शनीश्चरी अमावस्या 18 अप्रेल को बहुत ही थोड़े समय के लिये वह भी शाम के बाद और रात के वक्त रहेगी, शनि मंदिर में दर्शन संभव किन्तु अन्य कारणों से
अमावस्या बिद्धा तिथि‍ रहेगी और उदयकालीन तिथि‍ नहीं रहेगी अबकी बार 18 अप्रेल को शनीश्चरी अमावस्या
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’
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शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या की तिथि‍ को शनीश्चरी अमावस्या कहा जाता है और शनीश्चरी अमावस्या को शनिदेव का दर्शन पूजन दान , मान मनौती आदि करना बहुत शुभ माना जाता है । भारतवर्ष और विदेशों में लोग सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या जिसे ‘’सोमवती अमावस्या’’ कहा जाता है में तीर्थ जल स्नान व गंगा स्नान को बहुत पुण्यप्रद व धर्म अर्थ मोक्षादि प्राप्तिव हेतु सर्वोत्तम माना जाता है , वहीं शनीवार को पड़ने वाली शनीश्चरी अमावस्या को शनि पूजा, दान, दर्शन, मान मनौती आदि करने के लिये सर्वोत्म माना जाता है ।
इसी प्रकार मंगलवार को पड़ने वाली ‘’भौमवती अमावस्या’’ या शुक्रवती अमावस्या या रविती अमावस्या जो कि रविवार को रहती है , इन सबके अलग अलग अर्थ, फल , धर्म , पुण्य विधान मान्य व प्रचलित है ।
किन्तु सबमें कई चीजें महत्वपूर्ण हो जातीं हैं, मसलन ग्रह स्थि्ति गणना, नक्षत्र स्थि‍तियां , तिथि‍ की स्थिहति, वार आदि की स्थिरति , कुल मिलाकर ज्योतिषीय गणना , तंत्रिक गणनायें इत्यादि , अन्यथा सब व्यर्थ हो जाता है ।
फिलवक्त आने वाली 18 अप्रेल को पड़ने जा रही शनीश्चरी अमावस्या का जिक्र ही इस आलेख की विषवस्तु है । ज्योतिषीय व तांत्रिकीय स्थि‍ति के अनुसार शनिवार 18 अप्रेल को यह उदयकालीन तिथि‍ के रूप में अमावस्या के रूप में नहीं पड़ रही है बल्किइ बिद्वा तिथि‍ हो जाने और चतुर्दशी तिथि‍ का क्षय हो जाने के कारण और त्रयोदशी तिथि‍ का कालक्रम बढ़ जाने के कारण इस अमावस्या तिथि‍ का 18 अप्रेल की उदयकाल रात्रि में चला गया है । और रात्रिकाल में यह तिथि‍ में 12 बजकर 26 मिनिट पर उदय होगी , जबकि मुरैना के हिसाब ( शनीश्चरा मंदिर चूकि मुरैना में शनि पर्वत पर स्थापित है , इसलिये मुरैना की तिथि‍ काल गणना मान्य की जायेगी , यह तिथि‍ उदयकाल मुरैना में रात्रि 12 बजकर 06 मिनिट पर होगा । जबकि चंद्र राशि‍ परिवर्तन प्रवेश काल सायं 5 बजकर 21 मिनिट पर और मुरैना के हिसाब से सायं 5 बजकर 01 मिनिट पर होगा ।
सूर्य और चन्द्र एकस्थ राशी होकर एक ही अंश पर होने से अमावस्या तिथि‍ का निर्माण व प्रचलन होता है । इसके ठीक उलट विपरीतस्थ आमुख सामुख समान अंश होने पर पूर्णिरमा तिथि‍ बनती है ।
इस समय चूंकि 14 अप्रेल को सूर्य का राशि‍ संक्रमण (संक्रान्ति‍) हुआ है और राशि‍ परिवर्तन कर मेषस्थ हुये हैं , जबकि चन्द्रमा का राशि‍ संक्रमण ( चान्द्र संक्रान्ति ) कर राशि‍ परिवर्तन कर 18 अप्रेल को सायंकाल में ऊपर लिखे सायंकाल समय में होगा । इसलिये चान्द्र संक्रमण काल के हिसाब से सायंकाल में 5 बजे के बाद ( मुरैना शनि पर्वत – शनिधाम के लिये) अन्य स्थान पर अन्य समयकाल लागू होंगें , के पश्चात ही शनि प्रावधान लागू किये जा सकते हैं, जो कि बहुत ही हल्के प्रभाव के होंगें क्योंकि शनि व सूर्य दोनों ही अर्थात अमावस्या तिथि‍ इस वक्त सूर्य 3 अंश 34 कला पर होंगें और चन्द्रमा शून्य कला पर होंगें । परिणाम स्वरूप यह तिथि‍ काल हालांकि लगभग प्रभावहीन एवं महत्वहीन होगा जो कि रात्रि में 12 बजे के बाद सूर्य चन्द्र के समान अंश व कला पर आने के बाद और चन्द्र कलायें विकलायें बढ़ने के बाद ही असल तिथि‍ अभ्युदय अमावस्या का उदयकाल गण्यमान्य होगा ।
चूंकि शनि इस समय वक्री चल रहे हैं और वृश्चि क राशीस्थ होकर 18 अप्रेल को करीब 9 अंश 54 कला पर हैं , लिहाजा प्रचण्ड व प्रबल न होकर भी फिलवक्त होशमंद हैं , जो कि कुछ समय बाद स्वयं ही प्रभावहीन होना प्रारंभ हो जायेंगें ।
उधर चूंकि सूर्य मेष राशीस्थ होकर इस समय उच्च राशीस्थ होकर उच्च के सूर्य के रूप में विद्यमान हैं और 23 या 24 अप्रेल से अपने उच्च असर में आ जायेंगें और मई के पहले हफ्ते तक उच्च के प्रबल व प्रचंड प्रभाव में रहेंगें , वहीं इसी दरम्यान ठीक अगले हफ्ते 24 व 25 अप्रेल को चन्द्रमा भी राशि‍ संक्रमण कर वृषस्थ होकर उच्च राशीस्थ हो , चन्द्रमा भी उच्च का हो जायेगा । स्पष्टत: ग्रह स्पष्ट गणना के अनुसार 24 एवं 25 अप्रेल को सूर्य व चन्द्रमा अपनी उच्च स्थि्ति व उच्च राशि‍ में होर उच्च के रहेंगें , वहीं तब जबकि इस समय गुरू मार्गी हो चुके हैं और अपनी उच्च राशि‍ कर्क में विद्यमान होकर उच्च के गुरू अति प्रचण्ड व बलवान होकर मौजूद हैं । कुल मिलाकर 24 एवं 25 अप्रेल को तीन ग्रह एक साथ , जो कि अति महत्वपूर्ण व ज्योतिष के अनुसार बेहद ज्यादा करामती है और अकेला चन्द्रमा जो 108 राजयोगों का निर्माण कर देता है, अकेला सूर्य अनेक राजयोंगों का निर्माण कर देता है, अकेला गुरू कई सारे राजयोगों का निर्माण कर देता है , जब ये तानों ग्रह एक साथ उच्च के होंगें तो निसंदेह अनेकानेक ( सैकडों या हजारों राजयोगों के निर्माण कर देने में सक्षम होंगें) राजयोग स्वत: ही बना देंगें भले ही शनि बलवान व वक्री होकर इस समय कही भी किसी भी हालत में हो , ये तीन अकेले सब पर बहुत भारी पड़ेंगें ।
अब निष्कर्ष यह प्राप्त होता है कि चूंकि शनिदेव , सूर्य के पुत्र हैं और शनि भले ही सूर्य से शत्रुता मान कर वैर रखते हों लेकिन सूर्य के वे बहुत लाड़ले व प्रिय हैं । लिहाजा जन्म कुंडली में जिना शनि गोचर ठीक चल रहा हो वे शनिवार 18 अप्रेल को सूर्य के उच्च रहते दिन भर में कभी सूर्यास्त पूर्व शनि मंदिर में शनि संबंधी समस्त कार्य भले ही कुशलता पूर्वक संपादित कर सकते हैं , अन्य के लिये व्यर्थ या प्रभावहीन व फलहीन होंगें ।
जबकि चन्द्र राशि‍ संक्रमण काल या सायंकाल के बाद अन्य व्यक्तिी भी शनि संबंधी शनीश्चरी अमावस्या की पूजन दर्शन व अन्य क्रियाविधि‍ संपन्न कर सकते हैं , किन्तु असल अमावस्या रात्रिकाल में ही रहेगी और शनि मंदिर में शनीश्चरी अमावस्या संबंधी पूजन , दानादि सहित समस्त कार्यादि संपन्न किये जाने का विधान काल होगा । यद्यपि यह दीगर बात होगी कि 18 अप्रेल रात्रिकाल में भी सूर्य व चंद्र बहुत कम अंश पर विलय कर विलीन होंगें अत: यह अमावस्या काफी हल्की या बहुत ही कम या अल्प लाक्षणि‍क प्रभाव वाली होगी । Shanishari Amavasya

भि‍ण्ड पहुँचे शि‍वराज सिंह ने कहा म.प्र. में किसान राहत कोष व खुद की सरकारी बीमा कंपनी बनाये जायेगें अगर किसान का नुकसान कम लिखा तो नौकरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा – शि‍वराज सिंह


भि‍ण्ड पहुँचे शि‍वराज सिंह ने कहा म.प्र. में किसान राहत कोष व खुद की सरकारी बीमा कंपनी बनाये जायेगें
अगर किसान का नुकसान कम लिखा तो नौकरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा – शि‍वराज सिंह
आप पार्टी के प्रदेश संयोजक उतरे जल सत्याग्रह में , आम आदमी पार्टी चलाएगी “जल सत्याग्रह” के समर्थन में पूरे प्रदेश में आंदोलन
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भिंड- 13 अप्रेल 15 मुख्यमंत्री शिवराज सिंह आज भि‍ण्ड जिले की गोहद तहसील के सुहांस गांव पहुंचे, खुद खेतों में जाकर देखा फसल का नुकसान, इस अवसर पर शि‍वराज सिंह बोले कि हर दुःख की घडी मे मध्यप्रदेश सरकार किसान के साथ है ।
इस अवसर पर बर्बाद हुये किसानों और फसलों को देखकर म.प्र. के मुख्यमंत्री शि‍वराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि किसभी कर्मचारी या अफसर ने किसी भी किसान का या खेत का नुकसान कम लिखा तो उसे मैं नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा । चाहे वह कलेक्टर हो या अन्य कोई भी कर्मचारी या अन्य अधिकारीयों को, किसान को अब ओवर ड्यू नहीं माना जायेगा और उसे खाद बीज 0 प्रतिशत व्याज पर मिलेगा ।
हमारी मध्यप्रदेश सरकार सभी मृत किसानो की बेटियों को देंगी पचास पचास हजार रूपये , इसके साथ ही शि‍वराज सिंह ने घोषणा करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश में हम बहुत जल्द ही किसान राहत कोष बनाएंगे, और ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निबटने के सारे इंतजाम रखेंगें इसके साथ ही सरकार की खुद की बीमा कंपनी बनाने का इरादा है और बहुत जल्द हम इस दिशा में कदम उठा कर सरकारी बीमा कंपनी बनाने की ओर अग्रसर होंगें ।

आप के प्रदेश संयोजक उतरे “जल सत्याग्रह” में, आम आदमी पार्टी चलाएगी “जल सत्याग्रह” के समर्थन में पूरे प्रदेश में आंदोलन
भोपाल 13 अप्रेल 15. आम आदमी पार्टी के प्रदेश मीडिया एवं आई.टी. सेल के मार्फत जारी प्रेस विज्ञप्तिि के अनुसार विगत 11 अप्रैल को ओंकारेश्वर बाँध में 189 मीटर से ऊपर पानी भरना चालू कर दिया गया है । जिसके विरोध में सैकड़ों विस्थापितों ने तुरंत गोघलगॉव जिला खंडवा में जल सत्याग्रह शुरू कर दिया था । अभी तक इस बांध में 191 मीटर तक भर दिया गया है और इससे अनेक किसानो के खेत बिना पुनर्वास के डुबो दिए गए हैं ।
इस अमानवीय डूब के खिलाफ 11 अप्रैल से प्रभावित विस्थापितों एवं पीडि़तों द्वारा जारी जल सत्याग्रह में, आज आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल विस्थापितों के साथ में पानी में उतर कर जल सत्याग्रह में शामिल हो गए हैं । आम आदमी पार्टी 15-अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इसके खिलाफ प्रदर्शन करेगी । अग्रवाल ने साफ़ कहा है कि जब तक विस्थापितों के पुनर्वास की मांगे पूरी नहीं की जाती हैं तब तक पानी में रह कर जल सत्याग्रह जारी रहेगा चाहे भले ही शरीर गल कर खत्म ही क्यों ना हो जाए । Shivraj

तो अब क्या यह मान लिया जाये कि अगला बड़ा और दमदार मुकाबला ‘’आप’’ और ‘भाजपा’’ के बीच होगा


तो अब क्या यह मान लिया जाये कि अगला बड़ा और दमदार मुकाबला ‘’आप’’ और ‘भाजपा’’ के बीच होगा
‘’ आप ‘’ के विरोध प्रदर्शन की भोपाल रैली में उमड़ा जन सैलाब और जिलों में चल रही आप की सक्रिय गतिविधि‍यों से भाजपा की पेशानी पर चिंता की लकीरें खिंचीं
* कांग्रेस से खतरा मुक्त हुई भाजपा के लिये ‘’आप’’ ने बजाया खतरे का अलार्म * भाजपा में ‘’आप’’ के बढ़ते सैलाबी तूफान को लेकर अंदरूनी हाई अलर्ट * भाजपा ने तैयार की रणनीति खेल सकती है राजनीति का तिकड़मी पेच
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
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मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मरणासन्न सन्नाटे में धकेलकर तकरीबन जमींदोज व नेस्तनाबूद कर चुकी बेफिक्री व निशंक तेवरों में जी रही लेकिन केन्द्र सरकार से परेशान और आंतरिक झंझावात और भंवर में उलझी म.प्र. की भारतीय जनता पार्टी के लिये एक चुनौती के रूप में लगातार आगे बढ़ रही ‘’आम आदमी पार्टी’’ की निरंतर सक्रियता ने और उसमें लगातार बढ़ते जा रहे जन सैलाब ने म.प्र. भाजपा की पेशानी पर चिंता की लकीरें खींच कर , आने वाले वक्त में बड़े मुकाबले और खतरे का अलार्म बजा कर आगे होने वाली कबड्डी की ताल ठोक दी है ।
राजनीतिक तौर पर इसका दूसरा संदेश यह जाता है कि म.प्र. की भाजपा सरकार के विरूद्ध आम आदमी पार्टी और कांग्रेस लगभग एक ही जैसे मुद्दों या एक जैसे सियासी शतरंजी दांव पेंच खेलने जा रहे हैं । और जाहिर है कि इसका सीध सीधा जमीनी नुकसान भाजपा को कम और कांग्रेस को ज्यादा होगा । वर्तमान हालात देखकर लगता है कि यह बहुत ज्यादा संभव है , आने वाली म.प्र. विधानसभा में कांग्रेस की जगह ‘’आप’’ ले ले , हालांकि आम आदमी पार्टी यह दावा कर रही है कि वह म.प्र. विधानसभा में 150 से ज्यादा सीटें हासिल करेगी ।
लेकिन अगर जमीनी हकीकत को टटोला जाये तो आज की तारीख में इस वक्त आम आदमी पार्टी 150 विधानसभा सीटों पर तो नहीं लेकिन करीब 50 से 80 तक विधानसभा सीटों पर और करीब 6 से 8 लोकसभा सीटों पर बेहद मजबूत स्थि‍ति में नजर आ रही है ।
दोनों पार्टीयों में अंदरूनी नूराकुश्ती और रणनीतिक खेमेबाजी शुरू
अगर भाजपा और आम आदमी पार्टी के अंदरूनी हालातों की बात करें या अंदरखाने जो चल रहा है उस गोपनीय रणनीति की बात करें तो स्थि ति कही अधि‍क साफ हो जायेगी ।
भाजपा ने भी बदली रणनीति
सुनने में आ रहा है कि भाजपा ने अपना हाल ही में 15 तारीख तक किया जाने वाला म.प्र. सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टाल दिया है । और यह विस्तार बहुत जल्द या जैसा भाजपा के सूत्र बताते हैं , इसी महीने के अंत तक या मई की 10 या 15 तारीख से पहले हो लेगा , लेकिन उससे पहले अब बदली गई रणनीति के मुताबिक पहले निगमों और मंडलों में नियुक्तिकयां की जायेंगीं , उसके बाद मंत्री मंडल का विस्तार किया जायेगा । और भरोसेमंद सूत्र यह भी बताते हैं कि आने वाले वक्त में होने वाले खतरे के सारे स्थान ( सीटें) चिह्निआत कर पहचान ली गईं हैं, और तदनुसार ही अब राजनीतिक व रणनीतिक दांव पेंच व भूमिकायें भाजपा अपनायेगी । और उन सीटों को कव्हरअप करेगी जहॉं या तो भाजपा जीती नहीं थी या आगे कोई और दमदारी से उस सीट पर फाइट कर सकता है या जीत सकता है ।
आने वाले तूफान व सैलाब के प्रति भाजपा व आर.एस.एस. सतर्क
बसपा अगले चुनाव में म.प्र. से समाप्त हो जायेगी वहीं कांग्रेस बमुश्कि ल 8 या 10 सीटों पर सिमट जायेगी, जबकि ‘’आप’’ पार्टी के सशक्त विपक्ष या ‘’विकल्प’’ बन कर सन 2018 के म.प्र. विधानसभा चुनावों में सामने आ सकती है या फिर बहुत जबरदस्त कड़ी फाइट देकर खतरनाक चुनौती बन सकती है, भाजपा खेमे के अंदर चल रही मथनी से उनके व आर.एस.एस. के राजनीतिक पंडितों ने पूर्व आगाह कर दिया है । और आम आदमी पार्टी की भोपाल रैली में उमड़े जन सैलाब ने और कई जिलों चल रही निरंतर राजनीतिक सक्रियता के प्रति सचेत कर, आने वाले तूफान के प्रति आगाह कर दिया है ।
आम आदमी पार्टी की भी रणनीति में खासे फेाबदल के संकेत
इधर आम आदमी पार्टी में भी कोई कम रणनीति और राजनीतिक मंथन नहीं चल रहा, वह भी प्रदेश में जान डालने के लिये प्रदेश की कमान व जिलों की कमान बहुत बड़े फेरबदल के साथ बदल कर अनुभवी दबंग व दमदार लोगों को फ्रण्ट पर लाने की तैयारी में जुटी है , आने वाले वक्त आम आदमी पार्टी की इस खास राजनीति व रणनीति का खुलासा हो सकता है । हालांकि वर्तमान प्रदेश व जिला नेतृत्वों से पार्टी के हाईकमान को कोई शि‍कायत शि‍कवा नहीं है, लेकिन खुद आम आदमी पार्टी का ही प्रदेश नेतृत्व और जिलों का नेतृत्व ऐसी दरकार व मांग कर रहा है , यह भी सोचने की बात है जहॉं सब एक कार्यकर्ता बने रहना चाहते हैं और आम आदमी बन कर ही पदों पर या बिना पदों के पार्टी के लिये काम करना चाहते हैं और खुद ही यह मांग करते हैं कि सक्रिय व दबंग व डटे जमे अड़े रहकर सोशल व पॉलिटिकल एक्सपर्ट चाहिये , कमान और नेतृत्व उनको देकर उनके साथ काम करना है । जाहिर है इस प्रकार की नीति व रणनीति भाजपा और आर.एस.एस. के लिये निसंदेह बहुत ज्यादा चिंता का विषय है , क्योंकि अब तक केवल भाजपा को ही म.प्र. में ग्रास रूट लेवल की पार्टी माना जाता है । लेकिन आप कार्यकर्ताओं की निरंतर बढ़ती फौज व किसी दमदार नेतृत्व को प्रदेश व जिलों में सामने लाया जाना बेहद खतरनाक अलार्म है । फिलवक्त आप पार्टी हाई कमान की नजर में कुछ लोग ऐसे हैं या इस प्रकार का अंदरूनी चयन कार्य चल रहा है । और भाजपा की रणनीति के हर कदम पर आप की नजर है , वहीं आप की रणनीति के हर कदम पर भाजपा की नजर है । कुल मिलाकर दोनों का पोसंपा भाई पोसंपा चल रहा है ।
खतरनाक राजनीतिक चूक से बच रहे हैं दोनों राजनीतिक दलों की राजनीति और रणनीति पर ध्यान दें तो साफिया तौर पर जाहिर हो जायेगा कि ये दोनों ही दल ‘’कांग्रेस’’ को और कांग्रेस नेताओं को ल तो लक्षि त या टारगेट कर रहे हैं और न उसका कहीं जिक्र तक कर रहे हैं । मतलब साफ है कि इनकी रणनीति में कांग्रेस आउट ऑफ फोकस और जमीनी चर्चा से बाहर का विषय है । सनद रहे कि यह दोनों दल इस गेम को दिल्ली विधानसभा चुनावों में खेल चुके हैं और कांग्रेस का सफाया कर चुके हैं , वही रणनीति म.प्र. में अपनाई जा रही है । ‘’नजर अंदाजी की भी एक जुबां और एक भाषा होती है ‘’
भाजपा और आर.एस.एस. भी तुरूप के इक्के मैदान में ला सकती है या कहिये कि अब पूरी तरह से तैयारी में है कि अपनी जंगी राजनीतिक बिसात अब बिछा दे, और इसका पता आने वाले समय में होने वाली निगम व मंडल की नियुक्ति यों सहित होने वाले मंत्रीमंडल विस्तार में झलकना चाहिये , यदि यह नहीं झलकता है तो यह मानना चाहिये कि भाजपा यह मान चुकी है कि अब म.प्र. में सरकार बदलेगी और इसके साथ ही आप पार्टी के बदलावों और रणनीति से भी यह खुलासा आने वाले वक्त में हो जायेगा कि वह म.प्र. विधानसभा में विपक्ष में बैठने जा रही है या सरकार व सत्ता में । कुल मिलाकर इतना तो साफ है कि अगला तगड़ा व जंगी मुकाबला ‘’आप’’ और भाजपा के बीच ही म.प्र. में होना है । और उस ‘’विकल्प रिक्तिस’’ या ‘’ सब्स्टीट्यूट गैप’’ की पूर्ति हो जायेगी ।
यदि दोनों ही दल इस रणनीति पर अमल करते नजर आते हैं तो यह भी बहुत ज्यादा संभव है कि आने वाले कुछ स्थानीय निकायों के चुनावों में भी ये दोनों पार्टीयां ही आमने सामने टकरा जायें और तब बसपा और कांग्रेस के लिये यह स्पष्ट अलार्म और ताबूत की अंतिम कील ठोके जाने का स्पष्ट आगाज होगा । हालांकि अभी मुरैना में भी नगर निकाय चुनाव होना है , लेकिन नगरीय निकाय चुनावों तक यदि ये दोनों दल सुनिश्चिनत रणनीति के तहत अमल नहीं करते तो सारी रणनीति को दूरगामी परिणामों अर्थात म.प्र. विधानसभा चुनाव 2018 और लोकसभा चुनाव 2019 के नजरिये से देखा जाना चाहिये । ज्ञातव्य है कि म.प्र. की भाजपा सरकार के लिये केन्द्र की मोदी सरकार भी अंदरूनी तौर पर बहुत बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी हुई है और तथाकथि‍त आर्थिजक सुधारों के नाम पर भाजपा की राज्य सरकार का बेड़ा गर्क करने पर तुली है , वहीं जनता का परिवर्तन का मूड भांपते हुये आम आदमी पार्टी अपने अलग कसीदे पढ़ना शुरू कर चुकी है ।
अरविन्द केजरीवाल की निजी रूचि ने बढ़ाया आने वाले आगाजी तूफान का खतरा
म.प्र. में आम आदमी पार्टी की भोपाल में विगत दिवस हुई विरोध प्रदर्शन रैली को और उसमें हुई भीड़ के चित्रों को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा रिट्वीट किये जाने व म.प्र. के मुख्यमंत्री शि‍वराज सिंह चौहान के नाम संदेश व उपदेश का ट्वीट किये जाने से सारा मामला राजनीतिक गर्मी पकड़ गया है, साथ यह भी स्पष्ट हो गया है कि म.प्र. की पल पल की गतिविधि‍ पर आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व न केवल बहुत गहरी नजर रख रहा है बल्कि् , आप के बढ़ते जन सैलाब व पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता से बेहद गंभीर व उत्साहित भी है । निसंदेह केजरीवाल की म.प्र. में निजी व गहरी रूचि कयामती व कहर ढा कर मंजर बदलने वाली मानी जा सकती है ।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना शादी के साथ रहने वालों जोड़े विवाहित माने जायेंगे
नई दिल्ली :: बिना शादी के साथ रहने वालों जोड़े विवाहित माने जायेंगे: सुप्रीम कोर्ट
सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। आज उसने कहा कि यदि कोई अविवाहित जोड़ा मियां-बीवी के रूप में अगर साथ रह रहा है तो उन्हें कानूनी रूप से शादीशुदा माना जाएगा और और उसे वो सारे अधिकार मिलेंगे जो कि विवाहित कपल को मिलते हैं यहां तक कि अपने साथी की मौत के बाद महिला उसकी संपत्ति की हकदार होगी। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक संपत्ति के मामले में सुनाया है। यह फैसला जस्टिस एमवाय इकबाल और जस्टिस अमिताव रॉय की बैंच ने लिया है। बैंच ने कहा कि लेकिन दोनों को इस सूरत में यह साबित करना होगा कि यह फैसला उन्होंने शादी करने के लिहाज से ही लिया है।
साथ रहने वाले जोड़े माने जायेंगे शादी-शुदा
जिस केस के तहत कोर्ट ने यह फैसला किया है वो एक संपत्ति विवाद का मामला था जिसमें परिवार का कहना था कि उनके दादा अपनी पत्नी की मौत के बाद एक महिला के साथ 20 साल से रह रहे थे इसलिए उनकी संपति में उसका हिस्सा नहीं दिया जा सकता। परिवार वालों का कहना है कि वह महिला उनके दादा की मिस्ट्रेस थी। जिस पर पीड़ित महिला ने कानून से मदद मांगी और संपति में हिस्सा भी।
कपल को मिलेंगे सारे पति-पत्नी के हक
जिस पर आज कोर्ट ने सुनवाई की और पीड़ित महिला को मृतक की कानून पत्नी मान लिया और फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि एक मर्द और औरत लंबे समय से साथ रह रहे हैं तो समाज उसे भले ही जो उपमा देता हो लेकिन अगर दोनों के साथ रहने का फैसला शादी के मद्देनजर है तो ऐसे में दोनों विवाहित माने जायेंगे । AABJP-1 AABJP-2


दिल्ली की किल्ली : जब कांप उठी धरा , थर्रा गये सब धरा मेरू , कंपित हो कांपे शेषनाग , आया सारी धरती पर भूकंप
महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमरों का साम्राज्य- 3
* पांडवों की तीन भारी ऐतिहासिक भूलें और बदल गया समूचे महाभारत का इतिहास * भारत नाम किसी भूखंड या देश का नहीं , एक राजकुल का है, जानिये क्यों कहते हैं तोमरों को भारत * ययाति और पुरू के वंशज चन्द्रवंशीय क्षत्रिय राजपूत ( पौरव – पांडव )
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
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( गतांक से आगे भाग-3 ) पिछले अंक में दिल्ली की किल्ली का जिक्र आ चुका है, या कहिये कि ‘’दिल्ली की किल्ली’’ जिसे आज लौह स्तम्भ या भीमलाट कहा जाता है और आज के महरौली नामक स्थान पर कुतुब मीनार जिसे आजकल कहा जाता है , के निकट मौजूद व स्थापित है ( इस स्थान का नाम जबकि वंशावली एवं शास्त्रों एवं प्राप्त शि‍लालेखों एवं दिल्ली की किल्ली पर खुदे लेख के अनुसार अलग है, जिसका जिक्र हम आगे करेंगें, इसे जिसे कुतुब मीनार कहा जाता है, उसका असल नाम विजय आरोह पूजन स्तंभ या श्री हरिपूजन व ध्वज पताका फहराने के लिये बनवाया गया एक समानांतर आरोही स्थल है , तोमर राजवंश की वंशावली में यह कीर्ति पताका ध्वज स्तंभ एवं श्री हरि दर्शन पूजन का आरोही स्थल के रूप में वर्णिबत है ।
दिल्ली की किल्ली की स्थापना – तोमर राजवंश की महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की राजघराने की मूल वंशावली, इंद्रप्रस्थ के किले , लालकोट परिसर व आसपास मिले प्राचीन शि‍लालेखों और स्वयं दिल्ली की किल्ली पर खुदे लेख में , किल्ली की स्थापना का व उस पर लेख खोदे जाने के समय काल का वर्णन है , जो कि विक्रम संवत 1109 से महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर (द्वितीय) के महाराजा बनने का समय अंकित है, जिसमें महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर ( द्वितीय ) द्वारा इसे गाड़कर स्थापित करने एवं भूकंप कर धरती व शेषनाग को थर्रा देने का जिक्र है । शि‍लालेखों एवं तत्समय लिखे गये ग्रंथों ‘’विबुध श्रीधर’’ और ‘’पृथ्वीराज रासो’’ में उल्लेख है कि शेषनाग जो अपने शीष पर मणि‍यों की महामणि‍यां धारण करते हैं , उन्हें कंपा देने वाला या हिला दे कर थर्रा देने वाला कार्य आज तक किसी ने नहीं किया , वह कार्य चन्द्रवंश के राजपूत क्षत्रिय महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर ने कर दिखाया , महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के एक ही हाथ से, एक ही हुंकार में कील धरा में बल भर कर ठोक देने से शेषनाग कंपित हो गये और बुरी तरह थरथरा गये , यह कार्य सूर्यवंश , चन्द्र वंश ही कोई भी नहीं बल्किह इस चर अचर संपूर्ण जगत में , सुर , असुर , लोक परलोक में आज तक कोई नहीं कर पाया, शेषनाग के थरथरा कर कांप जाने से से सारी भूमि धरा पृथ्वी कांप गई और समूची भूमि कंपित हो कर बुरी तरह हिल उठी । खैर यह जिक्र व विषय विस्तार हम आगे करेंगें और इन ग्रंथों में कही गयी बातों पर एवं इस किल्ली की स्थापना की वजह एवं स्थापित करने का तरीका और कारण पर आगे विस्तृत विस्तार से चर्चा करेंगें ।
लौह स्तंभ यानि कि दिल्ली की किल्ली पर खुदे लेख , तोमर राजवंश की वंशावली और प्राप्त शि‍लालेखों या शि‍लापट्टि काओं या अन्य चिह्नों व निशानों पर महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर का राजतिलक व शासनकाल की शुरूआत व इस कील के स्थापना लेखादि में, इस कील या लौह स्तम्भ या किल्ली पर लेख में महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर का शासन काल विक्रम संवत 1109 से एवं अग्रेजी में सन के हिसाब से कहें तो ( ईसवी सन के अनुसार ई. सन 1052) से शुरू होना व कील की स्थापना करना अंकित है और इस लेख व किल्ली स्थापना ( गाड़े जाने) के लेख में चन्द्रवंश के प्रतापी राजपूत क्षत्रिय महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर ( द्वितीय) द्वारा इसकी स्थापना का उल्लेख है ।
…. क्रमश: अगले अंक में जारी  Anangpal Part-3

द्वापर काल में भगवान श्री कृष्ण का लोकतंत्र , संसद , कानून और प्रजातांत्रिक राजाज्ञायें – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”


द्वापर काल में भगवान श्री कृष्ण का लोकतंत्र , संसद , कानून और प्रजातांत्रिक राजाज्ञायें
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
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प्रथम भाग – प्रथम अंक
भारत जैसे देश में अक्सर लोकतंत्र या प्रजातंत्र की बातें भी सुनाई कही जातीं हैं और यह भी बताया जाता है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा , सबसे बेहतरीन लोकतंत्र वाला देश है । इसके साथ ही यह भी बताया जाता है कि भारत में इससे पूर्व राजतंत्र था और राजतंत्र बहुत बुरा था तथा राजतंत्र के अनेक दोष व खामीयां गिनाई जातीं हैं ।
यदि जो कहा बताया या पढ़ाया जाता है उसके आधार पर लोकतंत्र की परिभाषा लिखी जाये तो कुछ यूं बनेगी ‘’ जनता का, जनता द्वारा , जनता के लिये शासन’’ ही लोकतंत्र है , और यदि राजतंत्र की परिभाषा बकौल इन के की जाये तो ये लिखी जायेगी कि राजा का प्रजा पर प्रभुत्व संपन्न एकक्ष व एकमात्र राज्य या शासन ही राजतंत्र कहलाता है ।
खैर इस विषय में विद्वानों में गहरे मतभेद हैं और विद्वान , बुद्धिजीवी, इतिहासकार, एवं कानूनविद भी इन दोनों ही परिभाषाओं को भारत के परिप्रेक्ष्य में सही नहीं मानते । और विडम्बनावश भारत में ‘’लोकतंत्र’’ या प्रजातंत्र अभी आज दिनांक तक तो केवल मात्र एक सैद्वांतिक अवधारणा है और व्यावहारिक रूप से यह आज तक भारत देश में तथाकथि‍त प्रजातंत्र अभी तक नहीं आया है, केवल व्यवस्था का नाम बदल देने या पद नाम बदल देने या मात्र व्यक्तिे बदल देने से न तो व्यवस्था बदलती है और न उसमें सुधार ही संभव होता है ।
यहॉं यह उदाहरण देना सटीक होगा कि ‘’महाराजा’’ का नाम राष्ट्रपति रख दिया जाये और किसी रियासत या राज्य के राजा का नाम राज्यपाल रख दिया जाये , बाकी सब वही अर्थात प्रधानमंत्री, मंत्री गण एवं सभासद या दरबारी गण ( सांसद और विधायक) और भी कुछ है जिस पर आगे इसी आलेख में सब कुछ चर्चा में आयेगा । बस गुड़ का नाम शक्कर रख देने से और शक्कर का नाम गुड़ रख देने से कभी भी न तो गुड़ का और शक्कर का रूप रंग स्वाद व सवभाव बदलेगा ।
किसी भी शासन व्यवस्था हो या गृह व्यवस्था केवल व्यवस्था कान , पद नाम व व्यक्तिे मात्र बदल दिये जाने से वह व्यवस्था नहीं बदलती, बल्कि् उसका रूप व स्वभाव एवं व्यावहारिक अमल विकृत एवं दूषि‍त व विद्रूपित हो जाता है , प्रणाली दोषपूर्ण एवं दोषगत हो जाती है, व्यवस्था अपना चरित्र एवं नैतिकतायें खो देती है । और अत्यंत कुरूप व भयावह स्वरूप में प्रकट हो उठती है ।
हम जो आगे विषयवस्तु लिखने जा रहे हैं कि ‘’द्वापरकाल में श्री कृष्ण का लोकतंत्र’’ यह पूर्णत: प्रमाणि‍क एवं सौ प्रतिशत साबित एवं शास्त्रीय है । सारी शासन व्यवस्था का एक सिंहावलोकन एवं विद्वजनों व सुविज्ञों के लिये यह प्रश्न छोड़कर जायेगा कि तब ( द्वापर के श्रीकृष्ण काल) और अब आज के लोतंत्र काल में , क्या फर्क है अब में और तब की शासन व्यवस्था में या उस समय के संविधान संसद कानून राजाज्ञाओं और आज के संसद , कानून, संविधान और सरकारी आदेशों में ।
हम इस विषय को सौ फीसदी प्रमाणि‍कता के साथ विषयवस्तु व समग्र सिंहावलोकनीय सामग्री के साथ पूर्ण करने के साथ ही हमारे लगातार चल रहे एक अन्य आलेख ‘’दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली सं चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा’’ में भी आगे भारत यानि तोमर राजवंश के शासन व्यवस्था के ऊपर भी कुछ प्रकाश डालेंगें व उस शासन व्यवस्था का भी एक सिंहावलोकन प्रस्तुत करेंगें ।
………. क्रमश: जारी अगले अंक में Krishna Loktantra

आंचलिक पत्रकारों के लिए लागू होंगी स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा योजनाएं * हर जिले में बनेगा प्रेस क्लब * आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार की राशि इसी साल से 51 हजार से बढकर हुई दोगुनी * इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फ़ोटो पत्रकारिता में उत्कृष्टता पुरस्कार अगले साल से * आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की घोषणाएँ


Press Club C.M.आंचलिक पत्रकारों के लिए लागू होंगी स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा योजनाएं
* हर जिले में बनेगा प्रेस क्लब * आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार की राशि इसी साल से 51 हजार से बढकर हुई दोगुनी
* इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फ़ोटो पत्रकारिता में उत्कृष्टता पुरस्कार अगले साल से * आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की घोषणाएँ
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
Gwalior Times Worldwide News & Broadcasting Services http://www.gwaliortimes.in
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंचलिक पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा योजनाएँ लागू करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इसी साल से आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार की राशि 51 हजार से बढाकर दोगुनी करने की घोषणा की। आज पुरस्कृत सभी पत्रकारों के खाते में शेष राशि जमा कर दी जायेगी।
आज यहाँ समन्वय भवन में जनसम्पर्क विभाग द्वारा स्थापित आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में श्री चौहान ने कहा कि जिला मुख्यालयों पर भी प्रेस क्लब के लिए भूमि देने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। इससे आंचलिक पत्रकारों को काम करने में सहूलियत होगी। श्री चौहान ने कहा की भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रेस क्लब बनाने के लिए रोड मैप तैयार कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने अगले साल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और फ़ोटो पत्रकारिता में उत्कृष्ट कार्य के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार स्थापित करने की भी घोषणा की।
आंचलिक पत्रकारिता की कठिनाइयों और विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने का साहस रखने वाले आंचलिक पत्रकारों की सराहना करते हुए श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्कृष्टता को सम्मानित करने की पहल की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे काम को सामाजिक मान्यता और सराहना मिलना ही चाहिए। पत्रकार समाज के प्रति अपना दायित्व निभाते हैं इसलिए समाज का भी दायित्व है कि उन्हें सम्मानित करे। उन्होंने कहा कि आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार हर साल समय पर दिए जायेंगे। श्री चौहान ने कहा कि गाँवों और कस्बों से तथ्यात्मक समाचार पाठकों तक पहुँचाना कठिन काम है। समाज में हो रहे अच्छे कामों को अभिव्यक्ति देना अपने आप में समाज की सेवा है। आंचलिक पत्रकार व्यवस्था को जगाने और सतर्क करने का काम करते है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ आलोचना को सरकार ने हमेशा सादर स्वीकार किया है और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की कोशिश की है।

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कोई भी पत्रकार, साहित्यकार, लेखक, स्वतंत्र या किसी मीडिया संस्थान से जुड़ा हुआ हो या नहीं हो , चाहे प्रिट मीडिया , इलेक्ट्रानिक मीडिया, अन्य किसी मीडिया या सोशल मीडिया से संबंध रखता हो , प्रेस क्लब की निशुल्क सदस्यता प्राप्त कर सकता है , प्रेस क्लब की सदस्यता पूरी तरह से निशुल्क है, और इसके लिये कोई शुल्क नहीं देना है । अपना आवेदन पत्र पूर्ण रूपेण भर कर हमारे व्हाटस एप्प नंबर 094257 38101 पर या हमारे ई मेल पते gwaliortimes@gmail.com  पर भेज दें । विशेष संपर्क या अन्य जानकारी हेतु हमारी वेबसाइट ग्वालियर टाइम्स http://www.gwaliortimes.in देखें । सदस्यता आवेदन पत्र निम्न है , इसे डाउनलोड कर इसका प्रिंट निकाल लें और अपने हाथ से भरकर हस्ताक्षरित कर इसे भेजें ।  – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनंद” , अध्यक्ष – चम्बल संभाग एवं मुरैना जिला म.प्रganesh vidyarthi sadasyata form

प्रेस क्लब इंदौर के प्रतिनिध‍ि मण्डल से मुख्यमंत्री आज दोपहर 1 बजे मुलाकात करेंगें – प्रेस क्लबों को सूचनार्थ द्वारा नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनंद” , अध्यक्ष प्रेस क्लब चंबल संभाग एवं जिला मुरैना म.प्र.


CM Programme

महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमर साम्राज्य * पांडवों की तीन भारी ऐतिहासिक भूलें और बदल गया समूचे महाभारत का इतिहास * भारत नाम किसी भूखंड या देश का नहीं , एक राजकुल का है, जानिये क्यों कहते हैं तोमरों को भारत * जानिये कैसे हुये क्षत्रिय उपनाम लगाने वाले जाट , गूजर और भंगी पैदा


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महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमर साम्राज्य ( भाग- 2)
* पांडवों की तीन भारी ऐतिहासिक भूलें और बदल गया समूचे महाभारत का इतिहास
* भारत नाम किसी भूखंड या देश का नहीं , एक राजकुल का है, जानिये क्यों कहते हैं तोमरों को भारत
* जानिये कैसे हुये क्षत्रिय उपनाम लगाने वाले जाट , गूजर और भंगी पैदा
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
Gwalior Times
Worldwide News & Broadcasting ServicesDilli Ki Killi Full
http://www.gwaliortimes.in

( गतांक से आगे ) भारत के इतिहास का विद्रूपीकरण व कूटरचना का सबसे बड़ा साक्ष्य और भौतिक प्रमाण कोई एक नहीं वरन सैकड़ों हजारों की संख्या में मौजूद हैं । लेकिन चूंकि यह आलेख चन्द्र वंश के महाप्रतापी पराक्रमी राजपूत महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर से संबंधि‍त है अत: इसकी विषयवस्तु को केव तोमर राजवंश तक ही सीमित रखा जायेगा ।
सबसे पहले यह उल्लेख समीचीन होगा कि क्षत्रिय राजपूत वंशों में कुल कितने क्षत्रिय कुल है और किन्हें क्षत्रिय शास्त्राज्ञा एवं राजाज्ञा द्वारा माना व घोषि‍त किया गया है ।
इस सम्बन्ध में एक दोहा क्षत्रियों में सर्व प्रचलित एवं मान्य है ।
दस रवि सों , दस चन्द्र सों , द्वादश ऋषि‍ प्रमान ।
चार हुतासन यज्ञ सों, यह छत्तीस कुली तू जान ।।
अर्थात क्षत्रियों के कुल मात्र चार वंश हैं, सूर्य वंश, चन्द्र वंश , ऋषि‍ वंश, और अग्नि वंश । इसमें अर्थात इन चार वंशों केवल संपूर्ण मात्र मिला कर छत्तीस कुल शामिल हैं, इसे क्षत्रियों की छत्तीस कुरी ( कुली) कहा पुकारा जाता है , जिसमें सूर्य वंश में केवल दस क्षत्रिय कुल हैं, चन्द्र वंश में केवल दस क्षत्रिय कुल हैं । ऋषि‍ वंश मं बारह क्षत्रिय कुल हैं । और अग्निै वंश में केवल चार क्षत्रिय कुल हैं ।
चन्द्र वंश के दस क्षत्रिय कुलों में से एक ‘’तोमर’’ क्षत्रिय कुल है , इसी प्रकार इसी चन्द्र वंश में दूसरा क्षत्रिय कुल यदु है जिसे तत्समय यादव कुल और वर्तमान में जादौन कहा जाता है, किंतु मूल कुल रूप में ‘’यदुकुल’’ ही शास्त्राज्ञा एवं राजाज्ञा से मान्यता प्राप्त है । अहीरों किरारों व अन्य गैर क्षत्रियों द्वारा कलयुग में ‘’यादव’’ शब्द अपने उपनाम में लिखे जाने से यह राजाज्ञा व शास्त्राज्ञा अनुसार यह क्षत्रिय वर्तमान में ‘’जादौन’’ क्षत्रिय राजपूत कहे पुकारे जाते हैं, और किसी भी क्षत्रिय द्वारा यादव शब्द वर्तमान में उपयोग नहीं किया जाता । भगवान श्री कृष्ण इसी यदुकुल से या जादौन वंश के राजा और राजपुत्र ( राजपूत) रहे हैं ।
इन समस्त कुलों का और वंशों का विस्तृत व विशद विवरण समस्त भारतीय ग्रंथों व शास्त्रों ( विशेषकर वेदादि) , अठारह पुराणादि में श्रीमद भागवत महाग्रंथ , श्री महाभारत , श्री खि‍लभाग हरिवंश पुराणादि में बृहद रूप से और समग्रत: वर्णिशत है ।
वंश विस्तार व कुल विस्तार पर बृहद चर्चा इस आलेख की विषयवस्तु से परे है । अत: सीधे विषय पर आते हैं ।
दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के बारे में अनेक शि‍लालेख प्राचीन दिल्ली के लालकोट परिसर, इन्द्रप्रस्थ के पुराने किले और जहॉं जहॉं से दिल्ली से चलकर महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर गुजरे वहॉं वहॉं यत्र तत्र मिलने क बाद उनका अंतिम ठिकाना ऐसाह गढ़ी जिला मुरैना म.प्र. में मिलता है ।
महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर क बारे में ‘’विबुध श्रीधर’’ ग्रंथ में बहुत विस्तार से और ‘’पृथ्वीराज रासो’’ नामक ग्रंथ में उनका विस्तार से वर्णन उपलब्ध है ।
महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के बारे में कहा गया है कि चन्द्रवंश का यह क्षत्रिय राजपूत इतना शौर्यशाली पराक्रमी , वीर व बलवान था कि महज एक हाथ से तलवार चलाता था , और इसमें इतनी प्रचण्ड शक्ति व असीम तेज था कि यह मात्र अपनी तलवार से ही पूरी की पूरी ही रोक देता था । महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के पराक्रम व वीरता के बारे में ग्रंथों व शास्त्रों में बहुत कुछ लिखा गया है ।
कैसे बने महाभारत सम्राट , इन्द्रप्रस्थ के शासक महाराजा से ‘’दिल्लीपति’’
यह विषय बड़ा ही रोचक है और इसका उल्लेख समीचीन है कि पांडव अर्जुन के महाभारत सम्राट , इन्द्रप्रस्थ का महाराजा बनने के बाद उनके पौत्र अभि‍मन्यु के पुत्र परीक्षत और उसके बाद समस्त पीढ़ीयां महाभारत सम्राट एवं इन्द्रप्रस्थ पति या इन्द्रप्रस्थ महाराज ही कहीं पुकारी गयीं म‍हाराजा अनंगपाल सिंह तोमर तक को भी महाभारत सम्राट और इन्द्रप्रस्थ पति या इन्द्रप्रस्थ महाराज कहा पुकारा गया । फिर आखि‍र ऐसा क्या हुआ कि वह ‘’दिल्लीपति’’ कहे पुकारे गये , तब जबकि दिल्ली नामक कोई भी जगह या स्थान संपूर्ण भारतवर्ष ( भारत वंश का जहॉं तक राज्य रहा, उस स्थान को भारतवर्ष कहा पुकारा जाता है )
महाभारत सम्राट इन्द्रप्रस्थ महाराज का दिल्लीपति के रूप में नाम पड़ना बहुत ही रोचक व अद्भुत वृत्तांत है । तथा इसका उल्लेख बाकायदा ग्रंथों में और शि‍लालेखों सहित महरौली दिल्ली में गड़े हुये लौह स्तम्भ जिसे ‘’दिल्ली की किल्ली’’ कहा पुकारा जाता है , इस दिलली की किल्ली पर भी यह लेख अंकित है । मजे की बात यह है कि असल लेख व असल शि‍लालेख संस्कृत भाषा में है , मगर फर्जी इतिहासकारों व इतिहास की कूटरचना करने वाले चाटुकार चारण भाटों ने इस संस्कृत के लेख व शि‍लालेख का भी अनुवाद कुछ का कुछ और ही कर दिया है । आगे हम आपको उस संस्कृत के असल लेख व शि‍लालेख तथा दिल्ली की किल्ली पर खुदे लेख का भी चित्र दिखायेंगें और उस संस्कृत की असल हिन्दी भाषा में पूरी व्याख्या व अनुवाद भी बतायेंगें ।
………… क्रमश : अगले अंक में जारी

बदल दो सारे तीर तरकश के, ये सारे तीर ए अंदाज और ये सारे वार तो हमारे आजमाये हुये हैं


बदल दो सारे तीर तरकश के, ये सारे तीर ए अंदाज और ये सारे वार तो हमारे आजमाये हुये हैं
नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”
बहुधा ऐसा होता है कि …… ना ना करके प्यार तुम्हीं से कर बैठे ….. आप महत्वहीन को महत्व देकर महत्वपूर्ण बना देते हैं, कांग्रेस की यह खूबी है कि वह कभी अपनों की चर्चा और बखान तक नहीं करती, अपने लोगों को भुलाती चली जाती है, मगर दूसरों का नाम 24 घंटे सुमिरना और उन्हें जगत प्रसिद्ध कर देना , कांग्रेस के तौर तरीकों में है । नरेन्द्र मोदी या भाजपा की यह खूबी है कि वे अपनी चर्चा कराना या खुद को कांग्रेस से महत्व दिलाने या पाने की कला में निपुण हैं , नजरअंदाजी भी प्रचार का या लोकप्रिय होने का एक बेहद सशक्त व सक्षम हथ‍ियार है । भाजपा का या भाजपा नेताओं का या नरेन्द्र मोदी का प्रचार स्वयं इन लोगों द्वारा या भाजपा द्वारा कभी नहीं किया गया होगा , जितना इनका दुष्प्रचार करते करते कांग्रेस ने प्रचार कर डाला । नजर अंदाजी की भी एक जुबां होती है, खामोशी और मौन का प्रहार सशक्त होता है । बात गिरिराज सिंह की करें और कली गोरी चमड़ी की करें, राजनीति और रणनीति में न तो गिरिराज सिंह का कोई महत्व है और न औकात, बस सिवा इसके कि वह एक पद पर आसीन हैं, और पद पर आसीन होने से हर आदमी महत्वपूर्ण नहीं बन जाता , यह जरूरी नहीं होता कि देश में या कहीं भी उसकी बात कोई सुने या उसे तवज्जुह दे , जब कुछ समय पहले एक लंबे अरसे तक श्रीमती सोनिया गांधी के बारे में एक मुद्दा बना हुआ था कि श्रीमती सोनिया गांधी विदेशी हैं, इटली की हैं, और तब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह , दिग्वि‍जय सिंह को कुत्ते के रूप में , बंदर के रूप में कार्टून बना कर फेसबुक पर फैलाया जा रहा था , तब उस समय कोई कांग्रेसी यहॉं उसका जवाब नहीं देता था , श्रीमती सोनिया गांधी के इटली के या विदेशी होने के मुद्दे को हमने महज चंद बहसों में या चंद फाइटों में सदा के लिये समाप्त कर दिया , लंबे अरसे से चले आ रहे इस मुद्दे को हमने चर्चा से उड़ा दिया , जवाब और तर्क कुछ ऐसा था कि , यह सवाल उठाने वाले या मुद्दा बनाने वाले लोगों पर उसका कोई जवाब देते नहीं बना , उल्टे वे फस गये , उलझ गये और सारे कार्टून भी फेसबुक से विदा हो गये और सोनिया जी के विदेशी या इटली का होना कहने वाले भी भूल गये । राजनीति या रणनीति क्या कहती है, वह केवल इतना कहती है कि काली गोरी चमड़ी और गिरिराज सिंह , दरअसल न चर्चा योग्य , न बहस योग्य विषय थे, नजरअंदाज कर नकारने योग्य विषय थे , लेकिन कांग्रेस ने इस बात का निन्दा या दुष्प्रचार करके इसे बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा खुद ही बना दिया और जमकर गिरिराज सिंह का दुष्प्रचार करते करते , प्रचार कर डाला , लोगों में गिरिराज सिंह नामक तुच्छ व महत्वहीन आदमी , जिसकी बात न कोई सुनता है इस देश में और न मानता है , एक अति विश‍िष्ट महत्वपूर्ण व्यक्त‍ि बना दिया , और जो न सुनते थे उन्हें खुद कांग्रेस ने भोंपू लगा लगा कर सुना दिया ….. अलबत्ता इतना कहना काफी है कि ” मर मिटे हम पर ही वो जो कभी हमारे गली से गुजरने पर थूका करते थे, हम चुपचाप गुजरते रहे मौन , बेफिक्र लापरवाह होकर, न कभी नजर मिलाई उनसे , न कभी जवाब दिया, प्रतिक्र‍ियाहीन रहे, अंजाम ये हुआ कि वो पगलाई कुछ इस कदर दीवानी बनकर हमारी बेपरवाही नजरअंदाजी से, वक्त ने पलटा ऐसा खाया , मरता था शहर जिस पर, थूकती थी बेवजह जो हम पर, मर मिटी कायनात की वो खूबसूरती हम पर, जाने कितने गीत सुनाये तराने मोहब्बत के उसने, न जाने कितने नृत्य दिखाये आजाद परिन्दे को दिल में कैद करने के, चढ़ी कई मंजिल ऊँची छत की बाउण्ड्री पर , कहा कूदती हूं या मैं मरती हूं, या तो मेरे से कहो मेरा नाम लेकर बस एक बार कि वाकिफ हूँ तुझसे , हॉं मैं पागल हूँ तुम्हारे लिये, तुम्हारे खास अंदाज पर , ( और हमने तब भी कुछ नहीं कहा , इशारे से इशारा कर दिय कि कूद जाओ …. ) थामी होगी कलाई उसने सरे बाजार तड़प कर न जाने कितनी बार ……. मगर ये बंदा न तब झुका , न तब रूका …. और अंदाज ये कि आज तलक उस दुश्मन के दिल का कैदी एक, उसके मन मंदिर का देवता एक ….. और वह ये बंदा है …. कुल मिलाकर कहने का मतलब ये कि ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे ….. ( यह स्टोरी तो खैर सच्ची है, आपबीती है, मगर इसमें खास संदेश छिपा है ) …… नजरअंदाजी की भी एक अपनी जुबान और अपनी भाषा व बेहद सशक्त जवाब होती है, कत्ल कर डालती है दुश्मन का, मार ही डालती है , वजूद ए हुस्न, वजूद ए गुरूर ही मिटा देती है सामने वाले का …. …… – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनंद”

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