कैलाश विजयवर्गीय को पड़ जाये तमा चा तो वे बन जायेंगें मुख्यमंत्री, कांग्रेस के हल्ला बोल में जमकर बर से दिग्विजय सिंह

दिग्विजय ने शिवराज को कहा , एक जुबान का और विश्वसनीय आदमी नहीं है, म.प्र. का मुख्य मंत्री

कैलाश विजयवर्गीय को पड़ जाये तमाचा तो वे बन जायेंगें मुख्यमंत्री, कांग्रेस के हल्ला बोल में जमकर बरसे दिग्विजय सिंह

उज्जैन , 30 अप्रेल , आज उज्जै‍न में कांग्रेस के हल्ला बोल कार्यक्रम में म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने म.प्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर ताबड़तोड़ हमला बोलते हुये कहा है कि क्या हालत बना दी है शिवराज सिंह ने मध्यंप्रदेश की , चारों ओर बस अपराध ही अपराध , माफिया ही माफिया, गुण्डे ही गुण्डे , बलात्कार ही बलात्कार , अ.जा. / ज.जा. के लोगों पर बेतहाशा जुल्म और अत्या चार की इंतहा जो कि म.प्र के इतिहास में आज तक नहीं हुआ है । सारे रिकार्ड टूट गये हैं म.प्र. में । हमने अपनी सरकार में जो योजनायें बनाईं वे ही आज विकसित और फलीभूत हो रहीं हैं, प्रदेश की गॉंव गॉंव तक सड़कें बनाने की योजना हमने बनाई , काम हमने शुरू किया , जो हमने शुरू किया वही आज दिख रहा है , शिवराज सिंह का खुद का तो कुछ है ही नहीं खुद के पास ।
अत्याचार अपराध और अन्याय के अलावा चारों ओर भ्रष्टााचार , निरंकुश प्रशासन और अफसर , लगता है जैसे पूरे प्रदश में अराजकता ही अराजकता फैली हुयी है , प्रदेश में सरकार नाम की चीज ही नहीं रही है , प्रदेश का मुख्यमंत्री बेअसर, प्रभावहीन, और नाकारा बन कर बैठा है , कैलाश विजयवर्गीय जैसे अभद्र अशालीन भाषा बोलने, भ्रष्टाचार में आकंठ लिप्त को पाल पास रखा है , सुनने में आया है कि किसी अफसर को पार्षद चंदू शिंदे ने तमाचा मार दिया और उसके बाद उस अफसर की तरक्की हो गयी , इसका मतलब ये निकला कि अगर चंदू शिंदे एक तमाचा कैलाश विजयवर्गीय में मार दे तो कैलाश विजयवर्गीय की भी तरक्की होकर मुख्यमंत्री बन जायेंगें , एक और मंत्री विजय शाह ने भी भाजपा संस्कृति की व्याख्याा करते हुये जब शिवराज सिंह के घर में ही हाथ डाल दिया तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उसका पद छीन लिया, लेकिन खुले आम गुण्डागिरी कर रहे और निरंतर अभद्र व अशालीन भाषा का प्रयोग कर रहे, कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा लेने की हिम्मत ही नहीं है । कैलाश विजयवर्गीय किसी में भी तमाचा मारें चाहें गाली गलौज करें , कैलाश विजयवर्गीय को संरक्षण और विजयवर्गीय द्वारा सताये गये का भक्षण । हमने गरीबों को अज जजा के लोगों को पट्टे दिये लेकिन सुनने में आ रहा है कि न केवल उनके पट्टे कैंसिल किये जा रहे बल्किह उनकी खुद की भी जमीनें छीनी जा रहीं हैं ।
निहायत ही लचर और प्रभावहीन, नियंत्रण हीन ऐसी सरकार म.प्र. के इतिहास में कभी नहीं हुयी , कोई तो म.प्र. के मुख्यलमंत्री शिवराज सिंह को महाझूठा कहता है तो कोई घोषणावीर , कोई लबरा कहता है, कोई लाफर या लाफड़ कहता है, कोई लबार कहता है, कोई लपसा कहता है तो कोई लफ्फाज कहता है , ये क्याा हाल बना रखा है शिवराज ने , कोई सुनता मानता ही नहीं है पूरे म.प्र. में शिवराज की , मुख्य मंत्री कुछ भी कहता रहे , कुछ भी बकता रहे , पूरे प्रदेश में दो कौड़ी की कदर नहीं है , अरे भई सरकार का एक रूतबा होता है , एक तेजस्विता होती है सरकार में जिससे सब कुशलता पूर्वक नियंत्रित भी होता है और सरकार भी चलती है, मुख्य मंत्री रोजाना क्या कह रहे हैं, क्याा वायदा , क्या घोषणा कर रहे हैं , न खुद को कुछ याद है , न सरकार के पास कोई हिसाब है । ये कोई मुख्ययमंत्री है कि एक घोषणा कर दे और दूसरे दिन उसी घोषणा के खिलाफ पूरी सरकार और प्रशासन ठीक उलट काम करे । मुख्य मंत्री उसे कहा जाता है कि जिसकी जुबान गंभीर हो , जिसकी बात में दम हो, वजन हो ‘’जिसमें यह तासीर हो , कि जो कह दिया सो कह दिया, जो कर दिया सो कर दिया, फिर पूरी सरकार और प्रशासन में दम नहीं कि उस बात के उलट कुछ कर पाये, मुख्यमंत्री द्वारा कही गयी बात के खिलाफ कोई जा सके, मुख्य मंत्री के आदेश , घोषणा या वायदे को कोई टाल सके या काट सके’’ , शिवराज सिंह क्या कहते हैं और क्या् करते हैं , उनकी हर घोषणा का , हर वायदे का क्याई अंजाम होता है , केवल म.प्र. के लोग ही नहीं पूरे देश के लोग जानते हैं ।

महाझूठे शिवराज सिंह के खस्ताहाल म ध्यप्रदेश में बिजली कटौती फिर सिर चढ़ कर बोली

संभागीय मुख्यालय पर 16 घंटे और जिला मुख्यालयों पर 20 घंटे की बिजली कटौती
मुरैना 27 दिसंबर 12, स्वर्णिम म.प्र. बनाने का पिछले चार साल से दावा और वादा कर रही म.प्र. की शिवराज सिंह सरकार के बुरी तरह खस्ताहाल मध्यप्रदेश में पिछले एक हफ्ते से बिजली कटौती का कहर टूट पड़ा है । विकास और प्रगति के मामले में घुटनों पर रेंग रही म.प्र. की सरकार जब सन 2003 में सत्ता आई तो महज एक महीने के अंद 24 घंटे बिजली देने का वायदा करके आई । मगर हालात का आलम ये है कि भाजपा की सरकार को सत्ताम में आये पूरे 10 साल गुजर गये 24 घंटे बिजली देना तो दूर आठ घंटे भी बिजली आज तक म.प्र. को मयस्सर नहीं करा पाई ।
सन 2008 के विधानसभा चुनावों में शिवराज सिंह चम्बल में पोरसा एवं जौरा की चुनावी सभाओं में वायदा करके गये थे कि पिछले 5 साल में हम आपको बिजली नहीं दे पाये लेकिन अब मेरा वायदा है कि अब अगर मेरी सरकार बनी तो मैं आपको 24 घंटे बिजली दूंगा , पोरसा की सभा में शिवराज सिंह ने यह वायदा किया कि अगर अबकी बार बरसात अच्छी हुयी तो मैं आपको 24 घंटे बिजली दूंगा , संयोगवश उस साल बहुत अच्छी वारिश हो गयी , बांघ ओवरफुल हो गये काफी पानी बांधों को खोलकर बाहर निकालना पड़ा तो चार पॉंच महीने बाद जौरा में हुयी शिवराज सिंह ने पलटी मारते हुये कहा कि अगर अबकी बार मेरी सरकार बनी तो आपको 24 घंटे बिजली दूंगा , संयोगवश शिवराज सिंह की सरकार भी बन गई तो अगले महीने ही शिवराज सिंह ने बयान दिया कि मैं क्या करूं केन्द्र कोयला ही नहीं दे रहा , मैं प्रदेश को बिजली कैसे दूं , इसके बाद जब केन्द्रीय कोयला मंत्री ने म.प्र. में आकर बयान दिया कि जितना चाहिये उतना कोयला लो , कोयले की कोई कमी नहीं है , पैसा दो और कोयला लो , तब उसके अगले महीने से शिवराज सिंह ने कहना शुरू किया कि केन्द्र घटिया कोयला दे रहा है , मैं क्याऔ करूं प्रदेश को बिजली कैसे दूं , इसके कुछ समय बाद शिवराज सिंह ने कहा कि सबके फीछर अलग अलग किये जा रहे हैं , फीछर अलग अलग होते ही प्रदेश को 24 घंटे बिजली दूंगा । फीडर भी अलग अलग कर दिये गये प्रदेश में कटिया डालना भी सन 2010 में ही बंद करा दिया गया, हाईटेंशन लाइनें सीधे हर घर तक डाल कर घर घर में मीटर टांग दिये गये बिजली के बिल आठ गुना तक बढ़ा दिये गये , दिग्विजय सिंह के शासनकाल में जिन घरों में बिजली का बिल 200 रूपये आता था उन घरों का बिजली का बिल 2000 रूपये महीने से भी ऊपर आने लगा मगर बिजली फिर भी प्रदेश को मयस्सर नहीं हुयी ।
हाल ये है कि अब तासे शिवराज सिंह के पास कोई बहाना भी नहीं बचा , अगले साल सन 2013 में फिर विधानसभा चुनाव है , सुनने में आ रहा है कि अब शिवराज सिंह चुनाव के ऐन वक्त पर प्रदेश को 24 घंटे बिजली देंगें , सवाल यह है कि दस साल तक म.प्र. को खून के ऑंसू रूला देने वाले शिवराज सिंह को दस महीने चुनाव काल में बिजली देने का जनता पुरूकार देगी या दंड । यह देखने की बात होगी कि पत्ते पत्ते पर गुलांटी खाने वाले, महज घोषणायें करने और लगातार दनादन झूठ बालने शिवराज सिंह को प्रदेश की जनता अबकी बार पुन: सत्तासीन करेगी या सत्ता से बाहर धकेल कर सदा सर्वदा के लिये राजनीति से बाहर कर देगी ।

बिजली कटौती के वावजूद जनता से जवरन बसूले गये धन की वापसी करायेगी युव ा कांग्रेस, जनहित याचिका आयेगी , शव यात्रा निकलेंगीं और फुकेंगें सरक ार के पुतले

युवक कांग्रेस 20 जुलाई को घेरेगी म. प्र. विधानसभा, 7 जुलाई से मुरैना की हर विधानसभा का दौरा

ग्वालियर चम्‍बल में चुनावी करवट क ी दस्तक, रामदेव के साथ शिवराज की च ुनावी हुंकार – नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’

हम कहाँ थे,हम कहाँ जा रहे हैं – रजनी छाबड़ा

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हम कहाँ थे,हम कहाँ जा रहे हैं

रजनी छाबड़ा
सुहाग के जोड़े,कुमकुम सने पग और
मेहँदी रचे हाथों से सजी संवरी दुल्हनिया
घोड़े पर सवार,सेहरे से सजे,
शाही शान से आते दुल्हे राजा
क्या ख्वाबों की बात हो जायेंगे
औत चटक,जनक जननी के जज़्बात जायेंगे

अपने जिगर के टुकड़े को
निगाहों से दूर बसने देना
क्या उन्हें मनमानी का परमिट दे गया
और अभिभावक क्या
उनका जीवन साथी सुझाने में
इतने अक्षम हो गए कि
नयी पौध द्वारा,वैवाहिक जीवन से पहले ही
खुद को आजमाना ज़रूरी हो गया

रिश्ते न हुए,
हो गयी मिठाई
चख लौ,भायी तो भायी
वरना ठुकराई
आदम और हव्वा की
वर्जित फल खाने की
कहानी का दोहरान
आधुनिक पीड़ी चढ़ती जायेगी
दिशाहीनता की एक और सोपान

मृगतृष्णा सी तलाश
भटकन की राह दिखती है
तन मन की बेताबी बडाती है
जीवंत विश्वास,संस्कार और परम्पराएँ
क्यों न हम यही आजमाई राह अपनाये

कानून की कलम से लिखा
लिव इन का फैसला
सर पर सवार होने न पाए
भारतीयता का परिवेश बदलने न पाए
हम भारतीय हैं,भारतीय रहेंगे
तपस्वनी धरा का यही औचित्य
सारी दुनिया को दिखलायें

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रिटेल एफ.डी.आई. को मंजूरी मिली , अधि सूचना जारी हुयी

भ्रष्‍टाचार से नि‍पटने और नागरि‍ कों को तय समय पर सेवाएं प्रदान करन े के लि‍ए ऐति‍हासि‍क वि‍धेयक लाए ग ए

भ्रष्‍टाचार से नि‍पटने और नागरि‍कों को तय समय पर सेवाएं प्रदानकरने के लि‍ए ऐति‍हासि‍क वि‍धेयक लाए गए

वार्षि‍क समीक्षा
कार्मि‍क लोक शि‍कायत और पेंशन मंत्रालय

कार्मि‍क लोक शि‍कायत और पेंशन मंत्रालय ने भ्रष्‍टाचार से नि‍टपने और नागरि‍कों को तय समय पर सेवाएं प्रदान करने के लि‍ए ऐति‍हासि‍क वि‍धेयक पेश कि‍ए। इसके अलावा सरकारी कर्मचारि‍यों को जवाबदेह बनाने के भी उपाय कि‍ए गए। मंत्रालय की वर्ष के दौरान प्रमुख पहल/उपलब्‍धि‍यां इस प्रकार हैं :

लोकपाल वि‍धेयक-2011
सरकार ने लोकसभा में लोकपाल और लोकायुक्‍त वि‍धेयक 2011 पेश कि‍या। इसका उद्देश्‍य केन्‍द्र में लोकपाल और राज्‍यों में लोकायुक्‍त की नि‍युक्‍ति‍करना है। प्रस्‍तावि‍त स्‍वायत्‍त और स्‍वतंत्र नि‍काय, लोकपाल और लोकायुक्‍त के पास आरंभि‍क जांच के लि‍ए नि‍रीक्षण और नि‍र्देश देने, जांच के लि‍ए प्रेरि‍त करने और भ्रष्‍टाचार को रोकने के लि‍ए कि‍सी कानून के अंतर्गत दर्ज शि‍कायतों के संबंध में जुर्म के नि‍ष्‍पादन का अधि‍कार होगा। वि‍धेयक में केन्‍द्र और राज्‍यों के लि‍ए एक समान सतर्कता और भ्रष्‍टाचार वि‍रोधी खाका तैयार करने का प्रावधान है। वि‍धेयक में जांच को मुकदमे से अलग करने और दक्षता और वि‍शेषज्ञता का दायरा बढ़ाने में हि‍तों के टकराव को दूर करना शामि‍ल है।

शि‍कायत नि‍वारक वि‍धेयक-2011
सरकार ने तय समय पर सेवाएं प्रदान करने और नागरि‍कों की शि‍कायतें दूर करने के लि‍ए नागरि‍क अधि‍कार वि‍धेयक 2011 हाल ही में संसद में पेश कि‍या। वि‍धेयक के अंतर्गत्‍प्रत्‍येक नागरि‍क प्राधि‍कार को एक सि‍टीजन चार्टर प्रकाशि‍त करना होगा, जि‍समें माल की आपूर्ति‍की श्रेणी का वि‍स्‍तृत वि‍वरण देना होगा, नि‍यत समय की जानकारी देनी होगी जि‍समें माल की आपूर्ति‍की गयी या सेवाएं दी गयी और नागरि‍कों से प्राप्‍त शि‍कायतों के बारे में पूछताछ करने और उसे दूर करने के लि‍ए सभी जन प्राधि‍कारों में शि‍कायत नि‍वारण अधि‍कारि‍यों (जीआरओ) की नि‍युक्‍ति‍का प्रावधान है। वि‍धेयक में जीआरओ के फैसले और माल और सेवाएं प्रदान करने के लि‍ए नामजद अधि‍कारी के अपने काम में वि‍फल रहने की स्‍थि‍ति‍में जुर्माना लागू करने के फैसले के खि‍लाफ अपीलों के लि‍ए राज्‍य लोक शि‍कायत नि‍वारण आयोग और केन्‍द्रीय लोक शि‍कायत नि‍वारण आयोग के गठन का प्रावधान है। नि‍चले स्‍तर पर नि‍युक्‍त अधि‍कारी के पास जि‍ला और उप जि‍ला स्‍तर पर अधि‍कतर शि‍कायतों को दूर करने का अधि‍कार होगा।

वि‍देशों में रि‍श्‍वतखोरी वि‍धेयक
वि‍देशों में सार्वजनि‍क अधि‍कारि‍यों और सार्वजनि‍क अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों के अधि‍कारि‍यों के रि‍श्‍वत लेने से रोकने संबंधी वि‍धेयक 2011 को संसद के मानसून सत्र में पेश कि‍या गया और इस समय यह वि‍भाग की संसद की स्‍थाई समि‍ति‍के समक्ष है। प्रस्‍तावि‍त कानून के अनुसार कोई भी व्‍यक्‍ति‍’जो वि‍देश में वि‍धायी, कार्यकारी, प्रशासनि‍क या न्‍यायि‍क अधि‍कारी के पद पर है’ यदि‍उसे भारत में ठेका प्राप्‍त करने के लि‍ए रि‍श्‍वत लेते हुए या देते हुए पाया जाता है तो उसे भारत में सात साल की सजा दी जाएगी। प्रस्‍तावि‍त वि‍धेयक के अंतर्गत इस तरह के अपराधों के लि‍ए ‘उकसाने’ को भी अपराध माना जाएगा।

भ्रष्‍टाचार से नि‍पटने के लि‍ए मंत्रि‍यों का समूह
सरकार ने भ्रष्‍टाचार से नि‍पटने के उपायों पर वि‍चार करने के लि‍ए जनवरी 2011 में मंत्रि‍यों के एक समूह का गठन कि‍या। मंत्री समूह ने अपनी पहली रि‍पोर्ट दे दी है जि‍से सरकार ने कुछ मामूली बदलाओं के बाद स्‍वीकार कर लि‍या है। स्‍वीकृत सि‍फारि‍शों को लागू करने के लि‍ए सरकार ने कदम उठाया है।

समूह ए केन्‍द्रीय सेवा अधि‍कारि‍यों के आईपीआर सार्वजनि‍क
सरकार ने फैसला कि‍या कि‍प्रशासन में पारदर्शि‍ता और जवाबदेही तय करने के लि‍ए अखि‍ल भारतीय सेवा के अधि‍कारि‍यों और संगठि‍त समूह ए केन्‍द्रीय सेवाओं के अधि‍कारि‍यों की 01 जनवरी, 2011 तक की अचल संपत्‍ति‍के वार्षि‍क ब्‍यौरे सार्वजनि‍क कि‍या जाए।
केन्‍द्रीय लोक सेवा/पदों के सभी सदस्‍यों के लि‍ए सतर्कता की मंजूरी के बारे में दि‍शा नि‍र्देशों में संशोधन कि‍या गया है। कि‍सी अधि‍कारी को सतर्कता को मंजूरी नहीं दी जाएगी अगर वह पि‍छले वर्ष के लि‍ए अपनी वार्षि‍क अचल संपत्‍ति‍का ब्‍यौरा अगले वर्ष 31 जनवरी तक नहीं देता।

जन शि‍कायतें
प्रशासनि‍क सुधार और जन शि‍कायत वि‍भाग ने वर्ष के दौरान जन शि‍कायतों को दूर करने के संबंध में कुछ प्रमुख कदम उठाए हैं। सेवोत्‍तम तैयार कि‍या गया और प्रकाशि‍त कि‍या गया। इसके अलावा सेवोत्‍तम को लागू करने के लि‍ए दि‍शा नि‍र्देश सि‍तम्‍बर में तैयार कि‍ए गए। ये दस्‍तावेज वि‍भाग की वेबसाइट http://www.darpg.gov.in पर भी उपलब्‍ध है। केन्‍द्र सरकार के सभी मंत्रालयों/और राज्‍य सरकारों में केन्‍द्रीयकृत लोक शि‍कायत नि‍वारण और नि‍गरानी प्रणाली को मजबूत करने के लि‍ए वर्ष के दौरान अनेक कदम उठाए गए हैं :
· सरकार के 62 मंत्रालयों/वि‍भागों/संगठनों के अधि‍कारि‍यों को प्रशि‍क्षण दि‍या गया।
· प्रणाली से जुड़े फील्‍ड अधि‍कारि‍यों की संख्‍या बढ़ाकर 1500 से 6000 कर दी गयी।
· स्‍थानीय भाषा के साथ अंतराफलक स्‍थापि‍त कि‍या गया और राजस्‍थान सरकार ने इसे व्‍यवहारि‍क बनाया। राज्‍य के मुख्‍य मंत्री ने इस प्रणाली का उद्घाटन कि‍या।

सेवोत्‍तम के लि‍ए क्षमता नि‍र्माण के बारे में कार्यशाला
केन्‍द्र सरकार के सभी मंत्रालयों/वि‍भागों के लि‍ए क्षमता नि‍र्माण के बारे में दो कार्यशालाएं और सभी राज्‍यों/केन्‍द्रशासि‍त प्रदेशों के लि‍ए दो कार्यशालाए आयोजि‍त की गयीं। सार्वजनि‍क सेवा में उत्‍कृष्‍टता के लि‍ए पुरस्‍कार दि‍ए गए। इनमें चण्‍डीगढ़ में सार्वजनि‍क वि‍तरण प्रणाली, तमि‍लनाडु में कार्यकलाप आधारि‍त ज्ञान, गुजरात में प्राथमि‍क स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, कर्नाटक में आईसीडीएस, केरल में ग्राम पंचायत का सि‍टीजन चार्टर, नि‍गम मामलों के मंत्रालय में एमसीए 21, प्रारंभि‍क शि‍क्षा में जवाबदेही, सीबीडीटी में सेवोत्‍तम और सीबीईसी में सेवोत्‍तम शामि‍ल है। चार कार्यशालाओं में कुल मि‍लाकर केन्‍द्र, राज्‍य/केन्‍द्रशासि‍त प्रशासन के 450 अधि‍कारि‍यों ने भाग लि‍या।
सरकारी कार्यालयों का आधुनि‍कीकरण
वर्ष के दौरान प्रशासनि‍क सुधार और लोक शि‍कायत वि‍भाग ने नि‍र्धारि‍त लक्ष्‍य को हासि‍ल करने के लि‍ए 9 मंत्रालयों/वि‍भागों/कार्यालयों के लि‍ए 6.50 करोड़ रुपये जारी कि‍ये। इससे लाभांवि‍त होने वाले संगठनों के साथ नि‍यमि‍त बैठकें की जाती हैं ताकि‍तय समय के अनुसार इन्‍हें लागू कि‍या जा सके।

ई-गवर्नेंस की दि‍शा में कदम
वि‍भाग और महाराष्‍ट्र सरकार ने संयुक्‍त रूप से औरंगाबाद में ई-गवर्नेंस के बारे में 14वें राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन कि‍या। इस सम्‍मेलन में ‘ग्रामीण ई सेवा देने : स्‍थि‍ति‍और चुनौति‍यां’ वि‍षय पर वि‍स्‍तृत वि‍चार वि‍मर्श कि‍या गया। सम्‍मेलन के दौरान ई-गवर्नेंस के लि‍ए राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार भी प्रदान कि‍ए गए।
राष्‍ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के अंतर्गत ई-कार्यालय मि‍शन मोड परि‍योजनाओं में से एक है। इस परि‍योजना का केन्‍द्र सरकार के मंत्रालयों और वि‍भागों के कामकाज में सुधार लाना है। ई-मैनुअल जरि‍ए फाइलों और दस्‍तावेजों का तेजी से नि‍पटारा कि‍या जा सकता है।

सीएपीएएम नेतृत्व विकास कार्यक्रम
विभाग ने 2011 में राष्ट्रमंडल लोक प्रशासन एवं प्रबंधन संघ (सीएपीएएम) नेतृत्व विकास कार्यक्रम का भारतीय लोक प्रशासन संस्थान में आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आज के प्रतिस्पर्धात्मक विश्व में कुशल नेतृत्व का विकास करना था जो कि सीखने की प्रायोगिक पद्धति पर आधारित था और जिसका उद्देश्य फैसलों में स्व-जागरूकता, भावनात्मक कुशाग्रता तथा रणनीतिक विचार विकसित करना था। इसमें भाग लेने वाले प्रतिभागियों को भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय मंत्रालयों व विभागों तथा राज्य सरकारों से चुना गया था।
सम्मेलन का आयोजना
मुख्य सचिवों का दूसरा वार्षिक सम्मेलन फरवरी 2011 में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन ने केन्द्र और राज्यों के विचारों के पारस्परिक आदान प्रदान के लिए स्थायी मंच की भूमिका निभाई।
सभी राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासनिक सुधारों पर सचिवों का तीसरा सम्मेलन सितंबर 2011 में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं में सुधार, प्रशासन को प्रभावी, पारदर्शी तथा जवाबदेह एवं नागरिकों के अनुकूल बनाने के लिए राज्यों द्वारा किए गए सुधारों एवं पहल के उनके अनुभवों को बांटने के लिए एक राष्ट्रीय मंच तैयार करना था।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
भारत और सिंगापुर के बीच कार्मिक प्रबंधन एवं लोक प्रशासन के क्षेत्र में नवंबर 2011 में एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये। एमओयू में निम्नलिखित बिंदु सम्मिलित थे। (i) क्षमता विकास एवं कौशल सुधार, लोक सेवा वितरण प्रणाली में सुधार (ग्राहकों उन्मुखी सेवाएं, कुल गुणवत्ता प्रबंधन, सिटीजन चार्टर पहल, लोक शिकायत निवारण तंत्र) (ii) मानव संसाधन प्रबंधन (iii) सार्वजनिक क्षेत्र सुधार (iv) नेतृत्व/प्रतिभा विकास
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और रायल सिविल सर्विस कमीशन, भूटान के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये जिसमें लोक सेवा मामलों पर अनुभवों का आदान प्रदान किया जाएगा। यूपीएससी और कनाडा लोक सेवा आयोग के बीच भी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय आदान प्रदान के द्वारा बेहतर परम्पराओं को प्रोत्साहित करना एवं एक दूसरे से बांटना है।
खाली आरक्षित पदों को भरने के लिए विशेष अभियान का आरंभ
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग तथा शारीरिक विकलांगों के लिए आरक्षित खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार ने एक अभियान शुरू किया। खाली पड़े पदों की संख्या 57947 है, जिसमें अनुसूचित जाति के लिए 15323, अनुसूचित जनजाति के लिए 20301, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 15323 और शारीरिक विकलांगों के लिए 7000 पद हैं। सभी मंत्रालय एवं विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे उक्त श्रेणियों के पदों को 31 मार्च 2012 तक भरें।

भर्ती
लोक सेवा (प्रारंभिक) परीक्षाओं के लिए सिलेबस और पैटर्न में 2011 में संशोधन किया गया जिसके मुताबिक अब वस्तुनिष्ठ प्रकार (बहुविकल्पीय) के दो प्रश्नपत्र होंगे। प्रत्येक प्रश्नपत्र 200 अंकों के होंगे और प्रत्येक के लिए दो घंटे का समय निर्धारित होगा।
यूपीएससी ने इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा के लिए फरवरी 2011 से आवेदन आनलाइन स्वीकार करना शुरू कर दिया है। आनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाने से न केवल समय की बचत हो रही है बल्कि फार्म में दिए गए विवरण के अधिक सटीक होने की संभावना है क्योंकि सभी जानकारियां आवेदक स्वयं भरता है।
यूपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण हुए आवेदकों के लिए 2011 से केवल आनलाइन मोड में ही फार्म उपलब्ध कराना शुरू किया है।
आयोग ने सभी प्रकार की परीक्षाओं के संपन्न होने के बाद प्रश्नपत्रों के आदान-प्रदान की व्यवस्था शुरू की है। परीक्षा में सफल एवं असफल आवेदकों को मूल्यांकन प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद प्राप्त अंकों की विवरण की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी शुरू की है।
आयोग ने हाल ही में ई-एडमिट कार्ड के लिए सरल साफ्टवेयर विकसित किया है जिससे आयोग की वेबसाइट पर जाकर आवेदक अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। यह प्रणाली जल्दी ही काम करना शुरू कर देगी।
इस साल के दौरान कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने अखिल भारतीय स्तर पर 9 मुक्त प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन किया। इन परीक्षाओं में रिकार्ड 19,42,289 लोगों ने आवेदन किया और 13,83,281 आवेदक परीक्षा में सम्मिलित हुए। एसएससी ने सभी के परिणाम घोषित किए और 67,861 आवेदकों की नियुक्तियों की सिफारिश की।
एसएससी को सीपीओ में 53,188 कांस्टेबलों (जीडी) की भर्ती के लिए कहा गया है। एसएससी ने बहुत ही कम समय में इस चुनौती को स्वीकार किया है और भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।

विविध
विभाग द्वारा 21 अप्रैल 2011 को छठें नागरिक सेवा दिवस का आयोजन किया गया। इस दिन सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए लोक सेवक स्वयं को नागरिकों के प्रति एक बार फिर समर्पित करने का व्रत लेते हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2009-10 में तीन श्रेणियों (व्यक्तिगत, समूह एवं संगठन) में पुरस्कार वितरित किए।
लोकसभा की विशेषाधिकार समिति से विचार विमर्श के बाद प्रशासन, संसद सदस्य और राज्य विधानसभाओं के बीच आधिकारिक कामकाज के लिए दिशा-निर्देश में संशोधन किया गया।

कुमारी सैलजा ने फुटपाथ विक्रय पर क ेंद्रीय कानून हेतु राष्‍ट्रीय मं त्रणा की एक दिवसीय कार्यशाला का शु भारंभ किया

कुमारी सैलजा ने फुटपाथ विक्रय पर केंद्रीय कानून हेतु राष्‍ट्रीय मंत्रणा की एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया

आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने फुटपाथ विक्रय पर केंद्रीय कानून हेतु राष्‍ट्रीय मंत्रणा का आज यहां आयोजन किया।

इस अवसर पर आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि फुटपाथ विक्रताओं को आम जनता के हितों को नुकसान पहुंचाए बिना अपना व्‍यावसाय करने का संवैधानिक अधिकार है। उन्‍होंने कहा कि फुटपाथ विक्रय स्‍व-रोज़गार का माध्‍यम है तथा यह बिना सर‍कारी सब्सिडी के शहर से गरीबी उपशमन का भी एक उपाय है।

आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने 2009 में शहरी फुटपाथ विक्रय पर राष्‍ट्रीय नीति प्रस्‍तुत की थी। इस नीति के अंतर्गत कोई भी पेशा या व्यवसाय, व्यापार करना हर नागरिक का अधिकार है और इस अधिकार से फुटपाथ विक्रताओं को वंचित नहीं किया जा सकता। उन्‍होंने कहा कि फुटपाथ विक्रेता को परेशानी का सामना इसलिए करना पड़ता है क्‍योंकि शहरों में फुटपाथ विक्रय के लिए कोई जगह निर्धारित नहीं की गई है।

उन्‍होंने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में फुटपाथ विक्रय की सुविधा के लिए एक योजना का प्रस्‍ताव भी किया जा रहा है।

इस बैठक में मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री श्री बाबूलाल गौर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्‍ली सरकार में मंत्री श्री ए.के. वालिया, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय में सचिव श्री अरुण कुमार मिश्रा, जेएनएनयूआरएम के मिशन निदेशक और अपर सचिव डॉ. पी. के मोंहती, राजीव आवास योजना की संयुक्त सचिव श्रीमती अरुणा सुंदराजन, विशेषज्ञ और फुटपाथ विक्रेता संघ के सदस्य भी उपस्थित थे।

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