आज फिर गुल हुई बिजली सबेरे 5 बजे से अब तक लगातार मैराथन बिजली कटौती


मुरैना की आधी गांधी कालोनी की बिजली कटौती थमने का नाम नहीं ले रही है , आज सबेरे 5 बजे से जो बिजली कटौती अंधाधुध शुरू हुई , बीच बीच में दस दस मिनिट के लिये हर आधा एक तीन चार घंटे बाद की कटौती के बाद आती रही….. मसला ये है कि कल सी एम हेल्पलाइन पर एक एल -1 ने खुद म . प्र. शासन द्वारा दर्ज की गयी शिकायत पर एक झूठा मनगढ़ंत और फर्जी जवाब डाल दिया कि उपभोक्ता का मीटर खराब हैऔर उपभोक्ता नया मीटर नहीं लगाने दे रहा है ।

अति उच्च स्तर के मूवमेंट से चल रही पूरी कार्यवाही कुछ इस तरह है , उपभोक्ता ने एक अन्य शिकायत पर जनवरी ( सी एम हेल्पलाइन के नाम से फोन किया गया था जो बाद में जाली निकला यह काल रिकार्डेड हैं ) , फरवरी में और फिर मार्च में असिस्टेंट इंजीनियर और एल – 1 से कहा कि हमारे यहॉं मीटर लगाओ और हमारा बिल ठीक करो । असिस्टेंट इंजीनियर ने कहा कि कल आपके यहां मीटर लग जायेगा और साथ आये मुटल्ले गोलमटोल को कहा कि कल इनके यहां मीटर लगा देना ।

पर मुटल्ले गोलमटोल ने मीटर फिर भी नहीं लगाया , उल्टे सी एम हेल्पलाइन में फर्जी जवाब देता रहा कि उपभोक्ता मीटर नहीं लगाने दे रहा । हालांकि बड़ा सवाल ये है कि सन 1983-84 से इस शहर में एक ऐसा उपभोक्ता है जो मीटर नहीं लगाने देता और 37 – 38 साल से पहले म प्र विद्युत मंडल और अब मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी सोती ही रही , है न कमाल की बात , और यह भी लिख रहा है कि उपभोक्ता के परिसर में मीटर खराब लगा हुआ है , मतलब मीटर पहले से लगा है , केवल बदलना मात्र है, उपभोक्ता ने तो खैर सी एम हेल्पलाइन पर लिखित में दर्ज करा दिया कि हमारे यहां मीटर लगाया जाये और बिल ठीक किया जाये , उस मांग और शिकायत को लपक कर नस्तीबद्ध कर दिया और बिना सुनवाई किये ही मामला फाइल क्लोज्ड कर दिया गया ।

उपभोक्ता ने तुरंत मुख्यमंत्री म प्र और मुख्य सचिव को ई मेल भेजकर सारे माजरे से अवगत करा दिया और सी एम हेल्पलाइन पर इस नस्तीबद्ध की गयी शिकायत का पूरा नंबर और उसका प्रिंट आउट भेज दिया कि ये हो रह है असल में ।

फिर यही मांग और एसिस्टेंट इंजीनियर द्वारा कही गयी मीटर लगाने की सारी बात और फिर न लगाया जाना आखिर सीपीग्राम भारत सरकार के पास दर्ज करा दिया गया , इसके बाद सी एम हेल्पलाइन और समाधान पोर्टल पर शिकायत अपने आप ही सीपीग्राम के मामले मैप कर दर्ज कर दिये जाते हैं । सो हो गया ।

अब इधर एक सूचना का अधिकार महाप्रबंधक म क्षेे वि व कंपनी मुरैना के यहां लगा , एस ई ने अधिनियम के प्रावधान के मुताबिक संबंधित अधिकारी को अंतरित कर दिया ।

बस इसके बाद तो कयामत ही कयामत आ गई …… बिजली का 14 घंटे तक जबरदस्त फ्लक्चुएशन , और फिर पूरी तरह से गोल …….. मतलब आप समझ ही गये होंगें …… जब भ्रष्ट फंसता है तो फड़ड़ाता जरूर है , तिलमिलाता जरूर है , दीया बुझने से पहले जरा ज्यादा चमकता है , भेंस पूंछ उठाये तो समझदार सावधान हो जाते हैं मतलब वो गोबर ही करेगी । चलिये झलक देख लीजिये ऊपर जो लिखा है उसकी ……..

इसमें ही नीचे लिखा है कि यह शिकायत सीपीग्राम से सीधी आयी है मैप कर सी एम हेल्पलाइन ने दर्ज की है , मगर उसे पढ़ने की फुरसत ही नहीं बल्कि मनगढ़ंत झूठा जवाब देने की जल्दी मची थी

कल ही दिये सूचना का अधिकार के आवेदन से ही बिलबिला गई फर्जी बिल देने वाली म प्र की बिजली कंपनी , चार दिन से दनादन अंधाधुंध बिजली कटौती जारी


 कल दिया गया सूचना का अधिकार का आवेदन 

आवेदन अंतर्गत धारा  6 , सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

Through E Mail And By Speed Post

Signaured Copy is Enclosed Here As attachment

प्रति ,

        लोक सूचना अधिकारी

     महाप्रबंधक कार्यालय

     मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लि0

     मुरैना म प्र

          (NOTE  : आवेदक न्यायबंधु है तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय भारत सरकार द्वारा नेशनल लीगल सर्विसेज एक्ट 1987 ( नालसा) के तहत प्रोबोनो लीगल सर्विसेज का अधिकृत , मान्यता प्राप्त व सूचीबद्ध एडवाकेट होकर , सभी प्रकार के न्याय शुल्क एवं अन्य प्रभारों से पूर्णत: मुक्त है ) 

विषय : न्यायालयीन उपयोग हेतु मुझ अधोहस्ताक्षर कर्ता नरेन्द्र सिंह तोमर एडवोकेट को निम्न जानकारीयों की जनहित में याचिका प्रस्तुत करने हेतु आवश्यकता है, कृपया आवश्यक जानकारीयां मय दस्तावेजात प्रमाणित प्रतियों में उपलब्ध करायें , यदि जानकारी दस पृष्ठ से अधिक है तो अधिनयम व नियमों के प्रावधानानुसार प्रमाणित डी वी डी  या सी डी उपलब्ध करायें ।

महोदय/ महोदया ,

      उपरोक्त विघयान्तर्गत कृपया निम्न बिन्दुओं पर मुझे सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत माह अप्रेल वर्ष सन 2000 तक की ( अधिनियम के प्रावधानानुसार आज दिनांक से विगत 20 वर्ष तक की ) निम्न जानकारीयों की आवश्यकता है , कृपया उपलब्ध कराने का कष्ट करें ।

1 यह कि आवेदक नरेन्द्र सिंह तोमर , 42 गांधी कालोनी , मुरैना म प्र ने माह अप्रेल सन 2000 से आज दिनांक तक बिजली के संबंध में  विभिन्न स्तरों पर विभिन्न माध्यमों जिसमें व्यक्तिगत आवेदन उपस्थित होकर दिये गये , फयूज ऑफ कॉल रजिस्टर में दर्ज की गयी शिकायतें ,  फोन कॉल माध्यम से दिये गये ,आनलाइन विभन्न पोर्टलों पर दर्ज कराये गये और ई मेल आदि के माध्यम से भेजे गये पत्र , आवेदन और शिकायतें आदि की कुल संख्या कितनी है और यह किस किस विषय पर किस किस दिनांक को कितने कितने बजे पर दिये गये । सभी की इकजाई सूची के साथ सभी की प्रतिलिपि चाहिये ।

2. यह कि 42 गांधी कालोनी मुरैना में प्रथम विद्युत कनेक्शन किस दिनांक , माह एवं वर्ष में लिया गया और इसका मीटर क्रमांक क्या था , तथा यह कब किस दिनांक को तत्समय के म प्र विद्युत मंडल मुरैना द्वारा वापस लिया गया तथा इसकी अंतिम रीडिंग क्या थी । तथा इसका पहला एवं अंतिम बिल क्या था , सभी की प्रमाणित प्रति चाहिये ।

3. वर्तमान में 42 गांधी कालोनी मुरैना पर विद्युत कनेक्शन कब व किसके नाम से किस दिनांक , माह एवं वर्ष में लगाया गया तथा यह किस प्रकार का था और इसका आवेदन क्या था , इस आवेदन की प्रति चाहिये , तथा यह कनेक्शन कितने फेज का था , और कितने फेज का लगयाया गया , वर्तमान में कितने फेज पर यह चालू एवं संचालित है ।

4.  यह कि वर्तमान में 42 गांधी कालोनी मुरैना म.प्र पर संचालित विद्युत कनेक्शन का पहला विद्युत मीटर किस दिनांक को लगाया गया एवं उसकी अंतिम रीडिंग क्या थी । तथा इसका पहला एवं अंतिम बिल क्या था , सभी की प्रमाणित प्रति चाहिये । इस कनेक्शन पर दूसरा नवीन विद्युत मीटर कब और किस दिनांक को और किस स्थल पर लगाया गया , इस मीटर की अंतिम रीडिंग क्या थी और इसका पहला व अंतिम बिल क्या है , सभी की प्रमाणित प्रति चाहिये ।

5.  42 एवं 43 गांधी कालोनी मुरैना को सप्लाई की जाने वाली विद्युत ट्रांसफार्मर पोल पर से कुल कितने घरों में विद्युत कनेक्शन किस किसको दिये गये हैं उन सभी के नाम पते , कनेक्शन क्रमांक व कनेक्शन दिनांक जिसमें पहला कनेक्शन दिनांक मय माह एवं वर्ष तथा अंतिम व वर्तमान कनेक्शन दिनांक , माह व वर्ष तथा उनके पहले व वर्तमान विद्युत कनेक्शनों के आवेदन की प्रति तथा उनके पहले व अंतिम बिजली बिलों की प्रति की प्रमाणित प्रतियां चाहिये ।

6.  गांधी कालोनी मुरैना के कुल कितने घरों में आकलित खपत के बिल भेजे जाते हैं उन सभी के पहले व अंतिम बिजली  बिलों की प्रमाणित प्रतियां चाहियें तथा उनका प्रथम कनेक्शन आवेदन व वर्तमान कनेक्शन आवेदन सभी की प्रमाणित प्रतियां चाहिये । गांधी कालोनी क्षेत्र में कुल कितने बिजली मीटर खराब हैं या हें ही नहीं उनकी संख्या क्या है एवं मीटर रीडर द्वारा उनकी खराब होने या न होने की रिपोर्ट कब कब कितने दिन के भीतर दी गयी और कितने दिन के भीतर खराब मीटर बदले गये । सभी रिपोर्टों की सन 2001 से आज दिनांक तक की प्रमाणित प्रति चाहिये ।

7.  कुल कितने बिजली पोल से मुरेना नगर निगम क्षेत्र में बिजली पोल ट्रांसफार्मर पर 5 से कम घरेलू उपभोक्ताओं या व्यावसायिक उपभोक्ताओं से कम कनेक्शन हैं और कितने पर 5 से अधिक ऐसे उपभोक्ताओं के कनेक्शन हैं , तथा कितने उपभोक्ता बिना तय कनेक्शन संख्या  वाले बिजली पोल ट्रांसफार्मरों से जुड़े हैं और उनके बिल निर्धारण का क्राइटीरिया व तरीका क्या है । नगरनिगम क्षेत्र में कुल कितने बिजली मीटर खराब हैं या हैं ही नहीं उनकी संख्या क्या है एवं मीटर रीडर द्वारा उनकी खराब होने या न होने की रिपोर्ट कब कब कितने दिन के भीतर दी गयी और कितने दिन के भीतर खराब मीटर बदले गये ।

8.  उपभोक्ताओं घरेलू एवं व्यावसायिक दोनों का ही लोड टेस्टिंग का क्राइटीरिया क्या है और वैधानिक आधार क्या है , एवं किस मशीन या उपकरण का उपयोग लोड टेस्टर के लिये क्या जाता है , तथा ऐसी मशीनें व उपकरण कितनी संख्या में मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की मुरैना शाखा के पास उपलब्ध हैं एवं कब कब कितने कितने मुल्य में कहां से खरीदीं गयीं , इनके टेंडर व कब किसको किये गये , इन टेंडरों की प्रमाणित प्रति चाहिये और कुल उपलब्ध संख्या की प्रमाणित प्रतियां चाहियें ।

अस्तु उपरोक्तानुसार आवेदक इन सभी मामलों में हर प्रकार की न्यायालयीन व कानूनी कार्यवाही हेतु भारम सरकार के न्याय विभाग , विधि और न्याय मंत्रालय से सूचीबद्ध व अधिकृत होकर अत्यावश्यक और उचित  कार्यवाही व्यापक जनहित में करने जा रहा है । जिसके लिये उपरोक्त जानकारी की मय दस्तावेज प्रमाणित प्रतियों में  आवश्यकता है । तथा इस संबंध में प्रत्येक प्रकार के शुल्क , न्यायायिक शुल्क एवं अन्य प्रभारों से मुक्त है । देखें आनलाइन न्याय विभाग भारत सरकार का पोर्टल ।

दिनांक 24 मार्च 2021                        हस्ताक्षर डिजिटल एवं स्याही में ( दोनों में )  मय सील

  नरेन्द्र सिंह तोमर

एडवोकेट

Narendra Singh Tomar

Advocate ( M.P. High Court – Gwalior Bench)

Attorney For Trade Marks , Copy Rights, Patents and Designs.

Nyaya Bandhu  ( Probono Legal Services Under NALSA )

42 , Gandhi Colony – Morena – M.P.

       Mobile Numbers – 9425738101  & 7000998037  

केवल आधी Gandhi Colony Morena में लगातार विगत चार दिन से की जा रही पूरे दिन रात की मैराथन बिजली कटौती के बाद  फिर आज भी अभी इस समय तक बिजली कटौती जारी है

नहीं करते बिजली कंपनियों के लोग बिजली बिल एडजस्ट , खुद करते हैं चोरी और करवाते हैं ले देर बिजली चोरी , एक डाक्टर ने अपने क्लिनिक में यहां लगवा रखा है, काफी समय से , दो बरस पहले से यानि सन 2018 से, वह बिजली की एक्सेस प्राडक्शन को बिजली कंपनी को हर रोज अनेक महीने तक सप्लाई करता रहा , मगर बिजली कंपनी ने उसे भुगतान करने के बजाय उल्टा उस पर दे दनादन बिल पर बिल भेज दिया , डाक्टर अपना माथा फोड़ता रह गया और बिजली वालों से उल्टे अपना बिल माफ कराने को चक्कर लगाता फिर , उसके बाद लाकडाउन में बिजली कंपनी वालों ने उसका बिल बिलासुर बनाकर अनाप-शनाप बिल दे दे कर बिलबिला दिया । 

सो कोई अब बिजली कंपनी को एक्सेस सप्लाई देगा यह तो चंबल में यह गलती कोई नहीं करेगा । अखबारों में जब उसकी खबर छपी तब लोगों को पता चली और एक नया कारनामा नयी कारिस्तानी लोगों को पता चली ।

हमारा या हमारे मोहल्ले का मामला जरा पेचीदा है, हमारे खंबे पर हमने अपने प्रयासों से एक एस ई से 25 के वी का ट्रांसफार्मर हटवा कर 63 के वी का लगवाया, उस समय एक सब इंजीनियर जबरदस्ती उस पर 25 के वी का ही ट्रांसफार्मर रखवा रहा था, हमने फिर उसी वक्त एस ई से फोन पर बात की , एस ई ने हमसे कहा कि नहीं तोमर साहब वहां 63 के वी का ही ट्रांसफार्मर रखा जायेगा मैंने वहां 63 के वी का ही ट्रांसफार्मर मंजूर किया है और वही वहां रखा जायेगा । 

खैर उसके कुछ बरस बाद वह सब इंजीनियर यहीं मुरैना में ही एस ई बन गया , उसके बाद उसने वो अंधेरगर्दी मचाई कि 5 कनेक्शन वाले ट्रांसफार्मर पर यानि उस हमारे पोल पर केवल तीन कनेक्शन उपभोक्ताओं के और बाद बाकी दो पांइ़ट्स से एक तरफ का आधे मोहल्ले की सभी घरों की पूरी सप्लाई और दूसरे प्वाइंट पर आधी एक अलग गली की सप्लाई , मतलब डबल क्रॉस, यानि पोल के रीडिंग के हिसाब से तीन उपभोक्ताओं पर एवरेज बिलिंग और बाद बाकी मोहल्ले से भी हर घर से अलग-अलग एवरेज बिलिंग , मतलब खंबे और ट्रांसफार्मर की अनाप-शनाप कमाई अलग और बाकी मोहल्ले के हर घर से एवरेज और मीटर्ड बिल दोनों तरह की वसूली अलग । यानि बाकी मोहल्ले में 5 कनेक्शन वाला कोई ट्रांसफार्मर ही नहीं है , अब उनका पोल नंबर और ट्रांसफार्मर नंबर क्या कैलकुलेट किया जायेगा ये तो खुदा जाने , क्योंकि उनकी लाइन पोल ट्रांसफार्मर ही नहीं । ये हमने अपनी पी जी भारत सरकार के रिमांइडर में कल ही सब उल्लेख किया है । 

अब दिक्कत ये है कि बिजली कंपनी वाले सी एम हेल्पलाइन म प्र को कुछ समझते नहीं और लपक कर अर्जी फर्जी तरीके से शिकायतें क्लोज करा देते हैं , इसलिये हम अब सी एम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करते नहीं , मगर खुद म प्र शासन ही अपने आप ही मैपिंग कर खुद ही शिकायत हमारे नाम और नंबर से दर्ज कर देता है और शिकायत चलाता रहता है, अबकी बार सरकार बदल जाने से ही एम हेल्पलाइन कुछ सख्त और खतरनाक तरीके से चल और काम कर रही है, इसलिये वे समझते हैं कि हमने सी एम हेल्पलाइन पर शिकायत फिर दर्ज कर दी , और वे हमारे पोल जोन एरिया की बिजली काटते रहते हैं, हम हालांकि 3 फेज उपभोक्ता है मगर हमें कभी 3 फेज सप्लाई सन् 2010 से मिली ही नहीं केवल सिंगल फेज सप्लाई देते हैं और बिल 3 फेज का देते हैं , पहले तो कई साल तो इसी में ही लगा दिये कि तीनों फेजों को सिंगल फेज में जोड़कर 3 फेज सप्लाई बताते रहे, जब तक वह शिकायत गर्म रही तब तक यह नौटंकी दिखाते रहे , फिर 2010 के बाद क्लीयर कट सिंगल फेज सप्लाई ही चल रही है, खैर ये सारी बातें कल के रिमांइडर में हमने लिखी है, क्योंकि हम जानते हैं कि एक और अगली पी जी आयेगी तो सबके साथ अब सारा ही मसला खुलकर सामने आयेगा । समझे के बी कुछ , चोरों के पीछे मोर पड़े हैं, हम भी अबकी बार कसम खा के बैठै है , आर या पार

भारी भ्रष्टाचार और अंधाधुंध भीषण बिजली कटौती से थर्राया मुरैना , अंधाधुंध अनाप शनाप फर्जी बिल 2000 और 3000 रू महीने तक बढ़ा कर जारी किये कंपनी ने


मुरैना शहर 02 फरवरी रात्रि 11 बजकर 56 मिनिट , विशेषकर गांधी कालोनी में की जा रही बिजली कटौती तारीख 31 जनवरी की सुबह 6 बजे से शुरू की गयी , पूरे दिन व पूरी रात बिजली गायब रहने के बाद फिर 1 फरवरी और 2 फरवरी को भी बिजली कटौती का यही आलम बरकरार है , खबर लिखे जाने के वक्त देर रात तक गांधी कालोनी मुरैना में अंधाधुंध अघोषित बिजली कटौती जारी थी ।

ज्ञातव्य है कि जहां जाली व फर्जी बिल जारी करने में भी मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की मुरैना शाखा अव्वलतम है वहीं तकरीबन 50 हजार उपभोक्ताओं के बिजली के बिल इनके भ्रष्ट व अंधेरगर्द अफसरों ने इतने अधिक बढ़ा दिये कि जिनके बिल 196 रू महीने आते थे , उनके बिल 3 हजार रू महीने कर दिये ।

आवेदनों पर कोई कार्यवाही नहीं – बिजली कंपनी को उपभोक्ता सन 2010 से निरंतर आवेदन दे रहे हैं ( ग्वालियर टाइम्स के पास इन आवेदनों की पावतियां उपलब्ध हैं ) तमाम शिकायतें भी करते हैं । मगर भ्रष्टाचार की विष्टा खा रहे अधिकारी इतने मगरूर और अंधे बहरे हैं कि न तो उन्हें कुछ दिखाई देता है और न कुछ सुनाई ही देता है । गोया आलम ये है कि 40 साल से जो उपभोक्ता हर महीने नियमित बिल देते भरते आये हैं , बिजली कंपनी की अंधेरगर्दी ने इस सूरत में उन्हें ला दिया है कि वे बिजली का एक भी बिल और कभी भी जमा न करें ।

बिजली कंपनी की असली सूरत और तस्वीर देख कर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह के सारे काम और सारे के सारे दावे एकदम झूठे और दिखावटी ही प्रतीत होते हैं ।

बार्डर पर सैनिक का सिर पाकिस्तानीयों ने सोते समय काटा, शहीद सुधाकर सिंह का शहादत दिवस पूरी श्रद्धा व सम्मान से मनाया गया


ग्राम गढ़िया चुरहट जिला सीधी निवासी शहीद सुधाकर सिंह का कल 8 जनवरी शहीदी दिवस था , सन 2013 में जम्मू बॉर्डर पर पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा सुधाकर सिंह एवं सैनिक हेमराज की लाश को क्षत-विक्षत कर सिर काट कर ले गए थे ।
भारत ही नहीं पूरे विश्व में काफी आक्रोश था आज सुधाकर सिंह के समाधि स्थल पर जाकर सैनिक के सम्मान में श्रद्धांजलि दी गई ।

श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में श्री राजेन्द्र सिंह भदौरिया ( चुरहट सीधी ) श्री अजय सिंह राहुल ( पूर्व नेता प्रतिपक्ष म प्र विधानसभा ) सहित भारी संख्या में गण्यमाण्य लोग शामिल हुये ।

गंदे धुंये और प्रदूषण से परेशान मुरैना शहर , गांधी कालोनी जैसी पॉश कालोनी में रोजाना जहरीले धुंंआ सुबह शाम , मरे कई और गांधी कालोनी की जहरीली हवा से दमा , अस्थमा और खांसी के साथ फेंफड़ों के संक्रमण से मौत की दस्तक


मुरैना 28 दिसम्बर 2020 , ग्वालियर टाइम्स कार्यालय । मुरैना नगर निगम , कहने को तो नगर निगम है , मगर नगर निगम जैसा यहां कुछ भी नहीं , शहर मानों एक छोटा सा गांव और ग्राम पंचायतों जैसा माहौल और आबो हवा । गांवों में कम से कम प्रदूषण को बाहर निकालने के लिये एक स्वच्छंद वातावरण रहता है , मगर मुरैना शहर में प्रदूषण फैलाने वाले तो बहुतेरे सैकड़ों हैं मगर इसके निस्तारण का कोई भी इंतजाम नहीं । 

नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनंद” 

( लेखक सन 2001 से भारत सरकार की एन जी सी – नेशनल ग्रीन कोर्प्स के  तहत मुरैना जिला पर्यावरण क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षण समिति – अध्यक्ष कलेक्टर मुरैना का सदस्य व संचालन समिति का प्रभारी है ) 

यूं तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत भी , नगर पालिका (नगर निगम) अधिनियम के तहत भी और मानव अधिकार अधिनियम संरक्षण अधिनियम के तहत भी ,  इसके अलावा एक ऐलान जो नगर निगम मुरैना द्वारा रोजाना किया जा रहा था कि ….. सम्मानीय उपभोक्ताओं …… अगर इसे मान लें तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत भी , शहर में चारों प्रकार के प्रदूषण या इनमें से किसी भी एक प्रकार का प्रदूषण फैलाना केवल अपराध ही नहीं बल्कि नगर निगम द्वारा और जिला प्रशासन द्वारा तुरंत व तत्काल निराकरण किया जाना चाहिये अन्यथा इसमें न्यायालय सम्यक आदेश व प्रभावितों व पीड़ितों को हर्जाना जुर्माना देने का आदेश देगा। 

शहर में सबसे बड़ा प्रदूषण जमीन पर सूखे व गीले कचरे का भी है , तो जल निकासी मल निकासी सहित पेयजल के अस्वच्छ व प्रदूषित वाटर सप्लाई का भी है  । 

वायु प्रदूषण में सबसे खतरनाक और जहरीला प्रदूषण शहर में फैल रहे रोजाना ही सुबह शाम के धुंयें ( गंदे व प्रदूषित ) का है । यह मसला कोई नया नहीं , बल्कि बरसों पुराना है । 

शहर में आ बसे तमाम खेत विहीन  कृषि मजदूर रोजी रोटी के लिये तमाम अवसर खोजने हेतु गरीबी की मार के शिकार तो हैं हीं , किसी न किसी भांति किसी रिश्तेदार के चरण चुंबन कर रहने का आशियाना तो जैसे तैसे या फिर  शहर के आसपास बना बसा लिये हैं , मगर उनका सोशो इकानामिक स्तर व दर्जा अभी भी उसी निम्नतम स्तर पर है और इधर उधर से लकड़ियां तथा अन्य चीजें चोरी चकारी करके वे  अपनी गुजर बसर जैसे तैसे करते हैं , उनके पास खाना पीना बनाने खाने या पशुओं के लिये चारा तैयार करने के लिये एक गैस कनेक्शन तो बहुत दूर की बात , एक स्टोव या कोयले की अंगीठी तक नहीं है , या कहिये कि कोयला या मिट्टी का तेल खरीदने तक के पैसे नहीं है । 

ऐसे लोग सुबह शाम चोरी की गंदे पेड़ पौधों की लकड़ीयां चुराकर चूल्हा और बरोसी जलाते हैं , जिसका प्रदूषित व जहरीला धुंआं सारे मोहल्ले और सारे वायुमंडल में फैलता है । इसके अलावा नकली दवायें सप्लाई करने वाले मेडिकल रिप्रजेंटेटिव और एक्सपायरी डेट की दवायें रखने वाले एम आर उन दवाओं की लंबी चौड़ी खेप रोजाना ही मोहल्ले में जलाते हैं जिससे प्रदूषित धुंआ  सारे ही वायुमंडल को अपने कब्जे में लेकर चारों और मोहल्ले में पसरा रहता है , इसके अलावा कुछ अवैध वाहन और बसें, र्टेक्टर तथा पर्यावरण का सर्टीफिकेट लिये बगैर मोहल्ले में चक्कर लगाते और लेड ( सीसा युक्त ) जहरीला धुंआं मोहल्ले में फैलाते  रहते हैं । 

कुछ आपत्तिजनक व्यावसायिक गतिविधियां मसलन , लकड़ी लोहे का फर्नीचर का काम जो कि रहवासी कालोनियों और मोहल्लों में प्रतिबंधित है , आरी रंदा आदि चलाकर ध्वनि प्रदूषण सहित वातावरण में रजकणों ( डस्ट पार्टीकल्स ) उगलते रहते हैं । 

स्पष्टत: मोहल्ले के रहवासियों में इनकी वजह से तमाम बीमारीयां , संक्रामक बीमारीयां , श्वास लेने में तकलीफ , दमा , अस्थमा , फेंफड़ों के संक्रमण , किडनी संक्रमण और डेमेज जेसी तमाम बीमारीयों के साथ , ध्वनि प्रदूषण से कानों एवं मस्तिष्क से संबंधित तमाम विकार , अवसाद और हृदय रोगों , ब्लड प्रेशर जैसे तमाम रोगों से नित्य ही ग्रस्त होना पड़ता है तथा खांसी एवं फ्लू् जैसे तमाम रोगों का शिकार होना पड़ रहा है ।   

गांधी कालोनी मुरैना यूं तो मुरैना शहर की सबसे पॉश कालोनी और शहर के ऐन बींचोंबीच स्थित है , मगर कतिपय नये निवासियों के कारण अब इसे पॉश कालोनी तो नहीं कहा जा सकता , लेकिन तमाम लोग इन हीं प्रदूषणों के कारण मौत के आगोश में जा चुके हैं , जिसकी फेहरिस्त काफी लंबी है । 

मेरे खुद के माता पिता जब तक जीवित रहे इन्हीं प्रदूषणों के शिकार रहे , और उन्हें सांस लेने में तकलीफ के साथ , खांसी और जल प्रदूषण ने शिकार बनाकर परेशान व तंग रखा , खांसी का मेरी मां का अंतिम दम तक इलाज चला मगर गांधी कालोनी में फैला जहरीला धुंआं उस खांसी को कभी ठीक नहीं होने देता था , अंतत: मां उसी खांसी और उसी जहरीले ध्रुंये का शिकार हो गयी और उसी से उसका स्वर्गवास हो गया । अभी पिता ने भी जब इसी महीने अंतिम सांस ली तो उन्हें भी मुरैना की गांधी कालोनी के धुंये ने मरते दम तक परेशान किया , उन्हें भी सांस लेने में बरसों से यहां तकलीफ होती थी , दम घुटता रहता था , सुबह शाम फैलता धुंआं ऊपर की मंजिल पर बहुत आसानी से पहुंचता और उन्हें परेशान रखता था , प्रदूषित अस्वच्छ और पीने के गंदे पानी ने न केवल उनका डायजेशन सिस्टम ही घ्वस्त किया बल्कि पूरी तरह से किडनी ही डेमेज कर दीं । 

ग्वालियर में उनके मृत्युकाल में जब यह सब जांचें हुईं तो टेस्ट रिपोर्टों ने सारी असलियत खोल कर रख दी , कुल मिलाकर मुरैना की गांधी कालोनी के चारों प्रदूषणों ने उनकी जान ले ली , या दूसरे शब्दों में कहें तो हत्या कर दी । 

हालांकि यह सब हम अपनी पर्यावरण समिति की बैठक में उठाते और इसका स्थाई समाधान भी कर देते , मगर अफसोस एक जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा करीब पर्यावरण समित में करीब 70-80 लाख का फर्जीवाड़ा और घोटाला कर दिया , उसके बाद से 30 मई सन 2002 के बाद इस पर्यावरण समिति की कोई भी अनिवार्य तिमाही बैठक ही नहीं हुई इसलिये इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच पर लाना और उठाना अनिवार्य हो गया है , जिससे आम जनता और जिम्मेदार प्रशासनिक अफसर और नेता तथा नगरनिगम इसे जान सके , पहचान सके और इसका स्थाई निराकरण कर सके ।

नहीं हटा बरसों से लगा अभिशाप मुरैना नगर निगम पर , शोभाराम बाल्मीकि के अध्यक्ष कार्यकाल से अब तक लगातार दलित के लिये आरक्षित चली आ रही फिर से दलित मेयर के लिये रिजर्व हुयी



हाय मुरैना तेरी यही कहानी , शहर हुआ बेहड़ से बदतर और नहीं पीने लायक पीने का पानी

नरेन्द्र सिंह तोमर ” आनन्द”

 मुरैना शहर और नगर निगम के दिन फिरते नजर नही आ रहे हैं , दशकों से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासन काल में शुरू हुये नगरपालिका और नगरनिगम चुनावों के वक्त से लगातार दलितों के लिये रिजर्व चला आ रहा मुरैना नगर निगम ( पहले नगर पालिका अब नगर निगम ) का मेयर ( महापौर पहले नपा अध्यक्ष ) का रिजर्वेशन मुरैना के लिये ऐतिहासिक बन गया है और स्थाई रूप से दलितों के लिये आरक्षित हो गया है , उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सत्ता में आते ही दशकों से बंद पड़े नगरीय निकायों के चुनाव दोबारा शुरू कराये थे , उस समय नगरपालिका अध्यक्ष का पद दलित के लिये आरक्षित किया गया था , इस वक्त मुरैना नगरपालिका के पहले अध्यक्ष शोभाराम बाल्मीक बने थे । खैर शोभाराम बाल्मीक तो बहुत सीधे सच्चे और ईमानदार अध्यक्ष रहे सो नगरपालिका ठीक ठाक और अच्छी तरह चला ले गये । इसीलिये फिर उन्हें किसी भी भ्रष्ट नेता ने टिकिट नहीं दिया और ऐसे लोगों को राजनीति में भ्रष्ट लोग ठौर और मुकाम देते भी नहीं है । 

इसके बाद नगरपालिका के लगातार तमाम चुनाव हुये मगर लगातार नगरपालिका अध्यक्ष का पद दलित के लिये ही रिजर्व ही रहा । कभी दलित पुरूष तो कभी दलित महिला । सन 1993 से लेकर सन 2026 तक , यानि कि इतिहास से लेकर भविष्य तक मुरैना नगरनिगम के मेयर ( महापौर ) केवल एक ही जाति विशेष दलित के लिये आरक्षित कर दिया गया है । स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये नगरीय निकायों में फ्लोटिंग आरक्षण को मध्यप्रदेश सरकार ने और राजनेताओं ने ताक पर धरकर, मुरैना में केवल एक ही जाति वर्ग दलित के लिये स्थाई आरक्षण कर दिया है ।

उल्लेखनीय है कि इस समय दलित मेयर अशोक अर्गल वर्तमान ( अब निवर्तमान) मुरेना नगर निगम के मेयर थे । अब दोबारा यह पद दलित महिला के लिये आरक्षित कर दिया गया है , जाहिर है कि मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा न तो भ्रष्टाचार को खत्म करने की है और न उजागर करने की ।

दलितों के कंधे पर रखकर भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि अंधेरगर्दी और फर्जीवाड़े के जितने काले कारनामे किये जाते हैं यह किसी से छिपा नहीं है , मुरैना नगर निगम में अरबों रूपये का फर्जीवाड़ा , भ्रष्टाचार और काली कमाई के अलावा जितना मुरैना शहर का कबाड़ा अकेले मेयर अशोक अर्गल के कार्यकाल में हुआ उतना तो शायद पूरे मुरैना जिला में कहीं भी कभी भी नहीं हुआ । जाहिर है कि अशोक अर्गल के कार्यकाल में हुये भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के काले कारनामों  को दबाने और छिपाने का काम अकेला कोई दलित ही कर सकता है और अन्य कोई भी नहीं , जिसमें समूची की समूची केवल सीवर लाइन ही नहीं खा ली गई ,बल्कि सड़कों की खुदाई से लेकर , भराई तक , रिपेयरिंग और मैंटीनेंस ,  घटिया गुणवत्ता की नयी सड़कें बनवानें से लेकर जनता की नासुनवाई और , पीने के पानी की सप्लाई से लेकर स्ट्रीट लाइटों तक, बिना बेस प्लेटफार्म बिछाये और बिना सपोर्टिंग वाल बनाये घरों में लगाये जाने वाले प्लास्टिक के पानी पाइपों से सीवर लाइन बनाने का करिश्मा कर देने ( सीवर लाइन के मंजूरशुदा प्रोजेक्ट में स्पष्ट लिखा है और मंजूरशुदा ड्राइंग में बेस प्लेटफार्म और सपोर्टिंग वाल हर सीवर लाइन में बनाईं जायेंगी, मगर कहीं नहीं बनाईं गईं और सीमेंट पाइप न्यूनतम साइज 375 तक के डाले जायेंगे मगर कहीं डाले नहीं गये  ) , खुदी मिट्टी न केवल मंहगे दामों में बिक गई बल्कि उससे डबल भ्रष्टाचार का खेल प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों में भराई करवाकर उसका डबल बिल मिट्टी भराई का डालकर अलग से वसूला गया , ऐसे ऐसे  हुये महा फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार और अरबों रूपये के खाऊ हजम भ्रष्टाचार पर अगर कोई पर्दा डाल सकता है तो वह केवल दलित मेयर ही डाल सकता है ।

जाहिर है कि मुरैना नगर निगम लोकल लेवल की नहीं बल्कि उच्चस्तर की गहरी राजनीतिक चरागाह और शिकार है । जो यह भी साफ करता है कि नगरीय निकायों के मेयर और अध्यक्षों के आरक्षण साफ नीयत से किये गये स्पष्ट और पारदर्शी नहीं हैं और न इनमें फ्लोटिंग आरक्षण व्यवस्था का पालन ही किया गया है ।

यह भी साफ है कि मुरैना नगर निगम का मेयर राज्य सरकार के और केन्द्र सरकार के नेताओं का गुलाम और रबर का ठप्पा होना ही चाहिये वरना राज्य सरकार के नेताओं और केन्द्र सरकार के नेताओं को सीवर से लेकर सड़कें और स्ट्रीट खिला पिला चुका और उन्हें पाल पोस कर बड़ा बना रहा नगर निगम मुरैना , कहीं जनता के लिये साफ काम करने वाला सेवा करने वाला नगर निगम बनकर , मुरैना दमकता चमकता शहर बनकर केन्द्र और राज्य के तथाकथित बड़े नेताओं को नंगा कर कलई नहीं उतार देगा । इसलिये मुरैना की जनता के लिये और नगरनिगम के ईमानदार अधिकारीयों  और कर्मचारीयों तथा ठेकेदारों के लिये आलम ये है ”अब उस हाल में रहना लाजिम है ,जिस हाल में रहना मुश्किल है” मुरैना की जनता मौन रह कर बरसों से , सन 2015 से बिना सड़कों का, बिना स्ट्रीट लाइटों का , खुदा पड़ा शहर, धुल और गंदगी से लबरेज आवो हवा और पीने को मिल रहा गंदा व दूषित पानी , मौन रह कर झेल रही है , आगे भी झेलेगी , नेताजी की स्वर्णिम चरागाह को झेलने और रहने के लिये जो देते तो एक हाथ से हैं और वापस छीनते और लूटते हजार हाथों से हैं ।  

अरे आरक्षण की नौटंकी दिखाने की जरूरत क्या थी , वैसे ही अपने आप ही घोषित कर देते कि ये ऐसे रिजर्व और वो वैसे रिजर्व रहेगा , एक अधिनियम पारित कर देते कि अगले सौ साल तक मुरैना नगर निगम दलित मेयर के लिये ही रिजर्व रहेगा ।

आनलाइन वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये होगी 12 दिसंबर शनिवार को नेशनल लोक अदालत – उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति


I.P.C. , Cr.P.C. , Arms Act , Drugs and Narcotics and All Criminal Laws with Cyber Crime Laws will be Ammend , Home Ministry Invited Suggestions


राज्य शासन द्वारा भारत सरकार (गृह मंत्रालय) के निर्देशानुसार आपराधिक विधियों में सम्यक संशोधन के लिये अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया है।

समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, गृह अध्यक्ष होंगे। अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विकास, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव वाणिज्य कर, प्रमुख सचिव विधि और संचालक लोक अभियोजन समिति में सदस्य होंगे। सचिव गृह विभाग समिति के सदस्य सचिव होंगे।

विधि एवं व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं कमजोर वर्गों के लिये त्वरित न्याय सुनिश्चित करने तथा आम नागरिकों का जीवन सुगम बनाने के लिये वर्तमान आपराधिक विधियों जैसे भारतीय दण्ड संहिता, दण्ड प्रक्रिया संहिता, शस्त्र अधिनियम तथा नारकोटिक्स एक्ट पर विचार-विमर्श कर उसमें सम्यक संशोधन किया जाना है। पुलिस एवं लोक व्यवस्था संविधान की अनुसूची-7 में राज्य संबंधी विषय है। अत: केन्द्र शासन ने राज्य सरकारों से सुझाव आमंत्रित किये हैं। सुझाव देते समय यह ध्यान देना उचित होगा कि पुनरीक्षित कानून जनता की लोकतांत्रिक अपेक्षाओं के अनुरूप हो और महिलाओं तथा बच्चों एवं समाज के कमजोर वर्गों को त्वरित न्याय दिलाने में सक्षम हो एवं आम नागरिकों का जीवन सुगम हो सके। समिति अपनी अनुशंसा तीन माह में प्रस्तुत करेगी।

म प्र के किसानों से ज्वार बाजरा खरीदी 20 दिसंबर तक, पोर्टल पर पंजीयन व एस एम एस प्राप्ति 5 दिसंबर तक, अब दूसरा एस एम एस भी ले पायेंगें


शिवराज ने किसानों की सुनी , दूर की परेशानी और चिंता , शासन ने आज जारी किये आदेश , अब चिन्ता न करें किसान

ग्वालियर टाइम्स 03  दिसम्बर, आज जारी म प्र शासन के आदेश में किसानों को ज्वार व बाजरा खरीदी हेतु अब पहला एस एम एस खो जाने या उसकी अवधि समाप्त हो जाने पर एन आई सी के माध्यम से एक और दूसरा एस एम एस प्राप्त करने की सुविधा दी है ।

दी गयी सुविधा में यह भी कहा गया है कि पोर्टल पर पंजीकृत किसान 05 दिसंबर तक एस एम एस या दूसरा एस एम एस प्राप्त कर सकेंगें । तथा एस एम एस प्राप्त करने के 15 दिन तक वह एस एम एस या दूसरा एस एम एस मान्य और वैध रहेगा । और किसान एस एम एस प्राप्त करने से 15 दिन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना ज्वार बाजरा मंडी या उपार्जन केन्द्र को बेच सकेगा ।

दूसरी भाषा में कहें तो 04 तारीख को एस एम एस पाने वाला किसान 19 दिसम्बर तक और 05 दिसम्बर को एस एम एस पाने वाला किसान 20 दिसंबर तक अपनी फसल की उपज बेच सकेगा ।      

पेशकार ने ली 9 हजार रिश्वत, मेनका गांधी बोलीं- ‘1 घंटे में वापस करो, नहीं तो जेल में डाल दूंगी’


उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विधायक देवमणि दुबे के विधानसभा क्षेत्र लंभुआ में एसडीएम के पेशकार ने एक व्यक्ति से 9 हजार रुपये रिश्वत में ले लिए। बुधवार को जब पीड़ित ने इसकी शिकायत पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सुलतानपुर सांसद मेनका गांधी ने से की तो उनका पारा गर्म हो गया। मेनका गांधी के प्रतिनिधि विजय सिंह रघुवंशी ने बताया कि सांसद ने पेशकार से कहा कि 9 हजार रुपये एक घंटे में वापस करो, मेरे क्षेत्र में रिश्वतखोरी नहीं चलेगी। मेनका गांधी ने आरोपी को जेल में डालने की धमकी भी दी।

एनबीटी ऑनलाइन के पास मौजूद वीडियो में मेनका गांधी सख्त लहजे में पेशकार से कह रही हैं, ‘मैं आपको जेल में डालने वाली हूं। आपके खिलाफ शिकायत मिली है। अभी एक घंटे के अंदर रिश्वत के 9 हजार रुपये वापस कीजिए। एक घंटे में आपने वापस नहीं किए तो एसडीएम और डीएम से बात करने वाली हूं।’

‘…मुझे सबूत चाहिए’

मेनका गांधी बोलीं, ‘मुझे एक घंटे में फोन आना चाहिए कि पैसे वापस पहुंच गए। तुम एक नंबर के चोर हो और बहुत बड़े रिश्वतखोर हो। वह पैसे आप वापस दोगे और आज के बाद कोई शिकायत मिली रिश्वत की तो बहुत बुरा होगा। मुझे एक घंटे में फोन आना चाहिए कि वह पैसे वापस पहुंच गए, मुझे सबूत चाहिए। समझ गए आप? इस पर दूसरी ओर से जवाब मिला उस पर सख्त लहजे में मेनका ने कहा अभी 9 हजार रुपये वापस करेंगे आप। मेरे क्षेत्र में रिश्वतखोरी नहीं चलेगी।’

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