स्वर्ण‍िम मध्यप्रदेश एक हकीकत एक सच्चाई, भारत के नबंर 1 राज्य और अटल ज्योति और भले व शरीफ नेताओं की असल कहानी


पर्दे के पीछे का सच , म.प्र. शासन

लीजिये फिल्म देख लीजिये ‘ हमारा म.प्र. नं 1 स्वर्ण‍िम मध्यप्रदेश” नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” सन 2009 या 2010 के दरम्यान या आसपास की है , हम लोग फेसबुक पर काफी धमाल व शरारत मचाते रहते थे , कई बीजेपी वाले और आर.एस.एस. वाले हमारे मित्र थे ( हैं ) , उस समय सचिन खरे म.प्र. भाजपा के आई टी. सेल का काम देख रहे थे , हम हर तरह का लेखन कर रहे थे रूबाइयों से लेकर शायरी तलक और दोहों चौपाइयों से लेकर कविताओं तलक , हास्य व्यंग्य से लेकर समाचारों तक सब कुछ जोरदार चल रहा था , कई विषयों पर हमारी जबरदस्त बहस तर्क और पंगा हो जाता और हम हिन्दू को बिन्दू बना देते …. सचिन खरे हमारे बहुत पक्के मित्र थे , तब भी बिजली बहुत परेशान करती थी और रोज हम फेसबुक पर पूरे इंटरनेट पर मुरैना व म.प्र. की बिजली कटौती लिखते , जमकर गरियाते, साला लोकल लोगों का ही धंधा फेल देख देख कर , कोई भी बाहर वाला इन्वेस्टर म.प्र. में इन्वेस्ट करने नहीं आता , जब लोकल वाले ही धंधा एक कौड़ी का बिना बिजली चला नहीं पा रहे तो , कोई महामूरख ही होगा जो बाहर से आकर करोड़ों अरबों रूपये का इन्वेस्ट म.प्र. में करे , मामा सैकड़ों इन्वेस्टर मीट करा करा के अबों रूपये फूंक गया , साली एक हजार तो पंचायतें करवा डालीं मगर नतीजा सिफर , व्यापम से लेकर डंपर तक , बंपर से लेकर जंपर तक , म.प्र. में बचा कुछ नहीं जो घोटाले और भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ा हो । खैर बात हम उस बात की कर रहे थे जब हमारा लिखा हुआ कुछ भी चुरा कर लोग अपनी फेसबुक ववाल पर चस्पा करके उसे मेक इन इंडिया बना लेते थे , लेकिन हमारी कलम दनादन चलती थी इसलिये हम परवाह नहीं करते थे , म.प्र. भाजपा आई.टी. सेल के सचिन खरे ने हमसे आइडिया लिया …. देश का दिल मध्यप्रदेश … हृदय स्थल ….. और उसने कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा जमाया और ”देश का दिल देखा ” के नाम से एक गीत बना डाला और एक विाापन फिल्म बना डाली , हमें सबसे पहले दिखाई … हमने कही बकवास है साली , पूरे म.प्र. की मट्टी कूट दी है , साली कितनी बोगस बंकस वाहियात स्क्र‍िप्ट और कितना भद्दा भौंड़ा गीत संगीत बनाया है , और गाया भी साला ऐसा है जैसे छक्के गाते हैं , सज रही डोल मेरी मां … सुनहरे गोटे में …. जैसे हां जी हां जी हांजी करते हैं और ताली ठोकते हैं …. या फिर हमारा काम है हम तो …. सरे बाजार नाचेंगें ….. वाली स्टाइल में गा डाला है , उधर कम से कम रफी साहब थे तो गाना ही बदल कर गीत हो गया , सहगीत भी संगीत हो गया … तुमने तो म.प्र. की बुरी तरह से रगड़ मार के रख दी ….. खैर हमारे विपरीत प्रत्युत्तर के बावजूद भी वह फिल्म उन्होंनें जारी कर दी और सोशल मीडिया , भाजपाई वेबसाइटों सहित तमाम टी.वी. चैनलों पर वह विज्ञापन फिल्म चलवा डाली … मगर नतीजा वही सिफर …. फिर भी साला कोई इन्वेस्टर नहीं आया ….. हमारी एक लाइन और एक रूपैया ….. उनके हजार पन्नों को और करोड़ों रूपयों को बर्बाद कर देता था ….. खैर कोई इन्वेस्टर अभी तक म.प्र. में आया नहीं , खुले खुलाये सारे उद्योग धंधे बंद हो गये , सारे शक्कर मिल बंद हो गये , तिलहन संध में ताले पड़ कर उसकी तो पूरी मशीनरी ही गायब हो गई , कुल मिला कर नया कुछ नहीं आया , उल्टे जो था वह भी सब आहिस्ते आहिस्ते खत्म व नष्ट हो गया …… अब खैर सचिन खरे शायद नहीं हैं म.प्र. भाजपा के आई टी. सेल में …… मगर फिल्म असल में क्या जानी चाहिये थी , किस तरह जानी चाहिये थी … म.प्र. में क्या देखने लायक है …. हमने नमूने की एक फिल्म बनाई है …. इसे देख लीजिये ….. फिल्म कुछ इस तरह बनानी और चलवानी थी …. बहुत कुछ है यहॉं देखने को …. यह दिखाना चाहिये था …. इस फिल्म का शीर्षक है … ” हमारा म.प्र. नं 1 स्वर्ण‍िम मध्यप्रदेश”

Gwalior Chambal News Updates 26th January


ग्वालियर चम्बल संभाग के 26 जनवरी तक के समाचार अपडेट * राजमाता विजयाराजे की पुण्यतिथ‍ि *राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम की झलकियां * चीनोर में जनसंपर्क विभाग का सूचना कैम्प * मुरैना का गणतंत्र दिवस * डायमंड मिशन पब्‍िलक स्कूल , गणेश पुरा मुरैना का गणतंत्र दिवस कार्यक्रम * मुरैना एस.ए. एफ. परेड ग्राउण्ड पर आयोजित हुआ सरकारी गणतंत्र दिवस समारोह की झलकियां Presented By Gwalior Times

तोमर राजवंश और अफ्रीका की हिडिम्बा , क्यों कहा जाता है , महान और बड़े लोगों को अफ्रीका में मुरैना , पढि़ये 3 साल तक अफ्रीका में रहे डॉ. लेफ्ट‍िनेंट कर्नल राजेश सिंह चौहान का यह आलेख “मुरैना”


तोमर राजवंश और अफ्रीका की हिडिम्बा , क्यों कहा जाता है , महान और बड़े लोगों को अफ्रीका में मुरैना , पढि़ये 3 साल तक अफ्रीका में रहे डॉ. लेफ्ट‍िनेंट कर्नल राजेश सिंह चौहान का यह आलेख
“मुरैना”
डा करनल राजेश चौहान·19 जनवरी 2016
क्या आप जानते हैं कि “मुरैना” शब्द का कोई मतलब भी होता है ? यदि नहीं तो यह जान लीजिये कि दक्षिण अफ्रीका के एक क्षेत्र में अपने से बड़े व्यक्ति को “मुरैना” कहकर सम्बोधन करते है l अब ग्वालियर और भिण्ड से लगे हुए इलाके को “मुरैना” ही क्यों कहते हैं, कुछ और क्यों नहीं क्या किसी ने इस विषय में सोचा भी है ? हम इतिहासकार नहीं है, पर इतना तो पता है कि मोरेना में बसने वाला तोमर वंश अपना इतिहास महाभारत काल के एक पांडव पुत्र श्री अर्जुन से जोड़ता रहा है l अब यदि हम महाभारत काल के इतिहास पर कुछ और ध्यान दें, तो हमें याद आएगा कि पाण्डव जब दुर्योधन से जुए में सब कुछ हार गए थे, तब उनको वनवास और अज्ञातवास भोगने के लिए विवश भी होना पड़ा था l अब यदि इतिहास और भूगोल को जोड़कर हम इस बात को देखें, तो हमें ज्ञात होगा कि भारत और अफ्रीका उस काल में एक ही भूखण्ड हुआ करते थे, जिसे भूगोलिक गोंडवानालैंड की संज्ञा से जानते हैं l अब इस सबको जोड़कर हमारा अनुमान तो यही बनता है कि पाण्डव दक्षिण भारत होते हुए अफ्रीका के दक्षिण छोर पर पहुँच गए थे जहां उनका मिलाप “हिडिम्ब” कबीले से हुआ होगा l और हमारा यह भी अनुमान है कि इसी “हिडिम्ब” कबीले से पाण्डव पुत्र श्री भीम की पत्नी “हिडिम्बा” का सम्बन्ध था l यह “मुरैना” शब्द हिडिम्ब कबीले और उसके आस पास के इलाके में प्रयोग में आज भी आता है l तीन साल हम भी अफ्रीका के बोत्स्वाना में वास कर के आये हैं, और वहां हमें काफी लोगों ने हमेशा ही मुरैना कहकर सम्बोधित करा, और हमने भी यह शब्द और इसका मतलब सीखकर वहां के अपने से ऊंचे ओहदे वालों को मुरैना कहकर सम्बोधित करा l तमिल नाडू के मामल्लपुरम जिसे महाबलीपुरम भी कहते हैं, वहां पांडवों पर आधारित मूर्तियां और कृतियाँ आज भी मौजूद हैं जिसे UNESCO ने संसार की धरोहरों में शामिल करके रखा हुआ है l और यदि भारत देश और अफ्रीका एक ही भूगोलिक खण्ड किसी समय पर हुआ करते थे, तो बेहद सम्भव है कि पाण्डव पुत्र वनवास और अज्ञातवास में छुपते छुपाते तमिल नाडू के महाबलीपुरम होते हुए अफ्रीका के दक्षिणी छोर तक पहुँच गए होंगे, जहां पर श्री भीम ने हिडिम्ब कबीले के हिडिम्बा देवी से ब्याह रचाया हो l , और यह “मुरैना” शब्द अफ्रीका से दहेज़ में आया हो और इस चम्बल के स्वर्णिम क्षेत्र में पांडव परिवार और उनके वंशजों को सम्बोधन में इस्तेमाल होते-होते इस पूरे क्षेत्र का नाम ही “मुरैना” पड़ गया हो l अब यदि “मुरैना” शब्द का कोई और मतलब हो, या मोरेना शब्द का कोई अन्य इतिहास हो, तो हम अपना यह लेख मिटा देंगे l वैसे हमारे लिए यह गर्व की बात है कि “मुरैना” जिले में हमारे कई एक रिश्तेदार हैं l श्री भीम और अन्य पांडव हमेशा ही “मुरैना” नाम से जाने-अनजाने सम्बोधित होते रहे हैं, और होते रहेंगे l यह लेख इतिहास पर आधारित हमारी एक पुस्तक का हिस्सा है, जो हम समय मिलने पर लिख रहे हैं l
जय हिन्द, जय मुरैना
डा० (लैफ्टीनैंट कर्नल) राजेश चौहान
आगरा

Arjun Africa Morena Lt. Col. Chouhan महाभारत का नक्शा

श्री भैरव चालीसा एवं श्री भैरव रक्षा स्तोत्र ( जंजीरा)


 

 

स्वर एवं उच्चारण – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनंद”

श्री महामाई पीताम्र्बरा राज राजेश्वरी भवानी बगलामुखी का कवच एवं खडगमाला महा सिद्ध महापाठ वाडियो


श्री महामाई पीताम्र्बरा राज राजेश्वरी भवानी बगलामुखी का कवच एवं खडगमाला महा सिद्ध महापाठ वाडियो – श्री महामाई पीताम्र्बरा राज राजेश्वरी भवानी बगलामुखी का कवच एवं खडगमाला महा सिद्ध महापाठ https://youtu.be/40OtLF-5JYo इसका आडियो तैयार है , लेकिन फिलवक्त इसका वीडियो वर्ल्डवाइड रिलीज में गया है , अत: फिलहाल अपने चॅनल पार्टनर्स के विज्ञापनों के इसमें जाने के कारण इसका आडियो अभी ब्राडकास्ट नहीं किया जा रहा ……. बाद में कभी वर्ल्ड वाइड ब्राडकास्ट करेंगें अत: अभी कृपया केवल वीडियो ही देखें – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” , प्रधान संपादक , ग्वालियर टाइम्स समूह श्री महामाई पीताम्र्बरा राज राजेश्वरी भवानी बगलामुखी का कवच एवं खडगमाला महा सिद्ध महापाठ

View a Short Film on Best I. A. S. Officers of Madhya Pradesh Part-1


अपनी वेबसाइट केवल 60 रूपये में रजिस्टर करें , नये साल पर ग्वालियर टाइम्स की विशेष भेंट

भारतीय नवीन सौर वर्ष के शुभागमन पर आपको हार्दिक मंगलमय शुभकामनायें


Happy New Year

क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय खेल संगम का केन्द्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर द्वारा समापन


जयपुर राजस्थान के सांसद एवं भारत सरकार के माननीय केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा निशानेबाजी ( शूटिंग) में ओलंपिक पदक विजेता कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर द्वारा कल जयपुर में 27 दिसंबंर को ”क्रीड़ा भारती ” के ”राष्ट्रीय खेल संगम” कार्यक्रम का समापन चौगान स्टेडियम जयपुर में किया , उसी समापन कार्यक्रम के युवाा खेल प्रतिभाओं के लिये प्रोत्साहनवर्धक संबोधन करते हुये केन्द्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर के चित्र ( ब्राडकास्टेड थ्रू आउट वर्ल्ड ग्वालियर टाइम्स द्वारा )

col Rajyavardhan Singh

फेसबुक पर कृपया इस प्रोफाइल में अब मित्रता अनुरोध न भेजें , हमारी अन्य प्रोफाइलें भी हैं , कृपया वहॉं जाकर हमसे जुड़ें – एक विनम्र अनुरोध – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”


This Post already Published yesterday at my Facebook Profile https://www.facebook.com/narendrasinghtomar/ and also at automatically tweeted by Facebook at my Twitter Account https://twitter.com/narendra_singh and already shared some super top official of Govt. of India . Now it is Broadcasting through our wireless over to air system to throughout the world and releasing also through Gwalior Times worldwide with our channel partners Google and 300 more worldwide partners of our network. its copy through broadcasting also sending to C. B. I. Madhya Pradesh and also to officials of Lokayukt of Madhya Pradesh with All Ministers og Govt. of India and other States with Madhya Pradesh All concerned I. A. S’s and I. P. S.’s. with Prime Minister of India, All Super Top Politicians and officials of All Parties and Govt’s. Look just it is Published yesterday .
फेसबुक पर कृपया इस प्रोफाइल में अब मित्रता अनुरोध न भेजें , हमारी अन्य प्रोफाइलें भी हैं , कृपया वहॉं जाकर हमसे जुड़ें – एक विनम्र अनुरोध – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”

प्रिय मित्रगण , फेसबुक की हमार इस प्रोफाइल पर आपके रोजाना निरंतर व दनादन मित्रता निवेदन मिल रहे हैं, और कुछ अनावश्यक या आवश्यक टैगिंग भी बहुत ज्यादा मिल रही है । अत: यह अनुरोध लिखना आवश्यक प्रतीत हुआ । दरअसल एक तो हमारी यह प्रोफाइल वर्षों से मित्रता सूची के तौर पर 5 हजार मित्रों की पूरी संख्या से भरी पूरी होकर एकदम से फुल चल रही है । एकाध दो चार कभी कोई मित्र कम होता है तो हम नया कोई मित्र उसमें जोड़ कर फिर पूरी 5 हजार कर देते हैं । अभी हमने देखा कि इस समय करीब 500 से ज्यादा मित्रता अनुरोध स्वीकृति के लिये लंबित हैं । अत: दो बातें हम कहना चाहेंगें कि एक तो यह कि जो हमारे बहुत वर्षों से पुराने मित्र हैं और हमसे जुड़े हैं , उन्हें हम अपनी सूची से हटाना नहीं चाहते , यहॉं तक कि हमारे पुराने मित्र प्रसिद्ध पत्रकार स्व. आलोक तोमर और बंगाल के शंभूनाथ पाण्डेय जी को उनके निधन के बाद भी हमने अपनी सूची से आज तक विलोपित नहीं किया यानि हटाया नहीं है , उनसे इस फेसबुक पर हमारी बहुत सी यादें जुड़ी हैं । इसी प्रकार यह भी कि जो निष्क्र‍िय मित्र हैं और हमें यह लगता है कि उन्हें हमारी मित्र सूची में रखने या न रखने का कोई औचित्य नहीं है और वे कभी हमारी प्रोफाइल की ओर आते भी नहीं , उनके संबंध में हटाये जाने व सूची खाली किये जाने संबंधी निर्णय हम अब अगले साल ही यानि जनवरी 2016 में ही लेंगें , कम से कम इस साल तो कतई नहीं , और इस साल के समाप्त होने में महज अब 12 दिन बाकी हैं । तीसरी अहम बात यह कि हमारे फैसलों के पीछे हमारा मन , आत्मा , ईश्वरीय , शास्त्रीय व ग्रंथों में में उपलब्ध सिद्धांत , कुदरत के इशारे आदि काम करते हैं , हम तदनुसार ही अपने फैसले करते हैं और विशेषकर ज्योतिष इसमें अहम भूमिका अदा करता है , और ज्योतिषीय सिद्धांतों व संकेतों के आधार पर अपने कार्य व निर्णय तय करते हैं । जनवरी में बहुत बड़े दो ज्योतिषीय परिवर्तन होने जा रहे हैं , तथा 22 दिसंबर से सूर्य उत्तरायण होने जा रहे हैं और देवताओं की रात्रि समाप्त होकर उनका दिन शुरू होगा व राक्षसों का दिन समाप्त होकर उनका रात्रिकाल शुरू होगा और सब बदलावों पर हमारी गहरी नजर है , उसके बाद का गणि‍त फलित क्या कहता है , इसके विश्लेषण के बाद ही हम अपने कार्य व नीतियों का निर्धारण करेंगें । तब फैसला लेंगें कि अपनी फेसबुक मित्रसूची से किसे निकालें और किसे जोड़ें । तथा असली जीवन में भी अपनी कार्य व नीति निर्धारण करेंगें । यही वह खास वजह है कि हमारी टेबल पर मुरैना जिला से संबंध रखने वाले दो बहुत बड़े पुलिस केस दर्ज कराये जाने हेतु लंबित हैं , जो बड़े बड़े तीस मरखाओं के न केवल होश उड़ा देंगें , वरन उन्हें राजा से रंक बना कर जेल तक पहुँचा देंगें , दोनों ही केस बहुत बड़ी व बहुत छोटी हस्त‍ियों से ताल्लुक रखते हैं । किन्तु इन्हीं ज्योतिषीय व ईश्वरीय सिद्धांतों , संकेतो व नीतियों पर अमल करने की हमारी आदत बहुत पुरानी है , लिहाजा उन्हें भी हम लंबे समय से रोके हुये हैं , हमारी आदत चौतरफा हमला करने की है , हम चारों ओर से घेरकर मारते हैं या मौत के घाट उतारते हैं । और तीन तरफा घेरा हम पहले से ही डाल चुके हैं , बस अब सीधा हमला बाकी है । जब इतने महत्वपूर्ण कार्य को हमने रोका हुआ है , जिसमें ऐसे महत्वपूर्ण व जीतने वाले श्रेयपूर्ण कार्यो के लिये लोग तरसा करते हैं , ऐसे न जाने कितने काम हम कर चुके हैं , लेकिन नाम से या प्रचार से बचते हैं । लिहाजा हमारा टारगेट केवल टारगेट रहता है , उसका चर्चा नहीं । नाम तो हमारा पहले से ही बहुत नामवर कह लीजिये या बदनाम कह लीजिये , बहुत जबरदस्त विख्यात या कुख्यात हैॅ । अत: जिसे मारना है, बचाना हैॅ सब काम अगले साल ही करेंगें । दूसरे चूंकि अब हमारे पास व्यस्तता और काम की बहुत ज्यादा मसरूफियत है , हमें न केवल मीडिया का ही वरन , घर परिवार , खेती बाड़ी, वकालत, गांव , रिश्तेदारी , व्यवहार सहित तमाम भूमिकायें निभाने के साथ , परेशान पव मजलूम लोगों को सुनना व उनकी समस्या का समाधान व निराकरण भी करना पड़ता है , कभी कभी कई गांवों में जाकर पंचायतें सुननी पड़ती व उनमें अपने फैसले सुनाने पड़ते हैं । दूसरे चूंकि अब आगे अले साल से और बड़ी कुछ जिम्मेवारीयां आने वाली हैं , कुछ पारिवारिक तो कुछ व्यावसाय‍िक , कुछ संपत्त‍ि संबंधी , अत: अब व्यस्तता और ज्यादा बढने वाली है । उधर ग्वालियर में मकान बनना है , दिल्ली में जबरदस्ती अपने आप ही कुलदेवी की कृपा व आशीर्वाद से आश्रम शुरू हो गया है , वहां भी अब दौड़धूप लगातार रहेगी , दिल्ली का दूसरा दौरा भी जनवरी में करना है । वहॉं और भी कुछ दैवीय कृपा से कुछ गोपनीय व बहुत बड़े काम निबटाने हैं । लिहाजा दूसरी बात यह कि राजनीति से हम स्वयं बाहर निकल कर या छोड़ कर आये हैं , अत: राजनीतिक दल यह उम्मीद कतई न करे कि हम उनकी मर्जी से कोई काम करेंगें या कुछ लिखेंगें । मुरैना का बिजली विभाग हम पर खासा मेहरबान है, जिसकी तमाम अनिराकृत कंपलैंटस पहले से ही दर्ज हैं,ओर दो कंपलैंटस भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार व कार्मिक मंत्रालय में दर्ज हैं जो आज तक अनिराकृत हैं , जिनमें से एक कंपलैंट सीधे मुरैना सांसद, मुरैना कलेक्टर व ऊर्जा विभाग म.प्र. के प्रमुख सचिव सहित कई अन्य लोगों के विरूद्ध दर्ज है , जो कि अभी कार्यवाही के आधीन है । इस कंपलैंट के बाद तो जैसा आमतौर पर भारत में होता है , वही धमकाना , आतंकित करना और कंपलैंट वापस लेने के लिये हर किस्म की जोर आजमाइशें व पूरी ताकत लोग लगाते हैं सो लगाई जा रहीं हैं , हमारी बिजली लिहाजा जरूररत से ज्यादा रोजाना जानबूझ कर काटी जा रही है । खैर चुकि भ्रष्टाचार व सरकारी नाकारापन सरकारी बदतमीजी से जंग लड़ने के हम बहुत पुराने जंगबाज हैं , और धूल चटा कर जमींदोज कर नाम नक्शा इतिहास भूगोल सब मिटा देने का हमारा बहुत पुराना इतिहास है , वह तो खैर हम निबट ही लेंगें । ये तो बहुत ही छोटे जीव जंतु हैं जो अपनी जात व औकात के साथ अपने पदों की पॉवर दिखा रहे हैं , और यह सब हम बहुत बार बहुत सी ऐसी जंगों में देख चुके हैं और उनके अंजाम भी लिख चुके हैं । खैर माजरे से वाकिफ हैं हम, मगर अंजाम से वाकिफ नहीं है वे , हमारी पुरानी हिस्ट्री देख लेते या पता लगा लेते तो शायद ऐसी हिमाकत और जुर्रत न करते । बस यही अनुरोध है आप सबसे कि कृपया अभी नवीन मित्रता निवेदन यहॉं फेसबुक पर न भेजें , फिलहाल इस साल न हम किसी को हटाने जा रहे हैं और न जोड़ने , जो हैं सो फिलवक्त जस के तस ही रहेंगें , अगर एकाध दो चार कम हुये तो उसकी पूर्ति अवश्य कर देंगें । चूंकि म.प्र. या मुरैना में या विशेषकर हमारे यहां बिजली का कोई भरोसा नहीं रहता और नये साल पर बिजली रहे या न रहे अत: बीते और जाते साल 2015 की विदाई की इस घडी में आप सभी को नवीन आगत वर्ष 2016 की अग्रिम शुभकामनायें व बधाईयां जय श्री कृष्ण … जय जय श्री राधे – आपका अपना नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”

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