न्याय बंधु के लीगल एड क्लिनिक का प्रभारी आशीष मित्तल को नियुक्त किया गया


  • ग्वालियर हाई कोर्ट के जूरिस्डिक्शन क्षेत्रांतर्गत कार्य करेगा लीगल एड क्लिनिक
  • गरीबों , लाचारों को मिल सकेगी मुफ्त कानूनी सलाह और सेवायें
  • तहसील कोर्ट से लेकर एस डी एम और कलेक्टर कोर्ट से लेकर जिला एवं सत्र न्यायालयों तथा हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट स्तर की सलाह एवं सेवायें उपलब्ध होंगी
  • लीगल क्लिनिक पर पात्र हितग्राहियों के अलावा अन्य व्यापारीयों और उच्च स्तरीय लोगों के लिये भी कानूनी सलाह और सेवायें सशुल्क उपलब्ध रहेंगीं
  • लीगल एड क्लिनिक पर ट्रेड मार्क , कॉपीराइट , डिजाइन , पेटेंट सम्बन्धी मामले , ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रेशन व उनकी समस्यायें , व्यापारीयों व्यावसाईयों की विभन्न समस्यायें , समितियों , फर्म्स , एम एस एम ई पंजीयन , स्टार्ट अप्स , लोन योजनाओं में सहायता , कंपनी पंजीयन , कंपनियों व शिक्षा आदि से जुड़े मामले भी निराकृत किये जायेंगें । पथ विक्रेताओं , लघु व्यासाईयों आदि के प्रकरण भी लीगल एड क्लिनिक से निराकृत किये जायेंगें ।
आशीष मित्तल

मुरैना 22 अक्टूबर 2022 । न्याय विभाग भारत सरकार के लिये अधिकृत व कार्यरत न्याय बंधु एडवोकेट नरेन्द्र सिंह तोमर ने अपना लीगल एड क्लिनिक , स्थानीय गोपीनाथ की पुलिया पर स्थित बालाजी प्लाजा में स्थापित व शुरू करने का अधिकार शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं व्यापारी व व्यावसाई श्री आशीष मित्तल को सौंपा है । श्री मित्तल वर्तमान में शगुन साड़ी कलेक्शन के संचालक तथा उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ जिला मुरैना के अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक श्री राकेश मावई के विधायक प्रतिनिधि हैं । 

न्याय बंधु नरेन्द्र सिंह तोमर एडवोकेट ने श्री आशीष मित्तल के सामाजिक कार्यों और जन हितैषी व निष्काम व निष्पक्ष कार्य को देखते हुये लीगल एड क्लिनिक संचालन योग्य शख्सियत व सुपात्र पाते हुये , अपने लीगल एड क्लिनिक का प्रभारी नियुक्त किया है ।

इस लीगल एड क्लिनिक के तहत श्री मित्तल हर प्रकार के कानूनी सहायता व सलाह के इच्छुकों की एवं किसी भी स्तर की कोई भी समस्या या परेशानी की प्राथमिक सुनवाई कर सकेंगें , उनको विभिन्न प्रकार के आवेदन उपलब्ध करायेंगें , उनकी समस्या के उपचार का स्तर व बिन्दु तय कर सकेंगें , उन्हें यदि उच्च स्तरीय विधिक सहायता या सलाह की आवश्यकता महसूस होने पर वे लीगल एड क्लिनिक से जुड़े किसी भी एडवोकेट से मिलवा सकेंगें और उनका परमर्श और सहायता दिलवा सकेंगें , यदि श्री आशीष मित्तल को यह महसूस होता है कि किसी प्रकरण में किसी को न्याय बंधु से मिलवाने , या उनकी सलाह या सहायता की आवश्यकता है , तो वे न्यायबंधु को संबंधित पीड़ित व्यक्ति , संबंधित संगठन के प्रकरण की फाइल तैयार कर सौंपेंगें उसके बाद सीधे न्यायबंधु से मुलाकात करायेंगें ।

आशीष मित्तल अपने क्लिनिक के तहत आने वाले प्रकरणों की छंटनी / स्क्रूटनिंग कर सकेंगें , और उसका स्तर सुनिश्चित करेंगें , इस लीगल एड क्लिनिक से प्राप्त व केवल अनुशंसित प्रकरण ही न्यायबंधु द्वारा ग्रहण किये जायेंगें ।

श्री मित्तल विधिक सहायता के व मुफ्त सलाह के प्रकरण राष्ट्रीय विधिक सहायता प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 12 के पात्र हितग्राहियों की अलग फाइल बनाकर उसे विधिक सहायता के लिये चिह्नित कर , ऑन लाइन या मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से न्याय विभाग भारत सरकार की विधिक सहायता हेतु न्याय बंधु के भारत सरकार के पोर्टल पर पंजीकृत कर सकेंगें और प्रकरण के पंजीयन की जानकारी व रसीद सुरक्षित रखेंगें । इसी प्रकार वे यदि किसी प्रकरण में नालसा से विधिक सहायता दिलाना उचित समझेंगें तो उस केस को नालसा में पंजीकृत कर उसकी जानकारी और रसीद सुरक्षित रखेंगें , यदि वे किसी केस को जिला स्तर की विधिक सहायता का पात्र समझेंगें तो उसे जिला विधिक सहायता प्राधिकरण की ओर प्रेषित कर देंगें ।

श्री मित्तल अपने लीगल एड क्लिनिक के माध्यम से विधिक साक्ष्रता , जागरूकता व शिक्षा प्रशिक्षण आदि के विभन्न लोगों , विभन्न समूहों , आम जनता के लिये शिविर , सेमिनार , वर्कशॅाप आदि का आयोजन कर सकेंगें ।  वे विधिक साक्षरता , जानकारी , जागरूकता संबंधी कानूनी या लोकहित सामग्री के प्रकाशनों जैसे पुस्तक , पुस्तिकायें , न्यूज लेटर्स, अन्य प्रकार के साहित्य पत्रकायें आदि प्रकाशित व वितरित कर सकेंगें , वे प्रचार प्रसार , विज्ञापन प्रकाशन , पेम्पलेटस, हेण्डबिल्स , होर्डिंग्स , बैनर्स , कैलेंडर्स आदि  के माध्यम से व्यापक प्रचार कर सकेंगें ।

वे कानून के सहयोग के लिये तथा अपने क्लिनिक के कार्य व सहयोग के लिये , विभन्न स्तर के न्यायालयों के सहयोग के लिये पैरालीगल वालंटियर्स नियुक्त कर सकेंगें । वे क्लिनिक के सहयोग व कार्य के लिये विभिन्न एडवोकेट नियुक्त कर सकेंगें या उन्हें हटा सकेंगें ।

वे साप्ताहिक प्रतिवेदन न्यायबंधु को प्रस्तुत करेंगें और केवल पूर्णत: जवाबदेह न्यायबंधु , सचिव, न्याय विभाग भारत सरकार , प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संबंधित जिला , मुख्य न्यायाधीश म.प्र. उच्च न्यायालय तथा मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय के प्रति होंगें ।       

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