परिसीमन का साया : बिलबिलाते नेता, खिलखिलाती जनता और चोर लुटेरों की पौ बारह

परिसीमन का साया : बिलबिलाते नेता, खिलखिलाती जनता और चोर लुटेरों की पौ बारह

नरेन्‍द्र सिंह तोमर आनन्‍द

करवट 4 श्रंखलाबद्ध आलेख

पिछले अंक से जारी …

यूं तो यह हर चुनाव के पहले ही होता है, लेकिन अबकी बार कुछ खास इसलिये है कि नये परिसीमन की छांव तले कुछ नये राजनीतिक ठीये बनेंगें, कुछ टूटेंगें । राजनेताओं और राजनीतिक दलों के बीच मारामार चालू हो गयी है ,जो कुछ वक्‍त पहले तक अन्‍दरूनी थी अब लगभग खुलकर सामने आ गयी है ।

कुछ राजनीतिक दलों ने तो अपने प्रत्‍याशीयों के नामों की विधिवत अखबारों में खबर छपवाकर घोषणा कर दी है । बहुजन समाज पार्टी के मुरैना जिला में 4 और म.प्र. में 64 प्रत्‍याशी घोषित हो चुके हैं, बसपा सुप्रीमो की नजर में हैं या नहीं लेकिन अखबारों में घोषित हो चुके हैं । इस प्रकार की अति पूर्व घोषणा के दूरगामी व असल परिणाम क्‍या होंगें ये वक्‍त बतायेगा 1 लेकिन घोषित प्रत्‍याशी अपने चुनाव प्रचार में या युद्धाभ्‍यास में जुट गये हैं इसमें संशय नहीं, मुरैना शहर के बदले हालात तो लगभग यही कहते हैं ।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी जो कि पिछले नवम्‍बर के महीने से अपने राजनीतिक होमवर्क में जुटी थी, जनवरी के महीने से ही जमीनी कार्य करना चालू कर चुकी थी और मार्च तक नये परिसीमन के फॉर्म में आते ही अपनी कार्यवाही की गति काफी तेज कर दी है ।

कम से कम यह दाद तो देनी ही पड़ेगी कि भारतीय जनता पार्टी का आंतरिक एवं जमीनी नेटवर्क न केवल बहुत सशक्‍त व सक्रिय है बल्कि चार साल लगभग अदृश्‍य रहने के बाद अचानक पिगत तीन माह के भीतर ही अपनी सारी मशीनरी की न केवल ओवरहालिंग कर डाली बल्कि उसे तुरन्‍त त्‍वरित व सक्रिय भी कर दिया । इतनी फटाफट आटो मशीन शायद राजनीतिक तौर पर मैंने कभी नहीं देखी ।

भाजपा का राजनैतिक मार्केटिंग का फार्मूला का बेसिक कन्‍सेप्‍ट तो वही पुराना है लेकिन जिस नये तरीके से इसे अबकी बार प्रस्‍तुत किया जा रहा है, यदि चुनाव तक इस सामूहिक सम्‍मोहन को भाजपा कायम रख पाने में कामयाब होती है, तो शायद चुनावी परिणाम एकदम अनुमान के विपरीत होंगें । म.प्र. के हर आदमी को जिस जादू के साथ बिजी और मगन (सम्‍मोहित) कर दिया गया है, यह आश्‍चर्यजनक है । कुल मिला कर संक्षेप में कहें तो इतना पर्याप्‍त होगा कि इतिहास लिखे नहीं बनाये जाते हैं

प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की हालत इस समय सबसे ज्‍यादा खराब है, वह अभी तैयारीयों की रणनीति ही बनाने की सोच रही है, जबकि उसकी प्रमुख विरोधी पार्टी अब तक अपनी योजनाओं व कार्यक्रमों को न केवल प्रारंभ कर चुकी है अपितु मूर्त रूप दे चुकी है । दो माह पहले तक जो स्‍वत: प्रदेश सरकार के बदले जाने के आसार बन रहे थे, लगता है कि हवा का रूख पलटा खा गया है । एक तो कांग्रेस की ढुलमुल व लगभग निष्क्रिय जैसी स्थिति, दूसरे करिश्‍माई नेताओं को पीछे धकेल कर नेपथ्‍य में पहुँचाना, तीसरे प्रदेश पदाधिकारीयों को नई बोतल में पुरानी शराब की तरह ठूंसना और चौथे नये पदाधिकारी (नये चेहरे) वही लोग हैं, जो पहले से ही चर्चाओं के केन्‍द्र रहे हैं, और खुद के बलबूते पर या पदीय बलबूतों के आधार पर अपना नाम चमका कर आगे आये हैं, पांचवा अन्‍य जो महत्‍वपूर्ण कारण है वह कांग्रेस के पास सैनिकों का अभाव है और उसका हर कार्यकर्ता सेनापति की भूमिका में नजर आता है । कांग्रेस को जब तक यह समझ में आयेगा कि चुनावी समर सैनिकों के सहारे लड़े जाते हैं न कि सेनापतियों के सहारे तब तक शायद काफी देर हो चुकी होगी ।

जहॉं अभी तक कांगेस न अपनी रणनीति साफ कर पायी है वही उसके प्रत्‍याशी कौन होंगें यह भी असमंजस की स्थिति है । अब किस विधानसभा की तैयारी कौन करे यह प्रश्‍न अधर में है । अक्‍सर होता यह है कि निर्वाचन नामांकन जमा करने की तिथि गुजर जाने के बाद कांग्रेस अपने प्रत्‍याशी घोषित करती है, तब तक कांगेस के नाम पर दस बीस लोग अपना एक ही सीट के लिये फार्म भर चुके होते हैं, और बाद में नाम घोषित हो जाने के बाद बकाया लोग अपना फार्म वापस ले लेते हैं, अब वे इसे हाईकमान का आदेश कह कर हवा में भले ही उड़ायें लेकिन जो चार छ दिन रात को सपने में विधायकी के जलवों का आनन्‍द लेते हैं वह कसक उन्‍हें अपनी ही पार्टी के प्रत्‍याशी के अन्‍दरूनी विरोध के लिये मजबूर कर देती है, और वे ऐसा करते हैं, दूसरे उनके ही घोषित प्रत्‍याशी को न तो चुनाव की तैयारी के लिये और न प्रचार के लिये ही समुचित वक्‍त मिल पाता है, एवं न मतदाता ही योग्‍य अयोग्‍य उचित अनुचित प्रत्‍याशी की परख पहचान ही कर पाता है, चुनावी शोर व ग्‍लेमर के बीच सब दब जाता है, जिसका खामियाजा कांग्रेस लम्‍बे समय से उठाती आ रही है ।

कांग्रेस को अपनी पार्टी में असमाजिक व बदनाम तत्‍वों को संरक्षण्‍ा व आश्रय देने से भी छुटकारा पाना होगा । हॉं यह ठीक है कि चुनावी नैया बगैर गुण्‍डों और लुटेरो के पार नहीं होती और इसलिये भले व शरीफ राजनीति में या तो प्रवेश ही नहीं कर पाते और यदि कर भी जायें तो जीत नहीं पाते । मैं समझता हूँ इस समय कांग्रेस का नेतृत्‍व ऐसे हाथों में हैं जो इस अवधारणा को बदलने की ताकत व तासीर रखता है, उसे किंचित प्रयास अवश्‍य करना चाहिये ।

मुरैना विधानसभा से अभी मात्र भाजपा और बसपा के उम्‍मीदवार ही लगभग घोषित से हैं, अन्‍य दलों ने अभी मौनव्रत साध रखा है, इन दो उम्‍मीदवारों के नाम पर तो जनता लगभग फैसला कर ही चुकी है कि क्‍या करना है और अब यह चर्चा आम भी हो चुकी है, अब अन्‍य दलों से नाम खुलें तो परिणाम पहले ही तय हो जायेगा कि क्‍या होगा ।                       

क्रमश: जारी अगले अंक में ………

 

14 अप्रैल से पूरे प्रदेश में ग्राम सभाएं आयोजित होंगी

14 अप्रैल से पूरे प्रदेश में ग्राम सभाएं आयोजित होंगी

भोपाल 4 अप्रैल 08 । आगामी 14 अप्रैल से मध्यप्रदेश के हर गांव में ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा। सप्ताह भर चलने वाली इन ग्राम सभाओं में स्थानीय मुद्दों के अलावा मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना, पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक निकाय का दर्जा मिलने की जानकारी, अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वनवासी अधिनियम 2006, रोजगार गारंटी योजना, समन्वित आजीविका परियोजना, समग्र स्वच्छता अभियान के तहत तदर्थ समितियों का गठन, सामुदायिक एवं विकास कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण, जलाभिषेक अभियान, ग्रीष्म काल में पेयजल व्यवस्था, सर्वशिक्षा अभियान, मध्यान्ह भोजन आदि विषयों को शामिल किया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव, श्री प्रदीप भार्गव ने ग्राम सभाओं के आयोजन के संबंध में प्रदेश के सभी कलेक्टरों और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। ये अधिकारी जिले में आयोजित ग्राम सभाओं का संकलित प्रतिवेदन आयुक्त, पंचायत राज संचालनालय को 30 अप्रैल तक भेजेंगे। जारी आदेश में कहा गया है कि ग्राम सभाओं में लोगों को मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना की गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को विस्तृत जानकारी देकर उन्हें इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें। इस योजना में नीले राशन कार्डधारी उपभोक्ताओं को तीन रूपये प्रति किलोग्राम की दर से गेंहूँ एवं साढ़े चार रूपये प्रति किलोग्राम की दर से 20 किलोग्राम खाद्यान्न प्रतिमाह उचित मूल्य की दुकान से उपलब्ध कराया जाएगा।

देश में पंचायत राज संस्थाओं को संवैधानिक निकाय का दर्जा प्राप्त हुआ है। सभी कलेक्टरों को इन संस्थाओं के सशक्तिकरण के संबंध में भारत सरकार से प्राप्त प्रारूप चार्टर भी भेजा गया है। ग्राम सभाओं में इस प्रारूप चार्टर का वाचन होगा और प्रतिक्रियायें संकलित की जायेंगी।

ग्राम सभाओं में अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वनवासी अधिनियम 2006 पर भी चर्चा की जाएगी। जिन गांवों में वन अधिकार समिति का गठन नहीं हुआ है वहां समितियों का गठन किया जाएगा। वन अधिकार समितियों की बैठक एवं इन समितियों के निष्कर्षों पर संकल्प पारित करने के लिए तत्संबंधी समस्याओं और सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।

ग्राम सभाओ में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत प्रगतिरत कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण किया जायेगा और जहां सतर्कता एवं मूल्यांकन समिति का गठन नहीं हुआ है, वहां गठन किया जाएगा। इसके अलावा नवीन परिवारों को ग्रामीण परिवार की सूची में शामिल कर ग्राम सभा से अनुमोदन कराया जाएगा। योजना में एक अप्रैल से शामिल 17 जिलों में सतर्कता एवं मूल्यांकन समिति का गठन किया जाएगा। जिन जिलों में समन्वित आजीविका परियोजना का क्रियान्वयन हो रहा है, ग्राम सभाओं में उनके उद्देश्य और उपलब्धियों का भी वाचन होगा।

समग्र स्व्च्छता एवं स्वजलधारा योजनाओं के तहत जिन-जिन गांवों में तदर्थ समिति का गठन नहीं हुआ है, गठन किया जाएगा। ग्राम सभा क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत कराये गए सामुदायिक एवं व्यक्ति मूलक समस्त विकास एवं निर्माण कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण भी किया जाएगा। इसके अलावा जलाभिषेक अभियान कार्ययोजना 2008-09 तथा रणनीति विचार, गर्मी में संभावित पेयजल संकट के त्वरित निराकरण के उपाय, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष, सर्वशिक्षा अभियान, किचन शेड आदि के तहत कराये गए कार्यों और प्राप्त राशि के उपयोग की समीक्षा की जाएगी।

 

अजा वर्ग के विद्यार्थियों से मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट प्रशिक्षण के लिये आवेदन 15 अप्रैल तक आमंत्रित : प्रवेश के लिये लिखित परीक्षा 22 अप्रैल को

अजा वर्ग के विद्यार्थियों से मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट प्रशिक्षण के लिये आवेदन 15 अप्रैल तक आमंत्रित : प्रवेश के लिये लिखित परीक्षा 22 अप्रैल को

भोपाल 4 अप्रैल 08 । मध्यप्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों से रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना वर्ष 2008 में मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट के तहत प्रवेश के लिये आवेदन-पत्र 15 अप्रैल तक आमंत्रित किये गये हैं। इस प्रशिक्षण की अवधि 10 माह निर्धारित है। इस प्रशिक्षण के लिये कुल 25 सीटें आरक्षित हैं। इसके लिये लिखित परीक्षा 22 अप्रैल, 2008 को आयोजित होगी। भोपाल से बाहर के विद्यार्थियों को 500 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति भी दी जायेगी।

प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रशिक्षणार्थियों को एम.एस. ऑफिस कम्प्यूटर प्रशिक्षण, एकाउंटिंग, स्टेनोग्राफी (हिन्दी), ऑफिस इक्यूपमेंट मैन्टेनेन्स, अंग्रेजी भाषा एवं व्यक्तित्व विकास संबंधी प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम आवासीय है। इसीलिये भोपाल के बाहर के प्रशिक्षणार्थियों को 500 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जायेगी। चयन प्रक्रिया का माध्यम लिखित परीक्षा है। प्रवेश आर्हता में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिये।

प्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थी, जो भोपाल में स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एण्ड इण्डस्ट्रियल स्टॉफ परफॉरमेन्स (क्रिस्प) संस्था में प्रशिक्षण के इच्छुक हों, से आवेदन-पत्र आमंत्रित किये गये हैं। योजनांतर्गत आवेदन करने के लिये छात्र-छात्राओं को मध्यप्रदेश का मूल निवासी तथा राज्य शासन द्वारा घोषित अनुसूचित जाति वर्ग की सूची में सम्मिलित होना चाहिये। इसके लिये जिले के कलेक्टर द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी प्रमाण-पत्र एवं स्थायी जाति प्रमाण-पत्र की प्रमाणित छाया प्रति प्रस्तुत करना होगा।

आवेदन-पत्र निर्धारित प्रारूप में कार्यक्रम संयोजक मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट (क्रिस्प) मानस भवन के सामने, श्यामला हिल्स, भोपाल (म.प्र.) 462002 में जमा करना होगा। प्रवेश के लिये लिखित परीक्षा 22 अप्रैल, 2008 को प्रात: 11.00 बजे से दोपहर एक बजे तक आयोजित होगी।

 

शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी आज से होगी

शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी आज से होगी

ग्वालियर 4 अप्रैल 08 । ऐसे मतदाता जिनके नाम मतदाता सूची में है किन्तु वे फोटोग्राफी से वंचित रह गये हैं ऐसे शेष रहे 85 हजार 120 मतदाताओं के मतदाता फोटो परिचय पत्र बनाने का कार्य 5 अप्रैल 08 से प्रारंभ किया गया है । यह कार्य 15 मई 08 तक चलेगा । फोटोग्राफी कार्य के लिये 280 फोटोग्राफी केन्द्र निर्धारित किये गये हैं ।

       जिन केन्द्रों पर 5 अप्रैल 08 को फोटोग्राफी होगी उनमें विधानसभा क्षेत्र क्रमांक- 15 ग्वालियर के अंतर्गत फोटोग्राफी केन्द्र धर्मशाला शब्द प्रताप आश्रम पर मतदान केन्द्र क्रमांक 1, 2 और 3 के फोटोग्राफी से शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी । फोटोग्राफी केन्द्र लाल बहादुर शस्त्री महाविद्यालय सुरेश नगर पर मतदान केन्द्र क्रमांक-135, 136, 137 और 138 के शेष मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी । फोटोग्राफी केन्द्र महाराजा मानसिंह महाविद्यालय चार शहर का नाका ग्वालियर पर मतदान केन्द्र क्रमांक-70 से लगायत 78 तक के मतदान केन्द्रों के शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी । फोटोग्राफी केन्द्र अमर भारतीय हाईस्कूल ठाठीपुर मुरार पर मतदान केन्द्र क्रमांक 182 से लगायत 185 तक के मतदान केन्द्रों के फोटोग्राफी के लिये शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी ।

       विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-16 लश्कर-पूर्व के अंतर्गत फोटोग्राफी केन्द्र बालक मंदिर विद्यालय (महिला मंडल द्वारा संचालित) खेड़ापति कॉलोनी के मतदान केन्द्र क्रमांक-1,2,3,4, के फोटोग्राफी से शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी । विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-17 लश्कर-पश्चिम के अंतर्गत फोटोग्राफी केन्द्र नगर निगम वाचनालय मुल्लाजी की सराय जीवाजीगंज के मतदान केन्द्र क्रमांक-1 से लगायत 6 तक के फोटोग्राफी से शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी । विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक- 18 मुरार के अंतर्गत फोटोग्राफी केन्द्र पर मतदान केन्द्र क्रमांक 1 से लगायत 5 तक और क्रमांक 41 के मतदान केन्द्र के शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी । फोटोग्राफी केन्द्र एस.एम. मैमोरियल स्कूल जड़ेरूआ के मतदान केन्द्र क्रमांक 92 से लगायत 96 तक के फोटोग्राफी से शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी । फोटोग्राफी केन्द्र शासकीय माध्यमिक विद्यालय भवन टिहोली पर मतदान केन्द्र क्रमांक 136137 के मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी ।

       विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 19 गिर्द के अंतर्गत फोटोग्राफी केन्द्र शासकीय प्राथमिक विद्यालय समेड़ी पर मतदान केन्द्र क्रमांक-1 फोटोग्राफी केन्द्र प्राथमिक विद्यालय महाराजपुरा के मतदान केन्द्र क्रमांक-69 फोटोग्राफी केन्द्र माध्यमिक विद्यालय भवन भौरी के मतदान केन्द्र क्रमांक 126, 127 पर फोटोग्राफी से शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी ।

       विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 20 डबरा के अंतर्गत फोटोग्राफी केन्द्र माध्यमिक विद्यालय भवन टेकनपुर के मतदान केन्द्र क्रमांक 1,2, 7 और 8 के फोटोग्राफी केन्द्र शासकीय माध्यमिक विद्यालय के मतदान केन्द्र क्रमांक 97, 98 के फोटोग्राफी से शेष रहे मतदाताओं की फोटोग्राफी होगी ।

 

परिसीमन का साया : बिलबिलाते नेता, खिलखिलाती जनता और चोर लुटेरों की पौ बारह

परिसीमन का साया : बिलबिलाते नेता, खिलखिलाती जनता और चोर लुटेरों की पौ बारह

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

करवट 4 श्रंखलाबद्ध आलेख

पिछले अंक से जारी …

यूं तो यह हर चुनाव के पहले ही होता है, लेकिन अबकी बार कुछ खास इसलिये है कि नये परिसीमन की छांव तले कुछ नये राजनीतिक ठीये बनेंगें, कुछ टूटेंगें । राजनेताओं और राजनीतिक दलों के बीच मारामार चालू हो गयी है ,जो कुछ वक्‍त पहले तक अन्‍दरूनी थी अब लगभग खुलकर सामने आ गयी है ।

कुछ राजनीतिक दलों ने तो अपने प्रत्‍याशीयों के नामों की विधिवत अखबारों में खबर छपवाकर घोषणा कर दी है । बहुजन समाज पार्टी के मुरैना जिला में 4 और म.प्र. में 64 प्रत्‍याशी घोषित हो चुके हैं, बसपा सुप्रीमो की नजर में हैं या नहीं लेकिन अखबारों में घोषित हो चुके हैं । इस प्रकार की अति पूर्व घोषणा के दूरगामी व असल परिणाम क्‍या होंगें ये वक्‍त बतायेगा 1 लेकिन घोषित प्रत्‍याशी अपने चुनाव प्रचार में या युद्धाभ्‍यास में जुट गये हैं इसमें संशय नहीं, मुरैना शहर के बदले हालात तो लगभग यही कहते हैं ।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी जो कि पिछले नवम्‍बर के महीने से अपने राजनीतिक होमवर्क में जुटी थी, जनवरी के महीने से ही जमीनी कार्य करना चालू कर चुकी थी और मार्च तक नये परिसीमन के फॉर्म में आते ही अपनी कार्यवाही की गति काफी तेज कर दी है ।

कम से कम यह दाद तो देनी ही पड़ेगी कि भारतीय जनता पार्टी का आंतरिक एवं जमीनी नेटवर्क न केवल बहुत सशक्‍त व सक्रिय है बल्कि चार साल लगभग अदृश्‍य रहने के बाद अचानक पिगत तीन माह के भीतर ही अपनी सारी मशीनरी की न केवल ओवरहालिंग कर डाली बल्कि उसे तुरन्‍त त्‍वरित व सक्रिय भी कर दिया । इतनी फटाफट आटो मशीन शायद राजनीतिक तौर पर मैंने कभी नहीं देखी ।

भाजपा का राजनैतिक मार्केटिंग का फार्मूला का बेसिक कन्‍सेप्‍ट तो वही पुराना है लेकिन जिस नये तरीके से इसे अबकी बार प्रस्‍तुत किया जा रहा है, यदि चुनाव तक इस सामूहिक सम्‍मोहन को भाजपा कायम रख पाने में कामयाब होती है, तो शायद चुनावी परिणाम एकदम अनुमान के विपरीत होंगें । म.प्र. के हर आदमी को जिस जादू के साथ बिजी और मगन (सम्‍मोहित) कर दिया गया है, यह आश्‍चर्यजनक है । कुल मिला कर संक्षेप में कहें तो इतना पर्याप्‍त होगा कि ‘’इतिहास लिखे नहीं बनाये जाते हैं’’

प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की हालत इस समय सबसे ज्‍यादा खराब है, वह अभी तैयारीयों की रणनीति ही बनाने की सोच रही है, जबकि उसकी प्रमुख विरोधी पार्टी अब तक अपनी योजनाओं व कार्यक्रमों को न केवल प्रारंभ कर चुकी है अपितु मूर्त रूप दे चुकी है । दो माह पहले तक जो स्‍वत: प्रदेश सरकार के बदले जाने के आसार बन रहे थे, लगता है कि हवा का रूख पलटा खा गया है । एक तो कांग्रेस की ढुलमुल व लगभग निष्क्रिय जैसी स्थिति, दूसरे करिश्‍माई नेताओं को पीछे धकेल कर नेपथ्‍य में पहुँचाना, तीसरे प्रदेश पदाधिकारीयों को नई बोतल में पुरानी शराब की तरह ठूंसना और चौथे नये पदाधिकारी (नये चेहरे) वही लोग हैं, जो पहले से ही चर्चाओं के केन्‍द्र रहे हैं, और खुद के बलबूते पर या पदीय बलबूतों के आधार पर अपना नाम चमका कर आगे आये हैं, पांचवा अन्‍य जो महत्‍वपूर्ण कारण है वह कांग्रेस के पास सैनिकों का अभाव है और उसका हर कार्यकर्ता सेनापति की भूमिका में नजर आता है । कांग्रेस को जब तक यह समझ में आयेगा कि चुनावी समर सैनिकों के सहारे लड़े जाते हैं न कि सेनापतियों के सहारे तब तक शायद काफी देर हो चुकी होगी ।

जहॉं अभी तक कांगेस न अपनी रणनीति साफ कर पायी है वही उसके प्रत्‍याशी कौन होंगें यह भी असमंजस की स्थिति है । अब किस विधानसभा की तैयारी कौन करे यह प्रश्‍न अधर में है । अक्‍सर होता यह है कि निर्वाचन नामांकन जमा करने की तिथि गुजर जाने के बाद कांग्रेस अपने प्रत्‍याशी घोषित करती है, तब तक कांगेस के नाम पर दस बीस लोग अपना एक ही सीट के लिये फार्म भर चुके होते हैं, और बाद में नाम घोषित हो जाने के बाद बकाया लोग अपना फार्म वापस ले लेते हैं, अब वे इसे हाईकमान का आदेश कह कर हवा में भले ही उड़ायें लेकिन जो चार छ दिन रात को सपने में विधायकी के जलवों का आनन्‍द लेते हैं वह कसक उन्‍हें अपनी ही पार्टी के प्रत्‍याशी के अन्‍दरूनी विरोध के लिये मजबूर कर देती है, और वे ऐसा करते हैं, दूसरे उनके ही घोषित प्रत्‍याशी को न तो चुनाव की तैयारी के लिये और न प्रचार के लिये ही समुचित वक्‍त मिल पाता है, एवं न मतदाता ही योग्‍य अयोग्‍य उचित अनुचित प्रत्‍याशी की परख पहचान ही कर पाता है, चुनावी शोर व ग्‍लेमर के बीच सब दब जाता है, जिसका खामियाजा कांग्रेस लम्‍बे समय से उठाती आ रही है ।

कांग्रेस को अपनी पार्टी में असमाजिक व बदनाम तत्‍वों को संरक्षण्‍ा व आश्रय देने से भी छुटकारा पाना होगा । हॉं यह ठीक है कि चुनावी नैया बगैर गुण्‍डों और लुटेरो के पार नहीं होती और इसलिये भले व शरीफ राजनीति में या तो प्रवेश ही नहीं कर पाते और यदि कर भी जायें तो जीत नहीं पाते । मैं समझता हूँ इस समय कांग्रेस का नेतृत्‍व ऐसे हाथों में हैं जो इस अवधारणा को बदलने की ताकत व तासीर रखता है, उसे किंचित प्रयास अवश्‍य करना चाहिये ।

मुरैना विधानसभा से अभी मात्र भाजपा और बसपा के उम्‍मीदवार ही लगभग घोषित से हैं, अन्‍य दलों ने अभी मौनव्रत साध रखा है, इन दो उम्‍मीदवारों के नाम पर तो जनता लगभग फैसला कर ही चुकी है कि क्‍या करना है और अब यह चर्चा आम भी हो चुकी है, अब अन्‍य दलों से नाम खुलें तो परिणाम पहले ही तय हो जायेगा कि क्‍या होगा ।                       

क्रमश: जारी अगले अंक में ………

 

सांसद ने स्वयं की भूमि पर तालाब योजना के तहत चेक प्रदान किये

सांसद ने स्वयं की भूमि पर तालाब योजना के तहत चेक प्रदान किये

ग्वालियर 4 अप्रैल 08 । सांसद श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने मत्स्य विभाग की स्वयं की भूमि पर तालाब योजना के तहत आज दो हितग्राहियों को अनुदान राशि के चेक प्रदान किये । उन्होंने भितरवार विकासखंड के ग्राम घिड़ौरा के निवासी श्री राम किशुन को 40 हजार और जनपद पंचायत डबरा के ग्राम सूखापाठा के श्री अवधेश कुमार को 28 हजार रूपये की अनुदान राशि के चेक प्रदान किये।

 

किसी को व्‍यस्‍त कैसे रखा जाये

किसी व्यक्ति को एक मछली दे दो तो उसका पेट दिन भर के लिए भर जाएगा. उसे इंटरनेट चलाना सिखा दो तो वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा. एनन

स्टेकहोल्डर्स की दो दिवसीय कार्यशाला 8 एवं 9 अप्रैल को

स्टेकहोल्डर्स की दो दिवसीय कार्यशाला 8 एवं 9 अप्रैल को

ग्वालियर 4 अप्रैल 08 । कूनो वन्यप्राणी वनमंडल की आगामी 10 वर्षों की प्रबंध योजना के तैयार करने के लिये कार्य आयोजना वृत्त ग्वालियर द्वारा संबध्द पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) की दो दिवसीय कार्यशाला 8 एवं 9 अप्रैल 08 को होटल तानसेन रेसीडेंसी गांधी रोड ग्वालियर में आयोजित की जायेगी ।

       कार्य आयोजना वृत्त ग्वालियर के वन संरक्षक ने बताया कि इस कार्यशाला में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगणी, वन्यप्राणी विशेषज्ञ एवं ईको टूरिज्म विशेषज्ञ तथा प्रशासनिक अधिकारी, स्थानी ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि आदि उपस्थित होकर कूनो वन्यप्राणी वनमंडल की आगामी 10 वर्षों की प्रबंध योजना के बनाने हेतु चर्चा एवं विचार विमर्श करेंगे ।

       ज्ञातव्य है कि कूनो वन्यप्राणी वनमंडल में केन्द्र शासन द्वारा सिंह परियोजना स्वीकृत की गई है । केन्द्र शासन द्वारा स्वीकृत सिंह परियोजना का मूल उद्देश्य एशियाई सिंह को गिर राष्ट्रीय उद्यान से कूनो वन्यप्राणी वनमंडल के अंतर्गत वैकल्पिक रहवास स्थल के रूप में विकसित किया गया है । वर्तमान में भारतीय वन्यप्राणी संस्थान देहरादून द्वारा किये गये अध्ययन के अनुसार कूनो अभयारण्य वर्तमान में 5-8 सिंहों को रहवास उपलब्ध कराने में सक्षम है ।

 

राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 4 हजार 900 मरीजों का उपचार

राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 4 हजार 900 मरीजों का उपचार

ग्वालियर 4 अप्रैल 08 । राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2007-08 में ग्वालियर एवं चंबल संभागों में 4 हजार 900 मरीजों का उपचार डॉट्स पध्दति से किया गया ।

       संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवायें ग्वालियर से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्वालियर जिले में एक हजार 724, शिवपुरी जिले में 131, गुना जिले में एक हजार 148, दतिया जिले में 65, अशोकनगर जिले में 614, भिण्ड जिले में 207, मुरैना जिले में 622 और श्योपुर जिले में 389 मरीजों का उपचार किया ।

 

राष्ट्रीय अंधतत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 37 हजार 500 से अधिक मोतियाबिंद के ऑपरेशन

राष्ट्रीय अंधतत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 37 हजार 500 से अधिक मोतियाबिंद के ऑपरेशन

ग्वालियर 4 अप्रैल 08 । राष्ट्रीय अंधतत्व निवारण कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2007-08 में ग्वालियर एवं चंबल संभागों में आयोजित 192 नैत्र शिविरों के माध्यम से 37 हजार 527 मोतियाबिंद के ऑपरेशन किये गये ।

       संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवायें ग्वालियर से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्वालियर जिले में 13 हजार 426, शिवपुरी जिले में 4 हजार 844, गुना जिले में 3 हजार 200, दतिया जिले में एक हजार 610, अशोकनगर जिले में एक हजार 327, भिण्ड जिले में 5 हजार 23, मुरैना जिले में 7 हजार 421 तथा श्योपुर जिले में 646 नैत्र ऑपरेशन किये गये ।

 

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