क्या ऊना और क्या पूना जलजला आना है , ज्वालामुखी तो फटना है, महाभारत तो होना है


क्या ऊना और क्या पूना , ज्वालामुखी तो फटना है , अभी महाभारत तो होना है
– नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”
दलित, शूद्र , पिछड़ा , दर असल किसी जाति का नाम नहीं , न किसी भी भारतीय ग्रंथ में या शास्त्र में इनकी कोई जाति दी हुई है , सबसे बड़ा सबूत है इसका महाभारत , जिसमें न कोई दलित मरा, न शूद्र न पिछड़ा , भारत के इतिहास में कभी ये नहीं मरे ।
हम नरेन्द्र मोदी की तथा कथ‍ित गौ रक्षकों के बारे में कही गई बात को सही मानते हैं व उससे सहमत हैं ।
ये जातियां किसने बनाईं , इन जातियों को जातिगत नाम व जन्म किसने दिया , कौन इन नामों की जातियों को अब तक जिन्दा रखे है , भाारत की आजादी के 70 साल गुजरने के बाद भी यह जातियां मुकम्मल कायम व दलित व पिछड़ी हैं, जबकि इस कालांतर में ही नहीं विगत हजारों वर्षो के कालांतर में भी यह शासक रहीं हैं यह शोध का विषय है , वस्तुत: 98 प्रतिशत तथाकथ‍ित दलित एवं पिछड़ी जातियां फर्जी हैं , और इस पर बाकायदा एक बहुत बड़ा अभ‍ियान चला कर इनकी मूल से आज तक वास्तविक सूची बनाई जानी चाहिये , इस फर्जी दलित व पिछड़ा जाति की असलियत सामने लाने का वक्त आ चुका है ।
जब दयाशंकर सिंह की मॉं बहिन बेटी को गरियाया व अपमानित किया जा रहा था तब इनके होठों पर मेंहदी लगी थी या जुबानों पर ताले लगे थे , या कि इनके मोबाइल व कम्प्यूटर के की बोडों में पानी भर गया था । जो दुर्योधन की सभा में द्रोपदी का चीर हरण होते देख , दुर्योधन द्वारा द्रोपदी को अपनी जंघा पर बैठने का आदेश देते देख मौन थे , वे कितने बड़े , बेशक बहुत बड़े महारथी थे , मगर बहुत बुरी भयावह व दर्दनाक मौत मारे गये । उनके सम्पूर्ण कुल व वंशों के विनाश हो गये ।
इसके बाद भी यदि इतने भीषण महाभारत जिसमें अठारह अहौक्षणी सेना व समस्त कौरव वंश का समूल सर्वनाश हो गया था , उस देश में आप क्या उम्मीद करते हैं , आप अपना असत्य, फर्जीवाड़ा , मिथ्यावाद, झूठा तमगीकरण, अपने पापों और अपराधों को छिपाने के लिये दूसरों पर आरोप जड़ते रहने का खेल कब तक … कितने वक्त तक खेल सकते हैं , और प्रतिकार की , बदले की या दण्ड की अपेक्षा नहीं करते । यदि आप किसी मुगालते में हैं वह भी भारत जैसे देश में , जहॉं महाभारत जैसा युद्ध हुआ , सीता की इज्जत पर ऑंच आने से रावण के सम्पूर्ण कुल का सर्वनाश हुआ । वहॉं आप क्या अपेक्षा व उम्मीद करते हैं । ऊना हो या पूना या हो जूना गढ़, यह तो बहुत ही हल्की सी बहुत छोटी सी प्रतिक्रिया है , एक बगावत , एक आक्रोश के दबे हुये बलबले दार ज्वालामुखी का महज कहीं जरा सी गिरी चिंगारी है , ज्वालामुखी तो फटना है , तय है , कब फटेगा कितना व किस हद तक फटेगा , आप जितना कुचल सकते हैं भारत को , भारतवासियों को , समझ लीजिये कुचल चुके दबा चुके , राजनीति बहुत हो गई , बहुत कूटनीति व नेतागिरी कर ली ।
लोगों का अब पुलिस पर , कानून पर , राजनेताओं व सरकार पर, अदालतों पर भरोसा व यकीन नहीं रहा ।
एक बगावत , आक्रोश समूचे भारत में समाई है , भगोड़े टिक कहॉं पाये हैं , जब जंग छिड़ती है और वह जंग जब हक के लिये , न्याय के लिये होती है तो धर्मयुद्ध कहलाती है । महाभारत कहलाती है , इसलिये श्रीमद भगवद गीता पहला श्लोक है ” धर्म क्षेत्रे कुरू क्षेत्रे … ”
और महाभारत का अर्थ है भारत का महान होना .. विस्तृत व विशाल होकर चारों ओर फैलना , बहुतों को मिटा कर और बहुतों को मिला कर भारत बनाना , ऐसा भारत ही महाभारत कहलाया था जिसकी सत्ता 5500 वर्ष तक सम्पूर्ण विश्व भूमि पर रही ।
अब ये फैसला तो श्री कृष्ण ने काफी प्रयास करके पहले उन्हीं लोगों पर छोड़ दिया था जिनके बीच महाभारत का युद्ध हुआ कि ” तुम्हें मिटना है या मिलना है ” और सारी जातियां, धर्म , संप्रदाय , संस्कृतियां , भाषायें , सारे विश्व के लोग …. मिट गये और मिल कर एक हो गये …. और बन गया भारत का महाभारत …
अब आप तय कर लें कि ” भारत की जनता जो कि एक अभ‍िमन्यु है , कब तक निआप सातों महारथ‍ियों ( सरकार, नेता, पुलिस, अदालत, सिस्टम, भ्रष्ट , जनता को अपना गुलाम व खुद को राजा माानने वाले लोग ) हत्थे लाचार इस बालक को चक्रव्यूह में घेर फंसा कर रखना है और कब तक इसे जूझना और संघर्ष कराना है , और कब मार देना है ”
बेशक सातों महारथ‍ियों का खौफनाक व भयावह अंत तय है , महाभारत का मैदान सज रहा है , नया कुरूक्षेत्र बन चुका है , श्री कृष्ण हार चुका है , वह दुर्योधन के छप्पन भोग ठुकरा कर विदुर के घर साग रोटी खा रहा है ।
चिल्लाओ मत , तब चुप थे तो अब भी चुप रहो, बोलने का हक खो खुके हो , जीने का हक खो चुके हो , बोलोगे तो जुबान खुद ही टपक कर नीचे गिर जायेगी , जिन्दगी का अहसास व आस रखोगे तो मौत सुनिश्चत हो खुद ब खुद आ जायेगी ।
क्या ऊना और क्या पूना …. अंधा भी केवल कॉमनसेन्स के आधार पर बता देगा , जुल्म की इन्त‍िहा गुजर चुकी है , अब तो बस आक्रोश व बदले का ज्वालामुखी फटना है , महाभारत के युद्ध का बिगुल बजना है , अर्जुन को रथ पर चढ़ना है , श्री कृष्ण को अपना पांचजन्य शंख फूंकना है ….. बस उसके बाद किसी को मिटना है और किसी को मिलना है , बेशक फिर एक महाभारत बनना है – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”

ग्वालियर टाइम्स के सी. ई. ओ. नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” को गूगल इंकारपोरेशन ने गूगल मैप के लिये अपना लोकल गाइड नियुक्त किया


देवपुत्र पायवेट लिमिटेड ग्रुप ऑफ कम्पनीज के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं लीगल एडवाइजर, चम्बल की आवाज तथा ग्वालियर टाइम्स के सी. ई. ओ. नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” को गूगल मैप्स इंकारपोरेशन ने गूगल मैप के लिये अपना लोकल गाइड बनाया

नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” को गूगल ( इन्कार्पोरेशन ) कम्पनी ने स्थानीय गाइड नियुक्त किया , सभी स्थानीय फोटो , थ्री डी फोटो , वीडियो सहित , उसका नाम , इतिहास , और पृष्ठभूमि , विचार, सतर्कता , सावधानियां सहित सभी प्रकार के व्यू और रिव्यू लिखने के सर्वाध‍िकार कम्पनी ने तोमर को सौंपें
ग्वालियर / मुरैना 19 जुलाई 2016 । गूगल कम्पनी ने अपने बहुत बड़े व संपूर्ण विश्व तक फैले महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ” गूगल मैप ” के लिय मुरैना के गांधी कालोनी के विख्यात व प्रसिद्ध समाजसेवी एवं पुराने अति अनुभवी नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”’ को अपना लोकल गाइड नियुक्त किया है ।
नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” को गूगल की ओर से नियुक्त‍ि पत्र प्राप्त हो गया है , साथ ही गूगल ने बहुत बड़ा काम करने जा रहे श्री तोमर को बहुत बड़ा अवार्ड देने की भी घोषणा की है ।
नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” अब न केवल किसी व्यक्त‍ि विशेष पर बल्क‍ि स्थल विशेष पर भी गूगल की ओर से काम करेंगें , किसी स्थल विशेष या व्यक्त‍ि विशेष को गूगल मैप में जोड़ सकेंगें, फर्जी या असत्य को हटा व डिलीट कर सकेंगें , लापता भवनों को तलाश सकेंगें, ऐतिहासिक स्थलों , किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान, व्यवसाय , होटल , खानपान, लॉजिंग , मंदिर , मस्जिद , चर्च , ढाबा अदि को चिह्न‍ित कर सकेंगें , उस पर ब्यौरा दजकर सकेंगें , उसे गेड दे सकंगें , डी ग्रेड कर सकेंगें ।
इसके अलावा किसी भी फोटो , वीडियो , थ्री डी वीड‍ियो या थ्री डी फोटो को गूगल मैप पर अपलोड कर सकेंगें , सभी ऐतिहासिक प्रृष्ठभूमि के स्थल अपलोड कर सकेंगें उनके इतिहास व ब्यौरे लिखें सकेंगें , स्थानीय स्कूलों , कालोजों के, चिकित्सा सुविधाओं, पेट्रोल पम्पों , सार्वजनिक सुविधाओं, होटलों आदि के नाम , चित्र वीडियो ब्यौरे ग्रेड , डीग्रेड , व्यू , रिव्यू लिख सकेंगें , जोड सकेंगें , हटा सकेंगें , किसी हस्ती विशेष , व्यक्त‍ि विशेष , युग पुरूष व ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर ब्यौरा चित्र वीडियो आदि जोड़ या हटा या बदल सकेंगें ।
असली सड़कों के , असली भवनों की व असल अधोसंरचना की , नगर के स्तरीय हालात व असल नगरीय हालात व स्थ‍िति के चित्र व वीडियो अपलोड कर सकेंगें , या हटा सकेंगें , संपादन व क्रियेशन , डिलीशन आदि सभी कार्य नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” गूगल मैप की ओर से तथा गूगल कम्पनी की ओर से करेंगें ।
नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द ” ने ग्वालियर चम्बल सहित राजस्थान के लोगों से कहा है कि वे अपने सड़को , बिजली संरचना , अन्य अधोसंरचना आदि के चित्र व वीडियो  आदि भेजते समय अपने कैमरे का जी.पी.एस. इन्फो ऑन रखें और , सारे जी.पी.एस. सूचनाओं की रिकार्डिंग कैमरे को ही करने दें , जिससे आपका फोटो या वीडियो स्वत: आटोमेटिक रूप से जियो टेग हो जायेगा और खुद ब खुद सही जगह गुगल मैप में स्वत: सेट हो जायेगा । अपने चित्र या वीडियो के साथ संपूर्ण ब्यौरा अवश्य भेंजें , उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभ्ज्ञूमि अवश्य भेजें , यदि किसी ऐतिहासिक स्थल से संबंधी वीडियो या चित्र भेज रहे हैं तो उसका संदर्भ ग्रंथ , प्रमाण‍िकता सहित संपूर्ण अतिहास व वंशावली आदि अवश्य भेजें ।
चम्बल के लोगों से बिजली , सडक व खेतों की हालत तथा अन्य इन्फ्रा स्ट्रक्चर संबधी वीडियो व चित्र भेजने की अपेक्षा की गयी है , जो गुगल के लोकल गाइड नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” द्वारा गुगल मैप में दर्ज किया गया जायेगा , केवल वही चित्र , वीडियो व ब्यौरा ही संपूर्ण विश्व में दिखेगा ।

फिल्म – योगेश्वरी ( भाग – 4) काला जादू , तंत्र मंत्र की काट


BHARAT FILM ( PART -2) भारत फिल्म (भाग-2)


भारत फिल्म ( भाग - 2)

भारत फिल्म भाग -2  का विश्वस्तरीय प्रसारण हुआ
बहुप्रतीक्ष‍ित फिल्म भारत भाग – 2 का आज देवपुत्र फिल्मस , मीडिया एवं एडवर्टाइजर्स प्रायवेट लिमिटेड द्वारा प्रसारण कर दिया गया , इस फिल्म को नीचे दी गयी लिंक पर क्ल‍िक करके सीधे यू ट्यूब , फेसबुक , ट्व‍िटर सहित 16 सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है , विज्ञापन अनुबंधों के कारण ग्वालियर टाइम्स के निजी वेबलाग्स और निजी इंटरनेट प्लेटफार्म पर यह फिल्म इसी हफ्ते बाद में प्रसारित की जायेगी ।
हल्दीघाटी का युद्ध, ग्वालियर के राजा रामशाह सिंह तोमर की और उनकी तीन पीढ़ीयों की वीरगति , चम्बल के 423 तोमर राजपूतों की वीरगति, महाभारत की महारानी कुन्ती का कुन्तलपुर ( अर्जुन की ननसार) , मुनि दुर्वासा की तपस्थली व आश्रम, महारानी कुन्ती का शि‍व लिंग और शि‍व मंदिर, कर्णखार जहॉं सूर्य का रथ आसन नदी में उतरा , जहॉं कर्ण का जन्म हुआ, कर्णखाार आसन नदी जहॉं स्वर्ण मंजूषा में रख कर कर्ण को आसन नदी में प्रवाहित किया गया , देखि‍ये सारे भौतिक स्थलों के चित्र व वीडियो इस फिल्म में
Presented By Gwalior Times
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भारत फिल्म ( भाग - 2)

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भारत ( फिल्म भाग -2 ) प्रोमो ट्रेलर


Film – Yogeshwari ( Part- 2) फिल्म योगेश्वरी ( भाग – 2)


स्त्री पुरूष सम्बन्ध व गुण मिलान , ऋणात्मक व धनात्मक ऊर्जायें एवं कुंडिल‍िनी का शक्त‍ि प्रवाह


स्त्री पुरूष सम्बन्ध व गुण मिलान , ऋणात्मक व धनात्मक ऊर्जायें एवं कुंडिल‍िनी का शक्त‍ि प्रवाह
– नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”
मनुष्य मात्र में या प्राणी मात्र में जिनमें से उन्हें छोड़कर जो कि उभयलिंगी होते हैं जैसे केंचुआ, या अमीबा , पैरामीश‍ियम या अन्य , शेष बाकी सभी में मातृ शक्त‍ि और पितृ शक्त‍ि , तथा तीनों गुण सतो गुण , रजो गुण, तमो गुण मौजूद रहते हैं , प्रत्येक प्राणी मात्र में इन गुणों की यह मात्रा का अनुपात घटा या बढ़ा हुआ रहता है और यह भी कि यह सदैव घटता बढ़ता रहता है , जो हर मनुष्य के आचरण व व्यवहार का निर्धारण व नियंत्रण कर उसके व्यक्त‍ित्व व गुणों के साथ उसके प्रभा मंडल का निर्माण करता है , वैसे सभी प्राणी या सारे मनुष्य भौतिक देह आधार पर एक जैसे ही नजर आते हैं , लेकिन केवल इन गुणों के अनुपात घटते बढ़ने से उनके स्वभाव , आचरण, व्यवहार व कर्म निर्धारित होकर उनके स्वरूप व व्यक्त‍ित्व का निर्माण होता है ।
बेशक यही ध्रुव सत्य है कि जिस पुरूष में जिस अनुपात में पौरूषीय गुण शक्त‍ि तथा सत , रज या तम गुण की जितनी मात्रा होगी , उसके ठीक एकदम विपरीत कम या ज्यादा गुण शक्त‍ि वाली स्त्री स्वत: ही उसकी ओर आकर्ष‍ित व सम्मोहित होकर अनजाने ही उसकी चाहने वाली होगी , यह चाहना किसी भी रूप में या किसी भी हद तक हो सकता है । लोग इसे सभ्यतावश अनेक नाम दे देते हैं ” पसन्द” करना से लेकर बहिन, पत्नी, मेहबूबा, प्रेमिका, या अन्य दीगर किसी प्रकार का अनजान या मित्रता मात्र का गहरा रिश्ता कुछ भी हो किन्तु उनमें स्वाभाविक परस्पर एक अंदरूनी प्रीति व लगाव एवं ख‍िंचाव बना रहेगा ।
मसलन उदाहरण के रूप में यह संभव है कि जिस पुरूष में पौरूषत्व ज्यादा हो , और इसके विपरीत किसी स्त्री में स्त्रीत्व ज्यादा हो तो उनमें स्वाभाविक ही सम्मोहन व आकर्षण हो जायेगा , इसी प्रकार स्त्रीत्व गुणों से संपन्न पुरूष के प्रति पुरूष गुण से संपन्न नारी के बीच स्वाभाविक सम्मोहन , आकर्षण व प्रीति होगी ।
अक्सर जहॉं समलिंगी सम्बन्ध या विवाह होते हैं , वहॉं इन्हीं गुणों व स्वरूपों का करिश्माई कमाल होता है , भगवान शंकर का अर्धनारीश्वर स्वरूप या श्री कृष्ण का या अर्जुन का स्त्रीवेश धारण करना इसे निरूपित व परिभाष‍ित कर इसकी विस्तृत व्याख्या करता है ।
एक नपुंसक लिंग या उभयलिंगी यदि कोई प्राणी शुरूआत में या जन्म से न हो लेकिन वह यदि कुंआरा रहने या ब्रह्मचर्य का व्रत धारण कर ले या समलिंगी सम्बन्ध कर ले या समलिंगीं विवाह कर ले तो , स्त्री पुरूष संबंधों से या तंत्र में भैरवी शक्त‍ि या भैरवी चक्र जागरण के बाद सहस्त्राधार तक कुंडिलिनी शक्त‍ि को ले जाकर ” ऊँ” की प्राप्त‍ि का मार्ग पूरी तरह बदल जाता है और फिर ऐसे मनुष्य के अंदर स्वयं ही दोनों शक्त‍ियां यदि भैरव एवं भैरवी पैदा हो जायें तो ही वह साधना के अंतिम चक्र तक जाकर समाध‍ि अवस्था तक पहुँच पायेगा , अन्यथा विनष्ट होकर उसकी सारी शक्त‍ि ऋणात्मक होकर ऊर्ध्व गति प्रवाह के बजाय अधोगति प्रवाह में होने लगेगी और वह निम्नमनतर गति व ऋणात्मक होता जायेगा , आसुरी तत्व बढ़ते जायेंगें अंतत: अंतिम गति में उसका स्वरूप एवं अगली जन्म निम्न या क्षुद्र या किसी अन्य नीच योनि में होगा और उसे बेशक मनुष्य योनि में पुनर्जन्म लेना संभव नहीं होगा ।
स्त्री पुरूष चाहे वह दांपत्य जीवन में पति पत्नी हों , या प्रेमी प्रेमिका हों , मेहबूब व मेहबूबा हों या लिव इन रिलेशन में हों , उन्हें परस्पर ऊर्जायमान व तेजस्वी होने का अनुभव व अहसास यदि हो अर्थात सकारात्मक या धनात्मक ऊर्जा प्रवाह व समृद्धि , चेतना की परस्पर अनुभूति हो तो ही संबंध या रिश्ता जारी रखना चाहिये , अन्यथा इसके विपरीत यदि किसी भी प्रकार से पारस्परिक संबंधों से ऋणात्मकता या अधोगति या तनाव या चिन्ता या विकारग्रस्तता या खेद या ऋणत्मक ऊर्जा प्रवाह या समृद्धि व चेतना की हीनता या हृास या कमी अनुभव या महसूस हो तो , ऐसे रिश्ते या संबंध तुरंत समाप्त कर देने चाहिये और आगे और ज्यादा होने वाल अधोगति को जारी नहीं रखना चाहिये ।
जन्म कुण्डली मिलान में , वर व वधू की जन्म कुण्डली मिलान करना एक बहुत उत्तम व उचित व्यवस्था है , किन्तु यह पूरी तरह से एक गण‍ितीय व वैज्ञानिक विध‍ि व रीति है , कम ज्ञान वाले या अधूरे ज्ञान वाले या अगण‍ितीय या अवैज्ञाानिक ज्योतिषी से ऐसा जन्म कुण्डली विवाह मिलान नहीं कराना चाहिये । वरना सब कुछ उल्टा पुल्टा हो जायेगा ।
मसलन कुण्डी मिलान में कई गुणों का मिलान किया जाता है , जैसे वर्ण , योनि एवं नाड़ी आदि ….. इनके सबके अपने अपने अर्थ एवं महत्व हैं , कुल मिलाकर जितने गुण मिलान शास्त्रीय रीति से वर वधू के मिलान किये जाते हैं , एक उत्तम गण‍ितज्ञ व वैज्ञानिक ज्योतिषी उससे ज्यादा आगे जाकर अन्य और भी कई गुणों का मिलान कर एक सटीक व उत्तम विवाह मिलान कर सकता है या स्पष्टत: विवाह लिान को रिजेक्ट कर देगा । अत: देख भाल कर चालिये, यही में सबकी खैर , वरना चले थे मोहब्बत करने, पर हो गया उनसे वैर ….. ( विशेष कृपया उन लोगों से विशेष रूप से उनसे सवाधान रहें जो यह गारण्टी देते हैं कि प्रमिका का वशीकरण करा दूंगा , या आकर्षण करा दूंगा, खोया प्रेम पुन: वापस पायें , मनचाही संतान पायें वगैरह , आदमी की खुद की कोई गारण्टी नहीं होती कि आधे घण्टे के भीतर उसके खुद के साथ क्या होने वाला है , लिहाजा दूसरों को चैलेन्ज करके गारण्टी देने वाले खुद को खुदा कहने वाले या हनुमान जी का सिद्ध या किसी अवतार का सिद्ध बताने वाले ढोंगीं पाखण्डीयों से बच कर रहें , हो सकता है , कि आधे घण्टे में कुदरत या खुदा उन्हीं का कुछ और ही अंजाम लिख रही हो अत: अपना धन व समय एवं इज्जत बचा कर रखें , सोच समझ कर ही इसे खर्च करें ) हम नाम नहीं बताना चाहते , कुछ ज्योतषी व तंत्र के विशेषज्ञ हैं , ऐसे लोग भी हैं जो पूरे शहर भर में हमारे यहॉं सबकी जन्म कुण्डलियां बनाते हैं , कुण्डलियां मिलान करते हैं और पूजा पाठ हवन आदि तंत्र क्रियायें करते हैं , लेकिन खुद के लिये , अपने स्वयं के परिवार के लिये या किसी मोटे ग्राहक की कुंडली बनवाने या कुण्डली मिलान करवाने या किसी तंत्र क्रिया या हवन आदि , पूजा पाठ या अनुष्ठान के लिये वे हमारे पास आते हैं और हमसे यह सब करवाते हैं , खैर यह उनका धंधा है , चलता भी खूब है , कमा भी खूब रहे हैं , चाहे कोई बर्बाद हो या आबाद हो , उन्हें बस अपने धंधे के चलने से काम …. खैर यह संसार है , इसी तरह चलता है – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”

भारत फिल्म आश्चर्यजनक रूप से सुपर डुपर हिट हुई , केवल दो दिन में विश्व भर में रिसर्च प्रोजेक्ट भी बनी और 2 करोड़ 44 लाख प्रसारण हुये


यह अत्यंत आश्चर्य का विषय है कि , हम फिल्म योगेश्वरी के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे , लेकिन अचानक बीच में ही फिल्म ” भारत ” भी साथ में बनाने और प्रसारण का आइडिया आया , और बस यूं ही एक फौरी तौर पर बहुत हल्की सी मात्र 26 मिनअ की छोटी सी फिल्म ” भारत के असल इतिहास व असल परिचय पर यू ट्यूब पर अपलोड कर दी । हालांकि अभी न तो फिल्म योगेश्वरी और न फिल्म भारत , ग्वालियर टाइम्स की नेटवर्क पर रिलीज हुई हैं , यानि कि ग्वालियर टाइम्स की खुद की समग्र व संपूर्ण नेटवर्क करीब 33.3 करोड़ लोगों की है, अर्थात आज तक दोनों में से एक भी फिल्म अभी ग्वालियर टाइम्स की खुद की नेटवर्क पर रिलीज नहीं हुई है । केवल मात्र यू ट्यूब अपलोड से ही हमारे विश्व भर में फैले चैनल पार्टनरों और हमारे खुद के चैनल पार्टनर यू ट्यूब को ”भारत” फिल्म इतनी पसन्द आई कि उन्होंनें खुद ही फिल्म को न केवल फैला का सारे विश्व में प्रसारण कर दिया , बल्क‍ि उसे हिस्ओरिकल व सांइंटिफिक रिसर्च का सर्वाधिक उपयोगी व महत्वपूर्ण दस्तावेजी अभ‍िलेख लेकर रिसर्च प्रोजेक्ट बना दिया , हमारे पास आई विश्व की बहुत बड़ी रिसर्च व प्रसारण , पकाशक हस्त‍ियों की प्रतिक्रियाओं में अनुरोध किया गया है , कि हम इस विषय पर यानि ” भारत” फिल्म को आगे बढ़ायें और फिल्म भारत का अगला भाग एवं उससे आगे के और कई भाग जारी करें । जबकि वास्तविकता यह है कि , हमने मात्र उतना अंश ही फिल्म भारत बना कर बस यूं ही यू ट्यूब पर अपने चैनल पर डाल दिया था ।
खैर जब बात समूचे विश्व से और बहुत बड़ी रिसर्च प्रोजेक्ट के रूप में आई है , तो अवश्य ही अब फिल्म ”भारत” के अगले भाग भी बनायेंगें और यू ट्यूब पर अपलोड करने के साथ ही उन्हें तथा पीछे डाले गये भाग भी ग्वालियर टाइम्स की नेटवर्क पर रिलीज व प्रसारित करेंगें ।
इस विवरण के साथ यह मजेदार व रोचक , इतिहास बदल देने वाली फिल्म यू ट्यूब पर अपलोड की गई थी , विश्व ने इसे ही सही माना , तथा इसके साथ ही , हड्प्पा , सिंधुघाटी जैसी फर्जी इतिहास की किताबें व सारी बातें समूचे विश्व स्तर पर फर्जी स्वीकार व मान्य कर अमान्य व अस्वीकृत कर दी गईं । बल्क‍ि सतयुग, त्रेता , द्वापर , कलयुग का सिद्धांत ही सर्वमान्य हुआ । उल्लेखनीय है कि फिल्म योगेश्वरी और फिल्म भारत में हीाौतिक साक्ष्यों के वीडियो भी दिखाये गये थे , आज फिर फिल्म भारत हम यहॉं ब्राडकास्ट कर रहे हैं , आप भी देख लीजिये कि विश्व ने अंतत: भारत को ही अपना विश्व गुरू कैसे स्वीकार किया और एडम व हव्वा या आदम हव्वा तथा हड्प्पा , सिंधुघाटी की तथाकथ‍ित फर्जी सभ्यताओं को क्यों अमान्य व अस्वीकार किया गया । और क्यों श्री कृष्ण व महाभारत का सिद्धांत सर्वमान्य व स्वीकार हुआ ।
भारत की एक असल खोज ( भारत का महाभारत) एक विश्व सल्तनत ग्वालियर टाइम्स द्वारा फिल्म – ”भारत ” की विश्वस्तरीय रिलीज व टेलीकास्ट जारी की
कौन है भारत, किसका नाम है भारत , क्यों कहते हैं हमारे देश को भारत , भारत पिताजी का नाम है या हमारी माता जी का, क्या है वंदे मातरम् का असली अर्थ , क्यों नहीं बोलना चाहिये ” भारत माता की जय” , कहॉं है दिव्य भारत , महाभारत क्या है , जानिये विश्व के सबसे प्राचीनतम किले और उसके असल निर्माताओं के बारे में पहली बार भारत का असल इतिहास , विश्व के सबसे प्राचीनतम सनातन धर्म के ग्रंथ ” श्री महाभारत ” से , क्यों श्री कृष्ण ने श्रीमद भगवद्गीता में अर्जुन को बार बार ” भारत” कहकर पुकारा और कहा कि ” यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत …. हे भारत ( अर्जुन) , जब जब धर्म की हानि होती है , क्यों अर्जुन के वंशजों को अर्थात तोमर राजवंश को भारत कहते हैं । जानिये सारे रहस्यों का खुलासा इस फिल्म में , जानिये कि स्वामी विवेकानंद ने क्या कहा है भारत के बारे में और अंग्रेजों के बारे में , सारे रहस्य खोलती एक फिल्म ”भारत” ग्वालियर टाइम्स की दमदार, जानदार व शानदार प्रसारण प्रस्तुति , देवपुत्र फिल्म्स प्रायवेट लिमिटेड का निर्माण – स्वर व उच्चारण – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”
यह फिल्म यू टयूब पर विश्व स्तर पर प्रकाशन एवं प्रसारण की जा चुकी है , आप इसे निम्न लिंक पर क्ल‍िक करके देख सकते हैं

 

फिल्म ”योगेश्वरी का पहला भाग , ग्वालियर टाइम्स ने विश्वस्तर पर रिलीज व टेलीकास्ट जारी किया


फिल्म ” योगेश्वरी ” का पहला भाग का विश्वव्यापी प्रसारण , फिल्म की इण्ट्रोडक्ट्री प्रसारित की जा चुकी है , इस फिल्म के खास भाग ” ताजमहल तोमर राजवंश का शिव मंदिर पूरी कथा व कहानी , इंद्रप्रस्थ यानि दिल्ली का पुराना किला और उसकी पूरी कहानी
ग्वालियर टाइम्स । 18 मई 2016 , ग्वालियर टाइम्स द्वारा प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय महत्व की एवं राष्ट्रीय महत्व की ( यूनिसेफ द्वारा सूचीबद्ध एवं शासकीय मान्यता प्राप्त तथा भारत सरकार के एन.जी.ओ. पोर्टल पर उपलब्ध , ( ”वॉयस ऑफ भारत” में संस्था के नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” की आवाज सेम्पल राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में सूरक्षित होने का सम्मान प्राप्त ), मुरैना मेला प्रदर्शनी में सन 1993- 94 में प्रदर्शनी का प्रथम पुरूस्कार व सम्मान प्राप्त स्वयंसेवी संस्था ”नेशनल नोबल यूथ अकादमी” तथा ”देवपुत्र फिल्म्स, एडवर्टाइजिंग एंड सीरियल्स निर्माण ” कंपनी        (देवपुत्र प्रायवेट लिमिटेड ग्रुप ऑफ कम्पनीज की एक सब्स‍िडियरीज कंपनी – रजिस्टर्उ अंडर कंपनीज एक्ट – 1956) के तहत निर्माण की गयी फिल्म सतयुग, त्रेता काल , द्वापर काल से लेकर कलयुग में आज दिनांक तक , ” योगेश्वरी” के नाम से निर्मित फिल्म का प्रसारण इसी हफ्ते से विश्व स्तर पर शुरू किया जायेगा , इस हफ्ते पहला भाग दिखाया जायेगा , फिल्म के पहले भाग में महाभारत के पराक्रमी योद्धा अर्जुन की मॉं कुन्ती के मातृ निवास राज्य ”कुंतलपुर की पहली फिल्म दिखाई जायेगी , जिसमें योगेश्वरी के कुतलपुर में हरसिद्धि के रूप में विराजित होने और महाभारत के मैदान में पांडवों को विजय दिलाने की फिल्म व कहानी दिखाई जायेगी । फिल्म के दूसरे भाग में भी यह कहानी व यह फिल्म जारी रहेगी, फिल्म के तीसरे भाग में कुतलपुर के ही ”कुंती के शंकर जी की मंदिर , दुर्वासा मुनि की तप स्थली, एवं वह स्थल जहॉं आसन नदी में सूर्य का रथ एवं घोड़े उतरे , कर्ण का जन्म हुआ, कर्णखार से लेकर उस स्थल पर की विस्तृत फिल्म …. इसी प्रकार यह फिल्म योगेश्वरी अपनी पूर्ण कथा के साथ आगे बढ़ते , ग्वालियर किले के मंदिरों, मितावली के चौंसठ योगनी मंदिर, बटेसुरा के मंदिरों व पढ़ावली मंदिरों के रहस्यों , ककनमठ के मंदिर, पांडवों के राजवंश में देवीयों और अप्सराओं का पत्नी के रूप में रहना व वंश संचालन, देवी का का विध्यवासिनी के रूप में नाम व धाम , 52 शक्त‍ि पीठों , भैरव – भैरवियों , योगीयों – योगनियों , यक्ष – यक्षणियों, भूत प्रेत , शाकिनी डाकिनी , देवी के भेदों , देवी रहस्यों , दस महाविद्या भेद , स्त्री भेदों , स्त्रीयों में यक्षणीयों , योगनियों , आदि विभ‍िन्न स्वरूपों से गुजरती हुई , ऐसाह गढ़ी , दिल्लीपति महाभारत सम्राट महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर द्वारा निर्मित मंदिर भगेसुरी ( भगेश्वरी) , भवेसुरी ( भवेश्वरी) , ऐसाहगढ़ी में कामाख्या के रूप में चम्बल नदी का स्वरूप धारण कर भगेसुरी माता के सेटेलाइट चित्र , दिल्ली में इंद्रप्रस्थ के किले में पांडवों द्वारा बनवाये गये योगमाया , योगमाता मंदिर, से लेकर वर्तमान में माता बीजासेन तक की कहानी व मंदिर फिल्म में दिखायें जायेंगें । इस बीच में इस फिल्म ”योगेश्वरी” के प्रसारण के दौरान , बीच बीच में अन्य सामायिक व सामाजिक फिल्में या शासकीय ब्राडकास्टेड व टेलीकास्टेड फिल्मों का प्रसारण जारी रहेगा । अत: फिल्म ‘ योगेश्वरी” के बीच बीच में , अन्य फिल्में भी प्रसारित होंगीं । फिल्म योगेश्वरी की आधी शूटिंग पूर्ण हो चुकी है और पहला भाग एडिटिंग की प्रक्रिया से गुजर रहा है , फिल्म एच.डी. कैमरे से शूट की गयी है , फिल्म की कैमरा सांचालन टीम व छायांकन व फिल्मांकन ” मुरैना के विख्यात कैमरामैन ”अजय सोनी” और दीपक राजौरिया ने किया है , डायरेक्शन स्क्रिप्ट आदि नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द एवं विनोद दुबे ने किया है
अगली फिल्म की तैयारी – ग्वालियर टाइम्स द्वारा इसके साथ ही अगली फिल्म बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है – फिल्म का नाम होगा ” ….. ” यह फिल्म भारत की आखरी विश्व सत्ता पर आधारित होगी और मक्का मदीना का असल रहस्य व असल कथा , असल इतिहास व असल कहानी , अजमेर की दरगाह का रहस्य सहित अरब में तोमर राजपूतों की सत्ता के साक्ष्य , भगवान जगन्नाथ का मंदिर और उसकी ध्वज पताका का रहस्य, इसमें कई राजवंशों के व राजपूतों के असल भेद, वंश व उनके राज्य क्षेत्र उजागर किये जायेंगें , दोनों ही फिल्में भारत के असल व सनातन प्राचीन ग्रंथों , शास्त्रों एवं वंशावलियों पर आधारित हैं । जो लोग हमारी इस प्रोजेक्ट टीम में किसी भी रूप में जुड़ना चाहें वे हमसे नीचे दिये चित्र में पतों पर संपर्क कर सकते हैं । फायनेन्सरों एवं फिल्म लाइन के अनुभवियों , आदि काल से लिख रहे परंपरागत वंशावली लेखकों , प्राचीन ग्रंथों व शास्त्रों के विशेषज्ञों , का सुस्वागतम है , इतिहासकारों का प्राचीन ग्रंथों , शास्त्रों, वंशावलियों के मुताबिक इतिहास लेखकों का स्वागत है , किसी भी फर्जी इतिहास लेखक , या काल्पनिक मनगढन्त इतिहास लिखने वाले कृपया भूलकर भी हमसे संपर्क न करें , तदनुसार फर्जी राजा , महाराजा , मुगलों एवं अंग्रेजों के गुलाम व दास तथाकथ‍ित राजा महाराजा , गवर्नर , लाट साहब , पटेल , राव साहब , राय साहब ऐसे लोग जिन्हें भारत के इतिहास , ग्रंथ , शास्त्र एवं वंशावलियां मान्यता नहीं देते एवं उनका अनुसमर्थन नहीं करते , या वर्ष सन 1193 – 1194 के बाद के अचानक बने काल्पनिक राजा महाराजा कृपया कतई संपर्क नहीं करें , चूंकि फिल्में पूर्णत: शत प्रतिशत शुद्ध विशुद्ध भारत के इतिहास , ग्रंथों एवं शास्त्रों पर आधारित हैं अत: अशुद्धता, काल्पनिकता या मनगढन्तता के लिये इनमें कोई स्थान नहीं है । ” ये फिल्में ”जो है सो है , जो जैसा है सो जैसा और वैसा है” पर आधारित हैं एवं इनमें सभी कुछ यथावत रखा जा रहा है । हम उम्मीद करते हैं कि आप हमारी , भारत की भावना को पूर्णत: समझेंगें और उसका सम्मान करेंगें । कल के सम्राटों के वंशज आज भले ही खेत जोत रहे या मजदूरी कर रहे गरीब और भुखमरी में जी रहे हों , हमारी फिल्में उनके उस भव्य इतिहास और उन्हें किसने व कैसे लूटा , कैसे गरीब बनाया , कैसे भुखमरी में धकेला , इस अंाम तक यानि भारत की आज की कहानी तक चल कर आयेंगीं , इसलिये हमने इनको दो अलग अलग फिल्मों में बनाना सुनिश्च‍ित किया है ।
– नरेन्द्र सिंह तोमर ” आनन्द”

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