प्रधानमंत्री ने सड़कों के समन्वि त और समयबद्ध राजमार्ग विकास कार्य क्रम के लिए राज्‍यों से आग्रह किया


प्रधानमंत्री ने सड़कों के समन्वित और समयबद्ध राजमार्ग विकास कार्यक्रम के लिए राज्‍यों से आग्रह किया

राष्‍ट्रीय राजमार्गो में सरकारी निजी क्षेत्र भागीदारी परियोजनाओं में जनहित को वरियता दी जानी च प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि अच्‍छी सड़कें उ़द्योग और कृषि की बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए जरूरी हैं ताकि कृषि उत्‍पादन और व्‍यापार को बढ़ावा मिले। इसके अलावा नागरिकों के जीवन स्‍तर को बेहतर बनाने के लिए आमतौर पर ये जरूरी है योजना आयोग के सहयोग से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्‍ट्रीय राजमार्गो में सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी-चुनौतियां विषय पर सम्‍मेलन के उदघाटन भाषण में उन्‍होंने कहा कि सड़कें विकास दर को बढ़ाने के लिए ही महत्‍वपूर्ण नहीं है बल्कि पूरी विकास प्रक्रिया को सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से समग्र बनाने के लिए भी महत्‍वपूर्ण हैं।

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि एक महत्‍वंकाक्षी राजमार्ग कार्यक्रम के लिए वित्‍त जुटाने के वास्‍ते बहुत अधिक साधनों की जरूरत होगी। उन्‍होंने कहा कि राजमार्गो का कुछ भाग सरकारी निवेश से विकसित किया जा सकता हैं लेकिन कुछ भाग ऐसे भी हैं जिसके लिए निजी निवेश की जरूरत पड़ेगी। 12वीं योजना की रणनीति में सरकार निजी भागीदारी की सम्‍भावनाओं का पता लगाने का आहवान किया गया हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा देश इस क्षेत्र में काफी ज्‍यादा निजी पूंजीनिवेश को आ‍कर्षित करने में सफल रहा हैं। पिछले वित्‍त वर्ष में 4800 किलोमीटर के ठेके सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा दिए गए और इस वर्ष 7300 किलोमीटर के ठेके दिए जाने हैं। सरकार निजी भागीदारी परियोजनाओं में कम समय लगता है और सरकार को नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

डॉ. सिंह ने इस बात पर प्रसन्‍नता प्रकट की कि बुनियादी ढ़ाचें की परियोजनाओं में निजी क्षेत्र के पूंजीनिवेश को प्राप्‍त करने में भारत का विकासशील देशों में दूसरा स्‍थान है। इसके लिए उन्‍होंने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्‍य सरकारों को सड़क के क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभानी है। उन्‍होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों से लेकर राज्‍य राजमार्ग उनके क्षेत्र में आते है और राष्‍ट्रीय राजमार्गो के विकास में भी उनका सहयोग जरूरी हैं। उन्‍होंने राज्‍यों से आग्रह किया कि प्रत्‍येक राज्‍य में सड़कों का आधुनिक जाल बिछाने में वे केन्‍द्रीय सरकार के साथ सहयोग करें।

केन्‍द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री डॉ. सीपी जोशी ने कहा कि हमारा राष्‍ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम कई गुणा बढ़ गया है। हमारी सरकार निजी भागीदारी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र ने काफी दिलचस्‍पी दिखाई है और इसमें देश के और विदेशी निवेशक पूंजीनिवेश करना चाह रहे हैं। हमारे सभी समझौतों, टेंडर के लिए दस्‍तावेज और अन्‍य जरूरी औपचारिकताओं के मानक तय कर दिये गये हैं।
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श्री जोशी ने कहा कि सरकार निजी भागीदारी की परियोजनाएं लोगों की परियोजनाएं हैं और इनमें जनहित का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि 71,000 किलोमीटर की कुल परियोजनाओं में से 16,000 किलोमीटर की परियोजनाएं पूरी हो चुकी है और 15,000 किलोमीटर की परियोजनाओं पर विभिन्‍न स्‍तरों पर काम चल रहा हैं। इसके साथ ही 40,000 किलोमीटर की परियाजनाओं पर अभी ध्‍यान नहीं दिया जा रहा हैं। इनमें से 20,000 किलोमीटर की परियोजनाएं एक ही लेन वाली है और वे कम विकसित क्षेत्र में है। उन्‍होंने बताया कि सरकार इन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर दो लेन वाली सड़कों के रूप में विकसित करेगी।

दिल्‍ली मुम्‍बई कोलकता, चेन्‍नई और बंगलूरू को जो़ड़ने वाले सुनहरी चतुर्भुज का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि इसमें से आधी दूरी के लिए रियायतें दे दी गई और बाकी आधे के लिए शीध्र ही रियायतें दे दी जायेगी।

डॉ. जोशी ने भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कठिनाइओं पर चिन्‍ता व्‍यक्‍त की और कहा कि आम सह‍मति से इन्‍हें सुलझा लिया जायेगा। उन्‍होंने कहा कि राज्‍यों में भी सरकार निजी भागदारी से राज्‍य राजमार्गो का विकास शुरू कर दिया है और अब तक 7,801 किलोमीटर लम्‍बाई की सड़कों पर काम शुरू कर दिया गया है।

योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष डॉ. मोंटेक सिंह आहूवालिया ने अपने सम्‍बोधन में 12वीं योजना के दौरान बुनियादी ढ़ाचे के विकास कार्यक्रमों में आने वाली बाधाओं का जिक्र किया।

सड़क परिवहन और राष्‍ट्रीय राजमार्ग राज्‍यमंत्री श्री जितिन प्रसाद ने अपने भाषण में कहा कि राष्‍ट्रीय राजमार्ग विकास में निवेश कई गुणा बढ़ गया हैं और निजी क्षेत्र इसमें महत्‍वपूर्ण निभा सकता हैं। सड़क परिवहन और राष्‍ट्रीय राजमार्ग राज्‍य मंत्री तुषार भाई ए चौधरी ने अपने भाषण में निजी क्षेत्र के निवेश का स्‍वागत किया। डॉ. सम्‍मेलन में विभिन्‍न पक्षकारों को एक दूसरे के साथ अपना जानकारी और अनुभव को बांटने का अवसर मिला।

सड़कों की लम्‍बाई की दृष्टि से भारत का अमेरिका के बाद दूसरा स्‍थान है। देश में विश्‍व स्‍तर की सड़कें बनाने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने प्रतिदिन 20 किलोमीटर लम्‍बी सड़क यानि एक वर्ष में 7300 किलोमीटर लम्‍बी सड़क बनाने का कार्यक्रम शुरू किया हैं।

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