अनीति पूर्वक छल करने वाले के विरूद्ध अनीति से छल करना सर्वोत्तम नीति है, तभी राज और दण्ड की श्रेष्ठता सिद्ध होती है, महाभारत के युद्ध में छल व अनीति से निहत्थे बालक को मारने वाले सात महारथीयों को श्रीकृष्ण ने इसी नीति के तहत दण्डित किया था । - श्रीकृष्ण नीति, संकलित
प्रश्न : आपकी नजर में म.प्र. में अबकी बार किसकी सरकार बनने जा रही है – विजय गुप्ता, माताप्रसाद गुप्ता, सिन्धी कालोनी मुरैना
June 27, 2008 at 4:50 pm (Articles & Papers)
प्रश्न : आपकी नजर में म.प्र. में अबकी बार किसकी सरकार बनने जा रही है – विजय गुप्ता, माताप्रसाद गुप्ता, सिन्धी कालोनी मुरैना
उत्तर – भाई विजय और माताप्रसाद जी, हालात रोज बदल रहे हैं, आधे पत्ते उधर झुकते हैं तो एक घण्टे बाद दूसरी ओर झुक जाते हैं अभी तो ऊहापोह ही मानिये । वैसे अगर आप हमारी परिसीमन के ऊपर चल रहा धारावाहिक आलेख अगर लगातार पढ़ रहे होंगें, तो परिदृश्य कुछ समझ आ रहा होगा । फिलहाल अगली कड़ी का इंतजार करिये कुछ कुछ माजरा साफ हो जायेगा । आज किसी का मुख्यमंत्री लोकप्रिय हो जाता है तो नीचे से उसकी सवारी खिसक रही है, दूसरी पार्टी का मुख्यमंत्री अभी साफ नहीं है इसलिये परिदृश्य खुल कर साफ नहीं हो पा रहा । वैसे अबकी बार चुनाव पूरा टिकिट वितरण पर आधारित होगा । आगे आप भी इंतजार कीजिये हम भी इंतजार कर रहे हैं कि कौनसा दल किसे अपना उम्मीदवार कहॉं कहॉं बनाता है । आपने मुरैना सीट के बारे में जो पत्र में लिखा है, हमारी नजर में सभी दल अगर टिकिट यानि अपने प्रत्याशी रिपीट करते हैं तो रिजल्ट भी रिपीट हो सकता है । आपके अन्य सवालों का जवाब हम अपने अगले लेख में अवश्य देंगें ।
भ्रष्टाचार आसुरी कुल के लोगों का पैतृक गुण है
June 27, 2008 at 4:33 pm (Articles & Papers)
भ्रष्ट आचरण या भ्रष्टाचार एक आसुरी गुण है जो मनुष्य को उसके संस्कारों वश स्वत: प्राप्त होता है, वर्ण संकर अर्थात जिनके कुल में दोष होकर कहीं कभी विदीर्णता होती है वह अपना असर दिखा कर मनुष्य को भ्रष्टाचार अर्थात दूसरे का धन या सम्पत्ति अनाधिकृत रूप से हरण करने या चुराने, या छीनने के लिये प्रेरित करती है, भ्रष्टों के पूर्वज आसुरी वंश के होने से यह गुण मनुष्य को पैतृक आसुरी सम्पदा के रूप में आ प्राप्त होता है – संकलित
प्रश्न: क्या ज्योतिष सही होता है, यदि हॉं तो अधिकतर भविष्यवाणीयां गलत क्यों हो जाती हैं – विभा अग्रवाल, बीकानेर, राजस्थान
June 14, 2008 at 7:27 pm (Articles & Papers)
प्रश्न: क्या ज्योतिष सही होता है, यदि हॉं तो अधिकतर भविष्यवाणीयां गलत क्यों हो जाती हैं – विभा अग्रवाल, बीकानेर, राजस्थान
उत्तर: विभा जी, भारतीय ज्योतिष परम्परा के मुताबिक भारतीय ज्योतिष विशुद्ध गणित पर आधारित होता है, और इसका गणित जितना सटीक होता है, फलित उतना ही सही और पुष्ट होता है । अधिकांश ज्योतिषी इसके गणित व विज्ञान की सटीक व सही गणना नहीं कर पाते अत: इसका फलित गलत हो जाता है और व्यर्थ ही भारत की यह अमूल्य व महत्वपूर्ण विद्या बदनाम होती है । इसे जब कोई गणित व विज्ञान से सम्बन्धित विद्वान उपयोग करता है तो फलित अधिक सटीक व सही आता है । अब तक तो भारतीय ज्योतिष में काफी काम हो चुका है और मनुष्य के पिछले जन्म तक का हाल जन्मकुण्डली बयां करने लगी है । किन्तु इसमें सही व सटीक फलित के लिये काफी साधना और ईश्वरीय कृपा के साथ अतीन्द्रिय ज्ञान व गणित एवं विज्ञान की विशेषज्ञाता आवश्यक है । अन्यथा फलित सही नहीं होगा । अख्ाबारों आदि में नित्य छपने वाले भविष्यफल पूर्णत: बेमानी हैं क्योंकि हर राशि/ व्यक्ति का भविष्यफल उसकी खुद की जन्मकुण्डली के अनुसार निधार्रित होता है ।
विद्यार्थियों के लिये वर्जित आठ चीजें
June 11, 2008 at 3:35 am (Articles & Papers)
कामं क्रोधं तथा लोभं स्वादु श्रंगार कौतुके । अतिनिद्रातिसेवां च विद्यार्थी ह्यष्ट वर्जयेत् ।।
काम, क्रोध, लोभ, स्वाद, श्रंगार, कौतुक कार्य आनन्द, अति निद्रा, अति सेवा यह आठ कार्य विद्यार्थियों के लिये वर्जित हैं – संस्कृत का प्रसिद्ध श्र्लोक
देव दानव और मनुष्य में क्या अंतर है
June 8, 2008 at 6:23 am (Articles & Papers)
मन के वश में रहने वाले अर्थात मन के अधीन रहने वाले मनुष्य हैं, पाश अर्थात बंधन के वशीभूत होकर उसके अधीन रहने वाले पशु हैं, देवत्व अर्थात सदा देते रहने की प्रकृति से वशीभूत होकर उसके अधीन रहने वाले देवता हैं, तमोगुण व्याप्त लिप्त सदा दूसरों की चीजों के हरण में प्रवृत रहने वाले राक्षस होते हैं
खतरे में पर्यावरण- श्रीमती राजबाला अरोड़ा
June 7, 2008 at 5:40 am (Articles & Papers, Blogroll, CHAMBAL, HINDI, MADHYA PRADESH, MORENA, NEWS, PATRIKA, खाना खजाना, ग्वालियर समाचार, घर/गृहस्थी/परिवार, चम्बल, जबलपुर समाचार, बच्चों का कोना, भिण्ड, मध्यप्रदेश, मध्यप्रदेश समाचार, महिलाओं के लिये, मुरैना, मुरैना समाचार, राष्ट्रीय/अन्तर्र, रोजगार/कैरियर, लेख/आलेख/फीचर्स, लेख/आलेख/फीचर्स, व्यंग्य, समाचार, हास्य)
खतरे में पर्यावरण
श्रीमती राजबाला अरोड़ा
एम.एससी(बॉटनी)
बी.जे.सी,
प्रकृति के पाँच तत्व जल, अग्नि, वायु, आकाश एवं पृथ्वी पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं जिनका आपस में गहरा सम्बंध है । इन पाँचों तत्वों में किसी एक का भी असंतुलन पर्यावरण के लिये अपूर्णनीय क्षतिकारक और विनाशकारी है । पर्यावरण दो शब्दों परि और आवरण से बना है जिसका अर्थ है चारों ओर का घेरा हमारे चारों ओर जो भी वस्तुएं, परिस्थितियां या शक्तियां विद्यमान हैं, वे मानवीय क्रियाकलापों को प्रभावित करती हैं और उसके लिये दायरा सुनिश्चित करती हैं । इसी दायरे को पर्यावरण कहते हैं ।
पर्यावरण के अंग्रेजी शब्द इनवायरन्मेंट का उद्भव फ्रांसीसी भाषा के इनविरोनिर शब्द से हुआ है, जिसका अर्थ है घेरना । इनवायरन्मेंट का समानार्थक शब्द हैबिटैट है जो लैटिन भाषा के हैबिटायर शब्द से निकला है । हबिटैट शब्द पर्यावरण के सभी घटकों को स्थानीय रूप से लागू करता है इसका प्रभाव आवास स्थल तक सीमित है । जबकि इनवायरन्मेंट शब्द हैबिटैट की तुलना में अधिक व्यापक है ।
देखा जाये तो पर्यावरण को दो प्रमुख घटकों में विभाजित किया जा सकता है । पहला जैविक अर्थात बायोटिक जिसमें समस्त प्रकार के जीवजन्तु व वनस्पतियां (एक कोशिकीय से लेकर जटिल कोशिकीय तक ) दूसरे प्रकार के घटक में भौतिक अर्थात अजैविक जिसमें थलमण्डल, जलमण्डल व वायुमण्डल सम्मिलित हैं । इन सभी घटकों में सृष्टि ने मानव जीवन की सर्वश्रेष्ठ जीव के रूप में उत्पत्ति की है । अत: मानव सम्पूर्ण जीव जगत का केन्द्र बिन्दु है । पर्यावरण के सभी महत्वपूर्ण घटक मानव को परावृत्त करते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी पर्यावरण के प्रभावों को परिलक्षित करती है। वस्तुत: अनुवांशिकी एवं पर्यावरण ये दो महत्वपूर्ण कारक मानव जीवन को प्रभावित करते हैं । समस्त जीवों में सर्वश्रेष्ठ जीव होने के नाते मनुष्य ने प्रकृति की प्राकृतिक सम्पदाओं का सदियों से भरपूर दोहन किया है । लेकिन वर्तमान दौर में बढ़ती जनसंख्या, पश्चिमी उपभोक्तावाद एवं वैश्विक भूमण्डलीकरण के मकड़जाल में फँस कर मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सुख को खोता जा रहा है । वह नहीं जान पा रहा कि कंकरीट का शहर बसाने की चाहत के बदले में वह अपना भविष्य दाँव पर लगा बैठा है ।
प्रकृति के समस्त संसाधन प्रदूषण की चपेट में है । हवा, जल और मिट्टी जो हमारे जीवन के आधार हैं जिनके बिना जीवन की कल्पना ही बेमानी है , आज अपना मौलिक स्वरूप एवं गुण खोते जा रहा है । पर्यावरण की छतरी अर्थात ओजोन परत जो हमें सौर मण्डल से आने वाली घातक किरणों से बचाती है उसमें छेद होना, वातावरण में बढ़ती कार्बन डाई-आक्सॉइड की मात्रा से उत्पन्न समस्या ग्लोबल वार्मिंग, दिनो दिन घातक बीमारियों का प्रादुर्भाव व स्वास्थ्य संकट ये सब मानव के समक्ष एक विकराल दानव का रूप ले चुके हैं जो भस्मासुर की तरह समस्त मानव जाति को लीलने को आतुर हैं, जिससे सावधान होना बहुत जरूरी है ।
जैव मण्डल में मौजूद संसाधनों में जल सर्वाधिक मूल्यवान है क्योंकि यह केवल मानव ही नहीं अपितु सभी जीवों तथा वनस्पति के लिये उपयोगी है । प्रकृति में जल तीन रूपों में विद्यमान है ठोस, तरल एवं गैस । ठोस के रूप में बर्फ जल का शुध्द रूप है । इसके बाद वर्षा का जल, पर्वतीय झीलें, नदियां एवं कुएं शुध्दता क्रम में आते हैं । धरातल पर प्रवाहित तथा झीलों, तालाबों आदि के रूप में उपलब्ध स्वच्छ जल की मात्रा केवल 7 प्रतिशत है । लेकिन बढ़ती संख्या , कुकरमुत्ते से उगे बहुमंजिला इमारतों , खेती में रसायनों का उपयोग तथा रासायनिक फैक्ट्रियों से निकला पानी नदियों, तालाबों, झरनों को प्रदूषित कर रहा है, जो मानव जाति सहित जीवजन्तुओं के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक साबित हो रहा है । जल को प्रदूषित करने वाले तत्व जल में मौजूद ऑक्सीजन के स्तर को कम कर जल को पीने योग्य नहीं रहने देते।
वसुन्धरा को माता का दर्जा दिया गया है जो अपने गर्भ में मौजूद तमाम आवश्यक धातुओं, अधातुओं, खनिज लवणों के सहयोग से बीज का पोषण कर खाद्य पदार्थ के रूप में विकसित करती है जो समस्त जीव जन्तुओं में जीवन का संचार करते हैं । भूमि या मिट्टी भी जल की भाँति सर्वाधिक मूल्यवान संसाधन है,क्यों कि विश्व के 71 प्रतिशत खाद्य पदार्थ मिट्टी से ही उत्पन्न होते हैं यह संसाधन इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता कि सम्पूर्ण ग्लोब के मात्र 2 प्रतिशत भाग में ही कृषि योग्य भूमि है लेकिन बढ़ती जनसंख्या के पोषण के लिये खाद्यानों की बढ़ती मांग के कारण कृषि उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जा रहा है । जिसके कारण विश्व में खाद्यान्न की समस्या पर काफी हद तक काबू किया जा सका है लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी के प्रयोग, नित नए रासायनिक उर्वरकों, रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण धरती की उर्वरता कम हो गई है। शहरों व महानगरों से निकला अपशिष्ट पदार्थ जैसे पॉलीथिन, कूड़ाकरकट, राख, औद्योगिक अपशिष्ट, दफ्ती, चमड़ा, शीशा, रबर आदि के कारण मिट्टी के प्रदूषण को तेजी से बढ़ावा दिया है ।
पृथ्वी के चारों ओर गैसों का घेरा है जिसे वायुमण्डल कहते हैं । यह वायुमण्डल विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण है जिसमें लगभग 73 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन एवं .03 प्रतिशत कार्बन डाई-ऑक्साइड है । ये सभी तत्व पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने में सहायक हैं । पृथ्वी पर मौजूद पेड़ पौधे वायुमण्डल में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड को अवशोषित कर प्रकाश की उपस्थिति में एवं जड़ों के माध्यम से जल एवं आवश्यक खनिज लवण लेकर अपना भोजन तैयार करते हैं । बदले में ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं यही ऑक्सीजन वायुमण्डल में मिलकर मानव जाति के लिये प्राणवायु का काम करती है। मनुष्य व जीव-जन्तु भी जब वातावरण से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तो कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं जो कि पेड़ पौधों के लिये भोजन बनाने में सहायक होती है । इस प्रकार हम कह सकते हैं कि पर्यावरण में मौजूद सभी घटक सिम्बायोटिक तरीके से एक दूसरे से सम्बध्द है और इस प्रकार पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है लेकिन विकसित देशों की प्रभुता की लालसा ने अंधाधुंध परमाणु हथियारों का जखीरा खड़ा करने, रासायनिक हथियार बनाने की होड़ ने मनुष्य को अंधा बना दिया है। बढ़ती जनसंख्या के कारण मनुष्य ने वनों को काटकर कंकरीट की बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर ली । ऐसा कर उसने अपने भविष्य का नाश कर दिया । पेड़ों के कटने के कारण कार्बन डाई ऑक्साइड का संतुलन बिगड़ने से ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा मिला है। वायुमण्डल में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड वातावरण के तापमान को भी नियंत्रित करती है । पेड़ों के कटने के कारण वायुमण्डल में कार्बन डाई ऑक्साइड की निरंतर बढ़ती मात्रा के कारण वातावरण के तापमान को दिनों-दिन बढ़ाती जा रही है जो अप्रत्यक्ष रूप से वर्षा, सर्दी, गर्मी के चक्र को भी प्रभावित कर रही है । निकट भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का जलस्तर इस हद तक बढ़ जायेगा कि समुद्र के किनारे बसे समूचे शहरों को लील जाए तो अतिशयोक्ति न होगी ।
पर्यावरण के इस असंतुलन की जिम्मेदार हमारी समस्त मानव जाति है । यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो विनाश अवश्यंभावी है । इसीलिए वेद मनीषियों ने भी द्यूलोक से लेकर व्यक्ति तक शांति की प्रार्थना की है
ओं द्यौं :शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति:पृथिवी शान्तिराप:
शान्तिरोषघय: शान्तिर्वनस्पतय: शान्ति र्विश्वे देवा:
शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वंशान्ति: शान्तिरेव
शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ (शुक्ल यजुर्वेद)
श्रीमती राजबाला अरोड़ा
एम.एससी(बॉटनी)
बी.जे.सी,
दूंगा दस लाख को हर साल रोजगार, बेटियों को बना दूंगा वरदान, म.प्र. को नंबर 1 का स्टेट और खेती को कर दूंगा मुनाफे का सौदा – आंधी वारिश के बीच गरजे बरसे सी.एम. शिवराज सिंह
June 7, 2008 at 5:33 am (Articles & Papers, Blogroll, CHAMBAL, HINDI, MADHYA PRADESH, MORENA, NEWS, PATRIKA, खाना खजाना, ग्वालियर समाचार, घर/गृहस्थी/परिवार, चम्बल, जबलपुर समाचार, बच्चों का कोना, भिण्ड, मध्यप्रदेश, मध्यप्रदेश समाचार, महिलाओं के लिये, मुरैना, मुरैना समाचार, राष्ट्रीय/अन्तर्र, रोजगार/कैरियर, लेख/आलेख/फीचर्स, लेख/आलेख/फीचर्स, व्यंग्य, समाचार, हास्य)
दूंगा दस लाख को हर साल रोजगार, बेटियों को बना दूंगा वरदान, म.प्र. को नंबर 1 का स्टेट और खेती को कर दूंगा मुनाफे का सौदा – आंधी वारिश के बीच गरजे बरसे सी.एम. शिवराज सिंह
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’
- मैं मुख्यमंत्री जैसा नहीं लगता, लगता ही नहीं कि मैं मुख्यमंत्री हूँ
- वीरों की जन्मदाता, जन्मजात फौजीयों की प्रसूता, महान अमर शहीद रामप्रसाद विस्मिल की इस धरती इस जन्मभूमि को मेरा प्रणाम
- प्रदेश की हर बेटी मेरी बेटी है, बनाऊंगा लखपति, करूंगा उसका ब्याह
- मैं 11 रूपये का किलो गेंहूं खरीदूंगा, बेचूंगा 3 रू किलो में, नहीं मरने दूंगा किसी को भूखा
- नहीं रहेंगे प्यासे खेत, जानवर और लोग
- नहीं मरने दूंगा किसी को इलाज के बगैर, हर गरीब का बड़े से बड़ा मुफ्त इलाज कराऊंगा
- हरेक को दूंगा काम, धन्धा और रोजगार, स्वरोजगार की नई योजना शीघ्र दूंगा
- कांग्रेस ने केवल राज किया, और हमने की गरीब की सेवा
- मैं सेवक, मैं पुजारी जनता का, बोलो मैं सी.एम. हूं कि तुम्हारा भईया
पोरसा 4 जून 2008, आज यहॉं मुरैना जिला की पोरसा तहसील के मण्डी प्रांगण में म.प्र. के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने एक पंच सरपंच कार्यक्रम के दौरान विशाल जनसभा में तकरीबन पॉंच छह हजार लोगों के जनसमूह को सम्बोधित करते हुये अपनी राजनीतिक शैली के सारे दॉंव पेंच जम कर इस्तेमाल किये वहीं मनमोहक वायदों और घोषणाओं की झड़ी लगा दी । मुख्यमंत्री ने इस दरम्यान कई शिलान्यास भी किये और जनता से आगामी चुनावों पर जनता से सीधा प्रत्युत्तरीय संवाद भी किया ।
विलम्ब से पहुँचे मुख्यमंत्री
हालांकि मुख्यमंत्री के पोरसा आगमन से पूर्व शिवपुरी और कोलारस के कार्यक्रम तय थे और अंचल के प्रशासनिक क्षेत्र व पत्रकारों तथा जनता के बीच एक अनुमान की लहर थी कि मुख्यमंत्री डेढ़ या दो बजे तक पोरसा पहुँच जायेंगे, सो अधिकांश लोग सुबह साढ़े ग्यारह बजे से ही कार्यक्रम स्थल पर पहुँच गये थे । मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर लगभग पौने चार बजे पहुँचे तब तक जनता का गर्मी, पसीने और भीड़ से बुरा हाल हो चुका था । हवायें बन्द थीं ऊपर से तेज धूप और चारों ओर से बन्द वातावरण के साथ हजारों लोगों के बदन की गर्मी ने वहॉं का माहौल तपती भट्टी जैसा कर दिया था ।
पत्रकारों का दौरा और कवरेज
स्थानीय पोरसा के पत्रकार वहॉं सुबह से ही विद्यमान थे जबकि हमारी टीम (मुरैना वाले सभी) लगभग डेढ़ बजे वहॉं पहुँचे ।
अब चूंकि वहॉं भीड़ भड़क्का भी ज्यादा था और दूसरे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में भारी किफायत बरती गयी थी, अत: कुछ अव्यवस्थायें वहॉं स्वत: ही व्याप्त हो गयीं ।
पत्रकारों के लिये कुल 10 कुर्सियां वहॉं डाली गयीं थीं वह भी तीखी धूप के ठीक सामने । मुरैना जिला जनसम्पर्क कार्यालय ने अपनी व्यवस्थाओं के चलते पत्रकारों के दो दल अलग अलग भेजे जिससे किसी को असुविधा न हो, वहीं विभागीय टीम पृथक से अलग टीम में पहुँचे ।
यह मेरा सौभाग्य था कि मैं सादा गाड़ी में (बिना ए.सी. की) में सवार हुआ और वरिष्ठतम व अनुभवी पत्रकारगण मेरे साथ मेरी टीम में थे । जिसमें बेचारे दो चार नये पत्रकारों को यदि छोड़ दें तो सभी इस पोरसा यात्रा का भरपूर आनन्द लेते हुये अपनी यात्रा कर रहे थे ।
रास्ते में हमारे सीनीयर पत्रकार शुक्ला जी और हम बतियाते रहे पोरसा कार्यक्रम के सन्दर्भ में और हमारी चर्चा के मुताबिक वहॉं जो भी हुआ वह वही हुआ जैसा कि हम बतियाते रहे थे, कुछ भी भिन्न नहीं था । हमारे नये पत्रकार बन्धुओं ने भी बड़ राज की बातें बताईं जो अमूमन सौ फीसदी सच ही निकलीं । बतियाते बतियाते हम दिमनी पार कर रहे थे, मैं चर्चा के साथ दनादन फोटो भी रास्ते भर खींचता जा रहा था, पत्रकार मित्र बोले कि 90 – 100 की स्पीड पर गाड़ी है और आप फोटो कैसे खींच लेते हो, जवाब हमारे सीनीयर पत्रकार शुक्ला जी ने दे दिया कि भई ये कला है । और रास्ते के ऐसे फोटो बचत के फोटो कहे जाते हैं, और वक्त बेवक्त काम आते हैं ।
ऑंधी के साथ आये मुख्यमंत्री वारिश के साथ गये
मुख्यमंत्री हालांकि विलम्ब से कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे और आते ही सबसे पहले उन्होंने थोकबन्द शिलान्यास किये । उसके बाद मंच पर पहुँच कर कई लाड़ली लक्ष्मीयों को अपनी गोद में लेकर दुलारते हुये नाड़ली लक्ष्मी बचत पत्र सौंपे और बच्चियों को दुलारते हुये ही आशीर्वाद दिया । कई महिलाओं की मंच पर ही व्यथा सुनी तथा ज्ञापन भी प्राप्त किये । कुछ महिलाओं को कुछ सहायता देते या कुछ देते हुये भी शिवराज सिंह नजर आये लेकिन भारी शोरशराबे के बीच समझ नहीं आया कि क्या हुआ ।
इन औपचारिकताओं के बाद मुख्यमंत्री को 1857 की क्रान्ति के सम्बन्ध में कमल और रोटी यात्रा का पीला ध्वज थमाया गया । रूस्तम सिंह ने इस ध्वज में अपना हाथ बंटाया ।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस को कोसने के बजाय प्रश्नचिह्नों के भारी भरकम कठघरे में खड़ा कर दिया और लगभग अपनी हर वाक्य पंक्ति पर अपनी उपलब्धियां गिनाते हुये प्रश्न पूछते रहे कि मैंने ऐसा किया , बताओ कांगेस ने इतने साल के राज में ऐसा किया क्या, जनता बार बार प्रत्युत्तर देती रही कि नहीं किया ।
अमूमन मुख्यमंत्री के भाषण का वही रटारटाया पारम्परिक भाष्यांश ही था जो वे हर जगह हर बार बोलते हैं । लाड़ली लक्ष्मी, अन्नपूर्णा, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना वगैरह वगैरह । लगभग 90 -95 फीसदी पारम्परिक भाषण के बाद केवल कुछ नयी बातें और नयी घोषणायें मुख्यमंत्री ने वहॉं कीं ।
मुख्यमंत्री ने बेरोजगारों को एक आश्वासन घोषणा दी और कहा कि प्रदेश में किसी को भी बेरोजगार नहीं रहने दूंगा, हर साल दस लाख नौजवानों को रोजगार दूंगा । किसी को भी भूखा और बगैर इलाज के मरने नही दूंगा ।
मुख्यमंत्री ने एक स्वरोजगार योजना लाने का वायदा भी किया और कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह मध्यप्रदेश में किसी को भी रोजगार, काम धन्धे और रोजी रोटी के बगैर नहीं रहने देगा ।
शिवराज सिंह ने मध्यप्रदेश की हर बेटी को अपनी बेटी को अपनी बेटी बताते हुये उनकी शादी, पढ़ाई और लखपति बनाने की जिम्मेवारी अपने ऊपर ली ।
शिवराज सिंह ने किसानों से कहा कि जो कर्जा केन्द्र सरकार आपका उतार नहीं पायी उसे आधा शिवराज सिंह चुकायेगा आधा आप ।
मध्यप्रदेश में हर गरीब का बड़े से बड़ा इलाज मैं मुफ्त कराऊंगा, हर गरीब को हर हालत में रोटी दूंगा । म.प्र. की जनता मेरी भगवान है और मैं इस भगवान का पुजारी और सेवक हूं । मैं अगर दोबारा मुख्यमंत्री बना तो मध्यप्रदेश को नंबर 1 का राज्य बना दूंगा ।
अपनी योजनाओं की ही शिवराज व्याख्यात्मक रूप से फैला फैला कर बताते रहे और पूछते रहे कि कांग्रेस ने कभी ऐसा किया क्या ।
देश भर में बढ़ी मंहगाई पर केन्द्र सरकार मनमोहन और सोनिया को कोसते हुये गरीब पर मार कहकर मंहगाई का पूरा ठीकरा केन्द्र सरकार पर फोड़ दिया और पूछा कि अटल सरकार के राज में मंहगाई कभी बढ़ी क्या । (शायद तेल प्याज आलू भूल गये शिवराज, पेट्रोल, गैस और डीजल भी बिसरा दिया)
जनता जहॉं लगातार उन्हें प्रत्युत्तर देती रह वहीं कुछ बातों पर जनता ने स्पष्ट नकारात्मक उत्तर देकर भी शिवराज सिंह को भौंचक्क कर दिया । (हमने पूरे कार्यक्रम का वीडियो रिकार्ड किया है)
अपनी उपलब्धियां गिनाते गिनाते शिवराज सिंह अचानक लोगों से पूछ बैठे कि बताओ शिवराज सिंह अगला मुख्यमंत्री होना चाहिये कि नहीं – लोगों ने उत्तर दिया – होना चाहिये, शिवराज सिंह ने पूछा बंसीलाल अगला विधायक होना चाहिये कि नहीं – लोगों ने कहा कि नहीं, नहीं नहीं ( प्रतिक्रिया बहुत तेज व लम्बी थी लोग चीख चीख कर बोले – कुछ भद्दी गालियां भी विधायक को दीं, और कई आरोप लगा डाले) शिवराज सिंह ने कहा कि ( शिवराज हतप्रभ रह गये और चेहरा उतर गया तथा गला सूख कर आवाज चिपक गयी) भई बंसीलाल ने तो यहां के गांवों में 120 सड़के बनवाईं हैं, – लोगों ने कहा कि नहीं बनवाईं – हर सड़क में पैसा खाया है, सड़कें तो केन्द्र सरकार ने बनवाईं हैं । सारी सड़के खराब हैं, घटिया माल डाला है, उखड़ गयीं हैं । आगे शिवराज बंसीलाल की उपलब्धियों के बारे में कुछ न बोलते हुये बात बदल कर बोले कि तो संध्याराय विधायक होना चाहिये कि नहीं (उल्लेखनीय है संध्या राय इस समय अम्बाह पोरसा की नहीं बल्िक अन्य विधानसभा क्षेत्र दिमनी विधानसभा की विधायक हैं और दिमनी विधानसभा में काफी अलोकप्रिय और बदनाम हैं ) लोग बोले कि चल जायेगी, (मंचासीन मुंशीलाल और अशोक अर्गल के खिसिया कर चेहरे उतर जाते हैं, दिमनी विधानसभा सीट सामान्य हो जाने से अम्बाह विधानसभा सीट के लिये ये भी प्रत्याशी बनना चाहते हैं)
मामला कुछ गर्मा गया था, शिवराज सिंह स्थिति भांप चुके थे । अत: बोले कि बताओं मैं मुख्यमंत्री हूं कि तुम्हारा भईया लोग बोले कि मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह ने संशोधन करवाते हुये कहा कि भईया कहो भईया मैं तुम्हारा भईया हूं ।
उल्लेखनीय है कि चम्बल अंचल में स्वयं शिवराज सिंह की व्यक्तिगत छवि काफी अच्छी है और लोग ईश्वर के मानिन्द उनका सम्मान करते हैं तथा श्रद्धा से नाम लेते हैं । लोग यह भी कहते नहीं अघाते कि सात साख तक ऐसा सी.एम. नहीं होगा । सबसे बढि़या सी.एम. हैं,( गरीब का सी.एम. है ) और सबकी सुनता है, सुन लेता है और मदद कर देता है, हरेक के काम कर देता है । सी.एम. शिवराज ही रहना चाहिये वगैरह वगैरह ।
मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि बताओ क्या मैं मुख्यमंत्री जैसा लगता हूं क्या, फिर खुद ही कहा कि मैं मुख्यमंत्री जैसा लगता ही नहीं हूं, न मेरे पास रूतबा है न रूकावट, मैं आपका हूं आपके बीच हूं । आपके ही बीच रहना चाहता हूं । फिर पूछा बताओं कांग्रेस में कभी कोई पी.एम. या सी.एम. ऐसा हुआ क्या जिससे आप मजे से खुलकर बतिया लेते थे, सारी बातें कर लेते थे – लोगों ने कहा नहीं नहीं नहीं । फिर पूछा कि क्या इतनी आसानी से मिल लेते थे – लोगों ने कहा – नहीं नहीं नहीं । शिवराज सिंह ने कहा कि पुलिस की घेराबन्दी में रूतबा बुलन्द कर चलने वालों को सी.एम. बनाओगे कि अपने इस गरीब भईया को जो गरीबों के लिये काम करता है, गरीबों के लिये जीता और मरता है – लोग बोले शिवराज को शिवराज को ।
उल्लेखनीय है कि शिवराज सिंह पर आम लोग अपना हक समझते हैं और आसानी से शिवराज से मिल बतिया सकते हैं । कांग्रेस मुख्यमंत्री के यहॉं मुख्यमंत्री निवास पर द्वारापालों को ताकीद थी कि सी.एम. मुरैना भिण्ड वालों से नहीं मिलते ।
कुल मिला कर भौंचक्क हुये मुख्यमंत्री ने वारिश कह परवाह किये बगैर (वारिश के दरम्यान हुआ था भाषण) वारिश के बहाने अपना हेलीकॉप्टर पोरसा में ही छोड़ कर पोरसा अम्बाह मुरैना मार्ग से सड़क द्वारा ग्वालियर की ओर वापसी की । शायद मुरैना की सड़कों का सच टटोलने के लिये और सच उन्हें मिल भी गया होगा । नजर भी आ गया होगा ।
मुख्यमंत्री की इस कवायद से इतना तो साफ हो ही गया, सार मेहनत पर पानी फिरना तय है, लोकल जनप्रतिनिधियों की छवि बहुत खराब है बौर बंटाढार साफमसाफ है । चाहे दिमनी की संध्याराय हो चाहे बंसीलाल चाहे कोई अन्य । मामला हद तक खिलाफ है । ऊपर से परिसीमन ने सारे गणित उलट पुलट डाले हैं सो अलग । अब बिगड़े मामले का क्या इलाज मुख्यमंत्री करते हैं यह वक्त बतायेगा फिलहाल वे खुद तो अच्छे फोरम में हैं लेकिन अब भाषण भी बदल लें तो ठीक है, कम से कम कुछ नया कवरेज तो मिले ।
पत्रकारों की टिप्पणी थी (मेरी नहीं) कि यार कित्ती बार छापें एक ही बात) आप समझ गये होंगें कि वे क्या कहना चाह रहे थे ।
संध्याराय, और मुंशी तथा अशोक पर लगे आरोप
पोरसा कार्यक्रम को लेकर अन्य हरिजन नेताओं पर भाजपा और मीडिया में खुलकर आरोप लगे हैं तथा कहा गया है कि जानबूझ कर बंसीलाल को चलता करने के लिये यह रची गयी लीला (प्रायोजित कार्यक्रम) इन विरोधी नेताओं का था जिससे बंसी का टिकिट कट जायेगा । कुछ सबूत भी मौके के यही कह रहे थे ।
प्रश्न- क्या सूचना के अधिकार में जानकारी प्राप्त करने हेतु आवेदन इण्टरनेट से भेजा जा सकता है, हॉं तो कैसे, क्या इसका कोई निश्चित प्रारूप होता है जिस पर आवेदन किया जा सके – राधाकिशन सारस्वत, कब्रिस्तान रोड, गणेश पुरा मुरैना म.प्र.
June 6, 2008 at 11:19 am (Articles & Papers)
प्रश्न- क्या सूचना के अधिकार में जानकारी प्राप्त करने हेतु आवेदन इण्टरनेट से भेजा जा सकता है, हॉं तो कैसे, क्या इसका कोई निश्चित प्रारूप होता है जिस पर आवेदन किया जा सके – राधाकिशन सारस्वत, कब्रिस्तान रोड, गणेश पुरा मुरैना म.प्र.
उत्तर – भाई राधाकिशन जी, भारत के सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों के अनुसार अधिनियम की धारा 6 के अनुसार अपना सूचना चाहे जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं । इसका कोई प्रारूप नहीं है, और कोई प्रारूप पर आवेदन आपसे मांगता है इसका अर्थ है कि वह सूचना प्रदान करने में कोई रूकावट पैदा करता है या आनाकानी करता है । इस अधिनियम के अनुसार आप बगैर लिखा आवेदन केवल मौखिक रूप से प्रस्तु कर सकते हैं । आवेदन को उचित रीति में लिखना व प्रोसेस करना लोक सूचना अधिकारी व सहायक लोक सूचना अधिकारी की जिम्मेवारी है आवेदक की नहीं । आप किसी भी तरीके से सूचना मांग सकते हैं, जिसमें इलेक्ट्रानिक रीति भी शामिल है , अर्थात टेलीफोन से, ई मेल से, फैक्स से, एस.एम.एस. के जरिये, पंजीकृत डाक से या अन्य किसी भी माध्यम से अपना आवेदन सम्बन्धित लोक सूचना अधिकारी को प्रस्तुत कर सकते हैं । यदि आपके आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती या आपके आवेदन को ग्रहण नहीं किया जाता या आपको सुनाओ नहीं जाता तो आप अधिनियम की धारा 18 के तहत अपनी शिकायत राज्य या केन्द्रीय सूचना आयोग को भेज सकते हैं ।
प्रश्न- मुरैना और भिण्ड के कलेक्टरों को ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है क्या यदि हॉं तो तरीका बतायें – अनिल अग्रवाल, लहार भिण्ड म.प्र.
June 6, 2008 at 11:19 am (Articles & Papers)
प्रश्न- मुरैना और भिण्ड के कलेक्टरों को ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है क्या यदि हॉं तो तरीका बतायें – अनिल अग्रवाल, लहार भिण्ड म.प्र.
Dear Sir ,
Can we complaint to Morena/ Bhind Collector Online, Give me procedure – Aaapka Anil Agrawal, Lahar, Bhind.
उत्तर- प्रिय अनिल भाई, अभी मुरैना और भिण्ड के कलेक्टरों ने अपनी ई गवर्नेन्स सम्बन्धी या ऑन लाइन समाधान की वेबसाइटें शुरू नहीं की हैं, म.प्र. के केवल कुछ जिलों के कलेक्टरों ने ही केवल अभी यह सुविधा प्रदान की है । इण्टरनेट की दुनियां में अभी भिण्ड मुरैना (सारी चम्बल) का जिला प्रशासन बेहद पिछड़ा और चेतनाहीन है । आप सजग व सतर्क प्रशासन के आने तक यह इंतजार करें । वैसे आप ई मेल से अवश्य अपनी शिकायत दोनों जिलों के कलेक्टरों को भेज सकते हैं । अथवा आप हमारी ई सेवायें इस सम्बन्ध में प्रयोग करके इन दोनों जिलों के कलेक्टरों को अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं । अन्य तरीका यह है कि आप म.प्र. शासन के जन शिकायत निवारण विभाग की वेबसाइट का उपयोग करके अथवा हमारी ई सेवा का उपयोग करके म.प्र. के मुख्यमंत्री जी को अपनी शिकायत दर्ज करा दें, आपकी शिकायत अपने आप सही जगह पहुँच जायेगी ।



