गरीबी सभ्य समाज के लिए अभिशाप: श्री शेखावत

गरीबी सभ्य समाज के लिए अभिशाप: श्री शेखावतउपराष्ट्रपति श्री भैरोंसिंह शेखावत ने कहा है कि गरीबी सभ्य समाज के लिए अभिशाप है । हमारे संविधान में न्नजीवन न्न की जो परिभाषा दी गई है, उच्चतम न्यायालय ने उसकी विषयवस्तु और रूपरेखा का दायरा बढाया है और कहा है कि जीवन का अधिकार का मतलब है मानवीय गरिमा के साथ जीवन बिताना है।श्री शेखावत ने सुविख्यात गांधीवादी और सर्वोदय नेता डॉ रतन दास द्वारा लिखित पुस्तक न्न पॉवर्टी एण्ड हंगर: कॉजिज एण्ड कान्सिक्वसेज न्न का विमोचन करते हुए कहा कि गरीबी उन्मूलन से संबंधित कार्यक्रम की सफलता सार्वजनिक प्रशासन की गुणवत्ता से अभिन्न रूप से जुड़ी है ।श्री शेखावत ने कहा कि उनका हमेशा से मानना है कि राज्य के कोष पर हमेशा पहला हक गरीब का होता है । गरीबी का अभिशाप मिटाना राज्य का पवित्र कर्तव्य है । उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान 1977 में चलाई गई अंत्योदय पहल की सफलता का उल्लेख किया । उन्होंने अंत्योदय की संकल्पना पर जोर देते हुए कहा कि इस संकल्पना को गरीबों और पददलितों के कल्याण के लिए चलाए जा रहे सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए । श्री शेखावत ने गरीबी पर इस विशद तथा विश्लेषक पुस्तक लेखन के लिए डा0 दास की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक गरीबी और भुखमरी से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर एक रचनात्मक बहस शुरू करेगी । इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डा0 रतन दास और श्री बी के देव (संसद सदस्य) ने भी अपने विचार व्यक्त किये ।

बैंक स्व-सहायता समूह के त्रऽण आवेदनों को शीघ्रता से निपटायें

बैंक स्व-सहायता समूह के त्रऽण आवेदनों को शीघ्रता से निपटायेंग्रामीण विकास मंत्रालय ने वाणिज्यिक बैंको के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशकों से कहा है कि वे स्वर्ण जयंती ग्राम स्व-रोजगार योजना (एसजीएसवाई) के तहत स्व-सहायता समूहों के 2.5 लाख से ज्यादा लम्बित त्रऽण आवेदन पत्रों को निपटाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाएं। अभियान के तहत बैंकों की उन शाखाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा जिन्होंने बिल्कुल ही त्रऽण नहीं दिए हैं या फिर जिन्होंने स्व-सहायता समूहों को बहुत कम त्रऽण दिया है। इस अभियान के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक कम से कम 50 फीसदी आवेदन पत्रों पर त्रऽण मंजूर कर दिया जाए। राज्य तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को को एक पत्र लिखकर सलाह दी गई है कि वे एसजीएसवाई के तहत लाभार्थियों को त्रऽण का प्रवाह बढाने के लिए शीघ्र समीक्षा बैठकें बुलाएं, एसएलबीसी संयोजक के साथ परामर्श से लम्बित आवेदन पत्रों के संबंध में आंकड़ों के मिलान के वास्ते बैंको के साथ मिलकर तुरंत आवश्यक कार्रवाई करें और समायोजित आंकड़े मंत्रालय को भेजें। बैंकों से एक उत्पाद प्रबंधक नामजद करने को भी कहा गया है ताकि स्व-सहायता समूहों को निगमित स्तर पर त्रऽण का प्रवाह हो सके। बैंकों से कहा गया है कि वे तदनुसार अपने राज्य स्तर के प्रमुखों को सलाह दें।       ग्रामीण विकास मंत्री डॉ0. रघुवंश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एसजीएसवाई की केन्द्रीय स्तर की समन्वय समिति की 10वीं बैठक के फलस्वरूप यह फैसला लिया गया है। बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक और वाणिज्यिक बैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। बैंक में इस बात पर प्रमुख रूप से चिंता जताई गई थी कि मौजूदा वर्ष में बैकों द्वारा एसजीएसवाई के लाभार्थियों को त्रऽण वितरण की स्थिति काफी खराब रही है। वर्ष 2006-07 के लिए राष्ट्रीय त्रऽण का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था, अभी तक उसका मात्र 38 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल किया जा सका है। बैंकों की ऐसी 2643 शाखाएं हैं, जिन्होंने 2005-06 के दौरान त्रऽण लक्ष्य के 25 प्रतिशत से भी कम त्रऽण जारी किए हैं। त्रऽण वितरण की इस खराब स्थिति का एक कारण यह बताया गया था कि भारी संख्या में त्रऽण आवेदन पत्र लम्बित हैं।

सरकार को विकास स्तंभ स्थापित करने का प्रस्ताव मिले

सरकार को विकास स्तंभ स्थापित करने का प्रस्ताव मिलेराष्ट्रीय असंगठित क्षेत्र उद्यम आयोग ने विनिर्माण सेवाओं एवं गैर-कृषि गतिविधियों में लगी उत्पादन इकाइयों का संबंधित भौगोलिक क्षेत्र के साथ बेहतर तालमेल कायम कने तथा छोटे एवं लघु इकाइयों में उत्पादन और रोजगार के विस्तार को बढावा देने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में विकास स्तंभों की स्थापना के प्रस्ताव पेश किये हैं। इन विकास स्तंभों में ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं के प्रावधानों की अवधारण को भी शामिल किया जाएगा। राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम ने भी इस अवधारण को समर्थन दिया था।       सरकार को देश के विभिन्न हिस्सों में कुछ निश्चित भौगोलिक क्षेत्रों के लिए विकास स्तंभ स्थापित करने के प्रस्ताव मिले हैं। छत्तीसगढ, क़ेरल, राजस्थान, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर से इन क्षेत्रों के लिए विकास स्तंभ के प्रस्ताव आये हैं – बस्तर जिले (छत्तीसगढ) में कौंडागांव, केरल के कोल्लाम जिले में, दौसा (राजस्थान) के सिकंदरा, उत्तरांचल के चमौली जिले, हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के दामजोर-पांचला में और असम में दक्षिण पश्चिम कामरूप में।       छत्तीसगढ, क़ेरल, राजस्थान और पश्चिम बंगाल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट संबंधित राज्य सरकारों के साथ विचार-विमर्श से तैयार की जा रही है। असम के दक्षिण पश्चिम कामरूप के वास्ते प्रस्ताव विचाराधीन है।       असंगठित क्षेत्र की समस्याओं का अध्ययन करने तथा उनका समाधान सुझाने के लिए डॉ. अर्जुन सेनगुप्ता की अध्यक्षता में इस आयोग का गठन किया गया था।

स्व राजनारायण की स्मृति में डाक टिकट जारी

स्व राजनारायण की स्मृति में डाक टिकट जारी 

उपराष्ट्रपति श्री भैरोंसिंह शेखावत ने कहा है कि जब तक सभी राजनीतिक दल सामंजस्य की भावना से गरीबी उन्मूलन के लिए कार्य नहीं करेंगे तब तक देश का विकास नहीं हो सकता । उन्होंने सभी राजनीतिक दलों का आह्वान किया कि वे गरीबी और सामान्य जन अभावों , आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को महत्व देते हुए प्रभावी नीतियां बनाकर उसको क्रियान्वित करें ।श्री शेखावत ने आज अपराह्न अपने निवास स्थान पर प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व0 श्री राजनारायण की स्मृति में डाक विभाग द्वारा जारी डाक टिकट का लोकार्पण करते हुए कहा कि श्री राजनारायण ने अपने संघर्षमय जीवन, सादगी और शुचिता से एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया जो नयी पीढी क़े लिए प्रेरणा का स्रोत है । उन्होंने कहा कि यह डाक टिकट एक संदेश है जिससे देश के लिए बलिदान और समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा मिलेगी ।उन्होंने कहा कि स्व0 श्री राजनारायण से उनके आत्मीय संबंध थे । वे उनके द्वारा 1977 में लागू की गयी अंत्योदय योजना से प्रभावित थे । उनका कहना था कि गांव और गरीब के कल्याण की योजनाएं केवल सरकार के भरोसे नहीं चल सकतीं, बल्कि इसके लिए जन सहयोग और सहभागिता की बहुत बड़ी आवश्यकता है ।इस अवसर पर सांसदगण सर्वश्री रेवती रमन सिंह, हरि केवल प्रसाद, मोहन सिंह और दिग्विजय सिंह भी उपस्थित थे । श्री मोहन सिंह और हरि केवल प्रसाद ने भी इस अवसर पर अपने विचार प्रकट किये । समारोह में स्व0 श्री राजनारायण के परिवार के सदस्यों के अलावा बहुत बड़ी संख्या में उनके प्रशसंक भी उपस्थित थे ।

राष्ट्रीय शहरी स्वच्छता नीति शीघ्र – राजमणि

राष्ट्रीय शहरी स्वच्छता नीति शीघ्र – राजमणिसरकार जल्दी ही राष्ट्रीय शहरी स्वच्छता नीति लाने वाली है। शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री एम.एम.राजमणि ने आज यहां विश्व जल दिवस के अवसर पर गैर-सरकारी संगठनों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह नीति निर्माणाधीन है और इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता की स्थिति तथा लोगों के स्वास्थ्य में गुणात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए सरकार ने जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) में जल एवं स्वच्छता, सीवरेज, ठोस कचरा का प्रबंधन, बाढ जल निकासी आदि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। श्री राजमणि ने कहा कि पांच वर्षों के अंदर मिशन शहरों के परिवेश में आमूल-चूल परिवर्तन आएगा। नवीकरण मिशन के क्रियान्वयन की प्रगति अब तक काफी अच्छी रही है। हमारे शहरों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए और यह तभी संभव हो सकता है, जब हमारे पास अंतर्राष्ट्रीय मानक के बुनियादी ढांचों से लैस स्वच्छ शहर हों। श्री राजमणि जेएनएनयूआरएम निदेशालय के प्रभारी भी हैं।       उन्होंने कहा कि शहरी आधारभूत ढांचा विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में लोगों की भागीदारी और समर्थन जुटाने के लिए सरकार सामुदायिक सहभागिता कोष के गठन की तैयारी कर रही है। उन्होंने गैर-सरकारी संगठानों से गरीबों और वंचितों के जीवन स्तर मे सुधार लाने के लिए हरसंभव प्रयास करने की अपील की। 

 

कर्नाटक में फिल्म सिटी

कर्नाटक में फिल्म सिटी

        कर्नाटक सरकार ने श्री रामकृष्ण हेगड़े की सरकार के दौरान हेसरघट्टा में करीब 200 एकड़ में फिल्म सिटी बनाने का वायदा किया था। कर्नाटक सरकार से प्राप्त सूचना के अनुसार राज्य सरकार ने 1972 में 99 वर्ष की लीज पर कर्नाटक फिल्म उद्योग विकास लिमिटेड (केएफआईडीसी) को फिल्म सिटी निर्माण के लिए 347 एकड़ भूमि आबंटित की थी।       राज्य सरकार ने बताया कि चूंकि केएफआईडीसी घाटे में चल रहा है है और धन का अभाव था ऐसे में फिल्म सिटी परियोजना लागू नही हो पायी। अब केएफआईडीसी बंद होने के कगार पर है। राज्य सरकार के अनुसार धनाभाव ही इस परियोजना की असफलता का कारण है। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्यमंत्री श्री प्रियरंजन दास मुंशी ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में  यह जानकारी दी।

सेट टॉप बॉक्सों की कोई कमी नहीं

सेट टॉप बॉक्सों की कोई कमी नहीं

        भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (टीआरआईए) को केबल ऑपरेटरों से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक सेट बॉक्स (एसटीबी) की कोई कमी नहीं है।       सरकार ने न तो किसी ऐसी एजेंसी को प्राधिकृत किया है जिससे एसटीबी खरीदे जा सकते हैं और न ही इस तरह के आपूर्तिकर्ताओं की कोई सूची बनाई है। प्रसारकोंएमएसओ द्वारा शोषण का कोई भी मामला टीआरआईए के संज्ञान में नही आया है। हालांकि, कैस स्कीम से संबंधित नियमोंआदेशों के उल्लंघन की जब कभी कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उसके खिलाफ स्थापित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है। टीआरआईए, एमएसओ तथा संबंधित नोडल अधिकारियों के साथ सतत् संपर्क बनाए हुए है ताकि उपभोक्ताओं की हितों की रक्षा के लिए किसी भी बाधा को दूर किया जा सके।       केन्द्रीय सूचना और प्रसारण तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रियरंजन दास मुंशी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

बिजली क्षेत्र में पारेषण तथा वितरण नुकसान और चोरी स्वीकार्य नहीं- प्रधानमंत्री

बिजली क्षेत्र में पारेषण तथा वितरण नुकसान और चोरी स्वीकार्य नहीं- प्रधानमंत्री       देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कारणों से बिजली की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि उद्योग तथा कृषि, ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों, घरों, खेतों और फैक्ट्रियों में बिजली की बढती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बिजली क्षेत्र के तीव्र विकास की जरूरत है।       आज यहां एक समारोह में विद्युत सेवा प्रदाताओं को उनकी शानदार कार्यनिष्पादन के लिए पुरस्कार प्रदान करने के बाद  डॉ. सिंह ने कहा दसवीं पंचवर्षीय योजना में विद्युत उत्पादन की जो क्षमता जोड़ी गई है वह इस योजना अवधि के लिए लक्षित क्षमता का मात्र 50 प्रतिशत के आसपास है। यदि हम देश की अर्थव्यवस्था में बिजली को बाधा नहीं बनने देना चाहते हैं तो हमें और बेहतर प्रयास करने होंगे।       प्रधानमंत्री ने केन्द्र तथा राज्यों के विद्युत सेवाप्रदाताओं से आह्वान किया कि वे विद्युत उत्पादन क्षमता का अधिकतम सीमा तक इस्तेमाल करें और इसके लिए सर्वश्रेष्ठ तौर-तरीके तथा बिजली उत्पादन इकाईयों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पारेषण तथा वितरण में बिजली के नुकसान और चोरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने वितरण क्षेत्र में सुधारों की जरूरत पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने मांग पक्ष के प्रबंध के महत्व को भी उजागर किया। केन्द्रीय विद्युत मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे, सांसद तथा विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इस समारोह में मौजूद थे।

दांडी मार्च, विरासत पथ घोषित

दांडी मार्च, विरासत पथ घोषितकेन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्रीमती अंबिका सोनी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि गुजरात समेत राज्य सरकारोंकेन्द्रशसित प्रदेशों द्वारा पर्यटन के विकास एवं प्रोत्साहन पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटन मंत्रालय 10वीं पंचवर्षीय योजना से राज्य सरकारोंकेन्द्रशासित प्रदेशों को पर्यटन से संबंधित परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ प्रतिवर्ष विचार विमर्श के बाद पर्यटन सकिर्टोंपर्यटन केन्द्रों के बुनियादी ढांचे के विकास तथा राजस्व सृजन करने वाली परियोजनाओं को सहायता स्कीमों के तहत इन परियोजनाओं की पहचान की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा सौंपे गये परियोजना प्रस्ताव तथा दिशा-निर्देशों के तहत इस पर विचार-विमर्श के बाद, दांडी मार्ग के विकास के लिए निम्नलिखित परियोजनाएं मंजूर की गयी हैं-· दांडी का गंतव्य विकास 380.27 लाख रुपये· दांडी की ग्रामीण पर्यटन परियोजना 50.00 लाख रुपये       श्रीमती सोनी ने कहा कि मंत्रालय द्वारा मंजूर परियोजनाओं का क्रियान्वयन गुजरात सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि मंत्रालय समय-समय पर समीक्षा बैठकों के जरिए परियोजनओं की प्रगति पर नजर रखता है। 

बच्चों के प्रति अपराध

बच्चों के प्रति अपराध

 महिला और बाल विकास मंत्रालय की राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका चौधरी  ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2006 के दौरान भारत में बच्चों के प्रति अपराध के राष्ट्रीय आंकड़ों में वर्ष 2004 की तुलना में 3.8 प्रतिशत की वृध्दि हुई तथा बच्चों से बलात्कार के मामलों में 13.7 प्रतिशत की वृध्दि हुई।       किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 में कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों तथा संरक्षण और देखभाल के जरूरतमंद बच्चों का पता लगाने, उनकी शिक्षा एवं पुनर्वास हेतु सुविधाएं प्रदान करने, संसाधन जुटाने, गृहों की स्थापना व अनुरक्षण से संबंधित मामलों पर सरकार को सलाह देने तथा विभिन्न सरकारी अभिकरणों के बीच समन्वयन के लिए केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड के गठन का उपबन्ध किया गया है। पहले सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इस विषय पर कार्रवाई कर रहा था। यह विषय इस मंत्रालय को हस्तांरित किये जाने के पश्चात इस विकास मंत्रालय बड़ी बड़ी संख्या में बाल कल्याण विशेषज्ञों और इस क्षेत्र में कार्यरत सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित रूप से परामर्श करता रहा है।       हाल ही में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 को बच्चों के लिए और अधिक अनुकूल बनाने हेतु इस अधिनियम में संशोधन किये हैं। मंत्रालय ने देशभर में व्यापक बाल संरक्षण तंत्र स्थापित करने के लिए समेकित बाल संरक्षण स्कीमनामक नई स्कीम भी तैयार की है। 

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