चम्बल में विद्युत सप्लाई पूर्णत: ध्वस्त: लगातार नवदुर्गा में ब्लैक आउट


हल्‍दी जर्दी ना तजै, खटरस तजै ना आम । शीलवान गुन ना तजै, ना औगुन तजै गुलाम ।।

चम्बल में विद्युत सप्लाई पूर्णत: ध्वस्त: लगातार नवदुर्गा में ब्लैक आउट

कहाँ तक बयां करें हालात ए गुलिस्तां, यहाँ हर शाख पे उल्लू बैठा है

नोट इस समाचार में पूर्व में प्रकाशित समाचारों के कतिपय अंश तारतम्‍यवश यथावत अंत में रख लिये गये हैं  

मुरैना 27 अक्‍तूबर 07 ! फर्जी दावे करने झूठी वाहवाही बटोरने में लगी म.प्र. सरकार की पीठ पिछाड़ी भारतीय जनता पार्टी भारत सरकार के परमाणु करार का विरोध कर देश को बिजली मिलने और बनाने से रोकने के लिये भले ही नंगा नाच रच रही हो, लेकिन बी.बी.सी. हिन्‍दी द्वारा विचार प्रतिक्रिया स्‍तम्‍भ में भारत की जनता ने परमाणु करार विरोधीयों और बिजली समस्‍या पैदा कर देश का विकास ठप्‍प कर फर्जी बातें करने वाले, परमाणु करार से देश में बिजली पैदा न होने देने और राष्‍ट्र को बिजली संकट में फंसाये रखने वाले ऐसे जनविरोधी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों और राजनेताओं के मुँह पर करारा तमाचा जड़ा है, यह स्‍तम्‍भ अभी बीबीसी पर जारी है आप पढ़ सकते हैं कि भारत की जनता इनके बारे में क्‍या कहती है ।    

और दावे दर दावे तथा आश्‍वासन दर आश्‍वासन के बावजूद पूरी तरह फेल हो चुकी सरकार की नपुंसकता के चलते अंततोगत्वा पिछले 12 अक्‍टूबर से चम्बल घाटी में कहर मचा रही बिजली व्यवस्था अपने चरम पर आकर जहॉं हिन्‍दूओं के प्रमुख आस्‍था एवं भक्ति पर्व नवरात्रि आरम्‍भ वाले दिन 12 अक्‍तूबर को ही न केवल पूरे दिन ही गुल रही वहीं रात को भी हिन्‍दूवादी भाजपा सरकार ने लोगों को माता की आरती तक नहीं करने दी । जहॉं व्रत उपवास कर नवरात्रों में लोग माता की भक्ति उपासना व अर्चना पूजा के लिये साल भर से उस दिवस का इन्‍तजार करते हैं जब माता घर में विराज कर प्रत्‍येक हिन्‍दू के घर नौ दिन की मेहमानी करती हैं, लोग व्रत उपवास तो छोडि़ये नहा धो भी नहीं पाये, माता की कलश व घट स्‍थापना पवित्र जल भर कर की जाती है तथाकथित हिन्‍दूओं के हिमायती भाजपाईयों ने लोगों को इस दिन ऐन माता की प्रतिष्‍ठा व स्‍थापना के दिन यानि 12 अक्‍तूबर को ही एक एक बूंद पानी के लिये तरसा दिया । बिल्‍कुल ठीक यही हालात अष्‍टमी वाले दिन यानि अंतिम पर्व दिवस यानि 19 अक्‍टूबर को जब कि लोग इस दिन पूरे दिन अनुष्‍ठान व यज्ञ हवन आदि करते हैं को भी सुबह 6 बजे गुल हुयी बिजली रात आठ बजे आई । लो भईया कर लो पूजा और हवन । बुधवार 17 अक्‍टूबर को पूरे 17 घण्‍टों के लिये पूर्णत: ठप्प हो ही गयी ! मजे की बात यह है कि हम एक सम्‍भागीय मुख्‍यालय शहर मुरैना की बात कर रहे हैं । गॉंवों और किसानों का आलम तो यह है कि अगर दिन भर में बीस मिनिट भी मिल जाये तो समझिये यूरेका यूरेका यानि मतलब समझ गये होंगे आप । समूची चम्‍बल घाटी का आलम यही है जनाब ।

उल्लेखनीय है कि विगत 12 अक्‍टूबर 07 से चम्बल घाटी की बिजली सप्लाई पूरी तरह चरमरा गयी थी और दिन में पीक वर्किंग टाइम में लगभग 6-7 घण्‍टे तथा रात में करीब 3-4 घण्टे की बेहिसाब अनाप शनाप कटौती चल रही थी, जिसका न समय तय था न कोई घोषणा ही इस मुतल्लिक जारी हुयी थी !

उधर दूसरी ओर सरकार दावा दर दावा ठोकने में लगी थी कि हम बहुत ज्यादा बिजली पैदा कर रहे हैं और अब कोई बिजली संकट नहीं है ! जबकि सच यह है कि चम्बल में धुंआधार कटौती चल रही थी !

अभी हाल ही में राष्‍ट्रीय जनता दल के मध्‍यप्रदेश के महासचिव नरेन्‍द्र सिंह तोमर आनन्‍द ने दिनांक 29 सितम्‍बर 2007 को लिखित शिकायती आवेदन चम्‍बल सम्‍भाग के अधीक्षण यंत्री को दिया था, जिसकी पावती ग्‍वालियर टाइम्‍स के कार्यालय में सुरक्षित है, यदि इस आवेदन को ही पढ़ लिया जाता और इस पर कार्यवाही कर दी गयी होती तो चम्‍बल सम्‍भाग में मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी के शराबी अधिकारी और कर्मचारीयों की करनी व करतूतों की न केवल सच्‍चाई सामने आ जाती बल्कि चम्‍बल की बिजली कटौती की समस्‍या भी सुलझ गयी होती । ( हम इस आवेदन की फोटो प्रति स्‍कैन कर अलग से विस्‍तृत आलेख इस सम्‍बन्‍ध में शीघ्र जारी करेंगें जो कि ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह की सभी वेबसाइटों पर उपलब्‍ध होगा । आप भी इस अंधेरगर्दी, भ्रष्‍टाचार और गुण्‍डागर्दी की कहानी का ऑखों देखा हाल भुक्‍तभोगी की जुबानी मय सबूत पढ़ सकेगें ) श्री तोमर का यह आवेदन आज की तारीख तक कार्यवाही के लिये लम्बित है । 

अभी हाल ही में म.प्र. के एक मंत्री रूस्‍तम सिंह ने मुरैना जिले में की जा रही अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती पर बिजली वितरण कम्‍पनी पर ऑंखे तरेरते हुये गीदड़ भभकी दी थी, लेकिन वह बेअसर रही ।  

अभी हाल ही में दो बड़े बिजली उत्पादन के अडडे जहाँ उदघाटित हुये हैं जिसमें एक लालकृष्ण आडवाणी जी ने किया वहीं दूसरा मुरैना के ऐन निकट ही ग्वालियर जिले में केन्द्रीय मंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने किया ! जिसमें दावा यह था कि म.प्र. विशेषकर चम्बल ग्वालियर की बिजली समस्या अब पूर्णत: समाप्त !

उधर भगवान की दया से प्रदेश में बरसात भी अच्छी भली चल रही है, बाढ़ आ रही है, बांधो के इमरजेन्सी गेट खोल कर जरूरत से ज्यादा इकठठा हुआ पानी निकालना पड़ रहा है !

फिर भी बिजली नहीं होना जहाँ हैरत अंगेज और गजब की जादूगिरी है वहीं कुछ चौंकाने वाले सवालों की भी जन्मदाता ! मसलन बिना बिजली मिले म.प्र. की जनता अरबों रूपया की बिल भरपाई वर्ष सनृ 2000 से करती आ रही है ! उल्लेखनीय है कि प्रदेश में एवरेज बिलर्स की संख्या 70 फीसदी है, जिन्हें बिजली मिले या न मिले एक निश्चित औसत राशि बिजली विभाग को देनी ही पड़ती है ! और यह राशि प्रतिमाह करोड़ों रू में और वर्ष 2000 से अब तक अरबों रू में पहुँच चुकी है !

जहाँ सरकार बिजली चोरी और जनता को चोर ठहराने में कोई कसर बकाया नहीं रखती वही अब यह सवाल भी जोरदार है कि बिना बिजली दिये की गयी अरबों रू की यह वसूली क्या नाहक नहीं है ? और क्या सरकार चोर नहीं है ? जिसने जनता की जेब पर डाका डाला है ! सरकार में यदि भलमनसाहत है तो पहले तो उनका पैसा लौटाये जिन्होंने इतने वर्ष तक बिना बिजली मिले भी पूरा बिल भुगतान किया है, उनकी बिजली तो कटी लेकिन बिलों में कटौती या उनकी धन वापसी की बात अभी तक क्यों नहीं हुयी ! यह सवाल यक्ष प्रश्न है, जिसका उत्तर सरकार को जनता को चोर कहने से पहले अनिवार्यत: देना होगा, तभी जनता के गले बात उतरेगी, वरना जनता आपको चोर कहती रहेगी, और आप जनता को !

विगत सोमवार 6 अगस्त से 8 अगस्त जो चम्बल में बिजली सप्लाई का जो कहर हुआ वह न केवल शर्मनाक बल्कि संभवत: म.प्र. के इतिहास में पहली बार हुआ जबरदस्त बलैक आउट है ! जिसमें 6 अगस्त सुबह से लेकर सारे दिन और सारी रात फिर 7 अगस्त को सारा दिन और सारी रात फिर 8 अगस्त को दोपहर 12 बजे तक लगातार सप्लाई ठप्प यानि पूर्णत: बन्द यानि ब्लैकआउट ! फिर दोबारा 8 अगस्त को शाम 4 बजे से रात 7:45 बजे तक पुन: सप्लाई बन्द ! गजब, अदभुत, चमात्कारिक, वाह क्या कहने ! बिजली वाले हुये या अलाउददीन के चिराग के जिन्न !

अब इसमें लोग कह रहे थे कि भईया आरक्षण की भर्ती है, आरक्षण का स्टाफ है तो यह तो होना ही है , अब ऐसी अवस्था में यदि लोग ऐसा कहते हैं तो हम पूछते हैं कि क्या गलत कहते हैं ! आरक्षण के नाम पर अयोग्य लोगों या कम योग्य लोगों के सहारे ऐसे संवेदलशील टैक्नीकल काम छोड़े जायेंगे तो यह तो होगा ही ! अव्वल तो वे कुछ जानते ही नहीं, दूसरे हराम की चाट पंजीरी का ऐसा स्वाद उनके मुँह लगा है कि, सरकार बाद में बिजली बेच पायेगी वे यहीं फैक्ट्रयों और इण्डस्ट्रियों में जम कर बिजली बेच देते हैं, उनके बैंक बैलेन्स और कोठीयों की लम्बाई चौड़ाई तो लगभग यही कहानी कहती है ! वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह भी कहते हैं कि बजली वालों को चोर और डकैतों से हफ्ता वसूली मिलती है, और कब कब कहाँ की बिजली गुल की जायेगी इसकी खबर चोरों डकैतों को रहती है और बिजली विभाग के गुप्त शिडयूल के अनुसार ही उनका गुप्त शिडयूल चलता है ! अगर लोग ऐसा कहते हैं, तो अब लोग क्या गलत कहते हैं ? 

उल्लेखनीय है कि मुरैना और भिण्ड दोनों ही जिलों में बिजली को लेकर अभी हाल ही पिछले दस पन्द्रह दिनों में भारी जनआक्रोश और उपद्रव हुआ जहाँ महिलाओं ने जगह जगह कई आन्दोलन किये और पुतले फूंके, बिजली वालों की धुनाई पिटाई कर डाली वहीं लगता है सारी चम्बल घाटी में महिलाओं की फौज मानो कमर कसकर विद्रोह और विरोध पर उतारू है और प्रदर्शन, धरना, विरोध से लेकर धुनाई पिटाई भी उनके आन्दोलन का हिस्सा है, मजे की बात ये है कि उनके साथ कोई राजनीतिक दल नहीं हैं, जनता अपनी लड़ाई खुद लड़ रही है !

पिछले सप्ताह म.प्र. शासन के पूर्व कांग्रेस मंत्री राकेश चौधरी को जरूर भिण्ड में बिजली समस्या को लेकर न केवल सड़कों पर आना पड़ा बल्कि भिण्ड कलेक्ट्रेट की तालाबन्दी करना पड़ी, उनके तालाबन्दी आन्दोलन को जनता का इतना व्यापक समर्थन मिला कि भिण्ड की सडृकों पर जनता समाये नहीं बन रही थी, उन्होंने न केवल कुशलता और सफलतापूर्वक कलेक्ट्रेट भिण्ड की तालाबन्दी कर दी बल्कि जनता के हीरो भी बन गये ! यह भी स्मरणीय है कि भिण्ड के वर्तमान भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह भी बिल्कुल ठीक इसी तरह विधायक बने ! बस फर्क यह था कि उस समय कांग्रेस की सरकार थी और इसी बिजली के लिये आन्दोलन नरेन्द्र सिंह कुशवाह ने इसी तरह जनता को साथ लेकर किया था ! और कई बिजली वालों की पिटाई धुनाई की थी, और पहले वे अखबारों की सुर्खियां बनें, फिर भिण्ड के विधायक ! तब राकेश चौधरी भिण्ड के विधायक और बाद में सरकार के मंत्री थे ! अब बिल्कुल वही सिचुएशन एकदम उल्टी है ! यानि आप समझ ही गये होंगे कि इसका अर्थ क्या है !

मुरैना की स्थिति थोड़ी भिन्न है, विशुध्द रूप से आरक्षित सीट रहने और भाजपा का अखण्ड गढ़ रहने से यहाँ जननेतृत्व का अभाव है, यहाँ के विधायक, सांसद जननेता की परिभाषा से परे हैं , चाटुकारिता और कृपालुता के भरोसे राजनीति करने वाले नेताओं के साये में मुरैना जिला की जनता को अपनी लड़ाई खुद लड़ना पड़ती है, लड़ती आयी है, और लड़ भी रही है ! नेता, विधायक, मंत्री, सांसद सब अपनी अपनी पीठ खुद ही थपथपाते रहते हैं, थपथपा रहे हैं, उनका हमेशा ही खैरियत अलार्म औरजी सरयस सरतकिया कलाम चालू रहता है !      

जनता चोर और वे साहूकार, वाह भई वाह उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे ! लोकतंत्र में जनता कोतवाल होती है, और सरकार चोर, लोकतंत्र का मतलब तो यही है भईया ! जनता अधिकारी होती है, और सरकारी लोग उसके नौकर यानि सेवक यानि पब्लिक सर्वेण्ट ! मगर यहाँ तो उल्टी ही गंगा बह रही है ! 

क्या कहता है बिजली विभाग  ?

आज के दैनिक भास्कर में बिजली विभाग का स्पष्टीकरण यानि पक्ष प्रकाशित है, हम दैनिक भास्कर से साभार इसे यहाँ दे रहे हैंमहकमे के बिजली के तार चार पाँच जगह पर टूट गये थे, रात का समय होने की वजह से तारों को जोड़ा नहीं जा सके, हालांकि बुधवार की दोपहर को शहर की आपूर्ति को सामान्य बना लिया गया है- पी.के.सिंह, एस.ई. विद्युत मण्डल मुरैना !

क्या उक्त पक्ष स्पष्टीकरण से कुछ जाहिर नहीं होता – 1. ये लोग 24 घण्टे के पूर्णकालिक कर्मचारी यानि लोकसेवक यानि पब्लिक सर्वेण्ट नहीं हैं 2. बिजली के तार टूटना एक सामान्य और आम बात है जो सनृ 2000 से आज तक रोजाना हो रही है 3. ट्रान्सफार्मर फुंकना आम बात है जो सन 2000 से रोजाना फुंक रहे हैं 4. रात के वक्त बिजली महकमा काम नहीं करता 5. चार पाँच जगह के बिजली के तार तीन दिनों में जोड़ पाते हैं बेचारे 6. दारू पीकर होश में आने में कर्मचारीयों को तीन दिन से ज्यादा भी लग जाते हैं !

 

हल्‍दी जर्दी ना तजै, खटरस तजै ना आम । शीलवान गुन ना तजै, ना औगुन तजै गुलाम ।।



चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

हल्‍दी जर्दी ना तजै, खटरस तजै ना आम । शीलवान गुन ना तजै, ना औगुन तजै गुलाम ।।

चम्बल में विद्युत सप्लाई पूर्णत: ध्वस्त: लगातार नवदुर्गा में ब्लैक आउट

कहाँ तक बयां करें हालात ए गुलिस्तां, यहाँ हर शाख पे उल्लू बैठा है

नोट इस समाचार में पूर्व में प्रकाशित समाचारों के कतिपय अंश तारतम्‍यवश यथावत अंत में रख लिये गये हैं  

मुरैना 20 अक्‍तूबर 07 ! फर्जी दावे करने झूठी वाहवाही बटोरने में लगी म.प्र. सरकार की पीठ पिछाड़ी भारतीय जनता पार्टी भारत सरकार के परमाणु करार का विरोध कर देश को बिजली मिलने और बनाने से रोकने के लिये भले ही नंगा नाच रच रही हो, लेकिन बी.बी.सी. हिन्‍दी द्वारा विचार प्रतिक्रिया स्‍तम्‍भ में भारत की जनता ने परमाणु करार विरोधीयों और बिजली समस्‍या पैदा कर देश का विकास ठप्‍प कर फर्जी बातें करने वाले, परमाणु करार से देश में बिजली पैदा न होने देने और राष्‍ट्र को बिजली संकट में फंसाये रखने वाले ऐसे जनविरोधी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों और राजनेताओं के मुँह पर करारा तमाचा जड़ा है, यह स्‍तम्‍भ अभी बीबीसी पर जारी है आप पढ़ सकते हैं कि भारत की जनता इनके बारे में क्‍या कहती है ।    

और दावे दर दावे तथा आश्‍वासन दर आश्‍वासन के बावजूद पूरी तरह फेल हो चुकी सरकार की नपुंसकता के चलते अंततोगत्वा पिछले 12 अक्‍टूबर से चम्बल घाटी में कहर मचा रही बिजली व्यवस्था अपने चरम पर आकर जहॉं हिन्‍दूओं के प्रमुख आस्‍था एवं भक्ति पर्व नवरात्रि आरम्‍भ वाले दिन 12 अक्‍तूबर को ही न केवल पूरे दिन ही गुल रही वहीं रात को भी हिन्‍दूवादी भाजपा सरकार ने लोगों को माता की आरती तक नहीं करने दी । जहॉं व्रत उपवास कर नवरात्रों में लोग माता की भक्ति उपासना व अर्चना पूजा के लिये साल भर से उस दिवस का इन्‍तजार करते हैं जब माता घर में विराज कर प्रत्‍येक हिन्‍दू के घर नौ दिन की मेहमानी करती हैं, लोग व्रत उपवास तो छोडि़ये नहा धो भी नहीं पाये, माता की कलश व घट स्‍थापना पवित्र जल भर कर की जाती है तथाकथित हिन्‍दूओं के हिमायती भाजपाईयों ने लोगों को इस दिन ऐन माता की प्रतिष्‍ठा व स्‍थापना के दिन यानि 12 अक्‍तूबर को ही एक एक बूंद पानी के लिये तरसा दिया । बिल्‍कुल ठीक यही हालात अष्‍टमी वाले दिन यानि अंतिम पर्व दिवस यानि 19 अक्‍टूबर को जब कि लोग इस दिन पूरे दिन अनुष्‍ठान व यज्ञ हवन आदि करते हैं को भी सुबह 6 बजे गुल हुयी बिजली रात आठ बजे आई । लो भईया कर लो पूजा और हवन । बुधवार 17 अक्‍टूबर को पूरे 17 घण्‍टों के लिये पूर्णत: ठप्प हो ही गयी ! मजे की बात यह है कि हम एक सम्‍भागीय मुख्‍यालय शहर मुरैना की बात कर रहे हैं । गॉंवों और किसानों का आलम तो यह है कि अगर दिन भर में बीस मिनिट भी मिल जाये तो समझिये यूरेका यूरेका यानि मतलब समझ गये होंगे आप । समूची चम्‍बल घाटी का आलम यही है जनाब ।

उल्लेखनीय है कि विगत 12 अक्‍टूबर 07 से चम्बल घाटी की बिजली सप्लाई पूरी तरह चरमरा गयी थी और दिन में पीक वर्किंग टाइम में लगभग 6-7 घण्‍टे तथा रात में करीब 3-4 घण्टे की बेहिसाब अनाप शनाप कटौती चल रही थी, जिसका न समय तय था न कोई घोषणा ही इस मुतल्लिक जारी हुयी थी !

उधर दूसरी ओर सरकार दावा दर दावा ठोकने में लगी थी कि हम बहुत ज्यादा बिजली पैदा कर रहे हैं और अब कोई बिजली संकट नहीं है ! जबकि सच यह है कि चम्बल में धुंआधार कटौती चल रही थी !

अभी हाल ही में राष्‍ट्रीय जनता दल के मध्‍यप्रदेश के महासचिव नरेन्‍द्र सिंह तोमर आनन्‍द ने दिनांक 29 सितम्‍बर 2007 को लिखित शिकायती आवेदन चम्‍बल सम्‍भाग के अधीक्षण यंत्री को दिया था, जिसकी पावती ग्‍वालियर टाइम्‍स के कार्यालय में सुरक्षित है, यदि इस आवेदन को ही पढ़ लिया जाता और इस पर कार्यवाही कर दी गयी होती तो चम्‍बल सम्‍भाग में मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी के शराबी अधिकारी और कर्मचारीयों की करनी व करतूतों की न केवल सच्‍चाई सामने आ जाती बल्कि चम्‍बल की बिजली कटौती की समस्‍या भी सुलझ गयी होती । ( हम इस आवेदन की फोटो प्रति स्‍कैन कर अलग से विस्‍तृत आलेख इस सम्‍बन्‍ध में शीघ्र जारी करेंगें जो कि ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह की सभी वेबसाइटों पर उपलब्‍ध होगा । आप भी इस अंधेरगर्दी, भ्रष्‍टाचार और गुण्‍डागर्दी की कहानी का ऑखों देखा हाल भुक्‍तभोगी की जुबानी मय सबूत पढ़ सकेगें ) श्री तोमर का यह आवेदन आज की तारीख तक कार्यवाही के लिये लम्बित है । 

अभी हाल ही में म.प्र. के एक मंत्री रूस्‍तम सिंह ने मुरैना जिले में की जा रही अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती पर बिजली वितरण कम्‍पनी पर ऑंखे तरेरते हुये गीदड़ भभकी दी थी, लेकिन वह बेअसर रही ।  

अभी हाल ही में दो बड़े बिजली उत्पादन के अडडे जहाँ उदघाटित हुये हैं जिसमें एक लालकृष्ण आडवाणी जी ने किया वहीं दूसरा मुरैना के ऐन निकट ही ग्वालियर जिले में केन्द्रीय मंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने किया ! जिसमें दावा यह था कि म.प्र. विशेषकर चम्बल ग्वालियर की बिजली समस्या अब पूर्णत: समाप्त !

उधर भगवान की दया से प्रदेश में बरसात भी अच्छी भली चल रही है, बाढ़ आ रही है, बांधो के इमरजेन्सी गेट खोल कर जरूरत से ज्यादा इकठठा हुआ पानी निकालना पड़ रहा है !

फिर भी बिजली नहीं होना जहाँ हैरत अंगेज और गजब की जादूगिरी है वहीं कुछ चौंकाने वाले सवालों की भी जन्मदाता ! मसलन बिना बिजली मिले म.प्र. की जनता अरबों रूपया की बिल भरपाई वर्ष सनृ 2000 से करती आ रही है ! उल्लेखनीय है कि प्रदेश में एवरेज बिलर्स की संख्या 70 फीसदी है, जिन्हें बिजली मिले या न मिले एक निश्चित औसत राशि बिजली विभाग को देनी ही पड़ती है ! और यह राशि प्रतिमाह करोड़ों रू में और वर्ष 2000 से अब तक अरबों रू में पहुँच चुकी है !

जहाँ सरकार बिजली चोरी और जनता को चोर ठहराने में कोई कसर बकाया नहीं रखती वही अब यह सवाल भी जोरदार है कि बिना बिजली दिये की गयी अरबों रू की यह वसूली क्या नाहक नहीं है ? और क्या सरकार चोर नहीं है ? जिसने जनता की जेब पर डाका डाला है ! सरकार में यदि भलमनसाहत है तो पहले तो उनका पैसा लौटाये जिन्होंने इतने वर्ष तक बिना बिजली मिले भी पूरा बिल भुगतान किया है, उनकी बिजली तो कटी लेकिन बिलों में कटौती या उनकी धन वापसी की बात अभी तक क्यों नहीं हुयी ! यह सवाल यक्ष प्रश्न है, जिसका उत्तर सरकार को जनता को चोर कहने से पहले अनिवार्यत: देना होगा, तभी जनता के गले बात उतरेगी, वरना जनता आपको चोर कहती रहेगी, और आप जनता को !

विगत सोमवार 6 अगस्त से 8 अगस्त जो चम्बल में बिजली सप्लाई का जो कहर हुआ वह न केवल शर्मनाक बल्कि संभवत: म.प्र. के इतिहास में पहली बार हुआ जबरदस्त बलैक आउट है ! जिसमें 6 अगस्त सुबह से लेकर सारे दिन और सारी रात फिर 7 अगस्त को सारा दिन और सारी रात फिर 8 अगस्त को दोपहर 12 बजे तक लगातार सप्लाई ठप्प यानि पूर्णत: बन्द यानि ब्लैकआउट ! फिर दोबारा 8 अगस्त को शाम 4 बजे से रात 7:45 बजे तक पुन: सप्लाई बन्द ! गजब, अदभुत, चमात्कारिक, वाह क्या कहने ! बिजली वाले हुये या अलाउददीन के चिराग के जिन्न !

अब इसमें लोग कह रहे थे कि भईया आरक्षण की भर्ती है, आरक्षण का स्टाफ है तो यह तो होना ही है , अब ऐसी अवस्था में यदि लोग ऐसा कहते हैं तो हम पूछते हैं कि क्या गलत कहते हैं ! आरक्षण के नाम पर अयोग्य लोगों या कम योग्य लोगों के सहारे ऐसे संवेदलशील टैक्नीकल काम छोड़े जायेंगे तो यह तो होगा ही ! अव्वल तो वे कुछ जानते ही नहीं, दूसरे हराम की चाट पंजीरी का ऐसा स्वाद उनके मुँह लगा है कि, सरकार बाद में बिजली बेच पायेगी वे यहीं फैक्ट्रयों और इण्डस्ट्रियों में जम कर बिजली बेच देते हैं, उनके बैंक बैलेन्स और कोठीयों की लम्बाई चौड़ाई तो लगभग यही कहानी कहती है ! वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह भी कहते हैं कि बजली वालों को चोर और डकैतों से हफ्ता वसूली मिलती है, और कब कब कहाँ की बिजली गुल की जायेगी इसकी खबर चोरों डकैतों को रहती है और बिजली विभाग के गुप्त शिडयूल के अनुसार ही उनका गुप्त शिडयूल चलता है ! अगर लोग ऐसा कहते हैं, तो अब लोग क्या गलत कहते हैं ? 

उल्लेखनीय है कि मुरैना और भिण्ड दोनों ही जिलों में बिजली को लेकर अभी हाल ही पिछले दस पन्द्रह दिनों में भारी जनआक्रोश और उपद्रव हुआ जहाँ महिलाओं ने जगह जगह कई आन्दोलन किये और पुतले फूंके, बिजली वालों की धुनाई पिटाई कर डाली वहीं लगता है सारी चम्बल घाटी में महिलाओं की फौज मानो कमर कसकर विद्रोह और विरोध पर उतारू है और प्रदर्शन, धरना, विरोध से लेकर धुनाई पिटाई भी उनके आन्दोलन का हिस्सा है, मजे की बात ये है कि उनके साथ कोई राजनीतिक दल नहीं हैं, जनता अपनी लड़ाई खुद लड़ रही है !

पिछले सप्ताह म.प्र. शासन के पूर्व कांग्रेस मंत्री राकेश चौधरी को जरूर भिण्ड में बिजली समस्या को लेकर न केवल सड़कों पर आना पड़ा बल्कि भिण्ड कलेक्ट्रेट की तालाबन्दी करना पड़ी, उनके तालाबन्दी आन्दोलन को जनता का इतना व्यापक समर्थन मिला कि भिण्ड की सडृकों पर जनता समाये नहीं बन रही थी, उन्होंने न केवल कुशलता और सफलतापूर्वक कलेक्ट्रेट भिण्ड की तालाबन्दी कर दी बल्कि जनता के हीरो भी बन गये ! यह भी स्मरणीय है कि भिण्ड के वर्तमान भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह भी बिल्कुल ठीक इसी तरह विधायक बने ! बस फर्क यह था कि उस समय कांग्रेस की सरकार थी और इसी बिजली के लिये आन्दोलन नरेन्द्र सिंह कुशवाह ने इसी तरह जनता को साथ लेकर किया था ! और कई बिजली वालों की पिटाई धुनाई की थी, और पहले वे अखबारों की सुर्खियां बनें, फिर भिण्ड के विधायक ! तब राकेश चौधरी भिण्ड के विधायक और बाद में सरकार के मंत्री थे ! अब बिल्कुल वही सिचुएशन एकदम उल्टी है ! यानि आप समझ ही गये होंगे कि इसका अर्थ क्या है !

मुरैना की स्थिति थोड़ी भिन्न है, विशुध्द रूप से आरक्षित सीट रहने और भाजपा का अखण्ड गढ़ रहने से यहाँ जननेतृत्व का अभाव है, यहाँ के विधायक, सांसद जननेता की परिभाषा से परे हैं , चाटुकारिता और कृपालुता के भरोसे राजनीति करने वाले नेताओं के साये में मुरैना जिला की जनता को अपनी लड़ाई खुद लड़ना पड़ती है, लड़ती आयी है, और लड़ भी रही है ! नेता, विधायक, मंत्री, सांसद सब अपनी अपनी पीठ खुद ही थपथपाते रहते हैं, थपथपा रहे हैं, उनका हमेशा ही खैरियत अलार्म औरजी सरयस सरतकिया कलाम चालू रहता है !      

जनता चोर और वे साहूकार, वाह भई वाह उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे ! लोकतंत्र में जनता कोतवाल होती है, और सरकार चोर, लोकतंत्र का मतलब तो यही है भईया ! जनता अधिकारी होती है, और सरकारी लोग उसके नौकर यानि सेवक यानि पब्लिक सर्वेण्ट ! मगर यहाँ तो उल्टी ही गंगा बह रही है ! 

क्या कहता है बिजली विभाग  ?

आज के दैनिक भास्कर में बिजली विभाग का स्पष्टीकरण यानि पक्ष प्रकाशित है, हम दैनिक भास्कर से साभार इसे यहाँ दे रहे हैंमहकमे के बिजली के तार चार पाँच जगह पर टूट गये थे, रात का समय होने की वजह से तारों को जोड़ा नहीं जा सके, हालांकि बुधवार की दोपहर को शहर की आपूर्ति को सामान्य बना लिया गया है- पी.के.सिंह, एस.ई. विद्युत मण्डल मुरैना !

क्या उक्त पक्ष स्पष्टीकरण से कुछ जाहिर नहीं होता – 1. ये लोग 24 घण्टे के पूर्णकालिक कर्मचारी यानि लोकसेवक यानि पब्लिक सर्वेण्ट नहीं हैं 2. बिजली के तार टूटना एक सामान्य और आम बात है जो सनृ 2000 से आज तक रोजाना हो रही है 3. ट्रान्सफार्मर फुंकना आम बात है जो सन 2000 से रोजाना फुंक रहे हैं 4. रात के वक्त बिजली महकमा काम नहीं करता 5. चार पाँच जगह के बिजली के तार तीन दिनों में जोड़ पाते हैं बेचारे 6. दारू पीकर होश में आने में कर्मचारीयों को तीन दिन से ज्यादा भी लग जाते हैं !

 

कृषि उपभोक्ताओं के लिए उर्जा संरक्षण उपाय



चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

कृषि उपभोक्ताओं के लिए उर्जा संरक्षण उपाय

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कृषि पंप उपभोक्ताओं को उर्जा संरक्षण के उपाय बताये हैं। कंपनी ने कहा कि ऊर्जा घटक और वोल्टेज में सुधार के लिए मोटर के साथ सही क्षमता वाले आई.एस.आई. मार्क शन्ट कैपेसिटर का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे बिजली की बचत होती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कार्य क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे दिन में कुएं की बत्ती (पायलेट लेम्प) बंद रखें।

कंपनी ने कहा है कि घटिया मोटर-पंप सैट वास्तव में बिजली की ज्यादा खपत करते हैं और भविष्य में ज्यादा खर्चीले साबित होते हैं। इसलिए पंप खरीदते समय इनर्जी इफिशियन्ट पंप ही खरीदना चाहिए। कृषि उपभोक्ताओं को पाइप की ऊंचाई और क्षमता को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त पंप सेट्स का प्रयोग करना चाहिए। बिजली की खपत को कम करने के लिए टयूब वेल में कम प्रतिरोधी (घर्षण) वाले फुटवाल्व लगाना चाहिए। ऊर्जा संरक्षण के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले पी.वी.सी. सक्शन पाइप का प्रयोग करना चाहिए। इससे 20 प्रतिशत तक बिजली बच सकती है।

इसी तरह यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पानी के तल से मोटर पंप तीन मीटर से अधिक ऊपर नहीं हो। पानी का निकास भूमि-तल के निकटतम होना चाहिए। सिंचाई पंप की बियरिंग्स को नुकसान से बचाने के लिए मोटर और पंप को एक सीध में ही रखना चाहिए। यह ऊर्जा को बेकार होने से बचाता है। सिंचाई पंपों को नियमित रूप से पंप निर्माता कंपनी के बताए तरीके के अनुसार तेल एवं ग्रीस देते रहना चाहिए।

 

एक नवम्बर को ”छात्रावास दिवस” के रूप में मनाया जायेगा


एक नवम्बर को छात्रावास दिवस  के रूप में मनाया जायेगा

मुरैना 25 अक्टूबर 2007 // मध्यप्रदेश का स्थापना दिवस आगामी एक नवम्बर को अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रावासों एवं आश्रमों में छात्रावास दिवसके रूप में मनाया जायेगा। इस अवसर पर छात्रावासों-आश्रमों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। राज्य शासन ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के छात्रावास-आश्रमों में वर्ष 2007-08 से छात्रावास दिवस योजनाकी स्वीकृति प्रदान की है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 6 अप्रैल, 2007 को अनुसूचित जाति पंचायत के आयोजन के अवसर पर मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस एक नवम्बर को प्रतिवर्ष छात्रावास-आश्रमों में छात्रावास दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की गई थी।

योजना के उद्देश्यों में छात्रावास-आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की बहुमुखी प्रतिभा की पहचान तथा छात्र-छात्राओं में आपसी सद्भाव का मेल-मिलाप बढ़ाना, छात्रावास-आश्रम संचालन में पालकों एवं अभिभावकों की सहभागिता एवं सुझाव प्राप्त करना, छात्रावास-आश्रम की कार्यप्रणाली एवं गतिविधियों से पालकों-अभिभावकों को अवगत कराना, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना तथा अनुसूचित जनजाति-अनुसूचित जाति कल्याण की विभिन्न योजनाओं से पालकों को अवगत कराना है।

योजना का क्रियान्वयन प्रतिवर्ष एक नवम्बर (मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस) को छात्रावास-आश्रमों में निवास करने वाले छात्र-छात्राओं के पालकों-अभिभावकों को अधीक्षक द्वारा विधिवत आमंत्रित कर किया जायेगा। आयोजन में स्थानीय जन-प्रतिनिधि यथा क्षेत्रीय विधायक, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका-नगर पंचायत के अध्यक्ष अथवा सरपंच आदि को भी आमंत्रित किया जायेगा।

आमंत्रित अतिथियों-पालकों-अभिभावकों के समक्ष विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। इनमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, छात्रावास-आश्रम का वार्षिक प्रतिवेदन का प्रस्तुतीकरण, आगामी वर्ष की कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण तथा पुरस्कार वितरण किया जायेगा। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता छात्र-छात्राओं के अतिरिक्त छात्रावास-आश्रमों में सर्वश्रेष्ठ अनुशासित आचरण एवं सर्वाधिक उपस्थिति वाले प्रथम तीन छात्र-छात्रा को पुरस्कृत किया जायेगा। पुरस्कार का निर्धारण उपलब्ध प्रावधान से अधीक्षक-छात्र-छात्राओं की समिति द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर सामूहिक विशेष भोज का आयोजन भी होगा।

 

पीड़ित परिवार को 50 हजार रूपये की सहायता


पीड़ित परिवार को 50 हजार रूपये की सहायता

मुरैना 25 अक्टूबर 2007 // कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने जिले की सबलगढ़ तहसील के ग्राम बामसौली निवासी श्री पान सिंह रावत को 50हजार रूपये की आर्थिक अनुदान सहायता स्वीकृत की है । यह सहायता गत 1 अगस्त को संर्पदंश के कारण पान सिंह की पत्नी श्रीमती मिथलेश की मृत्यु हो जाने से स्वीकृत की गई है । राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के तहत यह सहायता राशि तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी सबलगढ़ की अनुशंसा के आधार पर स्वीकृत की गई है ।

 

मध्यान्ह भोजन के लिए ढाई करोड़ रूपये की राशि जारी


मध्यान्ह भोजन के लिए ढाई करोड़ रूपये की राशि जारी

मुरैना 25 अक्टूबर 2007 / परिवर्तित व्यवस्था के अनुसार मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु जनपद पंचायतों को 2 करोड 57 लाख 50 हजार 934 रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है ।

       मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभय वर्मा के अनुसार जिले के ग्रामीण क्षेत्र की शासकीय एवं अनुदान प्राप्त प्राथमिक शालाओं को प्रति विद्यार्थी प्रत्येक शैक्षणिक दिवस हेतु 2 रूपये के मान से स्व सहायता समूह को प्रदाय करने के लिए उक्त राशि जारी की गई है ।

       जनपद पोरसा को 34 लाख 75 हजार 158 रूपये, अम्बाह को 35 लाख 34 हजार 834 रूपये, मुरैना को 58 लाख 35 हजार 344 रूपये, जौरा को 37 लाख 61 हजार 450 रूपये , कैलारस को 29 लाख 26 हजार 019 रूपये, पहाडगढ़ को 31 लाख 39 हजार 258 रूपये तथा सबलगढ़ को 30 लाख 78हजार 873 रूपये की राशि माह नवम्बर से जनवरी 08 तक के लिए प्रदत्त की गई है । इस राशि में से शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक तीन माह के लिए आवश्यक राशि स्व सहायता समूह के योजना खाते में जमा की जायेगी ।

 

वर्ष 2008-09 के लिए 115 करोड़ रूपये की जिला योजना अनुमोदित


वर्ष 2008-09 के लिए 115 करोड़ रूपये की जिला योजना अनुमोदित

 

प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला योजना समिति की बैठक सम्पन्न

 

मुरैना 25 अक्टूबर 2007 // ग्रामाद्योग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री करण सिंह वर्मा की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न जिला योजना समिति की बैठक में आगामी वित्त वर्ष 2008-09 के लिए मुरैना जिले की 115 करोड़ 61 लाख 47 हजार रूपये की वार्षिक जिला योजना अनुमोदित की गई । ज्ञात हो कि म.प्र. राज्य योजना मंडल द्वारा जिले के लिए 122 करोड़ 19 लाख रूपये के परिव्यय का निर्धारण किया गया था। जिसकी तुलना में अनुमोदित जिला योजना 5.38 प्रतिशत कम परिव्यय की प्रस्तावित की गई । जिला योजना में 82 करोड़ 10 लाख 97 हजार रूपये की राशि सामान्य योजना, 6 करोड़ 25 लाख 01 हजार रूपये आदिवासी उप योजना और 27 करोड़ 25 लाख 49 हजार रूपये की राशि विशेष घटक योजना के लिए प्रावधानित की गई है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह की विशिष्ट उपस्थिति में सम्पन्न इस बैठक में सांसद श्री अशोक अर्गल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रघुराज सिंह कंषाना, विधायक सर्वश्री गजराज सिंह सिकरवार, वंशीलाल, मेहरवान सिंह रावत, उम्मेद सिंह बना और श्रीमती संध्या सुमन राय, कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी , पुलिस अधीक्षक श्री हरीसिंह यादव तथा जिला योजना समिति के सदस्यगण और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे ।

       पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह के प्रस्ताव पर जिला योजना समिति द्वारा रेल्वे अंडर ब्रिज के निर्माण के लिए 1 करोड़ 77 लाख रूपये की राशि लोक निर्माण विभाग के बजट में शामिल कराकर कार्य कराने का अनुमोदन किया गया । साथ ही क्वारी नदी पर वरेठा और सांगोली के पास तथा सांक नदी पर वमरोली के पास स्टाप डेम बनाने के लिए स्थल चिन्हित करने के निर्देश कार्यपालन यंत्री जल संसाधन को दिए गये ।

       बैठक में अनुसूचित जाति और जन जाति के किसानों को अनुदान पर बीज उपलब्ध कराने की सूरज धारा योजना को जिले में लागू करने का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया । इस योजना में अनुसूचित जाति और जन जाति के किसानों को बीज स्वावलम्बन और बीज अदला-बदली कार्यक्रम के तहत इस वर्ष 10 लाख 80 हजार रूपये की राशि व्यय की जायेगी । योजना के अन्तर्गत 2070 हेक्टर का लक्ष्य रखा गया है । अनुसूचित जाति जनजाति के किसानों को इसके लिए 75 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा । इसके साथ ही समिति द्वारा पोरसा में विगत चार वर्षों से जप्त एवं राजसात उर्वरक को खुली नीलामी से विक्रय कर गोदाम खाली करने के प्रस्ताव को मंजूर किया गया ।

       प्रभारी मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने चालू वित्त वर्ष में प्राप्त आवंटन और व्यय की स्थिति की विभागवार समीक्षा की तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए प्राप्त बजट आवंटन का शत- प्रतिशत सदुपयोग सुनिश्चित किया जाय । उन्होंने कहा कि विकास योजना बनाते समय जनप्रतिनिधियों से आवश्यक रूप से चर्चा की जाय और उनके सुझावों को योजना में शामिल भी किया जाय । उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों से अच्छा व्यवहार करना अधिकारी कर्मचारी की आचार संहिता में शामिल है, इसका पालन नहीं करने वालों के विरूध्द कार्रवाई की जायेगी । उन्होंने उद्यानिकी विभाग को उपलब्ध करायी गयी बजट राशि के अभी तक उपयोग नहीं करने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसकी जांच करा कर संबंधित दोषी अधिकारी के विरूध्द कार्रवाई की जायेगी । उन्होंने कहा कि मुरैना के जन प्रतिनिधियों की पहल पर मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में बकाया राशि का 10 प्रतिशत जमा कराने पर शीघ्र ट्रांसफार्मर बदलने की कार्रवाई के आदेश जारी किये हैं । पहले ट्रांसफार्मर बदलने के लिए बकाया की पचास प्रतिशत राशि जमा करानी पड़ती थी । उन्होंने आशा व्यक्त की कि जन प्रतिनिधि और अधिकारी सांमंजस्य और समन्वय से कार्य कर मुरैना को मॉडल जिला बनाने की पहल करेंगें ।

              कलेक्टर एवं जिला योजना समिति के सचिव श्री आकाश त्रिपाठी ने गत बैठक में लिये गये निर्णयों का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया ।

अंत्यावसायी योजनाओं की ऋण बसूली में मुरैना प्रदेश में अब्बल


अंत्यावसायी योजनाओं की ऋण बसूली में मुरैना प्रदेश में अब्बल

मुरैना 24 अक्टूबर 2007 // अन्त्यावसायी स्वरोजगार योजनाओं में दिऐ गये ऋणों की बसूली में मुरैना जिला प्रदेश में अब्बल रहा है । यह जानकारी गत दिवस भोपाल में प्रबंध संचालक श्री एस.आर.मोहन्ती की अध्यक्षता में सम्पन्न छमाही समीक्षा बैठक में दी गई ।

       कार्यपालन अधिकारी जिला अन्त्यावसायी सहकारी विकास समिति श्री ओ.पी. जारौलिया को अनुसार जिले के वर्ष 2007 – 08 में 33 लाख रूपये की बसूली का लक्ष्य प्राप्त हुआ है । इस लक्ष्य की तुलना में वित्त वर्ष की प्रथम छ: माही में माह सितम्बर अंत तक छ: माही लक्ष्य से 140 प्रतिशत अधिक अर्थात 23 लाख 12 हजार रूपये की बसूली कर जिले ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया । जिले को यह उल्लेखनीय उपलब्धि कलेक्टर एवं समिति के अध्यक्ष श्री आकाश त्रिपाठी के सतत मार्गदर्शन के कारण संभव हो सकी ।

 

जन शिकायत निवारण शिविर 29 और 30 अक्टूबर को


जन शिकायत निवारण शिविर 29 और 30 अक्टूबर को

मुरैना 24 अक्टूबर 2007 // राज्य शासन के जन शिकायत निवारण विभाग के निर्देशानुसार मुरैना जिला मुख्यालय पर टाउन हॉल में आगामी 29 और 30 अक्टूबर को दो दिवसीय जन शिकायत निवारण शिविर आयोजित किया जायेगा

       कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने समस्त जिला अधिकारियों को 29 और 30 अक्टूबर को शिविर स्थल पर उपस्थित रह कर नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए है । शिविर में 29 अक्टूबर को शिकायती आवेदन विभागवार प्राप्त करने के लिए काउण्टर स्थापित रहेंगे । प्राप्त आवेदन पत्र को संबंधित विभाग की पंजी में दर्ज किया जायेगा । अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों का यथा संभव मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गये है । निराकरण से शेष रहे आवेदन पत्रों की विवेचना 30 अक्टूबर को अधिकारियों द्वारा की जायेंगी और शिकायत कर्ता को शिकायत के निराकरण के संबंध में अवगत कराया जायेगा । कलेक्टर ने समस्त जिला अधिकारियों को 29 और 30 अक्टूबर को शिविर में आवश्यक रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं

 

नवीन प्रतिभा प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदन 31 अक्टूबर तक आमंत्रित


नवीन प्रतिभा प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदन 31 अक्टूबर तक आमंत्रित

मुरैना 24 अक्टूबर 2007 // कला एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वालों से नवीन प्रतिभा प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिये संस्कृति संचालनालय शिवाजी नगर भोपाल द्वारा आगामी 31 अक्टूबर तक आवेदन-पत्र आमंत्रित किये गये हैं। योजना का उद्देश्य ऐसे विकलांग व्यक्तियों को जिन्होंने कला और साहित्य के विकास में योगदान दिया है, किन्तु असहाय हैं या ऐसे व्यक्तियों के आश्रितों को जो अपने परिवार को असहाय छोड़ गये हैं, प्रतिभा प्रोत्साहन योजनांतर्गत उन्हें वित्तीय सहायता पहुंचाना है।

प्रतिभा प्रोत्साहन योजना में मध्यप्रदेश के मूल निवासी जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो ऐसे विकलांग/असहाय व्यक्ति जिनका कला अथवा साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हो, परम्परागत विद्वान अथवा ऐसे व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर उनकी विधवा पत्नी, नाबालिग बच्चे तथा विशेष परिस्थितियों में आश्रित वृध्द माता-पिता, अवयस्क भाई-बहन को एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाती है। वित्तीय सहायता की राशि अधिकतम 25 हजार रुपये तक दी जा सकेगी।

मध्यप्रदेश के मूल निवासी कला, साहित्य तथा परम्परागत विधाओं से जुड़े विकलांग जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो अथवा उनके आश्रित/आवेदक की समस्त साधनों से होने वाली मासिक आय अकेले व्यक्ति के लिये 1500 रुपये, दो सदस्यीय परिवार के लिये 4000 रुपये तथा तीन या अधिक सदस्यीय परिवार के लिये 5000 रुपये से अधिक न हो, पात्र होंगे।

योजना के तहत आवेदक को निर्धारित प्रपत्र में कलेक्टर को आवेदनपत्र प्रस्तुत करना होगा। कलेक्टर अपनी अध्यक्षता में गठित समिति में प्रकरणों की छानबीन कर आवेदनपत्रों सहित अपना स्पष्ट अभिमत (अनुशंसा) आयुक्त/संचालक संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश, भोपाल को भेजेंगे। जहां आयुक्त/संचालक संस्कृति स्वयं की अध्यक्षता में गठित कार्यकारी समिति में विचार कर एकमुश्त सहायता राशि स्वीकृति या स्वीकृति सहायता राशि में वृध्दि करने का निर्णय लेंगे।

 

« Older entries

%d bloggers like this: