मुरैना वासी- रोज जहर पी रहे हैं लोग , महादेव नीलकंठ के बराब जहर पी चुके 69 साल में


पानीपत युद्ध में महाराजा विक्रमादित्य सिंह तोमर का शहादत दिवस आज


पानीपत के प्रथम युद्ध के वीरता पूर्वक लड़ते हुये युद्ध के मैदान में वीरगति पाकर मुगल बाबर से युद्ध करते हुये ग्वालियर सम्राट महाराजा विक्रमादित्य सिंह तोमर एवं 16 हजार राजपूत वीर योद्धाओं की शौर्य व पराक्रमशाली शहादत को गौरवपूर्ण सादर नमन व प्रणाम
तोमर राजवंश , तोमर राजपरिवार एवं समस्त तोमर राजपूत तथा भारत के समस्त क्षत्रिय व राजपूत
( क्षमा करें , हमें यह दुखद खेद है कि मुरैना में कल से पूरे दिन व आज लगातार बिजली कटौती के चलते , शहीदों की यह गौरवशाली व सादर नमन प्रणाम की पोस्ट डालने में , व्यापम व आरक्षण की औलादों , जातिवादीयों व महाभ्रष्टों गुलामों व वर्णसंकरों की हरकतों के कारण विलंब हुआ )

Vikramaditya Paneepat

अब फेसबुक के जरिये हर चीज व हर सेवा खरीदिये बेचिये , फेसबुक बना ई व्यापार और ऑनलाइन खरीदी बिक्री का सबसे बड़ा माध्यम


लक्ष्मी तंत्रम 4

अब फेसबुक के जरिये हर चीज व हर सेवा खरीदिये बेचिये , फेसबुक बना ई व्यापार और ऑनलाइन खरीदी बिक्री का सबसे बड़ा माध्यम
– नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”
व्हाटस एप्प द्वारा एण्ड टू एण्ड सिक्योरिटी देने के बाद , सारी सामग्री एनक्रिप्शन कर देने के बाद अब जहॉं खुद व्हाटस एपप कंपनी भी किसी के द्वारा किसी को या किसी ग्रुप के सदस्य न होते हुये उस सामग्री को पढ़ नहीं सकती , वहीं अब पुलिस व साइबर सेल की पकड़ से भी व्हाटस एप्प बाहर निकल गया है , इसके साथ ही व्हाटस एप्प अकाउंट हैक करने वालों और दूसरे के मोबाइल नंबर से अकाउण्ट ऑपरेट करने वालों और हैकिंग की जद से भी व्हाटस एप्प बाहर निकल गया है । कंपनी द्वारा इसके लिये व्हाटस एप्प एप्लीकेशन के लिये अपडेटस विगत सप्ताह मंगलवार को जारी कर , मंगलवार से ही यह सुविधा लागू कर दी गयी थी ।
फेसबुक ने भी अपनी सिक्योरिटी बढ़ाते हुये , डाटा एन्क्र‍िप्शन के साथ ही ई व्यापार और ऑन लाइन खरीदी बिक्री की बहुत बड़ी अंतर्राष्ट्रीय सेवा शुरू की है , अब पूरे विश्व में कहीं से भी कुछ भी फेसबुक के जरिये खरीद और बेच सकते हैं ।
फेसबुक पर कुछ खरीदने बेचने के लिये , ई व्यापार या ऑनलाइन खरीदी बिक्री के लिये आपको फेसबुक की निम्न लिंकों पर जाकर , निम्न खरीदी बिक्री समूहों का सदस्य बनना होगा , इसके साथ ही आप अपने घर से बैठकर ही या अपने मोबाइल फोन के जरिये ही जो कुछ भी आपके पास बेचने के लिये या खरीदने के लिये हो , खरीद बेच सकते हैं , यहॉं तक कि पूरे विश्व में जहॉं भी जो कुछ सस्ता , अच्छा या दुर्लभ से दुर्लभ चीज या वस्तु या सेवा उपलब्ध करा सकते हैं या बेच सकते हैं या खरीद सकते हैं ।
फेसबुक के इन खरीद बिक्री समूहों के लिये निम्न में से किसी भी समूह को दोनों समूहों को ज्वाइन कर लें , इसके बाद आपके लिये फेसबुक पर खरीदने एवं बिक्री करने का  आप्शन खुद ब खुद खुल जायेगा , और पैसे सीधे आपके बैंक खाते में पहुँचने लगेंगें ।
http://www.facebook.com/groups/Gwaliorsale/
*
http://www.facebook.com/groups/evaapar/

Narendra Singh Tomar ” Anand”

जब दिल में उल्फत हो , दूर दूर तक ना नफरत हो , तब होती है ऐसी यारी रिश्तेदारी


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जब दिल में उल्फत हो , दूर दूर तक ना नफरत हो , तब होती है ऐसी यारी रिश्तेदारी
And Something Special for You. This Holi Special . The Super Popular Baaghi Sardar of Chambal Late. Madho Singh ( Madho Singh – Mohar Singh Giroh) Son, Mr. Sahdev Singh Bhadoriya Playing Holi with Me. … A super Shot at my House. होली विशेष : चम्बल के मशहूर बागी सरदार स्व. माधौ सिंह ( माधौ सिंह – मोहर सिंह गिरोह) के बागी सरदार स्व. माधौ सिंह के सुपुत्र श्री सहदेव सिंह भदौरिया के साथ अबकी बार खेली गई हमारी होली का एक सुपर चित्र – यूं कि ये रंग रोगन सहदेव सिंह को हमीं ने पोता है .. जरा दिल से , जरा तबियत से – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” , मुरैना म.प्र.

 

मशहूर फिल्म अभि‍नेत्री आभा परमार ने लाइक कीं कई पोस्ट नरेन्द्र सिंह तामर ”आनन्द” की


मशहूर फिल्म अभि‍नेत्री आभा परमार ने लाइक कीं कई पोस्ट नरेन्द्र सिंह तामर ”आनन्द” की
ग्वालियर टाइम्स , 14 मार्च 2016 , ग्वालियर की मूलत: निवासी और ख्याति नाम मशहूर फिल्म अभि‍नेत्री आभा परमार ने आज फेसबुक के ग्रुप चम्बलघाटी में नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” की कई पोस्ट और वीडियो , एक साथ लाइक किये , जिसमें उनका महाभारत योद्धा अर्जुन के वंशज होने एवं आरक्षण पर जारी वीडियो भी शामिल है ।
उल्लेखनीय है कि मूलत: ग्वालियर की निवासी आभा परमार अनेक बड़े बैनर की फिल्मों जिसमें अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म ”मैं आजाद हूँ ” तथा अन्य अनेक बड़े हीरोज की फिल्में शामिल हैं , में काम कर चुकीं हैं , इसके साथ ही वर्षों से वे टी.वी. की मशहूर एक्ट्रेस भी हैं , और उनके तमाम सीरियल दूरदर्शन सहित तमाम चैनलों पर आ चुके हैं जिसमें बंगाली पृष्ठभूमि पर प्रसिद्ध सीरियल , चन्द्रकान्ता , सहित सैकड़ों टी.वी. सीरियल शामिल हैं , दोपहर में दूरदर्शन पर दिखाये जाने वाले ”घण्टा प्रसाद , घण्टा वाले” में भी एक प्रमुख में नजर आईं ।
यह भी स्मरणीय है कि आभा परमार और नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” न केवल एक साथ ही एक ही स्कूल में ग्वालियर में पढ़े हैं और केवल एक कक्षा जूनियर व सीनियर रहे हैं , बल्क‍ि ग्वालियर में आकाशवाणी ग्वालियर से कई सुपर हिट कार्यक्रम भी साथ साथ दे चुके हैं , अनेक ड्रामा व नाटकों में साथ साथ काम कर चुके हैं । एक्टिंग के अनेक मैडल्स भी साथ साथ जीत चुके हैं , आभा परमार और नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” दोनों एक दूसरे के स्कूल के समय से फेन रहे हैं , आभा परमार ग्वालियर से लेकर बंबई और मुंबई तक का लंबा सफर तय करके अभि‍नय की दुनियां की , फिल्मी व टी.वी. पर्दे की आज बहुत बड़ी स्टार हैं , जबकि नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” वहीं अपने ग्वालियर चम्बल में जहॉं की तहॉं जमे और डटे हैं ।
आभा परमार की फेसबुक के चम्बलघाटी ग्रुप में ढेर सारी लाइकिंग से प्रसन्न नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” ने केवल इतना कहा कि , जब हम आमने सामने कभी मिलेंगें , सही आनंद तो उस दिन आयेगा , लेकिन आभा ने अपनी व्यस्तता में से समय निकाल कर भी फेसबुक पर न केवल हमें जमकर पढ़ा वरन फिल्म दुनियां के नामी गिरामी हस्त‍ियों , हीरोज व हीरोइन को भी लगातार हमारी इसी तारतम्य में रखा और चंबल पर पान सिंह तोमर पर बरसों पहले लिखी हमारी एक आलेखनुमा स्टोरी पर पूरी फिल्म ”पान सिंह तोमर” ही बनवा दी , इसके लिये हम आभा के कृतज्ञ व आभारी हैं । आभा ने बंबई में ग्वालियर और चम्बल को जिन्दा रखा , यहॉं की भाषा व संस्कृति को जिन्दा रखा , यह हमारे लिये फख्र की बात है ।

Abha Parmar

हमें लौटना होगा दोबारा पुरानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर – नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”


हमें लौटना होगा दोबारा पुरानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर
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– नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”
काफी चिन्तन के बाद एक निष्कर्ष तो लगभग तय है कि तथा कथि‍त अर्थशास्त्रीयों द्वारा तय की गई आधुनिक व आज की भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है , यद्यपि अर्थव्यवस्था के भूमंडलीकरण ( ग्लोबलाइजेशन) और रूपये का प्रसार व फैलाव बढ़ाना तो ठीक बात है लेकिन इसके कारण बढ़ती मुद्रा स्फीति का बेलगाम होना और देश भर में मंहगाई का सुरसा के मुँह की तरह फैलना बेशक ही सोचनीय व चिन्तनीय बात है और इस जगह आकर ही आप साबित कर देते हैं कि भारत की प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था संबंधी प्रणाली बेहद पुख्ता और सुदृढ़ रही है जिसमें मुख्य विनिमय आधार पारस्परिक सेवा विनिमय या वस्तु विनिमय रहा है और बीच में ”रूपया” जैसे माध्यम के लिये बहुत ही संकीर्ण और लगभग ” ना” के बराबर स्थान रहा है । जब से अर्थव्यस्था के सुदृढ़ीकरण के नाम पर बीच में माध्यम यानि ”रूपया” डाला गया है, तब से बेशक ही तथाकथि‍त विदेशों में जाकर पढ़ लिख कर समय व धन बर्बाद करके आये अर्थशास्त्री देश के लिये या भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये स्वत: ही अपरिचित , अन्जाने एवं अप्रासंगिक हो गये और उनके लिये यह भारत देश एक अर्थशास्त्र के प्रयोगों को करने की प्रयोगशाला मात्र बनकर रह गया । प्रयोगधर्मिता व ”विकासशील” के नाम पर किये गये सारे ही प्रयोग भारत के ढांचे के अनुसार असफल और विनाशकारी ही सिद्ध हुये , हमने मुद्रास्फीति बढ़ाकर हमेशा सोचा कि हम विकास दर बढ़ा कर आगे जा रहे विकासशील देश हैं और कभी सोचा कि हम मुद्रास्फीति घटा कर विकास दर बढ़ा रहे हैं , आदमी की या साधारण आदमी की क्रय शक्त‍ि घटाते बढ़ाते रहने के फार्मूले में हमने इतने कीमती वर्ष गंवा दिये और आज हम अपने देश को गंवा देने और विदेशी धन के देश में विनियोग की या किसी भीख मांगते भि‍खारी की तरह दयनीय हालत में पहुँच चुके हैं । आज प्रदेशों व राज्यों की हालत बहुत नाजुक एवं खस्ता है , वे किसी अमीर उद्योगपति या औद्योगिक घरानों के तलुये चाट चाट कर पूरा राज्य लाल कारपेट बिछा कर उसे बदले में देने को तैयार हैं भले ही विधि‍ की सत्ता की यह अवधारणा हो कि ”राज्य जनता व वहॉं रहे प्रत्येक प्राणी की अमूल्य निधि‍ व संपत्त‍ि है, लेकिन राजनेताओं को विधि‍ की सत्ता की इस अवधारणा से कुछ लेना देना नहीं , वे अपने बाप का माल समझ कर पूरे प्रदेश को जैसे चाहे जिसे चाहे , जब चाहें सौंप देते हैं , इसके लिये उन्हें लगता है कि जनता ने उन्हें 5 साल के लिये खुद को और खुद की सारी निधि‍यों व संपत्त‍ि को ( जिसमें जनता की सामूहिक व निजी व्यक्त‍िगत प्रतिष्ठा एवं सम्मान भी शामिल है) किसी को भी सौंप देने का लायसेन्स दे दिया है और वे सब कुछ कर सकते हैं । उनकी अज्ञानता , अनुभवहीनता व विशेषज्ञता हीनता उन्हें स्वयं कुछ सोचने समझने विचारने की शक्त‍ि से विहीन करके उन्हे किराये के टट्टू सुझाव देने वाले सलाहकार या किसी अन्य बैसाखी लगा कर चलने वाले पंगु व मतिहीन की तरह बाध्य कर देती है । लिहाजा पहले तो इसका उसका परामर्शदाता , सलाहकार सुझाव मंडल , परामर्शदाता मंडल चाहिये , यानि कि आपके पास स्वयं का दिमाग नहीं और ऊपर से आप चीख चीख कर साबित करते हैं कि आपके आसपास खड़ी करोड़ों कर्मचारीयों और अफसरों से भरी पड़ी , सातवें वेतनमान ( जनसंपत्ति‍ ) से पल पोस कर बढ़ रही पूरी की पूरी फौज बेमतलब की , नाकारा व मतिहीन , दिमाग विहीन तथा योजना परियोजना विहीन , वैसे ही यूं ही नियुक्त कर लिये गये गधों व टट्टूओं की फौज है , लिहाजा हर काम के लिये आपको कंसल्टैण्ट चाहिये , फिर ये सरकारी अफसरों व कर्मचारीयों की अनावश्यक सरकारी सातवें वेतनमान की इस फौज का मतलब भी क्या है , हटाइये इसे और कंसल्टैण्ट ही पालिये , कुल मिलाकर धारणा अवधारण तोड़कर पूरी तरह से पंगु हो चुकी राजनीति में आज हालत इतनी दयनीय व नाजुक है कि हर कोई यानि कि राज्य सरकार से लेकर देश की सरकार तक किसी न किसी को यह देश दे देने या सौंपने को हर पल तैयार है ।
पूर्णत: आश्रित स्थति से गुजर रहा आज की तारीख में यह भारत देश अभी तक ”विकासशील ” देश है , जबकि सच कुछ अलग व जुदा है , भारत तो बर्षों वर्ष पहले से विकसित देश रहा है और पूरे विश्व का पालनहार देश रहा है , पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था का हजारों लाखों साल तक संचालन कर चुका देश है । विकासशील तो 70 साल का बुढ्ढा भी सदा रहता है वह 71 की ओर बढ़ रहा विकासशील है और 69 की तुलना में वह विकसित है , हम हमेशा बगल वाले किसान के खेत की फसल देख कर ही उसे उन्नत समझते आये हैं औ और वह किसान हमारे खेत की फसल देख कर हमें उन्नत समझता रहा है लेकिन शब्द विकासशील का तात्पर्य है अपने से बड़े की ओर देखना व हमेशा खुद को विकासशील कहना , विकसित का अर्थ है हमेशा अपने से छोटे की ओर देखना और खुद को विकसित कहना, हमने अपनी नसों में या तथाकथि‍त अर्थशास्त्रीयों ने देश को इतनी दयनीय व नाजुक हालत में पहुँचा दिया है कि हम हमेशा ही ”विकासशील” देश ही बने रहेंगें और कभी विकसित देश नहीं बन पायेंगें , दूसरी भाषा में इसे ही 99 का फेर कहा जाता है , जो हमेशा पूरे 100 होने की प्रतीक्षा में सदैव ही ”विकासशील” बना रहता है और वह कभी पूरा 100 नहीं बन पाता ।
जिहाजा कुल मिला कर जाहिर है कि जिन मस्त‍िष्क विहीन पंगु राजनेताओं ने पूरे के पूरे देश को ही प्रयोगशाला बना कर बर्बादी के कगार में इस कदर झोंक दिया हो कि उस देश में सरकारें वस्तुत: निर्वाचित नेताओं के हाथ में नहीं , बल्क‍ि किसी व्यापारिक व्यक्ति‍यों द्वारा या औद्योगिक घरानों के विनियोग या कुछ दे देने के लिये 24 घंटे भीख मांगने की हालत में पहुँच चुकी हों और प्रदेश व देश बेच देने के लिये पूरी तरह आतुर व रहम की पात्र बन चुकीं हों , बेशक जहॉं तीन चार पीढ़ीयां पूरी तरह से बेरोजगार बैठीं हों , जिनके घरों का पालन पोषण बाप या दादा की पेंशन पर आश्रित होकर चल रहा हो , उन्हें कितना और बातों के बतासे बांट कर बहला बहला कर ये राजनेता वक्त गुजार सकेगें यह तो वही जानें , किन्तु इतना तो जाहिर है कि असल बेरोजगारी देश में 90 फीसदी से ऊपर जा चुकी है और पेंशनधारी भी कब तक जिन्दा रहेंगें , कब तक इस देश में लोगों के चूल्हे पेंशन पर जलते रहेंगें , एक आदमी की पेंशन में आठ दस लोग जिन्दा हैं , यह दशा कब तक इस देश में बनी रहेगी । यह तो ईश्वर ही जाने मगर यह तो जाहिर है कि इंतहा की भी सरहदें समाप्त हो चुकीं हैं और आने वाले दौर में या वक्त में कुछ ठोस नहीं हुआ तो भारत को जो कि आतंकवाद की प्रयोगशाला भी साथ ही साथ पनप कर बनता चला जा रहा है बेशक वह दिन दूर नहीं जब प्रयेग कर सरकारें बदल बदल कर बार बार उम्मीद लगा रही जनता का अंदरूनी आक्रोश फूट पड़े और ये सब्स‍िडी वो सब्स‍िडी , ये कार्ड , वो कार्ड के सारा खेल खत्म होकर गृहयुद्ध भारत देश में छिड़ जाये , विधि‍ की सत्ता पूर्णत: समाप्त हो जाये और लोग सड़कों पर आ जायें , एक दूसरे को खुलेआम लूटने मारने लगें , यह दिन दूर नहीं , इस लिहाज से आज एक ललित मोदी या विजय माल्या पी खा कर उड़ा कर बाहर भागने के रास्ते टटोलता फिर रहे हैं , पता लगे कि सारे ही नेता देश छोड़ छोड़ कर भाग गये , और जनता के पास उन्हें लूटने के लिये भी कुछ नहीं छोड़ गये । मंजर खतरनाक है , सचेत हो जाईये , सब्जबागों के दिखाते चले जाने से किसी के पेट नहीं भरते , हर फिल्म को एक निश्च‍ित वक्त पर समाप्त होना है , भारतवासी भूखे हैं उन्हें रोटी और रोजगार चाहिये , अवसरों की भरमार चाहिये , वरना खत्म हो यह लंबा इंतजार चाहिये ।

सवर्ण गरीबों को भी मिलेगा आरक्षण , राजस्थान सरकार ने आयोग गठित किया , सविधान में संशोधन होगा


भगवान शंकर का महा मृत्युंजय स्तोत्र


स्वर्ण‍िम मध्यप्रदेश एक हकीकत एक सच्चाई, भारत के नबंर 1 राज्य और अटल ज्योति और भले व शरीफ नेताओं की असल कहानी


पर्दे के पीछे का सच , म.प्र. शासन

लीजिये फिल्म देख लीजिये ‘ हमारा म.प्र. नं 1 स्वर्ण‍िम मध्यप्रदेश” नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” सन 2009 या 2010 के दरम्यान या आसपास की है , हम लोग फेसबुक पर काफी धमाल व शरारत मचाते रहते थे , कई बीजेपी वाले और आर.एस.एस. वाले हमारे मित्र थे ( हैं ) , उस समय सचिन खरे म.प्र. भाजपा के आई टी. सेल का काम देख रहे थे , हम हर तरह का लेखन कर रहे थे रूबाइयों से लेकर शायरी तलक और दोहों चौपाइयों से लेकर कविताओं तलक , हास्य व्यंग्य से लेकर समाचारों तक सब कुछ जोरदार चल रहा था , कई विषयों पर हमारी जबरदस्त बहस तर्क और पंगा हो जाता और हम हिन्दू को बिन्दू बना देते …. सचिन खरे हमारे बहुत पक्के मित्र थे , तब भी बिजली बहुत परेशान करती थी और रोज हम फेसबुक पर पूरे इंटरनेट पर मुरैना व म.प्र. की बिजली कटौती लिखते , जमकर गरियाते, साला लोकल लोगों का ही धंधा फेल देख देख कर , कोई भी बाहर वाला इन्वेस्टर म.प्र. में इन्वेस्ट करने नहीं आता , जब लोकल वाले ही धंधा एक कौड़ी का बिना बिजली चला नहीं पा रहे तो , कोई महामूरख ही होगा जो बाहर से आकर करोड़ों अरबों रूपये का इन्वेस्ट म.प्र. में करे , मामा सैकड़ों इन्वेस्टर मीट करा करा के अबों रूपये फूंक गया , साली एक हजार तो पंचायतें करवा डालीं मगर नतीजा सिफर , व्यापम से लेकर डंपर तक , बंपर से लेकर जंपर तक , म.प्र. में बचा कुछ नहीं जो घोटाले और भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ा हो । खैर बात हम उस बात की कर रहे थे जब हमारा लिखा हुआ कुछ भी चुरा कर लोग अपनी फेसबुक ववाल पर चस्पा करके उसे मेक इन इंडिया बना लेते थे , लेकिन हमारी कलम दनादन चलती थी इसलिये हम परवाह नहीं करते थे , म.प्र. भाजपा आई.टी. सेल के सचिन खरे ने हमसे आइडिया लिया …. देश का दिल मध्यप्रदेश … हृदय स्थल ….. और उसने कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा जमाया और ”देश का दिल देखा ” के नाम से एक गीत बना डाला और एक विाापन फिल्म बना डाली , हमें सबसे पहले दिखाई … हमने कही बकवास है साली , पूरे म.प्र. की मट्टी कूट दी है , साली कितनी बोगस बंकस वाहियात स्क्र‍िप्ट और कितना भद्दा भौंड़ा गीत संगीत बनाया है , और गाया भी साला ऐसा है जैसे छक्के गाते हैं , सज रही डोल मेरी मां … सुनहरे गोटे में …. जैसे हां जी हां जी हांजी करते हैं और ताली ठोकते हैं …. या फिर हमारा काम है हम तो …. सरे बाजार नाचेंगें ….. वाली स्टाइल में गा डाला है , उधर कम से कम रफी साहब थे तो गाना ही बदल कर गीत हो गया , सहगीत भी संगीत हो गया … तुमने तो म.प्र. की बुरी तरह से रगड़ मार के रख दी ….. खैर हमारे विपरीत प्रत्युत्तर के बावजूद भी वह फिल्म उन्होंनें जारी कर दी और सोशल मीडिया , भाजपाई वेबसाइटों सहित तमाम टी.वी. चैनलों पर वह विज्ञापन फिल्म चलवा डाली … मगर नतीजा वही सिफर …. फिर भी साला कोई इन्वेस्टर नहीं आया ….. हमारी एक लाइन और एक रूपैया ….. उनके हजार पन्नों को और करोड़ों रूपयों को बर्बाद कर देता था ….. खैर कोई इन्वेस्टर अभी तक म.प्र. में आया नहीं , खुले खुलाये सारे उद्योग धंधे बंद हो गये , सारे शक्कर मिल बंद हो गये , तिलहन संध में ताले पड़ कर उसकी तो पूरी मशीनरी ही गायब हो गई , कुल मिला कर नया कुछ नहीं आया , उल्टे जो था वह भी सब आहिस्ते आहिस्ते खत्म व नष्ट हो गया …… अब खैर सचिन खरे शायद नहीं हैं म.प्र. भाजपा के आई टी. सेल में …… मगर फिल्म असल में क्या जानी चाहिये थी , किस तरह जानी चाहिये थी … म.प्र. में क्या देखने लायक है …. हमने नमूने की एक फिल्म बनाई है …. इसे देख लीजिये ….. फिल्म कुछ इस तरह बनानी और चलवानी थी …. बहुत कुछ है यहॉं देखने को …. यह दिखाना चाहिये था …. इस फिल्म का शीर्षक है … ” हमारा म.प्र. नं 1 स्वर्ण‍िम मध्यप्रदेश”

Gwalior Chambal News Updates 26th January


ग्वालियर चम्बल संभाग के 26 जनवरी तक के समाचार अपडेट * राजमाता विजयाराजे की पुण्यतिथ‍ि *राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम की झलकियां * चीनोर में जनसंपर्क विभाग का सूचना कैम्प * मुरैना का गणतंत्र दिवस * डायमंड मिशन पब्‍िलक स्कूल , गणेश पुरा मुरैना का गणतंत्र दिवस कार्यक्रम * मुरैना एस.ए. एफ. परेड ग्राउण्ड पर आयोजित हुआ सरकारी गणतंत्र दिवस समारोह की झलकियां Presented By Gwalior Times

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