पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दें – श्री साहनी

पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दें – श्री साहनी

मुख्य सचिव ने दिये कमिश्नर एवं कलेक्टरों को निर्देश

ग्वालियर एक अप्रैल 08 । मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी ने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों एवं कलेक्टर्स को निर्देश दिये है कि प्रदेश में पेयजल की गंभीर समस्या को देखते हुये प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि लोगों को पेयजल की आपूर्ति सुगमता के साथ हो ।    मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी ने आज समाधान ऑन लाईनके द्वारा वीडियो कॉफ्रसिंग के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का भी समाधान किया।

संभागायुक्त डॉ. कोमल सिंह ने ग्वालियर संभाग के विभिन्न जिलों में पेयजल आपूर्ति की जानकारी देते हुये बताया कि संभाग के 50 गांवों में पेयजल परिवहन किया जा रहा है। डॉ. सिंह ने बताया कि ग्वालियर शहर के लिये पहसारी से पानी छोडा गया है जो 7 अप्रैल को तिघरा बांध में पहुच जायेगा। जहां से नगर की पेयजल आपूर्ति होती है। शहर के लिये पानी पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है । पेयजल आपूर्ति की सतत समीक्षा की जा रही है । इस अवसर पर कलेक्टर कार्यालय ग्वालियर के वीडियो कॉन्फ्रेसिंग हॉल में संभागायुक्त डॉ. कोमल सिंह सहित जिला  कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक श्री व्ही.के. सूर्यवंशी, नगर निगम आयुक्त डॉ. पवन शर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

       मुख्य सचिव श्री साहनी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से जिलेवार समीक्षा करते हुये सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिये कि खरीफ फसलों की बोनी हेतु खाद एवं बीज के रूप में आदान भंडारण की अभी से व्यवस्था सुनिश्चित कर लें ताकि खरीफ फसलों की बोनी हेतु कृषकों को आसानी से खाद, बीज एवं कीटनाशक दवाईयां सुलभ हो सके ।

       संभागायुक्त डॉ. सिंह ने सिंध नदी के किनारें के कुछ गांवों में पानी में फलोराईड होने की शिकायत के संबंध में भी ंध्यान आकर्षित किया । मुख्य सचिव ने इन गांवों में अधिक गहराई के टयूबेलों का खनन नहीं किये जाने के निर्देश दिये। संभागायुक्त ने अन्त्योदय योजना के तहत सहरिया जनजाति हेतु खाद्यान्न आवंटन बढ़ाने की बात रखी । उन्होंने संभाग में पटवारियों के रिक्त पदों की पूर्ति के संबंध में भी ध्यान आकर्षित किया । इस दौरान चंबल संभाग आयुक्त ने भी चंबल संभाग के विभिन्न जिलों में पेयजल आपूर्ति के संबंध में अवगत कराया ।

 

वन अधिकारों की मान्यता विषय पर मीडिया वर्कशॉप आज

वन अधिकारों की मान्यता विषय पर मीडिया वर्कशॉप आज

ग्वालियर एक अप्रैल 08 अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 एवं नियम 2007 की जानकारी सम्प्रेषण माध्यमों से जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से शासन द्वारा 2 अप्रैल 08 को होटल सेन्ट्रल पार्क में मीडिया वर्कशॉप आयोजित की गई है । मीडिया वर्कशॉप में आदिमजाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव श्री ओ.पी. रावत, जनसंपर्क संचालनालय भोपाल के अपर संचालक श्री आर.एम.पी. सिंह सहित अधिनियम के जानकार विद्वान मीडिया को अधिनियम के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देंगे ।

उल्लेखनीय है कि वन में निवास करने वाली ऐसी अनुसूचित जनजातियों और परम्परागत वन निवासियों के जो वनों में पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं किन्तु उनके अधिकारों को अभिलिखित नहीं किया जा सका है । उनके वन अधिकारों और वन भूमि में अधिभाग को मान्यता देने के लिये अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम को जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारतवर्ष में लागू किया गया है । अधिनियम के उद्देश्यों में वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों के मान्यता प्राप्त अधिकारों में, दीर्घकालीन उपयोग के लिये जिम्मेदारी और प्राधिकार, जैव विविधता का संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन को बनाये रखना और वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों की जीविका तथा खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करते समय वनों की संरक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करना भी सम्मिलित है । साथ ही औपनिवेशिक काल के दौरान तथा स्वतंत्र भारत में राज्य वनों को समेकित करते समय उनकी पैतृक भूमि पर वन अधिकारों और उनके निवास को पर्याप्त रूप से मान्यता नहीं दी गई थी । जिसके परिणामस्वरूप वन में निवास करने वाली उन अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों के प्रति ऐतिहासिक अन्याय हुआ । साथ ही वे पारिस्थितिकी प्रणाली को बचाने और बनाये रखने के लिये अभिन्न अंग है । इस अन्याय को समाप्त करने की दृष्टि से अब यह आवश्यक हो गया है कि वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों की, जिसके अंतर्गत वे जनजातियां भी है, जिन्हें राज्य के विकास से उत्पन्न हस्तक्षेप के कारण अपने निवास दूसरी जगह बनाने के लिये मजबूर किया गया था उनकी लंबे समय से चली आ रही भूमि संबंधी असुरक्षा तथा वनों में पहुंच के अधिकारों पर भी ध्यान दिया जाये । अधिनियम इन विसंगतियों को दूर करने की दिशा में किया गया सार्थक प्रयास है । अधिनियम की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक सही रूप में पहुंचे इसी इरादे से सम्प्रेषण माध्यमों की यह मीडिया वर्कशॉप आहुत की गई है।

 

 

वन अधिकारों की मान्यता विषय पर मीडिया वर्कशॉप आज

वन अधिकारों की मान्यता विषय पर मीडिया वर्कशॉप आज

ग्वालियर एक अप्रैल 08 अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 एवं नियम 2007 की जानकारी सम्प्रेषण माध्यमों से जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से शासन द्वारा 2 अप्रैल 08 को होटल सेन्ट्रल पार्क में मीडिया वर्कशॉप आयोजित की गई है । मीडिया वर्कशॉप में आदिमजाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव श्री ओ.पी. रावत, जनसंपर्क संचालनालय भोपाल के अपर संचालक श्री आर.एम.पी. सिंह सहित अधिनियम के जानकार विद्वान मीडिया को अधिनियम के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देंगे ।

उल्लेखनीय है कि वन में निवास करने वाली ऐसी अनुसूचित जनजातियों और परम्परागत वन निवासियों के जो वनों में पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं किन्तु उनके अधिकारों को अभिलिखित नहीं किया जा सका है । उनके वन अधिकारों और वन भूमि में अधिभाग को मान्यता देने के लिये अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम को जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारतवर्ष में लागू किया गया है । अधिनियम के उद्देश्यों में वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों के मान्यता प्राप्त अधिकारों में, दीर्घकालीन उपयोग के लिये जिम्मेदारी और प्राधिकार, जैव विविधता का संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन को बनाये रखना और वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों की जीविका तथा खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करते समय वनों की संरक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करना भी सम्मिलित है । साथ ही औपनिवेशिक काल के दौरान तथा स्वतंत्र भारत में राज्य वनों को समेकित करते समय उनकी पैतृक भूमि पर वन अधिकारों और उनके निवास को पर्याप्त रूप से मान्यता नहीं दी गई थी । जिसके परिणामस्वरूप वन में निवास करने वाली उन अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों के प्रति ऐतिहासिक अन्याय हुआ । साथ ही वे पारिस्थितिकी प्रणाली को बचाने और बनाये रखने के लिये अभिन्न अंग है । इस अन्याय को समाप्त करने की दृष्टि से अब यह आवश्यक हो गया है कि वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों की, जिसके अंतर्गत वे जनजातियां भी है, जिन्हें राज्य के विकास से उत्पन्न हस्तक्षेप के कारण अपने निवास दूसरी जगह बनाने के लिये मजबूर किया गया था उनकी लंबे समय से चली आ रही भूमि संबंधी असुरक्षा तथा वनों में पहुंच के अधिकारों पर भी ध्यान दिया जाये । अधिनियम इन विसंगतियों को दूर करने की दिशा में किया गया सार्थक प्रयास है । अधिनियम की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक सही रूप में पहुंचे इसी इरादे से सम्प्रेषण माध्यमों की यह मीडिया वर्कशॉप आहुत की गई है।

 

 

ग्वालियर चंबल संभाग में 56 हजार 919 नसबंदी ऑपरेशन हुये

ग्वालियर चंबल संभाग में 56 हजार 919 नसबंदी ऑपरेशन हुये

ग्वालियर एक अप्रैल 08 । छोटा परिवार, सुखी परिवार के उद्देश्य को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा मार्च 08 के अंत तक ग्वालियर एवं चंबल संभाग में 56 हजार 919 नसबंदी ऑपरेशन किये गये हैं जो लक्ष्य का 71.86 प्रतिशत है । पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान ग्वालियर एवं चंबल संभाग के आठों जिलों के लिये 79 हजार 205 नसबंदी ऑपरेशन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था । 56 हजार 919 हुये नसबंदी ऑपरेशन में 54 हजार 589 महिला ऑपरेशन और 2 हजार 330 पुरूष नसबंदी ऑपरेशन हुये हैं। सर्वाधिक 10 हजार 677 नसबंदी ऑपरेशन ग्वालियर जिले में किये गये हैं जिले में 10 हजार 700 नसबंदी ऑपरेशन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था । जिसके विरूध्द 99.79 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई । इसी तरह शिवपुरी जिले को सौंपे गये 16 हजार नसबंदी ऑपरेशन के लक्ष्य के विरूध्द 7 हजार 600 नसबंदी ऑपरेशन किये गये है । गुना जिले में 10 हजार 953 नसबंदी ऑपरेशन लक्ष्य के विरूध्द 7 हजार 121 नसबंदी ऑपरेशन किये गये ।

दतिया जिले में 5 हजार 875 नसबंदी ऑपरेशन के लक्ष्य के विरूध्द 4 हजार 156, अशोकनगर जिले में 6 हजार 660 नसबंदी ऑपरेशन के लक्ष्य के विरूध्द 6 हजार 198, भिण्ड जिले में 13 हजार 300 नसबंदी ऑपरेशन के लक्ष्य के विरूध्द 7 हजार 500, मुरैना जिले में 10 हजार नसबंदी ऑपरेशन के लक्ष्य के विरूध्द 9 हजार 516 और श्योपुर जिले में 5 हजार 717 नसबंदी ऑपरेशन के लक्ष्य के विरूध्द 4 हजार 151 नसबंदी ऑपरेशन किये गये हैं ।

ग्वालियर एवं चंबल संभाग में एक लाख 48 हजार 938 ओरलपिल्स, 3 लाख 11 हजार 593 लोगों को निरोध और 75 हजार 900 महिलाओं को कॉपर-टी लगाकर परिवार नियोजन किया गया ।

 

 

अजा-अजजा के आवेदकों को दिया जायेगा नि:शुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण

अजा-अजजा के आवेदकों को दिया जायेगा नि:शुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण

आवेदन 23 अप्रैल तक आमंत्रित : 500 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी मिलेगी

भोपाल एक अप्रैल 08 । अनुसूचित जाति तथा जनजाति के आवेदकों से नि:शुल्क डाटा एन्ट्री आपरेटर एण्ड कम्प्यूटर एप्लीकेशन के प्रशिक्षण के लिये आवेदन 23 अप्रैल, 2008 तक आमंत्रित किये गये हैं। इस छह माह के प्रशिक्षण के साथ आवेदकों को 500 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी दी जायेगी। महिला उम्मीदवारों के लिये 30 प्रतिशत तथा तीन प्रतिशत स्थान नि:शक्तजनों हेतु आरक्षित रखे गये हैं। यह प्रशिक्षण आगामी 28 अप्रैल से प्रारंभ होगा। आवेदक का चयन हायर सेकेण्डरी के प्राप्तांकों के आधार पर मेरिट के अनुसार होगा। प्रवेश के लिये प्रत्येक संस्था में 30 सीट्स#स्थान उपलब्ध रहेंगे।

आवेदन-पत्र संबंधित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं से प्राप्त किये जा सकते हैं। आवेदक की आयु 18 से 40 वर्ष (28 अप्रैल, 2008 को) होना चाहिये। पात्रता के लिये आवेदक को हायर सेकेण्डरी उत्तीर्ण, आवेदक को अनुसूचित जाति-जनजाति का तथा मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना चाहिये। साथ ही पूर्व में आवेदक द्वारा राज्य-केन्द्र शासन द्वारा संचालित अथवा अन्य अनुदान प्राप्त कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना में नि:शुल्क प्रशिक्षण प्राप्त नहीं होना चाहिये।

चयनित छात्र-छात्राओं की सूची 26 अप्रैल को संस्था के सूचना पटल पर प्रदर्शित की जायेगी। प्रवेश की कार्यवाही 26 अप्रैल को पूर्ण की जायेगी। आवेदक को संबंधित संस्था जिसमें वह प्रवेश चाहता है, 26 अप्रैल, 2008 का अभिलेखों के मूल दस्तावेज सहित उपस्थित होना आवश्यक है, ताकि चयनित होने की दशा में प्रवेश की कार्यवाही की जा सके। 26 अप्रैल को शाम 4.00 बजे तक मेरिट सूची के अनुसार प्रवेश कार्यवाही होने के उपरांत यदि व्यवसाय में स्थान रिक्त रह जाते हैं तो नियमानुसार प्रतीक्षा सूची से उपस्थित आवेदकों को प्रवेश दिया जायेगा। प्रवेश की सूचना डाक द्वारा नहीं दी जायेगी।

अनुसूचित जाति तथा जनजाति के आवेदकों को कम्प्यूटर का नि:शुल्क प्रशिक्षण जिन औद्योगिक शिक्षण संस्थाओं में दिया जायेगा उनमें ग्वालियर, शिवपुरी, राधोगढ़, खनियादाना, भिण्ड, मुरैना, विजयपुर, दतिया, गुना, महिला ग्वालियर तथा भाण्डेर शामिल है । इनके अलावा जबलपुर, बालाघाट, सिवनी, मण्डला, छिन्दवाड़ा, बरगी, विजयराघोगढ़, नैनपुर, कटनी, शहपुरा (भिटोनी), नरसिंहपुर महिला, जबलपुर, मैहर, महिला छिन्दवाड़ा, इंदौर, देवास, रामपुरा, उज्जैन, अलीराजपुर, टोंकखुर्द, सैलाना, जोबट, अपंग इंदौर, महिला खण्डवा, मानपुर, धार, नेपानगर, झाबुआ, खण्डवा, खरगौन, कांटाफोड़, मंदसौर, नीमच, रतलाम, महिला इंदौर, धामनौद, पीथमपुर, महिला सिंघाना, नर्मदा नगर, महिला उज्जैन, महिला रतलाम, शहडोल, महिला रीवा, रीवा, सतना उमरिया, सिंगरोली, मनगवां, सीधी, अनूपपुर, आदर्श भोपाल, बैतूल, शाजापुर, हरदा, रायसेन, महिला सीहोर, विदिशा, होशंगाबाद, महिला भोपाल गैस भोपाल, मण्डीदीप, महिला बैतूल, देवरी, महिला सागर, सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, बीना, मोहन्द्रा में भी यह प्रशिक्षण दिया जायेगा । औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था नि:शक्तजन इंदौर केवल नि:शक्तजनों के लिये, उपलब्ध न होने पर अन्य आवेदको को प्रवेश दिया जायेगा।

 

 

शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी तैयारी कार्य हेतु बैठक आज

शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी तैयारी कार्य हेतु बैठक आज

ग्वालियर एक अप्रैल 08 । भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश भोपाल के निर्देशानुसार शेष रहे मतदाताओं के फोटोयुक्त मतदाता परिचय पत्र बनाने के लिये मतदाताओं की फोटोग्राफी का कार्य 5 अप्रैल 08 से प्रारंभ होगा । अवशेष मतदाताओं के फोटो परिचय पत्र तैयार करने के लिये आवश्यक बैठक 2 अप्रैल 08 को अपरान्ह 4.30 बजे मध्यप्रदेश राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संचार संस्थान सिटी सेंटर में आयोजित की गई है । बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव करेंगे । बैठक में सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों, सभी जनपद अध्यक्षों, सभी नगरपालिका, नगर पंचायतों के अध्यक्षों को बैठक में आमंत्रित किया गया है ।

 

ग्राम चराई रेंहट में 18 मार्च को घटित घटना की जांच 10 अप्रैल को

ग्राम चराई रेंहट में 18 मार्च को घटित घटना की जांच 10 अप्रैल को

मौखिक एवं लिखित साक्ष्य प्रस्तुत किये जा सकते हैं

ग्वालियर एक अप्रैल 08 । ग्राम चराई रेंहट जिला ग्वालियर में 18 मार्च 08 को वन मंडलाधिकारी सामान्य के वन अमले के साथ वन क्षेत्र के अवैद्य उत्खनन की चैकिंग के दौरान पकड़े गये दो ट्रैक्टर-ट्रौली को लेकर आक्रोषित ग्रामीणों द्वारा ए.बी. रोड़ पर किये गये चक्काजाम एवं वन अमले तथा पुलिस बल पर किये गये पथराव की घटना की प्रशासनिक जांच के लिये जिला मजिस्ट्रेट श्री राकेश श्रीवास्तव ने अपर जिला मजिस्ट्रेट श्री वेदप्रकाश को नियुक्त किया है ।

       अपर जिला मजिस्ट्रेट ने बताया है कि प्रशासनिक जांच 10 अप्रैल 08 को की जायेगी । उन्होंने सर्वसाधारण को सूचित करते हुये कहा है कि घटना के संबंध में यदि किसी व्यक्ति यां संस्था को कोई भी अभ्यावेदन, शपथपत्र या कोई भी लिखित अथवा मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहे तो वह 10 अप्रैल 08 को गोरखी ग्वालियर स्थित अपर जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय में अपर जिला मजिस्ट्रेट समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत कर सकते हैं । तिथि निकलने के बाद कोई भी आपत्ति मान्य नहीं होगी ।

 

हर जरूरतमंद को काम की गारण्टी : जिले में रोजगार गारण्टी योजना शुरू

हर जरूरतमंद को काम की गारण्टी : जिले में रोजगार गारण्टी योजना शुरू

संभागायुक्त व कलेक्टर भी शामिल हुये शुभारंभ कार्यमक्रमों में

ग्वालियर एक अप्रैल 08 । रोजी रोटी के प्रबंध के लिये अब रामचरन को जंगल की खाक नहीं छाननी पड़ेगी। जिले में आज से शुरू हुई रोजगार गारण्टी योजना से उनकी ग्राम पंचायत में भी एक पहुंचमार्ग का काम आरंभ हो गया है, जिस पर रामचरन को भी काम मिल गया है । वे अब तक जंगल से बीनकर लाई सूखी लकड़ी को बेचकर बड़ी कठिनाई से दो जून की रोटी जुटा पाते थे । जिले की ग्राम पंचायत बड़ौरी के आदिवासी बहुल मजरे लौड़रा के निवासी रामचरन ने अपनी यह दास्ता ग्वालियर संभाग के आयुक्त डॉ. कोमल सिंह को सुनाई । संभागायुक्त आज उनकी पंचायत में जिला कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव व जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा तथा स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों के साथ जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना के शुभारंभ के सिलसिले में पहुंचे थे। इन सबकी मौजूदगी में बड़ौरी ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती गौरीबाई ने नौगांव में पहुंमार्ग का शुभारंभ कर जिले में रोजगार गारण्टी योजना की शुरूआत की । इस मौके पर जिला पंचायत के सदस्य श्री लक्ष्मण सिंह भी मौजूद थे ।

       नौगांव ग्राम में रोजगार गारण्टी योजना के तहत लगभग 77 हजार रूपये की लागत से आरंभ हुये पहुंच मार्ग पर काम कर रहे श्रमिकों से संभागायुक्त डॉ. कोमल सिंह ने रू-ब-रू होकर अनौपचारिक माहौल में खुलकर चर्चा की और योजना के तहत श्रमिको को दी जाने वाली सहूलियतों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रोजगार गारण्टी योजना के तहत परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वर्ष में 100 दिन का रोजगार दिया जायेगा । साथ ही अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग तथा अन्य गरीब परिवारों की भूमि का विकास, उनकी निजी जमीन पर कुंए व तालाब आदि कार्य भी कराये जा सकते हैं ।

       संभागायुक्त डॉ. कोमल सिंह ने संबंधित अधिकारियों को हिदायत दी कि शेष जॉब कार्ड व फोटोग्राफी का काम जल्द से जल्द पूर्ण करें । उन्होंने निर्देश दिये कि सबसे पहले उन परिवारों के खाते खुलवायें जिनके सदस्य रोजगारमूलक काम में लगे हैं, जिससे उन्हें समय से भुगतान हो सके । आयुक्त ने कार्यस्थल पर श्रमिकों के लिये अच्छी कार्यदशायें निर्मित करने के भी निर्देश दिये ।

जौरासी में तालाब जीर्णोध्दार कार्य का भी लिया जायजा

       जिले में रोजगार गारण्टी योजना की शुरूआत के सिलसिले में ग्रामीण अंचल के भ्रमण पर निकले संभागायुक्त डॉ. कोमल सिंह ने जनपद पंचायत डबरा के ग्राम जौरासी में शुरू हुये रोजगारमूलक कार्य का भी जायजा लिया । करीबन 2 लाख 44 हजार रूपये की लागत से मंजूर हुये तालाब की पार मरम्मत कार्य का जायजा लेते समय से आयुक्त ने निर्देश दिये कि इस पुराने तालाब का संपूर्ण जीर्णोध्दार करें, जिससे जल संरक्षण के साथ किसानों को सिंचाई सुविधा भी मिल सके ।

जिले में आज विभिन्न ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर ग्राम सभायें भी हुईं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण रोजगार गारण्टी स्कीम के तहत रोजगारमूलक कार्यों की शुरूआत की ।

 

विश्व आटिज्म दिवस पर विशेष आलेख आटिज्म : शीघ्र पहचान व उपचार ही निदान है

विश्व आटिज्म दिवस

(2 अप्रेल 08 पर विशेष)

आटिज्म : शीघ्र पहचान व उपचार ही निदान है

श्रीमती राजबाला अरोड़ा

क्या आपने ऐसे व्यक्ति या बच्चे को देखा है जो प्रत्यक्ष रूप से तो सामान्य दिखता है लेकिन उससे बात करने पर वह न तो किसी बात का जवाब देता है व ना ही ऑंख से ऑंख मिलाकर बात करता है और न ही प्रश्न का उत्तर देता है अपितु उसी प्रश्न को दोहराता है । इस प्रकार की समस्या को आदिज्म कहते हैं ।

आटिज्म अर्थात स्वपरायणता या यूँ कहें स्वत: प्रेम, नाम से ही जाहिर है ऐसा व्यक्ति अपने आप में केन्द्रित रहता है । आटिज्म को सबसे पहले सन् 1943 में कानर ने वार्णित किया था । आटिज्म स्नायु विकास (न्यूरो डेवलेपमेंट) में आई विकृति है । यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक व्यवहारिक विकृति (डिसआर्डर) है  । ऐसी अवस्थाओं के लक्षण या तो जन्म से या बच्चों के सामान्य विकास की अवधि के बाद दिखाई देते हैं । आदिज्म के लक्षणों के कारणों का अभी तक कोई वैज्ञानिक आधार स्पष्ट नहीं है परन्तु नवीन खोजों व शोधों के अनुसार इन अवस्थाओं के उद्भवों का कारण जेनेटिक तत्व है ।

यह पाया गया है कि लड़कियों की अपेक्षा लड़के आटिज्म से अधिक प्रभावित होते हैं । इनका अनुपात 1:4 है । अर्थात प्रभावितों में 80 प्रतिशत लड़के हैं । भारत में अब तक 4 करोड़ आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर से ग्रसित बच्चों को चिन्हित किया जा चुका है ।

प्रत्यक्षतौर पर शारीरिक विकलांगता के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं । इसलिये इस प्रकार की विकृति को अदृश्य विकृति भी कह सकते हैं । ऐसे बच्चों की शारीरिक बनावट सामान्य बच्चों जैसी होती है , फिर भी हम उनके व्यवहार के आधार पर उन्हें पहचान सकते हैं ।

पहचाने आटिस्टिक व्यक्ति को

1-     भाषा के आधार –

1          भाषा को समझ्ना व उनका प्रयोग करने में नाकाम भाषा अस्पष्ट ।

2          शब्दों, गानों या कविताओं को बार-बार दोहराना ।

3          संवादहीनता की कमी ।

2-    सामाजिक आधार पर ।

1          ऑंख से ऑंख मिलाकर बात नहीं करते ।

2          दोस्त बनाने में उदासीन

3          अकेले खेलना पसंद । अपनी उम्र के बच्चों के साथ खेलने के बजाय अपने से बड़े या अपने से छोटों के साथ खेलना पसंद करते हैं ।

3- असामान्य व्यवहार के आधार पर ।

1          कोई बदलाव पसंद नहीं करते , मसलन यदि टीवी या उसकी कोई वस्तु निर्धारित जगह से हटाकर दूसरी जगह रख दें तो उत्तेजित हो जाते हैं ।

2          तेज आवाज जैसे कुकर की सीटी की आवाज, जेट या हवई जहाज की आवाज पर अपने कान बंद कर लेते हैं  या चिल्लाने लगते हैं ।

3          अकारण उत्तेजित हो जाते हैं ।

4         गर्म , सर्द या दर्द के एहसास की कमी होती है ।

5         घूमती वस्तु जैसे लट्टू , पंखा, पहिया के प्रति आकर्षित होते हैं ।

6          अकारण हंसना, ताली बजाना या कूदना ।

        

       स्वपरायणता अर्थात आटिज्म से प्रभावित बच्चों की पहचान जितनी जल्दी हो सके उतनी ही जल्दी उसे सही उपचार मिलने की संभावना रहती है । जिसके परिणामस्वरूप बच्चा जल्दी ही अन्य सामान्य बच्चों की तरह जीवन की मुख्यधारा से जुड़ सकता है । दरअसल 18 माह की अविधि से ही आटिज्म प्रभावितों को पहचाना जा सकता है और तभी से उपचार की पहल भी की जा सकती है । आटिज्म की पहचान में विलम्ब अथवा उपचार में देरी प्रभावितों को मुख्याधारा में लाने का कार्य दुरूह बना देती है ।

       स्वत: प्रेम या स्वपरायणता अर्थात आटिज्म की रोकथाम मुश्किल है क्योंकि इसके कारण अभी तक अस्पष्ट हैं । शीघ्र पहचान, शीघ्र उपचार व स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम ही ऐसे बच्चों के लिये प्रभावी इलाज है ।

       यदि आप के आसपास या परिवार में ऐसा कोई व्यक्ति अथवा बच्चा दिखाई दे तो उसे आप शिशुरोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक, मनोविज्ञानी, विशेष बच्चों की देखभाल करने वाले प्रोफेशनल्स या ऐसी संस्थाएं मसलन ग्वालियर में रोशनीरामकृष्ण आश्रम , स्नेहालय, एहसास जैसी संस्थाओं से भी उपचार अथवा मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं 

 

श्रीमती राजबाला अरोड़ा

 एम.एस.सी, बी.जे.सी.

स्पेशल एजूकेटर

 स्वयंसेवी कार्यकर्ता

रोशनी, रामकृष्ण आश्रम,ग्वलियर

 

 

 

 

खाद्यान्न व शक्कर का आवंटन जारी

खाद्यान्न व शक्कर का आवंटन जारी

ग्वालियर 31 मार्च 08 । सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अप्रैल माह में वितरित किये जाने वाले खाद्यान्न एवं शक्कर का आवंटन जारी कर दिया गया है ।

       जिला आपूर्ति नियंत्रक ने बताया कि अप्रैल माह के लिये आवंटित गेहूं में से बी.पी.एल. कार्डधारियों को लगभग 798 मैट्रिक टन, अन्त्योदय अन्न योजना के कार्डधारियों को करीबन 991 मैट्रिक टन तथा सामान्य कार्डधारियों को एक हजार 567 मैट्रिक टन गेहूं आवंटित किया गया है । इसी प्रकार चावल के कोटे में से बी.पी.एल. कार्डधारियों को करीबन 342 मैट्रिक टन, अन्त्योदय कार्डधारियों को करीबन 29 मैट्रिक टन तथा सामान्य कार्डधारियों के लिये 248 मैट्रिक टन से अधिक चावल का आवंटन जारी किया गया है । सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अप्रैल माह के लिये 205 मैट्रिक टन से अधिक शक्कर का आवंटन भी जारी कर दिया गया है ।

 

« Older entries