मुरैना में हाल में विवाहित युवक ने प िता के पैसे नहीं देने पर फांसी लगाई


मुरैना में हाल में विवाहित युवक ने पिता के पैसे नहीं देने पर फांसी लगाई

मुरैना 28 जुलाई 09 अभी दो माह पहले जिसका विवाह हुआ और नयी नवेली दुल्‍हन को विवाहिता बना कर अपने साथ लाया, उसके जीवन भर का साथ निभाने के कसमे वादे, सातों वचन तोड़ कर वह फांसी लगा कर उसे अलविदा कह गया । और बेचारी नवविवाहिता दहाड़े मार कर अधमरी होकर सड़क पर माथा फोड़ती बिलखती हुयी पड़ी रह गयी ।

मुरैना शहर के बीचों बीच आज शिक्षा नगर कालोनी में शास.कन्‍या महाविद्यालय और निकट ही बने सरस्‍वती शिशु मंदिर के ठीक सामने रहने वाले मनीष अग्रवाल पुत्र गोपालदास अग्रवाल उम्र लगभग 28- 29 साल जिसका अभी दो माह पहले ही विवाह हुआ था ने आज सुबह अपने पिता से कुछ रूपये मांगे, जिस पर पिता ने कहा कि अभी उसके पास पैसे नहीं हैं, बाद में दे देगा । तब सुबह 10 बजे मनीष अग्रवाल कमरे में घुस गया और अंदर से किवाड़ों में कुन्‍दी टूटी होने पर एल्‍यूमिनियम के तारों से बांध कर दरवाजा लॉक कर लिया । उसकी मॉं ने बताया कि जब काफी देर तक वह कमरे से बाहर नहीं निकला तो कुछ चिन्‍ता हुयी ओर उस कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन दरवाजा नहीं खुला तब कुछ पड़ौसियों को दोपहर बुलाया, पड़ोसियों ने बताया कि एल्‍यूमिनियम के तार बंधे होने से दरवाजा लॉक है, दोपहर 3 बजे एल्‍यूमिनियम के तारों को काट कर दरवाजा खोला गया तो सामने मनीष अग्रवाल टांड़ के निकट छत पर लटके कुन्‍दे पर फांसी झूलता दिखा, तब पड़ोसियों व घरवालों ने पुलिस को इत्‍तला दी ।

शाम साढ़े तीन बजे पुलिस वहॉं पहुँची और मौका मुआयना कर तकरीबन 4 बजे शाम को मनीष की लाश को फन्दे से उतारा गया और शव को जप्‍ती में लेकर पोस्‍टमार्टम के लिये भेजा गया । पुलिस ने मर्ग कायमी कर ली है और आगे की कार्यवाही जारी है ।

पड़ोसियों तथा अन्‍य नजदीकी सूत्रों ने बताया कि मृतक व्‍यवहार कुशल तथा उसका पूरा परिवार बेहद नेक और सज्‍जन था, लेकिन पता नहीं क्‍या बात हो गयी कि मनीष ने जरा सी बात पर इतना आत्‍मघाती कदम उठा लिया ।

मनीष द्वारा आत्‍महत्‍या किये जाने का कारण किसी की समझ नहीं आ रहा था और जो अंदाजिया बातें सामने आयीं उसमें सिर्फ यह कि शायद वह किसी कर्ज या देनदारी के जाल में फंस गया होगा या फिर वह किसी न किसी तरह से किसी के द्वारा पैसे के लिये परेशान किया जा रहा होगा । यह तथ्‍य भी उभर कर आया कि मृतक को क्रोध बहुत आता था और आपा खो देता था तथा क्रोध में मानसिक रूप से शून्‍य होकर विक्षिप्‍तता जैसी हरकते करने लगता था । वहीं कुछ लोगों ने मृतक व उसकी पत्‍नी के आपसी सम्‍बन्‍धों को आत्‍महत्‍या की वजह बताया । उललेखनीय है कि मृतक षरा आत्‍महत्‍या किये जाने से पूर्व एवं किये जाने के वक्‍त भी मृतक की पत्‍नी अपने मायके धौलपुर राजस्‍थान में थी एवं मृतक की अंत्‍येष्टि के वक्‍त थेड़ी देर को आकर पुन: वापस अपने मायके लौट गयी जिससे लोग पति पत्‍नी के सम्‍बन्‍ध नरम गरम बताने लगे । मृतक के पिता का मिल एरिया रोड पर मशहूर एडवोकेट विद्याराम गुप्‍ता के घर के निकट एक मिल है, जो कि परिवार की आय का मुख्‍य जरिया था ।

लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शि क्षा विश्वविद्यालय ग्‍वालियर


लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय

v जयंत सिंह तोमर

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v लेखक – लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय,ग्वालियर में व्याख्याता है ।

‘बुंदेले हर बोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी

खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झाँसी वाली रानी थी ।’

प्रसिध्द कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता की ये पंक्तियां सभी के मन में सन् 1857 की अमर बलिदानी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का ओजपूर्ण चित्र खींचती है। ग्वालियर में अंग्रेज फौज से लड़ते हुये देश की स्वतंत्रता की खातिर झांसी की रानी ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये । सौ वर्ष बाद जब स्वाधीन भारत ने प्रथम स्वाधीनता संग्राम का शताब्दी वर्ष मनाया तो यह तय किया गया कि ग्वालियर में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की स्मृति में एक शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय स्थापित किया जायेगा ।

ग्वालियर नगर के प्रथम महापौर पहाड़गढ़ के राजा पंचमसिंह की इस संस्था की स्थापना में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही । वे स्वयं एक अच्छे निशानेबाज थे । रियासत के दौर में जहां घुड़दौड़ व पोलो का मैदान था, वहीं इस संस्था की शुरूआत हुई । भारत के श्रेष्ठ शारीरिक शिक्षाविद् प्रो. पी एम जोसेफ इस संस्था के पहले प्रिंसिपल नियुक्त किये गये । शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में केवल पी.एम.जोसेफ ही हैं, जिन्हें पद्मश्री अलंकरण से नवाजा गया। इस संस्थान का प्रारंभ विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से सम्बध्द महाविद्यालय के रूप में हुआ । ग्वालियर में जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद सन् 1964 में यह उसके अन्तर्गत आ गया । राष्ट्रीय महत्व को ध्यान में रखते हुये सन् 1973 में इसका नामकरण लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (एलएनसीपीई) किया गया । सन् 1982 में स्वायत्तशासी संस्था का दर्जा हासिल करने के बाद सितम्बर 1995 में इसे सम विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 14 जनवरी 2009 को इसे पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया ।

लक्ष्मीबाई रष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय में इस समय सात विभाग संचालित हैं। टीचर एज्यूकेशन विभाग में चार वर्षीय बैचलर आफ फिजीकल एज्यूकेशन (बीपीई) व दो वर्षीय पाठयक्रम मास्टर आफ फिजीकल एज्यूकेशन (एमपीई) संचालित है । रिसर्च डेवलपमेंट एंड एंडवांस्ड् स्ट्डीज डिपार्टमेंट में एम-फिल व पीएचडी की उपाधि प्रदान की जाती है । खेल प्रबंधन व खेल पत्रकारिता विभाग अपेक्षाकृत नया विभाग है । समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन व वेब माध्यमों में खेल पत्रकारिता के विस्तृत होते क्षेत्र को ध्यान में रखते हुये प्रशिक्षित खेल पत्रकार तैयार करने के लिये यहां खेल पत्रकारिता में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा पाठयक्रम चलाया जा रहा है । ऐसा ही एक पाठयक्रम खेल प्रबंधन के क्षेत्र में भी संचालित है।

प्रशिक्षण एवं दक्षता विभाग (कोचिंग एंव फिटनेस) क्रीड़ा प्रशिक्षण में पीजी डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स संचालित करता है । युवा कार्यक्रम एवं खेल विभाग साहसिक खेल एवं पर्यटन प्रबंधन में (एकवर्षीय) स्नातकोत्तर पत्रोपाधि प्रदान करता है । स्वास्थ्य विज्ञान एवं योग विभाग, वैकल्पिक चिकित्सा, योग व फिटनेस मैनेजमेंट आदि विषयों में विभिन्न पाठयक्रम संचालित करता है । कम्प्यूटर विज्ञान एवं अनुप्रायोगिक सांख्यिकी विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी व सांख्यिकी के पाठयक्रम संचालित करता है ।

वर्तमान में कुलपति मेजर जनरल एस.एन मुखर्जी के कार्यकाल में इस राष्ट्रीय महत्व की संस्था की छवि में बहुत निखार आया है । उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि है इस संस्थान का डीम्ड यूनीवर्सिटी से पूर्ण विश्वविद्यालय में तब्दील होना । इन्हीं के कार्यकाल में प्रथम प्रचार्य पीएम जोसेफ की स्मृति में एक खूबसूरत केन्द्रीय ग्रंथालय भी स्थापित हुआ है । शारीक्षिक शिक्षा व खेलकूद से संबंधित यह देश का एक मात्र ग्रंथालय है जिसे कम्प्यूटरीकृत कर अत्याधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है ।

एलएनयूपीई में सेना द्वारा प्रायोजित खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिये विशेष पाठयक्रम आयोजित किये जाते हैं । बकौल मेजर जनरल एस एन मुखर्जीं एलएनयूपीई लंबे समय तक एशिया की सर्वश्रेष्ठ संस्थाओं में शुमार होती रही है । अब हम इसे विश्वस्तर की श्रेष्ठ संस्था बनाने के लिये युध्दस्तर पर प्रयासरत हैं । विस्तार देने के लिये हाल में गुवाहाटी व देहरादून में एलएनयूपीई के दो केन्द्र भी स्थापित किये गये हैं ।

‘ गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानव में निरोगी काया को पहला सुख बताया है । कहा भी जाता है कि तंदुरूस्ती हजार नियामतइसी आदर्श को धारण किये हुये एलएनयूपीई अब फिट पीपुल- फिट नेशन का मूलमंत्र देश के जनसाधारण के बीच ले जाने के लिये प्रयासरत है ।

एलएनयूपीई के सितारे

लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय यों तो मूलरूप से खेल व शारीरिक शिक्षा के प्रशिक्षक तैयार करने का केन्द्र है, इसके बावजूद स्थापना के 52 वर्षों में यहां के कई शिक्षक व विद्यार्थियों ने खेल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां, पुरस्कारों के रूप में हासिल की हैं । इनमें से कुछ महत्वपूर्ण नाम इस प्रकार हैं:-

नाम अवार्ड क्षेत्र

1-डा.पी एम जोसफ पद्मश्री शारीरिक शिक्षण

2- डा. अजमेर सिंह अर्जुन अवार्ड ट्रैक एंड फील्ड

3- प्रो. करन सिंह द्रोणाचार्य अवार्ड ट्रैक एंड फील्ड

4- कल्पना देवनाथ अर्जुन अवार्ड जिम्नास्टिक

5- ब्रिगेडियर लाभ सिंह अर्जुन अवार्ड ट्रैक एंड फील्ड

6- विजय सिंह चौहान अर्जुन अवार्ड डेलाथेलान

मुख्यमंत्री द्वारा कैंसर चिकित् सालय परिसर में साढ़े चार करोड़ की लागत का भवन लोकार्पित, मुख्यमंत्री ने र ूद्राक्ष का पौधा रोपा, स्वास्थ्य स ेवाओं के विस्तार हेतु सरकार कृतसंक ल्पित – मुख्यमंत्री श्री चौहान


स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु सरकार कृतसंकल्पित – मुख्यमंत्री श्री चौहान

मुख्यमंत्री द्वारा कैंसर चिकित्सालय परिसर में साढ़े चार करोड़ की लागत का भवन लोकार्पित, मुख्यमंत्री ने रूद्राक्ष का पौधा रोपा

ग्वालियर 25 जुलाई 09 । मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान में साढ़े चार करोड़ रूपये की लागत से नवनिर्मित कालेज आफ लाइफ सांइसेज व पी.जी. कालेज आफ नर्सिंग के संयुक्त भवन का लोकर्पण किया । श्री चौहान ने ग्वालियर में कैंसर शोघ संस्थान की स्थापना के लिये श्री शीतला सहाय जी के प्रयासों की विशेष सराहना की तथा कहा कि राज्य शासन प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी और विस्तार के लिये कृत संकल्पित है । सरकार कैंसर शोध संस्थान के विकास में हर संभव मदद करेगी । लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता मुरैना के सांसद श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने की तथा कार्यक्रम में प्रदेश के लोक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा तथा ऊर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा, सांसद श्रीमती यशोधरा राजे, श्रीमती माया सिंह, श्री प्रभात झा, श्री अशोक अर्गल, महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर मंचासीन थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिये राज्य सरकार सतत प्रत्यनशील है । समाज के कमजोर व्यक्ति को भी भरपूर स्वास्थ्य सुविधायें मिल सकें इसके लिये राज्य सरकार द्वारा दीनदयाल अन्त्योदय उपचार योजना,जिला व रज्य बीमारी सहायता योजनाओं का संचालन किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को तुरंत सहायता मुहैया कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान निधि को 2 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रूपये किया गया है । उन्होंने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों की कमी है, युवा चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करें इसके लिये शासन द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं । दुर्गम व पहुंच विहीन क्षेत्रों के लिये सर्वसुविधायुक्त चलित चिकित्सालय योजना भी प्रारंभ की गई है । गंभीर मरीजों को लाने ले जाने के लिये प्रमुख शहरों में सर्वसुविधायुक्त एक्बुलेंस योजना भी प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा यद्यपि सरकार अपने स्तर पर पूरी क्षमता से प्रयासरत है लेकिन जनसहयोग के बिना यह कार्य संभव नहीं है। इसके लिये समाज को भी आगे आना होगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्वालियर में कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान की गतिविधियों के संबंध में चर्चा करते हुये कहा कि समाज में सभी लोग अपने लिये जीते हैं किन्तु श्री शीतला सहाय जैसे बिरले ही होते हैं जो दूसरों के लिये अपना सर्वस्व लगा देते हें । उन्होंने कहा कि श्री सहाय ने अपना सम्पूर्ण जीवन इस पुनीत कार्य में लगा दिया है। उन्होंने आगे कहा इस संस्थान के विकास और विस्तार हेतु राज्य शासन की ओर से हर संभव मदद मुहैया कराने का आश्वासन दिया तथा राजनीति और समाज सेवा में लगे लोगों से श्री सहाय से प्रेरणा लेने का भी आग्रह किया ।

संस्थान के संस्थापक न्यासी एवं म.प्र. राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री शीतला सहाय ने ग्वालियर में कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान की स्थापना के संबंध में अपने खट्टे -मीठे अनुभवों को याद किया तथा जिन्होंने सहयोग दिया उनके प्रति मंच से आभार भी व्यक्त किया।

संस्थान के संचालक डा. बी. आर श्रीवास्तव ने कैंसर संस्थान के 32 वर्ष की विकास यात्रा से सभी को अवगत कराया । उन्होंने बताया कि इस अवधि में एक लाख 75 हजार कैंसर के नवीन रोगियों तथा 17 लाख पुराने रोगियों का इलाज किया जा चुका है। संस्थान द्वारा नर्सिंग कालेज के साथ-साथ लाइफ सांइसेज व कैंसर पर रिसर्च वर्क भी कराया जा रहा है ।

कार्यक्रम के प्रारंभ में वंदेमातरम् के गायन के बाद अतिथियों द्वारा व मां सरस्वती की प्रतिमा तथा स्व. राजीव सहाय के चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम के अंत में डा. नीरज शर्मा ने आभार प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री ने रूद्राक्ष का पौधा रोपा

मुख्यमंत्री ने कैंसर चिकित्सालय परिसर में नवनिर्मित कालेज आफ लाइफ सांइसेज व पी.जी. कालेज आफ नर्सिंग के संयुक्त भवन के सामने रूद्राक्ष का पौधा भी रोपा। इस अवसर पर सांसद श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, लोक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा तथा ऊर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा, सांसद श्रीमती यशोधरा राजे, राज्य सभा सांसद श्रीमती माया सिंह व श्री प्रभात झा, सांसद श्री अशोक अर्गल व महौपार श्री विवेक नारायण शेजवलकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

क्रमांक/204/09

मुख्यमंत्री की अगवानी

ग्वालियर 25 जुलाई 09 । मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आज राजकीय विमान से प्रात: 10.25 बजे विजयाराजे सिंधिया विमान तल पर पधारे ।

विमानतल पर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं ऊर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा , गृह, परिवहन व जेल राज्य मंत्रीश्री नारायण सिंह कुशवाह, राज्य सभा सांसद श्री प्रभात झा, महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने मुख्यमंत्री की अगवानी की ।

इस अवसर पर साडा अध्यक्ष श्री जयसिंह कुशवाह , खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री कोकसिंह नरवरिया, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री कौशल शर्मा, भाजपा अध्यक्ष श्री अभय चौधरी, श्री महेन्द्र सिंह यादव, श्री राज चङ्ढा, सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। वरिष्ठ अधिकारियों में संभागायुक्त डा. कोमल सिंह, पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर रेंज श्री अरविंद कुमार, पुलिस महानिरीक्षक चंबल रेंज श्री संजीव झा, पुलिस उपमहानिरीक्षक ग्वालियर श्री एस एम अफजल, पुलिस उपमहानिरीक्षक चंबल श्री आर बी शर्मा, कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक ए सांई मनोहर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

ई गवर्नेन्‍स: त्वरित गति से मिलेगा अ ब नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र , एन आई स ी. ने विकसित की कम्प्यूटराइज्ड प ्रणाली, ग्‍वालियर म.प्र. का पहला जिला


ई गवर्नेन्‍स: त्वरित गति से मिलेगा अब नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र , एन आई सी. ने विकसित की कम्प्यूटराइज्ड प्रणाली, ग्‍वालियर म.प्र. का पहला जिला

Gwalior now entered to E Governance Era

With this new system now Gwalior District Administration entered into new era of E Governance. We congratulate to district Administration of Gwalior to initiate Public Services with electronic network in form of E Governance and now Gwalior is First district of state of Madhya Pradesh to use this system in such a way. Especially to District collector Gwalior Shri Aakash Tripathi and NIC team of Gwalior Municipal Corporation of Gwalior already initiated E Governance Practices. – Narendra Singh Tomar “Anand”

ग्वालियर 22 जुलाई 09। नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र को त्वरित गति से देने के लिये यहां कलेक्ट्रोरेट स्थित एन आई सी. में एक कम्प्यूटराइज प्रणाली विकसित की गई है। इस प्रणाली को विकसित करने वाला ग्वालियर जिला प्रदेश में पहला जिला है। कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने आज इसका शुभारंभ किया। उन्होंने औपचारिक रूप से दो आवेदको को नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्रदाय किये। इन आवेदकों द्वारा दो दिन पूर्व ही एन ओ सी. के लिये आवेदन किया था। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री वेदप्रकाश, संयुक्त कलेक्टर श्री राजेश बाथम, कलेक्ट्रेट के अन्य अधिकारीगण एवं आवेदकगण उपस्थित थे।

कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी के निर्देश पर एन आई सी. ग्वालियर ने एक ऐसा साफ्टवेयर विकसित किया है, जिसमें नजूल एन ओ सी. के आवेदनों का निराकरण त्वरित गति से हो सकेगा। इसमें शर्त यह है कि आवेदक को अपना आवेदन नगर निगम को देना होगा, जो नजूल कार्यालय को आयेगा। शेष जांच आदि की प्रक्रिया पूर्ववत रहेगी। नगर निगम के सिटी प्लानर एवं भवन अधिकारी के द्वारा नजूल अधिकारी को संबंधित भूमि के स्वामित्व की जानकारी हेतु पत्र भेजा जायेगा। पत्र के साथ आवेदक द्वारा प्रस्तुत समस्त दस्तावेज संलग्न करने होंगे। नजूल अधिकारी के द्वारा उक्त पत्र पर तत्काल कार्यवाही करते हुए एन आई सी. के सॉफ्टवेयर के माध्यम से डाटावेस से भूमि की स्थिति सीलिंग भूमियों को दृष्टिगत रखते हुए प्राप्त की जायेगी तथा दो दिवस के अंदर नगर निगम को प्रेषित की जायेगी।

वर्तमान में नजूल क्षेत्र के 20 ग्रामों का डाटावेस तैयार हो चुका है, तथा शेष का कार्य प्रगति पर है। जिन ग्रामों का डाटावेस तैयार हो चुका है, उनका अनापत्ति प्रमाण पत्र सॉफ्टवेयर द्वारा जारी होगा तथा जिन ग्रामों का डाटावेस तैयार नहीं हुआ है, उनका अनापत्ति प्रमाण पत्र रीडर-2 नजूल अधिकारी द्वारा मिसिल बन्दोबस्त कार्यालय में उपलब्ध प्रतियों के साथ मिलान कराकर नगर निगम में भेजा जायेगा। आवादी के क्षेत्र के नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र की व्यवस्था पूर्वानुसार रहेगी। अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रतियां तहसीलदार नजूल एवं संबंधित राजस्व निरीक्षक नजूल तथा हल्का पटवारी को भी दी जायेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आवेदक उसी भूमि पर निर्माण कर रहा है, जिसके लिये अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया है। यदि अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है तो ऐसी स्थिति में अवैध निर्माण न हो उक्त राजस्व अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे।

एन ओ सी. तत्काल मिलेगी

कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने बताया कि नजूल एन ओ सी. के लिये कम्प्यूटराइजड् प्रणाली विकसित हो जाने से नजूल एन ओ सी. चाहने वाले आवेदकों को अब कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा इसमें कोई विलम्ब भी नहीं होगा। साथ ही भ्रष्टाचार जैसी कोई शिकायत नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि इसमें 80 प्रतिशत समस्याओं का निराकरण त्वरित गति से होगा। श्री त्रिपाठी ने बताया कि नजूल द्वारा एन ओ सी. नगर निगम को सीधे भेजी जायेगी। जहाँ से आवेदकों को भवन निर्माण की अनुमति मिलेगी।

बेस्‍ट कलेक्‍टर्स, सुशासन भाग-1 फि ल्‍म पर एक सवाल का उत्‍तर


बेस्‍ट कलेक्‍टर्स, सुशासन भाग-1 फिल्‍म पर एक सवाल का उत्‍तर

मुरैना / ग्‍वालियर 21 जुलाई 09, पिछले दिनों ग्‍वालियर टाइम्‍स द्वारा नेशनल नोबलयूथ अकादमी के सहयोग से जारी की गयी फिल्‍म बेस्‍ट कलेक्‍टर्स, सुशासन भाग-1 पर हमें कई सुझाव व सवाल प्राप्‍त हुये हैं जिसमें हम श्री देवेन्‍द्र सिंह चौहान द्वारा हमारी फेसबुक प्रोफाइल पर चल रही फिल्‍म पर की गयी टिप्‍पणी का उत्‍तर देना हमें आवश्‍यक प्रतीत हुआ है, हम यहॉं इसका सम्‍यक उत्‍तर दे रहे हैं-

उनकी टिप्‍पणी इस प्रकार है –

Devendra ने आपके लिंक के बारे में टिप्पणी की:

तोमर साहब मेरी जानकारी में तो मुरेना के जिलाधीश श्री राधेश्याम जुलानिया, ग्वालियर के जिलाधीश श्री विजय सिंह तथा श्री राकेश साहनी आयुक्त की उत्कृष्ट कार्य प्रणाली की चर्चा आम थी!:

हमारा उत्‍तर यह है-

प्रिय देवेन्‍द्र जी,

हमने अपनी फिल्‍म के लिये अधिकारीयों का चयन करते वक्‍त कुछ मानदण्‍ड निर्धारित किये थे जिसमें केवल पिछले कुछ वर्षों में पदस्‍थ रहे (पिछले दस साल के भीतर) अधिकारीयों को इसमें शामिल करने का यत्‍न किया था तथा प्रशासनिक सक्रियता, लोकतांत्रिक अवधारणा की अनुकूलता, संवेदनशीलता, सजगता, मुस्‍तैदी, प्रतिबंधात्‍मक कार्यवाहीयां,, सहायता कार्यवाहीयां, जनोन्‍मुखी प्रशासन, जन निकटता, रचनात्‍मक गतिविधियां, रचनात्‍मक कार्य, जन सुनवाई, फरियादी को फौरी राहत, सुरक्षा, विनम्रता, जनसंपर्क आदि ऐसे करीब 58 बिन्‍दु तय किये थे ।

जिसके अनुसार हमने प्रयास किया था, तथा आपके द्वारा तथा अन्‍य कई लोगों द्वारा प्रेषित सुझावों पर हम बराबर पुनिरीक्षण कर रहे हैं, और हम आप सबसे लगभग पूरी तरह सहमत भी हैं, तत्‍कालीन ग्‍वालियर कलेक्‍टर श्री विजय सिंह के सम्‍पूर्ण कार्यकाल में मै स्‍वयं ही ग्‍वालियर रहा हूँ और उनका सारा कार्य मैंने स्‍वयं देखा है, और तत्‍कालीन ग्‍वालियर आयुक्‍त श्री राकेश साहनी व तकलीन कलेक्‍टर श्री विजय सिंह का नाम इसमें होना चाहिये मैं सहमत हूँ, इस फिल्‍म के आगे आने वाले किसी भी भाग में ये श्रेष्‍ठ अधिकारी अवश्‍य उल्‍लेखित होंगें । इन दोनों का नाम कई लोगों ने सुझाया भी है और मै स्‍वयं दोनों का कार्यकाल खुद देख भी चुका हूँ । मैं सहमत हूँ , इन्‍हें अवश्‍य उल्‍लेख व सम्‍मान प्राप्‍त होना चाहिये ये दोनों ही प्रेरणास्‍पद अधिकारी हैं । अगली फिल्‍मों के लिये इन्‍हें बेहिचक शामिल कर लिया गया है । चूंकि इसी सुशासन श्रंखला फिल्म में श्रेष्‍ठ राजनीतिज्ञों और श्रेष्‍ठ पुलिस अधिकारीयों व कर्मियों, श्रेष्‍ठ समाजसेवियों, संस्‍थाओं श्रेष्‍ठ छोटे अधिकारीयों व कर्मचारीयों के भाग भी शामिल हैं अत: किस भाग में पुन: आई.ए.एस. श्रेणी के अधिकारी होंगें यह क्रम की बात है ।

तत्‍कालीन मुरैना कलेक्‍टर श्री राधेश्‍याम जुलानिया का कार्यकाल किंचिंत विवादास्‍पद रहा है, उनका आधा कार्यकाल किसी और प्रकार का तथा आधा कार्यकाल किसी और प्रकार का रहा है , उनका पूरा कार्यकाल भी मैंने स्‍वयं मुरैना में रह कर देखा है और कई साक्ष्‍य ऐसे उपलब्‍ध हैं जो कि उनके सारे कार्यकाल में से आधे कार्यकाल पर भारी विवाद पैदा कर सकते हैं , फिर रचनात्‍मक कार्यों का अभाव, विध्‍वंसात्‍मक व विनाशात्‍मक प्रशासन, लोकतंत्र , वैधानिकता, पारदर्शिता आदि कई चीजों का अभाव रहा है, उनके द्वारा लिखे गये व किये गये कई विरोधाभासी कार्यों के साक्ष्‍य भी हमारे पास हैं । और भी कई चीजें उन्‍हें हमारे मानदण्‍डों पर फिट नहीं करतीं, अत: फिलहाल श्री जुलानिया का नाम इस फिल्‍म में शामिल कर पाने में हम असमर्थ हैं, श्‍योपुर के वर्तमान कलेक्‍टर श्री एस.एन. रूपला को भी इन्‍हीं मानदण्‍डों के आधार पर हम अगली फिल्‍मों में शामिल कर रहे हैं वे पूरी तरह उपयुक्‍त अधिकारी हैं ।

मुरैना कलेक्‍टर श्री एम.के. अग्रवाल का नाम कई लोगों द्वारा सुझाया गया है , इसी प्रकार डॉं. मनोहर अगनानी का नाम भी कुछ लोगों द्वारा सुझाया गया है , यह दोनों नाम अभी विचार में हैं और मानदण्‍डों पर परीक्षाणाधीन है ।

एक मित्र द्वारा फिल्‍म को तुलनात्‍मक रूप में प्रस्‍तुत करने की सलाह दी है, यानि कम्‍परेटिव रूप में , यह सलाह भी विचाराधीन है ।

सामुदायिक पुलिसिंग और पुलिस के व्यवहार परिवर्तन से सुलझेगी चम्बल क ी डकैत समस्या – पुलिस महानिरीक्षक झा


सामुदायिक पुलिसिंग और पुलिस के व्यवहार परिवर्तन से सुलझेगी चम्बल की डकैत समस्या – पुलिस महानिरीक्षक झा

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

· पुलिस को आचरण व व्यवहार के साथ कार्यशैली भी बदलना होगी

हमें खेद है मुरैना में भारी बिजली कटौती के कारण इस समाचार के प्रकाशन में विलम्ब हुआ

मुरैना 15/16 जुलाई 09, चम्बल पुलिस महानिरीक्षक श्री एस.के. झा ने आज पुलिस कण्ट्रोल रूम पर पत्रकारों से चर्चा करते हुये चम्बल की आपराधिक छवि और डकैत समस्या के स्थायी निदान के सम्बन्ध में खुल कर डिबेट की ! मौके पर जिले के सभी पत्रकारगण , मुरैना पुलिस अधीक्षक श्री संतोष सिंह, भिण्ड पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मुरैना सी.एस.पी. श्री अमृत मीणा, सिटी कोतवाली टी.आई. री प्रवीण अष्ठाना एवं अनेक एस.आई. व एस. आई. सहित आरक्षक गण उपस्थित थे !

चम्बल आई.जी. श्री संजय कुमार झा ने मुरैना पुलिस अधीक्षक री संतोष सिंह ओर उनकी टीम की भारी प्रशंसा की और कार्यप्रणाली पर सरहाना व्यक्त करते हुये बेहतर परिणाम निरन्तर देते रहने की अपेक्षा की ! श्री संतोष सिंह को ऊर्जावान एवं सकारात्मक पुलिस अधिकारी बताते हुये चम्बल के अपराधों पर स्थायी एवं लम्बी नासूर बन चुकी डकैत समस्या पर कुद ऐसी कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया कि जिससे चम्बल के माथे से यह बदनुमा दाग हट सके तथा विकास, व उन्नति के नये आयाम यहाँ विकसित हो सकें !

श्री झा ने पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुय बताया कि मैं म.प्र. के तकरीबन सभी जिलों में किसी न किसी रूप में पदस्थ रहा हूँ और पुलिस विभाग में यह कहावत है कि जब तक आप चम्बल में काम कर नहीं आते तब तक आपकी पुलिस की असल नौकरी पूर्ण नहीं होती, वहाँ जो काम करके पुलिस अफसर आता है वही कामयाब पुलिस अफसर माना जाता है ! मेरी तमन्ना थी कि मुझे चम्बल में एक बार काम करने का मौका मिले जो कि मेरी इस पदस्थापना के साथ पूर्ण हो गयी है ओर मैं यहाँ बेहतर काम करने के लिये आया हूँ मेरी इच्छा है कि अपनी पूरी क्षमता के साथ यहाँ की जनता की नजरों में एक सच्चे पुलिस अधिकारी की तरह सेवा करके जाऊॅं ! पत्रकारों ने श्री झा को इस पर शुभकामनायें दीं और उनकी सदभावनाओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया !

श्री झा ने पुलिस को समाज से निरन्तर जुड़े रहने तथा आम आदमी की पुलिस के रूप में काम करने की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि जब तक पुलिस आफिसर और आम आदमी में दूरी कायम रहेगी तब तक सच्चे अर्थों में पुलिसिंग कामयाब नहीं हो सकती, पुलिस कर्मियों का व्यवहार व आचरण बेहद संयत व शालीन रहना चाहिये, थाना पर पहुँचने वाले हर पीड़ित फरियादी को सहानुभूति एवं सहायता कर्मी के रूप में सुना जाना चाहिये और तदनुसार फरियादी की असल समस्या को जानने का पूर्ण मनोयोग से यत्न करना चाहिये, फरियादी भले ही अपनी बात कह या समझा न पा रहा हो , पुलिस अधिकारी को उसे व उसकी संवेदना एवं वेदना को यथोत्तम शब्दीय जामा पहनाना चाहिये और तुरन्त उसकी शिकायत विधिक रूप से दर्ज कर कार्यवाही की ओर अग्रसर होना चाहिये, जहाँ उसे जितनी फौरी राहत की जरूरत है उसे अविलंब प्रदान की जानी चाहिये, पुलिस कर्मियों को अपने अंतस में यह बिठाना ही होगा कि वे देश और समाज के सच्चे सेवक एवं हितैषी व मित्र हैं, अपराधी उनका विकट निशाना है और अपराधीयों के प्रति कठोर व्यवहार व आचरण अपनाने से ही पुलिस के प्रति लोगों का विश्वास व निष्ठा कायम रहेगी ! यदि विपरीत व्यवहार किया जाता है तो भले और पीड़ित लोग थाना जाना बन्द कर देंगें तथा पुलिस की साख इससे गिरेगी तथा समाज के शान्ति प्रिय निरपराध लोगों में भय का संचार होगा और अपराधीयों का मनोबल बढ़ेगा ! श्री झा ने पुलिस कर्मियों से अपेक्षा की न केवल व्यवहार में परिवर्तन करें अपितु आचरण में भी परिवर्तन करें ! और जनता एवं समाज के दोस्त बनें तथा आपराधियों के दुश्मन !

श्री झा ने बताया कि अब वे थाना स्तर पर भी थाना में पदस्थ पुलिस कर्मियों के साथ मीटिंग्स करेंगें और बारीकी से उनकी समस्याओं, कठिनाईयों तथा चम्बल के अपराधों के मूल की खोज करेंगे तथा प्रयास करेंगें कि मामले की तह तक जायेंगें और जानेंगें कि आखिर क्या वजह है कि चम्बल में बदला, रंजिश , बागी और डकैत आज करीब सौ साल से बनते चले आ रहे हैं और यह समस्या समाप्त क्यों नहीं हो रही !

प्रसंगवश- मुख्य न्यायाधिपति पटनायक ने कहा क्यों लेते हैं लोग चम्बल में बदला

हम यहाँ प्रसंग वश उल्लेख करना चाहेंगें कि पिछले कुछ साल पहले म.प्र. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री अनंग कुमार पटनायक मुरैना आये तो न्यायालय में आयोजित कार्यक्रम में श्री पटनायक ने सवाल किया था कि ”अगर सब ठीक चल रहा है, पुलिस अपना काम ठीक से कर रही है, प्रशासन अपना काम ठीक से कर रहा है, न्यायालय अपना काम ठीक से कर रहा है तो फिर क्यों लेते हैं लोग चम्बल में बदला, क्यों होते हैं फिर यहाँ बागी या डकैत पैदा, आखिर यह रिवेन्ज थ्योरी यहाँ क्यों है ! कहीं न कहीं हम चूक रहे हैं, हमारा तंत्र कहीं न कहीं गड़बड़ है , हमारे काम में कहीं खोट है हमें आत्मावलोकन कर अपनी खामीयां दूर करना होंगीं ! तभी लोग कानून हाथ में लेना बन्द कर देंगें , हम कानून हाथ में होकर उसका सही इस्तेमाल नहीं करते तो लोगों को सही वक्त पर मदद नहीं करते तो लोग कानून हाथ में लेते हैं, उन्हें जब किसी स्तर पर कानूनी मदद या न्याय नहीं मिलता तो खुद न्याय के लिये कानून हाथ में लेते हैं ! ”

श्री झा ने बताया कि यह हैरत की बात है कि चम्बल में 60 हजार से अधिक शस्त्र लायसेन्स हैं, और लगभग 4700 से अधिक अपराधी फरार चल रहे हैं यह आश्चर्यजनक संख्यायें हैं !

पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि थानों में पुलिस मामला दर्ज नहीं करती, इस सम्बन्ध में आप क्या कार्यवाही करेंगें ! श्री झा ने कहा कि मैं पहले ही कह चुका हूँ कि हर फरियादी को सहानुभूति पूर्वक सुना जाना चाहिये और जहाँ अपराध बनता है वहाँ अपराध अवश्य कायम किया जाना चाहिये !

ग्वालियर टाइम्स द्वारा यह पूछे जाने पर कि चम्बल में झूठे मामले दर्ज कराने का भी एक खासा प्रचलन है और ताकतवर लोग पुलिस का बेजा इस्तेमाल कर निर्बल व गरीबों के खिलाफ मामले दर्ज करा कर उन्हें प्रताड़ित करते हैं तथा दबा कर रखते हैं या शोषण करते हैं या अपना दबदबा बनाये रखते हैं जिससे आक्रोश पैदा होता है बाद में अधिकांश ऐसे प्रकरणों में मुल्जिम बरी हो जाते हैं जबकि आई.पी.सी. में धारा 182, 211, 193, 195 मौजूद हैं लेकिन पुलिस कभी भी इनका इस्तेमाल क्यों नहीं करती, जिससे झूठे मामले दर्ज होना बन्द हो सकें और पुलिस का दुरूपयोग बन्द हो सके ! इस पर श्री झा एवं मुरैना पुलिस अधीक्षक श्री संतोष सिंह एवं भिण्ड पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने एक साथ सहमति जताते हुये समवेत स्वर में कहा कि हाँ यह एकदम सही है ओर बहुत महत्वपूर्ण बात है, हम इसे एक सुझाव के रूप में नोट करेंगे और इस पर अवश्य अमल करेंगे यह होना चाहिये और बेहद जरूरी है !

ग्वालियर टाइम्स द्वारा अगला प्रश्न पूछे जाने पर कि अजाजजा अधिनियम के तहत 80 से 85 प्रतिशत प्रकरणों में भी ऐसा ही होता है तथा केवल प्रकरण दर्ज कराने पर मिलने वाले पैसे के लिये ऐसे सैकड़ों मामले फर्जी दर्ज कराये जाते हैं तथा सरकार से और मुल्जिम से मिलने वाले पैसे के बाद 90 से 85 प्रतिशत मामलों में मुल्जिम बरी हो जाते हैं लेकिन लुट पिट चुके अन्य जाति के मुल्जिमों और अजाजजा के लाों के बीच जातीय व सामाजिक विद्वेष फैलता है ऐसे मामलों में भी पलट केस क्यों नहीं चलाये जाते जिससे झूठे मामले दर्ज कराने वाले हतोत्साहित हों !

इस पर भी दोनों जिलों के पुलिस अधीक्षकगण सहित आई.जी. श्री झा ने सहमति व्यक्त करते हुये अपनी कार्यवाहीयों में इस पर खास कार्यवाही अमल करने की जरूरत बताई !

श्री झा ने सामुदायिक पुलिसिंग का महत्व प्रतिपादित करते हुये कहा कि हाल ही में म.प्र. के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर हाल ही में प्रारंभ की गयी जन सुनवाई के काफी सुखद परिणाम सामने आये हैं और पुलिस समाज के काफी नजदीक पहुँच रही है , लोगों में पुलिस के प्रति मित्रतापूर्ण व सहृदयता पूर्ण भावना जागृत हुयी है ! यह सामुदायिक पुलिसिंग का ही एक भाग है !

बेहतर सामुदायिक पुलिसिंग के लिये ग्राम व नगर रक्षा समितियों को सशक्त, समर्थ सक्षम बनाया जायेगा और समाज एवं कानून के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर उपयोग किया जायेगा ! नागरिकों की सुरक्षा अमनो चैन कायम रहे इसके लिये हर संभव जतन किये जायेंगें, मुरैना पुलिस अधीक्षक श्री संतोष सिंह स्वयं पेट्रोलिंग करते हैं और खुद न सो कर लोगों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेवारी निर्वाह करते हैं यह एक बेहतर पुलिसिंग है !

सामुदायिक पुलिसिंग में मीडिया की विशेष भूमिका

श्री झा ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग हो या अपराध निवारण हो या डकैत समस्या का निदान हो हर जगह मीडिया की खास भूमिका व जवाबदेही है, मीडिया सबसे बड़ा व अचूक प्रहरी है जो कि बेहतर सामाजिक व्यवस्था कायम करने में एक सशक्त भममिका निर्वाह करता है , श्री झा ने मीडिया से अपेक्षा की कि मीडिया बेहतर पुलिस व्यवस्था, अमनो चैन कायमी और अपराध तथा डकैत समस्या निवारण में अपनी महती व सकारात्मक भूमिका अदा करे !

श्री झा ने यह भी कहा कि दो प्रकार के अपराधी होते हैं , एक तो वे जो कि आइडेण्टीफाइड हैं और जिन्हें हम जानते हैं कि वे किसी अपराध में संलग्न रहे हैं और कानून के शिकंजे से बाहर या फरार हैं, दूसरे वे जो कि संभावित अपराधी हैं या अपराध कर सकते हैं या कहीं किसी अपराध की संभावना है ! हमें फरार अपराधियों को कानून तक लाना होगा और संभावित अपराधियों या अपराध को घटित होने से पहले रोकना होगा तभी समाज का सच्चे अर्थों में हित हो सकेगा !

तीव्र न्यायालयीन कार्यवाही की आवश्यकता

श्री झा ने यह भी कहा कि पुलिस और वकीलों सभी को यह प्रयास करना चाहिये कि प्रत्येक आपराधिक मामले में त्वरित एवं तीव्र न्यायायिक कार्यवाही हो और फेसलों में विलम्ब न हो, फैसलों में विलम्ब से भी आक्रोश व्याप्त होकर आम आदमी के सब्र का बांध टूट कर न्याय व कानून के प्रति आस्था कम होती है अत: यथा संभव स्पीडी ट्रायल होना चाहिये ! और केस में लेतलाली से बचना चाहिये !

बढ़ाया जायेगा अंतर्राज्यीय पुलिस सहयोग

श्री झा ने कहा कि हम अंतर्राज्यीय पुलिस सहयोग बढ़ाने के हामी हैं, राजस्थान, उत्तरप्रदेश एवं मध्यप्रदेश की सीमा पर चॅबल संभाग की स्थिति होने से यहाँ इसकी बेहद जरूरत है जिससे अपराधी एक राज्य में अपराध करके दूसरे राज्य में न छिप सकें ! हमें अभी तक राजस्थान और उत्तरप्रदेश पुलिस का काफी अच्छा सहयोग मिलता रहा है और कई मामलों में वहाँ की पुलिस ने हमारी त्वरित सहायता की है हम आगे भी इस पारस्परिक सहयोग को बनाये रखेंगे तभी अपराध नियंत्रण की दिशा में ठोस कार्यवाही संभव होगी !

श्री झा ने प्रत्येक पुलिस अधिकारी से क्षेत्र का भौगोलिक, सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश अच्छी तरह जानने समझने की आवश्यकता पर बल दिया !

श्री झा की पत्रकार वार्ता से एक बात तो लगभग साफ हो गयी कि पुलिसिंग झा के लिये एक पावन मिशन है ओर वे दिल से चम्बल की कई महती समस्याओं को सुलझाने के मूड में हैं !

मुरैना में भीषण वारिश, ठप्प हुयी बिज ली सप्लाई, सारा शहर और अंचल जल मग्न


मुरैना में भीषण वारिश, ठप्प हुयी बिजली सप्लाई, सारा शहर और अंचल जल मग्न

आखिर पिघल ही गया आसमान

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’,

फोटो – अतर सिंह डण्‍डोतिया एवं ऐश्‍वर्या सिंह

मुरैना 13 जुलाई 09, इस साल पानी न बरसने की शिकायत कर रहे लोगों को आषाढ़ का पूरा महीना तपती गर्मी के बीच में त्राहि त्राहि करते निकालना पड़ा ! कई अखबारों ने कल तक कई किसानों को सूखी चटकती जमीन पर बैठे आसमान की ओर बादलों की बाट जोहते , ताकते चित्र प्रकाशित किये थे ! तथा कई ने सूखा पड़ने की भारी संभावना व्यक्त कर दी थी और सूखाग्रस्त जिला घोषित की भी संभावनायें दर्शायी थीं !

यू तो आषाढ़ का महीना भले ही सूखा निकला हो लेकिन श्रावण मास प्रारंभ होते ही पहले ही दिन से चम्बल अंचल में वारिश ने दस्तक दे दी थी ! लेकिन हल्की फुल्की वारिश से न तो किसानों के खेतों में जोत आ पा रही थी और न तपती गर्मी की तपिश ही शान्त हो रही थी ! अज्ञैर तकरीबन सभी के चित्त गाँवों से शहरों तक भड़भड़ा रहे थे ! सबकी पेशानी पर चिन्ता की रेखायें थीं ! कलेक्टर कमिश्नर से लेकर व्यापारी और छात्र किसान पत्रकार वकील सभी वारिश की कमजोरी से भारी चिन्तित और परेशान थे !

जहाँ सबिजयों के दाम आसमान छू रहे थे और लोग अचार चटनी पर आ गये थे वहीं गरीब की अरहर यानि तुअर की दाल 80 रू. प्रति किलो पर पहुँच गयी थी !

लोगों को लग रहा था कि यही दशा रही तो जहाँ एक ओर भारी सूखा पड़ेगा और खेत खलिहान के साथ काछीयों की कछवाई चौपट हो जायेगी तथा भूख और मंहगाई कई लोगों के लिये मारक बन जायेगी !

प्रभु की दया हुयी, इन्द्र देव रीझे कि नहीं पता नहीं लेकिन भगवान आशुतोष शंकर जरूर चम्बल पर प्रसन्न हो कर कृपायमान हो गये ! सावन का पूरा महीना हिन्दूओं की ओर से भगवान शंकर, आस, आसमान, वारिश और रिश्तों को समर्पित है ! तो जहाँ सावन शुरू होते ही वारिश का पहला मौसमी खाता खुला वहीं सावन के पहले सोमवार को जब लोग भगवान भोले शंकर की आराधना अर्चना के लिये अपनी पूरी निष्ठा से जुटे और प्रात: ब्रह्म मुहूर्त से ही शि जलाभिषेक क्रियायें शुरू हुयीं तो मानो शिव के बन्द नेत्र अचानक खुल पड़े और बस जैसे बोले कि ठहरो, बूंद बूंद पानी के लिये तरसते मेरे बच्चो क्या मांग कर ढो ढो कर जल के लोटे ला रहे हो और कंजूसी से जलाभिषेक कर रहे हो, मुझे तो तृप्त होकर पूर्ण स्नान करना है भाई !

हुआ यूं कि सबेरे नियमित बिजली कटौती हुयी, सुबह 7 बजे कटी बिजली से मानो कई लोग स्नान तक नहीं कर पाये , और वापस बिजली आने का इन्तजार करते रहे (चम्बल में बिजली और पानी का अटूट रिश्ता है) और तत्पश्चात ही शिव जलाभिषेक को उद्यत हुये , बिजली भी ठीक सबेरे 10 बजे आ गयी लेकिन इसके साथ ही , प्रसन्न भगवान आशुतोष ने वारिश भी प्रारंभ कर दी, पहले लोगों को लगा कि सामान्य वर्षा होगी लेकिन कुछ ही समय बाद जब हवाओं ने रूख बदल बदल कर अलट पलट कर बादलो को पीटना पछीटना शुरू किया तो वारिश की तेज मूसलाधार लहर ने तुरन्त ही लोगों को अहसास करा दिया कि आज तो शंकर जी भारी प्रसन्न और वारिश पर विकट कुपित हैं, चम्बल के गाँवों में इस प्रकार की वारिश को गोलाधार वारिश कहते हैं !

गोलाधार यानि मूसलाधार वारिश का उलट पुलट धुंआधार निरन्तर सिलसिला लगातार दोपहर सवा 12 बजे तक चला इसके बाद जैसे खण भर के लिये वारिश ने 15 मिनिट के लिये मानो सांस ली और फिर इसके बाद फिर जो दोबारा शुरू हुयी तो लगातार ढाई बजे तक वही गोलाधार यानि मूसलाधार धुैआधार बरसता रहा !

वारिश इतनी तेज थी कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था ! और मस्ती इतनी कि क्या बूढ़ा क्या जवान कोई भी अपने आप को वारिश में डुबोने से रोक नहीं पाया और सारे के सारे कूद पड़े वारिश में खुद को डुबाने !

सारा शहर और अंचल जलमग्न

वारिश की अधिकता से शहर मुरैना मानों समुन्दर के बीच कोई टापू ज्ेसा लगने लगा ! चारों ओर सिर्फ पानी ही पानी, शहर से नाली सड़के सब गायब हो गयीं बस केवल पानी ही पानी, विशाल जलराशि के बीच पानी का सैलाब और धीरे धीरे डूबते जमीनी तल ! लगातार करीब 5 घण्टे की भीषण वारिश से शहर की सड़कों का मंजर देखने लायक और स्कूल आते जाते बच्चों, साइकिल दुपहियों का तैरते हुये निकलना सारा नजारा मानों सबको एक चुनौती दे रहा था , बोलो शिव जलाभिषेक हो रहा है कि नहीं, और सबके मुँह से बरबस ही निकला , वाह शंकर जी वाह मान गये ऐसा धुँआधार जलाभिषेक कि पूरे सावन का अभिषेक एक ही दिन में कर डाला , वह भी तरबतर !

शहर के साथ अंचल के गाँवों में भी यही आलम था, बस चारों ओर पानी ही पानी !

शहर की निचली बस्तियों में पानी धाड़ें मारता हुआ कई घरों में घुस बैठा, वही वे लोग भी अचानक मुसीबत में आ गये जहाँ नई बनीं सड़कों से स्क्थिति कुछ ऐसी हो गयी है कि सड़कें मकानों से ऊॅंची हो गयीं हैं और मकानों की दहलीज सड़कों से नीचे हो गयीं हैं , वे लोग अभी तक मजे में थें लेकिन आज की वारिश ने उनका हाल खराब कर दिया और पानी सीधा पहले ही झटके में उनके घरों में घुस बैठा ! और सडृक से ज्यादा जल स्तर उनके घरों में हो गया विशेषकर, सिंगल बस्ती, गोपालपुरा महावीर पुरा, और ओवर ब्रिज के पार अम्बाह रोड पर, रामनगर आदि इलाकों में पानी घरों में घुस गया !

आमतौर पर शहर में जल स्तर सड़कों पर ढाई से तीन साढ़े तीन फीट तक चढ़ कर प्रवाहित होता रहा !

ठीक ठाक काम करता रहा शहर का ड्रेनेज सिस्टम

यह खैर रही कि शहर का सीवर और ड्रेनेज सिस्टम ठीक ठाक काम करता रहा तथा केवल 15 मिनिट में ओवर वाटर लेवल को क्लीयर कर गायब करता रहा तथा शहर को यथावत करता रहा ! वीना भारी मुसीबत हो जाती और पिछले साल भिण्ड में हुयी स्थिति से भी कहीं बदतर हालत यहाँ हो जाती लेकिन महज 15 मिनिट में पानी गायब होते रहने से भई इतना तो कहना पड़ेगा कि आखिर प्राण बचे ! नगरपालिका इसके लिये धन्यवाद की पात्र है !

जमकर नहाये लोग

लेगों ने वारिश का जमकर लुत्फ लिया, लोग घरों से निकल कर अपनी खुली छतों और सड़को पर आकर जमकर खुल कर वारिश स्नान का आनन्द लेते रहे, युवतियां इस मामले में काफी आगे रहीं, युवक भी इससे पीछे नहीं रहे !

क्हा जाता है कि वारिश स्नान से चर्म रोग नहीं होते और घमौरियां आदि नहीं होतीं इसके साथ ही शरीर की साल भर की अन्दरूनी गर्मी समाप्त होकर सैकड़ों बीमारीयों और तकलीफों से राहत भी मिलती है ! वहीं कुछ लोग जो शिवपूजा के लिये सबेरे बिजली न होने से स्नान नहीं कर पाये थे वे भी जमकर वारिश में नहाये !

बिजली सप्लाई ठप्प रही लगातार 11 घण्टे

हालांकि वारिश के वक्त ऑंधी या तूफान जैसी कोई स्थिति नहीं थी फिर भी सतर्कता बरतते हुये बिजली महकमे ने वारिश शुरू होने के बीस मिनिट बाद से पूरे अंचल की बिजली सप्लाई पूरी तरह बन्द कर दी ! और वारिश होने के बाद तक बन्द रखी !

सबेरे 7 बजे से कटी बिजली सबेरे 10 बजे आयी तो वारिश शुरू होते ही बिजली सप्लाई फिर बन्द कर दी गयी, हालांकि निरन्तर भीषण वारिश दोपहर ढाई बजे तक चली किन्तु बिजली सप्लाई इसके बाद भी बन्द रखी गयी, उसके बाद दोपहर की नियमित कटौती 4 बजे से 6 बजे तक तय होने से अंतत: बिजली शाम 6 बजे ही वापस आयी यानि सबेरे 7 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली सप्लाई दो छुटटी के बीच वारिश युक्त वर्किंग टाइम फंस जाने से लगातार छुटटी पर रही ! यानि 11 घण्टै लगातार बन्द रही बिजली !

हालांकि यह बिजली कटौती लोगों को मस्त सुहावने मौसम के चलते अखरी नहीं और स्नान के अभाव वालों ने वारिश स्नान करके शिव पूजा कर ली ! लेकि इस दरम्यान मीडिया और खबरिया दस्ते पूरी तरह विकलांग हो गये और भीषण वारिश के समाचार समय पर प्रकाशित नहीं हो सके !

ग्‍वालियर चम्‍बल के श्रेष्‍ठ आई.ए.ए स. अधिकारीयों पर फिल्‍म सुशासन भाग-1


गुरूपर्व पूर्णिमा पर विशेष : अपनी पूजा करवायें वे प्रभु को क्या पहचा नें


गुरूपर्व पूर्णिमा पर विशेष : अपनी पूजा करवायें वे प्रभु को क्या पहचानें

नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द”

हालांकि कल या परसों तक जब तक यह आलेख अखबारों में प्रकाशित होगा तब तक गुरूपर्व निकल चुका होगा ! मेरी इच्छा हुयी कि अबकी बार इस महान गुरू पूर्णिमा पर अपने विचार और अनुभव आपके बीच बॉटू !

मनोज कुमार की पुरानी फिल्म सन्यासी का एक प्रसिध्द गीत है, स्व. मुकेश एवं लता जी ने इसे गाया है – इसे जरूर सुना जाना चाहिये –

गीत में काम की पंक्तियां है- ये साधु के वेष में पापी रोज पाखण्ड रचायें, दिन में डाके डाले पापी रात में कतल करायें, सच बोले सन्यासी इनका कभी न हो कल्यान …ये है गीता का ज्ञान

वेद शास्त्रों की भाषा को ये ढोंगी क्या जानें, अपनी पूजा करवायें ये प्रभु को क्या पहचानें …..ये है गीता का ज्ञान

यू तो गुरू महिमा अनन्त है और गुरू एक ऐसी कड़ी एक ऐसा सहारा होता है जो अपने शिष्य को कैसी भी मंझधार में फंसने पर येन केन प्रकारेण पार लगाता है, और इस दरम्यान अगर स्वयं साक्षात ईश्वर से भी उसका टकराव हो जाये तो सीधी टक्कर लेकर स्वयं की बलि भी देकर अपने शिष्य की रक्षा करता है !

गुरू बनना बेहद कठिन है, आजकल तो लगभग नामुमकिन है ! गुरू हजार मायावी बंधनों में बंधा है, गुरू लाखों कामनाओं की पतंग उड़ाता रहता है, गुरू मार्केटिंग की ख्वाहिश से ऐसे शिष्य तलाशता है कि जल्दी से जल्दी ख्यातनाम हो जाये और धनवान शिष्यों का मेला उसके पास टूट पड़े ! गुरू बनना वाकई कठिन हो गया है, फर्जी ढकोसले बाज मार्केटियर्स – ब्राण्ड नेम आज बाजार में अपार हैं लेकिन गुरू कोई नहीं दिखता !

भगवान श्रीकृष्ण, श्री गणेश, भगवान शंकर और प्रभु विष्णु, भगवान ब्रह्मा जी की चरण पादुकाओं का पूजन या अभीष्ट देव, देवता या देवी की पूजा या उनका पादुका वन्दन गुरू पर्व पर मुझे श्रेष्ठ जान पड़ता है !

आजकल गुरू की जगह पाखण्डी अधिक मिलते हैं ! जिन्हें न शास्त्रों का ही ज्ञान है, न शास्त्रों आदेशों से सुभिज्ञ हैं न गुरू शिष्य परम्परा से वाकिफ हैं और न संस्कार प्रणाली से परिचित ही ! मेरा आशय व संकेत किसी व्यक्ति विशेष के प्रति कतई नहीं हैं ! लेकिन मैं आपको अपना अनुभव सुनाता हूँ !

कई वर्ष पहले बचपन से ही मुझे ईश्वर और ईश्वरीय चमत्कारों से साक्षात्कार की गहन तमन्ना रही और मैंने अपने जीवन का हर पल कुछ न कुछ पाने में गुजारा ! मैंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से लेकर एल.एल.बी. और एम.एस.सी. भौतिक शास्त्र तक की पढ़ाई लिखाई की और यह भी खास बात है कि मैं सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण रहा, कई बार टॉपर रहा ! मुझे कुछ रिसर्च और अनुसंधान अन्वेषण करने का भी अवसर प्राप्त हुआ ! पर इस सबके बीच जो खास बात है वह यह कि मुझे गाँव में वक्त गुजारने का अधिक मौका मिला है और मेरी पहली पसन्द ग्रामीण जीवन है ! अपने गाँव में जब भी छुटिटयां बिताने या अन्य किसी अवसर पर जाता तो छुटटी बीतने के भी बाद एकाध दो महीने गॉव में बिता ही देता था ! सो मुझे हल जोतने और गाय भैंस जैसे प्शु चराने का खूब आनन्द मिला ! गहरे डाँग बेहड़ जंगल, चरवाई, नदी मछण्ड मुझे नापने का खूब अवसर मिला !

जंगलों और बेहड़ों में आप थोड़ा गहरे घुस जायेंगें तो आपको कई अनुपम व अदभुत प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलेंगें ! कई बार अनेक साधु, तांत्रिक, और विचित्र वेशभूषा वाले जादूगर, टोनागर, तो अनेक बार बागी, बदमाश या अपहरण करके लड़कियां बेचने वाले गिरोह के गिरोह मिल जायेंगें ! मुझे तकरीबन सभी प्रकार के लोगों से मिलने का सौभाग्य मिला है, खैर अब तो काफी वक्त हुआ जंगलों बेहड़ों में जाना नहीं हुआ, लेकिन जंगलों में बेहड़ों में काफी रहस्य छिपे पड़े हैं ! मैंने हजारों (शायद लाखों साल) पुरानी कई विशाल शिला प्रतिमायें बीच घने घनघोर जंगलों में यूं ही बिखरी पड़ी देंखीं हैं !

राजस्थान में करौली माचलपुर की एक लम्बी चौड़ी डाँग है, जहाँ प्रकृति के रहस्यमय खजानों का अदभुत व विपुल भण्डार है ! बहुत बरस हुये तब मैंने इन्हें अपनी ऑंखों से देखा ! गुप्त गुफाओं में कई मंदिर, बीच जंगली खारों में विशाल प्रतिमाये ंतो कई सूनसान वीराने मंदिर भी मुझे देखने को मिले ! तब मैं उनके महत्व से अपरिचित था और उनकी मूल्यवत्ता से अनभिज्ञ था ! आज आभास होता है कि कई बेशकीमती ऐतिहासिक और प्राकृतिक खजाने वहाँ थे ! अब जब यह सब समझ आया तो वहाँ जाना ही नसीब नहीं हो पाया ! अब तो सुना है कि वह क्षेत्र डकैतों की शरण स्थली बन गया है, खैर डकैत वहाँ तब भी थे लेकिन छोटे मोटे और बीड़ी बण्डल छीनने वाले भैंस चोर ही थे ! और कई बार तो हम सब गाय भैंस चराने वालों ने उनकी जमकर लठठों से धुनाई भी की थी, दरअसल वे लोग नदी से मछली पकड़ते मारते थे, और हम सब इसे पाप मानते थे सो सारे बालक मिलकर उनकी जमकर कुटाई कर देते थे, कई बार पीलू के पेड़ों में बॉध कर डलवा देते थे तथा सेहियां (सेही एक बड़े काँटो वाला जानवर होता है) छोड़ कर उन्हें तंग करते थे ! सेही अगर चिपक जाये तो खून पी जाती है यह बाद में पता चला, लेकिन लाठी से सेही जमीन पर गिरा ली जाती है अगर आप तेज लाठी चलाना जानते हों ! सेही का तंत्र मंत्र भी काफी इस्तेमाल होता है, सेही का कांटा अगर आप किसी घर में गाड़ दे ंतो वहाँ कभी शान्ति नहीं रहेगी, घरवाले आपस में ही लड़ते रहेंगे, ऐसी ंकिंवदन्ती है ! और सेही का कॉटा यदि दही की नाँद के नीचे गाड़ दें या चक्की यानि चकिया के नीचे गाड़ दें घर में दूध दही घी और आटे की कमी नहीं रहती , ऐसी किंवदन्ती भी है ! किसी जमाने में सेही के कॉटों और सेहीयों के बीच रह कर आज कल एक कॉटा भी सेही का नहीं मिल पा रहा वरना सब भ्रष्टों के घर एक एक गाड़ देते ! मिलेगा तो गाड़ेंगे जरूर, देखते हैं क्या होता है !

कई साधुओं से जंगल डॉग में भेंट हुयी , बाल स्वाभाविक कौतूहलता वश हरेक से पूछा – काये बाबा भगवान के दरसन कराय दोगे का – लेकिन हर बाबा ने हर बार यही कहा कि अरे बच्चा भगवान का ऐसे ही मिलते हैं का, बाकें लें भजन करों बिनकी माला फेरो तब जायकें दस बीस जनम में भगवान मिलेंगे ! सो भईया जिस बाबा से जब भी मिले, दे दे भगवान के नाम पर कहने वाले मिले भगवान के दरसन कराने वाला कोई नहीं मिला ! कई गुरू ऐसे मिले जो हवा में हाथ उठा देते और जो भी चीज उनसे माँगो वही हवा में से प्रकट कर देते ! मैंने आजमाइश के तौर पर कुछ विचित्र चीजों के नाम लिये उनने वे भी मंगा दीं, पर बाद में जब इस लाइन में आगे बढ़ा तो पता चला कि जिन्नात की सिध्दि कर लेने से ऐसा हो जाता है ! मेरा मामला वहाँ भी नहीं जमा, कुछ मुसलमानी, कुछ बौध्द तो कुछ जैन साधकों को भी मैंने गुरू बनाया लेकिन बात वही रही सब पर थोड़ा थोड़ा था, पूर्ण कोई नहीं था ! मैंने ज्योतिष में कई लोग तलाशे लेकिन कोई भी ज्योतिष में मेरे सवालों के उत्तर नहीं दे पाया ! एक गुरू ऐसे मिले जो रोज एक ऍग्रेजी व्हिस्की मंगाते हलांकि उन पर बहुत कुछ देने को था लेकिन वे किसी को कुछ देते नहीं थे, थोड़ा बहुत वहाँ से बटोरने की कोशिश की ! जादू टोना टोटका, तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष सबके गुरू तलाशे लेकिन पक्का काम किसी के पास नहीं था ! दक्षिण मार्गी वाम मार्गी हर विद्या में कहीं कोई कच्चा पड़ता तो कोई कहीं ! खैर मुझे अभी भी गुरूओं की तलाश है, कोई मिलेगा तो जरूर बनाऊंगा, फिलहाल मेरा कोई एकमात्र शरीरधारी गुरू नहीं है !

खैर बहुत लम्बी तलाश के बाद आखिर सच्चा गुरू मिला और तमाशा यह कि वह कोई शारीरिक व्यक्ति नहीं बल्कि आध्यात्मिक व्यक्ति था ! मेरी खोज कुछ यूं पूरी हुयी कि जब मुझे एक गुरू नहीं मिला और मेरे मानदण्डों पर खरा नहीं उतरा तो मैंने जहाँ से भी जो भी सीखा उसे ही अपना गुरू मानना शुरू कर दिया, सो भई मेंरे पास मेंरे गुरूओं की लम्बी चौड़ी फौज बनना शुरू हो गयी, लेकिन अक्सर ये हुया कि किसी से चन्द बातें सींखीं तो किसी से चन्द सूत्र टिकाऊ गुरू तो चन्द ही हुये ! आज इस आलेख के जरिये अपने गुरूओं का स्मरण कर उन्हें सादर प्रणाम एवं नमन करता हूँ !

असल गुरू कौन कौन – गुरू पर्व मानने वालों को निम्न असल गुरूओं को कभी विस्मृत नहीं करना चाहिये (यह लोग मेरे गुरू हैं)

माता (जन्मदात्री और पालनहारिणी) पिता (जन्मदाता और पालनहार) गुरू – बुध्दि, ज्ञान, चेतना, विवके प्रदाता और अहंकार सहित पंचमकार नाशक, लोभहीन, निर्विकार, योगी, समदृष्टा, सुपथदर्शी, सदा रक्षक
श्री कृष्ण -अपरिमित, अपरिभाषित, योगेश्वर, अखिलेश्वर, सच्चिदानंदघन, सर्व समाधान कारक, सर्व पथ प्रदर्शक श्री गणेश- बुध्दि, ज्ञान, विवेक, शुभ लाभ प्रदाता, विघ्न कारक, विघ्न हारक, शत्रु, ऋण, रोग, दारिद्रय संहारक भगवान शंकर- कालकूट हलाहल नाशक, मान अपमान पर विजय प्रदाता, परम योगी, तमोगुण हारक, सर्व कल्याण प्रदाता, अवगुण एवं दोष नाशक
स्वामी विवेकानन्द- सदगुरू- सर्वपथ प्रदर्शक, विवेक प्रदाता जेम्स एलन श्रेष्ठ मार्गदर्शक, तमोगुण नाशक सतोपथ दर्शक, विजय प्रदाता दस महाविद्या- सर्व रक्षक

अधिकतर लोग गुरू पूर्णिमा पर गोवर्धन गिरिराज जी पूजन और परिक्रमा के लिये जाते हैं, कुछ लोग दतिया पीताम्बरा पीठ पर स्वामी जी के विग्रह पर चरण वन्दन के लिये जाते हैं मुझे लगता है यह ठीक है एवं सर्वोत्तम है ! मैं अपने प्रिय गुरूजन प्रभु श्रीकृष्ण एवं पीताम्बरापीठ के अतुलनीय शक्तियों के स्वामी जी महाराज के चरणों में गुरू पर्व पर अपना सादर चरण वन्दन करता हूँ !

पीताम्बरापीठ के स्वामी जी महाराज के लिये कहा गया है –

करारविन्देन परामृषण्तं, पदमाक्षमालां शिवरूपिणतं !

पीताम्बरा ध्यान निमग्नचित्तं, श्री स्वामिनं राष्ट्रगुरूं स्मरामि !!

अर्जुन ने श्रीमदभगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण को गुरूओं का गुरू सबसे बड़ा गुरू कह कर प्रभु श्रीकृष्ण की गुरू स्वरूप में महत्ता प्रतिपादित की है –

पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्च गुरूर्गरीयान !

न त्वत्समोऽत्स्त्यभ्यधिक: कुतोऽन्योलोकत्रये ऽप्यप्रमिप्रभाव !!

यत्र योगेश्वर: कृष्णो, यत्र पार्थो धनुर्धर: !

तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्धु्रवा नीतिर्मतिर्मम !!

अनन्याश्चिन्तयतों मां ये जना: पर्युपासते !

तेषां नित्याभुक्तांनां योगक्षेमं वहाम्यहम् !!

गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्‍णु गुरूर्देवो महेश्‍वर: ।

गुरूर्साक्ष्‍परब्रह्म तस्‍मैश्री गुरूवै नम:

आओ विद्युत बचाएं: देश को आगे ले जाये ं, विद्युत की बचत ही विद्युत का उत्प ादन है


आओ विद्युत बचाएं: देश को आगे ले जायें, विद्युत की बचत ही विद्युत का उत्पादन है

आदेश शर्मा (भारद्वाज)

काशी नरेश की गली , भारद्वाज बाडा ग्वालियर, मोबाइल : 9826284045

विद्युत राष्ट्रीय ऊर्जा है तथा राष्ट्र की समृध्दि और विकास का आधार भी। विद्युत ऊर्जा के उपयोग और उपभोग के प्रति आम जनता और उपभोक्ता की सोच दूरगामी परिणामों को लेकर गंभीर नहीं है। विद्युत का उपयोग बेदर्दी और प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर हो रहा है। आम तौर पर होने वाले कार्यक्रमों में इस तरह की स्पर्धा बढ़-चढ़ कर देखी जा सकती है । प्राय: लोग विद्युत उपयोग का भी दिखावा करते हैं और कहते हैं कि ”हमने इतनी रोशनी की” हमें ऐसे थोथे विचारों को त्यागना होगा जो राष्ट्रीय ऊर्जा का संकट बढाने वाले साबित हों । दरअसल विद्युत का मितव्ययता से उपयोग ही राष्ट्र और समाज के भविष्य को मजबूती प्रदान करने वाला हो सकता है।

विद्युत ऊर्जा का उपयोग हमें अपनी कड़ी मेहनत से अर्जित धन की तरह करना चाहिए। साथ ही हमें अपने मन में यह भाव भी लाना होगा कि हम राष्ट्रीय ऊर्जा का अनावश्यक और अनाधिकृत उपयोग कर अपराध न करें । विद्युत ऊर्जा के अनियमित उपयोग से बिजली और पानी की समस्या विकराल रूप ले रही है जिससे सामाजिक वैमनस्यता बढ रही है और राष्ट्रीय और सामाजिक प्रगति भी अवरूध्द होती है।

हमारे देश में पॉच तरीकों से विद्युत उत्पादन किया जा सकता है इनमें से (हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी ) जल विद्युत इकाई के निर्माण एवं उपयोग योग्य बनाने में लगभग 10 से 12 वर्ष का समय, हजारों व्यक्तियों का श्रम और 1000 करोड़ की अनुमानित लागत आती है तब कहीं 450 से 500 मेगावॉट विद्युत उत्पादन वाली विद्युत इकाई स्थापित होती है । जिससे प्रति यूनिट उत्पादन लागत लगभग 60 पैसे आती है ।

कोयले से उत्पादित की जाने वाली (ताप विद्युत) इकाई के कार्य को पूरा करने में पांच वर्ष छ: माह का समय और लगभग 500 करोड़ की लागत आती है जिससे 250 से 500 मेगावॉट का उत्पादन होता है । ताप विद्युत ऊर्जा की लागत 2.50 रूपये प्रति यूनिट आती है। वहीं नाभिकीय विद्युत (न्युक्लिीयर इलेक्ट्रिीसिटी) इकाई को उत्पादन योग्य बनाने में पॉच वर्ष का समय और 900 करोड़ रूपये की राशि खर्च कर 500 से 1000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन किया जा सकता है । नाभिकीय ऊर्जा की प्रति यूनिटउत्पादन लागत लगभग 1.90 रूपये आती है। सौर ऊर्जा और वायु वेग से (विन्ड इलेक्ट्रिसिटी) विद्युत उर्जा का उत्पादन रेगिस्तानों अथवा समुद्री तटों आदि पर जहां सूर्य की तेज किरणों से अथवा तीव्र गति वायु औसतन 60 से 75 किमी प्रति घण्टा के वेग से चलती हो से किया जाता है ।

काफी समय, कठिनाईयों, करोड़ों रूपये की लागत तथा हजारों हाथों की मेहनत से उत्पादित विद्युत ऊर्जा की मांग जिस तेजी से बढ रही है उसके अनुरूप उत्पादन किया जाना संभव नहीं हो पा रहा । भविष्य में ऊर्जा संकट से निजात दिलाने के लिये सरकार ने बिरसिंगपुर में 500 मेगावॉट और अमरकंटक में 210 मेगावॉट बाणसागर, टोन्स, रीवा के सिलपरा में तीन विद्युत इकाईयों में 40 मेगावॉट, 30 मेगावॉट और 20 मेगावॉट के अलावा मणी खेडा बांध पर भी एक जल विद्युत ईकाई को उत्पादन योग्य बनाया जा रहा है । म.प्र. शासन और विद्युत मण्डल दोनों की जागरूकता से विद्युत के क्षेत्र में किये जा रहे सकारात्मक प्रयास भी दिखाई दे रहे हैं। इन प्रयत्नों के साथ – साथ विद्युत उपभोक्ताओं का सक्रिय सहयोग भी अति आवश्यक है। हमें विद्युत उर्जा बचत के लिये कम उर्जा खपत कर अधिक रोशनी प्रदान करने वाले सी.एफएल को उपयोग में लाना चाहिये। साथ ही जब भी घर के बाहर जावें बत्ती बुझाना भी न भूलें ।

सड़क बत्ती के उपयोग में 250 वॉट के हैलोजन बल्वों की जगह 100 वॉट की सी.एफ.एल उपयोग में लावें । साथ ही सर्किट व्यवस्था से चलने वाली सड़क बत्ती को अमल में लाना चाहिये। ऊर्जा संकट में ए.सी. तथा अधिक विद्युत खपत वाले उपकरणों का मित्तव्ययता से उपयोग करना चाहिये ताकि ए.सी. से बाहर निकलने पर होने वाले शारीरिक तापमान के असन्तुलन से होने वाली बीमारियों से भी बचा जा सके । इस प्रकार सावधानी से जहाँ हम शरीर को स्वस्थ्य रख सकते हैं वहीं ऊर्जा बचत के महायज्ञ में भी अपना योगदान दे सकते हैं ।

ऊर्जा बचत हमें जोड़ती है । परिवार के सभी सदस्य एक कमरे में इकट्ठा बैठकर बत्ती, पंखा या कूलर का सामूहिक उपभोग करके भी विद्युत की बचत कर सकते हैं । नगरीय क्षेत्र में पानी के लिये प्रत्येक घर में प्रयुक्त होने वाली 250 वॉट की विद्युत मोटरों को एक साथ एक समय में चलाकर भारी विद्युत ऊर्जा खर्च की जाती है । अगर वार्ड और मोहल्लों में पानी की बडी टंकियों निर्मित की जाकर ज्यादा दबाब से पानी दिये जाने की व्यवस्था को व्यवहार में लावें तो विद्युत की काफी बचत की जा सकती है।

विवाह समारोह और अन्य सार्वजनिक आयोजनों हेतु उपयोगी क्षेत्रफल में पर्याप्त प्रकाश मिलने में उपयोग होने लायक भार की ही स्वीकृति प्रदान की जावे । एक ही स्थान पर चार-चार बल्वों का उपयोग न करें । अनावश्यक उपयोग की जा रही विद्युत ऊर्जा को रोका जाकर विद्युत बचत की जा सकती है। यदि संभव हो तो शादी समारोह आदि दिन में आयोजित किये जावें जिससे बिजली की बचत होगी । स्कूलों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को विद्युत उपयोग की महत्ता से अवगत कराने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जा सकते हैं ।साथ ही सरकारी कार्यालयों में सीमित विद्युत उपयोग किया जावे । प्रदेश के शासकीय कार्यालयों द्वारा देश के अन्य राज्यों के समान पांच दिवसीय कार्यशील सप्ताह शैली को अंगीकार किया जाना चाहिये। बाजार सायं काल जल्दी बन्द किये जावें। सड़क बत्ती सांयकाल देरी से चालू की जाकर सुबह जल्दी बन्द की जावें। हीटर/गीजर की जगह सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण का उपयोग किया जावे तथा सी एफ एल सस्ती दरों पर सुलभ हों । विद्युत बचत के उपायों को अपनाकर हम मॉल एवं शापिंग कॉम्पलेकसों में उपयोगिता के आधार पर विद्युत का उपयोग हो न की प्रदर्शनार्थ अनाप – शनाप विद्युत प्रयुक्त की जावे। भवनों के निर्माण में प्राकृतिक प्रकाश का अधिक लाभ मिले, इस बात का ध्यान रखा जावे। विद्युत बचत के उपायों को अपनाकर हम करोड़ों रूपये और हजारों हाथों की कड़ी मेहनत से उत्पादित की जाने वाली विद्युत ऊर्जा के उचित उपयोग से प्रदेश के उद्योगों, कृषि क्षेत्र और चिकित्सा जैसे अतिमहत्वपूर्ण कार्य हेतु पर्याप्त विद्युत ऊर्जा प्रदान कर प्रदेश और देश की प्रगति में अपना योगदान दे सकते हैं।

आदेश शर्मा (भारद्वाज)

काशी नरेश की गली

भारद्वाज बाडा ग्वालियर

मेबाइल : 9826284045

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