फिल्म ”योगेश्वरी का पहला भाग , ग्वालियर टाइम्स ने विश्वस्तर पर रिलीज व टेलीकास्ट जारी किया


फिल्म ” योगेश्वरी ” का पहला भाग का विश्वव्यापी प्रसारण , फिल्म की इण्ट्रोडक्ट्री प्रसारित की जा चुकी है , इस फिल्म के खास भाग ” ताजमहल तोमर राजवंश का शिव मंदिर पूरी कथा व कहानी , इंद्रप्रस्थ यानि दिल्ली का पुराना किला और उसकी पूरी कहानी
ग्वालियर टाइम्स । 18 मई 2016 , ग्वालियर टाइम्स द्वारा प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय महत्व की एवं राष्ट्रीय महत्व की ( यूनिसेफ द्वारा सूचीबद्ध एवं शासकीय मान्यता प्राप्त तथा भारत सरकार के एन.जी.ओ. पोर्टल पर उपलब्ध , ( ”वॉयस ऑफ भारत” में संस्था के नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” की आवाज सेम्पल राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में सूरक्षित होने का सम्मान प्राप्त ), मुरैना मेला प्रदर्शनी में सन 1993- 94 में प्रदर्शनी का प्रथम पुरूस्कार व सम्मान प्राप्त स्वयंसेवी संस्था ”नेशनल नोबल यूथ अकादमी” तथा ”देवपुत्र फिल्म्स, एडवर्टाइजिंग एंड सीरियल्स निर्माण ” कंपनी        (देवपुत्र प्रायवेट लिमिटेड ग्रुप ऑफ कम्पनीज की एक सब्स‍िडियरीज कंपनी – रजिस्टर्उ अंडर कंपनीज एक्ट – 1956) के तहत निर्माण की गयी फिल्म सतयुग, त्रेता काल , द्वापर काल से लेकर कलयुग में आज दिनांक तक , ” योगेश्वरी” के नाम से निर्मित फिल्म का प्रसारण इसी हफ्ते से विश्व स्तर पर शुरू किया जायेगा , इस हफ्ते पहला भाग दिखाया जायेगा , फिल्म के पहले भाग में महाभारत के पराक्रमी योद्धा अर्जुन की मॉं कुन्ती के मातृ निवास राज्य ”कुंतलपुर की पहली फिल्म दिखाई जायेगी , जिसमें योगेश्वरी के कुतलपुर में हरसिद्धि के रूप में विराजित होने और महाभारत के मैदान में पांडवों को विजय दिलाने की फिल्म व कहानी दिखाई जायेगी । फिल्म के दूसरे भाग में भी यह कहानी व यह फिल्म जारी रहेगी, फिल्म के तीसरे भाग में कुतलपुर के ही ”कुंती के शंकर जी की मंदिर , दुर्वासा मुनि की तप स्थली, एवं वह स्थल जहॉं आसन नदी में सूर्य का रथ एवं घोड़े उतरे , कर्ण का जन्म हुआ, कर्णखार से लेकर उस स्थल पर की विस्तृत फिल्म …. इसी प्रकार यह फिल्म योगेश्वरी अपनी पूर्ण कथा के साथ आगे बढ़ते , ग्वालियर किले के मंदिरों, मितावली के चौंसठ योगनी मंदिर, बटेसुरा के मंदिरों व पढ़ावली मंदिरों के रहस्यों , ककनमठ के मंदिर, पांडवों के राजवंश में देवीयों और अप्सराओं का पत्नी के रूप में रहना व वंश संचालन, देवी का का विध्यवासिनी के रूप में नाम व धाम , 52 शक्त‍ि पीठों , भैरव – भैरवियों , योगीयों – योगनियों , यक्ष – यक्षणियों, भूत प्रेत , शाकिनी डाकिनी , देवी के भेदों , देवी रहस्यों , दस महाविद्या भेद , स्त्री भेदों , स्त्रीयों में यक्षणीयों , योगनियों , आदि विभ‍िन्न स्वरूपों से गुजरती हुई , ऐसाह गढ़ी , दिल्लीपति महाभारत सम्राट महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर द्वारा निर्मित मंदिर भगेसुरी ( भगेश्वरी) , भवेसुरी ( भवेश्वरी) , ऐसाहगढ़ी में कामाख्या के रूप में चम्बल नदी का स्वरूप धारण कर भगेसुरी माता के सेटेलाइट चित्र , दिल्ली में इंद्रप्रस्थ के किले में पांडवों द्वारा बनवाये गये योगमाया , योगमाता मंदिर, से लेकर वर्तमान में माता बीजासेन तक की कहानी व मंदिर फिल्म में दिखायें जायेंगें । इस बीच में इस फिल्म ”योगेश्वरी” के प्रसारण के दौरान , बीच बीच में अन्य सामायिक व सामाजिक फिल्में या शासकीय ब्राडकास्टेड व टेलीकास्टेड फिल्मों का प्रसारण जारी रहेगा । अत: फिल्म ‘ योगेश्वरी” के बीच बीच में , अन्य फिल्में भी प्रसारित होंगीं । फिल्म योगेश्वरी की आधी शूटिंग पूर्ण हो चुकी है और पहला भाग एडिटिंग की प्रक्रिया से गुजर रहा है , फिल्म एच.डी. कैमरे से शूट की गयी है , फिल्म की कैमरा सांचालन टीम व छायांकन व फिल्मांकन ” मुरैना के विख्यात कैमरामैन ”अजय सोनी” और दीपक राजौरिया ने किया है , डायरेक्शन स्क्रिप्ट आदि नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द एवं विनोद दुबे ने किया है
अगली फिल्म की तैयारी – ग्वालियर टाइम्स द्वारा इसके साथ ही अगली फिल्म बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है – फिल्म का नाम होगा ” ….. ” यह फिल्म भारत की आखरी विश्व सत्ता पर आधारित होगी और मक्का मदीना का असल रहस्य व असल कथा , असल इतिहास व असल कहानी , अजमेर की दरगाह का रहस्य सहित अरब में तोमर राजपूतों की सत्ता के साक्ष्य , भगवान जगन्नाथ का मंदिर और उसकी ध्वज पताका का रहस्य, इसमें कई राजवंशों के व राजपूतों के असल भेद, वंश व उनके राज्य क्षेत्र उजागर किये जायेंगें , दोनों ही फिल्में भारत के असल व सनातन प्राचीन ग्रंथों , शास्त्रों एवं वंशावलियों पर आधारित हैं । जो लोग हमारी इस प्रोजेक्ट टीम में किसी भी रूप में जुड़ना चाहें वे हमसे नीचे दिये चित्र में पतों पर संपर्क कर सकते हैं । फायनेन्सरों एवं फिल्म लाइन के अनुभवियों , आदि काल से लिख रहे परंपरागत वंशावली लेखकों , प्राचीन ग्रंथों व शास्त्रों के विशेषज्ञों , का सुस्वागतम है , इतिहासकारों का प्राचीन ग्रंथों , शास्त्रों, वंशावलियों के मुताबिक इतिहास लेखकों का स्वागत है , किसी भी फर्जी इतिहास लेखक , या काल्पनिक मनगढन्त इतिहास लिखने वाले कृपया भूलकर भी हमसे संपर्क न करें , तदनुसार फर्जी राजा , महाराजा , मुगलों एवं अंग्रेजों के गुलाम व दास तथाकथ‍ित राजा महाराजा , गवर्नर , लाट साहब , पटेल , राव साहब , राय साहब ऐसे लोग जिन्हें भारत के इतिहास , ग्रंथ , शास्त्र एवं वंशावलियां मान्यता नहीं देते एवं उनका अनुसमर्थन नहीं करते , या वर्ष सन 1193 – 1194 के बाद के अचानक बने काल्पनिक राजा महाराजा कृपया कतई संपर्क नहीं करें , चूंकि फिल्में पूर्णत: शत प्रतिशत शुद्ध विशुद्ध भारत के इतिहास , ग्रंथों एवं शास्त्रों पर आधारित हैं अत: अशुद्धता, काल्पनिकता या मनगढन्तता के लिये इनमें कोई स्थान नहीं है । ” ये फिल्में ”जो है सो है , जो जैसा है सो जैसा और वैसा है” पर आधारित हैं एवं इनमें सभी कुछ यथावत रखा जा रहा है । हम उम्मीद करते हैं कि आप हमारी , भारत की भावना को पूर्णत: समझेंगें और उसका सम्मान करेंगें । कल के सम्राटों के वंशज आज भले ही खेत जोत रहे या मजदूरी कर रहे गरीब और भुखमरी में जी रहे हों , हमारी फिल्में उनके उस भव्य इतिहास और उन्हें किसने व कैसे लूटा , कैसे गरीब बनाया , कैसे भुखमरी में धकेला , इस अंाम तक यानि भारत की आज की कहानी तक चल कर आयेंगीं , इसलिये हमने इनको दो अलग अलग फिल्मों में बनाना सुनिश्च‍ित किया है ।
– नरेन्द्र सिंह तोमर ” आनन्द”

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