ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान होगा पर्यावरण पर्यटन राष्ट्रीय आकर्षण


ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान होगा पर्यावरण पर्यटन राष्ट्रीय आकर्षण

651 वर्ग कि.मी. सघन वन क्षेत्र विस्थापित वन्य जीवों का नया घर

मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जलाशयों से घिरा 651 वर्ग कि.मी. का विशाल सघन वन क्षेत्र ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान, दो वन्यप्राणी अभयारण्य, तथा दो संरक्षित इकाईयों के रूप में पर्यावरण पर्यटन के शोकीनों के लिये आकर्षण का केन्द्र बनने जा रहा है। यह वन क्षेत्र जहां विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों, बहुरंगी फूलों से लदी झाड़ियों, घास के हरे भरे मैदानों तथा बारहमासी कल कल बहते झरनों, से भरा पड़ा है, वही इसमें विभिन्न प्रजातियों के वन्य जीवों को देखने का आनन्द लिया जा सकेगा। राष्ट्रीय उद्यान का एक बड़ा आकर्षण बड़ी संख्या में खड़े अन्जन वृक्षें का विशाल समूह है जो वन रक्षा के लिये तैनात ब्लेक कमांण्डों बटालियान का आभास देते है

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री उदय कुमार वर्मा ने हाल ही में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के सघन वन क्षेत्र की पदयात्रा के बाद प्राधिकरण के पर्यावरण संरक्षण अधिकारियों को निर्देश दिये है कि उद्यान से संबंधित सभी कार्यो निश्चित समय सीमा में पूरा करे। श्री वर्मा ने बताया कि इंदिरा सागर जलाशय में 40 हजार 332 वन क्षेत्र डूब में आया है। इस क्षेत्र से विस्थापित वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिये प्राधिकरण ने भारतीय वन्यप्राणी संस्थान तथा भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की सेवाएं ली हैं। क्षेत्र के सर्वेक्षण और अध्ययन के बाद भारतीय वन प्रबंधन संस्थान ने पर्यावरण संरक्षण विकास परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया है इसी प्रतिवेदन के आधार पर राष्ट्रीय उद्यान की कार्ययोजना को मूर्तरूप दिया जा रहा है। श्री वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय उद्यान विकास के कार्यो पर चालू वर्ष में 10 करोड़ 33 लाख रूपये का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। किये जा रहे कार्यो में नर्मदा नगर में एक इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण, वन्यप्राणियों के लिये सुरक्षित और अनुकूल वातावरण की व्यवस्था, पर्यटकों की सुविधा से संबंधित कार्य और उद्यान से लगे 29 गांव के लोगों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने संबंधी कार्य सम्मिलित है। सभी कार्य सितम्बर माह तक पूर्णकर उद्यान को 1 अक्टूबर 2007 से पर्यटको के लिये खोला जाना प्रस्तावित है।

प्राधिकरण में वन्यप्राणी संरक्षक श्री विनय कुमार वर्मन ने बताया कि इंदिरा सागर जलाशय से विस्थापित टाईगर, पेन्थर, निलगाय, सांभर, चीतल, चिंकारा बायसन जैसे वन्य जीवों का नया आवास ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान होगा। श्री वर्मन ने बताया कि वन्य प्राणियों को सुरक्षित, प्राकृतिक और अनुकूल वातावरण देने संबंधी उपायों के साथ ही जलाशय के टापूओं पर विभिन्न पक्षी प्रजातियों को आकर्षित करने के उपाय भी किये जा रहे है।

 

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