लो भैंस ने पूंछ भी उठा दी और गोबर भी कर दिया, शनिवार रात साढ़े 12 बजे तक गुल रही बिजली


लो भैंस ने पूंछ भी उठा दी और गोबर भी कर दिया, शनिवार रात साढ़े 12 बजे तक गुल रही बिजली

मुरैना/भिण्‍ड/श्‍योपुर 20 जुलाई, सुबह 8 बजे से शनिवार 19 जुलाई को शुरू हुयी बिजली कटौती रात साझ़े 12 बजे तक रह रह कर चलती रही । खैर ये तो होना ही था । कल हुये प्रकाशित समाचार के बाद तो यह सफां लाजमी था । वैसे आपको बतातें चलें हमने तो यह समाचार जानबूढ कर देरी से प्रकाशित किया था ग्‍वालियर और मुरैना से प्रकाशित सभी अखबारों में यह पहले ही छप चुका था ।

हमारी चम्‍बल में एक कहावत है कि भैंस पूंछ उठायेगी तो क्‍या करेगी, चतुर लोग इसका अपने आप उत्‍तर दे देते हैं कि गोबर करेगी और क्‍या करेगी ।

लो भैंस रोजाना पूंछ भी उठा रही है और गोबर भी दनादन अन्‍धाधुन्‍ध कर रही है ।

चालू रही बड़े बाबू , अफसरों और मंत्री के मोहल्‍ले की बिजली

बकाया आधे पौने शहर में भले ही बिजली कहर ढाती रही हो लेकिन बड़े बाबू (कलेक्‍टर साहब) और अफसरों तथा लोकल मिनिस्‍टर और अखबार वालों की बिजली चालू बनी रही । हुम्‍फ ये डेमोक्रेसी है भईये, इसमें ऐसा ही चलता है, मियां कह जूती मियां की चांद पर ऐसे ही पड़ती है ।       

 

अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती: गुस्‍साई जनता ने मुरैना बिजलीघर के अधीक्षण यंत्री कार्यालय को ताला लगाया


अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती: गुस्‍साई जनता ने मुरैना बिजलीघर के अधीक्षण यंत्री कार्यालय को ताला लगाया

न फरियाद सुनने वाला कोई, न हाकिम न हक्‍काम, हुआ हुक्‍का तमाम

मुरैना 19 जुलाई 08, अंतत: मुरैना की आक्रोशित जनता के सब्र का बांध टूट ही गया और बुधवार को मुरैना के बिजली घर पर जम कर धरना प्रदर्शन के बाद अधीक्षण यंत्री के कार्यालय को ताला जड़ दिया । मजे की बात ये रही कि घटनाक्रम के दरम्‍यान दोपहर डेढ़ बजे तक बिजलीघर के आला दर्जे के भ्रष्‍ट रईस अधिकारी अपने दफ्तर नहीं पहुँचे थे ।

उल्‍लेखनीय है बिल्‍कुल ठीक इसी तरह लगभग एक साल पहले जब ग्‍वालियर टाइम्‍स की टीम मामले की पड़ताल करने और शिकायत करने इसी बिजलीघर पर पहुची थी तब भी दोपहर दो बजे तक सुपरवाइजर से लेकर ए.ई., जे.ई., डी.ई. और एस.ई. तक कोई अधिकारी दफ्तर में नहीं मिला था, इसके बावजूद हमने अधीक्षण यंत्री के स्‍टेनो को शिकायत जमा कर पावती प्राप्‍त की थी । इसी शिकायत में एक शराबी और अभ्रद्र व्‍यवहार करने वाले इंजीनियर की भी शिकायत दर्ज थी, लेकिन महकमे की अधीक्षण यंत्री के नाम प्रस्‍तुत यह शिकायत आज तक कार्यवाही के लिये लंबित है और शराबी इंजीनियर जहॉं का तहॉं त्‍यों का त्‍यों पदस्‍थ और धांधलीशीन है । खैर इसका तो हम वक्‍त रहते अपने आवेदन को आपके सामने पेश जरूर करेंगें और बतायेंगें कि असल में क्‍या चल रहा है । आवेदन की पावती आपको दिखायेंगे जरूर ।

अब जनता की सुनिये, बुधवार को नैनागढ़ रोड मुरैना की बिलबिलाई जनता ने अपनी फरियाद सुनाने के लिये जब मुरैना के बिजली घर पर पहुँची तो कोई भी अधिकारी उन्‍हें वहॉं नहीं मिला । गुस्‍साई जनता ने धरना प्रदर्शन मुर्दाबाद और जो बेचारी कर सकती थी किया । अंतत: कोई अधिकारी न होने पर अधीक्षण यंत्री कार्यालय पर ताला जड़ दिया ।

कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुँचा

चम्‍बल के सम्‍भागीय मुख्‍यालय के नाम पर शहर मुरैना में यूं तो कमिश्‍नर साहब तक की बैठक (कचहरी) है । लेकिन गरीब लाचार जनता की सुनने वाला कोई नहीं । कमाई, पद व मद में मगरूर प्रशासननिक अधिकारीयों को दो घण्‍टे तक चले जनताई शिकवो शिकायत पर ध्‍यान देने की जरूरत ही महसूस नहीं हुयी । कम से कम अम्‍बाह में तहसीलदार और एस.डी.एम. (तहसील के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी ) तो पहुँच गये थे । मगर मुरैना में सोता रहा जिला और संभागीय प्रशासन । मजे की बात यह कि क्षेत्र का स्‍थानीय विधायक और मंत्री भी शहर में शिलान्‍यासी श्रेय बटोरता घूमता रहा मगर उसे भी जनता की तकलीफ सुनने देखने की फुरसत नहीं मिली ।

लोकतंत्र में ऐसे अधिकारी मंत्री और विधायकों  के लिये भई हम तो यही कहेंगें कि डूग मरो चुल्‍लू भर पानी में, शर्म शर्म शर्म ……।

समय पर ही होते हैं कार्य, धैर्य धारण करना चाहिये


समय पाय तरूवर फलें, केतक सींचो नीर ।

कारज धीरें होत हैं, काहे होत अधीर ।।

समय पाकर अर्थात समय पूरा हो जाने के बाद ही वृक्ष फल देते हैं, चाहे उनकी कितनी भी सिंचाई क्‍यों न की जाये । इसी प्रकार हर कार्य अपनी प्रक्रिया व समय पूरा हो जाने के बाद ही पूर्ण होता है, इसलिये मनुष्‍य को धैर्य नहीं खोना चाहिये और समय पूर्ण होने तक निश्चिंत होकर प्रतीक्षा करना चाहिये । संकलित (हिन्‍दी का प्रसिद्ध दोहा)  

हास्‍य /व्‍यंग्‍य सारा दिन सताते हो, रातों को जगाते हो …. बिजली का त्रिताल और कहरवा जारी, शिव का यह कऊनसा नृत्‍य है


हास्‍य /व्‍यंग्‍य

सारा दिन सताते हो, रातों को जगाते हो …. बिजली का त्रिताल और कहरवा जारी, शिव का यह कऊनसा नृत्‍य है

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘आनन्‍द’

जितेन्‍द्र भाई की एक फिल्‍म का एक गीत है, सारा दिन सताते हो, रातों को जगाते हो, तुम याद बहुत आते हो, इसमें एक लाइन और जोड़ दो तुम गाली खूब खाते हो बस बन गया म.प्र. का हाल ए सूरत । त्रिताल और कहरवा संगीत में तबले या ढोल‍क की ताल होती हैं

अब सुनो कैसे-

एक नेताजी पूरा गला फाड़ के नर्रा रहे थे, कह रहे थे शिव ने ये किया शिव ने वो किया, शिव ने त्रिताल किया शिव ने कहरवा किया, लोगों को घर बेटा हो तो राम भरोसे और बेटी हो तो शिव भरोसे वगैरह वगैरह । पूरा टेंटुआ फाड़ने के बाद भी पण्डित जी की जनता की जमात में सुनवाई नहीं हो रही थी । सीन जम नहीं पा रिया था, मौसम बन नहीं पा रिया था । नेताजी के माथे से पसीना चू रहा था उनकी बाबा रामदेव जैसी काली दाढ़ी से पसीने की धार बहने लगी थी, गोया जनता थी कि तवज्‍जो ही नहीं दे रही थी, चारों ओर चें पों चें पों मची थी ।

मामला था जौरा का, जहॉं सी.एम. और राजनाथ सिंह आने वाले थे । सीन जम नहीं पाने से नेताजी खिसिया रहे थे, उनके हाव भाव बता रहे थे कि वे कित्‍ती इम्‍पोर्टेंट बात कह रहे हैं और ससुरी बेवकूफ पब्लिक सुन ही नहीं रही हैं । नेताजी के महान उद्गारों से मूरख पब्लिक वंचित हो रही है । घुमा फिरा कर वे यह कहना भी नहीं चूक रहे थे कि पता नहीं कब कौन भावी सी.एम. या पी.एम. हो, तब याद आयेगी कि एक भावी सी.एम. या पी.एम. जौरे में बोल गया निपट मूरख सिकरवारी के लोग उसे सुन नहीं पाये, उसके अनमोल वचनों को कैच नहीं कर पाये ।

वे सब पर बोल रहे थे पर बिजली पर नहीं बोल रहे थे, आतंक राज और भय राज पर नहीं बोल रहे थे केवल शिवराज पर बोल रहे थे, पब्लिक सुन नहीं रही थी, सुनने और बोलने में एक गैप था एक डिफ्रेन्‍स था, खिंच रहा था खत्‍म नहीं हो रहा था । जित्‍ता टैम शिवराज और राजनाथ को आने पहुँचने में लग रहा था उत्‍ता पण्डितजी का फिलर भाषण लम्‍बा खिंच रहा था, वे भी बोलते बोलते उकता चुके थे, कभी घड़ी देखते थे कभी आसमान की ओर मुँह उठा कर कुत्‍ते की तरह कान खड़े कर शिवराज और राजनाथ के पुष्‍पक विमान की घड़घड़ाहट टटोलते । पर शिव और राज (शिवराज और राजनाथ) दोनों लापता थे, टैम बढ़ता जा रिया था, और दोनो पठठे जाने कहॉं अटक गये थे, जैसे पूरा टाइम गटक गये थे । नेताजी ने आखिरकार भाषण का ऑरिजनल फिलर कोटा खत्‍म होते ही पिछले सरकार के टैम के भाषण शुरू कर दिया और पहुँच गये स्‍व. इन्दिरा गांधी के ओल्‍ड एज में (एज ऑफ इमरजेन्‍सी) बोले नेता जी इन्दिरा जी ने कही हती कि एक ही जादू , कड़ी मेहनत, पक्‍का इरादा, दूरदृष्टि वगैरह वगैरह अब वे इसकी पण्डिताई वाली व्‍याख्‍या में जुट बैठे ।

वे उतारना तो कांग्रेस की चाह रहे थे लेकिन वे भूल गये और इसकी निन्‍दात्‍मक व्‍याख्‍या करते करते प्रदेश की भाजपा सरकार को धोना शुरू कर दिया । उन्‍हें ध्‍यान ही नहीं रहा कि इस समय प्रदेश में कांग्रेस की नहीं भाजपा की सरकार है । और बोले कि भ्रष्‍टाचार और रिश्‍वत का एक ही जादू है जो कि सरकार कर रही है पहला भ्रष्‍टाचार और रिश्‍वत के लिये दूरदृष्टि रखो, सरकार में बैठे मंत्री और अफसरों को हिदायत है कि कहॉं कहॉं से कैसे कैसे कमाई हो सकती है इसके लिये दूरदृष्टि रखों, फिर बोले कि ठिकाने पता लगते ही कड़ी मेहनत करो और भ्रष्‍टाचार और रिश्‍वत के लिये जम कर कड़ी मेहनत करो, फिर बोले तीसरी बात है पक्‍का इरादा यानि पक्‍का इरादा रखो कि सबकी यानि जनता की ठेसनी है यानि जम कर भ्रष्‍टाचार करना हे और रिश्‍वत ऐंठनी हैं । उनकी इन्‍टरेस्टिंग और मनभावन बातें सुन कर पब्लिक के कान खड़े हो गये, और पिन ड्राप सायलेन्‍स छा गया सब अब नेताजी को सुनने लगे ।

नेताजी भी जनता की नब्‍ज पकड़ गये और समझ गये कि सरकार की बुराई करो तो जनता सुनती है वरना कोई घास भी नहीं डालता, नेताजी को अब जोश आने लगा और पण्डित जी के नेताई तेवर लौटने लगे । मगर अफसोस जैसे ही नेता पण्डित जी का मौसम बनना शरू हुआ तब तक आसमान से घड़घड़ की आवाज आयी मजबूरी में नेताजी को माइक से हटना पड़ा ।

शिव आ गये पर राज नहीं आयें । (हम जैसो गुरूघण्‍टालों को पहले से ही पता था कि अकेले शिव आयेंगें राज नहीं आयेंगे ) नेता लोग जनता को बहला फुसला रहे थे कि राज के पुष्‍पक विमान का ए.सी. फेल हो गया सो नहीं आ पाये, हम मुस्‍करा रहे थे, हमने अपने साथ वालों को पहले ही बता दिया था कि अब तो अकेले शिव ही आयेंगें राज नहीं आयेंगें ।

लोग हमें मान गये, जान गये वाह क्‍या भविष्‍यवाणी करता है पठठा । गोया हुआ ये कि बिजली पर कोई बोला हो न बोला हो पर शिवराज सिंह बोले, बिना लाग लपेट खुलकर बोले, रियलाइज किया माफी मांगीं और घिघियाये कि हॉं हम बिजली नहीं दे पाये इसका हमें ओपन दुख है हम इसके लिये गलतीशुदा हैं माफी मांगते हैं लेकिन अगर वर्षा अच्‍छी हुयी और हमारे बांधो में पानी आ गया तो मेरा वायदा है मैं आपको चौबीसों घण्‍टे बिजली दूंगा, यह मेरी गारण्‍टी है ।

भईया शिवराज साइकिल वाले, जब कांग्रेस की सरकार मध्‍यप्रदेश में थी तो तुम्‍हारी भाजपा लालटेन टांग कर (राष्‍ट्रीय जनता दल का चुनाव चिह्न) घूमती थी और लालटेन रैली लालटेन यात्रा निकाला करती थी, अब यार सरकार में आकर पार्टी चेन्‍ज कर समाजवादी पार्टी की साइकिल हथिया लिये हो, गलत बात है ये, बहुत नाइन्‍साफी है । यार भईया शिवराज साइकिल वाले, क्‍यों समाजवादी पार्टी और राष्‍ट्रीय जनता दल के पीछे पड़े रहते हो उन्‍हीं के चुनाव चिह्न अगर इत्‍ते काम के हैं तो यार ज्‍वाइन क्‍यों नहीं कर लेते सपा या राजद । ससुरा कमल किसी काम की नहीं, जब कहीं काम ही नहीं आता तो फेंको ससुरे को, न तो पेट्रोल बचाने के काम का न बिजली समस्‍या बताने का न और किसी मतलब का । क्‍या यार बाहियात चिह्न है । इससे तो कांग्रेस का पंजा ठीक है कम से कम सभाओं में हाथ उठा कर दिखा तो देते हो । मैं एक दिन फोटो चेक कर रहा था, आपका पंजा हिलता देख मैं समझा शायद कांग्रेस ज्‍वाइन कर लिये हो और लोगों को हाथ का पंजा दिखा कर कांग्रेस के लिये वोट की अपील कर रहे हो । वैसे साइकिल से पेट्रोल बचा कर हेलीकॉप्‍टर में भरवा लेते हो गलत बात है ये, सरासर गलत ।

खैर मैं तो अर्ज ये कर रहा था हुजूर कि आपके वायदे के मुताबिक अब तो ताल तलैया पोखर डबरा, बांध बंधैये सब के सब छकाछक्‍क भर कर ओवर फ्लो मार रहे हैं, पर बिजली अब भी काहे नहीं आयी है । सारा दिन सताते हो, रातों को जगाते हो , तुम याद बहुत आते हो । दिग्विजय सिंह से भी ज्‍यादा । इत्‍ती काटनी थी तो यार दिग्‍गी को ही बना रहने देते कम से कम कह बता के तो काटता था । और टैम पता रहता था कि कब सोना है कब जागना है, कब कम्‍प्‍यूटर बन्‍द करना है कब चालू करना है । तुम्‍हारा तो ठीया ही नहीं है । अरे भईया बांध तो भर गये अब का कर रहे हो सो बताओ । या ये वायदा भी 370 खत्‍म करने या मन्दिर बनवाने जैसा ही है । जैसी भी हो थोड़ा लिखा बहुत समझना, रोटी खाओ तो, पानी बिजली आने के बाद ही पीना ।

बिजली के लिये गुस्‍साये किसानों ने दिया मुरैना में विशाल धरना


बिजली के लिये गुस्‍साये किसानों ने दिया मुरैना में विशाल धरना

मुरैना 13 जुलाई 08, बिजली समस्‍या के लिये गुस्‍साये कई गॉंवों के किसानों ने एकत्रित होकर विगत दिवस बिजली कम्‍पनी के सम्‍भागीय मुख्‍यालय मुरैना पर विशाल धरना दिया । इस दम्‍यान एक सभा भी हुयी और भारतीय किसान संघ के बैनर तले एक ज्ञापन भी बिजली कम्‍पनी के भ्रष्‍ट व नाकारा अधिकारीयों को दिया गया ।

किसानों ने अपनी कई समस्‍यायें, और कई विद्युत सबस्‍टेशनों की मांग की । तथा बिजली समस्‍या से तुरन्‍त निजात दिलाने की मांग की ।

बिजली पे पंगा, अम्‍बाह में दंगा, बिजली घर में बिजली वालों को किसानों ने ताला ठोक कर किया दाखिल ए हवालात ऑफ पब्लिक


बिजली पे पंगा, अम्‍बाह में दंगा, बिजली घर में बिजली वालों को किसानों ने ताला ठोक कर किया दाखिल ए हवालात ऑफ पब्लिक

सरकार राज में किसानों और देशी व्‍यावसायियों का पूर्णत: खात्‍मा

मुरैना 13 जुलाई 08, अम्‍बाह में विगत दिवस बिजली समस्‍या से त्रस्‍त अम्‍बाह वासीयों ने शुक्रवार को बिजली घर पर ताला ठोक कर उसमें मौजूद कर्मचारीयों अधिकारीयों को दाखिल ए हवालात ऑफ पब्लिक कर दिया ।

बिजली कम्‍पनी के दाखिल ए हवालात ऑफ पब्लिक होने की खबर पा कर तहसीलदार ए अम्‍बाह मौके मुआइने और दरियाफ्त को पहुँचे । नाजुक हालात देख तहसीलदासर ने शाम तक बिजली समस्‍या दुरूस्‍त करने का आश्‍्वासन देकर बिजली कम्‍पनी की सरकारी जमानत करायी । तब जाकर न्‍याय औ हूकूमते जनता ने उन्‍हें सशर्त पाबन्‍द कर रिहा किया ।

उल्‍लेखनीय है कि मुरैना जिला में भारी बिजली समस्‍या के चलते सम्‍पूर्ण शहरी व ग्रामीण अंचल में सारा दिन और सारी रात बिजली गोल रहती है । जिससे समूची चम्‍बल घाटी भारी तंग व परेशान है, दोपहर में इन दिनो भारी उमस भरा धमका पड़ता है और रात को लोग मच्‍छरों से परेशान रहते हैं । इससे सारी चम्‍बल में इस समय भारी रोष और आक्रोश व्‍याप्‍त है, पानी सर के ऊपर से गुजरने के बाद अम्‍बाह में यह घटना घटित हुयी ।

पहले निकाली रैली, फूंका शिवराज का पुतला

अम्‍बाह वासीयों ने बिजली कम्‍पनी की तांलाबन्‍दी करने से पहले हजारों लोगों ने विकट पब्लिक रैली निकाली ओर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का तहसील के सामने पुतला दहन किया । लोगों ने कांग्रेस के खिलाफ भी बिजली समस्‍या नहीं उठाने पर मुर्दाबादी कर डाली । इस जन आन्‍दोलन में किसी राजनीतिक दल को लोगों ने शामिल नहीं किया ।

बेघर महिलाओं के लिए अस्थायी आवासों में सुधार किया जाएगा


बेघर महिलाओं के लिए अस्थायी आवासों में सुधार किया जाएगा

महिला और बाल विकास मंत्रालय विभिन्न कारणों से बेघर हो चुकी महिलाओं के कुछ समय तक रहने उनके भरण-पोषण और पुनर्वास सेवाओं के लिए और भी अधिक भवनों का निर्माण करेगा और मौजूदा भवनों में सुविधाओं का विकास करेगा । प्रत्येक जिले में कम-से-कम एक ऐसे आश्रयशाला की स्थापना करने का प्रयास किया जाएगा जिसमें अनिवार्य रूप से महिला हेल्पलाइन, चिकित्सा सुविधा, मनोचिकित्सा उपचार, शिक्षा व व्यावसायिक प्रशिक्षण सुविधाएं आदि उपलब्ध होंगी । मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की अध्यक्षता करते हुए महिला और बाल विकास मंत्री, श्रीमती रेणुका चौधरी ने आज यहां यह जानकारी दी ।

चर्चा में भाग लेते हुए सांसदों ने महिला पुनर्वास योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए अधिक आबंटन करने और प्रभावकारी निगरानी प्रणाली कायम करने पर जोर दिया। उन्होंने इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने का सुझाव दिया ताकि अधिक से अधिक महिलाएं सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हो सकें । बैठक में भाग लेने वाले सदस्यों में सर्वश्री सी के चद्रप्पन, फांसिस फेन्थॉम, लक्ष्मीनारायण शर्मा, श्रीमती पी सतीद्वी और श्रीमती विप्लब ठाकुर शामिल थीं ।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए वेब-आधारित नया साफ्टवेयर


राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए वेब-आधारित नया साफ्टवेयर

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने http://www.nrega.nic.in नामक एक वेबसाइट विकसित किया है । इसका उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) की संचालन प्रक्रिया में दक्षता और पारदर्शिता में सुधार लाना और नरेगा से संबंधित सभी जानकारी को एक कंप्यूटर डाटाबेस में उपलब्ध कराना है ताकि आम जनता के लिए यह सुविधा उपलब्ध हो सके । राज्यों द्वारा इसके संचालन की समीक्षा और इसे त्वरित बनाने हेतु मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय कार्यशाला का भी आयोजन किया है ।

यह डाटा रिकार्डों के सत्यापन के साथ ही अधिनियम के किसी भी मानदंड पर रिपोर्ट तैयार करने हेतु सापऊटवेयर पर आधारित है । इस सॉपऊटवेयर में स्थानीय भाषा में सुविधाएं उपलब्ध हैं । इसलिए यह विशेषकर जिला और प्रखंड स्तरों पर पूरे देश में आसानी से उपयोग करने लायक है ।

यह वेबसाइट न केवल आंतरिक प्रबंधन का एक उपकरण है बल्कि यह बाहरी संचार के लिए भी उतना ही उपयोगी है क्योंकि इसके माध्यम से नरेगा के क्रियान्वयन के बारे में पूरी जानकारी जनता के सामने रखी जाती है । उपलब्ध कराए गए सभी जॉब कार्डों और मस्टर रॉलों को नरेगा वेबसाइट पर रखा जाता है । जब यह वेबसाइट पूरी तरह संचालित हो जाएगा तब नागरिकों को सूचना का अधिकार संबंधी वैधानिक प्रक्रियाओं के बिना जानकारी प्राप्त करने का अपना अधिकार प्राप्त हो जाएगा ।

जानदार पत्रकारिता व्यावसायिक नैतिकता के पालने में पनपती है– उपराष्ट्रपति


जानदार पत्रकारिता व्यावसायिक नैतिकता के पालने में पनपती है– उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति श्री मुहम्मद हामिद अंसारी ने आज यहां उदयन स्मृति पत्रकारिता सम्मान-2007 प्रदान किए । प्रिंट मीडिया के लिए राजस्थान पत्रिका (रायपुर) के संवाददाता श्री सिकंदर पारीख तथा फोटो पत्रकारिता के लिए केरल की मलयाला मनोरमा के श्री अरुण श्रीधर को पुरस्कृत किया गया ।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय मीडिया इस समय कथ्य के संकट का सामना कर रहा है । जिस तरह समाचार मीडिया, मनोरंजन और दूर संचार में तेज विकास हो रहा है, उसके कारण व्यावसायिक पत्रकारिता, जनसंपर्क, विज्ञापन और मनोरंजन की सीमा रेखाएं आपस में गड्ड-मड्ड हो गई हैं । उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या पत्रकार इन सीमा रेखाओं को जानते हैं, और क्या वे कारोबारी फायदे व मौद्रिक नफे के लिए उन्हें कुरबान करने के लिए तैयार हैं ? आज यह आम धारणा हो गई है कि व्यावसायिक पत्रकारिता पर नैतिकता की पकड़ ढीली पड़ गई है ।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रिंट मीडिया ने कोशिश की है कि पाठकों को परेशान करने वाले मुद्दों और कारोबारी चिंताओं के बीच संतुलन हो सके । मीडिया भी समाज का ही हिस्सा है । जिस तरह से देश के लोक मूल्यों में गिरावट आई है तो उसका प्रभाव पत्रकारिता पर भी हुआ है ।

श्री अंसारी ने कहा कि स्वर्गीय श्री उदयन शर्मा की मिसाल से सीख लेनी चाहिए । जानदार पत्रकारिता लोकतंत्र की प्रहरी होती है जो हमेशा नैतिकता के पालने से ही पनपती है ।

उन्होंने कहा, न्न मैं इस अवसर पर उदयन स्मृति पत्रकारिता और फोटो पत्रकारिता के विजेताओं को बधाई देता हूं । मैं आशा करता हूं कि इन पुरस्कारों को प्राप्त करने के बाद विजेता अपने कार्य और लगन के साथ करेंगे। मैं आग्रह करता हूं कि वे ग्रामीण पत्रकारिता के लिए भी कार्य करें जो महत्वपूर्ण है, लेकिन उसमें समुचित रुचि नहीं ली गई है ।

हास्‍य/व्‍यंग्‍य आज मोहब्‍बत बन्‍द है- एम.पी. पुलिस : कल्‍ला के बाद अमरनाथ का भी कर डाला फर्जी एनकाउण्‍टर


हास्‍य/व्‍यंग्‍य

आज मोहब्‍बत बन्‍द है- एम.पी. पुलिस : कल्‍ला के बाद अमरनाथ का भी कर डाला फर्जी एनकाउण्‍टर

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

जैसे जैसे मध्‍यप्रदेश के विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे वैसे राजनीतिक नूराकुश्‍ती बढ़ती जा रही है, मामला इस हद तक है कि यदि मुद्दा है तो है, नहीं है तो वो भी मुद्दा है । यदि कुछ नहीं है तो मुद्दे गये तेल लेने ससुरा पुतला तो फूं‍क ही डालो ।

कई साल पहले एक फिल्‍म आयी थी नाम था आपकी कसम, फिल्‍म की खास बात थी कि उसके दो गाने बड़े हिट और फिट हैं एक तो आज मोब्‍बत बन्‍द है दूसरा जय जय शिव शंकर, कांटा लगे न कंकर जरा देखिये इन दो गीतों ने भारत का भविष्‍य ही बता डाला था ।

अभी हाल ही में भाजपा ने बन्‍द करवा डाला, आजकल बन्‍द तो रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्‍सा बन गया है, मध्‍यप्रदेश विशेषकर चम्‍बलवासी हफ्ते में दो तीन दिन बन्‍द का आनंद लेते ही रहते हैं, कभी क्षत्रिय समाज का बन्‍द तो कभी मीणा समुदाय का बन्‍द, कभी ब्राह्मण बन्‍द कराते हैं तो कभी बनिये बन्‍द करा देते हैं, गूजरो ने तो थोक बन्‍द ही करा दिया, कभी कांग्रेस का बन्‍द तो कभी भाजपा का बन्‍द, कभी माकपा का तो कभी भाकपा का कभी सपा का तो कभी बसपा का । ससुरी जित्‍ती जाति हैं जित्‍ते धर्म हैं, जित्‍ते सम्‍प्रदाय हैं, जित्‍ते राजनीतिक दल हैं । सबके सब बन्‍द कराने पर तुल बैठे हैं । जो आवे सो बोले हैं बन्‍द । बन्‍द बन्‍द बन्‍द ।

बनिया सबसे डरता है, व्‍यापारी सबसे घबराता है, दूकानदार सबसे घिघियाता है, गली का कुत्‍ता भी चिल्‍ला दे कि आज बन्‍द तो पूरा समूचा मार्केट अपने आप बन्‍द हो लेता है । बन्‍द नहीं करा तो नुकसान, तोड़ फोड़, लूट लपाट और बेइज्‍जती । बन्‍द करा तो नुकसान । सो लोगों ने आदत डाल ली है कि हफ्ते में अब श्रम विभाग और दूकानदारी अधिनियम की एक छुट्टी के अलावा दो तीन छुट्टी और पड़नी हैं ।

बन्‍द कराना नेताओं का एक क्षत्र अधिकार है, नेता चाहे समाज का हो या राजनीति का सबसे पहले बन्‍द मांगता । बिना बन्‍द लगता ही नहीं कि कुछ हुआ । पता ही नहीं चलता कि कहीं किसी चीज का विरोध हो रहा है या आन्‍दोलन हो रहा है । बन्‍द जीवन का अविभाज्‍य अंग और भारतीय लोकतंत्र की अवधारणा है ।

बन्‍द पर टिके इस भारत के भविष्‍य के बारे में एक और मजेदार बात यह है कि लोग बाजार बन्‍द कर लेते हैं अपनी दूकानों के शटर डाल कर रखते हैं लेकिन उन्‍हें यह नहीं पता होता कि आज किस बात का बन्‍द है, बस पूछो तो कहते हैं कि आज बीजेपी का बन्‍द है आज कांग्रेस का या आज अलां का या फलां का ।

भाजपा ने काहे को बन्‍द कराया था मुरैना वाले बहुतेरो को नहीं पता (असल में बहुत बाद तक मुझे भी नहीं पता था) , मैंने कुछ दूकानदारों से पूछा कि ये कायका बन्‍द था । दूकानदार बोले पता नहीं बीजेपी का बन्‍द था, अमरनाथ अमरनाथ चिल्‍ला रहे थे, समझ नहीं आया कि अमरनाथ को किसने एनकाउण्‍टर कर दिया, कल्‍ला सिकरवार का तो पता है लेकिन ये अमरनाथ पता नहीं किसने ठोक दिया, शायद कांग्रेसीयों ने एनकाउण्‍टर करा होगा तभी बन्‍द करा रहे होंगें । मैंने अपने पुलिस मुखबिरों को फोन लगाया कि भईये ये अमरनाथ का एनकाउण्‍टर किसने कर दिया है बड़ा बन्‍द बन्‍द चल रहा है, मेरे पुलिस मुखबिर मित्र घबराये और बोले गुरू अगर अमरनाथ का भी फर्जी एनकाउण्‍टर हुआ है तो जरूर अमृत लाल मीणा ने ठोका होगा या फिर कैलारस या सबलगढ़ पुलिस ने ठोक दिया होगा । आप सीधे वहीं एस.डी.ओ.पी. को लगा लो । मैंने कई एस.डी.ओ.पी. और टी.आई. से खबर की पुष्टि और विवरण चाहा ससुरे सब के सब धुत्‍त और मस्‍त थे, हर कोई कहता था हमारे थाने के रोजनामचे में नहीं है, दादा जरूर अमृत मीणा ने ठोका होगा । हमारे यहॉं तो पन्‍द्रह दिन बाद रामसहाय गूजर गिरोह के चार आदमी ठोकने हैं, ये अमरनाथ फमरनाथ हमारे थाने के एरिया में कोई वारदात नहीं करता, और न उस पर कोई रिवार्ड है । ग्‍वालियर पुलिस से पूछ कर देख लो शायद टी- अलां फलां पर दर्ज हो, हो सकता है इण्‍टरनेशनल मुजरिम रहा हो और इण्‍टरपोल का रेड कार्नर हो । मैं फोन पर पैसे खर्च कर कर के और माथा पटक पटक के परेशान था मगर खबर थी कि मिल ही नहीं रही थी ।

खुद मैंने समझा कि कोई भाजपा नेता अमरनाथ होगा सो उसका भी पुलिस ने कल्‍ला सिकरवार की तरह फर्जी एनकाउण्‍टर कर डाला होगा तो बीजेपी भी क्षत्रिय महासभा की तरह बन्‍द करा रही होगी । लेकिन जब पलटकर कांग्रेसीयों ने लफड़ा किया और इन्‍दौर भोपाल में सरकार को रगड़ा तो मुझे टेंशन हुआ कि यार इसका मतलब अमरनाथ कोई ज्‍यादा बड़ा नेता था सो ज्‍यादा भभ्‍भर मच रहा है, मुझे इस बात पर भी शर्म आ रही थी कि इतना बड़ा नेता फर्जी एनकाउण्‍टर हो गया और मैं उसका नाम तक नहीं जानता । उफ मुझे तो डूब ही मरना चाहिये । मैं लालकृष्‍ण से शिवराज तक को जानता हूँ पर अमरनाथ को नहीं जानता, मैंने ठान लिया कि हम मीडिया में काम नहीं कर रहे झकमारी कर रहे हैं, बन्‍द आज से लिखना बन्‍द । सब बाजार बन्‍द कर रहे हैं, अमरनाथ बेचारा कोई बहुत बड़ा बढि़या आदमी होगा निबटा दिया इन पुलिस वालों ने बेचारे को, और हमें कानोंकान खबर भी नहीं हुयी, सो उनके बन्‍द के साथ अपना लिखना बन्‍द ।

बहुत बाद में मुझे पता चला कि मामला बाबा अमरनाथ का था, गुफा वाले अमरनाथ महादेव । अरे भईया वे तो अमर हैं, उन्‍हें कौन निबटा सकता है । पर बाबा को भी अब मीडिया में हाईलाइट होने का चस्‍का लग गया है, कभी लुप्‍त होकर, कभी गुप्‍त होकर तो कभी सुप्‍त होकर हर साल मीडिया की हेडलाइन में जगह पा ही लेते हैं अबकी बार बन्‍द करा कर राजनीति में भी तगड़ी एण्‍ट्री मारी है, हाहाकार और मारामार मचाते हुये, वाह बाबा वाह क्‍या धांसू एण्‍ट्री मारी है । राम जी ने भी मारी थी ऐसी ही धांसू एण्‍ट्री पर वे आउटडेटेड हो गये, बिना मन्दिर के ही क्‍लीन बोल्‍ड हो गये । दूध की मक्‍खी हो गये । बाबा तुम जरा देखना टंगड़ी बचा के खेलना, वरना चुनाव के बाद राम जी से बदतर हालत हो जायेगी । प्रभु आप तो अन्‍तर्यामी हैं, सब जानते हैं, फिर काहे को नेताओं के अण्‍टे में आके पार्टी ज्‍वाइन कर रहे हो, दूर ही रहो प्रभु । अभी सब पार्टी वाले आपके भक्‍त हैं आपके दर्शनों के जोखिम उठाते हैं फिर एक पार्टी को छोड़ दूसरा कोई तुम्‍हारा ना नाम लेवा होगा ना पानी देवा । सबके बने रहो इसी में बड़प्‍पन है । काहे को एक के नाम बदनाम होते हो । प्रभु आपका ठीया वहीं ठीक है, दिल्‍ली, भोपाल, इन्‍दौर से दूर ही रहो तो बेहतर हैं ।

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