अर्जुन सिंह ने आज अमरकंटक में राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय शिक्षा एवं शोध संस्थाओं की श्रेणी में खड़ा करना है- श्री अर्जुन सिंह

श्री अर्जुन सिंह ने आज अमरकंटक में राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी

मानव संसाधन विकास मंत्री श्री अर्जुन सिंह ने आज मध्य प्रदेश में अमरकंटक में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी । इस अवसर पर श्री अर्जुन सिंह ने कहा, न्न मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहूंगा कि यदि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय शोध और अध्ययन की संस्थाओं की श्रेणि में खड़ा करना है तो इसके लिए अत्यधिक परिश्रम व लग्न के साथ-साथ इस क्षेत्र के विकास और यहां के समुदाय के प्रति एक विशेष लगाव भी आवश्यक है और विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्यों की सफल पूर्ति के लिए कई तरह की कुरबानियां भी देनी होंगी ।

देश में जनजातीय आबादी के लिए उच्च शिक्षा और शोध सुविधाओं के क्षेत्र में सुविधाएं जुटाने तथा इसे बढावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के अमरकंटक में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय नामक केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है । इससे जनजातीय क्षेत्र में विकास को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकेगी । अमरकंटक में मुख्यालय के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अनेक क्षेत्रीय केन्द्र और कैम्पस भी होंगे तथा इसके क्षेत्राधिकार को पूरे भारत में विस्तृत किया जाएगा।

मंत्री महोदय ने आज सुबह अमरकंटक में जवाहर नवोदय विद्यालय के प्रांगण में विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी । इस अवसर पर मध्य प्रदेश के वन एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री श्री विजय शाह और शहडौल से सांसद श्री दलपत सिंह परास्ते भी मौजूद थे । जाने-माने गांधीवादी और राष्ट्रीय सेवा योजना के संस्थापक डॉ. एस एन सुब्बाराव भी इस अवसर पर उपस्थित थे ।

इस अवसर पर श्री अर्जुन सिंह के उद्बोधन का मूल पाठ इस प्रकार है —

आज आप सभी के बीच नये भारत के निर्माताओं में से एक स्वर्गीय श्रीमती इन्दिरा गाँधी जी के नाम से जुड़े राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के अवसर पर उपस्थित होकर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता है। यह एक ऐतिहासिक अवसर है और राष्ट्र के लिए गौरव का दिन है। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए मेरे सार्वजनिक जीवन का यह सबसे महत्वपूर्ण दिन है, जब आदरणीय इन्दिरा जी के नाम पर इस नये केन्द्रीय विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने का सौभाग्य मुझे मिला।

आज हम अमरकंटक की पावन भूमि में एक ऐसे ज्योतिस्तंभ को स्थापित करने जा रहे हैं, जो ज्ञान-विज्ञान की रोशनी से देश के जनजातीय क्षेत्रों में युवावर्ग को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नई दिशा देगा और जो दुनिया के किसी भी बेहतर से बेहतर शिक्षा केन्द्र से कम नहीं ऑंका जाएगा। इस विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार देशव्यापी होगा और इसे अन्य केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की तरह केन्द्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से वित्तीय सहायता दी जाएगी।

उच्च शिक्षा में जन-जातीय समुदाय की कम भागीदारी एक गम्भीर मुद्दा है। 11.6 के राष्ट्रीय सकल प्रवेश अनुपात की तुलना में जन-जातियों का अनुपात केवल 6.61 है। जन-जातियों में बालिकाओं का उच्च शिक्षा में अनुपात तो और भी कम (4.69) है। उच्च शिक्षा में जन-जातियों के युवावर्ग का दखल कम होने के कारण उनका शैक्षणिक और आर्थिक स्तर तुलनात्मक रूप से कम है और विकास की दौड़ में उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ नहीं उठा पाने से वे पिछड़ जाते हैं।

उत्तर-पूर्वी राज्यों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, झारखण्ड, उड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में जन-जातियों की संख्या बहुतायत है। जहाँ प्रत्येक उत्तर-पूर्वी राज्य में कम-से-कम एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय उपलब्ध है, वहीं देश के अन्य जन-जातीय बाहुल्य इलाकों में कोई भी केन्द्रीय विश्वविद्यालय नहीं है। लेकिन यह केन्द्रीय विश्वविद्यालय, जो अमरकंटक में स्थापित किया जा रहा है, को इस बात का अधिकार रहेगा कि वह अन्य जन-जातीय बाहुल्य इलाकों में क्षेत्रीय कैम्पस खोल सकेगा।

इस विश्वविद्यालय का नाम एक ऐसे व्यक्तित्व पर रखा गया है, जो जनजातियों के विकास के लिए आजीवन संघर्ष करती रहीं। इन्दिरा जी सदैव जनजाति समुदायों के धैर्य, उनकी असीम क्षमता और कठिन परिस्थितियों में जुझने की ताकत से प्रभावित रहीं और कई अवसरों पर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे जनजातीय समुदाय से घुल-मिलकर कितना आनन्द अनुभव करती थीं। वह मानती थीं कि आदिवासी समुदाय में आर्थिक अभाव के बावजूद अपार उत्साह और उमंग है। वे जनजातीय संस्कृति को बचाए रखने और बढावा देने में भी आगे रहीं। इन्दिरा जी द्वारा सृजित 20 सूत्रीय सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रम में समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए और उन्हें शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए कई कदम उठाए थे। और जैसा आपको याद होगा कि 1980 के दशक में मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में जनजातियों को साहूकारों के कुचक्रों से परित्राण के लिए कानून बनाया गया। उनकी भूमि से उन्हें बेदखल करने वालों के विरुध्द कार्रवाई के कानून बने और इस तरह के कई अन्य सामाजिक आर्थिक न्याय संरचना के आधार बनाए। मध्य प्रदेश में तेंदुपत्ता व्यवसाय के सहकारीकरण का एक व्यापक कार्यक्रम हाथ में लिया गया था। उससे तमाम शोषण की शक्तियाँ नाराज हो गई थीं। परन्तु दृढता से उनसे मुकाबला किया गया था। आज अनेक वर्षों के बाद भी उस मूल अधिकार को वापिस नहीं लिया जा सका है। जहाँ इन्दिरा जी ने जनजातीय समुदायों से बहुत कुछ सीखा, वहीं देशभर के जनजातीय समुदायों ने स्वर्गीय इन्दिरा जी को भी अपना भरपूर स्नेह दिया। उन्होंने नेतृत्व क्षमता, कुशलता, कठिन मेहनत और अदम्य साहस पर अपनी आस्था रखी। इस राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय का नाम श्रीमती इन्दिरा गाँधी के नाम से जोड़कर भारत की संसद ने उस महान व्यक्तित्व के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।

आमतौर पर विश्वविद्यालय की स्थापना बड़ें शहरों के आसपास किया जाना स्वाभाविक है। इस प्रकार के स्थल-चयन में आवागमन, सम्पर्क, आवासीय व्यवस्था, सामाजिक अधोसंरचना आदि की सुलभता आमतौर पर विश्वविद्यालयों को बड़े शहरों के नजदीक स्थापित करने के कारण होते हैं। परन्तु हमने यह सब जानते हुए भी इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना जनजातीय क्षेत्र में करने का निर्णय लिया। इस सोचे-समझे निर्णय के पीछे न केवल विकास की दौड़ में पिछड़े हुए लोगों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का ध्येय रहा है, न केवल इस क्षेत्र के युवावर्ग के लिए उच्चतम स्तरीय शिक्षा एवं शोध के दरवाजे खोलने की चाह रही है, बल्कि साथ ही यह सुसंगत तर्क भी रहा है कि यदि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य उपलब्ध ज्ञान और विज्ञान की सम्भावना को बढाना और नए ज्ञान की खोज करना है, तो इसके लिए आवश्यक बौध्दिक क्षमता का उपयोग स्थानीय जनजाति के विकास से संबंधित विषय – जनजातीय भाषा, संस्कृति, कला, ऐतिहासिक विरासत और नैसर्गिक सम्पदा में शोध, खोज और उच्च अध्ययन के लिए किया जाना अनिवार्य है।

मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहूँगा कि यदि इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय शोध और अध्ययन की संस्थाओं की श्रेणी में खड़ा करना है तो इसके लिए अत्यधिक परिश्रम व लगन के साथ-साथ इस क्षेत्र के विकास और यहाँ के समुदाय के प्रति एक विशेष लगाव भी आवश्यक है और विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्यों की सफल पूर्ति के लिए कई तरह की कुर्बानियाँ भी देनी होंगी।

जैसा मैंने पूर्व में भी कहा, इस विश्वविद्यालय की स्थापना जनजातीय क्षेत्र में किए जाने के साथ-साथ यह भी तय किया गया कि विश्वविद्यालय का मुख्यालय पवित्र नर्मदा और सोन नदियों के उद्गम स्थल, अमरकंटक की इस पावन-भूमि पर स्थापित किया जाए। इस विश्वविद्यालय की स्थापना से अब धार्मिक तीर्थ और दर्शनीय स्थल के अपनी पहचान के साथ-साथ, अमरकंटक अब ज्ञान सरोवर का भी उद्गम स्थल बन गया है। यहाँ से असीम ज्ञान प्रवाहित होगा और पूरे देश और पूरा विश्व उससे लाभान्वित होगा। मैं इस संदर्भ में कहना चाहूँगा कि हमारी इच्छा है कि इस विश्वविद्यालय का परिसर अमरकंटक की वादी में ही हो। मुझे मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी ने विश्वास दिलाया है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उपयुक्त मात्रा में जमीन उपलब्ध करेंगे और साथ ही वहाँ उपयुक्त बिजली और जल संसाधन की सुविधा भी उपलब्ध कराएँगे। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके सहयोग से इस परिसर की संरचना जल्दी ही शुरू की जाएगी।

इस विश्वविद्यालय को, जैसा कि आप जानते हैं क्षेत्रीय कैम्पस खोलने का अधिकार दिया गया है। हमने संसद में विश्वविद्यालय के कानून के बारे में हुई बहस के दौरान यह वायदा किया है कि प्रत्येक क्षेत्रीय कैम्पस उस क्षेत्र से जुड़े ऐतिहासिक महापुरुषों के नाम से स्थापित होंगे। इस प्रकार आने वाले समय में हम शहीद वीर नारायण सिंह, पराक्रमी गुंडाधूर, बिरसा मुण्डा जी आदि के नाम पर सम्बन्धित जनजातीय क्षेत्रों में विश्वविद्यालय के कैम्पस की स्थापना कर, उन क्षेत्रों का विकास करने के साथ-साथ इन महापुरुषों को अपनी सच्ची श्रध्दांजलि भी देंगे।

यह विश्वविद्यालय अन्य केन्द्रीय विश्वविद्यालयों, आदिवासी शोध संस्थानों और अन्य उच्च शिक्षण और शोध संस्थानों के साथ अपना जीवन्त सम्बन्ध और सम्पर्क स्थापित करेगा और देश और विश्व के हर कोने से उपलब्ध ज्ञान का अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति के लिए उपयोग करेगा। आजकल विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों की बात की जाती है, परन्तु मैं इस अवसर पर इस धारणा के प्रति भी सचेत करना चाहूँगा कि विश्वस्तरीय संस्थान केवल कैम्पस निर्माण की आधुनिक शैलियों, बहुमंजिली इमारतों, वातानुकूलित कक्षों और दिखावे के आडम्बर के आधार पर नहीं, बल्कि ज्ञान और विज्ञान के प्रति सच्ची श्रध्दा, अन्वेषण के लिए आवश्यक कौतूहल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवीय मूल्यों के प्रति सम्मान और इन सबसे परे सादगीपूर्ण और गम्भीर आचरण से ही बन सकता है।

मैं आशा करता हूँ कि विश्वविद्यालय के सभी प्राधिकारियों का जल्द-से-जल्द चयन होगा, इस विश्वविद्यालय के कानून में यह विशेष व्यवस्था है कि विश्वविद्यालय की कोर्ट, कार्यकारी परिषद्, शैक्षणिक परिषद्, प्रशासन, अध्यापन और दाखिलों में जनजातीय समुदायों का विशेष और पर्याप्त प्रतिनिधित्व होगा।

वैसे तो 11वीं पंचवर्षीय योजना में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में केन्द्र सरकार द्वारा कई नए केन्द्रीय विश्वविद्यालय, विश्व स्तरीय संस्थान, आई.आई.टी., एन.आई.टी., विज्ञान और प्रबन्ध संस्थान खोले जाएँगे, परन्तु इन सबमें आज स्थापित होने वाले च्इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की एक अहम् भूमिका बनी रहेगी और इस विश्वविद्यालय को उसके उत्कृष्ट दर्जे पर बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय से जुड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति का, मध्य प्रदेश और जहाँ कहीं भी विश्वविद्यालय का कैम्पस स्थापित होगा, उन राज्य सरकारों का, और स्थानीय समुदायों का बहुमूल्य योगदान मिलता रहेगा, इसी उम्मीद के साथ मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूँ कि इस ऐतिहासिक घड़ी में आपने मुझे आमंत्रित किया। आपकी खुशहाली और विकास के लिए, इस क्षेत्र के जनजातियों के विकास के लिए, मैं अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। धन्यवाद !

जयहिन्द !

महावीर जयंती पर बन्दियों ने अपराध का मार्ग त्यागने तथा मांस मदिरा का सेवन न करने की शपथ ली

महावीर जयंती पर बन्दियों ने अपराध का मार्ग त्यागने तथा मांस मदिरा का सेवन न करने की शपथ ली

ग्वालियर 18 अप्रैल 08 । आज केन्द्रीय जेल ग्वालियर में महावीर जयंती के पावन अवसर पर बन्दियों ने अपराध न करने तथा सजा पूरी कर समाज में वापिस जाने पर आदर्श नागरिक के रूप में जीवन बिताने की कसम खाई । साथ ही बन्दियों ने मांस मदिरा त्याग की भी शपथ ली । पुलिस उप महानिरीक्षक ग्वालियर श्री आदर्श कटियार ने बन्दियों से अपराध का मार्ग त्याग कर समाज में रचनात्मक भूमिका अदा करने का आह्वान करते हुये अच्छे नागरिक बनने का संकल्प करवाया । वहीं दैनिक भास्कर के सम्पादक श्री हरिमोहन शर्मा ने जिन्होंने स्वयं भी आज तक मांस मदिरा का उपयोग नहीं किया ने उपस्थित बन्दियों को मांस मदिरा के पूर्ण त्याग की शपथ दिलाई । शपथग्रहण से पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक श्री कटियार तथा दैनिक भास्कर के संपादक श्री शर्मा ने अपने-अपने संबोधन में अपराध का मनोविज्ञान, अपराधिक प्रवृत्ति का मार्ग त्यागने तथा समाज में अच्छे नागरिक के रूप में रचनात्मक भूमिका को स्पष्ट करते हुये प्रेरणादायक व्याख्यान दिये । इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा ने जैन धर्म के 24वें तीर्थांकर भगवान महावीर के जीवन पर विस्तार से बोलते हुये अंहिसा के मार्ग पर चलने पर बल दिया ।

       कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने भगवान महावीर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर द्वीप प्रज्जवलित किया । इस अवसर पर डॉ. ए.एस. भल्ला ने अतिथियों का स्वागत किया तथा बन्दियों को आत्मचिंतन और पश्चाताप से मन को शुध्द कर जेल से बाहर जाने पर सद्मार्ग अपनाने की समझाईश दी । जेल अधीक्षक श्री के.पी. श्रीवास्तव ने अच्छे आचरण वाले कैदियों को पे-रोल पर छोड़ने के प्रकरणों के निराकरण में पुलिस एवं जिला प्रशासन से समय सीमा में सहानुभूतिपूर्वक निर्णय का अनुरोध किया । उन्होंने कहा कि इस तरह परिवार में जाने से जहां उनके परिवार की समस्याओं का निराकरण होता है वहीं बन्दियों को मानसिक सुख भी मिलता है जिससे उनके व्यवहार में रचनात्मक बदलाव आता है । उनके इस अनुरोध का जहां बन्दियों ने तालियां बजाकर स्वागत किया वहीं पुलिस महानिरीक्षक ने भी सहयोग का आश्वसान दिया ।

       कार्यक्रम में बन्दियों ने भगवान महावीर की अराधना करते हुये भजन भी प्रस्तुत किये । कार्यक्रम का संचालन ग्वालियर विकास समिति के सचिव श्री मनमोहन घायल ने किया । कार्यक्रम में समाजसेवी श्रीमती मधु भारद्वाज, श्रीमती प्रमिला वाजपेयी भी विशेष रूप से उपस्थित थीं । कार्यक्रम के अंत में श्री अशोक प्रेमी ने सभी अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम का आयोजन ग्वालियर विकास समिति का विनम्र प्रयास था जो भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।

 

संभाग में पशुओं के उपचार के लिये शिविरों का आयोजन

संभाग में पशुओं के उपचार के लिये शिविरों का आयोजन

ग्वालियर 18 अप्रैल 08 । ग्वालियर संभाग में पशुओं के उपचार, उनकी उचित देखभाल एवं उनके पालन पोषण के प्रति कृषकों को जागरूक करने के उद्देश्य से पशु उपचार शिविरों का आयोजन जारी है ।

       पशु चिकित्सा सेवा के संयुक्त संचालक ने एक जानकारी में बताया कि पिछले माली साल के दौरान ग्वालियर संभाग के शिवपुरी जिले में सर्वाधिक 631 पशु उपचार शिविरों का आयोजन किया गया । गुना जिले में 328, ग्वालियर जिले में 178, अशोकनगर जिले में 109 और दतिया जिले में 94 शिविरों का आयोजन किया गया ।

       शिवपुरी जिले में लगाये गये 631 शिविरों में 8 हजार 518 पशुओं का उपचार कर औषधी वितरित की गईं । 5 हजार 85 पशुओं का टीकाकरण किया गया । 2 हजार 141 बधियाकरण और 164 कृत्रिम गर्भाधान किये गये ।  गुना जिले में लगाये गयें 328 उपचार शिविरों में 11 हजार 264 पशुओं का उपचार किया गया । 8 हजार 516 पशुओं का टीकाकरण, 790 पशुओं का बंधियाकरण और 167 पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया गया । ग्वालियर जिले में लगाये गये 178 शिविरों में 2 हजार 471 पशुओं का उपचार किया गया । 6 हजार 207 पशुओं का टीकाकरण, एक हजार 280 पशुओं का बधियाकरण और 321 कृत्रिम गर्भाधान किये गये । अशोकनगर जिले में लगाये गये 109 शिविरों में 4 हजार 911 पशुओं का उपचार, 2 हजार 212 पशुओं का टीकाकरण, 287 पशुओं बधियाकरण और 59 पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया गया। दतिया जिले में लगाये गये 84 शिविरों में 2 हजार 204 पशुओं का उपचार एवं 5 हजार 85 पशुओं का टीकाकरण, 160 बांधियाकरण और 25 कृत्रिम गर्भाधान किये गये ।

अवशेष मतदाताओं के परिचय पत्र के लिये आज भी होगी फोटोग्राफी

अवशेष मतदाताओं के परिचय पत्र के लिये आज भी होगी फोटोग्राफी

ग्वालियर 18 अप्रैल 08 । भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जिले में अवशेष मतदाताओं के फोटो परिचय-पत्र तैयार कराने का कार्य जारी है । इस अनुक्रम में विधानसभा क्षेत्रवार एवं मतदान केन्द्रवार फोटोग्राफी जारी है । शनिवार 19 अप्रैल को फोटोग्राफी का कार्य प्रात: 8 बजे से सांयकाल 6 बजे तक संपन्न कराया जायेगा । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री राकेश श्रीवास्तव ने ऐसे मतदाताओं से जिन्हें अब तक परिचय पत्र प्राप्त नहीं हुये हैं अथवा परिचय पत्रों में त्रुटि है उनसे फोटोग्राफी कराने की अपील की है । जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में तो अंकित हैं लेकिन मतदाता सूची में उनके नाम के सामने फोटो अंकित नहीं है। जिन्हें फोटो परिचय पत्र प्राप्त हुये हैं और फोटो परिचय-पत्र में प्रविष्टियों में अथवा फोटो में कोई गलती है। जिन मतदाताओं द्वारा डुप्लीकेट कार्ड बनवाने हेतु पूर्व में फोटो खिचवाया या फोटो दिया गया था और उन्हें फोटो परिचय पत्र तैयार होकर प्राप्त नहीं हुये हैं । मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में अंकित नहीं हैं और वे अपना नाम मतदाता सूची में अंकित कराना चाहते हैं । उन सभी से भी कलेक्टर ने अपील की है कि वे फोटोग्राफी स्थलों पर उपस्थित होकर निर्धारित प्रपत्र में अपना आवेदन पत्र प्रस्तुत करें तथा आवेदन पत्र के साथ यदि फोटो उपलब्ध है तो फोटो चस्पा करके नियुक्त कर्मचारियों को उपलब्ध करावें । यदि फोटो नहीं है तो अपने-अपने फोटो अनिवार्य रूप से खिंचाये ताकि मतदाता पहचान पत्र तैयार कराये जा सकें ।

       जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार 19 अप्रैल को 15- ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र के मतदान केन्द्र क्रमांक 19 से 22 तक के मतदाताओं के लिये नया मनोरंजन भवन डी.आर.पी. लाईन ग्वालियर, मतदान केन्द्र क्रमांक 152 और 153 के मतदाताओं के लिये जाटवों की धर्मशाला रपट मुरार, मतदान केन्द्र केन्द्र क्रमांक 90 से 95 तक के मतदाताओं के लिये आर.सी.एस. कान्वेंट स्कूल गदाई पुरा ग्वालियर में फोटोग्राफी होगी । इसी प्रकार विधानसभा क्षेत्र 16 लश्कर पूर्व के मतदान केन्द्र क्रमांक 43,44 तथा 46 से 52 तक के मतदाताओं के लिये दिगंबर जैन खण्डेलवाल बीसपंथी चंपाबाग धर्मशाला नई सड़क, लश्कर में फोटोग्राफी होगी । विधानसभा क्षेत्र 17 लश्कर पश्चिम के मतदान केन्द्र क्रमांक 47, 48 तथा 53 से 56 तक के मतदाताओं के लिये शासकीय प्राथमिक विद्यालय भवन तारागंज लश्कर में फोटोग्राफी की जायेगी। विधानसभा क्षेत्र 18 मुरार के लिये मतदान केन्द्र क्रमांक 33 से 38 तक के मतदाताओं के लिये एस.आर.के. हायर सेकेण्डरी स्कूल मुरार, मतदान केन्द्र क्रमांक 97 से 102 तक के मतदाताओं के लिये शासकीय माध्यमिक जमाहर, मतदान केन्द्र क्रमांक 156 और 157 के मतदाताओं के लिये शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिरसौद में फोटो खिचेगी । विधानसभा क्षेत्र 19 गिर्द के मतदान केन्द्र क्रमांक 25 के मतदाताओं के लिये प्राथमिक विद्यालय भवन करही, मतदान केन्द्र क्रमांक 87 से 89 तक के मतदाताओं के लिये पंचायत भवन पुरानी छावनी, मतदान केन्द्र 147 से 151 तक के मतदाताओं के लिये माध्यमिक विद्यालय भवन पाटई में फोटो खिचेगी तथा विधान सभा क्षेत्र क्रमांक 20 डबरा के मतदान केन्द्र क्रमांक 32 से 35 तक के मतदाताओं के लिये माध्यमिक विद्यालय भवन करियावटी एवं मतदान केन्द्र क्रमांक 157 से 159 तक के मतदाताओं के लिये प्राथमिक विद्यालय भवन चांदपुर में फोटोग्राफी दल उपलब्ध रहेंगें ।

 

क्षमा और दण्‍ड में अधिक कठिन क्‍या है

दूसरों को दण्‍ड देना सहज है, किन्‍तु उन्‍हें क्षमा करना और उनकी भूल सुधारना अत्‍यधिक कठिन कार्य है भगवान महावीर स्‍वामी