बैतूल चुनाव : कांग्रेस नही कमलनाथ को झटका, मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर हो सकते हैं
April 17, 2008 at 3:31 pm (Articles & Papers, Blogroll, ग्वालियर समाचार, जबलपुर समाचार, मध्यप्रदेश समाचार, मुरैना समाचार, राष्ट्रीय/अन्तर्र, लेख/आलेख/फीचर्स, समाचार)
बैतूल चुनाव : कांग्रेस नही कमलनाथ को झटका, मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर हो सकते हैंराज श्री वर्मा, भोपाल (तहसील संवाददाता)भोपाल 17 अप्रेल 08, बैतूल लोकसभा उपचुनाव के परिणाम को लेकर भाजपा नेता भले ही फूले न समा रहे हों और अपनी पीठ खुद ठोंक कर भले ही विकास और अपनी नीतियों की जीत बताते फिरते हो । हकीकत तो कुछ और ही है । बैतूल का परिणाम अधिकांश लोगों को 20-25 दिन पहले से ही पता था । कांगेस नेता कमलनाथ के घटते प्रभाव का अनुमान लगभग सभी को था और कांग्रेस को भी इसका इल्म हो गया था जिसके चलते अनेक युवा सांसदों को एक साथ कांग्रेस ने बैतूल भेजा था ।
कांग्रेस में अगले म.प्र. विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं और अब यह चुनाव अधिक दूर भी नहीं हैं । भाजपा जहॉं शिवराज सिंह की आम आदमी गरीब आदमी के कल्याण की कुछ अद्भुत और अति लोकप्रिय योजनाओं के सहारे विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने की उधेड़बुन में लगी है और गरीब आदमी का आम आदमी का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह वाली छवि के साथ अपने अभियान को गति देने में लगी है वहीं कांग्रेस में बड़ी ऊहापोह की स्थिति अभी तक बनी हुयी है । कांग्रेस अपना भावी मुख्यमंत्री अभी तक प्रोजेक्ट नहीं कर पायी है ।
चर्चाओं में चल रहे कांग्रेस के भावी मुख्यमंत्रियों में से कमलनाथ का भी नाम बड़े जोर शोर से चलाया जा रहा था । कमलनाथ एवं दिग्विजय लॉबी कमलनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में न केवल घोषित कर चुकी थी बल्कि राजधानी के आसपास यह हवा भी जोर से बना दीगयी थी कि कमलनाथ म.प्र. के अगले मुख्यमंत्री होंगे । कमलनाथ की लोकप्रियता समूचे मध्यप्रदेश में नहीं है और कमलनाथ को उनके अनुयायीयों के अलावा सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में आम आदमी नहीं पहचानता । इसके बावजूद कमलनाथ की आगामी मुख्यमंत्री के रूप में हवा बनायी जाना कांग्रेस के लिये ही घातक सिद्ध हुयी । विशेषकर बैतूल उपचुनाव के परिप्रेक्ष्य में तो यह काफी स्पष्ट नतीजा है । बैतूल में कांग्रेस की नहीं बल्कि कमलनाथ की प्रतिष्ठा दॉंव पर थी, और बैतूल में कांग्रेस प्रत्याशी की हार के साथ कमलनाथ का तिलिस्म भी टूट गया ।
राजनीतिक विश्लेषकों ने 20 रोज पहले ही अनुमान लगा लिया था कि बैतूल में क्या होने वाला है, कांग्रेस की सेहत पर बैतूल लोकसभा का उपचुनाव कोई खास असर नहीं डालेगा और न इसकी गूंज दिल्ली जायेगी न भोपाल तक आयेगी, बस कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनने से नकार देगी और शेष कुछ नहीं होने वाला ।
शिवराज सिंह इन दिनों विज्ञापनों पर धुऑंधार लुटाने में लगे हैं, मजे की बात ये है कि जिस अन्नपूर्णा योजना की तारीख तीन बार टल चुकी है अभी 15 अप्रेल को उसके चालू होने के पहले ही खबर आ चुकी थी कि योजना टल कर तिथि आगे बढ़ गयी है, इसके बावजूद अखबारों में 15 अप्रेल को करोड़ो के विज्ञापन छपे कि इस योजना का शुभारम्भ आज होगा । जनता के गाढ़े खून पसीने की कमाई की कमाई को इस तरह योजना की फर्जी घोषणाओं के लिये फर्जी विज्ञापन देकर दोनों हाथ से लुटाने वाले शिवराज सिंह को गरीब का हमदर्द तो कतई नहीं माना जा सकता । जो योजना 14 तारीख को ही स्थगित हो गयी हो उसका विज्ञापन 15 तारीख को कैसे छपा, यह जबरदस्ती विज्ञापन तकसीम करने का एक जबरदस्त नुस्खा है । अब नई तारीख पर फिर नये विज्ञापन, योजना का जो चाहे हो सो हो मीडिया के तो वारे न्यारे हैं ही ।
आज शिवराज ने भाजपा का फिर विज्ञापन छपाया है जिसमें शिवराज कह रहे हैं हम जीत गये हम जीत गये, बंटाढार का नया संस्करण हार गया वगैरह वगैरह । दिल्ली तक गूंजेगी गरीब की लाठी की आवाज, गरीब की लाठी में आवाज नहीं होती ।
संभवत: शिवराज चिन्तित से अधिक उतावले हैं । कहॉं राजा भोज कहॉं गंगू तेली, कहॉं विधानसभा का समग्र चुनाव और कहॉं एक लोकसभा उपचुनाव । इस एक सीट ( जो पहले से ही शिवराज की भाजपा पर थी) को ज्यों का त्यों वापस जीत लेने से क्या होगा, क्या इस एक सीट के बल पर भाजपा की केन्द्र में सरकार बन जायेगी या फिर केन्द्र से कांग्रेस की सरकार गिर जायेगी । आखिर किस फर्क की किस नये संदेश की शिवराज बात कर रहे हैं, एक सामान्य समझ का आदमी भी इस बात को नहीं समझ सकता कि आखिर क्या शिवराज ने पा लिया और क्या कांग्रेस ने खो दिया । एक पल के लिये सिर्फ यही मान लीजिये कि यह सीट खाली ही नहीं हुयी । केवल कांगेस के एक भावी मुख्यमंत्री बनने के सपने लिये कमलनाथ को मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर कर गयी, इससे तो उल्टे कांग्रेस को फायदा ही होगा न कि नुकसान, भावी मुख्यमंत्रियों की कतार थोड़ी छोटी हो गयी ।
अगर कांग्रेस इस हार जीत को खास तवज्जो देती है तो जरूर आश्चर्य की बात होगी, उपचुनावों में अक्सर वैसे ही प्रदेश में जिसकी सरकार हो उसके पक्ष में परिणाम जाते हैं, यह कौन सी नई बात है । और बहुत कुछ पहले से तय शुदा और सबको पता था । फिर फालतू विज्ञापनों पर शिवराज सिंह ने भाजपा के पैसे खर्च करवा डाले कि आवाज दिल्ली तक जायेगी ।
कांग्रेस का विधानसभा चुनाव तो कौन होगा अगला मुख्यमंत्री और कहॉं कौन होगा प्रत्याशी पर निर्भर करेंगे । और शायद कांग्रेस इससे बेखबर नहीं होगी ।
