शिक्षक दिवस पर पुरस्‍कार विजेता श िक्षकों से मुलाकात के दौरान प्रधा नमंत्री का संबोधन


शिक्षक दिवस पर पुरस्‍कार विजेता शिक्षकों से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन
इस प्रकार है –

“शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं यहां आपके बीच आकर बहुत खुशी महसूस कर रहा हूं। जैसा कि आप जानते हैं आज हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् का जन्म दिन भी है। डॉ. राधाकृष्णन एक महान विद्वान तथा असाधारण योग्यता के शिक्षक थे। उनका जीवन और काम हम सबको हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।

शिक्षक हमारे देश के निर्माण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके इस महान कार्य के लिए आज हम उनका आभार प्रकट करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं देश के सभी शिक्षकों को हार्दिक बधाई देता हूं।

मैंने अपने करियर की शुरूआत एक शिक्षक के रूप में की थी। पढ़ने और पढ़ाने से मुझे हमेशा बेहद लगाव रहा है। मुझे इस बात की विशेष प्रसन्नता है कि आज मुझे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन सेवाएं और योगदान देने वाले श्रेष्ठ शिक्षकों से मुलाकात का अवसर भी मिला है। ये राष्ट्रीय पुरस्कार उनके प्रति हमारे सम्मान का एक छोटा-सा प्रतीक है। मैं पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी शिक्षकों को बधाई देता हूं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।

हमारी सरकार सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने जो शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया है, उसके ज़रिए विद्यालयों को बेहतर बनाया जा सकता है और बच्चों की क्षमताओं का विकास किया जा सकता है। इस कानून की सफलता के लिए केवल संसाधन उपलब्ध कराना ही काफी नहीं है। बल्कि हमारे शिक्षकों के समर्पण और प्रतिबद्धता से ही इस कानून के उद्देश्यों को हासिल किया जा सकता है।

देश के भविष्य को तराशने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। शिक्षक ही हमारे बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास करते हैं और उन्हें उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित करते हैं। शिक्षक ही बच्चों में ज्ञान की लालसा पैदा करते हैं। हमारे बच्चों में समाज तथा राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में योगदान करने की क्षमता विकसित करने का काम एक बड़ी हद तक शिक्षक ही करते हैं।

आने वाले समय में और ज्यादा बच्चे शिक्षा प्रणाली में शामिल होंगे। आपके सामने एक ऐसी लोकतांत्रिक कक्षा बनाने की चुनौती है, जिसमें सभी बच्चे सीखने की प्रकिया में समान रूप से भागीदार बन सकें।

अपने बच्चों तथा नौजवानों को शिक्षा देते समय हमें परंपरा तथा आधुनिकता के बीच तालमेल बनाए रखना चाहिए। शिक्षक के रूप में आप सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस समय की नई चुनौतियों के लिए बच्चों को तैयार करते समय हमारी अनोखी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे। हमारी कोशिश न केवल यह होनी चाहिए कि बच्चों में उच्च नैतिक मूल्यों का विकास हो, बल्कि हमें यह प्रयास भी करना चाहिए कि उनमें ऐसी योग्यता आए, जिससे वे आज के कम्‍पटेटिव युग में सफल हो सकें।

मैं एक बार फिर इस गौरवपूर्ण राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले सभी शिक्षकों को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं आप सभी के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं।”

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