पोषण आहार वितरण के लिये संस्थाओं के चयन में पूरी पारदर्शिता बरतें – कलेक्टर

पोषण आहार वितरण के लिये संस्थाओं के चयन में पूरी पारदर्शिता बरतें – कलेक्टर

ग्वालियर 2 अप्रैल 08 । आंगनबाड़ी केन्द्रों के पोषण आहार वितरण के लिये संस्थाओं के चयन में पूरी पारदर्शिता बरती जाये और समस्त प्रक्रियाओं का पालन भी किया जाये । यह निर्देश जिला कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण आहार वितरण के संबंध में जारी किये गये नवीन दिशा-निर्देशों को लागू करने के सिलसिले में बुलाई गई बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी को दिये । राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संचार संस्थान में सम्पन्न हुई बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती सीमा शर्मा, कोषालय अधिकारी कलेक्ट्रेट श्रीमती रंजना शुक्ला तथा जिले की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं के परियोजना अधिकारी मौजूद थे ।

       उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को विभागीय कामकाज के लिये पूरा समय देने के मकसद से उन्हें पोषण आहार वितरण से मुक्त करने का निर्णय लिया है । अब यह जिम्मेदारी मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम की भांति स्व-सहायता समूह व अन्य संस्थाओं को सौंपने का निर्णय शासन ने लिया है ।

       जिला कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण आहार वितरण के लिये विज्ञापन जारी कर संस्थाओं से आवेदन लेकर पात्र संस्थाओं को यह जिम्मेदारी सौंपे । इस काम में महिला स्व-सहायता समूहों को प्राथमिकता देने की बात उन्होंने कही । कलेक्टर ने कहा कि शहर व ग्रामीण अंचल के लिये स्थानीय परिस्थितियों व बच्चों की रूचि को ध्यान में रखकर पोषण आहार का मीनू तय करें । साथ ही शहर व ग्रामीण अंचल के लिये पृथक-पृथक संस्थायें तय की जायें, जिससे व्यवस्थित ढंग से पोषण आहार वितरित हो सके ।

       जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा ने कहा आंगनबाड़ी केन्द्रों में दर्ज बच्चों व गर्भवती धात्री माताओं की उपस्थिति पर खास ध्यान दें । नियमित पोषण वितरण के साथ-साथ अन्य विभागीय गतिविधियाँं भी व्यवस्थित ढंग से संचालित हों ।

 

फोटोग्राफी से शेष रहे 85 हजार 120 मतदाताओं की फोटोग्राफी का कार्य 5 अप्रैल से

फोटोग्राफी से शेष रहे 85 हजार 120 मतदाताओं की फोटोग्राफी का कार्य 5 अप्रैल से

जनप्रतिनिधियों से फोटोग्राफी कार्य में सहयोग करने की अपील

ग्वालियर 2 अप्रैल 08 । मतदाता फोटोग्राफी से शेष रहे 85 हजार 120 मतदाताओं के मतदाता फोटो परिचय पत्र बनाने के लिये मतदान केन्द्रों पर फोटोग्राफी का कार्य 5 अप्रैल 08 से प्रारंभ कराया जायेगा जो कि 15 मई 08 तक चलेगा । यह जानकारी आज मध्यप्रदेश राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संचार संस्थान सिटी सेंटर में शेष रहे मतदाताओं के फोटो परिचय पत्र तैयार कराने के लिये आयोजित मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों की बैठक में दी गई । बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव ने की । श्री श्रीवास्तव ने उपस्थित सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों से अपील करते हुये कहा कि राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य में अपनी विशेष भूमिका को निभाते हुये अपने-अपने क्षेत्रों में फोटोग्राफी से शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी करायें, ताकि शत-प्रतिशत मतदाताओं के फोटो परिचय पत्र बन सकें । बैठक में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी श्री वेदप्रकाश, उपजिला निर्वाचन अधिकारी श्री शरद श्रोत्रिय सहित मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के पदाधिकारी, ग्वालियर, डबरा और भितरवार के अनुविभागीय दण्डाधिकारी उपस्थित थे ।

       कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 9 लाख 16 हजार 727 मतदाताओं में से 8 लाख 31 हजार 607 मतदाताओं के फोटोयुक्त मतदाता परिचय पत्र बनाये जा चुके हैं । 85 हजार 120 मतदाता ऐसे हैं जिनकी फोटोग्राफी होना शेष है । कलेक्टर ने कहा कि फोटोग्राफी कार्य में जनप्रतिनिधियों का सहयोग बहुत जरूरी है । उन्होंने बताया कि विधानसभा क्रमांक 15 ग्वालियर से 26 हजार 784 मतदाताओं की फोटोग्राफी होना है । इसके लिये 38 फोटोग्राफी केन्द्र निर्धारित किये गये हैं । इसी तरह 16 लश्कर-पूर्व के 6 हजार 439 मतदाताओं के लिये 15 फोटोग्राफी केन्द्र, 17 लश्कर-पश्चिम के 8 हजार 636 मतदाताओं के लिये 22 फोटोग्राफी केन्द्र, 18- मुरार विधानसभा क्षेत्र के 18 हजार 935 मतदाताओं के लिये 84 फोटोग्राफी केन्द्र, 19 गिर्द क्षेत्र के 14 हजार 423 मतदाताओं के लिये 83 फोटोग्राफी केन्द्र और 20 डबरा क्षेत्र के 9 हजार 903 मतदातओं के लिये 38 फोटोग्राफी केन्द्र निर्धारित किये गये हैं । कलेक्टर ने बताया कि मतदाताओं की फोटोग्राफी किये जाने से पूर्व मतदाताओं को सूचना पर्ची के माध्यम से विधिवत सूचना बी.एल.ओ. के द्वारा की जायेगी । फोटोग्राफी स्थल पर मतदाताओं से मतदाता सूची की प्रविष्टि अनुसार वितरण फार्म 001 में अंकित कराया जाकर उनकी फोटो खीची जायेंगी । कलेक्टर ने कहा कि यदि किसी मतदाता के फोटो परिचय पत्र की प्रविष्टि में कोई त्रुटी है अथवा मतदाता का फोटो गलत है तो ऐसे मतदाताओं से प्रारूप में संशोधन प्रविष्टि की जानकारी ली जा रही है । जिसके आधार पर मतदाता सूची में संशोधन किया जाकर पुन: दूसरा फोटो परिचय पत्र तैयार कराया जाकर प्रदाय किया जायेगा । कलेक्टर ने कहा कि एक जनवरी 08 की स्थिति में 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे मतदाता भी निर्धारित फार्म भरकर अपने मतदाता परिचय पत्र बनवा सकते हैं । इसी तरह जिन मतदाताओं के फोटो परिचय पत्र खो गये हैं अथवा नष्ट हो गये हैं वे भी निर्धारित शुल्क जमा कर फोटो परिचय पत्र बनवा सकते हैं । कलेक्टर ने 5 अप्रैल से फोटोग्राफी होने वाले कार्य का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, र्सावजनिक स्थलों पर होर्डिंग लगाने एवं पार्षदों के माध्यम से जन-जन तक जानकारी भिजवाने के निर्देश दिये ।

       कलेक्टर ने कहा कि आयोग की ओर से नई परिसीमन के अनुसार मतदान केन्द्रों के युक्तियुक्तकरण का कार्य कराया जाना है । इसके अनुसार 1500 मतदाताओं के स्थान पर शहरी क्षेत्र में 1200 एवं ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार मतदाताओं पर एक मतदान केन्द्र बनाया जाना है । जिससे मतदान केन्द्रों की संख्या में वृध्दि होना निश्चित है । इसके लिये सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे मतदान केन्द्रों पर परिवर्तन एवं संशोधन के प्रस्ताव अगले 5 दिवस में भिजवायें ।

       बैठक में तहसीलदारों को मतदान केन्द्रों का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिये गये । जनप्रतिनिधियों द्वारा मतदान केन्द्रों की विसंगतियों को दूर करने पर भी चर्चा की गई

19 ग्रामों में और पेयजल परिवहन की अनुमति

19 ग्रामों में और पेयजल परिवहन की अनुमति

ग्वालियर 2 अप्रैल 08 । सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल समस्या के निराकरण के लिये जिले की तीन जनपद पंचायतों के 19 ग्रामों में पेयजल परिवहन करने की अनुमति जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा ने दी है ।

       जिन 19 ग्रामों में और पेयजल परिवहन करने की अनुमति दी गई है उनमें डबरा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत इटायल के ग्राम इटायल में एक अप्रैल से, ग्राम पंचायत बारौल के ग्राम मठार्रा में 5 अप्रैल से, ग्राम पंचायत छपरा के ग्राम गतारी में 15 अप्रैल से पेयजल परिवहन करने की अनुमति दी गई है । इसी प्रकार मुरार जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बेरजा के ग्राम बेरजा में एक अप्रैल से, मुरार जनपद पंचायत के ग्राम पारसेन के मजरा खेरसिंह का पुरा, बलवंत सिंह का पुरा, मनफूल सिंह का पुरा कांग्रेस बाबा का पुरा में एक अप्रैल 08 से पेयजल परिवहन की अनुमति दी गई है ।

       जनपद पंचायत घाटीगांव (बरई) की ग्राम पंचायत पाटई के ग्राम बीच का पुरा, ग्राम पंचायत बडकागांव के ग्राम चंगौरा में, ग्राम पंचायत सभराई के ग्राम सुभाषपुरा, आरौन ग्राम पंचायत के ग्राम किशनपुर, भगवानपुर, घाटीगांव ग्राम पंचायत के ग्राम नयापुरा, पाटई ग्राम पंचायत के ग्राम नजरपुरा, ग्राम पंचायत निरावली के ग्राम गंजीपुरा, ग्राम पंचायत तिलधना के ग्राम मंगूपुर, ग्राम पंचायत मालनपुर के ग्राम मालनपुर और ग्राम पंचायत शंकरपुर के ग्राम नाथो का पुरा (शंकरपुर) में एक अप्रैल से पेयजल परिवहन की अनुमति दी गई है ।

       जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा ने संबंधित जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि पेयजल व्यवस्था को शुरू कर जानकारी निर्धारित प्रपत्र में जिला पंचायत के सूखा राहत प्रकोष्ठ में जमा कराये । तभी पेयजल परिवहन राशि का भुगतान किया जायेगा । ग्रामीण क्षेत्र के पेयजल परिवहन के लिये कलेक्टर द्वारा वर्ष 2007-08 के जारी आदेशानुसार निर्धारित दरों से लागू होगा । जिले में अभी तक 65 पेयजल समस्या मूलक ग्रामों में पेयजल परिवहन की अनुमति दी गई है ।

 

लोगों को विधिक जानकारियां देने के लिये हस्तिनापुर में विधिक साक्षरता शिविर सम्पन्न

लोगों को विधिक जानकारियां देने के लिये हस्तिनापुर में विधिक साक्षरता शिविर सम्पन्न

ग्वालियर 2 अप्रैल 08 । ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विधिक जानकारी देने के लिये विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन जारी है । शिविर की श्रंखला में गत दिवस ग्राम हस्तिनापुर में शिविर सम्पन्न हुआ ।

       जिला सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एल.एच. थधानी के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री अरूण प्रधान द्वारा बाल विवाह अवरोध अधिनियम, ध्रूमपान निषेध अधिनियम, भरण पोषण, दाम्पत्य जीवन पुर्नस्थापन आदि कानूनों की विस्तार से जानकारी दी गई । श्री प्रधान ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला । मौके पर कन्जूमर एण्ड सिविल राइट एसोसिएशन की अध्यक्ष सुश्री ममता सिंह ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की जानकारी से अवगत कराया । शिविर में एडवोकेट सर्वश्री काशीराम कुशवाह, के.एन. उपमन्यु, आर.के भट्ट, विश्वनाथ सिंह भदौरिया ने भी विभिन्न कानूनों की जानकारी से लोगों को जागरूक किया । अंत में आभार सरपंच श्री राकेश लहारिया ने किया ।

 

मौसमी बीमारियों की रोकथाम हेतु जिलास्तरीय कम्बेट टीमें गठित

मौसमी बीमारियों की रोकथाम हेतु जिलास्तरीय कम्बेट टीमें गठित

ग्वालियर 2 अप्रैल 08 । मौसमी बीमारियों के त्वरित उपचार एवं रोकथाम की दृष्टि से जिला स्तरीय काम्बेट टीमें गठित की गई है । यह टीमें उनके क्षेत्रान्तर्गत मौसमी बीमारियों की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों के साथ पहुंचकर रोगियों का उपचार करेंगी ।

       मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. अर्चना शिंगवेकर ने बताया कि जिले में मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिये पांच जिलास्तरीय काम्बेट टीमें गठित की गई है । प्रत्येक टीम में एक चिकित्सक एवं पेरामेडिकल के तीन सदस्यों को शामिल किया गया है । उन्होंने बताया कि डबरा एवं भितरवार विकासखंड हेतु गठित टीम के प्रभारी सिविल डिसपेंसरी जनकगंज के चिकित्सा अधिकारी डा आर के मिश्रा रहेंगें । इसी प्रकार विकासखंड घाटीगांव, मुरार एवं भितरवार हेतु गठित टीम में शासकीय चिकित्सालय फालका बाजार के प्रभारी डा समीर गोखले रहेंगें । जबकि मुरार क्षेत्र हेतु गठित टीम के प्रभारी सिविल हास्पीटल मुरार के डा अनूप प्रधान, ग्वालियर क्षेत्र हेतु गठित टीम के प्रभारी सिविल हास्पीटल ग्वालियर के डा आर एन गुप्ता, लश्कर क्षेत्र हेतु गठित काम्बेट टीम के प्रभारी डा. राकेश चतुर्वेदी को नियुक्त किया गया है । उन्होंने सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि बीमारी की सूचना मिलने पर तत्काल संबंधित टीम के प्रभारी को सूचना दें । सूचना प्राप्त होते ही काम्बेट टीम के प्रभारी दल के सदस्यों के साथ प्रभावित क्षेत्र में बीमारी की रोकथाम एवं उपचार की तत्काल व्यवस्था करेंगें । कम्बेट टीमों को आवश्यक औषधियां संबंधित खंड चिकित्सा अधिकारी एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी ।

 

मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में मिलेगा गरीब परिवारों को 20 किलो खाद्यान्न

मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में मिलेगा गरीब परिवारों को 20 किलो खाद्यान्न

ग्वालियर 2 अप्रैल 08। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को सस्ते दामों पर 20 किलो खाद्यान्न उपलब्ध कराने हेतु एक अप्रैल से मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना शुरू की गई है । इस योजना में अन्त्योदय अन्न योजना में शेष रहे गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को खाद्यान्न  के रूप में गेहूं 3 रूपये प्रति किलो के मान से एवं चावल 4 रूपये 50 पैसे प्रति किलो की मान से प्रदाय किया जायेगा ।

       कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव ने अधिकारियों को योजना का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिये । जिससे योजना का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद एवं पात्र परिवारों को मिल सके । कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को उचित मूल्य दुकानों आदि पर योजना से संबंधित बेनर एवं पोस्टर भी लगाने के निर्देश दिये है ।

       जिला आपूर्ति नियंत्रक श्रीमती ज्योति शाह नरवरिया ने बताया कि अन्नपूर्णा योजना में जिले को 729 मेट्रिक टन का आवंटन प्रदान किया गया है । जिसमें 510 मेट्रिक टन गेहूं तथा 219 मेट्रिक टन चावल शामिल हैं । उन्होंने बताया कि योजना के तहत नगर निगम ग्वालियर के लिये 798.14 क्विंटल गेहूं तथा 342 क्विंटल चावल, विकासखंड मुरार के लिये गेहूं 100 क्विंटल गेहूं तथा 432.84 क्विंटल चावल, घाटीगांव के लिये 701.96 क्विंटल गेहूं तथा 300.84 क्विंटल चावल, डबरा के लिये 1703.1 क्विंटल गेहूं और 729.9 क्विंटल चावल तथा भितरवार विकासखंड के लिये 891.38 क्विंटल गेहूं एवं 382.02 क्विंटल चावल शामिल है ।

 

ग्वालियर जिले में समर्थन मूल्य पर 74 मैट्रिक टन गेहूं का उपार्जन 51 केन्द्र स्थापित

ग्वालियर जिले में समर्थन मूल्य पर 74 मैट्रिक टन गेहूं का उपार्जन 51 केन्द्र स्थापित

ग्वालियर 2 अप्रैल 08 । शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य जिले में शुरू हो गया है । रबी विपणन वर्ष 2008-09 में जिले में अभी तक 74 मैट्रिक टन अर्थात 740 क्विंटल गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है ।

 

       कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव ने शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर उपार्जन हेतु स्थापित किये गये सभी 51 केन्द्रों पर कांटा, बांट, तराजू, बैनर, पैम्पलेट एवं खाली वरदाना सहित पेयजल छाया जैसी मूलभूत सुविधायें भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने की संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये हैं।

       जिला आपूर्ति नियंत्रक श्रीमती ज्योति शाह नरवारिया ने बताया कि जिले में स्थापित किये गये 51 केन्द्रों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर अभी तक 74 मैट्रिक टन अर्थात 740 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है । श्रीमती नरवारिया ने बताया कि जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी हेतु नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा 21, विपणन संघ द्वारा 18, नाफेड द्वारा 1, भारतीय खाद्य निगम द्वारा 11 केन्द्रों के माध्यमों से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है । उन्होंने बताया कि सभी खरीदी केन्द्रों को 10 लाख रूपये की क्रेडिट लिमिट स्वीकृत की है । जिले को रबी विपणन वर्ष 2008-09 हेतु 2 हजार मैट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । जिसके विपरीत अभी तक 74 मैट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है । जिसमें नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा सेवा सहकारी संस्था हरसी के माध्यम से 33 मैट्रिक टन, सेवा सहकारी संस्था जगनापुरा के माध्यम से लक्ष्मीगंज मंडी में 2.3 मैट्रिक टन, भारतीय खाद्य निगम द्वारा डबरा मंडी में 36 मैट्रिक टन व सेवा सहकारी समिति खडवई के माध्यम से 2.7 मैट्रिक टन गेहूं शामिल है ।

       कलेक्टर ने उपार्जन केन्द्रों के आकस्मिक निरीक्षण हेतु खाद्य, सहकारिता एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अधिकारियों का एक जांच दल गठित किया गया है। जो समय-समय पर इन केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे । गेहूं उर्पाजन हेतु नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा 42 हजार वारदाने व मार्कफेड द्वारा दो हजार वारदाने की व्यवस्था की गई है । जबकि भारतीय खाद्य निगम नाफेड के पास भी पर्याप्त मात्रा में वारदाने की व्यवस्था की गई है ।

 

वन अधिकार अधिनियम की जानकारी लोगों तक पहुंचाने मीडिया आगे आये -श्री रावत

वन अधिकार अधिनियम की जानकारी लोगों तक पहुंचाने मीडिया आगे आये -श्री रावत

वन अधिकारों की मान्यता विषय पर मीडिया वर्कशॉप संपन्न

 

ग्वालियर 2 अप्रैल 08 । जंगल पर आश्रित लोग जंगल के दुश्मन नहीं अपितु दोस्त हैं । जंगल की रक्षा उनका धर्म है और उनके बिना जंगल की रक्षा असंभव है । इन्ही सब पहलुओं पर विचार कर सरकार ने अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वनवासियों के वन अधिकारों की मान्यता देने के लिये नया अधिनियम बनाया है। इस अधिनियम की सार्थकता तभी सिध्द होगी जब इसके बारे में उन लोगों को पूरी जानकारी होगी जिनके लिये यह अधिनियम बना है और जिन लोगों को इसे लागू करना है। यह सब अधिनियम के प्रचार प्रसार से ही संभव होगा और यह काम मीडिया बखूबी कर सकता है । उक्त आशय के विचार आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव श्री ओ.पी.रावत ने आज ग्वालियर में वनवासियों की मान्यता विषय पर आयोजित मीडिया कार्यशाला में व्यक्त किये । कार्यशाला में संभाग आयुक्त डा. कोमल सिंह, वन संरक्षक श्री सिन्हा, जिला कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव, अपर संचालक जनसंपर्क श्री आर एम पी सिंह, वनमंडलाधिकारी श्री पुरूषोत्तम धीमान, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा व संयुक्त संचालक जनसंपर्क श्री सुभाष अरोरा सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे । आचरण के संपादक श्री रामविद्रोही, नवभारत के संपादक डा. सुरेश सम्राट, नई दुनिया के संपाक श्री राकेश पाठक, वरिष्ठ पत्रकार डा. केशव पांडेय व श्री राकेश अचल सहित प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वरिष्ठ पत्रकारों ने इस कार्यशाला में भाग लिया ।

       प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण विभाग श्री रावत ने कहा कि अनुसूचित जाति और अन्य परम्परागत वननिवासी (वन अधिकारो की मान्यता) अधिनियम 2006 एवं नियम 2007 की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक सही रूप में पहुँचाने में सम्प्रेषण माध्यमों (प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं । उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का प्रमुख उध्देश्य वनवासियों के सहयोग से जंगलों का संरक्षण करना है । अधिनियम इस सोच पर आधारित है कि वनवासियों को वनों की आमदनी का हिस्सा देकर बेहतर ढंग से वन संरक्षित किये जा सकते हैं ।

       श्री रावत ने औपनिवेशिक काल में सन् 1864 में बने पहले फॉरेस्ट एक्ट, 1978 के दूसरे फॉरेस्ट एक्ट एवं 1927 में बने भारतीय वन अधिनियम का उल्लेख करते हुये कहा कि इन अधिनियमों में वनों की रक्षा के लिये किये गये तमाम कानूनी प्रावधानों के बावजूद वनों का रकबा लगातार घटता रहा । सरकार का मानना है कि इन अधिनियमों में वनवासियों के हितों की लगातार उपेक्षा होने से वन साफ होते जा रहे हैं । इसलिये वनों के सरंक्षण के लिये वनवासियों का संरक्षण भी आवश्यक है । इसी बात को ध्यान में रखकर नया वन अधिनिकार अधिनियम बनाया गया है । प्रमुख सचिव ने इस अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से अधिनियम के व्यापक प्रचार-प्रसार का आव्हान किया ।

 

       ग्वालियर संभाग के आयुक्त डा. कोमल सिंह ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम का प्रमुख मकसद वंचितों को अधिकार व मान्यता दिलाना है । इसे लागू करने के लिये स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विकेन्द्रीकृत व्यवस्था की गई है, जिसमें ग्रामसभा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है । अधिनियम में सभी वनवासियों को लाभ देने का प्रावधान है अर्थात इसमें जाति, धर्म का कोई बंधन नहीं है । उन्होंने अधिनियम की जवाबदेही के लिये उपयोगी सुझाव भी दिये।

उल्लेखनीय है कि वन में निवास करने वाली ऐसी अनुसूचित जनजातियों और परम्परागत वन निवासियों के जो वनों में पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं किन्तु उनके अधिकारों को अभिलिखित नहीं किया जा सका है । उनके वन अधिकारों और वन भूमि में अधिभाग को मान्यता देने के लिये अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम को जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारतवर्ष में लागू किया गया है । अधिनियम के उद्देश्यों में वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों के मान्यता प्राप्त अधिकारों में, दीर्घकालीन उपयोग के लिये जिम्मेदारी और प्राधिकार शामिल हैं। जैव विविधता का संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन को बनाये रखना और वन निवासियों की जीविका तथा खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करते समय वनों की संरक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करना भी सम्मिलित है । औपनिवेशिक काल के दौरान तथा स्वतंत्र भारत में राज्य वनों को समेकित करते समय उनकी पैतृक भूमि पर वन अधिकारों और उनके निवास को पर्याप्त रूप से मान्यता नहीं दी गई थी । जिसके परिणामस्वरूप वन में निवास करने वाली उन अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों के प्रति ऐतिहासिक अन्याय हुआ । पारिस्थितिकी प्रणाली को बचाने और बनाये रखने के लिये अभिन्न अंग है । इस अन्याय को समाप्त करने की दृष्टि से अब यह आवश्यक हो गया है कि वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों की, जिसके अंतर्गत वे जनजातियां भी है, जिन्हें राज्य के विकास से उत्पन्न हस्तक्षेप के कारण अपने निवास दूसरी जगह बनाने के लिये मजबूर किया गया था। उनकी लंबे समय से चली आ रही भूमि संबंधी असुरक्षा तथा वनों में पहुंच के अधिकारों पर भी ध्यान दिया जाये । नया वन अधिनियम इन विसंगतियों को दूर करने की दिशा में किया गया सार्थक प्रयास है ।

पॉवर पाइंट प्रजेण्टेशन के जरिये दी गई अधिनियम की जानकारी

कार्यशाला में आदिम जाति कल्याण विभाग के अपर संचालक श्री ए के उपाध्याय ने पॉवर पाइंट प्रजेण्टेशन के जरिए अधिनियम के बनुयादी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला । उन्होंने वन अधिकार व प्रावधान, वन समितियों, ग्राम सभा, उपखण्डस्तरीय समिति, जिला स्तरीय व राज्य स्तरीय समिति के कार्य, वन अधिकारों के निर्धारण के लिये साक्ष्य, ग्राम सभा की संरचना, काम काज की प्रक्रिया, विवादों का निपटान आदि के बारे में विस्तार से बताया ।