चम्बल में राजनीतिक परिवर्तन की दस्तक और नेताओं का घमासान

चम्बल में राजनीतिक परिवर्तन की दस्तक और नेताओं का घमासान

नरेन्द्र सिंह तोमरआनन्द

जहाँ चम्बल घाटी में नवीन परिसीमन के साये में नेताओं की पूरी एक पौध बदलने जा रही है वहीं अपने आपको वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और स्थापित राजनतिज्ञ मान कर एवं समझकर मगन रहने वाले, जनता के मार्गदर्शक व राजनतिक उपचार विशेषज्ञों की हालत बड़ी खस्ता व पतली होती जा रही है ! जहाँ चम्बल में राजनीतिक संघर्ष तेज हो गया है वहीं, भावी राजनीतिक उथल पुथल के गणित भी नये समीकरणों की तलाश में जुट गये हैं ! चम्बल पर राजनीतिक वर्चस्व की अभिलाषा लगभग सभी राजनीतिक दलों को सदैव ही रही है, किन्तु इस वर्चस्व संघर्ष में अभी तक पारिस्थितिक एवं स्थिति गणित ही अपनी सर्वोच्च भूमिका निभाता आया है, कोई भी राजनीतिक दल वर्तमान में इस स्थिति में नहीं है जो छाती ठोक कर कह सके कि उसका चम्बल पर एकाधिपत्य व लोकप्रिय फैलाव है ! कभी कोई दल यहाँ कोई सीट निकालता है तो कभी कोई और ! स्थायी तौर पर अपनी छाप न तो कोई राजनीतिक दल ही यहाँ बना पाया न कोई नेता ही ! परिसीमन की हवायें और बदलते परिदृश्यचम्बल के एक तबके विशेष को सदा से शिकायत रही कि एक जाति विशेष से चुनाव लड़ने के लिये सारे अधिकार राजनीतिक व कूटनीतिक तौर पर छीन लिये गये हैं, और जाति विशेष का यह भी आरोप रहा कि उन्हें दिल्ली तो क्या भोपाल तक का भी चुनाव लड़ने से प्रतिबन्धित कर दिया गया है !नये परिसीमन में इस जाति विशेष की शिकायत दूर होने जा रही है वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके साथ ही चम्बल की राजनीति का नया ध्रुवीकरण और नये गणित की नयी समीकरणें तय होंगीं ! जाहिर है कि जहाँ नये नेताओं का पदार्पण होने के आसार नजर आने लगे हैं वहीं पुराने नेताओं के तम्बू उखड़ने के भी कम संकेत नहीं हैं ! प्रस्तावित परिसीमन को लेकर जहाँ अनेक स्थानीय नेताओं में भारी व्याकुलता है वहीं राजनेताओं की नयी व भावी पीढ़ी का एक तबका भारी खुश भी है ! जहाँ जमे जमाये पुराने नेता अपने आकाओं के दरबारों में ढोक लगाते फिर रहे हैं वहीं परिसीमन आयोग के दफ्तर को भी उन्होंने आपत्तियों के पुलिन्दों से भर दिया है ! जाति विशेष के लिये दिल्ली और भोपाल के रास्ते खुलेइसमें तो कोई शक ही नहीं कि चम्बल राजपूत बाहुल्य व प्रधान क्षेत्र है ! राजपूत क्षेत्रान्तर्गत तोमर राजपूतों के लिये वर्तमान क्षेत्र व्यवस्था में चुनाव लड़ने के सारे रास्ते बन्द कर दिये थे ! और इसका अनेक तोमर राजनेताओं द्वारा प्रबल विरोध किया जा रहा था, तोमर नेताओं ने अपना आक्रोश कई प्रकार से व्यक्त भी किया था ! तोमरों की तीन विधानसभा सीटें गोहद, अम्बाह एवं दिमनी आरक्षित हैं वहीं उनकी एकमात्र लोकसभा सीट मुरैना लोकसभा सीट भी आरक्षित थी ! परिणाम स्वरूप जनसंख्या बाहुल्य होते हुये भी तोमरों का राजनीतिक अस्तित्व लगभग समाप्तप्राय: सा हो गया था ! इसका विरोध करते हुये जहाँ तोमर नेता भिण्ड दतिया लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़कर अपना विरोध जता आये वहीं मुरैना विधान सभा में भी चुनाव लड़कर अपना विरोध जताते रहे ! वहीं अखबारों और पत्रिकाओं में भी लेख आलेख व समाचारों के जरिये तथा वरिष्ठ नेताओं को अपनी बात कह कर अनेक तरीकों से अपने आक्रोश से अवगत कराते रहे ! अब लम्बे समय बाद इस जाति विशेष को जहाँ विधानसभा के लिये दिमनी विधानसभा क्षेत्र के सामान्य हो जाने से चुनाव लड़ने का मौका मिल जायेगा वहीं अब लोकसभा के लिये भी मुरैना सीट सामान्य हो जाने से वे चुनाव लड़ सकेंगें !   परिसीमन के प्रस्तावित स्वरूप से जहाँ अनेक दिग्गजों का राजनीतिक वजूद खतरे में आ गया है, वहीं नये जोड़ तोड़ के हिसाब से राजनीतिक दलों ने नये महारथीयों की खोज भी प्रारम्भ कर दी है ! बड़े दल अर्थात कांग्रेस और भाजपा की हालत नये हालातों में अधिक परिवर्तनीय है, जहाँ वर्तमान परिस्थितियों में दोनों ही राजनीतिक दलों के पास न तो दिमनी विधान सभा क्षेत्र में ही और न मुरैना लोकसभा क्षेत्र में ही कोई कद्दावर और सर्वमान्य नेता है वहीं अन्य राजनीतिक दल भी कम पशोपेश में नहीं हैं ! जहाँ मुरैना के समीकरण चम्बल में बदलेंगें वहीं भिण्ड दतिया संसदीय क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहेगा ! जहाँ मुरैना सीट सामान्य होगी वहीं भिण्ड दतिया सीट आरक्षित हो जायेगी ! अभी तक भाजपा ने जहाँ दोनों संसदीय सीटों पर कब्जा जमा कर रखा है वहीं वह अब इस पर काबिजी बरकरार रखने के लिये अपनी ताकत झोंक रही है, जबकि कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी इन दोनों सीटों को भाजपा से छीन कर अपने हक में करने की रणनीति पर कायम हैं ! जहाँ मुरैना संसदीय सीट के लिये भाजपा अपने मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर को इस लोकसभा सीट के लिये तैयार करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस और बसपा सहित अन्य राजनीतिक दल अपने लिये ताजा चेहरों की तलाश में जुटे हैं ! भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने जिस कदर मुरेना जिला पर ध्यान देना शुरू किया है, और ताबड़तोड़ दौरे इस संसदीय सीट पर करना शुरू किये हैं, उससे लोगों को मुकम्मल तौर पर लगने लगा है कि भाजपा की प्रादेशिक हाईकमान चम्बल की इस प्रमुख सीट पर काबिजी बरकरार रखने के लिये आतुर है और मुरैना सीट पर नरेन्द्र सिंह तोमर भाजपा के प्रत्याशी लगभग तय हैं ! भाजपा के लिये एक महत्वपूर्ण प्लस प्वाइण्ट है कि चम्बल का बेटा पहली बार किसी महत्वूर्ण राजनीतिक दल के प्रदेश स्तर के शीर्ष पद पर पहुँचा है ! अभी तक उपेक्षित के रूप में गिनी जाती रही चम्बल घाटी नरेन्द्र सिंह तोमर के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने से गौरान्वित व अहसानमन्द तो है ही , दूसरी ओर नरेन्द्र सिंह तोमर में राजनीतिक कूटनीतिकता की भी परिपक्वता है इसके साथ ही जहाँ तोमर ने चम्बल के लोगों की कमजोर नसों को टटोलना शुरू कर दिया है वहीं तोमर साम्राज्य के उद्गम स्थल ऐसाह की यात्रा भी इसी ओर इंगित करती है ! तोमर का चम्बल के ग्रामीण अंचलों में तूफानी दौरा भी इसी ओर इशारा करता है !