एक्सपेरीमेंट दर एक्सपेरीमेंट , लाखों ने जान गंवाई , फिर भी एक्सपेरीमेंट , ध्वस्त लोकतंत्र , सस्पेंड संविधान और विचारहीन भारतीय विपक्ष


नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’ आनन्द’’

नाम है कोरोना , सबसे ताकतवर , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी जिसके दास हैं , तुच्छतम साबित कर दिये । उसी कोराना की बात करें तो जानेंगें कि आखिर कितना बड़ा है ये है और कहां तक कितनी पहुंच है इसकी । आज के इस समसामायिक आलेख में इसी सब पर चर्चा करते है दो किश्तों के इस आलेख में , यह पहली किश्त है इस आलेख की ।

कोरोना की भारत में दस्तक : यह कब हुई कैसे हुयी शायद किसी को कुछ पता नहीं , बस इतना पता है कि ये विदेश से आया , बाकायदा पासपोर्ट वीजा लेकर भारत आया , पहली महिला रोगी दक्षिण भारत में मिली । पहली से लेकर आज करोड़ों तक इसके पॉजिटिव आंके जा रहे हैं ।

जांचने का सूत्र और फार्मूला : अभी तक इसकी जांच और इसे ट्रेस करने का फार्मला भारत तो क्या समूचे विश्व में नहीं हैअगर होता तो इसे

ट्रेस किया जा सकता , और जब ट्रेस ही हो जाता तो इसे खत्म किया जा सकना बेहद आसान होता , ट्रेस नहीं हो पा रहा इसीलिये सब काम अंदाजिया हो रहा है , थर्मल स्केनर असल में बॉडी टेम्परेचर नापने या पता लगाने का एक जरिया या साधन है , किसी संक्रमण या रोग की जांच करने का उपकरण नहीं , बिल्कुल उसी तरह जैसे कि थर्मामीटर , बस फर्क इतना है कि वह मुंह में डालना पड़ता है या बगल में दबाना पड़ता है , उसे टेंपरेचर स्केनर कहना तक तो ठीक है लेकिन संक्रमण स्केन कर देगा या बॉडी स्केन कर देगा यह समझना निहायत ही नादानी है ।

एयरपोर्ट पर या कोर्ट आदि में या अन्य वी आई पी एंटर्स पर भी अनेक तरह के स्केनर्स होते हैं , मसलन मेटल डिटेक्टर , इन्फ्रारेड बॉडी स्केनर , एक्सरेज स्केनर , प्रैंक स्केनर्स इत्यादि इत्यादि ।

हर स्केनर या डिटेक्टर का काम करने का तरीका अलग अलग , थ्योरी और फार्मूला सब कुछ अलग अलग है , कुछ मैग्नेटिक वेव्स पर तो कुछ इलेक्ट्रोमैगनेटिक वेव्स पर , कुछ इन्फ्रारेड वेव्स पर तो कुछ फौटो इफैक्टिव बेस पर तो कुछ लेजर वेव्स पर काम करते हैं , सबसे अधिक प्रभावी और शक्तिशाली स्केनर्स कॉस्मिक वेव्ज और ईथर आधारित होते हैं । ये अभी भारत तो क्या संभवत: चीन के पास भी नहीं हैं , हालांकि ये अंतरिक्ष केन्द्र के लिये काम करने वाले इसरो या नासा जैसे संस्थान ईको के लिये इस्तेमाल करते हैं और इन्हें किसी ग्रह पर कास्मिक वेव्ज या ईथर वेव्ज भेजकर ईको प्राप्त करते हैं और उस ग्रह से ईको में मिली चीजें विश्लेषित करके अनुमानों की पूरी श्रंखला और थ्योरी तैयार करते हैं जिसके आधार पर किसी ग्रह की रिसर्च व स्टडी आगे बढ़ती है , हालांकि इन सब में संस्कृत भाषा और ऊँ आदि का प्रयोग किया जाता है लेकिन यह हमारा इस आलेख का विषय नहीं है । अत: मूल बात यह कि हमारे पास सुविधा तो है मगर कॉस्मिक वेव्स या ईथर वेव्ज स्कैनर्स नहीं हैं ।

कोई स्केनर कितनी डेप्थ तक यानि गहराई तक स्केन कर सकता है

वर्तमान में प्रचलित भारत के स्केनर 2 डायमेंश्नल स्केन ही कर पाते हैं इससे अधिक नहीं , 3 डायमेशनल स्केनर्स अभी उपलब्ध नहीं हैं , मल्टी डायमेंश्नल उपलब्ध होने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता , वह तो केवल ईश्वर प्रदत्त मनुष्य या किसी अन्य प्राणी के शरीर में ही खासियत है कि वह 3 डी या मल्टी डायमेंश्नल देख भी पाता है सुन भी पाता है , महसूस भी कर पाता है और एक्ट या रियेक्ट भी कर पाता है  । लिहाजा किसी भी प्राणी का या मानव शरीर संसार का या कहें कि ब्रह्मांड का सर्वश्रेष्ठ स्केनर है , इससे बेहतर कोई अन्य स्केनर नहीं , बाकी तो डिटेक्टर हैं कि धातु कहां है कितनी है , हड्डी जैसी सख्त अपारदर्शी चीजें जिन्हें एक्सरे नहीं भेद पातीं वे हड्डीयां  स्केन कर उनका फोटो केवल इस आधार पर बनातीं हैं कि अपारदर्शी चीज कहां कहां और क्या क्या हैं उन्हें ही एक्सरे प्लेट कहा जाता है , अगर कोई हुक वगैरह शरीर पर हुआ तो वह हुक भी एक्सरे के लिये अपारदर्शी होकर वह भी चित्र के रूप में एक्सरे प्लेट पर आ जाता है , मतलब ये कि यह स्केनर भी केवल कुछ सीमा तक ही परफेक्ट है , पूर्ण परफेक्ट नहीं ।

डिजिटल कैमरे दो टेक्नालाजीयों पर काम करते हैं , एक तो इन्फ्रारेड वेव्स के जरिये तस्वीरें या वीडियो खींचते हैं और दूसरे इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेव्स के जरिये तस्वीरें और वीडियो खींचते हैं । दोनों की गुणवत्ता अलग अलग प्रकार की होती है , लेकिन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स वाले कैमरे को बिजली की लाइनों या किसी मैग्नेटिक फील्ड से दूर रखना जरूरी है वरना करेंट पास होकर केमरा होल्डर की मौत का कारण बन जाता है । इन्फ्रारेड कनेक्टिविटी की इसी तरह से अलग प्रकार की सावधानियां हैं । खैर ये सब इस आलेख के विषय नहीं हैं ।

किस गहराई तक कोई स्केनर स्केन कर सकता है यह निर्भर करता है , एक्सरे पूरे शरीर को भेद जातीं हैं मगर कुछ स्किन ढांचा उनमें दिखता है , मतलब यदि इस स्केनर को कुछ विशेष तरीकों से इस्तेमाल किया जाये तो यह आदमी की स्किन के अंदर महज जरा सा ही भेद कर केवल स्किन और उसकी बनावट यानि बाल या रोयें तक दिखा सकता है , थर्मल स्केनर शरीर का टेंपरेचर और ब्लड सर्कुलेशन तक दिखा सकता है या बता सकता है यदि इसे तरीके से इस्तेमाल किया जाये तो ।

फौटो लाइट या फोटो इफेक्ट स्केनर केवल कंप्यूटर आदि में फोटो या डाक्यूमेंटस स्केन करने के काम आते  हैं । अलबत्ता इसे बड़े स्प में कभी कभी आदमी की आरिजनलिटी की पहचान के लिये भी विदेशों में इस्तेमाल किया जाता है , मगर भारत उन देशों में शामिल नहीं है , यहां अभी केवल ऑंखों के डाक्टरों के पास रहने वाली बायोमीट्रिक डिवाइस मात्र है । और फिंगर प्रिंट स्केन करने के लिये थर्मल + फोटो स्केनर है वह भी अभी 3 डी नहीं है । वरना ऊंगली दबा कर रखने के बजाय केवल मशीन में दिखाने मात्र से ही फिंगर प्रिंट स्केन हो जाते ।

……… शेष अगले भाग में …..      

नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’ आनन्द’’

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