162 करोड़ रूपये से होगा 133 मार्गों का उन्नयन


162 करोड़ रूपये से होगा 133 मार्गों का उन्नयन

       प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 9 वें चरण के अन्तर्गत मुरैना जिले में 162 करोड़ 67 लाख 86 हजार रूपये की लागत से 590 किलो मीटर लम्बाई के 133 मार्गों के उन्नयन कार्य स्वीकृत हुए हैं।

       विधानसभा क्षेत्र अम्बाह में 11 मार्गों के लिए 8 करोड़ 93 लाख 62 हजार रूपये, दिमनी में 13 मार्गों के लिए 11 करोड़ 69 लाख 95 हजार रूपये, मुरैना में 42 मार्गों के लिए 52 करोड़ 15 लाख 85 हजार रूपये, सुमावली में 11 मार्गों के लिए 11 करोड़ 63 लाख 75 हजार रूपये, जौरा में 32 मार्गों के लिए 50 करोड़ 85 लाख 11 हजार रूपये और सबलगढ़ में 24 मार्गों के लिए 27 करोड़ 39 लाख 58 हजार रूपये मंजूर किये गये हैं। इन कार्यों के लिए निविदायें आमंत्रित की जा रही हैं।

 

672 किलो मीटर ग्रामीण सडकों का निर्माण


672 किलो मीटर ग्रामीण सडकों का निर्माण

मुरैना 28 फरवरी 08 । प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक योजना के अन्तर्गत मुरैना जिले में 124 करोड रूपये के व्यय से 672 किलो मीटर लम्बी 190 ग्रामीण सडकों के निर्माण पूर्ण कराये जा चुके हैं। योजना के अन्तर्गत 170 करोड 70 लाख 16 हजार रूपये की लागत से स्वीकृत 891 किलो मीटर लम्बी 256 सडकों के बन जाने पर जिले की पौने छै: लाख जनसंख्या लाभान्वित होगी।

       महाप्रबंधक म.प्र. ग्रामीण सडक विकास प्राधिकरण परियोजना क्रियान्वयन इकाई मुरैना श्री यशवंत सक्सैना से प्राप्त जानकारी के अनुसार योजना के अन्तर्गत 220 किलो मीटर लम्बे 66 मार्गो का निर्माण कार्य जारी हैं।

       मण्डी निधि के अन्तर्गत 1 करोड 78 लाख 15 हजार रूपये की लागत के 13 किलो मीटर लम्बे 6 मार्गो के निर्माण से 9 हजार की जनसंख्या को सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध हुई है। इसी प्रकार 2 करोड़ 13 लाख रूपये की लागत से स्वीकृत 14 सीमेन्ट क्रांक्रीट मार्गो के वन जाने पर 25 हजार की जनसंख्या को लाभ मिलेगा।

 

उद्योग एवं सहकारिता स्थाई समिति की बैठक 29 को


उद्योग एवं सहकारिता स्थाई समिति की बैठक 29 को

मुरैना 27 फरवरी 08/ उद्योग एवं सहकारिता स्थाई समिति की बैठक 29 फरवरी को दोपहर 3.00 बजे जिला पंचायत , मुरैना के सभागार में आयोजित की गई है ।

 

परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए अधिकारी नियुक्त


परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए अधिकारी नियुक्त

मुरैना 27 फरवरी 08/ कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री आकाश त्रिपाठी ने 1 मार्च से आयोजित माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्ड्री परीक्षाओं में नकल नहीं होने देने, परीक्षार्थियों को अनुचित साधनों का प्रयोग नहीं करने देने के लिए परीक्षा केन्द्र बार अधिकारियों की डयूटी आदेश जारी किये है ।

       परीक्षा केन्द्रों पर तैनात किये गये अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा संचालन समय तक परीक्षा कक्ष में उपस्थित रह कर परीक्षाओं में प्रकल रोकने की कार्रवाई करेंगे तथा प्रतिदिन की रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय में तथा एक प्रति अनुविभागीय दंण्डाधिकारी मुरैना के कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे ।

       कलेक्टर तथा आकस्मिक निरीक्षण दल (अपर जिला दंडाधिकारी, एस.डी.एम. और कार्यपालिक दंडाधिकारियों ) के निरीक्षण के दौरान परीक्षार्थियों द्वारा नकल करते हुए अथवा अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए पाये जाने की स्थिति में परीक्षार्थियों के साथ-साथ, परीक्षा केन्द्र प्रभारी तथा परीक्षा केन्द्र पर डयूटीरत अधिकारियों के विरूध्द भी कार्रवाई की जायेगी ।

 

योजनाओं का लाभ आम जन तक पहुंचे- कलेक्टर


योजनाओं का लाभ आम जन तक पहुंचे- कलेक्टर

कठिनाई आने पर हैल्प लाइन नम्बर 222222 शीघ्र डायल करें

मुरैना 27 फरवरी 2008/ राज्य शासन की संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंदों को लाभान्वित करायें, जिससे उनकी समस्याओं का निराकरण तत्काल ग्राम स्तर पर ही हो सके और उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय तक आने-जाने में समय व धन खर्च न करना पड़े । ये दायित्व पंचायत सचिव व पटवारियों का है कि ग्राम स्तर की समस्यायें ग्राम में ही निराकृत हों । ये निर्देश आज कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने प्रशिक्षण बतौर जिले के समस्त पटवारियों, ग्राम पंचायत के सचिवों को स्थित टाउन हाल में दिये । इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभय वर्मा, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार तथा सभी पटवारी, पंचायत सचिव सहायक विस्तार अधिकारी, पंचायत निरीक्षक एवं राजस्व निरीक्षक उपस्थित थे ।

       कलेक्टर श्री त्रिपाठी ने कहा कि राजस्व, खसरा- खतौनी, लाडली लक्ष्मी योजना, खाद्य, सामाजिक सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय परिवार सहायता, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना, सर्व शिक्षा आदि सभी संचालित योजनाओं के बारे में विस्तार से सुनें और उनका लाभ जरूरतमदों को दिलायें । उन्होंने कहा कि सभी का दायित्व है कि अधिकार क्षेत्र में जहां तक हो सके वहां तक कार्य करें । आपके स्तर से जो नहीं हो सके, उसे वरिष्ठ अधिकारियों को अग्रेषित करें । उन्होंने कहा कि सचिव को ग्राम पंचायत के कार्यालय में प्रात: 10.30 से दोपहर 2 बजे तक बैठना होगा और दोपहर 2 बजे के पश्चात संधारित पंजी में अंकित करना होगा । ग्राम पंचायत के अंतर्गत जिस कार्य से जाना हो, वह पंजी में अंकित किया जाये । श्री त्रिपाठी ने कहा कि ग्राम स्तर पर आपको शासन का नुमायन्दा माना जाता है ।  शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन कराने में आपका महत्वपूर्ण योगदान होता है । राज्य शासन की संचालित योजनाओं में कठिनाई आने पर हैल्प लाइन नम्बर 222222 शीघ्र डायल करें ।

       इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र सूखाग्रस्त घोषित हुआ है, वहां ग्रीष्मकाल की छुट्टियों में भी मध्यान्ह भोजन स्कूलों में 11 से 12 बजे के मध्य बच्चों को मिलता रहेगा । श्री त्रिपाठी ने खाद्यान्न के संबंध में कहा कि 21 मार्च को होली पड़ने के कारण मार्च माह में खाद्यान्न 17, 18, 19 तारीखों में (ढाई हजार से अधिक में 20) को वितरण कराया जायेगा । श्री त्रिपाठी ने सर्वशिक्षा अभियान,राष्ट्रीय परिवार सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, लाड़ली लक्ष्मी योजना, खसरा-खतौनी, राशन कार्ड, मुख्यमंत्री मजदूजूर सुरक्षा योजना, समग्र स्वच्छता अभियान, जननी प्रसव योजना आदि के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि जो कार्य समय सीमा के अंतर्गत हो उन्हें शीघ्र पूर्ण कराया जाये ।

       मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभय वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना के अन्तर्गत मुरैना जिले में 10399 भूमिहीन मजदूर पंजीवध्द किये गये हैं । इस योजना को एक अक्टूबर से लागू किया गया है । इसमें महिलाओं को प्रसूति सहायता, स्कूली बच्चों को छात्रवृत्ति तथा मृत्यु की दशा में परिवारों को अंत्येष्टि सहायता वितरित की जा जाती है ।  इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी गई ।

 

करह धाम : जहां बहती है भक्ति की अविरल धारा


करह धाम : जहां बहती है भक्ति की अविरल धारा

 

                                  ओ.पी. श्रीवास्तव,

    सहायक संचालक, जनसंपर्क मुरैना

 

मुरैना /  मुरैना जिला मुख्यालय से पन्द्रह किलोमीटर दूर स्थित सिध्द महात्माओं की तपोस्थली करहमें पहले जहां हिंसक पशुओं का गर्जन लोगों को भयभीत किये रहता था, अब वहां भक्ति की अविरल धारा बह रही है और श्रध्दालुजनों का आना-जाना भी निर्भयता के साथ होने लगा है । पिछले पचास वर्ष से यहां लगातार राम नाम संकीर्तन चल रहा है । यह इसी का पुण्य प्रताप है कि कल का घनघोर जंगल आज प्रसिध्द धामबन गया है ।

       कहा जाता है कि करहतीन सिध्दों के तप का जीवंत प्रतीक है । धनेले के महात्मा चेतनदास के एक शिष्य रामदास थे, जिन्हें ये रमुआ कह कर पुकारते थे । वे अपने रोजमर्रा के काम के साथ गुप्त साधना भी करते थे । एक बार उन्होंने आग को हाथों से उठा लिया । महात्मा चेतनदास की आज्ञा से इन्होंने करह की झाड़ी में आकर तपस्या करना शुरू कर दिया । मान्यता है कि यहां पहले से ही एक सिध्द बाबा रहा करते थे, जो तप के लिए आने वाले संत-महात्माओं की कठिन परीक्षायें लिया करते थे । रमुआ   की भी इन सिध्द बाबा ने परीक्षा ली और इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद रमुआ सिध्दरामदास कहलाने लगे । उन्होंने यहां बरगद का पेड़ लगाया ,जो आज भी इनकी स्मृति को तरोताजा बनाये हुए है । रामजानकी जी के मंदिर की भी इन्होंने स्थापना कराई, जिसकी प्रतिमा बाद में इनके शिष्य जानकीदास धनेला लेकर चले गये , जो आज भी वहां स्थापित होकर नित्य पूजित हैं । यह भी माना जाता है कि सिध्द रामदास का कढाहसदैव अग्नि पर चढ़ा रहता था और हर आने-जाने वाले श्रृध्दालु को दूध का प्रसाद मिलता था । यही कढ़ाह बाद में कड़ाह हुआ और अन्तराल में करह नाम से विख्यात हुआ ।

       करह को धाम बनाने में पटिया वाले बाबा रामरतन दास महाराज अग्रणी हैं । सांक नदी के किनारे स्थित जरारा ग्राम के गुर्जर परिवार में जन्में रतनसिंह का प्रारंभ से ही धर्म के प्रति झुकाव था । बचपन में ही पिता चतुर्भुज सिंह का निधन हो जाने से इनका पालन पोषण मां विजय कुंवरि ने किया । रतन सिंह का मन घर द्वार में नहीं था । नूराबाद के सीताराम मंदिर में रहने वाले तपसी बाबा के सम्पर्क में आने पर इनका रामानुराग बढ़ गया और उन्हीं के आदेश पर ये करह में रामजानकी मंदिर के सामने पड़ी पटिया पर आकर तपस्या करने लगे । सिध्द बाबा कभी सर्प और कभी सिंह के रूप में आकर इन के साथ लीला किया करते थे । वर्षों पटिया पर तप करने के कारण ये पटिया वाले बाबाके नाम से प्रसिध्द हुए । इस क्षेत्र के लोग किसी भी काम की शुरूआत पटिया वाले बाबा के जयकारे से ही करते हैं । इनके एक शिष्य बाबा लखनदास थे, जो परमहंस वृति के थे और बाद में करह से टेकरी चले गये ।

       पटिया वाले महाराज के दूसरे शिष्य मोहन सिंह थे, जो रामदास महाराज के नाम से करह के तीसरे सिध्द के रूप में प्रसिध्द हुए । मोहन सिंह का जन्म ग्वालियर जिले के छीमका में हुआ । इनके पिता का नाम मुरली सिंह था और माता लक्ष्मी बाई थी। बचपन में मां का निधन हो जाने से पिता को इनके पालन पोषण में परेशानी आने लगी । पुलिस की नौकरी पर जाते समय वे इन्हें आंतरी के बाबा धरमदास जी के पास छोड़कर चले जाते थे।

बचपन में ही इन्हें हनुमान चालीसा और सुंदर कांड कंठस्थ था । बाबा धरमदास के सानिध्य से इनका रामानुराग बढ़ा । मोहनसिंह ने नूराबाद और मुरैना की कचहरी में नौकरी भी की, लेकिन वे नौकरी से मिलने वाला वेतन दीन दुखियों और साधुओं की सेवा में लगा देते थे । तपसी बाबा का भी इन पर विशेष स्नेह रहा । कहते हैं कि हरिध्दार के कुम्भ में इन्हें नारद जी ने दर्शन दिए और उनकी प्रेरणा से सन्यासी हो गये ।  ईश्वरीय प्रेरणा से करह आकर बाबा रामरतन दास जी का शिष्यत्व गृहण कर लिया और नाम मिला रामदास। बाबा रामरतन दास की गुरू आज्ञा पर बाबा रामदास ने बड़ोखर हनुमान जी की तीन वर्ष कठोर साधना की और हनुमान जी का साक्षात्कार किया । बड़े महाराज के आदेश पर इन्होंने श्री विजय राघव सरकार की स्थापना कराई और पहली बार करह धाम पर सम्बत 2001 में विशाल यज्ञ कराया , जिसमें सिध्द संत श्री हरिबाबा, उडिया बाबा, आदि विभूतियों सहित एक हजार विद्वान संत महात्माओं ने भाग लिया । इस यज्ञ पर उस समय ढाई लाख रूपये का खर्च आया और यहीं से रामायणी बाबा श्री रामदास जी करहवाले प्रसिध्द हो गये । यह भी मान्यता है कि यज्ञ में घी कम पड़ने पर बाबा के आदेश पर परिसर में स्थित सरयू कुंड के जल को कढाई में डाल कर मालपूये सेके गये और बाद में इस जल की पूर्ति के एवज में उतना ही घी सरयू कुंड में डाला गया । ऐसा भी माना जाता है कि इसके पानी में कुत्ता काटे के इलाज की तासीर है । पटिया बाले बाबा रामरतन दास महाराज की चरण पादुकाओं का नियमित पूजन यहां होता है और श्रृध्दालु जीवन की सफलता के लिए पादुका का चरणामृत लेते हैं तथा मनोकामना की पूर्ति के लिए धाम परिसर की परिक्रमा करते हैं । बाबा रामदास द्वारा प्रारंभ कराया गया रामकीर्तन एव रामकथा का अविरल क्रम 50 वर्षों से लगातार करह धाम पर चल रहा है । इन्होंने करह धाम पर मां भगवती के भव्य भवन के अलावा, तपो भूमि मंदिर, यज्ञ शाला, संत निवास, संकीर्तन भवन, गौशाला आदि का निर्माण कराया । इसके अलावा हनुमान गढ़ी का भव्य मंदिर एवं टेकरी पर दिव्यधाम श्री एकादश मुंखी हनुमान जी और मारकण्डेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा कराई और भव्य मंदिर का निर्माणकराया । धनेला ग्राम के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्वार एवं मीरा नगर मुरार ग्वालियर में रामजानकी औरदेवी मां की प्राणप्रतिष्ठा भी कराई ।

       करह धाम की गौशाला में लगभग पांचसौ गायों की सेवा का क्रम आज भी जारी है । साथ ही अशक्त रोगियों की चिकित्साहेतु सुविधा युक्त अस्पताल है । 26 मार्च 2004 को परम पूज्य महाराज श्री रामदास जी के साकेतबास उपरांत श्री विजय राघव सरकार ट्रस्ट की अध्यक्ष अनन्त श्री विभूति किशनदासी बाई महाराज है और बाबा रामचरण दास (फलाहारी बाबा ) मठाधीश हैं ।

       प्रतिवर्ष माघ महीना की पूर्णिमा से फाल्गुन माह की नवमीं तक यहां सियपिय मिलन मेलालगता है। इस वर्ष  21 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह मेला 29 फरवरी तक चलेगा । जिला प्रशासन द्वारा मेला में आने-जाने वाले श्रृध्दालुओं की सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। मेला में 101ब्राह्मण भगवत कथा कर रहे हैं। प्रांगण के वाहर एक विशाल मंच से प्रकांड विद्वानों के प्रवचन चल रहे हैं और हजारों लोग प्रतिदिन भंडारा पा रहे हैं ।

करह धाम : जहां बहती है भक्ति की अविरल धारा


करह धाम : जहां बहती है भक्ति की अविरल धारा

 

                                  ओ.पी. श्रीवास्तव,

    सहायक संचालक, जनसंपर्क मुरैना

 

मुरैना /  मुरैना जिला मुख्यालय से पन्द्रह किलोमीटर दूर स्थित सिध्द महात्माओं की तपोस्थली करहमें पहले जहां हिंसक पशुओं का गर्जन लोगों को भयभीत किये रहता था, अब वहां भक्ति की अविरल धारा बह रही है और श्रध्दालुजनों का आना-जाना भी निर्भयता के साथ होने लगा है । पिछले पचास वर्ष से यहां लगातार राम नाम संकीर्तन चल रहा है । यह इसी का पुण्य प्रताप है कि कल का घनघोर जंगल आज प्रसिध्द धामबन गया है ।

       कहा जाता है कि करहतीन सिध्दों के तप का जीवंत प्रतीक है । धनेले के महात्मा चेतनदास के एक शिष्य रामदास थे, जिन्हें ये रमुआ कह कर पुकारते थे । वे अपने रोजमर्रा के काम के साथ गुप्त साधना भी करते थे । एक बार उन्होंने आग को हाथों से उठा लिया । महात्मा चेतनदास की आज्ञा से इन्होंने करह की झाड़ी में आकर तपस्या करना शुरू कर दिया । मान्यता है कि यहां पहले से ही एक सिध्द बाबा रहा करते थे, जो तप के लिए आने वाले संत-महात्माओं की कठिन परीक्षायें लिया करते थे । रमुआ   की भी इन सिध्द बाबा ने परीक्षा ली और इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद रमुआ सिध्दरामदास कहलाने लगे । उन्होंने यहां बरगद का पेड़ लगाया ,जो आज भी इनकी स्मृति को तरोताजा बनाये हुए है । रामजानकी जी के मंदिर की भी इन्होंने स्थापना कराई, जिसकी प्रतिमा बाद में इनके शिष्य जानकीदास धनेला लेकर चले गये , जो आज भी वहां स्थापित होकर नित्य पूजित हैं । यह भी माना जाता है कि सिध्द रामदास का कढाहसदैव अग्नि पर चढ़ा रहता था और हर आने-जाने वाले श्रृध्दालु को दूध का प्रसाद मिलता था । यही कढ़ाह बाद में कड़ाह हुआ और अन्तराल में करह नाम से विख्यात हुआ ।

       करह को धाम बनाने में पटिया वाले बाबा रामरतन दास महाराज अग्रणी हैं । सांक नदी के किनारे स्थित जरारा ग्राम के गुर्जर परिवार में जन्में रतनसिंह का प्रारंभ से ही धर्म के प्रति झुकाव था । बचपन में ही पिता चतुर्भुज सिंह का निधन हो जाने से इनका पालन पोषण मां विजय कुंवरि ने किया । रतन सिंह का मन घर द्वार में नहीं था । नूराबाद के सीताराम मंदिर में रहने वाले तपसी बाबा के सम्पर्क में आने पर इनका रामानुराग बढ़ गया और उन्हीं के आदेश पर ये करह में रामजानकी मंदिर के सामने पड़ी पटिया पर आकर तपस्या करने लगे । सिध्द बाबा कभी सर्प और कभी सिंह के रूप में आकर इन के साथ लीला किया करते थे । वर्षों पटिया पर तप करने के कारण ये पटिया वाले बाबाके नाम से प्रसिध्द हुए । इस क्षेत्र के लोग किसी भी काम की शुरूआत पटिया वाले बाबा के जयकारे से ही करते हैं । इनके एक शिष्य बाबा लखनदास थे, जो परमहंस वृति के थे और बाद में करह से टेकरी चले गये ।

       पटिया वाले महाराज के दूसरे शिष्य मोहन सिंह थे, जो रामदास महाराज के नाम से करह के तीसरे सिध्द के रूप में प्रसिध्द हुए । मोहन सिंह का जन्म ग्वालियर जिले के छीमका में हुआ । इनके पिता का नाम मुरली सिंह था और माता लक्ष्मी बाई थी। बचपन में मां का निधन हो जाने से पिता को इनके पालन पोषण में परेशानी आने लगी । पुलिस की नौकरी पर जाते समय वे इन्हें आंतरी के बाबा धरमदास जी के पास छोड़कर चले जाते थे।

बचपन में ही इन्हें हनुमान चालीसा और सुंदर कांड कंठस्थ था । बाबा धरमदास के सानिध्य से इनका रामानुराग बढ़ा । मोहनसिंह ने नूराबाद और मुरैना की कचहरी में नौकरी भी की, लेकिन वे नौकरी से मिलने वाला वेतन दीन दुखियों और साधुओं की सेवा में लगा देते थे । तपसी बाबा का भी इन पर विशेष स्नेह रहा । कहते हैं कि हरिध्दार के कुम्भ में इन्हें नारद जी ने दर्शन दिए और उनकी प्रेरणा से सन्यासी हो गये ।  ईश्वरीय प्रेरणा से करह आकर बाबा रामरतन दास जी का शिष्यत्व गृहण कर लिया और नाम मिला रामदास। बाबा रामरतन दास की गुरू आज्ञा पर बाबा रामदास ने बड़ोखर हनुमान जी की तीन वर्ष कठोर साधना की और हनुमान जी का साक्षात्कार किया । बड़े महाराज के आदेश पर इन्होंने श्री विजय राघव सरकार की स्थापना कराई और पहली बार करह धाम पर सम्बत 2001 में विशाल यज्ञ कराया , जिसमें सिध्द संत श्री हरिबाबा, उडिया बाबा, आदि विभूतियों सहित एक हजार विद्वान संत महात्माओं ने भाग लिया । इस यज्ञ पर उस समय ढाई लाख रूपये का खर्च आया और यहीं से रामायणी बाबा श्री रामदास जी करहवाले प्रसिध्द हो गये । यह भी मान्यता है कि यज्ञ में घी कम पड़ने पर बाबा के आदेश पर परिसर में स्थित सरयू कुंड के जल को कढाई में डाल कर मालपूये सेके गये और बाद में इस जल की पूर्ति के एवज में उतना ही घी सरयू कुंड में डाला गया । ऐसा भी माना जाता है कि इसके पानी में कुत्ता काटे के इलाज की तासीर है । पटिया बाले बाबा रामरतन दास महाराज की चरण पादुकाओं का नियमित पूजन यहां होता है और श्रृध्दालु जीवन की सफलता के लिए पादुका का चरणामृत लेते हैं तथा मनोकामना की पूर्ति के लिए धाम परिसर की परिक्रमा करते हैं । बाबा रामदास द्वारा प्रारंभ कराया गया रामकीर्तन एव रामकथा का अविरल क्रम 50 वर्षों से लगातार करह धाम पर चल रहा है । इन्होंने करह धाम पर मां भगवती के भव्य भवन के अलावा, तपो भूमि मंदिर, यज्ञ शाला, संत निवास, संकीर्तन भवन, गौशाला आदि का निर्माण कराया । इसके अलावा हनुमान गढ़ी का भव्य मंदिर एवं टेकरी पर दिव्यधाम श्री एकादश मुंखी हनुमान जी और मारकण्डेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा कराई और भव्य मंदिर का निर्माणकराया । धनेला ग्राम के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्वार एवं मीरा नगर मुरार ग्वालियर में रामजानकी औरदेवी मां की प्राणप्रतिष्ठा भी कराई ।

       करह धाम की गौशाला में लगभग पांचसौ गायों की सेवा का क्रम आज भी जारी है । साथ ही अशक्त रोगियों की चिकित्साहेतु सुविधा युक्त अस्पताल है । 26 मार्च 2004 को परम पूज्य महाराज श्री रामदास जी के साकेतबास उपरांत श्री विजय राघव सरकार ट्रस्ट की अध्यक्ष अनन्त श्री विभूति किशनदासी बाई महाराज है और बाबा रामचरण दास (फलाहारी बाबा ) मठाधीश हैं ।

       प्रतिवर्ष माघ महीना की पूर्णिमा से फाल्गुन माह की नवमीं तक यहां सियपिय मिलन मेलालगता है। इस वर्ष  21 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह मेला 29 फरवरी तक चलेगा । जिला प्रशासन द्वारा मेला में आने-जाने वाले श्रृध्दालुओं की सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। मेला में 101ब्राह्मण भगवत कथा कर रहे हैं। प्रांगण के वाहर एक विशाल मंच से प्रकांड विद्वानों के प्रवचन चल रहे हैं और हजारों लोग प्रतिदिन भंडारा पा रहे हैं ।

विकास एक्सप्रेस को जनपद अध्यक्ष ने दिखाई हरी झण्डी


विकास एक्सप्रेस को जनपद अध्यक्ष ने दिखाई हरी झण्डी

मुरैना 26 फरवरी 08/ मध्य प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का संदेश लेकर सबलगढ़ ब्लाक में आई सुपरफास्ट एक्सप्रेस को जनपद अध्यक्ष सबलगढ़ श्रीमती सुमित्रा भीमसेन रावत ने आज हरी झण्डी दिखाकर श्योपुर जिले के लिए रवाना किया । सुपरफास्ट विकास एक्सप्रेस टीम ने प्रभारी प्रकाश कटारिया के निर्देशन में दैपुर, मांगरौल, अटार, रामगढ़, पिपरघान आदि ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाया । लोगों ने सुपर फास्ट विकास एक्सप्रेस में लगी विकास प्रदर्शनी को देखकर सराहा तथा चलचित्र के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की । सबलगढ़ क्षेत्र में विकास का संदेश देने के बाद विकास यात्रा श्योपुर जिले के लिए रवाना हो गई ।

 

275 में से 196 शिकायतों का निपटारा


275 में से 196 शिकायतों का निपटारा

मुरैना 26 फरवरी 08/ राज्य शासन के निर्देशानुसार मुरैना के जिला पंचायत सभागार में आयोजित दो दिवसीय जन शिकायत निवारण शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित प्राप्त 275 शिकायती आवेदन पत्रों में से 196 का मौके पर ही निराकरण कराया जा चुका है । शेष 79 शिकायतों के निराकरण हेतु कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी द्वारा एक सप्ताह की समय सीमा निर्धारित की गई है । साथ ही विभागीय अधिकारियों को शिकायतों के पश्चात संबंधित आवेदक को कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं ।

       शिविर में स्थापित विभागीय काउण्टरों पर पुलिस विभाग के 2, जिला पंचायत के 17, एसडीएम अम्बाह के एक, जौरा के 2, सबलगढ़ के 3 और मुरैना के 25, उप संचालक पंचायत के 16, जिला शहरी विकास अभिकरण के 2, आदिम जाति कल्याण विभाग के 5,  जिला शिक्षा अधिकारी के 9, जिला परियोजना समन्वयक के 6, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के 21, विद्युत कम्पनी के 14, लोक निर्माण का एक, जल संसाधन के 3, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा का एक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के 6, प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के 2, वन का एक, महिला बाल विकास अधिकारी के 2, लीड बैंक का एक, नगर पालिका मुरैना के 12, परिवहन का एक, श्रम विभाग के 2, जिला पंजीयक का दो, तहसीलदार मुरैना के 97, सबलगढ़ का एक और जौरा के 5, कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा के 7, एस.सी.2 शाखा के दो, माफी शाखा का एक, स्टेनो शाखा के 2 और स्थापना शाखा के दो , कोषालय एक शिकायती आवेदन पत्र प्राप्त हुए ।

 

राजस्व और विकास कार्यों से संबंधित कर्मियों की बैठक आज


राजस्व और विकास कार्यों से संबंधित कर्मियों की बैठक आज 

मुरैना 26 फरवरी 08/ कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में 27 फरवरी को पूर्वान्ह 10.30 बजे राजस्व एवं विकास कार्यों से संबंधित कर्मचारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई है ।

       मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभय वर्मा के अनुसार टाउन हॉल में आयोजित इस बैठक में जिले के समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, मुख्य कार्यपालिन अधिकारी जनपद पंचायत, तहसीलदार तथा सभी पटवारी, पंचायत सचिव, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, पंचायत निरीक्षक एवं राजस्व निरीक्षक उपस्थित रहेंगे ।

 

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