क्या ऊना और क्या पूना जलजला आना है , ज्वालामुखी तो फटना है, महाभारत तो होना है


क्या ऊना और क्या पूना , ज्वालामुखी तो फटना है , अभी महाभारत तो होना है
– नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”
दलित, शूद्र , पिछड़ा , दर असल किसी जाति का नाम नहीं , न किसी भी भारतीय ग्रंथ में या शास्त्र में इनकी कोई जाति दी हुई है , सबसे बड़ा सबूत है इसका महाभारत , जिसमें न कोई दलित मरा, न शूद्र न पिछड़ा , भारत के इतिहास में कभी ये नहीं मरे ।
हम नरेन्द्र मोदी की तथा कथ‍ित गौ रक्षकों के बारे में कही गई बात को सही मानते हैं व उससे सहमत हैं ।
ये जातियां किसने बनाईं , इन जातियों को जातिगत नाम व जन्म किसने दिया , कौन इन नामों की जातियों को अब तक जिन्दा रखे है , भाारत की आजादी के 70 साल गुजरने के बाद भी यह जातियां मुकम्मल कायम व दलित व पिछड़ी हैं, जबकि इस कालांतर में ही नहीं विगत हजारों वर्षो के कालांतर में भी यह शासक रहीं हैं यह शोध का विषय है , वस्तुत: 98 प्रतिशत तथाकथ‍ित दलित एवं पिछड़ी जातियां फर्जी हैं , और इस पर बाकायदा एक बहुत बड़ा अभ‍ियान चला कर इनकी मूल से आज तक वास्तविक सूची बनाई जानी चाहिये , इस फर्जी दलित व पिछड़ा जाति की असलियत सामने लाने का वक्त आ चुका है ।
जब दयाशंकर सिंह की मॉं बहिन बेटी को गरियाया व अपमानित किया जा रहा था तब इनके होठों पर मेंहदी लगी थी या जुबानों पर ताले लगे थे , या कि इनके मोबाइल व कम्प्यूटर के की बोडों में पानी भर गया था । जो दुर्योधन की सभा में द्रोपदी का चीर हरण होते देख , दुर्योधन द्वारा द्रोपदी को अपनी जंघा पर बैठने का आदेश देते देख मौन थे , वे कितने बड़े , बेशक बहुत बड़े महारथी थे , मगर बहुत बुरी भयावह व दर्दनाक मौत मारे गये । उनके सम्पूर्ण कुल व वंशों के विनाश हो गये ।
इसके बाद भी यदि इतने भीषण महाभारत जिसमें अठारह अहौक्षणी सेना व समस्त कौरव वंश का समूल सर्वनाश हो गया था , उस देश में आप क्या उम्मीद करते हैं , आप अपना असत्य, फर्जीवाड़ा , मिथ्यावाद, झूठा तमगीकरण, अपने पापों और अपराधों को छिपाने के लिये दूसरों पर आरोप जड़ते रहने का खेल कब तक … कितने वक्त तक खेल सकते हैं , और प्रतिकार की , बदले की या दण्ड की अपेक्षा नहीं करते । यदि आप किसी मुगालते में हैं वह भी भारत जैसे देश में , जहॉं महाभारत जैसा युद्ध हुआ , सीता की इज्जत पर ऑंच आने से रावण के सम्पूर्ण कुल का सर्वनाश हुआ । वहॉं आप क्या अपेक्षा व उम्मीद करते हैं । ऊना हो या पूना या हो जूना गढ़, यह तो बहुत ही हल्की सी बहुत छोटी सी प्रतिक्रिया है , एक बगावत , एक आक्रोश के दबे हुये बलबले दार ज्वालामुखी का महज कहीं जरा सी गिरी चिंगारी है , ज्वालामुखी तो फटना है , तय है , कब फटेगा कितना व किस हद तक फटेगा , आप जितना कुचल सकते हैं भारत को , भारतवासियों को , समझ लीजिये कुचल चुके दबा चुके , राजनीति बहुत हो गई , बहुत कूटनीति व नेतागिरी कर ली ।
लोगों का अब पुलिस पर , कानून पर , राजनेताओं व सरकार पर, अदालतों पर भरोसा व यकीन नहीं रहा ।
एक बगावत , आक्रोश समूचे भारत में समाई है , भगोड़े टिक कहॉं पाये हैं , जब जंग छिड़ती है और वह जंग जब हक के लिये , न्याय के लिये होती है तो धर्मयुद्ध कहलाती है । महाभारत कहलाती है , इसलिये श्रीमद भगवद गीता पहला श्लोक है ” धर्म क्षेत्रे कुरू क्षेत्रे … ”
और महाभारत का अर्थ है भारत का महान होना .. विस्तृत व विशाल होकर चारों ओर फैलना , बहुतों को मिटा कर और बहुतों को मिला कर भारत बनाना , ऐसा भारत ही महाभारत कहलाया था जिसकी सत्ता 5500 वर्ष तक सम्पूर्ण विश्व भूमि पर रही ।
अब ये फैसला तो श्री कृष्ण ने काफी प्रयास करके पहले उन्हीं लोगों पर छोड़ दिया था जिनके बीच महाभारत का युद्ध हुआ कि ” तुम्हें मिटना है या मिलना है ” और सारी जातियां, धर्म , संप्रदाय , संस्कृतियां , भाषायें , सारे विश्व के लोग …. मिट गये और मिल कर एक हो गये …. और बन गया भारत का महाभारत …
अब आप तय कर लें कि ” भारत की जनता जो कि एक अभ‍िमन्यु है , कब तक निआप सातों महारथ‍ियों ( सरकार, नेता, पुलिस, अदालत, सिस्टम, भ्रष्ट , जनता को अपना गुलाम व खुद को राजा माानने वाले लोग ) हत्थे लाचार इस बालक को चक्रव्यूह में घेर फंसा कर रखना है और कब तक इसे जूझना और संघर्ष कराना है , और कब मार देना है ”
बेशक सातों महारथ‍ियों का खौफनाक व भयावह अंत तय है , महाभारत का मैदान सज रहा है , नया कुरूक्षेत्र बन चुका है , श्री कृष्ण हार चुका है , वह दुर्योधन के छप्पन भोग ठुकरा कर विदुर के घर साग रोटी खा रहा है ।
चिल्लाओ मत , तब चुप थे तो अब भी चुप रहो, बोलने का हक खो खुके हो , जीने का हक खो चुके हो , बोलोगे तो जुबान खुद ही टपक कर नीचे गिर जायेगी , जिन्दगी का अहसास व आस रखोगे तो मौत सुनिश्चत हो खुद ब खुद आ जायेगी ।
क्या ऊना और क्या पूना …. अंधा भी केवल कॉमनसेन्स के आधार पर बता देगा , जुल्म की इन्त‍िहा गुजर चुकी है , अब तो बस आक्रोश व बदले का ज्वालामुखी फटना है , महाभारत के युद्ध का बिगुल बजना है , अर्जुन को रथ पर चढ़ना है , श्री कृष्ण को अपना पांचजन्य शंख फूंकना है ….. बस उसके बाद किसी को मिटना है और किसी को मिलना है , बेशक फिर एक महाभारत बनना है – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”

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