सी.बी.आई. मुरैना आई, भ्रष्‍टाचार, गब न, रिश्‍वतखोरी के खिलाफ छेड़ी मैद ानी जंग, चम्‍बल में हडकम्‍प, रातो रा त पड़े छापे


सी.बी.आई. मुरैना आई, भ्रष्‍टाचार, गबन, रिश्‍वतखोरी के खिलाफ छेड़ी मैदानी जंग, चम्‍बल में हडकम्‍प, रातो रात पड़े छापे

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’ आनन्‍द’ एवं असलम खान

मुरैना 26 सितम्‍बर 09, सी.बी.आई की मध्‍यप्रदेश शाखा ने भ्रष्‍टाचार, गबन और रिश्‍वतखोरी जैसे मामलों में आम जनता से जागृत, सचेत होने और सीधे सी.बी.आई से इसकी शिकायतें करने हेतु मुरैना में 23 सितम्‍बर को जागरूकता तथा सम्‍पर्क शिविर का आयोजन यहॉं कलेक्‍ट्रेट परिसर के डी.आर.डी.ए. हॉल में किया ।

सी.बी.आई. की मध्‍यप्रदेश शाखा के एस.पी. श्री योगेन्‍द्र कोयल और उनकी टीम सहित मुरैना के सी.एस.पी. श्री कमल मौर्य, जिले के पत्रकारगण तथा कुछ शिकायतकर्ता मौके पर मौजूद थे । सी.बी.आई भोपाल के एस.पी. श्री योगेन्‍द्र कोयल पत्रकारों से रूबरू होकर सी.बी.आई के कामकाज और कार्यप्रणाली पर विस्‍तृत प्रकाश डालते हुये पत्रकारों के सवालों के उत्‍तर भी देते रहे साथ ही मौके पर ही शिकायत कर्ताओं के आवेदन भी ग्रहण करते रहे ।

सी.बी.आई के मुरैना आने की खबर अंत तक गोपनीय रहने से यद्यपि अधिक शिकायत कर्ता वहॉं नहीं पहुँच सके लेकिन फिर भी दो शिकायत कर्ताओं ने अपने शिकायती आवेदन श्री कोयल को दिये ।

23 सितम्‍बर को ही भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष एवं मुरैना सांसद नरेन्‍द्र सिंह तोमर के अनेक व्‍यस्‍तता भरे कार्यक्रमों के कारण जहॉं प्रशासन और महत्‍वपूर्ण पुलिस अधिकारी इस खास मौके से वंचित रहे वहीं इतने महत्‍वपूर्ण शिविर को अंतिम समय तक गोपनीय रखे जाने से आम नागरिकों को भी इसकी भनक नहीं लग सकी ।

श्री कोयल ने सी.बी.आई द्वारा भ्रष्‍टाचार, गबन, और रिश्‍वतखोरी जैसे मामलों में पत्रकारों से चर्चा करते हुये उन्‍हें बताया कि आम जनता यानि कोई भी आम नागरिक सीधे सी.बी.आई को शिकायत कर सकता है तथा उन्‍होनें अपने फोन व मोबाइल नंबर एवं ई मेल पते भी पत्रकारों को उपलब्‍ध कराये एवं जनता के लिये इन्‍हें प्रकाशित कर सार्वजनिक करने का आह्वान भी किया । श्री कोयल ने बताया कि ये नंबर 24 घण्‍टे चालू रहते हैं और किसी भी समय उनसे कोई भी सम्‍पर्क कर सकता है ।

सी.बी.आई की कार्यप्रणाली और भ्रष्‍टाचार विरोधी मुहिम

श्री योगेन्‍द्र कोयल ने भारत सरकार और सी.बी.आई. द्वारा छेड़े गये भ्रष्‍टाचार, रिश्‍वतखोरी और गबन जैसे मामलों के खिलाफ मैदानी अभियान की भूमिका व कार्यप्रणाली पर विस्‍तृत प्रकाश डालते हुये बताया कि केन्‍द्र सरकार के किसी भी कार्यालय, केन्‍द्र सरकार के किसी लोक उपक्रम, कार्पोरेट सेक्टर, लोक उद्यम, केन्‍द्र सरकार के किसी भी विभाग, बीमा, बैंक, डाकघर , रेल्‍वे, आयकर, क्रेडिटकार्ड, केन्‍द्र सरकार की योजनाओं, भारत सरकार द्वारा सीधे अनुदानित स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं के मामलों में भ्रष्‍टाचार , गबन, एवं रिश्‍वतखोरी के मामले सीधे ही सी.बी.आई स्‍वयं हैण्‍डल करती है और त्‍वरित एवं तत्‍पर सीधी कार्यवाही करती है ।

राज्‍य सरकार के ऐसे सभी विभाग या कार्यालय जो कहीं से पार्शियली या अंशत: या सारत: केन्‍द्र सरकार से निधि संबद्ध या धन प्राप्‍त होकर संचालित, मानिटर्ड या प्रशासित है उनसे संबंधित मामले भी सी.बी.आई राज्‍य सरकार से सहबद्ध होकर हैण्‍छल करती है इनके भी भ्रष्‍टाचार, गबन और रिश्‍वत से जुड़ मामले सी.बी.आई को भेजे जा सकते हैं ।

राज्‍य सरकार के पिभागों, कार्यालयों, लोक उपक्रमों, लोक उद्यमों एवं लोक सेवाओं, अधिकारीयों कर्मचारीयों से जुड़े भ्रष्‍टाचार, गबन और रिश्‍वत के मामले भी सी.बी.आई. को भेजे जा सकते हैं, ऐसे मामलों में सी.बी.आई. अपने कव्‍हर नोट के साथ राज्‍य सरकार की संबंधित जॉच या अपराध जॉच एजेन्‍सी की ओर प्रकरण अग्रेषित कर राज्‍य सरकार की सम्‍बन्धित अपराध शाखा या जॉच एजेन्‍सी मसलन आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरो, लोक आयुक्‍त, या सतर्कता विभाग को त्‍वरित व तत्‍पर कार्यवाही करने के लिये आग्रह करती है तथा मामले के अंत तक उस पर नजर रखती है ।

श्री कोयल ने किसान क्रेडिट कार्ड , किसान ऋण योजनाओं, स्‍वरोजगार योजनाओं, बेरोजगारों के शोषण आदि से जुड़े मामले भी सी.बी.आई. को दिये जाने का आग्रह किया ।

मौके पर हुयी दो शिकायतें

सम्‍पर्क शिविर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान ही दो आवेदक श्री कोयल से मिले और अपनी शिकायतें उन्‍हें सौंपी । एक आवेदक पहले से ही अपनी शिकायत लिखित तौर पर तैयार कर के लाया था (संभवत: उसे पहले से ही सी.बी.आई के आने की जानकारी थी, वह पूरी तैयारी से आया था) दूसरा आवेदक एक महिला थी जिसे शायद अचानक जानकारी मिली थी और बिना तैयारी के आयी थी जिस पर श्री कोयल ने उसे अपनी शिकायत लिखित रूप से विवरण रूप में बताने का निर्देश दिया और उसने अपनी शिकायत वहीं जल्‍दी जल्‍दी लिखी और श्री कोयल को सौंपी ।

लालौर मुरैना के सत्‍यनारायण शर्मा ने अपनी शिकायत सौंपते हुये बताया कि उनके नाम पर उनकी जमीन को मार्टगेज कर किसी ने यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया से 2 जाख रूपये का ऋण ले लिया है और उन्‍होंने खुद कभी बैंक से कोई ऋण नहीं लिया और अब उनसे जबरदस्‍ती बैंक द्वारा 1 लाख 65 हजार रूपये की पैनल्‍टी सहित ऋण वसूली की जा रही है, उनके द्वारा पुलिस में एफ.आई.आर. भी दर्ज करायी गयी किन्‍तु आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुयी, पत्रकारों ने बताया कि मुरैना की बैंकों में यह आमतौर पर वर्षों से चल रहा है और ऐसे सैकड़ों मामले हैं जिनमें किसी के भी नाम पर किसी अन्‍य ने फर्जी ऋण निकाल लिये हैं जिसमें अंचल में अनेक दलाल सक्रिय है तथा बैंक प्रबंधन इसमें अपने दलालों के माध्‍यम से कूटरचना व जालसाजी करके किसी के भी नाम पर कोई भी ऋण निकाल लेता है । सी.बी.आई ने सारी टिप्‍स एवं पाइण्‍टस नोट कर लिये तथा सत्‍यनारायण शर्मा नामक किसान का मामला अपने संज्ञान में लेकर कार्यवाही के लिये ग्रहण कर लिया ।

कल्‍पना मुदगल नामक युवती ने अपनी शिकायत करते हुये बताया कि वह एक एन.जी.ओ. चलाती है (कल्‍पना मुदगल के एन.जी.ओं. के खिलाफ मुरैना के तत्‍काली कलेक्‍टर राधेश्‍याम जुलानिया ने फर्जी कार्यवाही कर अनुदान हड़पने और जालसाजी का मामला पुलिस में पंजीबद्ध कराया था यह मामला लंबित है) कल्‍पना मुदगल की शिकायत थी कि उसके एन.जी.ओं के बैंक खाते से उसी के एन.जी.ओं. के अन्‍य पदाधिकारीयों ने उसके फर्जी हस्‍ताक्षर बना कर पूरा बैंक खाता साफ कर दिया है, उसने मामले की पुलिस एफ.आई.आर. भी दर्ज करायी लेकिन अभी तक उसे न्‍याय नहीं मिला है ।

पत्रकारों ने की व्हिसिल ब्‍लोइंग

पत्रकारों ने श्री कोयल के साथ चर्चा में भाग लेते हुये कई मामलों की व्हिसिल ब्‍लोइंग की पत्रकारों ने श्री कोयल कों किसानों के सहकारी समितियों द्वारा वर्षों से फर्जी बीमों और क्‍लेम मांगने पर क्‍लेम न मिलने तथा बीमा कम्‍पनीयों द्वारा यह कहे जाने पर कि सम्‍बन्धित सहकारी समिति ने उनके यहॉं कोई पैसा नही जमा कराया के लम्‍बे चौड़ फर्जीवाड़े, स्‍कूल शिक्षा विभाग में छात्रों के फर्जी बीमा किये जाने और सरकारी स्‍कूलों के छात्रों को आज तक कभी कोई क्‍लेम न मिलने, जिला शिक्षा विभाग द्वारा बीमा कम्‍पनीयों से सांठगॉंठ कर लाखों करोड़ो छात्र बीमा के फर्जीवाड़े, एन.जी.ओ. मूवमेण्‍ट के नाम पर जिले की फर्जी स्‍वयंसेवी संस्‍थाओ द्वारा करोड़ों रू. फर्जीवाड़ा कर हड़पने उनके साथ भारत सरकार के और मध्‍यप्रदेश सरकार के अधिकारीयों से सीधे सांठगांठ कर करोड़ों रू. का प्रतिवर्ष फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट की ओर भी ध्‍यान आकर्षित कराया । इस सम्‍बन्‍ध में कुछ पत्रकारों ने सी.बी.आई. को साक्ष्‍य सबूत देने और भारत सरकार द्वारा फर्जी व फरार घोषित संस्‍थाओं को मुरैना में प्रशासन व राज्‍य सरकार के साथ कई कार्यक्रमों में कार्य करने की जानकारी भी उपलब्‍ध कराई तथा भारत सरकार एवं राज्‍य सरकार से अनुदानित स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 के तहत कार्यवाही न करने, अपनी सूचनायें व जानकारीयॉं सार्वजनिक न करने, इण्‍टरनेट पर प्रकाशित न करने फण्‍ड, पदाधिकारी, व हितग्राहीयों की सूची सार्वजनिक न किये जाने पर भी सी.बी.आई. को व्हिसिल ब्‍लोइंग की । इसके अलावा करीब दो दर्जन और भ्रष्‍टाचार, गबन तथा रिश्‍वत से जुड़े अपराधों की व्हिसिल ब्‍लोइंग की गयी ।

सायबर क्राइम पर मौन रहा

हालांकि सायबर क्राइम से जुड़े अपराध सी.बी.आई के हिट लिस्‍ट में हैं लेकिन मुरैना में सायबर क्राइम पर मौन छाया रहा और न पत्रकारों ने न सी.बी.आई ने इस विषय को चर्चा में लिया ।

पब्लिक नेटवर्क बनाने की मुहिम

सी.बी.आई. ने खास वजह बताते हुये कहा कि जिन जिलों में सी.बी.आई. का पर्याप्‍त नेटवर्क नहीं हैं वहॉं सी.बी.आई. अपना पब्लिक नेटवर्क तैयार कर रही है एक सक्रिय, सक्षम व सशक्‍त पब्लिक नेटवर्क तैयार करना जो कि सी.बी.आई. का सहयोगी नेटवर्क हो सी.बी.आई का प्रमुख उद्देश्‍य है तथा मुरैना जिला ऐसे ही एक जिला है जहॉं हमें अपना नेटवर्क खड़ा करना है और हमने आज इसकी इस सम्‍पर्क शिविर के साथ शुरूआत की है । हम जिला स्‍तरीय कार्यक्रम चला रहे हैं और आगे सभी जिलों में ऐसे कार्यक्रम चलाये जायेंगें, हम चाहते हैं कि भ्रष्‍टाचार, गबन और रिश्‍वतखोरी के खिलाफ लोग खुलकर मुखर होकर सामने आयें, सी.बी.आई. से जुड़ें ।

सी.बी.आई को करें शिकायत तभी मिटेगा भ्रष्‍टाचार

श्री कोयल ने कहा कि हर जगह भ्रष्‍टाचार है, गबन और रिश्‍वतखोरी है लेकिन जब त‍क आप हमें शिकायत नहीं करेंगे, सुराग या साक्ष्‍य नहीं देंगे तब तक हम कार्यवाही कर पाने में असमर्थ रहते हैं हमें आप खबर दीजिये या सुराग दीजिये हम कार्यवाही करेंगें । श्री कोयल ने यहॉं तक कहा कि आप तो बस हमें सुरागी संकेत दे दीजिये बकाया काम हम कर लेंगे ।

चड्डी गीली हो जाती है सी.बी.आई के नाम से

एक पत्रकार द्वारा बार बार कई बार यह पूछे जाने और दोहराये जाने पर कि साहब पुलिस के नाम से तो लोगों को पसीने आते हैं लेकिन आपके नाम से तो आदमी की सीधी चड्डी गीली हो जाती है अगर कोई किसी की झूठी खबर आपको दे दे तो कोई तो मुफत में ही मारा जायेगा और उसकी चड्डी गीली हो जायेगी । इस पर श्री कोयल ने पहले तो कोई जवाब देना उचित नहीं समझा लेकिन बार बार पूछे जाने पर उन्‍होंने बताया कि हम हर खबर का हर सूचना का गोपनीय तरीके से पहले सत्‍यापन कराते हैं और सत्‍यता की सुगंध पाने के बाद ही कार्यवाही करते हैं और फिर कार्यवाही में देर नहीं लगाते । सबूत बटोरना हमारा काम है हमारे शिकायत कर्ता का नहीं और यदि इसके बाद भी अगर सूचना गलत पायी गयी तो हम अपनी कमजोरी इसे मानते हैं अपने सूचनाकर्ता या शिकायतकर्ता की नहीं और हम अपने खबर देने वाले को सुरक्षा व संरक्षण देते हैं पुलिस की तरह उसे उल्‍टा नहीं पुलिस केस में फंसा देते । उल्‍लेखनीय है कि सम्‍बन्धित पत्रकार प्रसिद्ध वकील भी था और अनेक भ्रष्‍टों का संरक्षक एवं शासकीय कम्‍पनीयों तथा सी.बीआई के निशाने पर कम्‍पनीयों, विभागों व अधिकारीयों का अभिभाषक है । पत्रकार की चिन्‍ता ताड़ते हुये ग्‍वालियर टाइम्‍स से सी.बी.आई. के एक अधिकारी ने अलग से गोपनीय चर्चा में अंतत: पूछ ही लिया कि यह श्रीमान कहीं किसी निशाने से तो नहीं जुड़े है इनकी चड्डी गीली क्‍यों हो रही है ।

रातोंरात मचा हड़कम्‍प और धड़ाधड़ हुयी छापेमारी

सी.बी.आई की शहर और अंचल में हरकत की खबर से मुरैना के कई सरकारी विभागों और कार्यालयों में हड़कम्‍प मच गया । और मुरैना सांसद नरेन्‍द्र सिंह तोमर के शाम तक चले कार्यक्रमों से फारिग होने के बाद कई विभागों ने फटाफट अपने रिकार्ड खंगालने और फूंकने तथा ओ.के करना शुरू कर दिये । रात 9 बजे से रात 1 बजे तक कई स्‍वयंसेवी अनुदानित संस्‍थाओं के कार्यालयों, छात्रावासों और संस्‍थाओं पर प्रशासन छापेमारी करता रहा । पिछले तीन दिन से चल रहा छापा मारी एपीसोड और एन.जी.ओं. की खाना तलाशी अभी तक जारी है । सूत्र बताते हैं कि दो चार एन.जी.ओं. लपेट में आभी गये हैं । एन.जी.ओ; की खाना तलाशी के लिये विशेष तौर पर पेजीयक फर्म्‍स एवं संस्‍थायें म.प्र ग्‍वालियर भी टीम के साथ घूम रहे है , उधर खबर है कि सी.बी.आई गोपनीय तौर पर अभी चम्‍बल में ही डेरा डाले हुये है और ग्‍वालियर चम्‍बल में कई मामलों के सुराग टटोल रही है ।

सी.बी.आई के सम्‍पर्क्‍ पते कैसे करें शिकायत

समाचार काफी विस्‍तृत हो जाने के कारण हम सी.बी.आई के सम्‍पर्क पते व सम्‍पर्क एवं शिकायत के तरीके पृथक से देंगें तथा वेबसाइट पर सी.बी.आई से सम्‍पर्क लिंक और जानकारी भी उपलब्‍ध करायेंगे साथ ही मातृ संस्‍था प्रसिद्ध स्‍वयंसेवी संस्‍था नेशनल नोबल यूथ अकादमी एवं ग्‍वालियर टाइम्‍स संयुक्‍त रूप से चम्‍बल में सी.बी.आई. को भ्रष्‍टाचार गबन और रिश्‍वत से जुड़ी शिकायतों को पहुँचाने के निये पर्चा पेम्‍पलेट छपवा कर बंटवाने ग्रामीण शिविर आदि लगा कर भी जागस्‍कता व प्रचार प्रसार करेंगें जिसमें सी.बी.आई को शिकायत करने तथा संपर्क तरीके आदि प्रमुख रूप से प्रचारित किये जायेंगे । अधिक जानकारी के लिये लॉगइन करें – www.gwaliortimes.com Or On Direct C.B.I. Website www.cbi.gov.in

एकता कपूर ने बालाजी टेलीफिल्‍म्‍स के नये प्रोजेक्‍ट के लिये नये चेहरे फेसबुक से चुने


एकता कपूर ने बालाजी टेलीफिल्‍म्‍स के नये प्रोजेक्‍ट के लिये नये चेहरे फेसबुक से चुने

ग्‍वालियर 15 सितम्‍बर 09 , फेसबुक पर नामी गिरामी हस्तियों में जहॉं वे पब्लिक से न केवल सीधे रूबरू होतीं हैं बल्कि कई राजनैतिक हस्तियॉ मसलन ग्‍वालियर सांसद श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, समाजवादी पार्टी की उ.प्र. की राजनेता मीरा शुक्‍ला सहित अनेक केन्‍द्रीय मंत्री व प्रदेश सरकारों के मंत्री लोगों से बाकायदा सलाह मशविरा और राय भी ग्रहण करते हैं तथा अपने द्वारा किये जा रहे या किये गये कार्यों से भी लोगों को अवगत कराते हैं इसके साथ ही उनसे सीधे बातचीत कर उनकी समस्‍याओं और परेशानीयों का भी निदान करते हैं ।

ग्‍वालियर सांसद श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया तो प्रतिदिन लगातार ही अनेक (हजारों) लोगों से फेसबुक पर सीधे रूबरू होकर वार्ता करतीं हैं ।

अन्‍य लोकप्रिय व म‍हत्‍वपूर्ण हस्तियों में कई शीर्ष फिल्‍म सितारे भी फेसबुक पर रोजाना अभिगमन करते हैं, जिसमें ऐश्‍वर्या रॉय, रिया, एकता कपूर (बालाजी टेली फिल्‍म्स), सहित अनेक शीर्ष अभिनेता भी यहॉं लोगों के सतत सम्‍पर्क में रहते हैं ।

आज प्रसिद्ध फिल्‍म अभिनेता जीतेन्‍द्र की पुत्री एकता कपूर ने अपनी घोषणा में कहा है कि फेसबुक पर अपने मित्रों व फैन्‍स में से ही उन्‍होंने अपने आगामी प्रोजेक्‍टस के लिये नये चेहरों को चुना है और शीघ्र ही इन चयनित लोगों को बालाजी टेलीफिल्‍म्‍स का आमंत्रण पत्र मिलने जा रहा है ।

एकता कपूर जी द्वारा की गयी घोषणा हम यहॉं नीचे यथावत दे रहे हैं । जो कि हमारी फेसबुक प्रोफाइल पर एकता जी की ओर से आयी है – हम एकता जी को उनके आगामी नवीन प्रोजेक्‍टस की रिकार्ड सफलता के लिये ग्‍वालियर टाइम्‍स की टीम ओर से हार्दिक शुभकामनायें व बधाई देते हैं ।

We’ve selected new faces for our new project&Iam very glad to tell that most of them are from my face book friends n fans. Nowmy company is going to contact these selected persons very soon on contactdetails provided by them. – एकता कपूर

साम्प्रदायिकता से कम खतरनाक नहीं है भ्रष्टाचार का दानव


साम्प्रदायिकता से कम खतरनाक नहीं है भ्रष्टाचार का दानव

तनवीर जांफरी

email: tanveerjafri1@gmail.com tanveerjafri58@gmail.com tanveerjafriamb@gmail.com 163011, महावीर नगर, अम्बाला शहर। हरियाणा , फोन : 0171-2535628 , मो: 098962-19228

विश्‍व के सबसे बड़े र्ध्‍म निरपेश लोकतंत्र इस भारत देश में कई मानव निर्मित समस्याएं ऐसी हैं जो इस देश के विकास के लिए बाधा साबित हो रही हैं। इनमें जहां साम्प्रदायिक शक्तियों का विस्तार इस देश की एक अहम समस्या है, वहीं भारतवर्ष में लगभग सभी क्षेत्रों में फैला भ्रष्टाचार भी साम्प्रदायिकता से कम खतरनाक नहीं है। हम भारतवासी केवल इस बात के लिए ंखुदा के शुक्रगुंजार हो सकते हैं कि सम्भवत: अब तक इस देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश व लोकसभा अध्यक्ष जैसे पदों पर ऐसे कोई व्यक्ति विराजमान नहीं हुए जिनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों। अन्यथा भ्रष्टाचार के प्रसार तथा विस्तार की सीमाओं को तो शायद आंका ही नहीं जा सकता।

हमारा देश भारतीय संसद में उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के विरुद्ध महाभियोग चलते देख चुका है। हमने एक राज्यपाल के विमान की दुर्घटना के समय आसमान से भारतीय मुद्रा की बरसात होते देखी है। भारतीय मीडिया स्टिंग ऑप्रेशन के द्वारा केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय राजनैतिक दल के अध्यक्ष एवं सांसदों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ चुका है। यहां प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जा चुका है। केंद्रीय मंत्री, अनेक राज्य मंत्री, सांसद, विधायक, अंफसरशाही से जुड़े लोग आदि सभी भ्रष्टाचार के आरोपी देखे जा सकते हैं। ऐसे में यह प्रश् उठना स्वाभाविक है कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम तथा प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जैसे देश के चंद ंजिम्मेदार लोगों द्वारा देश में फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवांज उठाने का आंखिर कुछ सकारात्मक परिणाम मिलेगा भी अथवा नहीं। भ्रष्टाचार की जड़ें इस देश में इतनी गहरी हो चुकी हैं कि कुछ सरकारी विभागों में तो इसे यथार्थ के रूप में स्वीकार कर लिया गया है। ऐसे विभागों में अब हालत यहां तक हो गई है कि रिश्वतंखोर व भ्रष्ट व्यक्ति ही योग्य अथवा ‘कमाऊपूत’ समझा जाता है, जबकि एक ईमानदार अधिकारी को सनकी अथवा पागल व्यक्ति की संज्ञा तक दे दी जाती है। कानपुर के भगवती प्रसाद दीक्षित का प्रकरण देश के लगभग सभी सुधी लोगों को पता है कि किस प्रकार भ्रष्टाचार में नीचे से लेकर ऊपर तक डूबे सरकारी तंत्र ने दीक्षित जैसे एक ईमानदार व कर्मठ इंजीनियर तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त से सख्त कदम उठाने की हिम्मत रखने वाले इस अधिकारी को मानसिक रोगी तथा पागल बना दिया। और आंखिकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करते-करते वह व्यक्ति इस संसार से ही चल बसा। इसके अतिरिक्त सत्येंद्र दूबे, के मंजूनाथन व मनोज गुप्ता जैसे और न जाने कितने ऐसे उदाहरण मिलेंगे जिन्हें भ्रष्टाचारियों ने अपने रास्ते का कांटा समझकर उनकी हत्या कर दी हो। निश्चित रूप से भ्रष्टाचारियों के हौसले केवल निम् स्तर पर भ्रष्टाचार फैलने मात्र से ही इतने नहीं बढ़ जाते कि बात हत्या या सीनांजोरी तक आ जाए। जब सिर से पैर तक पूरा का पूरा तंत्र ही भ्रष्टाचार में संलिप्त होता है, तभी भ्रष्टाचारियों के हौसले इस हद तक बढ़ पाते हैं।

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दिनों केंद्रीय जांच ब्यूरो तथा देश के सभी राज्यों की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों के एक सम्मेलन में संभवत: देश के पहले प्रधानमंत्री के रूप में बड़ी गंभीरता से देश में फैले भ्रष्टाचार पर अपनी बेबाक टिप्पणी देते हुए यह स्वीकार किया कि देश में व्यापक तौर पर यह धारणा बनी हुई है कि छोटे-मोटे मामलों में तो ंफौरन कार्रवाई होती है परन्तु ‘बड़ी मछलियां’ संजा से बच जाती हैं। उन्होंने कहा कि देश के आम लोगों में फैली इस धारणा को बदलने की ंजरूरत है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह भी कहा कि उच्चस्तर पर जो भ्रष्टाचार फैला है, उस पर सख्ती के साथ नंजर रखनी होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी मामलों में प्राथमिकता के आधार पर प्रत्येक आरोपों की निष्पक्ष रहकर तेंजी से सही-सही जांच होनी चाहिए। प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य के बाद देश के उन उच्चस्तरीय भ्रष्टाचारियों के चेहरों पर चिंता की लकीरें अवश्य खिंच गई हैं जो अपने पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार द्वारा धनार्जन करने तथा अपनी अगली नस्लों के वास्ते अकूत संपत्ति जुटाने में लगे रहते हैं।

देश के आम नागरिकों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस स्पष्टवादिता से भरे बयान को गंभीरता से लिया है तथा प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य के बाद निश्चित रूप से अब जनता की निगाहें इस ओर जा टिकी हैं कि देखें अब प्रधानमंत्री की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक जाल में सबसे पहली बड़ी मछली कौन सी फंसती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सांफगोई तथा कुछ कर गुंजरने के उनके हौसले को लेकर इस देश में कोई बहस नहीं है। यह बात गत् लोकसभा चुनावों में उस समय और प्रमाणित हो गई जबकि देश के मतदाताओं ने उन शक्तियों को ही राजनैतिक परिदृश्य से मिटा दिया जो मात्र सत्ता हासिल करने के लिए मनमोहन सिंह को ‘कमंजोर प्रधानमंत्री’ साबित करने के प्रयास कर रहे थे। राजनैतिक हल्ंकों में उनके सिख समुदाय से जुड़े होने को लेकर तरह-तरह की बातें की जाती हैं। परन्तु स्वयं मनमोहन सिंह ने पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान पंजाब के लुधियाना शहर में आयोजित एक विशाल जनसभा में सांफतौर पर यह कहा कि सर्वप्रथम मैं इस देश का प्रधानमंत्री हूं, उसके बाद मैं सिख हूं। उन्होंने यह भी कहा कि वे धर्म व राजनीति के मिश्रण के विरोधी हैं। जबकि उसी सभा में राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह को भारत का गौरव बताया था।

सत्तारूढ़ गठबंधन के सबसे बड़े दल की हैसियत रखने वाली कांग्रेस पार्टी ने पिछले चुनाव में देश की जनता को यह बताने की कोशिश की थी कि कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ है। निश्चित रूप से आज देश का आम आदमी इस नारे को क्रियान्वित होते हुए देखना चाहता है। और यदि देश का आम आदमी वास्तव में यह महसूस करता है कि सरकार उसके साथ खड़ी है तथा उसे न्याय मिल रहा है, तो वही आम जनता उस सरकार या राजनैतिक दल का साथ देने से भी परहेंज नहीं करती। इसका एक छोटा सा उदाहरण उत्तर प्रदेश में विगत् संसदीय चुनावों के दौरान देखा गया। उत्तर प्रदेश में उन 39 ंजिलों में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा जहां देश के बेरोंजगारों को रोंजगार मुहैया कराने वाली योजना ‘राष्ट्रीय रोंजगार गारंटी योजना’ (नरेगा) प्रथम चरण में लागू हुई थी। जिन-जिन क्षेत्रों में बेरोंजगारों को इस स्कीम के तहत पूरी पारदर्शिता से रोंजगार मिला तथा वर्षों के बाद जिन लोगों ने दो वक्त क़ी रोटी खाई तथा रोंजी रोटी के लिए उन्हें परदेस जाने से निजात मिली, ऐसे लोगों ने कांग्रेस पार्टी की ‘जय हो’ की आवांज से अपनी आवांज मिला दी।

दरअसल आज देश का आम आदमी सांफ सुथरा प्रशासनिक ढांचा, पादर्शी व्यवस्था तथा भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण देखना चाहता है। और निश्चित रूप से यह तभी संभव है जबकि भ्रष्टाचारियों को संरक्षण प्रदान करने वाले शीर्ष पर बैठे लोगों में भ्रष्टाचार समाप्त हो। भारतवर्ष में समस्या इस बात की है कि चाहे वह जीवन रक्षक दवाईयों अथवा खाद्य सामग्री में मिलावट करने वाला व्यक्ति हो, चाहे आर्थिक अपराध करने वाला बड़े से बड़ा व्यक्ति, चाहे आर्थिक अपराध करने वाला बड़े से बड़ा मास्टर माइंड या फिर कोई गैंगस्टर, पेशेवर अपराधी अथवा किसी अन्य बड़ी से बड़ी अपराधिक प्रवृत्ति में संलिप्त कोई व्यक्ति। ऐसे दुष्चरित्र लोगों को यहां ंफौरन ही बड़े से बड़ा राजनैतिक संरक्षण मिल जाता है। और इस राजनैतिक संरक्षण के बाद मध्यम व निम् स्तर के अधिकारी अपने आप लाचार व मजबूर बन जाते हैं। ऐसे में इन चंद ईमानदार अधिकारियों के समक्ष दो ही उपाय बचते हैं कि या तो वे उस उच्च श्रेणी के राजनैतिक हस्तक्षेप का सामना करते हुए अपने निलंबन अथवा नौकरी से हाथ धोने तक की नौबत का सामना करें, ऐसे भ्रष्ट नेटवर्क का कोपभाजन बनें या फिर उनकी नाजायंज बातें मानकर ंखुद भी भ्रष्टाचार के नेटवर्क के भागीदार बनें या उसकी ‘मुख्यधारा’ में शामिल हो जाएं। आज हम चीन की बढ़ती हुई तांकत से प्राय: चिंतित दिखाई देते हैं। परन्तु उनकी शक्ति तथा शासनप्रणाली का मूलमंत्र हम नंजरअंदांज कर देते हैं। जनसंख्या नियंत्रण हेतु चीन सरकार द्वारा उठाए गए ंकदम से पूरी दुनिया वांकिंफ ही है। ठीक एक वर्ष पूर्व उसी चीन में दो ऐसे व्यक्तियों को फांसी की संजा दे दी गई थी जो जानलेवा नंकली दूध का नेटवर्क चलाते थे। परन्तु हमारे देश में न जाने कब से नंकली दूध, ंजहरीली सब्ंजियां, मिलावटी रसद सामग्रियां और यहां तक कि अब तो मिलावटी ंखून तक भारतीय बांजार में उपलब्ध होने के समाचार मिल रहे हैं। यंकीनन बाड़ ही खेतों को खा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की न केवल चिंताएं वाजिब व न्यायसंगत हैं बल्कि उनकी चिंताओं को कार्यरूप दिए जाने की भी तत्काल ंजरूरत है।

आशा की जानी चाहिए कि डॉ मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए देश के उच्च पदों पर बैठे ईमानदार अधिकारियों के हौसले बुलंद होंगे तथा देश के विकास का एवं आम आदमी को न्याय देने का हौसला रखने वाले अधिकारी बड़ी मछलियों को यथाशीघ्र अपने भ्रष्टाचार निरोधक जाल में फंसाएंगे। शायद तभी आम लोग इस सरकार की ‘जय हो’ कर सकेंगे।

तनवीर जांफरी

भ्रष्‍टाचार से निर्णायक युद्ध करेग ी केन्‍द्र सरकार: सी.बी.आई. 71 नयी अ दालतें खोलेगी., अनुच्छेद 311 में स ंशोधन किया जाएगा – वीरप्पा मोइली, वि धि मंत्री.


भ्रष्‍टाचार से निर्णायक युद्ध करेगी केन्‍द्र सरकार: सी.बी.आई. 71 नयी अदालतें खोलेगी., अनुच्छेद 311 में संशोधन किया जाएगा – वीरप्पा मोइली, विधि मंत्री.

ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 पर अमल होगा

भ्रष्‍ट कर्मचारीयों की जायदाद कुर्क की जायेगी

भ्रष्‍टाचार निरोधक कानून का दायरा बढ़ेगा

निजी क्षेत्र भी आयेगा भ्रष्‍टाचार निरोधक ,एजेन्सियों के दायरे में

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सरकार ने भ्रष्टाचार मिटाने के लिए सभी से मिलकर काम करने को कहा है। भ्रष्टाचार की बुराई से लड़ने के बारे में दो दिन की विचार गोष्ठी के समापन सत्र में आज नई दिल्ली में केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि भले ही भ्रष्टाचार दूर करने के लिए कई उपाय किए जा चुके हैं, लेकिन और बहुत से सुधार किए जाने की जरूरत है। इनमें भ्रष्टाचार के रोकथाम के कानून का दायरा बढ़ाने, भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों की जायदाद कुर्क करने, भ्रष्टाचार की सूचना देने वालों को सुरक्षा प्रदान करने, झूठे दावों के बारे में कानून लागू करने और राष्ट्रीय स्तर पर बहुसदस्यीय लोकपाल व्यवस्था स्थापित करने जैसे उपाय शामिल हैं।

श्री मोइली ने स्वीकार किया कि संविधान का अनुच्छेद-311 भ्रष्ट अधिकारियों को अदालत के कठघरे तक लाने में एक बाधा है। उन्होंने बताया कि ये मामला प्रधानमंत्री के साथ उठाया गया है और इस अनुच्छेद में संशोधन की बात रखी गई है। श्री मोइली ने यह भी बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए सीबीआई की 71 नई अदालतें स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि संपूर्ण न्यायिक सुधारों की रूप-रेखा नवंबर तक तैयार हो जाएगी। इसमें मुकदमों का जल्दी फैसला करने और पूरा न्याय करने की भावना पर बल दिया जाएगा। न्यायाधीशों के रिक्त पद भरने के अलावा मुकदमों का अदालतों के बाहर फैसला करने के विभिन्न तरीकों को भी बल दिया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि ग्राम न्यायालय अधिनियम-2008 इस साल गांधी जयंती से लागू कर लिया जाएगा ताकि गांवों के स्तर से ही वैकल्पिक न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके। अदालतों में लंबित पड़े मामलों की संख्या अगले दो साल में काफी कम करने का संकल्प व्यक्त करते हुए श्री मोइली ने बताया कि न्यायपालिका का दायित्व सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक न्यायाधीश जांच विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। विधि मंत्री ने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र की एक संधि के अनुरूप निजी क्षेत्र को भी भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है।

दो दिन की इस विचार गोष्ठी का आयोजन केंद्रीय जांच ब्यूरो तथा राष्ट्रीय अपराध तंत्र और अपराध विज्ञान संस्थान ने मिलकर किया था। इसमें भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए आधुनिक टैक्नॉलॉजी के इस्तेमाल सहित विभिन्न उपायों के बारे में विचार-विमर्श किया गया।

शनि का ग्रह परिवर्तन, भावी परिवर्तन और उथल पुथल का तेज संकेत 9 सितम्‍बर को शनि का सिंह राशि से कन्‍या राशि म ें प्रवेश


शनि का ग्रह परिवर्तन, भावी परिवर्तन और उथल पुथल का तेज संकेत

9 सितम्‍बर को शनि का सिंह राशि से कन्‍या राशि में प्रवेश

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

कर्क राशि के जातक पिछले सात आठ साल से झेल रहे शनि की साढ़े साती से 9 सितम्‍बर 09 को अंतत: मुक्‍त हो जायेंगें, तथा तुला राशि पर साढ़े साती चालू हो जायेगी । दरअसल सबसे धीमी चाल तेज तासीर और असर वाले शनिदेव 9 सितम्‍बर 2009 को राशि बदल कर सिंह राशि से कन्‍या राशि में प्रवेश करेंगे ।

शनिदेव की विशेषता है कि वे जिस राशि में होते हैं उससे एक राशि आगे और एक राशि पीछे तक अपना असर विस्‍तारित कर रखते हैं । शनिदेव यूं तो गणितीय तौर पर एक राशि पर सामान्‍यत: ढाई साल तक विद्यमान रह कर गोचर करते हैं , किन्‍तु व्‍यावहारिक रूप से ऐसा कम ही होता है, शनिदेव अपनी वक्री व अतिचारी चाल से चलते कई बार वर्तमान राशि से पीछे की राशि तक चले जाते हैं परिणाम स्‍वरूप कभी कभी एक ही राशि पर तीन से साढे तीन चार साल तक टिके रहते हैं । शनि की वक्री चाल अक्‍सर हर साल आती है शायद ही कुछ अपवाद स्‍वरूप एकाध साल होता है जब शनि देव वक्री गति से नहीं चलते फलस्‍वरूप कभी कभी जितना आगे जाते है, उससे कहीं अधिक पीछे चले जाते हैं ।

शनिदेव की साढ़े साती से अक्‍सर लोग भरी भयभीत व आतंकित रहते हैं लेकिन ऐसा नहीं है, कुछ लोग सबसे अधिक फायदा शनि की साढ़े साती में ही उठाते हैं । उदाहरण के तौर पर जब पिछली बार वृश्चिक और तुला पर साढ़े साती आयी थी तो रोमानिया नामक देश के अतुलनीय वैभव से युक्‍त सम्राट निकोलाई चाऊशेस्‍कू की सपरिवार सार्वजनिक दण्‍ड स्‍व्‍ारूप हत्‍या कर जनता ने उनके महल पर कब्‍जा कर लिया और उनके लगभग पौन सदी के राज्‍य का खात्‍मा कर दिया । रूस पर उसी समय समस्‍यायें टूटना शुरू हो गयीं । एन.टी.रामाराव जैसे नेता ने इन्‍हीं दिनों में काफी संकट झेले अंतत: उनका स्‍वर्गवास भी हो गया ।

इसक बाद कुम्‍भ व मकर पर साढ़े साती लगते ही सोमालिया में हालात इतने बदतर हो गये कि भुखमरी में कई लोग अपने ही बच्‍चों को मार कर उनका मॉंस खने जैसी खबरों से लोगों के दिल हिल गये वहीं उसी दरम्‍यान इसी साढ़े साती के काल में ‘’सोवियत संघ’’ जैसी विश्‍व महाशक्ति का विखण्‍डन होकर नक्‍शा ही मिट कर अस्तित्‍व समाप्‍त हो गया और एक चक्रवर्ती वैभवशाली साम्राज्‍य टुकड़ों में टूटकर तिनका तिनका बिखर कर एक कमजोर राष्‍ट्र मात्र बन कर रह गया ।

मीन राशि की साढ़ेसाती में कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह म.प्र. कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष बने और इसी साढ़े साती के दरम्‍यान ही वे म.प्र. के मुख्‍यमंत्री भी बने ।

मीन की साढ़े साती के साथ ही अगली राशि मंगल के स्‍वामित्‍वाधीन मेष पर साढ़े साती का चरण चालू होते ही देश में भरी राजनीतिक उथलपुथल हुयी । और मेष राशि की कई हस्तियां जहॉं अचानक धरती से उठकर आसमान चूम गयीं वहीं आसमान में व्‍याप्‍त कई सितारे धरती पर मुँह के बल आ गिरे और कई संकटो व जंजालों में फंस गये ।

मेष राशि के इन्‍द्र कुमार गुजराल प्रधनमंत्री बन गये, लालकृष्‍ण आडवाणी, अटल बिहारी, उमाभारती जैसे लोग इसी दरम्‍यान गर्दिशों से निकल कर चर्चाओं में आ गये । वही मेष की साढ़े साती में ही लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में फंस गये और राजगद्दी से हाथ धो बैठे और कई संकटों में उलझ गये । मेष की साढ़े साती में ही अर्जुन सिंह पी.वी.नरसिंहाराव सरकार से इस्‍तीफा दे बैठे और कांग्रेस से भी बाहर हो गये , इसी साढ़े साती में चन्‍द्रबाबू नायडू भी मेष राशि के होकर मुख्‍यमंत्री बन गये, मेष की साढ़े साती में ही अटलबिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री बन गये, लालकृष्‍ण आडवाणी मंत्री और उपप्रधानमंत्री बन गये, उमाभारती केन्‍द्रीय मंत्री बन बैठीं ।

अटलबिहारी बाजपेयी के लिये वक्री शनि बहुत अच्‍छा फलप्रद रहता आया वहीं मार्गी शनि के समय वे सदा झंझटों में उलझे रहे । मेष की साढ़े साती समाप्‍त होने के साथ ही मेष राशि वाले भाजपा नेताओं की सत्‍ता छिन गयी वहीं मध्‍यप्रदेश में भी मेष की साढ़ेसाती काल में मुख्‍यमंत्री बनीं उमाभारती को भी नाटकीय ढंग से राजगद्दी से हाथ धोना पड़ा और अगली राशि वृष पर साढ़ेसाती के चलते बाबूलाल गौर म.प्र. के मुख्‍यमंत्री बन गये ।

मेष राशि की साढ़ेसाती काल में ही मेष राशि के राष्‍ट्रों में भी युद्ध छिडे अमरीका, ईराक, अफगानिस्‍तान और ओसामा बिन लादेन सभी मेष राशि के ही जातक हैं, इनका पूरा घटनाक्रम मेष राशि की साढ़ेसाती के दरम्‍यान ही घटित हुआ ।

शनि का वक्री होना म.प्र. के मुख्‍यमंत्री रह चुके बाबूलाल गौर को नही फला और उनका मुख्‍यमंत्री पद चला गया यदि वे किसी तरह शनि संतुष्टि का उपाय साध कर शनि के मार्गी होने तक टिके रहते तो उनका बाल बांका नहीं होता तथा वे मुख्‍यमंत्री बने रहते । तथा शिवराज सिंह को लघु कल्‍याणी ढैया का या उनकी जन्‍म राशि (ज्ञात नहीं) पर संभवत: साढ़ेसाती के कारण आया राजयोग बंध जाता यानि टल जाता ।

वर्तमान में चल रहा कर्क की साढ़ेसाती का दौर 9 सितम्‍बर को समाप्‍त होकर कई अच्‍छे परिवर्तन होने की उम्‍मीद है क्‍योंकि कर्क राशि का गहरा सम्‍बन्‍ध नक्षत्र सम्राट पुष्‍य नक्षत्र, विप्र वर्ण, देव योन से होकर स्‍वामी चन्‍द्रमा है । कर्क राशि के जातक देवता तुल्य मान्‍य किये गये हैं, संकट से दौर से गुजर रहे इस राशि के जातक अब भारी राहत महसूस करेंगें वहीं यदि साढ़े साती के कारण कर्क राशि के कुछ जातक जो अब तक मलाई मार रहे थे उन्‍हें अब अपना इन्‍तजाम कर लेना चाहिये ।

अब वर्तमान साढ़े साती शनि की दशा 10 सितम्‍बर 09 से तुला, सिंह व कन्‍या पर चलेगी जिसमें सिंह पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण और, कन्‍या पर दूसरा चरण एवं तुला पर पहला चरण शुरू होगा ।

वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राशि के हैं वे भी सिंह की राशि पर साढ़े साती आते ही प्रधानमंत्री सुख पा गये । लेकिन सिंह राशि का साढ़ेसाती का अंतिम चरण होने से अब उनका यह सुख लम्‍बे समय तक नहीं चलेगा । ज्योतिषीय हिसाब से किसी न किसी कारण से वक्री शनि आने पर (13 जनवरी 2010) मकर संक्रान्ति से मुसीबतों का दौर चालू होगा । और बाद में शनि के मार्गी होते ही मुसीबतें समाप्‍त भी हो जायेगा । लेकिन सिंह की साढे साती समाप्‍त होने के बाद वे प्रधानमंत्री नहीं रहेंगें , ज्‍योतिषीय तौर पर यह तय है । सिंह की साढ़े साती समाप्ति के साथ ही वृश्चिक राशि पर साढ़े साती शुरू हो जायेगी । तो यह तय है कि अगली सत्‍ता पर या राजगद्दियों पर तुला, वृश्चिक और कन्‍या राशि के लोग काबिज होंगे ।

ग्वालियर के एफ.एम. स्टेशन 91.9 लेमन न े बनाया लिम्का बुक में रिकॉर्ड


ग्वालियर के एफ.एम. स्टेशन 91.9 लेमन ने बनाया लिम्का बुक में रिकॉर्ड

ग्वालियर: 7 सितम्बर 09, हिम्मते मर्दा, मददे ख़ुदा। यदि इंसान ठान ले तो वह कुछ भी कर सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है ग्वालियर के प्रसिध्द एफ. एम. सुनो लेमन 91.9 एफ एम रसीला। सुनो लेमन 91.9 एफ एम द्वारा अपनी दूसरी वर्षगांठ पर शुरू किया गया कैम्पेन बनेगा क्या? अब बनेगा क्या? ने होकर बन गया हो गया है।

31 अगस्त की मध्य रात्रि शुरू हुआ कैम्पेन बनेगा क्या ने 7 सितम्बर की मध्य रात्रि को अपना सफर पूरा किया। इस तरह लेमन 91.9 एफ एम ने अपना नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करवाया।

बनेगा क्या? की शुरूआत ग्वालियर के महापौर श्री विवेक शेजवलकर जी के कर कमलों से हुई। इससे पहले लेमन टीम द्वारा इस कैम्पने के पूरा होने के लिए सभी धर्म स्थलों पर जाकर बनेगा क्या? की सफलता के लिए कामना की गई।

1 से 7 सितम्बर तक सुनो लेमन 91.9 एफ एम द्वारा इस सफर में ग्वालियर के हर कोने को कवर किया गया। लश्कर, मुरार, हजीरा, ग्वालियर आदि सभी जगहों पर लेमन एफ एम की टीम गई। इस दौरान ग्वालियर के सभी लोगों की समस्याओं को मोबाइल स्टूडियो वैन में बैठे आर. जे. ने स्वयं देखा और लेमन एफ एम के जरिए इन समस्याओं को उठाया। इस दौरान बीजेपी की सांसद यशोधरा राजे सिंधिया, टांसपोर्ट कमिश्नर एन के त्रिपाठी, एस पी ए. साई. मनोहर, सैंटल जेल के जेलर हरेंद्र सिंह, आर. टी. ओ. अशोक सिंह राठौर, सभापति बिजेंद्र सिंह जादौन, मदाखलत अधिकारी दिग्विजय सिंह जादौन, रिटायर्ड ए डी एम एस डी शर्मा आदि ने शिरकत की।

वहीं दूसरी तरफ साधारण जनता को भी लेमन टीम द्वारा चलाए जा रहे अभियान बनेगा क्या? के जरिए अपनी आवाज़ उठाने का मौका मिला।

वहीं दूसरी और निम्न वर्ग के श्रोता जो सिर्फ सुना करते थे, परमानैंटली लेमन 91.9 एफ एम से जुड़ गए। ग्वालियर के श्रोताओं से रूबरू होकर एफ.एम. रेडियो की टीम द्वारा ग्वालियर की समस्याओं को जाना गया। हर कोई यह चाहता है कि ग्वालियर विकास करे। विकासशील शहर से विकसित शहर बनें।

आखिरी दिन लेमन रसीला की मोबाइल स्टूडियो वैन में यशोधरा राजे सिंधिया से रूचि और पिया ने बातचीत की।

बनेगा क्या ? कैम्पेन पूरा होने पर सुनो लेमन द्वारा बाड़े पर रंगारंग कार्यक्रम, लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस में दर्ज

ग्वालियर: 7 सितम्‍बर 09, सुनो लेमन 91.9 एफ एम द्वारा महाराज बाड़े पर किया गया कार्यक्रम ग्वालियर की जनता के लिए बहुत ही रॉकिंग रहा। मैड ओ वॉट बैंड की परफोरमैंस, रॉकिंग गानों पर थिरकते कदम इस बात को ब्यान कर रहे थे लेमन द्वारा शुरू किया गया कैम्पेन बनेगा क्या? में वाकई ग्वालियर की पूरी जनता ने आनन्द लिया। जैसे जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ता गया वैसे वैसे वहां उपस्थित लोगों में एनर्जी बढ़ती गई। हम्मा हम्मा, समर ऑफ69, यू हीं चला चल राही, दिल से, जय हो, रॉक ऑन मूवी का फेमस साँग मेरी लाँडी का एक बिल आदि गानों पर महाराज बाड़े पर उपस्थित ग्वायिलर की जनता को थिरकने पर मजबूर कर दिया। बीच बीच में आ रहे ब्रेक के दौरान आर जे वेद ने अपने हास्य अंदाज में विभिन्न कलाकारों जैसे नाना पाटेकर, सनी दयोल, धर्मेन्द्र, शत्रुघ्न सिन्हा, राखी आदि अनेक कलाकारों की मिमिक्री कर कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया। इस कार्यक्रम के दौरान मुसाफिर रूद्र द्वारा अनेक सवाल भी पूछे गए और ढेर सारे प्राइज़ भी दिए गए। लेमन एफ एम द्वारा करवाए गए इस एफ एम में जनता के बीच से ही लोगों को चीफ गेस्ट बनाया गया।

ज्ञात रहे सुनो लेमन 91.9 एफ एम द्वारा 1 से 7 सितम्बर तक शुरू किया गया कैम्पेन बनेगा क्या? 7 तारीख को रात 12 बजे पूरा हो गया। इस दौरान लेमन एफ एम की टीम द्वारा पूरे ग्वालियर को कवर किया गया।

क्ार्यक्रम में लेमन टीम के सदस्य: स्टेशन डायरेक्टर: रूचि सिंह, दौलत सिंह चौहान, प्रोग्रामिंग मैनेजर: कैलाश शर्मा, मीडिया मैनेजर: सौरभ बवेजा, प्रोडक्शन हेड: संदीप राज शांडिल्य, सेल्स हेड: सुनील गोयल, मार्कीटिंग मैनेजर: प्रमोद जैन, दीपक जैन, इवेंट मैनेजर: रॉबिन सिंह उपस्थित थे।

लेमन एफ एम के आर. जें: आर जे रूचि, पिया, अरमान, रीचा, ध्रुव, सूरज, वेद ने मोबाइल स्टूडियो वैन से कार्यक्रम में हो रहे ताजा घटनाक्रम से लोगों को रूबरू करवाया।

विशेष लेख : ऊर्जा – राजीव गांधी ग्रा मीण विद्युतीकरण योजना – ग्रामीण क ्षेत्रों में नया उजाला


विशेष लेख : ऊर्जा – राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना – ग्रामीण क्षेत्रों में नया उजाला

ग्रामीण विद्युतीकरण को ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिये एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जाता है। यह अब सहज स्वीकार्य है कि बिजली अब एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता बन चुकी है और प्रत्येक घर में बिजली की सुविधा होनी ही चाहिए। ग्रामीण भारत में, व्यापक प्रभाव वाले आर्थिक और मानव विकास हेतु विद्युत आपूर्ति की आवश्कयता है। राष्ट्रीय विद्युत नीति में ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली देने की बात कही गई है। ग्रामीण विद्युतीकरण्ा नीति का उद्देश्य सभी घरों में बिजली की सुविधा प्रदान करना है।

ग्रामीण विद्युतीकरण की परिभाषा को अब और सख्त बना दिया गया है ताकि किसी गांव को विद्युतीकृत घोषित करने के पूर्व पर्याप्त विद्युतीय अधोसंरचना की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। जनगणना 2001 के अनुसार देश में करीब 1.2 लाख गांवों में बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

राज्यों द्वारा ग्रामीण विद्युतीकरण की मंथर गति को देखते हुए भारत सरकार ने मार्च 2005 में अपना अग्रगामी कार्यक्रम राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) की शुरूआत की। इसका उद्देश्य एक लाख अविद्युतीकृत गांवों में बिजली पहुंचाना और 2.31 करोड़ ग्रामीण बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले) परिवारों को मुपऊत बिजली कनेक्शन प्रदान करना है। इस योजना के तहत जो बुनियादी ढांचा खड़ा किया जा रहा है, वह सभी घरों में बिजली का कनेक्शन देने के लिये पर्याप्त है। एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर) परिवारों को बिजली आपूर्ति करने वाली कम्पनी की शर्तों आदि के फार्म भर उनसे बिजली के कनेक्शन लेने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है।

योजना-योजना में परियोजनाओं के लिये 9 प्रतिशत पूजीगत राज सहायता (सब्सिडी) दी जाती है और इसमें निम्नलिखित गतिविधियां शामिल हैं – ग्रामीण विद्युत वितरण मेरुदंड (बैकबोन)(आरईडीबी), ग्रामीण विद्युतीकरण अधोसंरचना का सृजन (वीईआई), विकेन्द्रीकृत वितरित उत्पादन (डीडीजी) और आपूर्ति तथा गरीबी रेखा से नीचे परिवारों को ग्रामीण परिवार विद्युतीकरण। विकेन्द्रीकृत वितरण उत्पादन (डीडीजी) योजना के तहत राज्य उन क्षेत्रों में नवीन एवं नवीकरणीय स्रोतों पर आधारित परियोजनायें भी हाथ में ले सकते हैं, जहां इनको लगाने में खर्च कम हो। आरजीजीवीवाई के तहत डीडीजी परियोजनायें लगाने के लिये विस्तृत दिशानिर्देश जारी किये जा चुके हैं।

ग्यारहवीं योजना में भी आरजीजीवीवाई जारी है-योजना के अंतर्गत 68,763 गांवों में बिजली पहुंचाने और 83.1 लाख बीपीएल परिवारों को बिजली के मुपऊत कनेक्शन के लिये 97 अरब 32 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 234 जिलों की 235 परियोजनाओं की मंजूरी दी गई थी। दसवीं योजना के अंत तक 38.525 गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी थी।

ग्यारहवीं योजना में आरजीजीवीवाई को जारी रखने की मंजूरी भारत सरकार ने 3 जनवरी, 2008 को दी और इसके लिये 2 लाख 80 अरब रूपये की पूंजीगत सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया। वे राज्य जिनमें अविद्युतीकृत गांवों और परिवारों की संख्या काफी ज्यादा है, उनपर इस योजना के तहत ज्यादा जोर दिया गया है। ये राज्य हैं – असम, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल। जिन अन्य क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है वे हैं पूर्वोत्तर के विशेष श्रेणी वाले राज्य, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा उत्तराखंड, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगने वाले जिले और नक्सल प्रभावित जिले। सौ से अधिक जनसंख्या वाली आबादियों को योजना में शामिल किया गया है।

ऊर्जा मंत्रालय ने अब तक 534 जिलों के 118,146 गांवों में बिजली पहुंचाने और 2.45 करोड़ ग्रामीण बीपीएल परिवारों को नि:शुल्क कनेक्शन देने की मंजूरी दी है। 15 जुलाई 2009 तक 63,040 गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है और 63.6 लाख बीपीएल परिवारों को बिजली के मुपऊत कनेक्शन दिये जा चुके थे। मार्च 2012 तक सभी स्वीकृत परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य है।

क्रियान्वयन-ग्रामीण विद्युतीकरण निगम योजना पर अमल करने वाली नोडल एजेंसी है। परियोजना पर तेजी से अमल के लिये पावर ग्रिड, एनटीपीसी, एनएचपीसी, और डीवीसी जैसे केन्द्रीय विद्युत उपक्रमों की सेवाओं को 4 राज्यों की बिजली कम्पनियों को उपलब्ध कराया गया है। परियोजनाओं पर प्रभावी और उम्दा क्रियान्वयन के लिये, मंत्रालय ने क्रियान्वयन की टर्न काद्ग (पूर्ण रूप से तैयार करके दी जाने वाली) पध्दति, त्रि-स्तरीय निगरानी व्यवस्था और मील का पत्थर आधारित परियोजना निगरानी का तरीका अपनाया है। इस योजना के तहत राज्यों से विद्युतीकृत गांवों को न्यूनतम 6 से 8 घंटे बिजली देने को कहा गया है। आरजीजीपीवाई के तहत विद्युतीकृत गांवों में वितरण के प्रभावी प्रावधान के लिये फ्रैंचाइजियों (अधिकृत एजेटों) की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है। वितरण प्रबन्धन के लिये अधिकृत एजेंसियों (फ्रैंचाइजी) की व्यवस्था से ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अच्छे अवसर मिल रहे हैं। अब तक 99,643 गांवों में अधिकृत एजेंट नियुक्त किये जा चुके हैं।

निगरानी –मंत्रालय ने राज्यों से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति गठित करने और त्वरित क्रियान्वयन पर विपरीत प्रभाव डालने वाली अन्तर्विभागीय समस्याओं के निराकरण के लिये इसकी नियमित बैठक आयोजित करने को कहा है। मंत्रालय ने स्थानीय मुद्दों को निपटाने और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिये राज्यों को संसद सदस्यों और विधायकों सहित सभी दावेदारों (स्टैक होल्डर) को लेकर जिला स्तरीय समितियां गठित करने को कहा है। यह अनुभव रहा है कि जिन राज्यों में ये समितियां सक्रिय हैं और जिनकी नियमित बैठकें होती रहती हैं, वहां प्रगति अन्यों के मुकाबले बेहतर है।

योजनान्तर्गत, मंत्रालय ने राज्यों के बिजली उपक्रमों और उनके एजेंटों के ‘ग’ और ‘घ’ वर्ग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना भी शुरू किया है। ग्यारहवीं योजना के दौरा 75,000 कर्मचारियों और 40,000 फ्रैंचाइजियों (एजेंटों) को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2009-10 के दौरान 2500 कर्मचारियों और 5000 एजेंटों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है।

आरजीजीवीवाई के अन्तर्गत राज्यों से न्यूनतम 6 से 8 घटों के लिये बिजली की आपूर्ति करने, लाइनों में बिजली दोड़ाने के लिये पर्याप्त विद्युत (ऊर्जा) का प्रबंध करने और योजनान्तर्गत सृजित वितरण अधोसंरचना को विद्युत आपूर्ति के लिये उप-पारेषण अधोसंरचना की स्थापना करने की प्रतिप्रबध्दता के तौर पर अपनी ग्रामीण विद्युतीकरण योजनायें अधिसूचित करने को कहा गया है। दस राज्यों को ग्रामीण विद्युतीकरण की अपनी अधिसूचनायें अभी जारी करनी बाकी है। ये राज्य हैं – आंध्र प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड।

वेबसाइट – मंत्रालय ने एक वेबसाइट http://rggvy.gov.in शुरू की है, जिसमें आरजीजीवीवाई परियोजनाओं के बारे में सम्पूर्ण ब्यौरा जैसे योजना के तहत शामिल और विद्युतीकृत गांवों आदि का विवरण दिया गया है। ‘पब्लिक फोरम’नाम से एक पृथक विन्डो बनाई गई है, जिसमें अपने विचार और शिकायतें दर्ज कराई जा सकती है। इस वेबसाइट पर व्यापक विचारों एवं प्रश्नों का उत्तर सम्बंधित जिले में परियोजना पर अमल की उत्तरदायी एजेंसी तुरंत देती है।

एकीकृत बाल संरक्षण योजना–बच्चों के समग्र विकास की देखरेख


एकीकृत बाल संरक्षण योजना–बच्चों के समग्र विकास की देखरेख

एन सी जोशी

उप निदेशक (मी.एवं सं.) पसूका, नई दिल्ली

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने, ऐसे बच्चों के विकास के लिए जिनको देखरेख और संरक्षण की जरूरत होती है या फिर ऐसे बच्चे जिनकी कानून के साथ खींचतान चलती रहती है, हाल ही में एकीकृत बाल संरक्षण योजना (आईपीसीएस) नाम से एक नई योजना शुरू की है। इस व्यापक योजना में आपात कालीन आउटरीच (अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर) सेवाएं, आश्रय, पालन-पोषण, विशेष आवास, खोये और बिछुड़े बच्चों हेतु वेबसाइट और अन्य अनेक नवाचारी हस्तक्षेप सहित बच्चों को सहायता पहुंचायी जाती है। इस योजना से बेसहारा, आवारा, भिखारियों और यौनकर्मियों के बच्चों, मलिन बस्तियों और अन्य कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को विशेष रूप से लाभ पहुंचेगा।

उद्देश्य

योजना के उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की देखभाल में सुधार लाने के साथ-साथ उन कार्यों और स्थितियों से जुड़े जोखिमों को कम करना है जो बच्चों के साथ दर्ुव्यवहार, तिरस्कार, शोषण्ा, उपेक्षा और अलगाव को बढावा देते हैं। इन उद्देश्यों की प्राप्ति- बाल संरक्षण की उन्नत सुविधाओं, बच्चों के अधिकार की सच्चाई के बारे में अधिक जन जागरूकता, भारत में स्थिति और संरक्षण, बाल संरक्षण हेतु स्पष्ट रूप से परिभाषित जिम्मेदारियां और प्रवर्तित जवाबदेहियां, कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को कानूनी सहारा प्रदान करने के लिये सरकार द्वारा सभी स्तरों पर कार्यशील संरचनाओं की स्थापना और साक्ष्य आधारित निगरानी तथा मूल्यांकन प्रणाली की स्थापना से हो सकेगी।

लक्षित समूह

एकीकृत बाल संरक्षण योजना में उन बच्चों पर ध्यान दिया जाएगा जिनको देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन बच्चों के संरक्षण पर भी ध्यान केन्द्रित किया जाएगा जिनकी प्राय: कानून के साथ खींचतान चलती रहती है अथवा उससे साबका पड़ता है। आईसीपीए केवल वंचित और खतरों के बीच रहने वाले परिवारों के बच्चों, प्रवासी, अतिनिर्धन, और निम्न जाति के परिवारों के बच्चों, भेदभाव पीड़ित परिवारों के बच्चों, अल्पसंख्यकों के बच्चों, एचआईवीएड्स पीड़ित या प्रभावित बच्चों, अनाथ, मादक द्रव्यों का सेवन करने वाले बच्चों, बाल भिखारियों, यौनशोषित बच्चों, कैदियों के बच्चों और आवारा तथा कामकाजी बच्चों तक ही सीमित नहीं है। इन बच्चों के अलावा अन्य मुसीबतज़दा बच्चों को भी इस योजना के तहत सहायता उपलब्ध होगी। इन बच्चों के बचाव और पुनर्वास के अलावा उनकी कानूनी तौर पर देखभाल भी की जाएगी। आईसीपीएस बनने के बाद अब उसके छत्र के नीचे पहले से मौजूद सभी बाल संरक्षण कार्यक्रम आ गए हैं। इनमें बाल न्याय कार्यक्रम, आवारा बच्चों हेतु एकीकृत कार्यक्रम, स्वदेशी दत्तक ग्रहण प्रोत्साहन हेतु शिशु गृहों को सहायता जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। आईसीपीएस में शामिल पहले के कार्यक्रमों में कुछ अतिरिक्त सुधार और संशोधन भी किये गए हैं।

योजना के तहत चाइल्डलाइन के माध्यम से देखभाल, सहायता और पुनर्वास सेवायें मुहैया करायी जाएंगी। इन सेवाओं में आपातकालीन आउटरीच सेवा, शहरी और अर्ध्दशहरी क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों को मुक्त आश्रय, प्रयोजन के माध्यम से परिवार आधारित गैर-संस्थागत देखभाल, पालन-पोषण, दत्तक ग्रहण और तदोपरांत देखरेख, संस्थागत सेवायें – आश्रय स्थल, बाल भवन, पर्यवेक्षण गृह, विशेष गृह, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों हेतु विशिष्ट सेवायें, बिछड़ेखोये हुए बच्चों हेतु वेबसाइट, वेब-जनित बाल संरक्षण प्रबंधन सूचना प्रणाली और जरूरतमंदनवाचारी हस्तक्षेप के लिये सामान्य अनुग्रह सहायता शामिल हैं।

बच्चों हेतु मुक्त आश्रय

आईसीपीएस में अन्य बातों के अलावा शहरी और अर्ध्दशहरी क्षेत्रों में जरूरतमंद बच्चों के लिये मुक्त आश्रय (ओपन शेल्टर्स) की स्थापना का प्रावधान किया गया है। शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बेघर और फुटपाथों पर रहने वाले बच्चों के अलावा बाल भिखारी हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। सर्वथा अकेले रह रहे इन बच्चों को देखभाल और सहारे की जरूरत है। भारत की करीब 29 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, जिनमें से आधे से अधिक लोग अति दुष्कर परिस्थितियों में रह रहे हैं। आश्रय, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन आदि सुविधाओं से वंचित होने के कारण इनकी स्थिति और भी जटिल हो गई है। इन परिस्थितियों में सबसे ज्यादा कष्ट बच्चों को ही सहना पड़ता है। उनमें से अधिकतर बच्चे, चाहे उन्हें अभिभावकों का सहारा हो या नहीं, प्राय: यातायात के चौराहों, सड़कों, रेलवे स्टेशनों, सब्जी मंडी आदि पर खड़े दिखाई देते हैं। इन्हीं बच्चों की बढती ज़रूरतों को पूरा करने के लिये इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से मुक्त आश्रय बनाये जाएंगे। इन केन्द्रों में बच्चों के खेलने के स्थान के अलावा संगीत, नृत्य, नाटक, योग, ध्यान, कम्प्यूटर, इन्डोर और आउटडोर खेलों आदि की सुविधायें भी होंगी ताकि वे रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले सकें। इन गतिविधियों से अर्थपूर्ण सामूहिक गतिविधियों, भागीदारी और पारस्परिक व्यवहार को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो सकेगा और वे सामाजिक रूप से गलत और अनैतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे। इसके साथ ही, वे भोजन, पोषाहार और स्वास्थ्य संबंधी अपनी प्राथमिक आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकेंगे। इन आश्रयों में स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के साथ-साथ सुविधानुसार समय पर अच्छी शिक्षा और व्यवसायिक प्रशिक्षण का प्रावधान होगा। बच्चे इनमें अपनी व्यक्तिगत चीजें और आय भी सुरक्षित रख सकेंगे। बच्चों की ऊर्जा को उत्पादक कार्यों में लगाने हेतु उनके मार्गदर्शन और परामर्श के अलावा कौशल-विकास शिक्षा की व्यवस्था भी की जाएगी।

इस योजना पर अमल के लिये सरकार ने इस वित्त वर्ष में 60 करोड़ रुपये आबंटित किये हैं। केन्द्र सरकार, योजना के विभिन्न घटकों पर अमल और उन पर राज्यों का समर्थन सुनिश्चित करने के लिये एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।

ई गवर्नेन्‍स- एनईजीपी – उम्दा प्रशास न लाने के प्रयास


सूचना प्रौद्योगिकी

ई गवर्नेन्‍स- एनईजीपी – उम्दा प्रशासन लाने के प्रयास

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