14 मार्च से ग्रहों की फिर बदलीं चाल, फिर होगा खेल शुरू उठापटक और बदलावों के दौर का, अधि‍क मास में गुरू बदलेंगें राशि‍


14 मार्च से ग्रहों की फिर बदली चाल, फिर होगा खेल शुरू उठापटक और बदलावों के दौर का, अधि‍क मास में गुरू बदलेंगें राशि‍
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’
Gwalior Times
Worldwide News & Broadcasting Services
http://www.gwaliortimes.in

ग्रहों की उठापटक और चालों का बदलाव निरंतर जारी है , इस बार भी 13 मार्च के बाद ग्रह फिर से अपनी चालों में बदलाव करने जा रहे हैं , जिसमें व्यापक असर डालने वाले और बड़े ग्रहों , गुरू व शनि की चालों में बदलाव प्रधान है तथा ज्योतिषीय दृष्टिग से भी काफी महत्वपूर्ण व असरकारक है । इसके साथ ही इसी साल गुरू राशि‍ भी बदलेंगें तो वहीं अगले साल जनवरी महीने में राहू व केतु भी राशि‍ परिवर्तन करेंगें । शनि का राशि‍ चक्र भ्रमण अभी वृश्चिैक राशि‍ में ही निरंतर वक्री कभी तो मार्गी कभी की गति के साथ बना रहेगा ।
पहली चाल शनि बदलेंगें और 14 मार्च 2015 से वृश्चि क राशि‍ में रहते हुये ही वक्री हो जायेंगें, शनि इस वक्त वृश्चिरक राशि‍ में 10 अंश 51 कला ( 10 डिग्री 51 मिनिट) पर होंगें । इसका सीधा सा तात्पर्य यह है कि अभी शनि किशोर अवस्था में आकर होश में आये ही हैं और अपना असर दिखाना व फेंकना शुरू कर ही पाये हैं कि 14 मार्च से पुन: वक्री गति पकड़ लेंगें और वापस उल्टे चलने लगेंगें , और विशेष बात यह है कि शनि की यह वक्री गति अर्थात उल्टी चाल 2 अगस्त सन 2015 तक जारी रहेगी , और उस समय शनि 4 अंश 12 कला तक वापसी करेंगें , कुल मिलाकर लंबी वापसी का दौर शनि तय करेंगें , इस दरम्यान अपनी वक्री गति में या उल्टी वापसी चाल में न्यायप्रिय एवं धर्म, दान दक्षिाणा प्रिय शनि यह देखते हैं कि जिस जिस को वे कुछ दे दे कर आये , या छीन छीन कर ले गये , उन्होंनें उस वक्त का या समय का , या दी हुयी चीजों को पाकर या छीनी हुई चीजों को खोकर क्या किया व उनका आचरण , चरित्र व व्यवहार आदि कैसा रहा , फिर तदनुसार ही वे मनुष्य को उल्टी चाल में या वक्री गति में उसका प्रतिफल देते हैं और लेते हैं , शनि मार्गी गति में लिये दिये का परीक्षण व प्रतिफल अपनी वक्री गति में करते हैं एवं तदनुसार या तो दिया हुआ वापस छीन लेते हैं , या छीना हुआ वापस दे देते हैं , या सम्यक तदनुसार दंड देने , सम्मान, पुरूस्कार या अपमान आदि देने का व्यवहार व उपाय करते हैं ।
ग्रहों में दूसरी बड़ी चाल में गुरू के दो प्रकार के परिवर्तन इस वर्ष नजर आयेंगें , वर्तमान में गुरू वक्री चल रहे हैं अर्थात उल्टी चाल विगत 8 दिसम्बर 2014 से चल रहे हैं , उस समय गुरू 28 अंश 30 कला पर ( लगभग मृतप्राय: हो चुके और राशि‍ बदलने के नजदीक ही ) वक्री हो गये थे , अतिचारी चाल से चलते हुये गुरू पुन: होली और चैत्र नवरात्रि के बाद वैशाख के महीने में 8 अप्रेल 2015 से पुन: मार्गी होंगें । इस गुरू बेहद प्रचंड स्वरूप में वक्री हैं, और 8 अप्रेल 2015 को यह करीब 18 अंश 32 कला की प्रचंड स्थि ति से मार्गी होंगें , और आगे बढ़ेगें , किंतु गुरू इस समय बेहद अतिचारी चाल से चल रहे हैं अत: मार्गी गति में इसी चाल से चलते हुये दिनांक 14 जुलाई 2015 को अधि‍क मास आषाढ़ के दूसरे महीने में राशि‍ बदल देंगें , और कर्क राशि‍ का चक्र पूर्ण कर सिंह राशि‍ में प्रवेश कर जायेंगें । उल्लेखनीय व स्मरणीय है कि इस वर्ष दो आषाढ़ के महीने रहेंगें , जिन्हें अधि‍क मास या मल मास या पुरूषोत्तम मास कहा जाता है , इस समय धर्म, दान पुण्य अधि‍क करने का विधान है । इन ग्रहों की चालों च राशि‍ परिवर्तन के साथ ही सबका सब कुछ बदल जायेगा । सबके दिन दशाओं में हेरा फेरी हो जायेगी ।

//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: