छतों पर लगे मोबाइल फोन टॉवर हटाये जा यें – मानव अधिकार आयोग


रिहायशी कॉलोनियों के पास सेल फोनटॉवर स्थापित करने की अनुमति न देने की अनुशंसा:

छतों पर लगे मोबाइल फोन टॉवर हटाये जायें – मानव अधिकार आयोग

Bhopal:Sunday, August 30, 2009

म.प्र. मानव अधिकार आयोग ने नगरीय क्षेत्रों में सेल फोन टॉवर स्थापित करने के लिये कम से कम ऐसे भूखंडों का चयन करने को प्राथमिकता देने की अनुशंसा की है जिनका आकार ढाई सौ फुट× ढाई सौ फुट हो। इन भूखंडों पर सेल फोन टॉवर के लिये स्थापित की जाने वाली मशीनों और जनरेटर से 100 फुट की त्रिज्या में कोई भी रिहायशी आवास न हो। टॉवर स्थापित करने के लिये जनरेटर की चिमनी की ऊँचाई न्यूनतम 30 फुट अथवा पास की ऊँचे आवासीय भवन से 20 फुट अधिक होना चाहिये।

आयोग ने सिफारिश की है कि ढाई हजार वर्ग फुट तक के आवासीय भूखंडों पर स्थापित टॉवर तत्काल हटाये जाने चाहिये। रिहायशी कॉलोनियों में मकानों की छत पर स्थापित टॉवरों से लोगों की जान और माल की क्षति का खतरा बना रहता है। वैसे भी ये भवन डायनामिक इम्पेक्ट फोर्स से डिजायन नहीं होते हैं इसलिये छतों पर स्थापित टॉवरों को भी हटा देना चाहिये। आयोग ने कहा है कि राज्य का अधिकांश भू-भाग भूकंप संभावित क्षेत्र है, इसलिये टॉवरों की ऊँचाई इतनी हो कि उनके गिरने से कोई जनहानि न हो। आयोग ने कहा है कि भारतीय टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग संस्थान दिल्ली द्वारा जारी मार्गदर्शी सिद्धांतों व निर्देर्शों का टॉवर की स्थापना में पालन कराया जाये। आयोग ने ये अनुशंसाएं खण्डवा के एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर श्री राजेन्द्र तिवारी की शिकायत पर विभिन्न संबंधित संस्थाओं से जानकारियां लेने और विचार-विमर्श करने के बाद की हैं।

आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि सेल फोन टॉवर्स का निर्माण एवं स्थापना घनी आबादी वाली बस्तियों के निकट न किया जाये। टॉवर स्थापित किये जाने वाले स्थान को वायर फेंसिंग और चारीदीवारी बनाकर सुरक्षित रखा जाना चाहिये ताकि उन तक किसी व्यक्ति की पहुंच न हो सके। आयोग ने यह भी कहा है कि विद्युत या डीजल जनरेटर से संचालित होने वाले टॉवरों में ध्वनि प्रदूषण न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिये। म.प्र. मानव अधिकार आयोग ने यह शिकायत प्राप्त होने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से टॉवर स्थापना की अनुमति देने के संबंध में शासन की नीति की जानकारी प्राप्त की। नीति से यह स्पष्ट हुआ कि सेल फोन टॉवर स्थापना की अनुमति देने की शर्तों में जन-सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव न पड़े इस संबंध में कोई खास शर्तें नहीं रखी गई हैं। आयोग की पहल पर शासन ने सेल फोन टॉवर से निकलने वाली विद्युत चुम्बकीय विकिरणों के दुष्प्रभावों का अध्ययन करने के लिये सात सदस्यीय एक विशेषज्ञ समिति गठित की। समिति में गाँधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के एटामिक मेडिसिन्स विभाग के डॉ. करण पीपरे, सूचना एवं प्रौद्योगिकी के ओ.एस.डी. डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, बी.एस.एन.एल. के श्री मनोज कुमार, नगरीय प्रशासन के अधीक्षण यंत्री श्री के.के. श्रीवास्तव, रिलायंस और एयरटेल कम्पनियों के एक-एक प्रतिनिधि को सम्मिलित किया गया।

समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ये विद्युत चुम्बकीय विकिरणें गर्भवती माताओं, गर्भस्थ शिशुओं और बालकों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सेल फोन टॉवरों का निर्माण करने की अनुमति केवल खुले सार्वजनिक स्थानों पर ही दी जानी चाहिये। निर्मित भवनों की छतों पर टॉवर स्थापित करने से कभी भी दुर्घटनाएं घटित हो सकती हैं। विभिन्न कम्पनियों को सेल फोन टॉवरों के साझा उपयोग पर सहमति बनाने के प्रयत्न होने चाहिये। भविष्य में बनने वाली रिहायशी कॉलोनियों में सेल फोन टॉवर स्थापित करने के लिये स्थान आरक्षित कराये जाने चाहिये।

शिकायतकर्ता श्री राजेन्द्र तिवारी, स्वयं स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं। उन्होंने भी सेल फोन टॉवर्स के बारे में जो अध्ययन किये हैं उनके संदर्भ प्रस्तुत करते हुए आयोग को काफी जानकारियां दी हैं। श्री तिवारी ने फ्रांस के एक शोध पत्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि सेल फोन टॉवर के पास रहने वाले लोगों को खून की कमी, दृष्टिदोष, सिरदर्द तथा अनिद्रा जैसे संत्रास हो सकते हैं। इसलिये सेल फोन के बेस स्टेशन को मानव बसाहट से कम से कम 300 मीटर दूर रखना उचित होगा। आस्ट्रिया के वियना विश्वविद्यालय के पर्यावरण स्वास्थ्य चिकित्सा संस्थान के एक शोधपत्र जो इंटरनेट पर उपलब्ध है में स्पष्ट किया गया है कि विद्युत चुम्बकीय विकिरणों का मानव स्वास्थ्य पर तात्कालिक प्रभाव भले ही न दिखे लेकिन लम्बे समय तक विकिरणों के प्रभाव से मानव शरीर पर दुष्परिणाम के उदाहरण मिले हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में किये गये एक अध्ययन में भी बताया गया है कि सेल फोन टॉवर और सेल फोन दोनों को एक सुरक्षित दूरी पर रखना आवश्यक है। अन्य स्थिति में इनके अहितकारी परिणाम बूढ़ों, बच्चों, गर्भवती माताओं और कमजोर लोगों पर प्रकट होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सेल फोन टॉवर स्थापित करने के संबंध में पूर्ण सावधानी और सतर्कता के सिद्धांतों का पालन करने की सलाह दी है।

ग्वालियर चम्‍बल से आगरा तक स्‍वाइन फ्लू की दहशत, अजीबोगरीब बीमारी की चप ेट में हैं लोग


ग्वालियर चम्‍बल से आगरा तक स्‍वाइन फ्लू की दहशत, अजीबोगरीब बीमारी की चपेट में हैं लोग

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

शरीर के जोड़ों में दर्द, पूरे शरीर में ऐंठन, बैचैनी और एकदम भारी दर्द व अचानक तेज बुखार की चपेट में आजकल हजारों लोग ग्‍वालियर चम्‍बल से लेकर धौलपुर आगरा तक हर गॉव शहर मे हैं । मुझे चन्‍द रोज में इन क्षेत्रों में जाने और घूमने का मौका मिला और मैने स्‍वयं देखा कि सभी लोग तकरीबन एक ही प्रकार के कष्‍ट से पीडि़त हैं सब ओर यही हाल है, उधर कुछ क्षेत्रों में सूअरों के लगातार मरने की खबर से भी लोग भयभीत हैं ।

हालांकि लोग इसे अजीब गरीब बीमारी या चिकनगुनिया या मंकी गुनिया, सूअरगुनिया जैसा बुखार या पीड़ा मान कर कई नीम हकीमों और तांत्रिकों तथा झाड़ फूंक वालों के यहॉं हजारों की संख्‍या में रोज इलाज करा रहे हैं । लेकिन कोई फर्क उनकी हालत में नहीं हो रहे हैं ।

ईश्‍वर करे कोई छोटी मोटी बीमारी ही हो और जल्‍द ही लोगों को राहत भी मिल जाये ।

हालांकि मुझे नहीं पता कि स्‍वाइन फ्लू की बीमारी के लक्षण क्‍या है और आम शहरी और ग्रामीणों को भी इसकी ज्‍यादा जानकारी नहीं है ।

लेकिन अगर यह बीमारी स्‍वाइन फ्लू या उसके जरा सी भी नजदीक है, तो सरकार को तुरन्‍त ऐहतियात बरत कर अपनी कार्यवाही प्रारंभ कर देना चाहिये । मैंने स्‍वयं देखा है कि लोगों की हालत काफी पीड़ादायक हो रही है और ग्‍वालियर से चम्‍बल, धौलपुर आगरा तक भौगोलिक क्षेत्र भी कोई कम छोटा नहीं है , पता लगा कर ऐहतियात के तौर पर दर्द व बुखार ग्रस्‍त लोगों में कुछ को सेम्‍पल के तौर पर जॉच करवा ली जाये तो बेहतर है वरना लोग कुछ का कुछ समझकर इधर उधर इलाज या झाड़फूंक में फंसे लाइलाज तक स्‍टेज तक पहुँच जायेंगें ।

अंतत: भाजपा सांसद नरेन्‍द्र सिंह तो मर और विधायक शिवमंगल सिंह तोमर के हस ्‍तक्षेप के बाद मुरैना की गॉधी कालोन ी की बिजली व्‍यवस्‍था में चालू हुये सुधार


अंतत: भाजपा सांसद नरेन्‍द्र सिंह तोमर और विधायक शिवमंगल सिंह तोमर के हस्‍तक्षेप के बाद मुरैना की गॉधी कालोनी की बिजली व्‍यवस्‍था में चालू हुये सुधार

मुरैना 21 अगस्‍त 09, मुरैना की गॉंधी कालोनी में चल रहा बिजली उपद्रव उस समय किंचित रूप से शान्‍त हो गया जब भाजपा सांसद श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर एवं भाजपा के दिमनी राजपूताना क्षेत्र विधायक श्री शिवमंगल सिंह तोमर ने व्‍यक्तिगत रूचि लेकर तत्‍काल गॉंधी कालोनी वासीयों की विद्युत समस्‍या के निदान हेतु अधिकारीयों को निर्देश दिये ।

आज गॉंधी कालोनी में जहॉं पूरे दिन सड़े गले तारों को बदलने में पूरा बिजली महकमा जुटा रहा वहीं ग्‍वालियर टाइम्‍स के श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर को भी पूरे दिन बिजली महकमा घेरे रहा ।

उल्‍लेखनीय है कि ग्‍वालियर टाइम्‍स के श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर द्वारा मुरैना श्‍योपुर सांसद श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर एवं भाजपा के राजपूताना क्षेत्र के ताकतवर विधायक श्री शिवमंगल सिंह तोमर को फोन द्वारा सारे मामले से अवगत कराया गया था जिस पर तत्‍काल संज्ञान लेते हुये भाजपा सांसद श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर एवं भाजपा विधायक श्री शिवमंगल सिंह तोमर ने बिजली अधिकारीयों को समस्‍या निदान के लिये आवश्‍यक निर्देश दिये और फिर आनन फानन में बिजली महकमें ने अपनी कार्यवाही शुरू कर दी और गॉधी कालोनी पुलिया पर से सड़े गले तार हटा कर नये तार लगवाये वहीं पूरे दिन पाइण्‍ट टू पाइण्‍ट पोल टू पोल सप्‍लाई डिस्‍टरबेन्‍स चेक किये गये हालांकि अभी कई लाइन फेज पायर सप्‍लार्ठ लाइन से गायब हैं और थ्री फेज उपभोक्‍ताओं को थ्री फेज सप्‍लाई चालू नहीं हुयी है संभवत: आज ये सभी गायब वायर लाइन में बिजली महकमा जोड़ेगा और उपभोक्‍ताओं को थ्री फेज सप्‍लाई दे सकेगा अभी एक ही फेज से तीनों फेजो पर सप्‍लाई की जा रही है ।

नरेन्‍द्र सिंह तोमर गुस्‍साये और कहा लगाओ नया ट्रान्‍सफार्मर

ग्‍वालियर टाइम्‍स के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने जब भाजपा सांसद श्री तोमर को सारे मामले से अवगत कराया तो सांसद श्री तोमर ने कहा कि ‘’ जनता को कोई परेशानी नहीं होना चाहिये और अगर गॉधी कालोनी में एक और ट्रान्‍सफार्मर लगना जरूरी है तो लगाओ मैं सांसद विकास निधि से इसे मंजूर करूंगा ‘’ यह ट्रान्‍सफार्मर मुरैना के प्रसिद्ध एस.के.टी. भवन के सामने रखा जायेगा । साथ ही गॉंधी कालोनी पार्क का विवादित ट्रान्‍सफार्मर हटाया जायेगा । वहीं शिवमंगल सिंह ने भी मामले पर नाराजी जताते हुये तुरन्‍त कालोनी निवासियों की समस्‍या हल करने के निर्देश दिये ।

भाजपा संसद श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर द्वारा अपने फण्‍ड से नया ट्रान्‍सफार्मर एस.के.टी बिल्डिंग के सामने लगाये जाने की घोषणा की सूचना मिलते ही श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर के नाम के जयकारे पूरी गॉंधी कालोनी में गूंज गये और चन्‍द पलों के भीतर नरेन्‍द्र सिंह तोमर पूरी कालोनी के न केवल हीरो बन गये बल्कि सभी कालोनी वासीयों ने कहा ‘’हमने सही आदमी को वोट दिया, सचमुच यही सपूत है ‘’

हालांकि अभी गॉंधी कालोनी की विद्युत समस्‍या हल नहीं हुयी है और न विद्युत आपूर्ति यही तरीके से चालू हुयी है तथा विद्युत अवरोध जस का तस है लेकिन बिजली महकमें की मेहनत और दौड़ घूप को देखते चन्‍द दिनों में समस्‍या का निदान नजदीक जान पड़ता है । आगे देखते हैं कि क्‍या होता है ।

हटेगा पानी का पम्‍प भी

गुस्साये राजपूत सांसद और विधायकों ने ततकाल उन विवादित पानी के पम्‍पों और हैण्‍डपम्‍पों को हटाने के भी निर्देश दिये हैं जिनसे सार्वजनिक होते हुये भी किसी ताकतवर व्‍यक्तिविशेष को पानी सप्‍लाई की जा रही है । गांधी कालोनी मुरैना में इस निर्देश विशेष के तहत दो पम्‍प हटेंगे । और ताकतवर दो बाहुबली पूर्णत: शून्‍य बटे सन्‍नाटा हो जायेंगे । .

मुरैना की गांधी कालोनी में लठियाई ए वं गोलीबारी : बिजली कटौती को लेकर भि ड़े लोग, भारी उपद्रव आशंकित, दैनिक भ ास्‍कर की खबर त्रुटिपूर्ण व मिथ् ‍या , कांग्रस अध्‍यक्ष के खिलाफ नार ेबाजी एवं पुतले फूंके


मुरैना की गांधी कालोनी में लठियाई एवं गोलीबारी : बिजली कटौती को लेकर भिड़े लोग, भारी उपद्रव आशंकित, दैनिक भास्‍कर की खबर त्रुटिपूर्ण व मिथ्‍या , कांग्रस अध्‍यक्ष के खिलाफ नारेबाजी एवं पुतले फूंके

मुरैना की गांधी कालोनी की बिजली कटौती एवं पानी सप्‍लाई बन्‍द होने के कारण भ्ण्डि , मुरैना, ग्‍वालियर के समाचारों का प्रकाशन रूका हुआ है , बिजली सप्‍लाई बहाल होते ही इनका यथावत प्रकाशन किया जायेगा ।

मुरैना 19 अगस्‍त 09 । देर रात 12 बजे समाचार लिखे जाने तक मुरैना की गांधी कालोनी के क्षेत्र विशेष की बिजली पिछले तीन दिनों से बिजली महकमे ने काट रखी है और पीने के पानी की सप्‍लाई भी पिछले तीन दिन से बन्‍द है । आज एक गांधी कालोनी पार्क मुरैना के ट्रान्‍सफार्मर से बिजलीघर मुरैना के भ्रष्‍ट कर्मचारीयों मुन्‍नालाल शर्मा, पी.के.शर्मा, राजीव कुमार गुप्‍ता एवं भागीरथ प्रसाद गोयल द्वारा कालोनी बिल पेयर एवं बिल पेड उपभोक्‍ताओं के कनेक्‍शन हटाये जाने एवं बिना बिजली बिल दिये बिजली चोरी करने वाले उपभोक्‍ताओं को बिजली दिये जाने को लेकर जमकर तकरीबन दो घण्‍टे तक लाठीयॉ चली तथा गोली बारी हुयी ।

गांधीकालोनीवासीयों करीबन 500 लोगों ने देर रात साढ़े 11 बजे तक मुरैना का बिजली घर घेर रखा था , जिसमें मुरैना कांग्रेस अध्‍यक्ष भगवान सिंह तोमर सहित भ्रष्‍ट बिजली कर्मचारीयों सहित कई लोगों के खिलाफ नारेबाजी एवं पुतला दहन किये जा रहे थे । उल्‍लेखनीय है कि कांग्रेस जिलाध्‍यक्ष सहित गांधी कालोनी निवासी भ्रष्‍ट बिजली कर्मचारी मुन्‍नालाल शर्मा ने अपने निजी नाम पर एक सुपर सप्‍लाई बिजली ट्रान्‍सफार्मर (असल में ये सार्वजनिक है लेकिन इसकी बिजली सप्‍लाई केवल इन्‍हें ही मिलती है ) एवं निजी तौर पर पानी सप्‍लाई के लिये सबमर्सिबल सार्वजनिक हैण्‍डपम्‍प के नाम पर नगरपालिका मुरैना का अपने पद व प्रभाव का दुरूपयोग कर लगवा रखा है और इन्‍हें नियमित पानी सप्‍लाई केवल इन्‍हे ही 24 घण्‍टे मिलती है शेष मोहल्‍ला की पानी सप्‍लाई बन्‍द रहती है जिससे लोग भड़क गये और जम कर लाठी मार एवं गोली बारी हुयी । देर रात साढ़े 11 बजे तक भारी उपद्रव जारी था । ग्‍वालियर टाइम्‍स के सी.ई;ओ. श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर एवं उनकी पूरी टीम जनता के साथ सड़कों पर मौजूद थी ।

पूरी खबर बिजली बहाल के बाद विस्‍तार से प्रकाशित की जायेगी । हमने बिजली धर मुरैना के एस.ई एस. के सचदेवा सहित सभी छोटे बड़े अधिकारीयों से बातचीत की है सारा ब्‍यौरा बिजली बहाल होने के बाद ।

मामले में तोमरों के सभी राजघराने, भाजपा सांसद नरेन्‍द्र सिंह तोमर के समर्थक , स्‍थानीय विधायक परशुराम मुदग्ल के समर्थकों सहित कई पुराने कॉंग्रेसीयों एवं भाजपाईयों , सपाईयों, राष्‍ट्रीय जनता दल सहित सपाईयों ने एक साथ इकठ्ठे होकर मोर्चा खोल दिया है । विस्‍तृत समाचार बिजली सप्‍लाई बहाल होने पर । भारी उच्‍च स्‍तर तक मामले की शिकायतें भी की जा रहीं है और संभवत: कुछ समय के भीतर शहर में भारी भयंकर उपद्रव आशंकित है । आज दैनिक भास्‍कर समाचारपत्र में इस सम्‍बन्‍ध में प्रकाशित समाचार त्रुटिपूर्ण तथ्‍यहीन व मिथ्‍या है (हमारे पास सबूत हैं )

जो उखाड़ सको सो उखाड़ लो, नहीं मिलेग ी बिजली- मुरैना कलेक्‍टर एम.के अग्र वाल


जो उखाड़ सको सो उखाड़ लो, नहीं मिलेगी बिजली- मुरैना कलेक्‍टर एम.के अग्रवाल

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

मुरैना शहर संभागीय मुख्‍यालय हैइसके कई मोहल्‍लों में पिछले 4-5 दिन से 24 घण्‍टों बिजली नहीं थी जिससे ग्‍वालियर टाइम्‍स जैसी वेबसाइट पहली बार इतिहास में पिछले 4 दिन से अपडैट नहीं हुयी, इस सम्‍बन्‍ध में एक पत्रकार के नाते हमने मुरैना कलेक्‍टर एम.के.अग्रवाल से कल फोन पर बात की, हमने कहा सर बराबर बिल भरते आ रहे हैं (पिछले 26 साल से) लेकिन हमारी बिजली बहुत परेशान कर रही है हमें बिजली नहीं मिल रही है, कलैक्‍टर एम.के. अग्रवाल का जवाब सुन कर हम भौंचक्‍क रह गये कलेक्‍टर ने कहा कि ‘’ कह दिया न कि नहीं है बिजली, जो उखाड़ा पड़े सो उखाड़ लो, नहीं मिलेगी बिजली’’ क्‍या एक कलेक्‍टर का ऐसा जवाब लोकतंत्र में एक लोकसेवक (जनता का सेवक) का सही जवाब था , हम आपकी राय जानना चाहते हैं , यदि आपको यह गलत व अप्रत्‍याशित एवं भद्दा महसूस होता है तो इसकी विश्‍वव्‍यापी निन्‍दा चाहते हैं , हालांकि इसकी शिकायत प्रधानमंत्री के प्रशासनिक सुधार कार्मिक एवं लोक शिकायत मंत्रालय तथा महामहिम राष्‍ट्रपति को ऑनलाइन की जा रही है और क्‍या अब भी कुछ सज्‍जन मुरैना के इस कलेक्‍टर को हमारी बेस्‍ट कलेक्‍टर्स और सुशासन की फिल्‍म में शामिल किये जाने हेतु प्रस्‍तावित करना पसन्‍द करेंगे ।

कहने को तो प्रति मंगलवार म.प्र. शासन की ओर से जन सुनवाई नामक नौटंकी म.प्र. सरकार करती है और जिसमें जनता की फरियाद सुनी जाती है और मौके पर ही समस्‍याओं का निराकरण किया जाता है लेकिन कलेक्‍टर के उपरोक्‍त जवाब से आपको मुरैना की जनसुनवाई की बानगी मिल गई होगी कि मुरैना का कलेक्‍टर कैसी जनसुनवाई करता होगा और जनता से क्‍या व्‍यवहार करता होगा । यह एक भुक्‍तभोगी दास्‍तान है और कल की ही घटना है । हालांकि बिजली विभाग के एस.ई; से हुयी वार्तालापों के कई फोन और कलेक्‍टर के फोन हमने रिकार्ड किये है । कोर सेण्‍टर सहित अन्‍य उच्‍च स्‍तरीय जॉचों में हम इन्‍हें सबूत के तौर पर प्रस्‍तुत करेंगें । लेकिन आपको कलेक्‍टर एम.के.अग्रवाल की गुण्‍डागर्दी के व्‍यवहार की वजह भी बता दें , पिछले दो महीने पहिले सहारा समय टी.वी. न्‍यूज चैनल के एक पत्रकार विजय तिवारी को कलेक्‍टर एम.के.अग्रवाल ने अपने कार्यालय में बन्‍द करके मारा पीटा था , विजय तिवारी के पास कलेक्‍टर एम.के. अग्रवाल सहित उसके कई मातहतों की वीडीयो स्ट्रिग्‍स थीं जिसमें कलेक्‍टर न केवल रिश्‍वत लेते बल्कि भ्रष्‍टाचार के रिकार्ड तोड़ कारनामे करते स्टिंग आपरेशन के जरिये फिल्‍मा लिया गया था । विजय तिवारी की मारपीट करने के साथ उसका कैमरा एवं पेन ड्राइव कलेक्‍टर एम.के.अग्रवाल ने अपने स्‍टाफ से छुड़वा ली थीं , जिसकी एफ.आई.आर मुरैना पुलिस नहीं लिख रही थी , सो रात को करीब 30-40 पत्रकार इक्‍ठ्ठा होकर मेरे पास आये और मैंने इण्‍ठरनेट के जरिये डी.जी.पी; म.प्र. को मुरैना कलेक्‍टर के खिलाफ एफ.आई.आर दर्ज कर दी यह एफ.आई.आर अभी तक दर्ज है जिसके सबूत हमारे पास हैं । बाद में अरूण तोमर (अध्‍यक्ष म.प्र. राज्‍य सहकारी संघ) के जरिये विजय तिवारी को काफी डराया धमकाया गया और राजीनामा कराने के लिये दवाब डलवाया गया । बाद में क्‍या हुआ पता नहीं लेकिन मुकदमें लड़ना और पैरवी करना, इण्‍टरनेट के जरिये एडवोकेसी करना , मुकदमे कायम कराना, एफ.आई.आर दर्ज कराना मेंरा पेशा है, मै एक एडवोकेट हूँ मेरी प्रोफशनल बाध्‍यता है कि मैं पीडि़त की बात सुनूं और उचित मंच पर पहुँचा कर उसे न्‍याय दिलाऊं अब इसमें मुल्जिम भले ही कोई भी क्‍यों न हो ।

मुरैना कलेक्‍टर एम.के अग्रवाल तभी से मुझसे दुश्‍मनी माने बैठे है और परेशान करने का, अपने पद का दुरूपयोग करने का कोई छोटा से छोटा मौका नहीं छोड़ रहे । वैसे मै कलेक्‍टर साहब को याद दिला दूं कि उनके विरूद्ध इतने साक्ष्‍य हैं कि एक बार भीतर चले गये तो निकल कर बाहर आना मुश्किल है , उच्‍च स्‍तरीय जॉच में हम सारे सबूत पेश भी करेंगे । चलिये श्रीमान अब लड़ ही लेते हैं और ढंग से लड़ लेते हैं 1 अब या तो हम नहीं या आप नहीं । चम्‍बल में एक ही शेर रहेगा आप या फिर हम । ‘’हम अमन चाहते हैं जुल्‍म के खिलाफ, फैसला अगर जंग से होगा तो जंग ही सही ‘’ तैयार हो जायें श्रीमान जितना पद का दुरूपयोग कर सकते हो कर डालो, और अब हमारे वार भी झेलो । हम क्‍या उखाड़ पायेंगे ये वक्‍त बतायेगा श्रीमान । फिलहाल आपको इण्‍टरनेशनल हस्‍ती बनाये देते हैं , छोटे मोटे से लड़ने में मजा भी नहीं आता ।

ग्वालियर शिक्षा का संभावनाशील ‘हब’ – राकेश अचल


ग्वालियर शिक्षा का संभावनाशील ‘हब’

  • राकेश अचल
  • लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

धरती उर्वरा हो, तभी उसमें फसल अच्छी होती है। ठीक यही बात शिक्षा और ग्वालियर पर लागू होती है। ग्वालियर उत्तरी म प्र. में ही नहीं बल्कि उत्तर भारत मे भी एक महत्वपूर्ण एज्यूकेशन हबके रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

ग्वालियर स्वतंत्रता पूर्व से ही शिक्षा का महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। ग्वालियर के तत्कालीन शासकों ने शिक्षा के महत्व को बहुत पहले समझ और पहचान लिया था। ग्वालियर दरबार ने भी शिक्षा को रियासत की जिम्मेदारी के रूप में लिया और 1846 में लश्कर मदरसाके नाम से लश्कर में पहला आधुनिक शिक्षा विद्यालय खोला। रियासत के एक मंत्री श्री दिनकर राव राजवाड़े की व्यक्तिगत रूचि के कारण 1852 से 1859 के बीच ग्वालियर में अंग्रेजी शिक्षा भी प्रारंभ कर दी गई। ग्वालियर अकेली ऐसी रियासत थी जहां 1857 में दो हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में स्कूल खोल दिये गये थे।

ग्वालियर में 1885में हाईस्कूल तथा 1890 में इन्टरमीडिएट कालेज की स्थापना कर दी गई थी। 1887 में ही ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की रजत जयंती स्मारक के रूप में बनी इमारत में विक्टोरिया कालेज की स्थापना की गई। इस इमारत का लोकार्पण 1899 लार्ड कर्जन ने किया। इसी इमारत में आज महारानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय संचालित हो रहा हे।

ग्वालियर में 1895 में सरदार स्कूल और मिलिट्री स्कूल की स्थापना भी की गई। 1903 में यहां दो नये कालेज और 1905 में पहला कन्या महाविद्यालय खोला गया। 1915 में पहली आयुर्वेद शाला और 1939 में कमलाराजा कन्या महाविद्यालय स्थापित किया गया। इस संस्थान में आज विभिन्न संकायों की 7500 छात्रायें अध्ययन करतीं हैं।

आजादी से पूर्व ही 1946में ग्वालियर में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की गई। 1949 में आयुर्वेद महाविद्यालय और 1950 में कृषि महाविद्यालय स्थापित कर दिया गया। 1957 में महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय स्थापित किया गया, जो अब स्वयं डीम्ड यूनीवर्सिटी बन चुका है।

ग्वालियर में 1964में जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद 1984 तक शिक्षा के क्षेत्र में एक ठहराव सा आ गया। लेकिन 1985 के बाद ग्वालियर के तत्कालीन सांसद माधवराव सिंधिया ने इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। सिंधिया के प्रयासों से ग्वालियर को राष्ट्रीय यात्रा, पर्यटन प्रबंधन संस्थान मिला। उन्हीं के प्रयासों से ग्वालियर में अटलबिहारी बाजपेयी सूचना प्रबंधन तकनीकी का राष्ट्रीय संस्थान मिला। खान-पान प्रबंधन की राष्ट्रीय संस्था भी ग्वालियर आ गई।

ग्वालियर में 59 साल बाद सरकार के प्रयासों से संगीत और कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना भी हो गई है। सरकार ने ग्वालियर में चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प भी व्यक्त किया है। हाल ही में कृषि मंत्री ने यहां पशु चिकित्सा महाविद्यालय खोलने की भी घोषणा की है।

ग्वालियर की भौगौलिक स्थिति के साथ ही यहां उपलब्ध बेहतर आवागमन और आवास सुविधाओं को देखते हुए निजीक्षेत्र के अधिकांश शैक्षणिक संस्थान और कोचिंग संस्थान ग्वालियर पहुँच चुके हैं। ग्वालियर में अब कला विज्ञान, चिकित्सा, तकनीक, पर्यटन शारीरिक शिक्षा, प्रबंधन, फैशन, एन सी सी. ही नहीं बल्कि नागरिक उड्डयन की शिक्षा देने वाले राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की सुदृढ़ उपलब्ध है।

आई आई आई टी एम.सूचना तकनीक के क्षेत्र में आई क्रांति को देखते हुए ग्वालियर में भारत सरकार ने इंडियन इंस्टीटयूट आफ इन्फारमेशन टैक्नोलाजी एण्ड मैनेजमेण्ट की स्थापना ग्वालियर में की। 60 हैक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में फैले इस राष्ट्रीय संस्थान में सूचना तकनीक और प्रशिक्षण के साथ ही बहुउद्देश्यी कार्यशालाओं, शोध परामर्श तथा कामकाजी लोगों के लिये सतत शिक्षण का काम पिछले एक दशक से हो रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जोड़ा जा चुका यह संस्थान पोस्ट ग्रेज्युएट, मैनेजेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम चला रहा है। इस संस्थान ने सूचना तकनीक एवं प्रबंधन के क्षेत्र में अपना अग्रणी स्थान बना लिया है।

आई आई टी टी एम. पर्यटन एवं यात्रा पबंधन विषय पर देश में प्रशिक्षण की सुविधा गिनेचुने शहरों में उपलब्ध है। ग्वालियर में भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान 1983 से इस विषय से जुड़े छात्रों को स्नातक तथा स्नातकोत्तर डिग्री एव डिप्लोमा प्रदान कर रहा है। इस संस्थान में देश के नामचीन विशेषज्ञ तो हैं ही, साथ ही यहां हॉस्टल की भी बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है। यह संस्थान जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में स्वयं की इमारत में संचालित है।

एम आई टी एस. ग्वालियर में तकनीकी शिक्षा का शुभारंभ आजादी के पहले ही उपलब्ध हो गया था। ग्वालियर के तत्कालीन शासक जीवाजी राव सिंधिया ने 1957 में माधव इंस्टीटयूट ऑफ टैक्नोलॉजी एवं साइंसेज की स्थापना की थी। यहां बी ई. से लेकर पी एच डी. तक के अध्ययन-अध्यापक का प्रबंध है यहां सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक्स, कम्प्यूटर के अलावा कृषि इंजिनियरिंग की पढ़ाई की व्यवस्था है। संस्थान में फार्मा, पोलीटेक्नोलॉजी साइंस, वायो कैमिस्ट्री आदि विषयों के अध्ययन अध्यापन के इंतजाम किये जा रहे हैं।

जीवाजी विश्वविद्यालय-ग्वालियर के एज्युकेशन हब बनने में जीवाजी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना 1966 में की गई। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने इस संस्थान का लोकार्पण किया था। यह विश्वविद्यालय लगभग प्रत्येक विषय के अध्ययन की उच्चस्तरीय व्यवस्था कर रहा है।

जीवाजी विश्वविद्यालय की अध्ययन शालाओं में विज्ञान, अर्थशास्त्र, गणित, राजनीति शास्त्र, के अतिरिक्त प्रबंधन, इंजिनियरिंग, पर्यटन के प्रथक संस्थान हैं। यह देश का अकेला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां प्रचलित विषयों के अलावा संगीत, ज्योतिष, योग, प्राकृतिक चिकित्सा जैसे पारंपरिक विषयों पर भी अध्ययन एवं शोध कराया जाता है।

संगीत शिक्षा – ग्वालियर सूचना प्रौद्यौगिकी का ही नहीं, संगीत शिक्षा का भी प्रचीन केन्द्र है। यहां पांच सौ साल पहले राजा मानसिंह तोमर ने पहली संगीत शाला स्थापित की थी। आज यहां माधव संगीत विद्यालय, चतुर संगीत महाविद्यालय, भारतीय संगीत महाविद्यालय के साथ ही अब पूरा का पूरा संगीत विश्वविद्यालय स्थापित कर दिया गया है। संगीत को कैरियर बनाने के इच्छुक छात्र यहां विश्वविद्यालय में रह कर संगीत पर शोध के साथ ही गुरू शिष्य परंपरा के अन्तर्गत भी ज्ञानवर्धन कर सकते हैं। शीघ्र ही यहां एक ख्याल केन्द्र भी बन रहा है।

कृषि शिक्षा- कृषि प्रधान भारत देश में कृषि विज्ञान की शिक्षा के माध्यम से भी रोजगार की अनेक संभावनायें बनी हैं। ग्वालियर में अब तक कृषि विज्ञान में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा ही उपलब्ध थी, किंतु इसी साल से यहां राजमाता विजयाराजे कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ पी एच डी. की उपाधि हासिल की जा सकती है। मृदा परीक्षण, मृदा उपचार, उन्नत बीजों तथा कृषि उत्पादनों पर शोध और विकास के क्षेत्र में ग्वालियर जैसी व्यवस्थायें दूसरे क्षेत्रों में कम ही हैं।

शारीरिक शिक्षा – ग्वालियर शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण और अनुसंधान का देश का ही नहीं अपितु एशिया का सबसे बड़ा केन्द्र है। यहां 1957 में तत्कालीन शासकों द्वारा 150 हैक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय अब विश्वविद्यालय बन चुका है। इस संस्थान में सभी प्रमुख खेलों के प्रशिक्षण, शोध , खेल चिकित्सा, खेल पत्रकारिता, योगा सहित सभी प्रमुख विषयों के अध्ययन, अध्यापन की विस्वस्तरीय व्यवस्थायें हैं। इस संस्थान का बहुत तेजी से विकास हो रहा है। यहां स्नातक शिक्षा से लेकर पी एच डी. तक के अध्ययन का प्रबंध है।

चिकित्सा शिक्षा- ग्वालियर में उत्तर भारत का सबसे पुराना मेडीकल कालेज है, गजराराजा मेडीकल कालेज की स्थापना ग्वालियर में 1946 में की गई थी। इस चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़ा एक विशाल अस्पताल भी है यहां एम बी बी एस., एम एस., एम डी., के अध्ययन, अध्यापन की व्यवस्था सतत् चली आ रही है। राज्य सरकार यहां शीघ्र ही एक हजार विस्तर का अस्पताल और बनाने जा रहीं है।

एलोपैथी के अलावा यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय भी पांच दशकों से संचालित है। इसी महाविद्यालय से जुड़ी आयुर्वेदिक फार्मेसी भी है।

कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान- ग्वालियर में 35 साल पहले स्थापित किया गया कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान अब रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित हो चुका है। यहां माइक्रोबायोलॉजी में स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ ही नर्सिंग का एक विशाल कालेज है। निजी क्षेत्र में दंतचिकित्सा के अतिरिक्त नर्सिंग प्रशिक्षण के अनेक संस्थान ग्वालियर में हैं जो देश-दुनियां को प्रतिवर्ष सैकड़ों नर्स तैयार कर दे रहे हैं।

महिला शिक्षा- म प्र. में महिला शिक्षा के क्षेत्र में ग्वालियर स्वतंत्रा प्राप्ति से पहले से अग्रणीय रहा है। यहां प्रदेश का सबसे बड़ा कमलाराजा कन्या विद्यालय है। इस महाविद्यालय में अलग- अलग संकाय की 7500 सीटें हैं। ग्वालियर में महिला पोलिटेक्नीक, महिला आई टी आई. , महिला बी टी आई. और महिला शिक्षा संस्थान है। एशिया का सबसे बड़ा एन सी सी. महिला प्रशिक्षण संस्थान ग्वालियर को पहचान बन चुका है। यहां पूरे वर्ष ओरियेंटेशन कार्यक्रम चलते रहते हैं।

अब अभिभावक अपने बच्चों का कोचिंग और अध्ययन के लिये कोटा, जयपुर, पुणे या इंदौर भेजने के बजाय ग्वालियर में ही रखना पसंद करते हैं। यहां शिक्षा की उच्च गुणवत्ता कम दामों पर उपलब्ध है। इसे देखते हुए देश के अलग अलग हिस्सों के छात्र ग्वालियर की ओर रूख करने लगे हैं।

ग्वालियर में प्रबंधन और इंजिनियरिंग के छात्रों के लिये व्यवहारिक प्रशिक्षण की सुविधायें भी बहुतायत में हैं। भिण्ड के मालनपुर और मुरैना के बानमौर औद्यौगिक क्षेत्र में मैकेनिकल, इलेक्ट्रीकल, डेयरी, ऊर्जा, आटोमोबाइल, इलेक्ट्रोनिक्स के एक से बढ़कर एक संस्थान है।

निकट भविष्य में ग्वालियर में आई टी. पार्क के अलावा एस ई.जेङ की स्थापना भी होने वाली है। ग्वालियर के विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही टाउनशिप में भी देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों ने अपनी इकाइयां स्थापित करने का निर्णय किया है।

अब दुनिया का शायद ही ऐसा कोई विषय होगा जिसके अध्ययन और अध्यापन की सुविधा ग्वालियर में उपलब्ध न हो। ग्वालियर में राष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरिंग कालेजों के साथ ही प्रबंधन के क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के संस्थान उपलब्ध है। शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में तो ग्वालियर में एशिया का अनूठा संस्थान है। ललित कलाओं और संगीत के छात्रों के लिये अब कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है। छात्र यहां अध्ययन, अध्यापन के साथ ही तानसेन समारोह के माध्यम से देश के प्रतिष्ठित संगीतज्ञों से सीधे रूबरू हो सकते हैं। कला के प्रदर्शन के लिये यहां तानसेन कला वीथिका भी है।

सारांश यह है कि ग्वालियर में गरीब से गरीब और अमीर से अमीर छात्रों के लिये अध्ययन की श्रेष्ठतम सुविधायें उपलब्ध हैं। पब्लिक स्कूलों में रूचि रखने वालों के लिये सिंधिया स्कूल तो यहां है ही। रेलवे और उड्डयन के विषयों से जुड़े उच्च स्तरीय संस्थान ग्वालियर को एज्यूकेशन हबके रूप में मान्यता दिलाने में कामयाब रहे हैं।

ग्वालियर के आई आई टी एम. और ए बी आई. आई आई टी एम में तो प्रवेश अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षाओं के जरिये होता है। इंजिनियरिंग, चिकित्सा एवं प्रबंधन संस्थानों में राज्यस्तर की प्रवेश परीक्षा म प्र. व्यवसायिक परीक्षा मण्डल की ओर से संचालित की जाती है। म प्र. के तकनीकी प्रबंधन और चिकित्सा संस्थानों में प्रवेश एवं शिक्षा शुल्क अन्य शहरी और राज्यों के मुकाबले काफी कम हैं।

भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान – vडॉ. सौरभ दीक्षित


भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान

v डॉ. सौरभ दीक्षित

v लेखक भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान में फेकल्टी मेम्बर है

पर्यटन में केरियर बनाने वाले छात्रों का प्रथम प्रयास भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान में प्रवेश के लिये होता है। यह संस्थान विगत 26 वर्षों से देश में पर्यटन, शिक्षा एवं मानव संसाधन के लिये सेवारत है। यहां स्नातकोत्तर स्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार(इंटरनेशन बिजनेस), सेवा क्षेत्र (सर्विसेज सेक्टर), पर्यटन एवं यात्रा (टूरिज्म एवं ट्रेवल) और पर्यटन एवं लेजर (टूरिज्म एवं लेजर) विषयों में प्रबंधन की उपाधि दी जाती है । इसके अलावा कई विषयों जैसे कि कम्प्युटराइज्ड आरक्षण प्रणाली, फ्रेंच एवं जर्मन विदेशी भाषायें, पर्यटन प्रबंधन, ईको टूरिज्म, ग्राहक संतुष्टि आदि विषयों पर शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग पाठयक्रम आवश्यकतानुसार चलाये जाते हैं । संस्थान का प्लेसमेंट रिकार्ड बहुत अच्छा है। विश्व में आर्थिक मंदी के बावजूद इस वर्ष संस्थान के पर्यटन छात्रों का प्लेसमेंट शत-प्रतिशत रहा। नौकरी देने वाली कम्पनियों में थॉमस कुक, एसओपीसी, ओरबिट, सर्दन ट्रेवल्स, लिस्परिंग पॉम आदि कम्पनियां हैं । संस्थान के सभी पाठयक्रम एआईसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त हैं । संस्थान में आने वाले गणमान्य प्रोफेसर्स/ व्यवसायियों में प्रोफेसर एरिक कोहेम(इजरायल), प्रोफेसर क्रिस कूपर , श्री प्रेम सुब्रमण्यम , श्री इंदर शर्मा, प्रोफेसर तपन पंडा, आईआईएम इन्दौर आदि प्रमुख हैं ।

इन्फ्रास्ट्रक्चर – संस्थान 22 एकड़ के हरेभरे सुरम्य वातावरण में फैला हुआ है जो यहां आने वाले छात्रों को अनायास ही अपनी ओर खींच लेता है । खेलकूद में रूचि रखने वाले छात्रों के लिये बिलियर्डस, स्नूकर, बेडमिंटन, क्रिकेट, जिमनेज्यिम, बॉलीबाल, केरम,शतरंज, फुटबाल आदि की सुविधायें हैं । संस्थान का सभागार एयरकंडीशन है एवं इसमें 500 लोग बैठ सकते हैं । संस्थान में दो संगणक केन्द्र जिनमें करीब 90 कम्प्यूटर्स लगे हुये हैं । ये संगणक केन्द्र पर्यटन एवं प्रबंधन से संबंधित सॉफ्टवेयर द्वारा युक्त हैं । सभी कम्प्यूटर्स में छात्रों, कर्मचारियों के लिये इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है। संस्थान का पुस्तकालय पर्यटन के क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा पर्यटन से संबंधित पुस्तकों का संग्रह केन्द्र है।

आईआईटीटीएम की स्थापना सन् 1983 में संसदीय समिति की अनुशंसा पर भारत सरकार ने की थी । पिछले कई वर्षों से पर्यटन के क्षेत्र में मानव संसाधन की कमी महसूस की जा रही थी । अत: आईआईटीटीएम की स्थापना पर्यटन के क्षेत्र में एक अपेक्स बॉडी की तरह दिल्ली में की गई । सन् 1992 में इसको ग्वालियर स्थानांतरित किया गया । इसके पश्चात सन् 1996 में संस्थान में पर्यटन, यात्रा विषय पर

स्नातकोत्तर डिप्लोमा शुरू किया गया । जो कि भारतवर्ष में काफी प्रचलित हुआ। तत्पश्चात पर्यटन एवं प्रबंधन से संबंधित विषयों में स्नातकोत्तर डिग्री एवं पर्यटन में स्नातक डिग्री शुरू की गई । वर्तमान में संस्थान पीजीडीएम की उपाधि देता है । संस्थान एशिया पेसिफिक क्षेत्र में उन गिने चुने संस्थानों / विश्वविद्यालयों में से एक है जो पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन विषय में स्नातकोत्तर की उपाधि देते हैं ।

संस्थान नियमित पाठयक्रमों के अलावा अपने एवं पर्यटन मंत्रालय के लिये केपीसिटी बिल्ंडिग एवं टूरिज्म (सीबीएसटी), लर्न वाइल यू अर्न (एलडब्ल्यूवायएन), डोनर, विदेशी छात्रों के लिये मार्कोपोलो , गाइड ट्रेनिंग कोर्स संचालित करता है । एक साथ 450 से अधिक गाइडों को एक ही स्थान पर ट्रेनिंग देने के लिये संस्थान का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है । आने वाले समय में संस्था पीएचडी स्तर के शोध कार्य करायेगा ।

संस्थान कई राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थाओं जैसे कि यूएनएसके द्वारा गठित एशिया पेसिफिक एज्यूकेशन एंड ट्रेनिंग इन्स्टीटयूशन इन टूरिज्म (एपीइटीआईटी), एमडिशा, इंडियन एसोसियेशन ऑफ टूर आपरेटर्स , ट्रेवल एजेन्ट्स एसोसियेशन आफ इंडिया , एफएचआरएआई का सदस्य है । संस्थान एशिया पेसिफिक एज्यूकेशन एंड ट्रेनिंग इन्स्टीटयूशन इन टूरिज्म (एपीइटीआईटी), इन्टरनेशनल फोकल पॉइंट है तथा संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सितीकंठ मिश्रा इसके वाइस चेयरमेन हैं । संस्थान ऐपिटिक का आधिकारिक न्यूज लेटर भी प्रकाशित करता है जिसका प्रचार-प्रसार 37 देशों में है ।

भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान एक मल्टी केम्पस इन्स्टीटयूट है । इसके केन्द्र नई दिल्ली, भुवनेश्वर एवं गोवा में है । ग्वालियर सेंटर हेडक्वार्टर है । गोवा केन्द्र को नेशनल इन्स्टीटयूट आफ वाटर स्पोट्र्स के नाम से जाना जाता है । जोकि वाटर स्पोट्र्स में शर्ट टर्म कोर्सेस चलाता है और कई राज्यों को कन्सलटेंसी देता है ।

आगामी वर्षों में संस्थान का विस्तार प्रस्तावित है । संस्थान भारत सरकार को कॉमनवेल्थ गेम्स में कमरों की आवश्यकता, और एसिसिबल टूरिज्म पर रिसर्च में भी सहायता दे रहा है ।

राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश ्वविद्यालय ग्वालियर


राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर

· डॉ. डी.एस.चंदेल

· रजिस्ट्रार,राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय

राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की स्थापना 19 अगस्त 2008 को राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय अध्यादेश 2008 के अन्तर्गत हुई थी । इस विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु कई वर्षों से प्रयास किये जा रहे थे । इसी संदर्भ में माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान , माननीय श्री अनूप मिश्रा मंत्री म.प्र. शासन, माननीय श्री नरेन्द्र सिंह जी तोमर प्रदेश अध्यक्ष एवं अन्य स्थानीय सांसदों गणमान्य अतिथियों की उपस्थित में इस विश्वविद्यालय की स्थापना की गई ।

राजा मानसिंह तोमर की साहित्य एवं संगीत के प्रति अगाध श्रध्दा थी । उनके कार्यकाल में ग्वालियर में संगीत विद्यालय की स्थापना की गई , जो शायद भारत वर्ष का पहला संगीत विद्यालय था। राजा स्वयं भी संगीतज्ञ एवं कवि थे व संगीत की ध्रुपद शैली के प्रणेता भी । राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 विधानसभा द्वारा 11 फरवरी 2009 को पारित हुआ । इस अधिनियम के अन्तर्गत विश्वविद्यालय के संचालन के लिये प्रथम कुलपति, आचार्य पं. चित्तरंजन ज्योतिषी को विश्वविद्यालय स्थापना के लिये शीघ्र समस्त कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये गये हैं । इस अधिनियम के अन्तर्गत बीस सदस्यों वाली एक साधारण परिषद् होगी , जिसके अध्यक्ष माननीय मुख्यमंत्री जी होंगे । विश्वविद्यालय की एक कार्य परिषद और विद्या परिषद भी होगी जो कि विश्वविद्यालय का संचालन करेगी । इस विश्वविद्यालय का क्षेत्र संपूर्ण मध्यप्रदेश होगा।

वर्तमान में विश्वविद्यालय के अन्तर्गत 24 महाविद्यालय संबध्दता प्राप्त हैं और इसके लिये जो पाठयक्रम हैं उनको निर्धारित करने के लिये विभिन्न विद्वानों की बैठकें संपन्न हो चुकी हैं । इस अधिनियम के अन्तर्गत संगीत संकाय, नृत्य संकाय, कला संकाय और अन्य संकाय जो परिनियम के अधीन होंगे का गठन किया गया है । यह भी निर्णय लिया गया कि नाटय संकाय को भी इसमें शामिल किया गया ।

भोपाल में संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, श्री मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग, श्री राम तिवारी संचालक संस्कृति विभाग, पं चित्तरंजन ज्येतिषी कुलपति जी की उपस्थिति में विश्विद्यालय के समग्र विकास पर चर्चा हुई । शैक्षणिक पदों का सृजन अन्य सुविधाओं पर विशेष रूप से चर्चा हुई और एक संबध्द कार्यकम के अन्तर्गत इसको पूर्ण करने का निर्णय लिया गया । इस विश्वविद्यालय में सभी संकायों में शोधकार्य, स्नातकोत्तर पाठयक्रम, स्नातक स्तर के पाठयक्रम , पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा एवं शार्ट कोर्स भी होंगे।

विश्वविद्यालय का उद्देश्य –

1- संगीत एवं कला संबंधी विद्या तथा ज्ञान का अभिवर्धन तथा उसका प्रसार और भारतीय समाज के विकास में रचनात्मक भूमिका सुनिश्चित करना ।

2- छात्रों तथा अनुसंधनकर्ता विद्वानों में संगीत एवं कला के क्षेत्र में सुधारों के संबंध में बुध्दि-कौशल का विकास करके संगीत एवं कला तथा संबंधित क्षेत्र में समाज की सेवा करने के उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना ।

3- संगीत से संबंधित ज्ञान की अभिवृध्दि के लिये अभिभाषणों, सेमीनारों, परिसंवादों और अधिवेशनों को आयोजित करना और संगीत एवं कला संबंधी प्रक्रिया को सामाजिक विकास का प्रभावशाली उपकरण बनाना ।

4- परीक्षायें आयोजित करना और उपाधियां तथा अन्य विद्या संबंधी विशिष्टताएं प्रदान करना ।

5- ऐसे समस्त कार्य करना जो विश्वविद्यालय के समस्त उद्देश्यों या उनके से किसी भी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिये आनुषंगिक, आवश्यक या सहायक हैं ।

6- विश्वविद्यालय का और गवेषणा, शिक्षा और शिक्षण के ऐसे केन्द्रों को , जो विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को अग्रसर करने हेतु आवश्यक है, प्रशासन तथा प्रबंधन करना ।

7- संगीत एवं कला संबंधी ज्ञान या विद्या की ऐसी शाखाओं में, जैसा कि विश्वविद्यालय उचित समझे, शिक्षण हेतु उपबंध करना और गणवेषण के लिये संगीत एवं कला के ज्ञान की अभिवृध्दि तथा प्रसार के लिये उपबंध करना ।

8- अध्येतावृत्तियां, छात्रवृत्तियां, पुरस्कार तथा पदक संस्थित करना तथा प्रदान करना ।

अटल बिहारी वाजपेई भारतीय सूचना प्र ौद्यौगिकी एवं प्रबंध संस्थान ग्वाल ियर -सुभाष चन्द्र अरोड़ा


अटल बिहारी वाजपेई भारतीय सूचना प्रौद्यौगिकी एवं प्रबंध संस्थान ग्वालियर

(भारत सरकार का स्वशासी संस्थान)

v सुभाष चन्द्र अरोड़ा

image001

v प्रस्तुतकर्ता संभागीय जनसंपर्क कार्यालय ग्वालियर में संयुक्त संचालक है ।

ई-गवर्नेंस साफ्टवेयर निर्माण हेतु पुरूस्कृत

ग्वालियर के अटल बिहारी वाजपेई प्रौद्यौगिकी संस्थान को ई गवर्नेंस की दृष्टि से उपयोगी फाईल ट्रेकिंग सिस्टमसॉफ्टवेयर निर्माण हेतु प्रदेश के सूचना प्रौद्यौगिकी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने ई गवर्नेंस इनीशेटीव इन मध्य प्रदेशपुरूस्कार प्रदान किया। फाईल ट्रेकिंग सिस्टम के इस सॉफ्टवेयर का आई आई आई टी एम के डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, डॉ. दिलीप कुमार एवं दो छात्रों विनीत रंजन एवं रोहित शुक्ला द्वारा निर्माण किया गया। यह द्विभाषीय सॉफ्टवेयर ओपन सोर्स तकनीक पर आधारित है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से किसी भी विभाग अथवा संस्थान में आने व जाने वाली फाइलों का रिकार्ड आराम से रखा जा सकता है साथ ही समय समय पर फाइल की स्थिति की जानकारी भी ली जा सकती है।

अटलबिहारी वाजपेई भारतीय सूचना प्रौद्यौगिकी एवं प्रबंध संस्थान ग्वालियर भारत सरकार द्वारा स्थापित एक समविश्वविद्यालय है। यह सूचना प्रौद्यौगिकी तथा प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में एक प्रतिष्ठित संस्थान है तथा विश्वस्तर का नामचीन संस्थान बनने के लिये प्रयासरत है।

यह संस्थान 160 एकड़ के परिसर में निर्मित है तथा सक्षम शिक्षकों के साथ ही कलात्मक प्रयोगशालाओं से सुसज्जित है। इस संस्थान का परिसर सभी आवश्यक सुविधाओं से परिपूर्ण है, जहां छात्रों के व्यक्तित्व के सम्रग विकास के प्रयत्न किये जाते हैं। यहां की गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों में जानकारी तथा शोध संस्कृति को बढ़ावा देना है।

अ बि वा. भारतीय सूचना प्रौद्यौगिकी एवं प्रबंध संस्थान ग्वालियर का उद्देश्य देश में सूचना प्राद्यौगिकी तथा प्रबंधन की शिक्षा में बेंचमार्क स्तर की स्टेट ऑफ आर्ट सुविधायें प्रदान करना है। इस संस्थान का परिसर आधुनिक संचार सुविधाओं से सुसज्जित है। संस्थान, प्रबंधन एवं सूचना प्रौद्यौगिकी के क्षेत्र में सम्पूर्ण ज्ञान को प्रदान करने वाले वातावरण को तैयार करने वाले शिक्षा केन्द्र के रूप में स्थान प्राप्त कर चुका है।

उद्योगों से संबंधित प्रबंधन के कार्यक्रम सलाहकार सेवा प्रदान करते हुए, संस्थान में समकालीन तथा संबंधित शोध क्षेत्रों की पहचान की जा चुकी है। आई आई आई टी एम. की शोध सुविधाओं को प्रयोगशाला परा संरचनाओं के द्वारा सशक्त बनाया गया है।

शैक्षणिक पोषण के हित के लिये संस्थान में शोध पर विशेष बल दिया जा रहा है। प्रयोगशालाओं को सशक्त बनाकर छात्रों तथा शिक्षकों को शोध कार्यों में समाहित कर देश विदेश के विश्व विद्यालयों से सहयोग बढ़ाकर इन उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सका है। वर्तमान में संस्थान में निम्नलिखित प्रयोगशालायें संचालित हैं।

आधारभूत इलेक्ट्रानिक प्रयोगशाला, डिजिटल प्रणाली प्रयोगशाला, संचार प्रणाली प्रयोगशाला, कम्प्यूटर नेटवर्किंग प्रयोगशाला, जेनेटिक कम्प्यूटिंग प्रयोगशाला (1,2,3), कम्यूनिकेशन स्किल प्रयोगशाला, वी एल एस आई. डिजाइन प्रयोगशाला, बिजनिस इनफोर्मेटिक्स प्रयोगशाला, ह्यूमनसेन्टर्ड कम्प्यूटिंग प्रयोगशाला, इन्फोर्मेशन सिक्योरिटी प्रयोगशाला, इंजीनियरिंग भौतिकी प्रयोगशाला तथा आई सी टी. कार्यशाला ।

संस्थान के पुस्तकालय में प्रबंधन सूचना प्रौद्यौगिकी कम्प्यूटर विज्ञान, नेटवर्किंग, समाज विज्ञान के साथ साथ औद्यौगिक शोध पत्र तथा परियोजना प्रतिवेदनों सहित पाठय पुस्तकों व संदर्भ ग्रंथों का अच्छा संग्रह है।

आई आई आई टी एम. ने सूचना स्रोतों की प्राप्ति का विस्तार डाटाबेस एक्सेस वर्चुअल पुस्तकालय के द्वारा किया है। यह पुस्तकालय इनडेस्ट कान्सोर्टियम का सदस्य है। पुस्तकालय द्वारा ई बी एस. को. के माध्यम से 800 से ज्यादा पत्रिकाओं को प्राप्त किया गया तथा सी. एम. आई. ई. द्वारा इकोनोमिक डाटाबेस उपलब्ध कराया गया है। संस्थान का पुस्तकालय सूचना प्रौद्यौगिकी तथा प्रबंधन के क्षेत्र की 200 से अधिक पत्र पत्रिकाओं को मंगाता है। इस पुस्तकालय में दर्शन शास्त्र योग आदि की पुस्तकें भी हैं। वर्तमान में छात्रों के लिये 14,500 पुस्तकें उपलब्ध हैं।

शैक्षणिक कार्यक्रम का रूपांकन इस अवधारणा से किया गया है, कि प्रबंधन, को सूचना प्रौद्यौगिकी के साधन के रूप में प्रभावशाली ढंग से संयुक्त किया जाये। पाठयक्रम का रूपांकन सूचना प्रौद्यौगिकी से संबंधित

आधुनिक विकास को ध्यान में रखकर किया गया है। इसमें साफ्टवेयर, नेटवर्किंग, मोबाइल, कंप्यूटिंग, व्ही एल एस आई. रूपांकन आदि के क्षेत्र सम्मिलित किये गये हैं। सूचना प्रौद्यौगिकी के अन्य क्षेत्रों जैसे- ई लर्निंग, ई गवर्नेंस, पर बल दिया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी की व्यवस्थित प्रबंधकीय श्रृंखला है। जिसमें स्ट्रैटजिक प्रबंधन तथा योजना कारकों का समावेश है संस्थान द्वारा एम टैक. , एम बी ए. तथा पी एच डी. कार्यक्रमों की ओर उन्मुख होने वाले स्नातकोत्तर पाठयक्रम संचालित है।

पंच वर्षीय इंटीग्रेटेड स्नातकोत्तर (आई पी जी.) कार्यक्रम – दस सेमेस्टर पूर्ण करने पर यह कार्यक्रम दोहरी डिग्री (स्नातक तथा स्नातकोत्तर) प्रदान करता है। कार्यक्रम का निर्माण इस प्रकार किया गया है जिससे छात्र छ: सेमेस्टर पूर्ण करने के पश्चात एम बी ए अथवा एम टैक. का चयन कर सकता है। छ: सेमेस्टर तक छात्राओं को विशेष और उसके विस्तार के लिये वृहद आयाम प्राप्त होता है। ताकि वे अपने आधार और दृष्टिकोण का विस्तार कर सकें। इसके लिये विज्ञान, मानविकी, प्रबंधन, कंप्यूटर एवं आई टी. विषयों को सम्मिलित किया गया है।

अखिल भारतीय स्तर पर संचालित होने वाले ए आई आई ट्रिपल ई.अखिल भारतीय यांत्रिक प्रवेश परीक्षा के द्वारा कार्यक्रम में प्रवेश दिया जाता है।

एम टैक (आई टी.) कार्यक्रम (2वर्ष) – सूचना प्रौद्यौगिकी के उभरते हुए छात्रों के लिये तकनीकी रूप से सक्षम वृत्तिकों को तैयार करने के उद्देश्य से एम टैक कार्यक्रम का तकनीकी विकास किया गया है। इस कार्यक्रम का रूपांकन सूचना प्रौद्यौगिकी की अवधारणा के विभिन्न खण्डों में आवकों के लिये किया गया है। छात्रों का चयन व्यक्तिगत साक्षात्कार तथा जी ए टी ई. में अर्जित अंकों के आधार पर किया जाता है। एम टैक स्तर पर विशेषज्ञता चार क्षेत्रों में प्रस्तावित है। ये चार क्षेत्र क्रमश: सूचना प्रौद्यौगिकी, उन्नत नेटवर्क, साफ्टवेयर इंजीनियरिंग तथा व्ही एल एस आई. है।

एम बी ए. कार्यक्रम (2 वर्ष )-एम बी ए पाठयक्रम को सूचना प्रौद्यौगिकी के महत्व को रेखांकित करते हुए इस तरह से रूपांकित किया है कि संबंधित सूचना तथा इसके प्रसारण में प्रबंधकीय परिस्थितियों में त्वरित गति में निर्णय लेने योग्य छात्रों को बनाया जा सके। इस कार्यक्रम को प्रबंधन की अवधारणा तथा सूचना प्रौद्यौगिकी दोनों को मिश्रित कर तैयार किया गया है। जी डी. के पश्चात व्यक्तिगत साक्षात्कार तथा कैट के आधार पर संस्थान में छात्र एवं छात्राओं का चयन किया जाता है।

शोध कार्यक्रम (पी एच डी.)- जुलाई 2001 में डाक्टरेट कार्यक्रम प्रारंभ किया गया । संस्थान में संचालित प्रवेश परीक्षा तथा साक्षात्कार के माध्यम से छात्रों का चयन शोध कार्यक्रम के लिये किया जाता है। सूचना प्रौद्यौगिकी तथा प्रबंधन पर बल देते हुए समस्त क्षेत्रों में डाकटोरल कार्यक्रम उपलब्ध कराया गया है। इनमें निम्न लिखित अर्न्तभागी शोध क्षेत्रों को शामिल किया गया। मोबाइल कंप्यूटिंग (संचार प्रणालियों डबल्यू ए पी. वायर लेस नेटवर्किंग आदि) नेटवर्किंग तथा सूचना सुरक्षा (वितरित नेटवर्क, सेन्सर नेटवर्क सूचना सुरक्षा किप्टोग्राफी आदि)

सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, (एस डब्ल्यू आर्किटेक्चर, अलगोरिथमस – ग्राफ प्रोब्लम ) डाटा स्ट्रक्चर प्रोग्रामिंग लेंग्वेज आपरेटिंग प्रणाली गुणवत्ता प्रबंधन आदि, एम्बेडेड प्रणाली, (वीएलएसआई)डिजाइन डिजीटल सिस्टम डिजाइन, एन ई एम एस. आदि, ह्यूमन सेन्टर्ड कंप्यूटिंग ,एन.एल.पी.ए.एल, एच.सी.एल. इमेज प्रोसेसिंग स्पीच टैक्नोलॉजी कंप्यूटर विजन एण्ड रोबोटिक्स सीमेन्टिक वेब डब्ल्यू 3 सी. स्टेण्डर्डस लोकेलाइजेशन आदि, ज्ञान प्रबंधन (इन्फार्मेशन इंटीग्रेशन) डीडीएस, एससीएम, ईआरपी, पीएलएम, पीडीएम, आईपीआर तथा गुणवत्ता, प्रबंधन टैक्नोलॉजी बिजनिस इम्क्यूबेशन आदि व्यापार विश्लेषण (डाटा वेयर हाउसिंग माइनिंग,व्यावसायिक बौध्दिकता डाटा, विजुअलाइजेशन जोखिम प्रबंधन आदि) नैनो विज्ञान तथा प्रौद्यौगिकी (मटेरियल मॉडलिंग, नैनो सेन्सर्स, नैनो डिवाइसेज)।

संस्थान उद्योगों से शोध एवं विकास तथा मानवशक्ति के बेहतर उपयोग के लिये लम्बे समय तक संबंध कायम करने के प्रयास करता है। सीईओ व्याख्यान ग्रीष्म इन्टर्नशिप तथा परिसर भर्ती आदि के द्वारा उद्योगों के संपर्क में रहते हैं। परिसर के अंदर तथा उसके बाहर दोनों प्रकार से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये हैं। 2008 बैच के 90 प्रतिशत छात्रों को रोजगार प्राप्त हो चुका है। शेष छात्रों को रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं। 2009 के बैच के रोजगार खोजने के अन्वेशन कार्य भी प्रारंभ हो चुके हैं।

इति।

विशिष्ट है श्योपुर का काष्ठ – शिल् प – सुभाष चन्द्र अरोड़ा


विशिष्ट है श्योपुर का काष्ठ – शिल्प – सुभाष चन्द्र अरोड़ा

आलेख- सुभाष चन्द्र अरोड़ा, क्षेत्रीय संयुक्‍त संचालक, जनसम्‍पर्क विभाग, म.प्र; , क्षेत्रीय जनसम्‍पर्क कार्यालय ग्‍वालियर म.प्र.

आलेख से सम्‍बन्धित चित्र चम्‍बल की आवाज पर फोटो एल्‍बम में एवं ग्‍वालियर टाइम्‍स वेबसाइट पर प्रसारित किये जा रहे हैं

image003चम्बल संभाग का शहर श्योपुर कलां काष्ठ – शिल्प के लिये विशेष रूप से जाना जाता है। श्योपुर कलां के काष्ठ – शिल्पी कच्ची जंगल वुड को खराद पर चढ़ाकर बना देते हैं ड्राईंग रूम का सजावटी सामान, देते हैं लकड़ी को तरह तरह के आकार । लाख अर्थात चपड़े के रंगों से उसे बनाते हैं आकर्षक जो अपनी खास कलर स्कीम के कारण दिखता है जुदा और बिकता भी है मंहगा ।

श्योपुर के काष्ठ शिल्पी परम्परागत भगवान के झूले से लेकर पैडस्टल लैम्प, कार्नर टेबल, शीशे का स्टैण्ड, बैंगल स्टैण्ड, फ्लावर पॉट, लालटेन, तोप आदि डेकोरेशन पीस बनाते हैं । उनके द्वारा बच्चों के लिये बनाये जाने वाले खिलौने भी सुन्दर होते हैं ।

श्योपुर प्रवास दौरान मेरी काष्ठ शिल्पी जनाब निसार अहमद और उसके भाई जनाब सरकार अहमद से बातचीत हुई । वो दोनों भाई न केवल अच्छे काष्ठ शिल्पी है अपितु उनकी काष्ठ शिल्प विक्रय हेतु दुकान भी है और वे काष्ठ शिल्प प्रदर्शन और विक्रय हेतु राजधानी दिल्ली सहित देश के बड़े बड़े नगरों में आयोजित शिल्प प्रदर्शनियों में भी शिरकत कर चुके हैं।

श्योपुर के इन दोनों भाईयों को काष्ठ शिल्प विरासत में मिला है । उनके परिवार में कई पीढ़ियों से परम्परागत भगवान के झूले बनते हैं । लकड़ी के अन्य आयटम भी वे बहुत खूबसूरती से बनाते हैं । जिस इलाके में दोनों भाई बसते हैं वह काष्ठ शिल्पियों का ही इलाका और खरादी बाजार कहलाता है । वहाँ बहुत सी काष्ठ शिल्प विक्रेताओं की दुकाने हैं । बाजार से सटी गलियों में काष्ठ शिल्पी बसते हैं जो अपने घरों पर लकड़ी का सुन्दर सुन्दर सामान बनाते हैं और यहाँ दुकानदारों को पहुँचा जाते हैं । कारीगरों को तो बामुश्किल मेहनताना ही मिलता है अलबत्ता दुकानदार जरूर ठीक ठाक पैसा कमा लेते हैं । ऐसे शिल्पी जिनकी अपनी दुकानें हैं महज वे ही बेहतर गुजर बसर करते हैं।

बातचीत में मुझे दोनों भाईयों निसार और सरकार अहमद ने बताया कि सलई, गमीर, गुरजेन, कदम और जो भी हेड लोड़ लकड़ी बेचने वाले खरादी बाजार के चौराहे पर लाते हैं उन्ही में से शिल्पी अपनी जरूरत की लकड़ियां देख कर खरीद लेते हैं । जंगल विभाग के डिपो से तो उन्हें अब लकड़ियां नहीं मिलती । इस प्रकार उपलब्ध जंगल वुड से जो खिलौने या सजावट का सामान बनता है वह सुन्दर तो होता है पर सहारनपुर के पक्की लकड़ी वाले काष्ठ शिल्प जैसा टिकाऊ नहीं होता । सहारनपुर के आयटम तो अब हर तरफ बिकते हैं । सहारनपुर वाले कई तरह की मशीनों का उपयोग करते हैं । उन्हें विदेशी बाजार भी मिल चुका है । श्योपुर के काष्ठ शिल्पियों को भी अगर वन विभाग से अच्छी लकड़ी मिलने लगे तो श्योपुर का शिल्प भी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार पा सकता है ।

राजस्थान से लगे मध्य प्रदेश के जिले श्योपुर के काष्ठ शिल्प की खासियत बयान करते हुए उन्होंने बताया कि हम खराद और हाथ का कमाल दिखाते हैं । हमारे परिवार की स्त्रियां और बच्चे ब्रश से इन कला- कृतियों को रंगते हैं और हम चपड़े वाले पन्द्रह रंगों से जो अधिक चमकीले और सतह को चिकना बनाने वाले होते हैं, से कलाकृतियों को सजा देते हैं। राजस्थान के उदयपुर में भी गौंड़ा लैम्प (पैडस्टल लैम्प) बनाये जाते हैं जो श्योपुर से मिलते जुलते दिखते हैं । समानता के बावजूद श्योपुर में निर्मित लकड़ी के लैम्प और अन्य सामान बड़ी मेहनत, अधिक सफाई और खास किस्म की कलर स्कीम के कारण विशिष्टता लिये रहता है । इसी लिए उनके दाम भी उदयपुर के सामान से कहीं अधिक मिलते हैं ।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दोनों भाई बताते हैं कि कभी श्योपुर के पठान, गौरी पठान, शेख, मेवाती आदि दो सौ से भी अधिक परिवार काष्ठ शिल्प से अपनी रोजी रोटी चलाते थे । आज इस व्यवसाय में मात्र एक चौथाई परिवार रह गये हैं । अव्वल दर्जे के कारीगर भी अब गिनती के हैं । अच्छे कारीगरों में सर्वश्री मसूद इकबाल, खालिक, सलमान और निसार जैसों का नाम लिया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि अमूमन बाहर से आने वाले पर्यटक या फिर शादी ब्याह में ही स्थानीय लोग हमारा सामान खरीदते हैं । बाहर प्रदर्शनियों में हिस्सेदारी भी कुछ न कुछ दे जाती है । बच्चों के खिलौने अब बहुत कम बिकते हैं । बाजार में अब प्लास्टिक और चीन देश के बने सस्ते सामान की भरमार होती जा रही है । साथ ही अब अच्छी लकड़ी भी तो दूर हो चुकी है ।

बावजूद बढ़ती दुश्वारियों के श्योपुर के काष्ठ शिल्पी अपनी श्रम साधना में निरन्तर जुटे हैं । परम्परागत काष्ठ शिल्प के अलावा कुछ नये आयटम भी वे अब बनाने लगे हैं । उनसे विदा होते हुए मुझे बचपन में सुना वह गीत याद आ रहा था जीते लकड़ी, मरते लकड़ी, अजब तमाशा लकड़ी कागीत में बच्चे के पालने से लेकर व्यक्ति की चिता तक लकड़ी के महत्व को बहुत खूबसूरती से पिरोया गया था। अब लगता वह लकड़ी हमसे छूटती जा रही है और उसकी जगह गैस,रसायन, प्लास्टिक और धातु निर्मित वस्तुएं लेती जा रही हैं। ऐसे में अगर इन काष्ठ शिल्पियों की सुध न ली गई तो यह परम्परागत शिल्प ड्रांईग रूम से उठकर कहीं संग्रहालय की वस्तु बन कर न रह जाये ।

सुभाष चन्द्र अरोड़ा

%d bloggers like this: