परिसीमन का साया : माया तेरे तीन नाम, परसा, परसू, परसराम, ध्‍वस्‍त गणित चौंकाने वाले होगें परिणाम

परिसीमन का साया : माया तेरे तीन नाम, परसा, परसू, परसराम, ध्‍वस्‍त गणित चौंकाने वाले होगें परिणाम

श्रंखलाबद्ध आलेख करवट-6

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

पिछले अंक से जारी …

यूं अब विधानसभा चुपाव काफी नजदीक आ गये हैं और चुनावी सागर की जल तल में जमी काई भी काफी हद तक छंट गयी है । कुछ राजनीतिक दलों की निगाहें (सभी की नहीं) लगे हाथ होली बाद होने वाले लोकसभा चुनावों पर भी लगी हुयीं हैं । और वे अपनी तैयारी में लोकसभा चुनावों की तैयारी को भी शामिल कर चल रहे हैं ।

वैसे लोकसभा का चुनाव अभी परिदृश्‍य से परे है और जनता यानि मतदाता के मनोमस्तिष्‍क में लोकसभा चुनावों का कोई कीड़ा नहीं रेंग रहा अत: हम अभी इस आलेख में लोकसभा चुनावों को अपने जिक्र व चर्चा से परे रख कर केवल विधानसभा चुनावों के परिदृश्‍य व आलोक में ही इस आलेख को लिखेंगे व पढ़ेंगे । कतिपय जगह कतिपय राजनीतिक दलों की लोकसभा चुनाव सम्‍बन्‍धी बातों का आलेख में कहीं जिक्र आये भी तो उसे महज विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्‍य में ही ग्रहण करें ।

जहॉं राजनीतिक दल इस समय अपने अपने लठ्ठ भांजने में लगे हैं वहीं हवाई तलवारें भी आसमान चूमने लगीं हैं । एक दूसरे पर आरोप प्रत्‍यारोपों का दौर शुरू हुये हालांकि अर्सा गुजर गया है । लेकिन अभी पार्टियों के लोकल प्रत्‍याशी घोषित न होने से आरोपों की यह बौछारें उच्‍च स्‍तरीय ही हैं अभी स्‍थानीय स्‍तर पर इनका अभ्‍यास युद्ध प्रारंभ नहीं हुआ है ।

राजनीतिक दल जिन्‍होंने अपने प्रत्‍याशी घोषित कर दिये हैं, उनका चुनाव प्रचार प्रारंभ हो गया है । हालांकि अभी चुनाव आयोग ने चुनाव का ऐलान करके सबको अपनी अपनी पॉंत जमाने का औपचारिक रंग दे दिया है और कई दल और कई नेता अपनी अपनी बिसात बिछाने में लग बठे हैं ।

वर्तमान परिदृश्‍य में किसके क्‍या हाल हें इस पर एक सरसरी नजर डाल ली जाये तो विषय विस्‍तार को समझना आसान रहेगा ।

पहले आईये चम्‍बल घाटी से ही शुरू करते हैं यहॉं बहुजन समाज पार्टी ने अपने सभी विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्‍याशी घोषित कर दिये हैं वहीं किंचित विवादों के चलते लगे हाथ लोकसभा का प्रत्‍याशी भी धोषित कर दिया है । भाजशपा ने अभी केवल तीन विधानसभा में ही प्रत्‍याशीयों का चयन किया है जिसमें अभी तक घोषित केवल दिमनी विधानसभा का प्रत्‍याशी हुआ है । सपा के प्रत्‍याशीयों का चयन अंतिम रूप में हैं और शीघ्र ही घोषित कर दिया जायेगा । वहीं लोक जन शक्ति पार्टी के प्रत्‍याशीयों की सूची भी घोषित की जा चुकी है । अन्‍य छिटपुट पार्टीयां भी प्रत्‍याशी चयन की कवायद में जुटी हैं 1 व्‍यापक व बृहद प्रभावी पार्टीयां कांग्रेस और भाजपा की चयन सूचीयां अभी कॉंट छॉंट और रद्दोबदल के दौर में हैं जो कि दीपावली के बाद क्रमवार घोषित होंगीं जिसमें स्‍पष्‍टत: मुरैना व दिमनी विधानसभा अंतिम समय तक रोकीं जायेंगीं । इन विधानसभाओं पर संभवत: सबसे आखिरी सूची में ही कांग्रेस व भाजपा अपने प्रत्‍याशी घोषित करेंगें ।

जहॉं कुछ विश्‍लेषक अबकी बार दिमनी विधानसभा को सर्वाधिक संवेदन शील सीट मान कर चल रहे हैं वहीं भारी हिंसा व उपद्रव की आशंका भी जता रहे हैं । आईये अब देखते हैं कि वस्‍तुस्थिति क्‍या है ।

वस्‍तुत: मुरैना विधानसभा सीट अभी कई पेचो खम में फंसी है अव्‍वल तो बहुजन समाज पार्टी ने अपना पिछला प्रत्‍याशी दोहरा कर परशुराम मुद्गल को मुरैना सीट पर उतारने की धोषणा की है वहीं पिछली बार परशुराम मुद्गल के मुकाबले ब्राह्मण समाज के अन्‍य कद्दावर नेता बलवीर सिंह डण्‍डोतिया को मुरैना लोकसभा का टिकिट का लोभ देकर मौन कर दिया है, यहॉं उल्‍लेखनीय है कि ब्राह्मण समाज को परशुराम मुदगल की पिछली पराजय का कारण बलवीर डण्‍डोतिया प्रतीत होते हैं और ब्राह्मणों का तर्क है कि बलवीर डण्‍डोतिया ने ब्राह्मणों के वोट काट लिये थे वरना परशुराम विजयी होता ।

उधर भाजपा में वर्तमान विधायक एवं मंत्री रूस्‍तम सिंह के अलावा जिन अन्‍य नामों पर मशक्‍कत हो रही है उनमें नगर पालिका पार्षद अनिल गोयल अल्‍ली, लक्ष्‍मीनारायण सिंह हर्षाना, तथा रामस्‍वरूप गुप्‍ता, और रामसेवक गुप्‍ता आदि हैं । अब भाजपा किसे प्रत्‍याशी बनायेगी ये वक्‍त बतायेगा ।

मुरैना सीट पर ही कांग्रेस में राकेश गर्ग, सोवरन सिंह मावई और दिनेश गुर्जर तथा रघुराज सिंह कंसाना पंक्ति में हैं । सपा का मुरैना टिकिट अभी विचाराधीन है । भाजशपा से पंजाब केसरी के पत्रकार गुप्‍ता, डॉ माहेश्‍वरी, और मनोरमा जैन स्‍कूल संचालिका कस्‍तूरबा स्‍कूल, उल्‍लेखनीय हे कि मनोरमा जैन समाजवादी पार्टी से भी टिकिट मांग रहीं हें ।

दिमनी विधानसभा से सपा द्वारा मोती सिंह गुर्जर, भाजशपा ने शिवचरण उपाध्‍याय, और बसपा ने रवीन्‍द्र सिंह तोमर तथा लोक जन शक्ति पार्टी द्वारा प्रेम कुमार जाटव को अपना प्रत्‍याशी बनाया है कांग्रेस व भाजपा के प्रत्‍याशी यहॉं अभी घोषित होने बाकी हैं ।

जौरा और सुमावली के क्षेत्र नये परिसीमन में कुछ बदल कर जातीय गणित यहॉं परिवर्तित हुये हैं । वैसे जातीय गणित तो लगभग हर विधानसभा सीट पर बदल गये हैं ।

जहॉं मुरैना विधानसभा सीट पर यदि भाजपा वर्तमान रूस्‍तम सिंह को टिकिट देती है तो भाजपा में एक वजनदारी कायम नजर आती है या फिर किसी एकदम नये व अविवादित चेहरे को लाने पर ही भाजपा का बेड़ा पार संभव नजर आता है । किन्‍तु वर्तमान में जिन प्रत्‍याशीयों के नाम भाजपा में उछल रहे हैं मुझे नहीं लगता कि विश्‍लेषणत्‍मक तौर पर वे भाजपा को कोई सकारात्‍मक नतीजा दे पायेंगें । जहॉं रूस्‍तम सिंह के शहरी वोट अबकी बार कुछ कम होंगे तो ग्रामीण वोट बढ् जायेंगे । रूस्‍तम सिंह ने ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री रहते भले ही समूचे मध्‍यप्रदेश और समूचे मुरैना जिला में कोई काम न करवाया हो किन्‍तु मुरैना विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र विशेषकर गूजर बाहुल्‍य क्षेत्रों में बहुत काम करवाया है और इन क्षेत्रों को मंत्री ने चकाचक करवा दिया है, वहीं शहर मुरैना के कुछ विशिष्‍ट क्षेत्रों में भी मंत्री ने खासा काम कराया है । इन क्षेत्रों के मतदाता भाजपा सरकार से भले ही चिढ़े हुये हों लेकिन रूस्‍तम सिंह पर रीझे और मेहरबान हैं । इस हिसाब से रूस्‍तम सिंह भाजपा के आज भी वजनदार प्रत्‍याशी आंके जाते हैं ।

वहीं दूसरी ओर भाजपा के न्ररपालिका पार्षद अनिल गोयल अल्‍ली को शहर का वैश्‍य वर्ग काफी अधिक संख्‍या में समर्थन देगा वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भी वैश्‍य समुदाय का समर्थन उन्‍हें मिल जायेगा लेकिन यदि इसी क्रम में यदि भाजशपा यदि पंजाब केसरी के पत्रकार गुप्‍ता को टिकिट देकर प्रत्‍याशी बना बैठी तो अनिल गोयल अल्‍ली को जमानत बचाने के भी लाले पड़ जायेंगे । क्‍योंकि अल्‍ली को भाजपा के पारम्‍परिक वोट के अतिरिक्‍त अन्‍य समाज शायद ही वोट दे । जबकि रूस्‍तम सिंह के मामले में जातीय रूझान केवल मुरैना ग्रामीण क्षेत्र तक सीमित है और शहरी मतदाता में हर जाति के वोट उन्‍हें मिलना आसान है । लक्ष्‍मीनारायण हर्षाना इस सारी दौड़ में अभी काफी पीछे छूट रहे हैं लेकिन उन्‍हें गुर्जर मतों और कुछ शहरी वैश्‍य मतों के सहारे अपनी दमदारी नजर आ रही है ।

भाजपा के ही अन्‍य नेता रामसेवक गुप्‍ता पूर्व विधायक एवं रामस्‍वरूप गुप्‍ता की स्थिति अभी कमजोर नजर आ रही है, लम्‍बे समय की निष्क्रियता से उन्‍हें अभी आउटडेटेड माना जायेगा तो उपयुक्‍त होगा ।

बहुजन समाज पार्टी के विवादित नेता परशुराम मुद्गल पिछली बार हुयी गलतियों को अब दोहराने के मूड में नहीं हैं और अबकी बार पूरा जोर जान लगाकर मुरैना विधानसभा के परिणामों को पलटने की कवायद में लगे हैं । हालांकि बसपा नेता मुद्गल पर कई अपराध कराने और उनमें लिप्‍त होने के आरोप बरकरार हैं साथ ही पुलिस के दलाल के रूप में उनकी छवि बिगड़ी हुयी है लेकिन उनके नजरिये से सारे विश्‍लेषण और गणित को सामने रखें तो मुरैना विधानसभा के परिणामों में वे करिश्‍माई बदलाव कर भी सकते हैं । लेकिन यह बदलाव कांग्रेस प्रत्‍याशी के ऊपर निर्भर करेगा कि कांग्रेस किसे अपना प्रत्‍याशी बनायेगी । यदि कांग्रेस सोवरन सिंह मावई को पुन: रिपीट करती है और भाजपा भी रूस्‍तम सिंह को मैदान में रखती है तो यह स्थिति बिल्‍कुल पिछले वर्ष सन 2003 के विधानसभा चुनाव के मानिन्‍द होगी । बस फर्क यह होगा कि अबकी बार मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा न होकर त्रिकोणीय संघर्ष होगा और कांग्रेस, बसपा या भाजपा में से कोई भी जीत सकता है किन्‍तु जीत का अन्‍तर काफी कम होगा । वैसे सम्‍भव है कि इस त्रिकोणीय मुकाबले में रूस्‍तम सिंह ही विजयी हो जायें क्‍योंकि जहॉं राजपूत वोटों को अबकी बार बसपा प्रत्‍याशी परशुराम मुद्गल खींचने की जुगाड़ में हैं तो जाटव समाज के वोट बसपा के विरूद्ध अबकी बार पड़ने की संभावनायें उन्‍हें कमजोर भी करतीं हैं । ऐसा नहीं कि जाटव वोट केवल मुरैना विधानसभा में ही बसपा के खिलाफ जायेंगे बल्कि समूचे चम्‍बल क्षेत्र में ही जाटव समाज बसपा क खिलाफ वोटिंग करेगा ऐसा ऐलान जाटव समाज द्वारा किया गया है, इसके पीछे प्रमुख कारण डॉ. पी.पी. चौधरी की हत्‍या, फूल सिंह बरैया की बगावत और अनीता हितेन्‍द्र चौधरी की बसपा के खिलाफ खुली ऐलाने जंग है । इस गणित पर बसपा को अबकी बार भरी संख्‍या में जाटव वोटों के वोट बैंक से हाथ धोकर अन्‍य वर्ग व जातियों का नया वोट बैंक बनाना होगा । यह एक खास वजह है जिससे बहुजन समाज पार्टी को भारी नुकसान समूची चम्‍बल घाटी में संभव है । लेकिन यदि बसपा तकनीकी तौर पर अन्‍य वर्ग जातियों व समाजों का नया वोट बैंक यदि इस दरम्‍यान उपजा लेती है तो बेशक यह करिश्‍मा होगा । और वाकई बसपा की दाद देनी पड़ेगी । वैसे यह मुझे मुश्किल जान पड़ता है, कयोंकि किसी भी पार्टी का नया वोट बैंक मुरैना जिला में केवल दिमनी विधानसभा से ही उपज सकता है क्‍योंकि वर्षो बाद यह सीट आरक्षित से सामान्‍य हुयी है और पूरी तरह फ्रेश है यहॉं जिस पार्टी की भी फतह होगी भविष्‍य में समूचे मुरैना जिला पर उसका ही वोट बैंक होगा । क्‍योंकि दिमनी विधानसभा सीट जहॉं अम्‍बाह एवं गोहद विधानसभा सीटों पर सीधा सीधा प्रभाव डालेगी (निकटवर्ती एवं तोमर राजपूत बाहुल्‍य सीटें) वहीं आगामी लोकसभा चुनाव में मुरैना लोकसभा सीट पर भी प्रत्‍यक्ष पकड़ व प्रभाव रखेगी ।

लेकिन यह बहुजन समाज पार्टी का दुर्भाग्‍य कहिये कि फिलवक्‍त बहुजन समाज पार्टी ने यहॉं उत्‍तरप्रदेश से आयातित प्रत्‍याशी दे दिया है सो बहुजन का नया जनाधार व बोट बैंक केवल उसी दशा में संभव होगा जब कांग्रेस और भाजपा किसी कमजोर प्रत्‍याशी को यहॉं से खड़ा कर इस सीट को थाल में सजा कर बहुजन समाज पार्टी को दें दें ।

क्रमश: जारी अगले अंक में ……

मुरैना चार सीटों पर परिदृश्‍य साफ, दो पर उलझन अभी तक जारी, प्रचार के दूसरा दौर समाप्‍त होने तक कई समीकरण बदले

मुरैना चार सीटों पर परिदृश्‍य साफ, दो पर उलझन अभी तक जारी, प्रचार के दूसरा दौर समाप्‍त होने तक कई समीकरण बदले

मुरैना 24 नवम्‍बर 08, विधानसभा प्रचार का दूसरा दौरान समाप्‍त होने तक जिले की छ: विधानसभा सीटों पर जो समीकरण व परिदृश्‍य उभर कर सामने आये हैं उसमें अब केवल एक सीट मुरैना विधान सभा पर ही सीधा त्रिकोणीय संघर्ष शेष जान पड़ रहा है बकाया सीटों पर सीधा मुकाबला साफ साफ सुनिश्चित है हालांकि जौरा सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष तो नहीं होगा लेकिन वोट काट विकट संभव है ।

छ: विधानसभाओं में रिपोर्ट लिखे जाने तक लगभग सारे निर्दलीय परिदृश्‍य से बाहर हो गये हैं और लगभग शत प्रतिशत अपना प्रचार बन्‍द करके घर बैठ चुके हैं, अब इसकी वजह कुछ भी रही हो ।

 

आज की स्थिति में कहॉं कैसा होगा संघर्ष (संभावित परिदृश्‍य)

 

मुरैना विधान सभा सीधा त्रिकोणीय संघर्ष (तीनों ही प्रत्‍याशीयों की वोट बैंक में सेंध संभव )

रूस्‍तम सिंह भाजपा

सोवरन सिंह मावई कांग्रेस

परशुराम मुद्गल बहुजन समाज पार्टी

दिमनी विधान सभा सीधा संघर्ष (दोनों प्रत्‍याशी की वोट बैंक में भारी काट होगी)

रवीन्‍द्र सिंह तोमर- बहुजन समाज पार्टी

जितेन्‍द्र सिंह तोमर सपा

संभावना- बसपा के खाते में यह सीट जायेगी

वोट काट करेंगें कांग्रेस, भाजपा और छोटी पार्टीयां तथा निर्दलीय

अम्‍बाह विधान सभा (आरक्षित)

सुरेश जाटव कांग्रेस

कमलेश जाटव भाजपा

संभावना कांग्रेस के खाते में यह सीट जायेगी

सबलगढ़ विधान सभा (दोनों प्रत्‍याशी के भारी वोट कटेंगें)

चन्‍द्र प्रकाश शर्मा बहुजन समाज पार्टी

सुरेश चौधरी कांग्रेस

संभावना यह सीट कांग्रेस के खाते में जायेगी    

जौरा विधान सभा सीट (कांग्रेस के भारी वोट कटेंगें)

वृन्‍दावन सिंह कांग्रेस

मनीराम धाकड़ बहुजन समाज पार्टी

संभावना यह सीट बसपा के खाते में जायेगी

सुमावली विधान सभा सीट (दोनों प्रत्‍याशी के भारी वोट कटेंगें)

ऐदल सिंह कंसाना कांग्रेस

गजराज सिंह सिकरवार भाजपा

संभावना यह सीट कांग्रेस के खाते में जायेगी

टीप- उपरोक्‍त परिदृश्‍य केवल अनुमान एवं प्रत्‍याशीयों के प्रचार प्रसार की स्थिति पर आधारित है

 

मुरैना विधान सभा सीट पर दो तरह की वोटिंग है जिसमें आधी वोटिंग शहरी क्षेत्र के मतदाताओं की है और आधी ग्रामीण मतदाताओं की । किसी प्रत्‍याशी के वोट शहरी क्षेत्र में अधिक हैं तो किसी के ग्रामीण क्षेत्र में अधिक हैं, गुण्‍डागर्दी और भयवश अधिकांश (सामान्‍य) आम मतदाताओं द्वारा पूर्णत: मौन साधा रखा गया है । और कोई भी कुछ भी भाव व्‍यक्‍त करने को तैयार नहीं है ।

चुनाव प्रचार का तीसरा चरण 25 तारीख को सायं 5 बजे समाप्‍त हो जायेगा और फिर चौथे चरण तक आते परिदृश्‍य में कई फेरबदल होते रहेंगें उपरोक्‍त अनुमानित परिदृश्‍य दूसरे चरण के चुनाव प्रचार की समाप्ति तक का है ।

 

 

भिण्‍ड चार सीटों पर परिदृश्‍य साफ, एक पर उलझन अभी तक जारी, प्रचार के दूसरा दौर समाप्‍त होने तक कई समीकरण बदले

भिण्‍ड चार सीटों पर परिदृश्‍य साफ, एक पर उलझन अभी तक जारी, प्रचार के दूसरा दौर समाप्‍त होने तक कई समीकरण बदले

भिण्‍ड 24 नवम्‍बर 08, विधानसभा प्रचार का दूसरा दौरान समाप्‍त होने तक जिले की पॉंच: विधानसभा सीटों पर जो समीकरण व परिदृश्‍य उभर कर सामने आये हैं उसमें अब केवल दो सीट भिण्‍ड और मेहगांव विधान सभा पर ही सीधा त्रिकोणीय संघर्ष शेष जान पड़ रहा है बकाया सीटों पर सीधा मुकाबला साफ साफ सुनिश्चित है हालांकि अटेर विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष तो नहीं होगा लेकिन वोट काट विकट संभव है ।

पॉंच विधानसभाओं में रिपोर्ट लिखे जाने तक लगभग सारे निर्दलीय परिदृश्‍य से बाहर हो गये हैं

आज की स्थिति में कहॉं कैसा होगा संघर्ष (संभावित परिदृश्‍य)

भिण्‍ड विधान सभा सीधा त्रिकोणीय संघर्ष (तीनों ही प्रत्‍याशीयों की वोट बैंक में विकट सेंध संभव )

रामलखन सिंह भाजपा

राकेश सिंह कांग्रेस

नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह समाजवादी पार्टी

संभावना- यह सीट कांग्रेस के खाते में जायेगी

अटेर विधान सभा सीधा संघर्ष (दोनों प्रत्‍याशी की वोट बैंक में भारी काट होगी)

अरविन्‍द सिंह भदौरिया- भाजपा

सत्‍यदेव कटारे- कांग्रेस

संभावना- सपा बसपा यहॉं काफी वोट काटेंगें यह सीट कांग्रेस के खाते में जायेगी

वोट काट करेंगें सपा, बसपा और छोटी पार्टीयां तथा निर्दलीय

गोहद विधान सभा (आरक्षित) भारी वोट काट होगी

माखन सिंह कांग्रेस

लाल सिंह आर्य भाजपा

संभावना कांग्रेस के खाते में यह सीट जायेगी

लहार विधान सभा (दोनों प्रत्‍याशी के भारी वोट कटेंगें)

मुन्‍नी त्रिपाठी भाजपा

डॉ गोविन्‍द सिंह कांग्रेस

संभावना यह सीट कांग्रेस के खाते में जायेगी

मेहगांव विधान सभा सीट त्रिकोणीय मुकाबला (भाजपा के भारी वोट कटेंगें)

दशरथ सिंह बहुजन समाज पार्टी

राकेश सिंह भाजपा

हरी सिंह कांग्रेस

संभावना यह सीट कांग्रेस के खाते में जायेगी

टीप- उपरोक्‍त परिदृश्‍य केवल अनुमान एवं प्रत्‍याशीयों द्वारा किये गये प्रचार प्रसार की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है

भिण्‍ड विधान सभा सीट पर दो तरह की वोटिंग है जिसमें आधी वोटिंग शहरी क्षेत्र के मतदाताओं की है और आधी ग्रामीण मतदाताओं की । किसी प्रत्‍याशी के वोट शहरी क्षेत्र में अधिक हैं तो किसी के ग्रामीण क्षेत्र में अधिक हैं, गुण्‍डागर्दी और भयवश अधिकांश (सामान्‍य) आम मतदाताओं द्वारा पूर्णत: मौन साधा रखा गया है । और कोई भी कुछ भी भाव व्‍यक्‍त करने को तैयार नहीं है । भिण्‍ड विधानसभा सीट पर डॉ; रामलखन सिंह और चोधरी राकेश सिंह बहुत पुराने पारम्‍परिक प्रतिद्वन्‍दी हैं जिसमें रामलखन सिंह जीतते आये हैं, किन्‍तु अबकी बार क्‍या होगा यह वक्‍त बतायेगा व्‍यक्‍त संभावनायें द्वितीय चुनाव प्रचार के दौर की समाप्ति काल तक की हैं ।

चुनाव प्रचार का तीसरा चरण 25 तारीख को सायं 5 बजे समाप्‍त हो जायेगा और फिर चौथे चरण तक आते परिदृश्‍य में कई फेरबदल होते रहेंगें उपरोक्‍त अनुमानित परिदृश्‍य दूसरे चरण के चुनाव प्रचार की समाप्ति तक का है ।

कहत कबीर सुनो भई साधो, बात कहूं मैं खरी…….बिजली जावत देख कर, जनता करी पुकार…..

कहत कबीर सुनो भई साधो, बात कहूं मैं खरी…….बिजली जावत देख कर, जनता करी पुकार…..

Narendra Singh Tomar “Anand”

कबिरा बिजली देंख के, जब रह गये यूं दंग ।
देख तमाशा अजब सा, ठानी रच रस रंग ।।
ठानी रच रस रंग, पदबन्ध रचा ।
लिखा अपढ गँवार जो जन मन बीच बसा ।।
बिजली को तो जाना है, वक्त से पहले चली गयी ।
दिन भर पूरे गोल रह, देर रात को आयेगी ।।
टाँग पसार के दिन भर सोवो, करो रात में काम ।
चढ जा बेटा सूली पे, बली करेंगे राम ।।
भली करेंगे राम, जय श्री राम जय श्री राम ।
सदी 18 का मिले, फोकट ही आराम ।।
बच्चों के पेपर फिर आये, लेकिन बिजली कभी न आई ।
भर्ती सारे चोर कर लिये जिनने सूंत के करी कमाई ।।
चोर एक चोरी करे, फिर भी सीनाजोर ।
अपनी चोरी का दे दोष , कहता जनता चोर ।।
40 साल से चल रही व्यवस्था, तब नहीं थी जनता चोर ।
चोरों की सत्ता आते ही अब कहते जनता चोर ।।
पूरी बिजली लील गये, पर ना लई डकार ।
कानन में है रूई ठुसी, सोय रही सरकार ।।
करोड अरब के करे घुटाले, फर्जीवाडे खर्च में डाले ।
दारू बीवी और संग में 56 ऐब और हैं पाले ।।
खर्च वसूली लाली लिपिस्टक औ ऊपर की माँग ।
कैसे पूरति होवे इनकी रोज रचें नित इक स्वांग ।।
कछु लुगाई की फरमाइश कछु रखैलन संग ।
जेबें काट काट जनता की, करें प्रजा कों तंग ।।
भडिया बैठे बिजली घर में रोज करें भडियाई ।
जो कहुँ जनता करे शिकायत, जानो सिर पे आफत आई ।।
या चोरी का केस लगावै, या माँगें पनिहाई ।
जो जनता माई बाप कहावे, भई अब गरीब लुगाई ।।
लोड चेक के नाम पे, ठांसें रोज डकैत ।
सरकारी लैसन्स पे, लूटत फिरें भडैत ।।
इन भडियन के राज में, खूब मचा अंधेर ।
अंधकार कायम रहे, कोडवर्ड का ये शेर ।।
अब जनता दीखे चोर, कहें लीलै बिजली जनता ।
जब बिजली थी खूब यहाँ , काहे चोर बजी न जनता ।।
तब भी काँटे खूब डले थे. खूब जले थे हीटर ।
जम कर बिजली खूब जलाते और नहीं थे मीटर ।।
बिन बिजली के बिल मिल रहे अब अंधाधुंध अनंत ।
अब बढी गयी आबादी, बोलो सरकारी संत ।।
6 शहर भारत के ऐसे, आध करोड ऊपर आबादी ।
ना बिजली का पत्ता खडके, ना ऐसी बर्बादी ।।
काँटे कटिया वहाँ भी डलते, ए.सी. हीटर की भरमार ।
पहले झाँको गिरेबान में गुण्डा भडियन के सरदार ।।
हालत गुण्डा राज की , देख कें रहे कबीरा रोय ।
पब्लिक नर्राती फिरे, राजा रहो है सोय ।।
राजा रहो है सोय. कान में डारे नौ मन तेल ।
पाछें रजिल्ट से बुरो रहे, छात्रों यही करमन के खेल ।।

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’
……..क्रमश: जारी रहेगा अगले अंक में

एचआईवी के साथ जी रहे बच्चों की मदद क ो बढ़े हाथ

एचआईवी के साथ जी रहे बच्चों की मदद को बढ़े हाथ

याहू जागरण हिन्‍दी से साभार

हाजीपुर एचआईवी के साथ अंधेरी दुनिया में जी रहे बच्चों की मदद को हाथ बढ़े है। सरोकार परियोजना का रविवार को हाजीपुर में शुभारंभ के साथ ही ऐसे बच्चों के जीवन में रोशनी फैलने की उम्मीद जगी है। संस्था एचआईवी के साथ जी रहे बच्चों के शिक्षा, पोषाहार, स्वास्थ्य एवं आवासीय प्रबंधन की व्यवस्था करेगी।

हाजीपुर के नारायणी नगर स्थित नारायणी सेवा संस्थान के सभागार में सरोकार परियोजना का शुभारंभ हुआ। अप्रवासी भारतीय एवं प्रतिज्ञा सामाजिक सेवा संस्थान के संरक्षक साधना सिंह ने दीप प्रज्वलित कर परियोजना का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा एचआईवी के साथ जी रहे बच्चों के लिए पोषाहार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवासीय प्रबंध की व्यवस्था की जायेगी। इस मौके पर ऐसे छह बच्चों को टोकन के रूप में पोषाहार में हार्लिक्स सहित अन्य खाद्य सामग्री एवं किताब, कांपी, कलम, बैग एवं स्वेटर इत्यादि का वितरण श्रीमती सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने इस मौके पर जल्द ही ऐसे बच्चों के लिए आवासीय व्यवस्था करने की घोषणा की। बच्चों के रखरखाव, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की नि:शुल्क व्यवस्था होगी। इस मौके पर जिला एचआईवी कार्यक्रम ‘दिशा’ वैशाली के मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारी अमरजीत कुमार सिन्हा ने बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से जिले में एचआईवी के साथ जी रहे सभी बच्चों के जीवन में काफी सुधार आयेगा।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित एचआईवी संक्रमित नेटवर्क के अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार ने सरोकार परियोजना की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग करने की अपील की। शिशु रोग विशेषज्ञ डा. संतोष कुमार ने इस मौके पर कहा कि एचआईवी के साथ जी रहे बच्चों में प्रतिरक्षण क्षमता कम हो जाती है जिसके कारण कोई भी बीमारी तुरंत पकड़ लेती है। इन बच्चों के पोषण एवं स्वच्छता पर सरोकार परियोजना ध्यान केन्द्रित करेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रतिज्ञा के संस्थापक सचिव संजय कुमार ने सरोकार परियोजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इस परियोजना के माध्यम से जिले में एचआईवी के साथ जी रहे बच्चों के जीवन में गुणात्मक सुधार लाने की कोशिश की जायेगी जिससे समाज में व्याप्त दूरी को मिटाया जा सके। आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए नारायणी सेवा संस्थान के सचिव ऋतुराज ने कहा कि इस परियोजना का शुरूआत होने से बच्चों को काफी मदद मिलेगी। इस मौके पर जागृति कला केन्द्र के सचिव अभय नाथ सिंह, डा. जेएस मिश्रा, डा. संजीव कुमार, सुरेश कुमार, सुनील कुमार, अजय प्रकाश, अवधेश कुमार, आशीष गौतम, आशुतोष राज, प्रेमनाथ, सुमित कुमार, मनीष कुमार समेत कई लोगों ने अपने महत्वपूर्ण विचार रखते हुए कहा कि एचआईवी के साथ जी रहे बच्चों के जीवन में सरोकार परियोजना नई रोशनी फैलाने में मददगार साबित होगी।

कहत कबीर सुनो भई साधू…..बात कहूँ मै ं खरी____

कहत कबीर सुनो भई साधू…..बात कहूँ मैं खरी

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

कबिरा फँसे बाजार में, माँगें खुद की खैर ।
कापीराइट में ले गये सब रचनन के खैर ।।
पढे लिखेन की मंडी में, कबिरा अपढ गंवार ।
कवियन मूरख नाम धर, इज्जत रहे उतार ।।
इज्जत रहे उतार, सुनावें नित नूतन कविता ।
कबिरा रोय पुकार, कित गयी छंद की सविता ।।
ना दोहा ना चौपाई, ना रोला ना मुक्तक ।
कहाँ सवैया, सोरठा ना रची कुंडली अभी तक ।।
बडे बडे कविराय, मण्डी के मठराज सलाह कबीरा दीनी ।
जाइन मठ कर, लिख तारीफा जो आपुन हित चीन्ही ।।
वरना रहे फकीरा बन फिरे गरीबा गमछा टांगे फिरिहे ।
नहीं होय उद्धार ना बेडापार जो तारीफ हमारी ना करिहे ।।
पावै लाभ अपार यूनियन गर नूतन कविता की लेवे ।
हैल्मेट बिन बीमा के कोऊ कवि सम्मेलन में ठुकवे ।।
बस करता जा तारीफ, पल्ले भले ना अधेला समझे ।
तुकबंदी बकवास की ये नूतन कविता समझे ।।
हैलमेट औ बीमा संग ट्रेनिंग कविता की देंगे ।
टैक्नालाजी औ मार्केटिंग संग कवि कबिरा नाम धरेंगे ।।
कहाँ फकीरी और गरीबी में लिये ताँत और बान ।
हुक्का बीडी और तमाखू, कैसे मिटे थकान ।।
ऊँच सोसाइटी ऊँची संगत ऊँची बडी दुकान ।
कविता बिकती तारीफें बिकतीं बिकता है सम्मान ।।
चढी पसेरी हाट में तुलतीं, कबिरा की पद बन्ध ।
कबिरा उलट बांसी ऐसी रची प्रस्तुत ये इक बंध ।।
ज्यों की त्यों धर दीनि चदरिया अब बोले संत कबीर ।
प्रिया फकीरी और गरीबी इनसों पैदा भयो कबीर ।।
ना नूतन पाखंड चहूँ, ना चाहूँ बडी दूकान ।
मंडी तुम्हार चलती रहबे होय फरक पहचान ।।
कबिरा एम.ए. ना करी, ना बन पाये अन जीनियर ।
पर पी.एच.डी. कर रहे कई कबिरा औ रहीमा पर ।।

…..जारी रहेगा क्रमश:

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

मइके की चिठिया- शन्नो Kent, United Kingdom

मइके की चिठिया

मइके से आई चिठिया
रोइ बेहाल हुई बिटिया
जेठवा हरदम आँख तरेरे
देवरा चिढ़ा-चिढ़ा कर घेरे
ससुरा कहे कच्ची है रोटी
सास कहे बहू है खोटी
लगी जिठानी नाक चढ़ाने
ननद निगोड़ी मारे ताने

भरि-भरि जायें अँखियाँ
मइके से जो आई चिठिया
रोइ बेहाल हुई बिटिया

करे चाकरी सबकी दिनभर
नहीं उसे आराम है पलभर
काम का करें सभी बहाना
दिनभर सासू मारे ताना
मइके में जो झूला झूली
सखियों संग करी ठिठोली
जबसे सास-ससुर घर आई
अपनी होकर रही पराई

कब से ना देखीं सखियाँ
मइके से आई चिठिया
रोइ बेहाल हुई बिटिया.

-शन्नोKent, United Kingdom

मतदाताओं पर अब आतंक का कहर, मुरैना म ें कई इलाकों की बिजली पानी सप्‍लाई ठप्‍प कराई

मतदाताओं पर अब आतंक का कहर, मुरैना में कई इलाकों की बिजली पानी सप्‍लाई ठप्‍प कराई

Narendra Singh Tomar “Anand”

मुरैना 7 दिसम्‍बर 09, जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे ही मतदाताओं लाभ, लोभ प्रलोभन के साथ ही तंग करने व आतंकित करने का सिलसिला भी प्रारंभ हो गया है ।

मुरैना शहर नगरपालिका निर्वाचन क्षेत्र में कई वार्डों की पानी सप्‍लाई पिछले तीन दिन से जहॉं नेताओं ने एकदम ठप्‍प करा दी है वहीं बिजली सप्‍लाई भी केवल मुरैना नगरपालिका क्षेत्र ही बल्कि जिले की कई अन्‍य नगरपालिका क्षेत्रों में भी एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत बन्‍द करा दी गयी है ।

मजे की बात यह है कि पार्षदी या नगरपालिका अध्‍यक्षी का चुनाव प्रचार के सतर पर जहॉं विधानसभा चुनावों को पीछे छोड़ चुका है वहीं मतदाताओं पर कहर ढाकर आतंक बरपा कर धमका चमका कर वोट देने के लिये बाध्‍य करने का मामला भी जोरों से परवान चढ़ता जा रहा है ।

कई प्रत्‍याशी बकायदा बिजली, पानी सड़क को मुद्दा बना कर ऐलान के साथ प्रचार कर रहे है । इस मामले में संदेह की सुई उन्‍हीं की ओर स्‍वत: घूम जाती है । मुझे हैरत है कि निर्वाचन आयोग और उसके अधिकारी नेताओं और अफसरों की इस मिली भगत और गुण्‍डागर्दी पर आखिर कहॉं सो रहे हैं । आखिर उनके पर्यवेक्षक कहॉं झक मरा रहे हैं ।

मै अपनी गांधी कालोनी की ही बात करता हूं , यहॉं पिछले तीन दिनों से वाटर सप्‍लाई पूरी तरह बन्‍द है, पिछले दो दिन से बिजली सप्‍लाई पूरी तरह बन्‍द है , शहर के 17 वार्डों (मेरे पास मय साक्ष्‍य पूरी रिपोर्ट उपलब्‍ध है ) में बिल्‍कुल ठीक यही हालात हैं । निर्वाचन के नाम पर जिस कदर शराब और भण्‍डारों , मॉस, मुर्गी मछली से लेकर सुन्‍दरियों को परोसा जा रहा है मुझे लगता है कि यह आपत्ति जनक है और तत्‍काल रोका ही नहीं जाना चाहिये बल्कि इन्‍हें चुनाव के लिये आजीवन अयोग्‍य घोषित कर देना चाहिये ।

जहॉं राजनीतिक पार्टीयों ने टिकिटों की जम कर बिक्री की, वहीं ऐयाशी में भी नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी, मुझे हैरत है कि राजनीतिक पार्टीयों में ऐसे वरित्र के नेता इस समय शीर्षाधार हैं, मेरे पास कई चौंकाने वाली हैरत अंगेज रिपोर्ट आयीं हैं, मैं इन्‍हें पढ़ कर दंग हू । एग, लेग पैग यानि सुरा, सुन्‍दरी और नानवेज जिस कदर रंग पर यानि शवाब पर है यूं कहिये कि शराब, शवाब और कवाब की जो इस समय बहार है कौन कहेगा कि ये महात्‍मा गांधी का देश है ।

चलो भई निर्वाचन हो लोने दो तब तक हम भी मौन रहेंगें वरना हम बोलेंगा तो बोलोगे कि बोलता है ।

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सावधान ।। म.प्र. शासन की वेबसाइटों प र वायरस है, हेडलाइन अपडेशन पर न क्लि क करें और न वेबसाइटों पर सीधे जायें

सावधान ।। म.प्र. शासन की वेबसाइटों पर वायरस है

हेडलाइन अपडेशन पर न क्लिक करें और न वेबसाइटों पर सीधे जायें

मुरैना (ग्‍वालियर टाइम्‍स) 6 दिसम्‍बर 09, हम ग्‍वालियर टाइम्‍स के सुधी पाठकों और व्‍यूअर्स को सचेत कर रहे हैं कि यद्यपि वेब सिंडीकेशन के कारण म.प्र. शासन की वेबसाइटों के समाचार ग्‍वालियर टाइम्‍स पर आटोमेटिक अपडेट होते हैं और इन्‍हें अपडेशन से ग्‍वालियर टाइम्‍स प्रतिबंधित नहीं कर रही है । लेकिन ग्‍वालियर टाइम्‍स के सिक्‍योरिटी सिस्‍टम द्वारा पिछले कुछ दिनों से लगातार म.प्र. शासन की कई / कुछ वेबसाइटों से खतरनाक वायरस इन्‍फेक्‍शन्‍स और ट्रॉजन हॉर्स के अलार्म और एबॉर्ट कनेक्‍शन के नोटिस मिल रहे हैं ।

विशेष कर जनसंपर्क संचालनालय म.प्र. की वेबसाइट पर फेविकॉन से लेकर एच.टी.एम.एल. और जावा स्क्रिप्‍ट आदि सर्वत्र वायरस और ट्रॉजन हॉर्स चेतावनी मिल रही है । जिन पाठकों और व्‍यूअर्स द्वारा अपडेटेड एण्‍टी वायरस तथा फायरवाल उपयोग नहीं की जा रही है उनके कम्‍प्‍यूटर्स क्षतिग्रस्‍त हो सकते हैं ।

हालांकि संबंधित वेबसाइटों की हेडलाइन अपडेशन हमने ब्लाक नहीं की हैं किन्‍तु फिलहाल म.प्र. सरकार की वेबसाइटों से अपडेट होकर आने वाली हेडलाइनों पर न तो क्लिक करें और न सीधे इन वेबसाइटों को खोलें । और अपना एण्‍टीवायरस तथा फायरवाल अद्यतन यानि अपडेट तुरन्‍त रखें ।

विश्‍व निशक्‍तता दिवस पर विशेष आलेख : नि:शक्तों को मिले न्याय व सम्मान

विश्‍व निशक्‍तता दिवस पर विशेष आलेख: नि:शक्तों को मिले न्याय व सम्मान

श्रीमती राजबाला

· लेखिका श्रीमती राजबाला, एम.एस.सी., बी.जे.सी., स्पेशल एजूकेशन क्षेत्र की वालंटियर हैं ।

हाल ही में एक सज्जन हमारे घर पधारे । उनके साथ उनकी 4 साल की प्यारी सी बिटिया थी । मैने सौजन्यतावश आदर सत्कार के पश्चात् छोटी सी बच्ची से उसका नाम जानना चाहा । कई बार जब मेरा प्रयास बेकार गया तो उन सज्जन ने कहा कि अभी यह छोटी है, कुछ ही शब्द बोलती है । मैने प्यार से उस बच्ची से पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है तो उसने भी चेहरे पर कोई प्रतिक्रिया लाए बिना मेरे ऊपर प्रश्न जड़ दिया कि तुम्हारा नाम क्या है ? मैं अचकचा गई। उसे मैने खेलने के लिए टैडी – बीयर खिलौना दिया, जिसे उसने फेंक दिया, लेकिन वह चलते पंखे को लगातार देख रही थी । शायद वह आटिज्म से प्रभावित थी। फिर मैनें उसके माता पिता से कहा कि मुझे इसके व्यवहार में कुछ अलग दिख रहा है अत: हो सके तो आप इसे चाइल्ड स्पेशलिस्ट के पास ले जाएं, पर शायद उन्हें मेरी बात अच्छी नहीं लगी । इस तरह की कई घटनाओं को हम अपने आस – पास देखते हैं, व प्राय: प्राय: नजरअंदाज भी कर देते हैं ।

कई बार हम ऐसे व्यक्तियों को देखते हैं, जो अपने असामान्य व्यवहार के कारण सहज ही अलग पहचाने जा सकते हैं । सामान्य व्यक्तियों की अपेक्षा उनका असामान्य व्यवहार लोगों की नजरों में कौतूहल का सबब बन जाता है। उनकी शारीरिक एवं मानसिक विकृति, को देखकर लोगों के मन में दया या घृणा का भाव ही उपजता है । यहाँ तक कि उससे दूर रहने का उपक्रम भी करते हैं, परन्तु उनके प्रति स्नेह भाव नहीं रखते,जिसकी उन्हे सख्त जरूरत है । सच तो यह है कि वे भी उसी समाज का एक हिस्सा हैं । उन्हें भी समाज में उसी अधिकार एवं सम्मान से जीने का हक है, जितना सामान्य जन को । भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में संवैधानिक कानून भी उनके हकों की पैरवी करता है । राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक स्वयंसेवी संगठन उनके अधिकारों एवं न्याय के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य कर रही है । पिछले वर्ष 3 दिसम्बर 2008 यानि ‘विश्व विकलांगता दिवस’ पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने विकलांगो के अधिकारों की वकालत करते हुए ”न्याय एवं सम्मान सबके लिए ” का नारा दिया, साथ ही विकलांगों के आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की खुलकर वकालत की ।

सिनेमा जगत में भी कई बार इन विषयों को लेकर फिल्म बनाई गई, जो काफी चर्चित हुई एवं पुरस्कृत भी की गई । आमिर खान द्वारा निर्देशित ‘तारे जमीं पर ‘ में ‘डिस्लेक्सिया ‘ यानि लर्निंग डिसआर्डर से प्रभावित बच्चों को केन्द्र में रखकर फिल्म बनी, जिसमें उसके पढ़ने लिखने के दौरान आने वाली समस्या, उसके पढ़े लिखे अभिभावक की अज्ञानता एवं बच्चे में मौजूद क्षमताओं को ढूँढकर उसके लिए नया रास्ता प्रशस्त करना आदि पहलुओं को उठाया गया । अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत फिल्म ब्लैक में भी इसी प्रकार के एक अन्य विषय पर फिल्म बनी । जिसके कारण लोग इन समस्याओं पर सोचने को मजबूर हो गये । हाल ही में नि:शक्तता को केन्द्रित कर ‘प्रोगेरिया’ से पीड़ित व्यक्ति पर ‘पा ‘ फिल्म का फिल्मांकन किया गया है । कहने का तात्पर्य यह है कि सिनेमा भी नि:शक्तजनों के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है।

विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा जारी रिर्पोटों से कई चौंकाने वाले आकड़े मिले हैं, जिसके अनुसार विश्व में 10 ऽ अर्थात 650 मिलियन लोग नि:शक्तता के शिकार हैं । औद्योगिक रूप से समृध्द देशों में लगभग 50ऽ विकलांग व्यक्ति बेरोजगार हैं जबकि विकासशील देशों में तो स्थिति और भी दयनीय है जहाँ इनका आंकड़ा 80 से 90ऽ है । यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों के 90ऽ विकलांग बच्चे स्कूल ही नहीं जाते।

80ऽ विकलांग गरीब देशों से हैं । भारत में भी इनका आंकड़ा कम चौंकाने वाला नहीं ह,ै देश में 15 लाख से भी अधिक व्यक्ति विकलांगता से ग्रसित हैं जिसका 3 प्रतिशत मानसिक मंदबुध्दि का शिकार हैं और आटिज्म अर्थात स्नायु विकार की समस्या से ग्रसितों की भी बड़ी संख्या है।

नि:शक्तता यानि विकलांगता क्या है ? इसका व्यक्ति के सामाजिक जीवन पर क्या असर पड़ता है नि:शक्तता के प्रकार कारणों व निदान पर चर्चा करना मेरा मूल एवं अपेक्षित विषय है। शरीर में 40 प्रतिशत विकलांगता आने पर व्यक्ति नि:शक्तता की श्रेणी में आ जाता है।

आमतौर पर मानसिक व शारीरिक विकृति के कारण प्रभावित व्यक्ति को व्यवहार जनित समस्याओं या फिर चलने फिरने एवं भाषागत समस्याओं से जूझना पड़ता है, जिसके कारण जानकारी के अभाव में लोग उन्हें पागल करार देते हैं । उन्हें समझने के बजाय उनसे दूर रहने का प्रयास करते हैं । विडम्बना यह है कि जागरूकता की कमी के चलते नि:शक्तता से प्रभावित व्यक्ति के परिवार भी उसके प्रति बेपरवाह होते हैं और उन्हें भाग्य भरोसे छोड़ देते हैं यह बेहद ही निराशाजनक एवं दु:खदाई पहलू है । इन पर गौर करने की नितान्त आवश्यकता है । गौरतलब है कि भारत सरकार भी इन नि:शक्तजनों के उत्थान के लिए सतत् प्रयासरत है। इस दिशा में भारत सरकार के अधीन सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय में पारित 99 एक्ट के तहत ‘राष्ट्रीय न्यास ‘ समिति गठित की गई है जो मुख्यत: मानसिक मंदता (मेंटल रिटार्डेशन), प्रमस्तिष्क अंगघात (सेरेबल पालसी), स्वपरायणता यानि आटिज्म एवं बहुनि:शक्तता इन चार प्रकार की समस्याओं से ग्रसित व्यक्तियों के अधिकार, सुरक्षा एवं पुनर्वास संबंधी मामलों के क्रियान्वयन का परिपालन करती है साथ ही नि:शक्तजनों के लिए बाधारहित वातावरण सुनिश्चित करने के कदम भी उठा रही हैं । इस दिशा में राष्ट्रीय न्यास की पहल पर रेल्वे स्टेशनों, स्कूलों, दफ्तरों व सार्वजनिक स्थलों पर सीढ़ियों के अलावा रैम्प बनवाने, प्रतीक्षालयों व अन्य स्थानों पर उनके बैठने के लिए विशेष प्रकार की कुर्सियों की व्यवस्था करने एवं प्रसाधन गृहों में नि:शक्तजनों के लिए विशेष प्रकार के टॉयलेट की व्यवस्था करने के स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं । ताकि ऐसे व्यक्ति बाधा मुक्त वातावरण में बिना किसी असुविधा के अपने कार्यों को अंजाम दे सकें ।

राष्ट्रीय न्यास द्वारा इन नि:शक्तजनों के सामाजिक सुरक्षा एवं पुर्नवास की दिशा में ‘निरामया ‘ स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की गई है जिसमें इनके इलाज हेतु एक लाख रूपये प्रतिवर्ष उपलब्ध कराने का प्रावधान है ।

लीगल गार्जियनशिप

संस्‍कृति भी ऑन लाइन होगी , कवियों स ाहित्‍यकारों के साथ एन.जी.ओ. की ने टवर्क भी ऑनलाइन होगी

संस्‍कृति भी ऑन लाइन होगी , कवियों साहित्‍यकारों के साथ एन.जी.ओ. की नेटवर्क भी ऑनलाइन होगी

मुरैना 28 नवम्‍बर 09, चम्‍बल की प्रसिद्ध स्‍वयंसेवी संस्‍था ‘’संस्‍कृति’’ भी शीघ्र ही ऑन लाइन होकर इण्‍टरनेट पर आ रही है । ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह संस्‍कृति संस्‍था को ऑनलाइन करने की व्‍यापक तैयारीयां कर रहा है ।

संस्‍कृति की वेबसाइट इण्‍टरेक्टिव होगी तथा साहित्‍यकार, कवि एवं स्‍वयंसेवी संगठनों की विशाल नेटवर्क संस्‍कृति की वेबसाइट पर उपलब्‍ध होगी , साथ ही संस्‍कृति अपनी परियोजनाये, सूचना का अधिकार सहित कई अनेक चैनल उपलब्‍ध करायेगी ।

संस्‍कृति के निदेशक प्रसिद्ध कवि एवं साहित्‍यकार देवेन्‍द्र तोमर ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह से जुड़कर संस्‍कृति संस्‍था के कार्यो की बृहद परियोजना बनाने में जुटे हैं । संस्‍कृति की वेबसाइट में चम्‍बल के ही नहीं बल्कि देश भर के साहित्‍यकारों व कवियों को उनकी रचनाओं के साथ एक जगह पर ही प्रकाशित किया जायेगा । और कई ख्‍यातनाम साहित्‍यकारों व कवियों की दुर्लभ कृतियां भी यहॉं पढ़ीं जा सकेगी । उनकी तथा स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं की विशाल नेटवर्क एवं डायरेक्‍ट्री भी यहॉं मय वेबसाइट उपलब्‍ध होगी । जिसमें आनलाइन पंजीयन कराने से लेकर प्रकाशन प्रसारण वेब नेटवर्किंग जैसी सुविधायें तथा आटो अपडेशन एवं आटो पब्‍िलिशिंग की सुविधा भी दी जायेगी ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी एवं प्रधान संपादक नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’ वेब साइट की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं । इसके पश्‍चात चम्‍बल की करीब 16 अन्‍य स्‍वयंसेवी संस्‍थायें भी ऑन लाइन की जायेंगी । नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’ ने कहा है कि चम्‍बल के बारे में विश्‍व में व्‍याप्‍त भ्रांतियां दूर कर असल चम्‍बल से परिचित कराने के अपनी परियोजना के दूसरे चरण पर तथा ई कामर्स व ई गवर्नेन्‍स के तीसरे चरण को नेशनल नोबल यूथ अकादमी ने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है । शीघ्र ही वे ग्‍वालियर चम्‍बल में एक विशेष अभियान छेड़ कर कार्यक्रम को गति देंगे ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स ग्‍वालियर चम्‍बल के पत्रकारों, राजनेताओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों, चिकित्‍सकों, अभिभाषकों की डायरेक्‍ट्री भी शीघ्र ही ऑनलाइन करने जा रही है यह भी इण्‍टरेक्टिव होगी और इसमें भी आन लाइन पंजीयन, आटो अपडेशन व आटो पब्‍िलिशंग की सुविधा रहेगी ।

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आसपड़ौस : अबू नहीं, संविधान पिटा- रा केश अचल

आसपड़ौस : अबू नहीं, संविधान पिटा

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल क्षेत्र के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं )

महाराष्ट्र विधानसभा मे जो हुआ वह शर्मनाक है। राज ठाकरे के विधायकों ने पूरी दुनियां मे महाराष्ट्र की और उससे बढ़कर इस अखंड राष्ट्र भारत की नाक कटवा दी। उन्होने हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को नहीं पीटा बल्कि पूरे संविधान पर हमला किया है।

भारत के संविधान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने प्रत्येक भारतवासी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा दी है। भारत मे रहने वाला कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में लिख सकता है, पढ़ सकता है, बोल सकता है। अभिव्यक्ति की इस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कानून है। कानून के उल्लघंन पर सजा का प्रावधान हैं लेकिन लगता है राजनीति में नए-नए आए राजठाकरे या तो इन कानूनों, सजाओं की परवाह नही करते या फिर वे अनपढ़ है, उनके लिए संविधान की मोटी किताब में काली स्याही में लिखें सोने के अच्छर भैंस के बराबर है।

मराठी मानुष की राजनीति करने वाले राज को उनके चाचा बाल ठाकरे ने जो संस्कार दिए थे वे अब फल फूल रहे है। व्यक्तिगत अस्मिता की रक्षा के लिए मराठी भाषा और मराठी मानुष का इस्तेमाल करने वाले इस युवा तुर्क की समझ में क्यों नही आता कि हाल में विधानसभा चुनावों मे जनता ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को अस्वीकार कर दिया है। दो सैंकड़ा सीटों वाली विधान सभा में राज के केवल एक दर्जन गुर्गे ही विधायक बनकर प्रवेष पा सके है।

दर असल महाराष्ट में राष्ट्र के विरूध्द भावनाएं भड़काने का जो खेल चार दषक पहले शुरू हुआ था, वह रह-रह कर अब भी जारी है, वोटो की राजनीति के आगे नतमस्तक सत्तारूढ़ दल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सलंग्न क्षेत्रीय दलों के आगे बौने साबित हो रहे है।

विधानसभा में अबू आजमी पर हमला करने वाले मनसे के 4 विधायको के निलंबन से इस शर्मनाक घटना का पटाक्षेप होने वाला नहीं है। इस घटना की देष व्यापी प्रतिक्रिया होना चाहिए। राजठाकरें के खिलाफ कानूनी कार्रावाई के लिए राज्य सरकार आगे क्यों नहीं आ रही? क्यों राज के फतबों को गैर कानूनी करार नहीं दिया जा रहा? राज के खिलाफ जो काम महाराष्ट्रके महान हिंदी प्रेमियों को करना चाहिए था, वह म.प्र. के हिंदी प्रेमियो ने किया।

मंदसौर की एक अदालत ने एक हिंदी सेवी की प्रार्थना पर संज्ञान लेते हुए राजठाकरे के खिलाफ राष्ट्रभाषा के अपमान का प्रकरण दर्ज कर इस दिषा में पहल की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मंदसौर की अदालत महाराष्ट्र कि इस मराठीदा को सबक सिखा पाएगी?

वस्तुत: अब समय आ गया है जब क्षेत्रवाद तथा भाषावाद के नाम पर होने वालो राजनीति का बहिष्कार किया जाए। यदि यह न हुआ तो आमयी मुबई और आपण महाराष्ट्र का भाव मराठियों को महाराष्ट्र के बाहर परेषानी का सबब बन सकता है।

दक्षिण के हिंदी विरोधी आंदोलन का हश्र सबने देखा है। तमिलनाडु में हिंदी का प्रबल विरोध करने वाले द्रविण पुत्र व्यापार के लिए फर्राटेदार हिंदी बोलते है। कष्मीर मे पष्तो बोलने बालों का पेट हिंदी में बोले बिना भर नहीं सकता। इस मामले में पूर्वी राज्य एक आदर्ष उदाहरण है। पूर्व के किसी भी राज्य में हिंदी को लेकर कहीं कोई दुराग्रह नहीं है, असम का वोडो आंदोलन भी फुस्स हो चुका है। एक दिन यही सब मनसे के मराठी आंदोलन का भी होगा।

मराठी भाषा को लेकर पूरे देष मे किसी को कोई दुराग्रह नही है। मराठी साहित्य का सर्वाधिक अनुवाद हिंदी में हुआ। मराठी सद-संस्कृति और सुसभ्यता की वाहक भाषा है। उसे लेकर राज परेषान क्यों है? राज शायद नही जानते कि भाषाओ का अस्तित्व राजनीतिक आंदोलनों से नहीं संस्कारों से बनता है। साढ़े तीन हजार सालों से तमिल भाषा का अस्तित्व किसी राजनीतिक आंदोलन की वजह से नहीं बल्कि संस्कारों की वजह से है।

बेहतर हो कि राजठाकरे मराठी प्रेम को छोड़ मराठी मानष में षिक्षा, स्वास्थ्य और उनके आर्थिक हको के लिए संघर्ष करें। मराठियों के लिए कष्मीरियों की तरह विषेषाधिकारों की मांग करना बेमानी है। राज भूल जाते है कि महाराष्ट्र के महान नेताओं को राष्ट्र ने अपने सिरमाथे उनके मराठी भाषी होने के कारण नहीं उनकी योग्यताओं के कारण लिया था। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर केंद्र सरकार के तमाम महत्व पूर्ण मंत्रालयों की कमान शुरू से महाराष्ट्र के नेताओं के हाथ मे रही। इसके लिए न बालठाकरे साहब के आंदोलन की जरूरत पड़ी न किसी और भाषाई आंदोलन की।

संविधान समिति के प्रमुख डा. भीमराव अंबेडकर से लेकर सुषील षिंदे तक को देष में सम्मान। षिव सेना या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने ही दिलाया। मराठी भाषी अच्छी तरह जानते है कि महाराष्ट्र के इन बेटो को सम्मान उनकी योग्यता, कर्मठता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा से मिला है।

मेरे ख्याल से राजठाकरे के कुव्सित राजनीतिक आंदोलन का विरोध महाराष्ट्र से ही शुरू होना चाहिए। मराठी जनता को समझना चाहिए कि राज उनका हित नही अहित कर रहे है। महाराष्ट्र की अर्थ व्यवस्था में अकेले मराठियों का नही बल्कि पूरे देष की भागीदारी है देष के प्रत्येक राज्य की प्रतिभा से महाराष्ट्र, महा-राष्ट्र बना है। अगर इसे बाधित किया गया तो महाराष्ट्र ”महा-राष्ट्र” नही रह जाएगा।

महाराष्ट्र को संप्रभु भारत राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए सेनाओं की नहीं प्रतिबंध्द राजनीतिक दलो की जरूरत है राज और उध्दव ठाकरे को चाहिए कि वे यदि सचमुच मराठी अस्मिता की रक्षा करना चाहते है तो अपनी-अपनी सेनाओं की पहचान समाप्त कर राष्ट्रीय दलो मे अपने आपको समाहित कर संघर्ष करें।

आज जब पूरी दुनियां बहुत छोटी हो गई है। तब महाराष्ट्र में राजठाकरे के आंदोलन से देष बदनाम ही हो रहा है। आजादी के सत्तर साल बाद भी भारत में भाषा और क्षेत्र के नाम पर आंदोलनों के जीवित रहने से लगता है कि हमारी आजादी या तो अधूरी है, या हम आजदी का मर्म ही नही समझ सके।

समय है जब पूरा देष दुनियां की महाषक्तियों के मुकाबले भारत को ”महान भारत” बनाने के लिए भाषा और क्षेत्र की संकीर्णताओं से बाहर आकर पूरी ताकत के साथ एक जुट होकर खड़ा हों। इस एक जुटता में जो आड़े आए, उसे तिरस्कृत कर देना ही श्रेयस्कर है फिर चाहे वह राज ठाकरे हो या बालठाकरे। जो राष्ट्र का नही वह ”महाराष्ट्र” का कैसे हो सकता है? संविधान के आगे सब बराबर है। (भावार्थ)

Rakesh Achal

दल तंत्र भगाओ – जनतंत्र बचाओ अभियान में सहभागिता की अपील- गोपाल दास गर ्ग

दल तंत्र भगाओ – जनतंत्र बचाओ अभियान में सहभागिता की अपील- गोपाल दास गर्ग

सम्मानीय देशवासियों,

आज की दल तंत्रीय राजनीति ने देश की एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखना प्रश्नांकित कर दिया है। समूचे देश में चारों तरफ देश का विद्यटन हो रहा है। प्रत्येक राजनीतिक दल अपनी अपनी सत्ता और संप्रभुता स्थापित करने में लगा है। जिसके लिये वह आये दिन दलवाद, जातिवाद, लिंगवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, आर्थिक सम्पन्नता/विपन्नता वाद आदि अनेकानेक वादों का जहर फैलाकर अपने अपने तरीके से अपने लक्ष्य को पाने के लिये अमर्यादित आचरण कर रहा है।

यदि समय रहते जनतंत्र को बचाने का कोई कारगर उपचार नहीं हुआ तो देश से जंनतंत्र पूरी तरह मिट जावेगा। देश टुकड़े-टुकड़े हो जावेगा। आज का शोषित वर्ग और अधिक शोषित होगा तथा दल तंत्रीय राजनीति के पोषक, स्वंयभू बन जावेगें।

अभियान का किसी दल से या दल के प्रत्याशी से कोई विरोध नहीं है अपितु दल तंत्रीय शासन प्रणाली से विरोध है। दल का प्रत्याशी कहने को जनप्रतिनिधि होता है किन्तु व्यवहारिक सत्य यह है कि वह जनप्रतिनिधि के नाम वास्तविक तौर पर वह अपने दल का प्रतिनिधि होता है। उसकी निष्ठा पूर्णत: अपने दल के प्रति होती है। दल का प्रत्याशी देश, देश के संविधान, देश की जनता या क्षेत्र के मतदाताओं के प्रति कतई वफादार नहीं होता। वह केवल अपने दल के प्रति ही वफादार रहता है। लोकसभा या विधानसभा में प्रस्तुत विषयों पर वह अपने दल के हितों के अधीन अपना वोट देता है न कि जनहित में। इस प्रकार जनहित, दलीय राजनीति में नष्ट हो जाता है।

दल का प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि के रूप में समय-समय पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 173 (क) अंतर्गत बारम्बार यह शपथ लेता है कि वह विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा रखेगा तथा भारत की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण रखेगा। किन्तु व्यवहार में वह इस शपथ को भूल जाता है और दलीय दल-दल में उलझ जाता है।

इस सत्य का प्रमाण आये दिन सदन में सभी दलों द्वारा किये जा रहे आचरण से स्पष्ट प्रमाणित हो रहा है। कोई भी दल तथा उसके प्रतिनिधि स्परूप चुना गया प्रतिनिधि, विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति न तो सच्ची श्रध्दा रखता है और न ही निष्ठा।

जनता द्वारा चुनें गये ये सभी जनप्रतिनिधि, भारत की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण न रखकर, केवल अपने-अपने दल की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये भारत के संविधान तथा उसके अंतर्गत निर्मित एवं स्थापित विधि के विपरीत प्राय: अविधिक आचरण कर सदनों को आये दिन शर्मसार करते रहते है। सभी राजनीतिक दलों का यह आचरण, जनतंत्र की हत्या कर, दल तंत्र की महत्ता को प्रतिस्थापित करने की ओर अग्रसर होना इंगित करता है।

जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त करने का आरोप-प्रत्यारोप एक दल, दूसरे दल पर आये दिन लगाता रहता है किन्तु रिश्वत लेने व देने के लिये निर्मित भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत अपेक्षित कार्यवाही करने या कराने की पहल किसी भी दल द्वारा नहीं की जाती है। राजनीतिक दलों का यह आचरण भारत की जनता को यह संदेश देता हैं कि कोई भी दल भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा नहीं रखता है और न ही संसद द्वारा बनाये गये किसी कानून के अनुपालन में उनकी स्वयं की कोई रूचि ही है।

भारत देश में संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून का शासन है जो देश के प्रत्येक राजनीतिक दल, दल के पदाधिकारी, प्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं नागरिक पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से प्रभावी है। किन्तु आये दिन देखने में यह आ रहा है कि कोई भी राजनीतिक दल संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून का पालन नहीं करना चाहता है तथा संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून को कानून मानने के लिये तैयार नहीं है।

प्रत्येक राजनीतिक दल स्वविचारित विचार को ही कानून की संज्ञा देकर, जनहित के नाम पर, अपने-अपने दलों की श्रेष्ठता व महत्ता को प्रतिष्ठित व प्रतिपादित करने के लिये आये दिन समूचे देश में हड़ताल, बाजार बंदी, चक्काजाम, तोड़-फोड़, लूटपाट, दंगाफसाद, धार्मिक उन्माद, बम विस्फोट आदि अनेकानेक भिन्न-भिन्न विद्यटनात्मक तथा हिंसात्मक तरीके अमल में लाते हुये राष्ट्रीय सम्पत्तियों को क्षति तथा देश की आम जनता को जन-धन की हानि पहुचाने जैसी गतिविधियों में संलग्न रहता है। दलबंदी के इस आचरण से देश में भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार और महगांई में आये दिन उत्तरोत्तर वृध्दि होती जा रही है। राजनीतिक दलों का यह आचरण जनतंत्र की हत्या कर, दल तंत्रीय राष्ट्र्र्र की स्थापना किये जाने का द्योतक है।

इसलिये दलतंत्र भगाओं – जनतंत्र बचाओं अभियान का दीप प्रज्वलित करना आज के समय की प्रासंगिकता है।

दल तंत्र को भगाना और जनतंत्र को बचाना हमारे अभियान का लक्ष्य है। लक्ष्य प्राप्ति के चार कारक है 1. निष्ठा 2. श्रम 3. कर्म 4. साधना। यदि आप देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत है और अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाये रखने हेतु संकल्पित, देश पर अपनी जान न्यौछावर करने हेतु तत्पर, किसी भी प्रकार के लालच से परे, निष्ठा के धनी, श्रम को समर्पित, कर्म के पुजारी और साधना के साधक है तो इस अभियान को गति प्रदान करने में अपना योगदान दे सकते है।

दलतंत्र भगाओ – जनतंत्र बचाओं अभियान के दीप – प्रज्जवन का प्रथम चरण, हमारा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मुरैना विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना था। इस कार्य के लिये हमें किसी भी प्रकार के धनबल व बाहुबल की कतई दरकार नहीं रही। हमने सिर्फ मतदाता के जनमत समर्थन को शीर्ष प्राथमिकता दी। हम यह अच्छी तरह जानते है कि दलतंत्र का खात्मा धनबल या बाहुबल से नहीं किया जा सकता है। दल तंत्र का खात्मा केवल जनमत से ही हो सकता है।

भारत देश के वासियों एवं मतदाताओं से अभियान की यह अपील है कि दलतंत्र को भगाकर जनतंत्र को बचाने के लिये भारत का प्रत्येक मतदाता भावी चुनावों (लोकसभा/विधानसभा/स्थानीय संस्थाओं के चुनाव) में अपने अपने निर्वाचन क्षेत्र में अपना वोट दलों के किसी भी प्रत्याशी को न देकर केवल निर्दलीय प्रत्याशियों को ही अपना वोट दे। एवं दल तंत्र भगाओं – जनतंत्र बचाओं अभियान को सफल बनाने में अपनी महती भूमिका निर्वहन करें।

अपीलार्थी

गोपाल दास गर्ग

संयोजक

दलतंत्र भगाओ- जनतंत्र बचाओ अभियान

गणेशपुरा, मुरैना म0प्र

07532-227836

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