फेसबुक हो या व्हाटसएप्प, आप चाहें तो इसका बेहतरीन उपयोग भी कर सकते हैं-1


फेसबुक हो या व्हाटसएप्प, आप चाहें तो इसका बेहतरीन उपयोग भी कर सकते हैं
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’
Gwalior Times
Worldwide News & Broadcasting Services
http://www.gwaliortimes.in

फेसबुक या व्हाटस एप्प दोनों में से कोई भी सोशल नेटवर्किंग का माध्यम हो या दोनों ही किसी व्यक्तिस द्वारा एक साथ प्रयोग किये जा रहे हों । इनका अधि‍कांश लोग अक्सर फालत व बेकार समय पास उपयोग या दुरूपयोग ज्यादा करते हैं । बहुत कम लोग ही हैं जो इन माध्यमों का सदुपयोग या बेहतरीन उपयोग कर पाते हों । या ऐसा उपयोग जानते हों ।
तीन शब्दों पर हमें खासा ध्यान देना पड़ेगा, पहला शग्द है सोशल जिसका अर्थ है सामाजिक , जो कि पूरी तरह से समाज के भीतर रहने व समाज में व्यापक रूप से जुड़े व संबद्ध रहने का परिचायक है ।
दूसरा शब्द है नेटवर्क या नेटवर्किंग , हिन्दी में कहें तो बहु व्यापक जाल या संजाल फैलाना और हर स्तर तक व हर कोने तक पहुँचना ।
तीसरा शब्द है मीडिया जिसका अर्थ है माध्यम , अर्थात एक ऐसा माध्यम जो कि समाज को नेटवर्किंग में बनाये रखने या जोड़े रखने के लिये एक सु माध्यम का कार्य करता है ।
अब यदि इन तीनों शब्दों को मिलाकर पढ़ें तो ‘’ सोशल नेटवर्किंग मीडिया ‘’ का अर्थ है , सारे समाज को नेटवर्क में या त्वरित व सक्रिंय नेटवर्क में बनाये रखने का समुचित व सर्वोत्कृष्ट माध्यम ।
बहुधा हमारा निजी अनुभव रहा है कि अक्सर लोग यहॉं सोशल मीडिया पर आकर सोशल न रहकर या सामाजिक न रहकर , पूरी तरह से असामाजिक हो जाते हैं । समाज के अंदर असामाजिक बर्ताव करने लगते हैं । व्यावहारिक दुनिया में समाज के अंदर एक दूसरे की बात पर या जिसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कहा जाता है , पर की गई छींटाकशी या टीका टिप्पणी अक्सर लोग पीठ पीछे करते हैं और चुगली आदि शब्द उनके लिये प्रयोग किये जाते हैं ।
लेकिन सोशल मीडिया पर आप किसी की भी पोस्ट पर कमेण्ट या छींटाकशी , टीका टिप्पणी आदि करते हैं तो वह पीठ पीछे नहीं प्रत्याक्ष होती है , बात कहने वाले के सामने भी और बात सुनने वालों के यानि कि सारी दुनिया के सामने भी । ऐसा नहीं कि वहॉं लोग पीठ पीछे बातें या चुगली नहीं करते , अवश्य करते हैं लेकिन केवल प्राइवेट चैटिंग के जरिये या फिर आपस में मोबाइल या अन्य मैसेजिंग के जरिये । इसलिये चुगली या चुगलखोरी सोशल मीडिया पर बहुत कम ही हो पाती है । सोशल नेटवर्क में सारा भारत देश ही नहीं , विश्व व कभी कभी किसी प्रोफाइल विशेष में समूचा विश्व या समाज की जानी मानी ऊँची हस्तिसयां व जिनसे आप कभी मुलाकात तो दूर , दर्शन तक नहीं कर सकते , वे लोग जुड़े रहते हैं , जो नित्य उस बात को या पोस्ट को व उस पर आने वाले कमेण्टों को पढ़ते हैं । इसके साथ ही वे अपने मतलब के लोग व मतलब की सामग्री खुद ही खोज कर उसे फॉलो करते हैं ।
फॉलोअर्स की संख्या ही असल में आपकी पोस्टिंग कैपेबिलिटी और आपकी पढ़ी जाने व पसंद की जाने वाली असल संख्या है । फालोअर्स की यह संख्या फेसबुक के किसी पेज पर तो खरीदी जा सकती है लेकिन व्यक्तिरगत प्रोफाइल पर यह संभव नहीं होती , और हम अपने निजी अनुभव से मानते हैं कि किसी की निजी वाल के फालोअर्स की संख्या ही उसकी असल अनुगामीयों व समर्थकों की संख्या होती है , न कि उसके मित्रों की संख्या या उस पोस्ट पर लाइक किये जानी वाली संख्या । कभी कभी फालोअर्स व अन्य बहुत से लोगों के लिये लाइक करने व कमेण्ट आदि करने पर भी प्रोफाइल यूजर प्रतिबंध या कड़ा प्रतिबंध लगा कर रखता है जिससे अवांछित तत्वों को रोका जा सके ।
अत: आपका प्रत्येक लाइक या कमेण्ट किसी भी पोस्ट को बहुत बेहतरीन व उम्दा बना देता है तो आपका खुद का भी रूतबा और दर्जा उससे बढ़ता है , जब एक अति लोकप्रिय या काफी उन लोगों की नजर में भी बड़ा व बेहतरीन हो , जिन लोगों को आप बड़ा मानते हैं , तो निसंदेह उसमें कुछ तो बात , विशेष बात होगी ही होगी ।
क्रमश: अगले अंक में जारी …….

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