उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में आगामी 3 वर्षों में स्थापित होंगे 5 अत्याधुनिक कलस्टर


मप्र में उद्यानिकी मिशन का केन्द्रीय कार्यालय शीघ्र ही प्रारंभ किया जाएगा : केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर
शिवराज जी आपने गेहूँ उत्पादन में हमारे पंजाब को पीछे छोड़ दिया – श्रीमती हरसिमरत कौर बादल

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मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए आगामी 3 वर्षों में 5 अत्याधुनिक कलस्टर स्थापित किए जाएंगे। इनमें से एक कलस्टर विश्व स्तर का होगा। मध्यप्रदेश में परम्परागत फसलों की तरह ही उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। कोल्ड चैन, वैल्यू एडिशन एवं फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से किसानों की आमदनी दोगुना करने की पूरे प्रयास किए जाएंगे। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का सपना किसान कल्याण से ही पूरा होगा। हम किसानों को ‘इन्कम सिक्योरिटी’ देंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मध्यप्रदेश में ‘उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण : भविष्य की रणनीति’ विषय पर आयोजित वेबिनार के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल, केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण और उद्योग राज्यमंत्री श्री रामेश्वर तेली, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री श्री भारत सिंह कुशवाह, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के राज्य प्रमुख श्री कुमार साकेत ने किया।

वेबिनार में केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के कुशल नेतृत्व में बागवानी के क्षेत्र में गंभीर चिंतन हो रहा है। इसके निष्कर्षों के आधार पर केन्द्र और राज्य सरकार‍ मिलकर मध्यप्रदेश को कृषि की ही तरह बागवानी के क्षेत्र में ऊचाईयों पर ले जाएंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान की किसानों के प्रति संवेदना तथा किसान हितैषी नीतियां अद्भुत हैं। बागवानी से किसानों की आय कई गुना बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में उद्यानिकी मिशन का केन्द्रीय कार्यालय शीघ्र ही प्रारंभ किया जाएगा। केन्द्र एवं राज्य सरकार मिलकर किसानों की तस्वीर और तकदीर बदलेंगे।

वेबिनार में केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि ‘शिवराज जी आपने गेहूँ उत्पादन में हमारे पंजाब को पीछे छोड़ दिया है’। इसके साथ ही जैविक कृषि में भी मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे है। प्रदेश में दो मेगा फूड पार्क (खरगौन और देवास) तथा आठ कोल्ड चैन पर कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में 800 करोड़ रूपए के कुल 30 प्रोजेक्ट्स पर कार्य चल रहा है। इसमें 250 करोड़ का अनुदान, 24 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा तथा 01 लाख किसानों को फायदा होगा। साथ ही प्रतिवर्ष 15 हजार करोड़ रूपए की ‘एग्रो प्रोसेसिंग’ हो सकेगी। उन्होंने मध्यप्रदेश के ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना की सराहना करते हुए कहा कि इससे मध्यप्रदेश के उत्पाद विदेशों में भी लोकप्रिय होंगे। केन्द्र सरकार की ‘ऑपरेशन ग्रीन’ योजना के अंतर्गत कम से कम 100 किलोमीटर की दूरी तक किसानों द्वारा फल एवं सब्जियों का परिवहन करने पर 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। किसानों द्वारा कोल्ड स्टोरेज में अपनी उपज रखे जाने पर आगामी तीन महीनों में 50 प्रतिशत की सब्सिडी भी मिलेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री चौहान से आग्रह किया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए बिजली को कृषि दर पर प्रदान किया जाए।

उत्पादन और प्रसंस्करण दोनों में मध्यप्रदेश आगे बढ़ेगा

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री श्री भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश उद्यानिकी फसलों के उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में जो मध्यप्रदेश से अपेक्षाएं की हैं, उनको मध्यप्रदेश अवश्य पूरी करेगा।

खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन महत्वपूर्ण

केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण और उद्योग राज्य मंत्री श्री रामेश्वर तेली ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें इन क्षेत्रों में आगे बढ़ना होगा। देश में किसानों एवं उद्यमियों के लाभ के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में 08 मेगा/मिनी फूड पार्क, कोल्ड चैन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट आदि पर कार्य चल रहा है। ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी।

पंजाब हमारा आदर्श भी और प्रेरणा भी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में पंजाब हमारा आदर्श भी है और प्रेरणा भी। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, श्रीमती हरसिमरत कौर एवं श्री रामेश्वर तेली द्वारा मध्यप्रदेश को निरंतर दिए जा रहे सहयोग की सराहना की।

वेबिनार के निष्कर्षों पर तैयार करेंगे रोडमैप

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया‍वेबिनार के निष्कर्षों के आधार पर मध्यप्रदेश में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में आगामी 03 वर्षों में किए जाने वाले कार्यों का रोडमैप तैयार‍किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में 21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 308 लाख मीट्रिक टन से भी अधिक उद्यानिकी फसलें होती हैं। मध्यप्रदेश का संतरा, धनिया, अंगूर, मिर्ची, मटर, आलू देश-दुनिया में प्रसिद्ध है।

केन्द्रीय दल से शीघ्र सर्वे का अनुरोध

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस बार बाढ़ से किसानों की फसलों को अत्यधिक नुकसान हुआ है। उन्होंने अनुरोध किया कि केन्द्रीय दल शीघ्र मध्यप्रदेश आकर किसानों की फसलों का सर्वे करे जिससे कि किसानों को जल्दी से जल्दी केन्द्र की राहत भी मिल सके।

प्रथम सत्र : उत्पादन व उत्पादकता को बढ़ाना (फार्म गेट मैनेजमेंट) के प्रमुख निष्कर्ष

(टीम लीडर और मॉडरेटर, श्री पुष्कर सिंह, आयुक्त, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग)

  • उद्यानिकी में मशीनीकरण को बढ़ावा देना।
  • एकीकृत कीट प्रबंधन तथा एकीकृत पौध संरक्षक कौशल को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता।
  • सौर आधारित सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देना।
  • कृषि में प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप को बढ़ाना।
  • एफपीओ के लिए गारंटी फंड/रिजर्व फंड की स्थापना।
  • उद्यानिकी उत्पादों के ग्रेडिंग, सोर्टिंग की ट्रेनिंग देकर गुणवत्ता युक्त मार्केट तैयार किया जाना।
  • सेटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल, (अभी इसराइल इस तकनीक का प्रयोग करता है)।

द्वितीय सत्र खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्यानिकी के प्रमुख निष्कर्ष

(टीम लीडर और मॉडरेटर, श्रीकांत बनोठ (IAS) प्रबंध निदेशक, मध्यप्रदेश स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज एवं

  • श्री कुमार साकेत, राज्य कार्यालय प्रमुख, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, मध्यप्रदेश)
  • एकीकृत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण प्रोत्साहन पॉलिसी की जरूरत।
  • ‘एक जिला एक उत्पाद’ को अपनाते हुए वैल्यू चेन का विकास करना।
  • प्रसंस्करण व मार्केट योग्य किस्मों को बढ़ावा देना।
  • शूक्ष्म इकाइयों को ब्याज दर में छूट एंव बैंकों से जोड़ना।
  • शूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कृषि की तरह कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराना।
  • बागवानी उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणन/जैविक प्रमाणीकरण को बढ़ावा देना।
  • भण्डारण क्षमता में 25 प्रतिशत वद्धि।
  • फलों और सब्जियों के लंबे भंडारण और परिवहन के लिए संशोधित वातावरण तैयार करना, किसानों को छोटी भण्डारण क्षमता के लिए गाँव में ही उन्हें अच्छी पैकेजिंग के लिए ट्रेनिंग देना।
  • भंडारण की सुविधा/मूल्यवर्धन/अनुबंध खेती को बढ़ावा।
  • अगले 5 वर्षों में 10000 शूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का उन्नयन।
  • वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण 2 से 3 प्रतिशत है अगले 3 वर्षों में खाद्य प्रसंस्करण में 8 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि करना।
  • भंडारण सुविधाओं में सुधार।
  • कृषि को सेवा मॉडल के रूप में बढ़ावा देते हुए 100 किसान स्टार्ट-अप्स व उद्यानिकी उद्यमियों को प्रोत्साहित करना।
  • बाजार लिंकेज, सलाहकार सेवाएं।
  • फार्म टू फोर्क – बाजार लिंकेज को प्रोत्साहित करना।

मध्यप्रदेश में मलखम्ब के लिए खुलेगी खेल अकादमी


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खेल अलंकरण समारोह में प्रदेश के दो खिलाड़ियों श्री योगेश मालवीय को मलखम्ब प्रशिक्षक के रूप में द्रोणाचार्य अवार्ड प्राप्त करने तथा श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया को दिव्यांग तैराक के रूप में तेंजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड मिलने पर शुभकामनाएँ एवं बधाई दी हैं। साथ ही श्री योगेश मालवीय को मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से 10 लाख रूपये की तथा श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया को 5 लाख रूपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि दोनों ही खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट उपलब्धता हासिल कर मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। मध्यप्रदेश सरकार इन्हें खेल के प्रोत्साहन के लिए हरंसभव मदद प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मलखम्ब मध्यप्रदेश का राज्य खेल है तथा इसे बढ़ाने के लिए सरकार ने खेल अकादमी खोलने का निर्णय लिया है। इस खेल अकादमी में द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त मलखम्ब प्रशिक्षक श्री योगेश मालवीय की सेवाएं ली जाएंगी। श्री योगेश मालवीय के सिखाए गए मलखम्ब खिलाड़ी आज देश और दुनिया में मलखम्ब का श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें वर्ष 2012 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा विश्वामित्र अवार्ड से तथा वर्ष 2018 में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा मलखम्ब के शानदार प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया जा चुका है।

श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया दिव्यांग पैरा तैराक के रूप में 42 कि.मी. की कैटलीना चैनल को 11 घंटे 34 मिनिट की अल्पवधि में पार कर पहले एशियाई तैराक बने तथा उन्होंने इंग्लिश चैनल को 12 घंटे 24 मिनिट में पार कर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज करवाया। उन्होंने चार अंतर्राष्ट्रीय तथा सात राष्ट्रीय पैरा तैराकी चैम्पियनशीप में कुल 28 पदक अर्जित किए। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इन्हें वर्ष 2014 में प्रदेश का सर्वोच्च खेल सम्मान विक्रम अवार्ड दिया गया

आर्किटेक्चरल इंजीनियरिंग एजुकेशन प्रणाली में बदलाव हुये


प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2020 4:40PM ग्वालियर टाइम्स

शिक्षा मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रासंगिक सुधारों की निरंतरता में, शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने आज यहां वर्चुअल तरीके से ‘वास्तुकला शिक्षा विनियमन, 2020 के न्यूनतम मानक’ लॉन्च किए। शिक्षा राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और वास्तु कला परिषद के अध्यक्ष अर हबीब खान भी उपस्थित थे।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री निशंक ने भारत, इसके धरोहरों एवं मंदिरों की अनूठी वास्तुकला सुंदरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सीओए को वास्तु कला के वर्तमान एवं प्राचीन खजानों से प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए और भारत को फिर से विश्व नेता बनाने के लिए वास्तु कला के क्षेत्र में रूपांतरकारी बदलाव लाना चाहिए। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि परिषद के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए ये विनियमन देश में मानव वास और निर्मित्त वातावरण के क्षेत्र में सामने आने वाली चुनौतियों एवं प्रमुख समस्याओं को दूर करने में सक्षम होंगे तथा भारत को नवोन्मेषण एवं कौशल विकास के क्षेत्रों में एक नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तु कला इसके इतिहास, संस्कृति एवं धर्म की जड़ों में निहित है।

मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लॉन्च के साथ, हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का एक नए और जीवंत भारत के लिए विजन उन छात्रों पर निर्भर करता है जिन्हें 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार होने की आवश्यकता है। एनईपी में कई व्यापक सुधारों का प्रस्ताव रखा गया है और इसके कार्यान्वयन के लिए सभी द्वारा योगदान दिए जाने की आवश्यकता है। और ये विनियमन निश्चित रूप से उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं जो प्रस्तावित एनईपी से कई विचार और सोच लाते हैं। उन्होंने इन विनियमनों को लॉन्च किए जाने पर वास्तु कला परिषद एवं परिषद के अध्यक्ष अर हबीब खान को बधाई दी और परिषद के भविष्य के उसके प्रत्येक प्रयासों के लिए शुभकामनायें दीं।

इस अवसर पर श्री धोत्रे ने कहा कि लंबे समय से इन विनियमनों को तैयार किया जा रहा था और पुराने विनियमनों के बाद से जो 1983 में बनाये गए थे, एक लंबी प्रतीक्षा के बाद आखिर ये अस्तित्व में आ सके। तब से लेकर पूरी दुनिया में शिक्षा के परिदृश्य में एक विशाल परिवर्तन आ चुका है। इसलिए जरूरी हो गया था कि इस क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम की रोशनी में देश में वास्तुकला शिक्षा से संबंधित विनियमनों में संशोधन किए जाए। प्राचीन नगर, स्मारक, मंदिर, भवन, आदि सभी समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत तथा विस्मयकारी वास्तु शिल्प के प्रमाण हैं। आधुनिक भारत के वास्तु शिल्प में विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिल्पों से प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है।

श्री धोत्रे ने उम्मीद जताई कि इन विनियमनों को छात्र केंद्रित दृष्टिकोण छात्रों को बेहतर तरीके से उनके कौशलों को सीखने एवं विकसित करने में सुसज्जित करेगा तथा उन्हें 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनायेगा।

वास्तुकला शिक्षा विनियमन, 2020 के न्यूनतम मानकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें  

एमजी/एएम/एसकेजे/डीसी

 

(रिलीज़ आईडी: 1645125) आगंतुक पटल : 46

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ब्लॉक चेन आधारित मतदान समाधान का उपयोग करने का प्रारंभिक विचार


दूरदराज के इलाकों में मतदान के प्रौद्योगिकीय पहलुओं पर विचार-विमर्श के लिए वेबिनार का आयोजन किया गया

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2020 4:37PM ग्वालियर टाइम्स

निर्वाचन आयोग ने तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी के साथ मिलकर, 10 अगस्त 2020 को “टेक्नोलॉजी एस्पेक्ट ऑफ रिमोट वोटिंग: एक्सप्लोरिंग ब्लॉक चेन” पर एक वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार में, भारत और पूरी दुनिया के प्रौद्योगिकीविदों, शिक्षाविदों, नीति पेशेवरों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों एक साथ भागीदार बनें। ब्लॉक चेन आधारित मतदान समाधान का उपयोग करने का प्रारंभिक विचार, 30 अक्टूबर 2019 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास में अपनी यात्रा के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त, श्री सुनील अरोड़ा के मन में प्रारंभिक चर्चा के दौरान आया।

 

इस वेबिनार में चुनाव आयुक्त, श्री सुशील चंद्रा ने मुख्य भाषण दिया। श्री चंद्रा ने चुनाव में ज्यादा से ज्यादा “चुनावी समावेशिता” को सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा कि भौगोलिक बाधाओं के कारण मतदाताओं की बड़ी संख्या अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर रही है। यह बात सामने आती है कि व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा उपचार या अन्य कारणों से, मतदाता अपने वर्तमान पंजीकरण निवास स्थान वाले मतदाता सूची से कहीं अलग रहते हैं। श्री चंद्रा ने हालांकि इस बात पर भी बल दिया कि प्रौद्योगिकी आधारित समाधान तैयार करने के लिए प्राथमिक विचार “सभी हितधारकों के विश्वास को प्रेरित करने, चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को सुनिश्चित करने और मतपत्र की गोपनीयता और योग्यता को सुनिश्चित करने की क्षमता होनी चाहिए।” उन्होंने महसूस किया कि राजनीतिक दलों को यह आश्वस्त करने की भी आवश्यकता है कि यह प्रणाली छेड़छाड़ रहित और सुरक्षित है। श्री चंद्रा ने दूरदराज के क्षेत्रों में मतदान के संदर्भ में कहा कि यह पारंपरिक मतदान केंद्र से प्रस्थान करता है जो केवल एक भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा इंटरनेट के माध्यम से घर पर रहकर मतदान करने की कल्पना नहीं की जा रही है। दूरस्थ मतदान परियोजना, अपने निर्दिष्ट मतदान केंद्रों से दूर रहने वालों के लिए सुरक्षित मतदान करने के लिए उन मतदाताओं को सक्षम बनाने की आकांक्षा रखती है। श्री चंद्रा ने आशा व्यक्त की कि विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करके, आयोग को एक मजबूत दूरदराज के इलाकों में मतदान के लिए मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी जो कि ज्यादा समावेशी और सशक्त होगा।

 

इस वेबिनार में दुनिया भर के 800 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने ब्लॉक चेन प्रौद्योगिकी के वैश्विक अनुभव पर, मापक्रमणीयता की संभावनाओं पर; डेटा गोपनीयता और व्यवस्थापन के मुद्दे पर; डेटा सुरक्षा; प्रमाणीकरण और सत्यापनता पर ध्यानाकर्षित किया। इस वेबिनार को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रो के विजय राघवन, आईआईटी भिलाई के निदेशक, प्रो रजत मूना, आईआईटी मद्रास के निदेशक, प्रो भास्कर राममूर्ति, ग्लोबल ब्लॉकचेन बिजनेस काउंसिल के सीईओ, सैंड्रा रो,  इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ट्रस्टेड ब्लॉकचेन एप्लीकेशंस के सदस्य, मोनिक बचनर, इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ट्रस्टेड ब्लॉकचैन एप्लिकेशन के सदस्य, इस्माईल एरिबास और कुनफुड स्पेनिश चैप्टर ऑफ गवर्नमेंट ब्लॉकचैन एप्लिकेशन के अध्यक्ष ने भी अलग-अलग सत्रों में संबोधित किया।

 

इस वेबिनार को निर्वाचन आयोग के आईटी डिवीजन के प्रभारी, उप निर्वाचन आयुक्त एसएच आशीष कुंद्रा द्वारा दूरदराज के इलाकों में मतदान के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ एक व्यापक परामर्श अभ्यास के रूप में बुलाया गया था।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि मेघ का किया शुभारम्भ


केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि मेघ का किया शुभारम्भ

नए भारत की डिजिटल कृषि की दिशा में उठाया गया एक कदम है कृषि मेघ : श्री तोमर

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2020 6:11PM by ग्वालियर टाइम्स एवं चम्बल की आवाज

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज वर्चुअल माध्यम से केवीसी एल्युनेट (कृषि विश्वविद्यालय छात्र एल्युम्नी नेटवर्क) और उच्च कृषि शिक्षण संस्थानों के लिए ऑनलाइन प्रत्यायन प्रणाली (एचईआई) के साथ ही कृषि मेघ (राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा व्यवस्था- क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं) का शुभारम्भ किया।

केन्द्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत सरकार-विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना को कृषि विद्यालयों के विद्यार्थियों को ज्यादा औचित्यपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से देश में राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो देश की नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है। श्री तोमर ने महत्वपूर्ण अनुसंधान आधारित डाटा डिजिटल रूप में सुरक्षित एवं संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे उस तक देश और दुनिया के किसी भी कोने से पहुंच हासिल की जा सके। उन्होंने कृषि में निजी निवेश को सक्षम बनाने पर भी जोर दिया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि मेघ नए भारत की डिजिटल कृषि की दिशा में उठाया गया एक कदम है, जिसकी कल्पना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई है।

 

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कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि 2-3 आईसीएआर संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा वाले अनुसंधान केंद्र के रूप में तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को रियल टाइम आधार पर डाटा उपलब्ध कराए जाने पर भी जोर दिया।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने कृषि मेघ की स्थापना के लिए आईसीएआर की सराहना की, जो आईसीएआर- भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के आईसीएआर डाटा सेंटर को आईसीएआर- राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद के डिजास्टर रिकवरी केन्द्र के साथ एकीकृत करता है। केन्द्रीय मंत्री ने इस पहल को कृषि में एक क्रांति के रूप में संबोधित किया।

सचिव (डेयर) और महानिदेशक (आईसीएआर) डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने 58 विश्वविद्यालयों का उल्लेख किया, जिन्हें आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (एनएएचईपी) के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में सहयोग दिया गया है। महानिदेशक ने लगभग 377 विद्यार्थियों (यूजी, पीजी और पीएचडी) का उल्लेख किया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण/इंटर्नशिप हासिल की है और उन्हें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के लगभग 120 संकाय सदस्यों ने प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने इंटरनेट तकनीक/ डिजिटलीकरण के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया। डॉ. महापात्रा ने कृषि मेघ की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला, जो छवि विश्लेषण, पशुओं में बीमारी की पहचान आदि के माध्यम से एप्लीकेशन आधारित डीप लर्निंग के विकास और लागू करने के लिए नवीनतम एआई/डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर/ टूल किट्स से युक्त हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि मेघ किसानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और नीति निर्माताओं को आईसीएआर संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा डिजिटल माध्यम से कृषि, शोध, शिक्षा एवं विस्तार के संबंध में जारी अद्यतन एवं ताजा जानकारी हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए डिजिटल इंडिया में एक नया अध्याय है।

इससे पहले, अपने उद्घाटन भाषण में आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. आर सी अग्रवाल ने कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य के बारे में बताया। उन्होंने केवीसी एल्युनेट के विकास पर प्रकाश डाला, जो कृषि विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों के लिए सोशल नेटवर्किंग के विचार का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे 74 कृषि विश्वविद्यालयों के सभी पूर्व छात्र एक दूसरे से जुड़ने में सक्षम होंगे और इससे विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, नियुक्तियों में सहायता मिलेगी, साथ ही उन्हें पूर्व छात्रों का सहयोग भी हासिल होगा।

विश्व बैंक के टास्क टीम लीडर श्री एडवर्ड विलियम ब्रेसन्यान ने आईसीएआर की पहल को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि इससे कृषि शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव आएगा। आईसीएआर और उसके संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से भागीदारी की।

कृषि मेघ की प्रमुख विशेषताएं

  1. राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा व्यवस्था (एनएआरईएस) की डिजिटल कृषि की सेवाओं और बुनियादी ढांचा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 2012 के दौरान विकसित वर्तमान डाटा सेंटर (आईसीएआर-डीसी) को क्लाउड कम्प्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ मजबूत बनाया जाएगा।
  2. एनएआरईएस- क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेस अपने घटकों आईसीएआर-डीसी और आईसीएआर-कृषि मेघ के साथ ई-ऑफिस, आईसीएआर- ईआरपी, शिक्षा पोर्टल, केवीके पोर्टल और मोबाइल ऐप्स, आईसीएआर संस्थान की वेबसाइट, अकादमी प्रबंधन प्रणाली, एल्युमनी पोर्टल, परास्नातक और स्नातक आदि स्तरों के ई-कोर्सेस जैसे अहम एप्लीकेशन को लागू करने के साथ एनएआरईएस प्रणाली की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक मजबूत और गतिशील प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है।
  3. एनएएचईपी के अंतर्गत आईसीएआर डाटा केन्द्र की पहुंच में विस्तार के साथ कृषि विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट और आईटी समाधान चलाने में सक्षम हो जाएंगे।
  4. वर्तमान कोविड-19 महामारी के दौर में आईटी एप्लीकेशंस की 24×7 उपलब्धता के माध्यम से घर से काम करने के साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साथी वैज्ञानिकों के साथ सहयोग संभव हुआ।
  5. आईसीएआर- आईएएसआरआई, नई दिल्ली के आईसीएआर- डाटा सेंटर के साथ जोड़े गए एनएएआरएम हैदराबाद स्थित आईसीएआर- कृषि मेघ का निर्माण भारत में कृषि के क्षेत्र में जोखिम कम करने, गुणवत्ता बढ़ाने, ई-प्रशासन की उपलब्धता और पहुंच, शोध, विस्तार एवं शिक्षा के लिए किया गया है।
  6. एनएएआरएम हैदराबाद को चुना गया है, क्योंकि आईसीएआर-आईएएसआरआई, नई दिल्ली के आईसीएआर- डाटा सेंटर से संबंधित विभिन्न भूकंपीय क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। हैदराबाद भी इसके लिए उपयुक्त है, क्योंकि निम्न आर्द्रता स्तर जैसी अन्य उपयुक्त पर्यावरण स्थितियों के साथ ही कुशल कार्यबल उपलब्ध हैं। यहां के आर्द्रता स्तर को डाटा सेंटर के पर्यावरण के साथ नियंत्रित किया जा सकता है।
  7. इन नए केन्द्र में छवि विश्लेषण के माध्यम से बीमारी और पेस्ट की पहचान, फलों की परिपक्वता और उनके पकने का पता लगाने, पशुओं आदि में बीमारी की पहचान आदि से जुड़े डीप लर्निंग बेस्ड एप्लीकेशंस के विकास और उपयोग के लिए नवीनतम एआई/ डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर/ टूल किट्स मौजूद हैं।

अटल नवाचार मिशन और डेल टेक्नोलॉजिज ने विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम 2.0 का शुभारम्भ किया


अटल नवाचार मिशन और डेल टेक्नोलॉजिज ने विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम 2.0 का शुभारम्भ किया

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2020 6:16PM by Gwalior Times

अटल नवाचार मिशन (एआईएम), नीति आयोग ने डेल टेक्नोलॉजिज के साथ भागीदारी में अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल) के युवा नवाचारकर्ताओं (अन्वेषकों) के लिए आज विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम 2.0 (एसईपी 2.0) का शुभारम्भ किया।

एसईपी 1.0 की शानदार सफलता के बाद नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, डेल टेक्नोलॉजिज के अध्यक्ष व एमडी आलोक ओरी, एआईएम के मिशन निदेशक आर रमणन और लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. अंजलि प्रकाश की उपस्थिति में इसकी दूसरी श्रृंखला की शुरुआत की गई।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा, “आज, मैं आशावाद से भरा हुआ हूं क्योंकि मैंने एटीएल के युवा अन्वेषकों द्वारा किए गए भरोसेमंद नवाचार देखे हैं। इन अन्वेषकों ने मुझे आश्चर्यचकित कर दिया है। जब नागरिकों के सामने आ रही चुनौतियों से अपरंपरागत रूप से निबटने का अवसर मिले तो इस देश के युवा बच्चे काफी कुछ हासिल कर सकते हैं। हमने जब एसईपी 1.0 का समापन किया और एसईपी 2.0 का शुभारम्भ किया है, ऐसे में मैं इन नवाचारों के देश पर पड़ने वाले असर को देखकर खासा उत्साहित हूं।”

एसईपी 2.0 से विद्यार्थी अन्वेषकों को डेल के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा। उन्हें संरक्षण; प्रोटोटाइपिंग और परीक्षण समर्थन; एंड यूजर फीडबैक;बौद्धिक संपदा पंजीकरण और आइडिया, प्रक्रियाओं और उत्पादों का पेटेंट संरक्षण हासिल करने;विनिर्माण सहयोग के साथ ही बाजार में उत्पाद के लॉन्च में भी सहयोग हासिल होगा।

डेल टेक्नोलॉजिज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आलोक ओरी ने कहा, “डेल अपने अनुभवों के सहारे विद्यार्थियों को सशक्त बनाने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग कर रही है। जिससे उन्हें नवाचार की मानसिकता विकसित की जा सके। हम पहले विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम के निष्कर्षों से खासे खुश हैं और अगले बैच की उपलब्धियों का इंतजार कर रहे हैं। नीति आयोग के साथ हमारी मजबूत भागीदारी से सामाजिक हित और नए उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए अपने तकनीक के विजन का विस्तार हो रहा है।”

इस अवसर पर अपने संबोधन में एआईएम मिशन निदेशक आर. रमणन ने कहा, “नवाचार मिशन का उद्देश्य देश में एक मिलियन नए अन्वेषक और संभावित रोजगार देने वाले तैयार करना है। डेल टेक्नोलॉजिज के साथ हमारी भागीदारी के तहत विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम के माध्यम से युवा स्कूली विद्यार्थियों को प्रोत्साहन के द्वारा युवा अटल टिंकरिंग लैब अन्वेषकों की उद्यमी क्षमताओं में बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही देश भर की नई प्रतिभाओं के लिए एक नवीन मंच तैयार हुआ है।”

एसईपी 1.0 की शुरुआत जनवरी, 2019 में हुई थी। 10 महीने लंबे कठिन कार्यक्रम के माध्यम से एक देशव्यापी प्रतियोगिता-एटीएल मैराथन के शीर्ष छह दलों को नवीन प्रोटोटाइप्स को पूरी तरह कार्यशील उत्पादों में परिवर्तित करने का मौका मिला, जो अब बाजार में उपलब्ध हैं। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने सामुदायिक चुनौतियों की पहचान की और एटीएल के अंतर्गत जमीनी स्तर पर नवाचार और समाधान तैयार किए गए।

एटीएल मैराथन के पिछले सीजन में लगभग 1,500 नवाचार जमा किए गए थे। दो कठिन चरणों के बाद, 50 दलों को विद्यार्थी अन्वेषक कार्यक्रम के लिए चुना गया था। 75 प्रतिशत से ज्यादा विजेता दल टियर-2 शहरों और/ या ग्रामीण क्षेत्रों से और 60 प्रतिशत से ज्यादा सरकारी स्कूलों से थे। विजेता दल में लगभग 46 प्रतिशत बालिकाएं थीं। फिर अटल इनक्यूबेशन केन्द्रों ने विद्यार्थी अन्वेषक कार्यक्रम के माध्यम से कई महीनों तक संरक्षण दिया गया था। इस क्रम में, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा 14 नवंबर, 2019 को आठ शीर्ष दलों को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया था। शीर्ष 8 दल अब एसईपी 2.0 के माध्यम से अपने प्रोटोटाइप्स को उत्पाद के स्तर पर ले जाएंगे।

एआईएम के मिशन निदेशक आर. रमणन ने छह दलों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “पिछले कुछ महीनों में, आपने एक उद्यमी बनने के लिए धैर्य और उत्साह दिखाया है। अपनी दृढ़ता के परिणाम स्वरूप आप अपने स्टार्टअप्स और उद्यमों के ‘सह संस्थापक’ बन गए हैं। आत्मनिर्भर भारत का यही सार है।” उन्होंने कहा कि उद्योग के साथ इस तरह की भागीदारियां युवा विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिए अहम हैं और इससे हमारा ग्रह एक बेहतर स्थान बनने में सक्षम हो जाएगा।

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