साइबर क्राइम से बचने के तरीके तथा आपको इंटरनेट या आनलाइन या सोशल मीडिया पर हतोत्साहित करने वालों को , कार्यवाही न करने वाले पुलिस वालों को कैसे जेल भिजवायें


सायबर क्राइम और हेकिंग कैसे पहचानें और क्या कानूनी कार्यवाही करें कि हैकर्स और आनलाइन आपको सोशल मीडिया तथा अन्य जगह हतोत्साहित करने वाले क्रिमिनल्स को सजा दिलाकर जेल भिजवायें
‘ नरेन्द्र सिंह तोमर ” आनंद” एडवोकेट , सायबर क्राइम स्पेशलिस्ट एडवोकेट
बहुत खतरनाक है माइक्रोसाफ्ट का एज क्रोमियम ब्राउजर ….. हेकर्स के लिये बेहद आसान और प्राक्सी वेबसाइट … नकली वेबसाइटों की ओर रीडायरेक्ट करना …. नये एज क्रोमियम वेब ब्राउजर की विशेषता है , सेव्ड पासवर्ड का हैकर्स के लिये आसानी से इस्तेमाल करना तथा मनमाने नकली प्रदर्शन करना आदि नये एज क्रोमियम ब्राउजर की खासियतें हैं , बच कर रहिये , इसे एंटीवायरस भी सिक्यारिटी प्रदान नहीं करता है , इसमें व्हाटस वेब भी नहीं चलता है और इस एज क्रोमियम ब्राउजर को डिनाई कर देता है ,जबकि इसके उलट इंटरनेट एक्सप्लोरर , गूगल क्रोम ब्राउजर सही काम करते हैं , जबकि फायर फॉक्स को एंटीवायरस सिक्योरिटी प्रदान नहीं करता , हालांकि इसमें व्हाटस एप्प वेब सही चलता है …. अत: इंटरनेट इस्तेमाल करते समय या सर्फिंग करते समय ब्राउजर का चयन काफी सोच समझ कर करें और सिस्टम के सेव पासवर्डों को हर 36 र्घंटे पर बदलते रहें , हालांकि मात्र अकेला माइक्रोसाफ्ट अपने ई मेल में हर 72 घंटे पर पासवर्ड बदलने की सुविधा देता है लेकिन अन्य कोई नहीं , लिहाजा आप कोई सा अकाउंट इस्तेमाल करें दो चरणीय सत्यापन अवश्य लागू करें । हैकर इसके बाद अपने आपकी मोबाइल सिम को कनेक्ट करने/ हैक करने का प्रयास करेगा , आप बड़ी आसानी से पकड़ सकेंगें कि हैकर अगल बगल में है या दूर से रिमोट कंट्रोल किया जा रहा है , दूर से कंट्रोल करने वाला मोबाइल सिम कंट्रोल नहीं कर पायेगा और लोकल में ही अगर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी का एजेंट या मांबाइल सिम बेचने वाले कारिंदे या इंटरनेट सामान रूटर या वायरलेस डिवाइसेज , कैमरे वाइफाइ या वेबकैम बेचने या इस्तेमाल करने वाले किसी के द्वारा गड़बड़ी की जा रही होगी तो आसानी से पकड़ में आ जायेगी , यह गड़बड़ी ट्रांसमिशन टावर से भी की जा रही होगी तो आसानी से पकड़ में लाने के लिये अपने मोबाइल फोन को एक टावर से दूसरे स्थान की ओर ले जाते वक्त स्विच आफ करके ले जाइये , दूसरे तीसरे चौथे टावर लोकेशन पर इसी तरह अलग अलग चेक कर लीजिये , गड़बड़ी वाला टावर आसानी से पकड़ में आ जायेगा , आपको आई टी एक्ट 2000 के संशोधित अधिनियम व सभी संशोधित प्रावधानों का बेहतर ज्ञान किसी अच्छे सायबर क्राइम स्पेशलिस्ट एडवोकेट से पाना चाहिये , उसके उपरांत ललिता कुमारी बनाम बिहार राज्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश और दिशा निर्देशों के अनुसार पुलिस को एफ आई आर देना चाहिये , सबूत इकठ्ठे करना पुलिस का काम है , यदि फॅिर भी पुलिस कार्यवाही न करे तो ललिता कुमारी बनाम बिहार राज्य के अनुसार आप पुलिस को केस देने के 15 दिन गुजरने ( 15 दिन गुजरने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सन 2019 में जारी किया है ) के बाद कभी भी आप जिला अदालत में धारा 200 का परिवाद लायें और जिला अदालत उसे रिजेक्ट करे या न सुने तो हाईकोर्ट में धारा 482 की पिटीशन लायें हाईकोर्ट एफ आई आर दर्ज करने और विवेचना करने व उसका धारा 173 के तहत रिपोर्ट यानि कि चालान पेश करने का आदेश जारी करेगा । इसमें खास ख्याल रखने वाली बात यह होगी कि आपने खुद ने जो भी जानकारी या साक्ष्य या सबूत इकठ्ठे करें हैं उन्हें बाकायदा किसी तकनीकी स्पेश्लिस्ट या किसी ऐसे एडवोकेट की मदद से जिसने कि बी एस सी गणित से या इंजीनियरिंग करने के बाद एल एल बी की हो , उसकी सहायता से एक डायरी में सारे ब्यौरे कलमबद्ध कर लेने चाहिये , यह न केवल हाईकोर्ट में काम देंगें बल्कि बाद में एफ आई आर के अदालत में मुकदमें में यानि क्रिमिनल केस के रूप में चलने में मुलजिमों को सजा दिलाने में काम आयेंगेंं , क्योंकि इलेक्ट्रानिक एविडेसेज और इलेक्ट्रानिक रिकार्डस कितने भी बार डिलीट करने के बावजूद कभी ख्त्त्म नहीं होते , ये डिलीट हो जाने के बाद भी बड़ी आसानी से रिकवर हो जाते हैं । चूंकि इन मामलों में एफ आई आर दर्ज न करने वाले या इससे जिम्मेवार सभी पुलिस कर्मी भी इस अपराध में मुलजिम बनते हैं और उनकी नौकरी तो जाती ही है , वेतन पेंशन तो जप्त होते ही हैं , जेल भी तुरंत ही जाना पड़ता है , लिहाजा वे आखरी दम तक साक्ष्य सबूत नष्ट करेंगें और आपको अदालतों तक जाने से रोकेंगें ही , क्योंकि उन्हें अपनी हर चीज जाजी और सीधे सीधे सजा और जेल नजर आती है , इसलिये इस प्रकार के मामले में जिला स्तर पर भी और हाई कोर्ट के स्तर पर भी एडवोकेट सही सोचसमझ कर चयन करें , जिसे पुलिस के खिलाफ और सायबर क्राइमों का लड़ने का बेहतरीन ज्ञान और तजुर्बा हो । …….. नरेन्द्र सिंह तोमर ,एडवोकेट , म. प्र. उच्च न्यायालय , खंडपीठ ग्वालियर एवं समस्त अधीनस्थ जिला एवं सत्र न्यायालय ।

राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी की बेंगलुरु में ई-आधारशिला रखी गई


04 SEP 2020 Gwalior Times

आर.यू.डी.एस.ई.टी.आई. (एनएआर) की राष्ट्रीय अकादमी के नए प्रशिक्षण संस्थान भवन की कल ई-आधारशिला रखने का समारोह आयोजित किया गया। एनएआर ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों (585 आर.एस.ई.टी.आई. देश के 566 जिलों में स्थित हैं), राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश, ग्रामीण आजीविका मिशन के कर्मचारियों और संबंधित बैंक अधिकारियों की ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से निगरानी, ​​सलाह और क्षमता निर्माण का कार्य करता है।

    प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सचिव, ग्रामीण विकास, भारत सरकार, श्री नागेंद्र नाथ सिन्हा ने जोर देकर कहा कि आर.एस.ई.टी.आई. एक अनूठी पहल है जिसमें राज्य सरकारें, केन्‍द्र सरकार और वाणिज्यिक बैंक, ग्रामीण गरीबी के मुद्दे से निटपने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने देश में बेरोजगारी की समस्या को कम करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने में आर.एस.ई.टी.आई. के महत्व का भी उल्लेख किया। आर.एस.ई.टी.आई. की गतिविधियों के मानकीकरण में एन.ए.आर. की भूमिका की प्रशंसा करते हुए उन्होंने एन.ए.आर. को इस दिशा में अपने प्रयास तेज करने की सलाह दी और ये अनुभव किया कि एन.ए.आर. के नए परिसरों की स्थापना से इस बारे में अच्छी सहायता मिलेगी।

     वर्तमान में ये प्रशिक्षण बेंगलुरु या राज्य/ केन्‍द्रशासित प्रदेशों में किराए के विभिन्न परिसरों में आयोजित किए जाते हैं। इस प्रस्‍तावित परिसर का विकास सुंदर बागों के शहर बेंगलुरु में 25 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह परिसर क्षमता निर्माण की एक प्रमुख समस्‍या का समाधान करेगा। इस कार्यक्रम में एन.ए.आर. के अध्‍यक्ष पद्मविभूषण डॉ. डी. वीरेंद्र हेगड़े और केनरा बैंक की कार्यकारी निदेशक सुश्री ए. मणिमेखलाई की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    एन.ए.आर. के अध्‍यक्ष डॉ. डी वीरेंद्र हेगड़े ने सफल रुडसेटी मॉडल को अपनाने के लिए सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना करते हुए यह स्‍मरण किया कि किस प्रकार यह अच्‍छी प्रतिकृति आर.एस.ई.टी.आई. के रूप में लाखों ग्रामीण बेरोजगार युवाओं के जीवन को संवार रही है। उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय की आर.एस.ई.टी.आई. मॉडल स्‍वीकार करने के लिए सभी बैंकों को सुनिश्चित करने में निभाई गई महत्‍वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। इसी के परिणामस्‍वरूप देश में उद्यमिता विकास प्रशिक्षण के बड़े नेटवर्क की स्थापना हुई है।

    केनरा बैंक की कार्यकारी निदेशक, सुश्री ए मणिमेखलाई  ने वर्षों से एनएआर की भूमिका की प्रशंसा करते हुए यह आश्वासन दिया कि कैनरा बैंक भविष्य के प्रयासों में भी पूरा सहयोग देगा। उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय, डॉ. हेगड़े और आर.एस.ई.टी.आई. को प्रायोजित करने वाले बैंकों को धन्यवाद दिया। उन्‍होंने एन.ए.आर. को आर.ए.एसटीआई के इस आंदोलन में सभी हितधारकों की एकता का प्रतीक बताया। सभी गणमान्य व्यक्तियों ने एनएआर के लिए एक नए युग को चिह्नित करते हुए आधारशिला का वर्चुअल अनावरण किया।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी भारतीय पुलिस सेवा के प्रोबेशनरों के साथ बातचीत करेंगे


ग्वालियर टाइम्स 04 SEP 2020

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी शुक्रवार, 04 सितंबर, 2020 को सुबह 11 बजे सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में आयोजित दीक्षांत परेड कार्यक्रम के दौरान भारतीय पुलिस सेवा के प्रोबेशनरों के साथ वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बातचीत करेंगे।

इन 131 भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के प्रोबेशनरों में 28 महिला प्रोबेशनर शामिल हैं, जिन्‍होंनेइस अकादमी में बुनियादी पाठ्यक्रम चरण-1 के 42 सप्ताह पूरे कर लिए हैं।

इन प्रोबेशनरों ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी और डॉ. मैरी चन्‍ना रेड्डी मानव संसाधन विकास संस्‍थान तेलंगाना, हैदराबाद में आईएएस, आईएफएस जैसी अन्‍य सेवाओं के प्रोबेशनरों के साथ अपना फाउंडेशन कोर्स पूरा करने के बाद 17 दिसंबर 2018 को इस अकादमी में प्रवेश किया था।

सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में बेसिक कोर्स प्रशिक्षण के दौरान प्रोबेशनरों को कानून, जांच-पड़ताल, फोरेंसिक, नेतृत्व एवं प्रबंधन, अपराध विज्ञान, सार्वजनिक व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा, नैतिकता और मानवाधिकार, आधुनिक भारतीय पुलिस व्‍यवस्‍था, फील्ड क्राफ्ट और युक्तियां, हथियार प्रशिक्षण और गोलाबारी जैसे विभिन्‍न इंडोर और आउटडोर विषयों का प्रशिक्षण दिया जाता है।

आर्किटेक्चरल इंजीनियरिंग एजुकेशन प्रणाली में बदलाव हुये


प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2020 4:40PM ग्वालियर टाइम्स

शिक्षा मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रासंगिक सुधारों की निरंतरता में, शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने आज यहां वर्चुअल तरीके से ‘वास्तुकला शिक्षा विनियमन, 2020 के न्यूनतम मानक’ लॉन्च किए। शिक्षा राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और वास्तु कला परिषद के अध्यक्ष अर हबीब खान भी उपस्थित थे।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री निशंक ने भारत, इसके धरोहरों एवं मंदिरों की अनूठी वास्तुकला सुंदरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सीओए को वास्तु कला के वर्तमान एवं प्राचीन खजानों से प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए और भारत को फिर से विश्व नेता बनाने के लिए वास्तु कला के क्षेत्र में रूपांतरकारी बदलाव लाना चाहिए। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि परिषद के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए ये विनियमन देश में मानव वास और निर्मित्त वातावरण के क्षेत्र में सामने आने वाली चुनौतियों एवं प्रमुख समस्याओं को दूर करने में सक्षम होंगे तथा भारत को नवोन्मेषण एवं कौशल विकास के क्षेत्रों में एक नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तु कला इसके इतिहास, संस्कृति एवं धर्म की जड़ों में निहित है।

मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लॉन्च के साथ, हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का एक नए और जीवंत भारत के लिए विजन उन छात्रों पर निर्भर करता है जिन्हें 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार होने की आवश्यकता है। एनईपी में कई व्यापक सुधारों का प्रस्ताव रखा गया है और इसके कार्यान्वयन के लिए सभी द्वारा योगदान दिए जाने की आवश्यकता है। और ये विनियमन निश्चित रूप से उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं जो प्रस्तावित एनईपी से कई विचार और सोच लाते हैं। उन्होंने इन विनियमनों को लॉन्च किए जाने पर वास्तु कला परिषद एवं परिषद के अध्यक्ष अर हबीब खान को बधाई दी और परिषद के भविष्य के उसके प्रत्येक प्रयासों के लिए शुभकामनायें दीं।

इस अवसर पर श्री धोत्रे ने कहा कि लंबे समय से इन विनियमनों को तैयार किया जा रहा था और पुराने विनियमनों के बाद से जो 1983 में बनाये गए थे, एक लंबी प्रतीक्षा के बाद आखिर ये अस्तित्व में आ सके। तब से लेकर पूरी दुनिया में शिक्षा के परिदृश्य में एक विशाल परिवर्तन आ चुका है। इसलिए जरूरी हो गया था कि इस क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम की रोशनी में देश में वास्तुकला शिक्षा से संबंधित विनियमनों में संशोधन किए जाए। प्राचीन नगर, स्मारक, मंदिर, भवन, आदि सभी समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत तथा विस्मयकारी वास्तु शिल्प के प्रमाण हैं। आधुनिक भारत के वास्तु शिल्प में विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिल्पों से प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है।

श्री धोत्रे ने उम्मीद जताई कि इन विनियमनों को छात्र केंद्रित दृष्टिकोण छात्रों को बेहतर तरीके से उनके कौशलों को सीखने एवं विकसित करने में सुसज्जित करेगा तथा उन्हें 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनायेगा।

वास्तुकला शिक्षा विनियमन, 2020 के न्यूनतम मानकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें  

एमजी/एएम/एसकेजे/डीसी

 

(रिलीज़ आईडी: 1645125) आगंतुक पटल : 46

इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Marathi , Bengali , Punjabi , Tamil , Telugu

ब्लॉक चेन आधारित मतदान समाधान का उपयोग करने का प्रारंभिक विचार


दूरदराज के इलाकों में मतदान के प्रौद्योगिकीय पहलुओं पर विचार-विमर्श के लिए वेबिनार का आयोजन किया गया

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2020 4:37PM ग्वालियर टाइम्स

निर्वाचन आयोग ने तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी के साथ मिलकर, 10 अगस्त 2020 को “टेक्नोलॉजी एस्पेक्ट ऑफ रिमोट वोटिंग: एक्सप्लोरिंग ब्लॉक चेन” पर एक वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार में, भारत और पूरी दुनिया के प्रौद्योगिकीविदों, शिक्षाविदों, नीति पेशेवरों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों एक साथ भागीदार बनें। ब्लॉक चेन आधारित मतदान समाधान का उपयोग करने का प्रारंभिक विचार, 30 अक्टूबर 2019 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास में अपनी यात्रा के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त, श्री सुनील अरोड़ा के मन में प्रारंभिक चर्चा के दौरान आया।

 

इस वेबिनार में चुनाव आयुक्त, श्री सुशील चंद्रा ने मुख्य भाषण दिया। श्री चंद्रा ने चुनाव में ज्यादा से ज्यादा “चुनावी समावेशिता” को सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा कि भौगोलिक बाधाओं के कारण मतदाताओं की बड़ी संख्या अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर रही है। यह बात सामने आती है कि व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा उपचार या अन्य कारणों से, मतदाता अपने वर्तमान पंजीकरण निवास स्थान वाले मतदाता सूची से कहीं अलग रहते हैं। श्री चंद्रा ने हालांकि इस बात पर भी बल दिया कि प्रौद्योगिकी आधारित समाधान तैयार करने के लिए प्राथमिक विचार “सभी हितधारकों के विश्वास को प्रेरित करने, चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को सुनिश्चित करने और मतपत्र की गोपनीयता और योग्यता को सुनिश्चित करने की क्षमता होनी चाहिए।” उन्होंने महसूस किया कि राजनीतिक दलों को यह आश्वस्त करने की भी आवश्यकता है कि यह प्रणाली छेड़छाड़ रहित और सुरक्षित है। श्री चंद्रा ने दूरदराज के क्षेत्रों में मतदान के संदर्भ में कहा कि यह पारंपरिक मतदान केंद्र से प्रस्थान करता है जो केवल एक भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा इंटरनेट के माध्यम से घर पर रहकर मतदान करने की कल्पना नहीं की जा रही है। दूरस्थ मतदान परियोजना, अपने निर्दिष्ट मतदान केंद्रों से दूर रहने वालों के लिए सुरक्षित मतदान करने के लिए उन मतदाताओं को सक्षम बनाने की आकांक्षा रखती है। श्री चंद्रा ने आशा व्यक्त की कि विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करके, आयोग को एक मजबूत दूरदराज के इलाकों में मतदान के लिए मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी जो कि ज्यादा समावेशी और सशक्त होगा।

 

इस वेबिनार में दुनिया भर के 800 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने ब्लॉक चेन प्रौद्योगिकी के वैश्विक अनुभव पर, मापक्रमणीयता की संभावनाओं पर; डेटा गोपनीयता और व्यवस्थापन के मुद्दे पर; डेटा सुरक्षा; प्रमाणीकरण और सत्यापनता पर ध्यानाकर्षित किया। इस वेबिनार को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रो के विजय राघवन, आईआईटी भिलाई के निदेशक, प्रो रजत मूना, आईआईटी मद्रास के निदेशक, प्रो भास्कर राममूर्ति, ग्लोबल ब्लॉकचेन बिजनेस काउंसिल के सीईओ, सैंड्रा रो,  इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ट्रस्टेड ब्लॉकचेन एप्लीकेशंस के सदस्य, मोनिक बचनर, इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ट्रस्टेड ब्लॉकचैन एप्लिकेशन के सदस्य, इस्माईल एरिबास और कुनफुड स्पेनिश चैप्टर ऑफ गवर्नमेंट ब्लॉकचैन एप्लिकेशन के अध्यक्ष ने भी अलग-अलग सत्रों में संबोधित किया।

 

इस वेबिनार को निर्वाचन आयोग के आईटी डिवीजन के प्रभारी, उप निर्वाचन आयुक्त एसएच आशीष कुंद्रा द्वारा दूरदराज के इलाकों में मतदान के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ एक व्यापक परामर्श अभ्यास के रूप में बुलाया गया था।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि मेघ का किया शुभारम्भ


केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि मेघ का किया शुभारम्भ

नए भारत की डिजिटल कृषि की दिशा में उठाया गया एक कदम है कृषि मेघ : श्री तोमर

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2020 6:11PM by ग्वालियर टाइम्स एवं चम्बल की आवाज

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज वर्चुअल माध्यम से केवीसी एल्युनेट (कृषि विश्वविद्यालय छात्र एल्युम्नी नेटवर्क) और उच्च कृषि शिक्षण संस्थानों के लिए ऑनलाइन प्रत्यायन प्रणाली (एचईआई) के साथ ही कृषि मेघ (राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा व्यवस्था- क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं) का शुभारम्भ किया।

केन्द्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत सरकार-विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना को कृषि विद्यालयों के विद्यार्थियों को ज्यादा औचित्यपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से देश में राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो देश की नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है। श्री तोमर ने महत्वपूर्ण अनुसंधान आधारित डाटा डिजिटल रूप में सुरक्षित एवं संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे उस तक देश और दुनिया के किसी भी कोने से पहुंच हासिल की जा सके। उन्होंने कृषि में निजी निवेश को सक्षम बनाने पर भी जोर दिया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि मेघ नए भारत की डिजिटल कृषि की दिशा में उठाया गया एक कदम है, जिसकी कल्पना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई है।

 

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कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि 2-3 आईसीएआर संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा वाले अनुसंधान केंद्र के रूप में तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को रियल टाइम आधार पर डाटा उपलब्ध कराए जाने पर भी जोर दिया।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने कृषि मेघ की स्थापना के लिए आईसीएआर की सराहना की, जो आईसीएआर- भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के आईसीएआर डाटा सेंटर को आईसीएआर- राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद के डिजास्टर रिकवरी केन्द्र के साथ एकीकृत करता है। केन्द्रीय मंत्री ने इस पहल को कृषि में एक क्रांति के रूप में संबोधित किया।

सचिव (डेयर) और महानिदेशक (आईसीएआर) डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने 58 विश्वविद्यालयों का उल्लेख किया, जिन्हें आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (एनएएचईपी) के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में सहयोग दिया गया है। महानिदेशक ने लगभग 377 विद्यार्थियों (यूजी, पीजी और पीएचडी) का उल्लेख किया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण/इंटर्नशिप हासिल की है और उन्हें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के लगभग 120 संकाय सदस्यों ने प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने इंटरनेट तकनीक/ डिजिटलीकरण के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया। डॉ. महापात्रा ने कृषि मेघ की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला, जो छवि विश्लेषण, पशुओं में बीमारी की पहचान आदि के माध्यम से एप्लीकेशन आधारित डीप लर्निंग के विकास और लागू करने के लिए नवीनतम एआई/डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर/ टूल किट्स से युक्त हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि मेघ किसानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और नीति निर्माताओं को आईसीएआर संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा डिजिटल माध्यम से कृषि, शोध, शिक्षा एवं विस्तार के संबंध में जारी अद्यतन एवं ताजा जानकारी हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए डिजिटल इंडिया में एक नया अध्याय है।

इससे पहले, अपने उद्घाटन भाषण में आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. आर सी अग्रवाल ने कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य के बारे में बताया। उन्होंने केवीसी एल्युनेट के विकास पर प्रकाश डाला, जो कृषि विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों के लिए सोशल नेटवर्किंग के विचार का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे 74 कृषि विश्वविद्यालयों के सभी पूर्व छात्र एक दूसरे से जुड़ने में सक्षम होंगे और इससे विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, नियुक्तियों में सहायता मिलेगी, साथ ही उन्हें पूर्व छात्रों का सहयोग भी हासिल होगा।

विश्व बैंक के टास्क टीम लीडर श्री एडवर्ड विलियम ब्रेसन्यान ने आईसीएआर की पहल को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि इससे कृषि शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव आएगा। आईसीएआर और उसके संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से भागीदारी की।

कृषि मेघ की प्रमुख विशेषताएं

  1. राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा व्यवस्था (एनएआरईएस) की डिजिटल कृषि की सेवाओं और बुनियादी ढांचा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 2012 के दौरान विकसित वर्तमान डाटा सेंटर (आईसीएआर-डीसी) को क्लाउड कम्प्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ मजबूत बनाया जाएगा।
  2. एनएआरईएस- क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेस अपने घटकों आईसीएआर-डीसी और आईसीएआर-कृषि मेघ के साथ ई-ऑफिस, आईसीएआर- ईआरपी, शिक्षा पोर्टल, केवीके पोर्टल और मोबाइल ऐप्स, आईसीएआर संस्थान की वेबसाइट, अकादमी प्रबंधन प्रणाली, एल्युमनी पोर्टल, परास्नातक और स्नातक आदि स्तरों के ई-कोर्सेस जैसे अहम एप्लीकेशन को लागू करने के साथ एनएआरईएस प्रणाली की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक मजबूत और गतिशील प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है।
  3. एनएएचईपी के अंतर्गत आईसीएआर डाटा केन्द्र की पहुंच में विस्तार के साथ कृषि विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट और आईटी समाधान चलाने में सक्षम हो जाएंगे।
  4. वर्तमान कोविड-19 महामारी के दौर में आईटी एप्लीकेशंस की 24×7 उपलब्धता के माध्यम से घर से काम करने के साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साथी वैज्ञानिकों के साथ सहयोग संभव हुआ।
  5. आईसीएआर- आईएएसआरआई, नई दिल्ली के आईसीएआर- डाटा सेंटर के साथ जोड़े गए एनएएआरएम हैदराबाद स्थित आईसीएआर- कृषि मेघ का निर्माण भारत में कृषि के क्षेत्र में जोखिम कम करने, गुणवत्ता बढ़ाने, ई-प्रशासन की उपलब्धता और पहुंच, शोध, विस्तार एवं शिक्षा के लिए किया गया है।
  6. एनएएआरएम हैदराबाद को चुना गया है, क्योंकि आईसीएआर-आईएएसआरआई, नई दिल्ली के आईसीएआर- डाटा सेंटर से संबंधित विभिन्न भूकंपीय क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। हैदराबाद भी इसके लिए उपयुक्त है, क्योंकि निम्न आर्द्रता स्तर जैसी अन्य उपयुक्त पर्यावरण स्थितियों के साथ ही कुशल कार्यबल उपलब्ध हैं। यहां के आर्द्रता स्तर को डाटा सेंटर के पर्यावरण के साथ नियंत्रित किया जा सकता है।
  7. इन नए केन्द्र में छवि विश्लेषण के माध्यम से बीमारी और पेस्ट की पहचान, फलों की परिपक्वता और उनके पकने का पता लगाने, पशुओं आदि में बीमारी की पहचान आदि से जुड़े डीप लर्निंग बेस्ड एप्लीकेशंस के विकास और उपयोग के लिए नवीनतम एआई/ डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर/ टूल किट्स मौजूद हैं।

अटल नवाचार मिशन और डेल टेक्नोलॉजिज ने विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम 2.0 का शुभारम्भ किया


अटल नवाचार मिशन और डेल टेक्नोलॉजिज ने विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम 2.0 का शुभारम्भ किया

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2020 6:16PM by Gwalior Times

अटल नवाचार मिशन (एआईएम), नीति आयोग ने डेल टेक्नोलॉजिज के साथ भागीदारी में अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल) के युवा नवाचारकर्ताओं (अन्वेषकों) के लिए आज विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम 2.0 (एसईपी 2.0) का शुभारम्भ किया।

एसईपी 1.0 की शानदार सफलता के बाद नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, डेल टेक्नोलॉजिज के अध्यक्ष व एमडी आलोक ओरी, एआईएम के मिशन निदेशक आर रमणन और लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. अंजलि प्रकाश की उपस्थिति में इसकी दूसरी श्रृंखला की शुरुआत की गई।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा, “आज, मैं आशावाद से भरा हुआ हूं क्योंकि मैंने एटीएल के युवा अन्वेषकों द्वारा किए गए भरोसेमंद नवाचार देखे हैं। इन अन्वेषकों ने मुझे आश्चर्यचकित कर दिया है। जब नागरिकों के सामने आ रही चुनौतियों से अपरंपरागत रूप से निबटने का अवसर मिले तो इस देश के युवा बच्चे काफी कुछ हासिल कर सकते हैं। हमने जब एसईपी 1.0 का समापन किया और एसईपी 2.0 का शुभारम्भ किया है, ऐसे में मैं इन नवाचारों के देश पर पड़ने वाले असर को देखकर खासा उत्साहित हूं।”

एसईपी 2.0 से विद्यार्थी अन्वेषकों को डेल के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा। उन्हें संरक्षण; प्रोटोटाइपिंग और परीक्षण समर्थन; एंड यूजर फीडबैक;बौद्धिक संपदा पंजीकरण और आइडिया, प्रक्रियाओं और उत्पादों का पेटेंट संरक्षण हासिल करने;विनिर्माण सहयोग के साथ ही बाजार में उत्पाद के लॉन्च में भी सहयोग हासिल होगा।

डेल टेक्नोलॉजिज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आलोक ओरी ने कहा, “डेल अपने अनुभवों के सहारे विद्यार्थियों को सशक्त बनाने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग कर रही है। जिससे उन्हें नवाचार की मानसिकता विकसित की जा सके। हम पहले विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम के निष्कर्षों से खासे खुश हैं और अगले बैच की उपलब्धियों का इंतजार कर रहे हैं। नीति आयोग के साथ हमारी मजबूत भागीदारी से सामाजिक हित और नए उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए अपने तकनीक के विजन का विस्तार हो रहा है।”

इस अवसर पर अपने संबोधन में एआईएम मिशन निदेशक आर. रमणन ने कहा, “नवाचार मिशन का उद्देश्य देश में एक मिलियन नए अन्वेषक और संभावित रोजगार देने वाले तैयार करना है। डेल टेक्नोलॉजिज के साथ हमारी भागीदारी के तहत विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम के माध्यम से युवा स्कूली विद्यार्थियों को प्रोत्साहन के द्वारा युवा अटल टिंकरिंग लैब अन्वेषकों की उद्यमी क्षमताओं में बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही देश भर की नई प्रतिभाओं के लिए एक नवीन मंच तैयार हुआ है।”

एसईपी 1.0 की शुरुआत जनवरी, 2019 में हुई थी। 10 महीने लंबे कठिन कार्यक्रम के माध्यम से एक देशव्यापी प्रतियोगिता-एटीएल मैराथन के शीर्ष छह दलों को नवीन प्रोटोटाइप्स को पूरी तरह कार्यशील उत्पादों में परिवर्तित करने का मौका मिला, जो अब बाजार में उपलब्ध हैं। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने सामुदायिक चुनौतियों की पहचान की और एटीएल के अंतर्गत जमीनी स्तर पर नवाचार और समाधान तैयार किए गए।

एटीएल मैराथन के पिछले सीजन में लगभग 1,500 नवाचार जमा किए गए थे। दो कठिन चरणों के बाद, 50 दलों को विद्यार्थी अन्वेषक कार्यक्रम के लिए चुना गया था। 75 प्रतिशत से ज्यादा विजेता दल टियर-2 शहरों और/ या ग्रामीण क्षेत्रों से और 60 प्रतिशत से ज्यादा सरकारी स्कूलों से थे। विजेता दल में लगभग 46 प्रतिशत बालिकाएं थीं। फिर अटल इनक्यूबेशन केन्द्रों ने विद्यार्थी अन्वेषक कार्यक्रम के माध्यम से कई महीनों तक संरक्षण दिया गया था। इस क्रम में, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा 14 नवंबर, 2019 को आठ शीर्ष दलों को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया था। शीर्ष 8 दल अब एसईपी 2.0 के माध्यम से अपने प्रोटोटाइप्स को उत्पाद के स्तर पर ले जाएंगे।

एआईएम के मिशन निदेशक आर. रमणन ने छह दलों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “पिछले कुछ महीनों में, आपने एक उद्यमी बनने के लिए धैर्य और उत्साह दिखाया है। अपनी दृढ़ता के परिणाम स्वरूप आप अपने स्टार्टअप्स और उद्यमों के ‘सह संस्थापक’ बन गए हैं। आत्मनिर्भर भारत का यही सार है।” उन्होंने कहा कि उद्योग के साथ इस तरह की भागीदारियां युवा विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिए अहम हैं और इससे हमारा ग्रह एक बेहतर स्थान बनने में सक्षम हो जाएगा।

क्यूं इक शेर को शेरनी तेरा इंतज़ार आज तलक है


दूसरी भाषा में कहें तो , जूता सोने का भी हो तो भी पैरों में ही जगह पायेगा और मुकुट भले ही तांबे का हो शीष पर ही धारण किया जायेगा , और शेर यानि सिंह जहां भी बैठेगा वह जगह सिंहासन ही कहलायेगी और बन जायेगी , अब कूकरासन और सियारासन यानि गोहदूआसन का अंदाजा आप खुद लगा लीजिये , सोने की बनी हीरों मोतियों से जड़ी कुर्सी पर अगर सियार या गोहदूआ बैठ जाये तो सिंहासन भी सियार आसन यानि गोहदू आसन बन जाता है और शेर यानि सिंह जमीन पर या पत्थर पर भी बैठ जाये तो वह जगह सिंहासन ही कहलाती है , बस इत्ता सा फर्क है , आदमी आदमी की तासीर और खालिस शख्स होने में, स्वामी दयानन्द सरस्वती ने और कवि बिहारी ने दो राजाओं को यही संदेश दिया था जब वे वैश्याओं के फंदे में फंस कर राजपाट भूल रंगरेलियों में खो गये थे कि शेर के अंकपाश में शेरनी का स्थान तो देखा सुना है मगर पहली दफा कुतिया की गोद में शेर को खेलते देख रहे हैं , बिहारी ने कागज की नाव पर इसका दोहा लिख कर राजा को तालाब के दूसरी ओर वैश्या के साथ लेटे राजा को भेजा तो दयानन्द सरस्वती ने इसे राजा की आरामगाह में घुस कर सीधे ही वैश्या के साथ लताड़ते हुये कहा , दोनों राजाओं की चेतना जागी और माना कि लोहे की अंगूठी में हीरे नहीं जड़े जा सकते और न सोने की अंगूठी में मामूली पत्थर लगाये जाते हैं ( सच्ची ऐतिहासिक घटनायें , स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाईं जातीं हैं ) सो खुद को पहचानो , जो हो संगत वैसी ही मिलेगी और खिताब भी वही मयस्सर होगा , इसीलिये शेरों के अंकपाश में अपने आप शेरनी ही जगह पाती है और उनकी जनसंख्या बेहद कम होती है जबकि कुत्तों और सियारों की जनसंख्या ज्यादा , तासीर कम और स्थान गलियों मोहल्लों में और दुबक छिप कर जंगलों में रहता है , शेर शेरनी पूरे जंगल के बेताज बादशाह रहते हैं – नरेन्द्र सिंह तोमर ” आनन्द”

मध्यप्रदेश के भाजपा नेता पूर्व राज्यमंत्री के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की एफआईआर


पूर्व राज्यमंत्री भाजपा के बद्रीलाल यादव के खिलाफ धाराओं 188 , 294 के तहत एफआईआर दर्ज हुई
* कलेक्टर के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी कि कलेक्टर गोदी में बैठाकर …
* फरियादी ब्यावरा एस डी एम की इंटीमेशन पर हुआ अपराध दर्ज
* आक्रमण से भाजपा बैकफुट पर आकर बचाव की मुद्रा में आई , भारी जन विरोध और प्रशासनिक अधिकारियों के विरोध से उड़े भाजपा के होश , न ई दिल्ली से भाजपा और आर एस एस ने रेड अलर्ट भांपा , मध्यप्रदेश भाजपा की कारगुजारी से खुद को न्यूट्रल किया

अब म.प्र. शासन की पॉाच लोक सेवायें , भारत सरकार के प्रोबोनो एडवोकेट के हवाले


अब म.प्र. शासन की पूरे मध्‍यप्रदेश की पॉंच लोकहितकारी सेवायें भी भारत सरकार के डिजिटल इंडिया को म.प्र. शासन द्वारा साौंपी गईं , ये सेवायें भाारत सरकार के न्‍याय विभाग , विधि एवंन्‍याय मंत्रालय के के तहत प्रोबो एडवोकेट के कार्यालय पर ई लोक सेवा केन्‍द्रों के माध्‍यम से उपलब्‍ध होंगी , हर सेवा की समयावधि निर्धारित है , उतने समय के अंदर यदि किसी को प्रमाणपत्र नहीं प्राप्‍त होता है या सेवा प्राप्‍त नहीं होती है तो सीधा एक्‍शन प्रोबोनो एडवोकेट कार्यालय द्वारा लिया जायेगा और दोषी के विरूद्ध सीधी कार्यवाही कर म.प्र. शासन के प्रमुख सचिव को , नगर निगम आयुक्‍त , जिला कलेक्‍टर , संभागीय कमिश्‍नर तथा , अपने न्‍याय विभाग भारत सरकार को की गई कार्यवाही से अवगत करा दिया जायेगा । जनता अपना आवेदन अब सीधे प्रोबोनो एडवोकेट के ई लोक सेवा केन्‍द्र पर निम्‍न चित्रानुसार प्रस्‍तुत कर सकती है । – नरेन्‍द्र सिंह तोमर , 42 गांधी कॉलोनी , मुरैना , म.प्र.

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