गंदे धुंये और प्रदूषण से परेशान मुरैना शहर , गांधी कालोनी जैसी पॉश कालोनी में रोजाना जहरीले धुंंआ सुबह शाम , मरे कई और गांधी कालोनी की जहरीली हवा से दमा , अस्थमा और खांसी के साथ फेंफड़ों के संक्रमण से मौत की दस्तक


मुरैना 28 दिसम्बर 2020 , ग्वालियर टाइम्स कार्यालय । मुरैना नगर निगम , कहने को तो नगर निगम है , मगर नगर निगम जैसा यहां कुछ भी नहीं , शहर मानों एक छोटा सा गांव और ग्राम पंचायतों जैसा माहौल और आबो हवा । गांवों में कम से कम प्रदूषण को बाहर निकालने के लिये एक स्वच्छंद वातावरण रहता है , मगर मुरैना शहर में प्रदूषण फैलाने वाले तो बहुतेरे सैकड़ों हैं मगर इसके निस्तारण का कोई भी इंतजाम नहीं । 

नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनंद” 

( लेखक सन 2001 से भारत सरकार की एन जी सी – नेशनल ग्रीन कोर्प्स के  तहत मुरैना जिला पर्यावरण क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षण समिति – अध्यक्ष कलेक्टर मुरैना का सदस्य व संचालन समिति का प्रभारी है ) 

यूं तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत भी , नगर पालिका (नगर निगम) अधिनियम के तहत भी और मानव अधिकार अधिनियम संरक्षण अधिनियम के तहत भी ,  इसके अलावा एक ऐलान जो नगर निगम मुरैना द्वारा रोजाना किया जा रहा था कि ….. सम्मानीय उपभोक्ताओं …… अगर इसे मान लें तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत भी , शहर में चारों प्रकार के प्रदूषण या इनमें से किसी भी एक प्रकार का प्रदूषण फैलाना केवल अपराध ही नहीं बल्कि नगर निगम द्वारा और जिला प्रशासन द्वारा तुरंत व तत्काल निराकरण किया जाना चाहिये अन्यथा इसमें न्यायालय सम्यक आदेश व प्रभावितों व पीड़ितों को हर्जाना जुर्माना देने का आदेश देगा। 

शहर में सबसे बड़ा प्रदूषण जमीन पर सूखे व गीले कचरे का भी है , तो जल निकासी मल निकासी सहित पेयजल के अस्वच्छ व प्रदूषित वाटर सप्लाई का भी है  । 

वायु प्रदूषण में सबसे खतरनाक और जहरीला प्रदूषण शहर में फैल रहे रोजाना ही सुबह शाम के धुंयें ( गंदे व प्रदूषित ) का है । यह मसला कोई नया नहीं , बल्कि बरसों पुराना है । 

शहर में आ बसे तमाम खेत विहीन  कृषि मजदूर रोजी रोटी के लिये तमाम अवसर खोजने हेतु गरीबी की मार के शिकार तो हैं हीं , किसी न किसी भांति किसी रिश्तेदार के चरण चुंबन कर रहने का आशियाना तो जैसे तैसे या फिर  शहर के आसपास बना बसा लिये हैं , मगर उनका सोशो इकानामिक स्तर व दर्जा अभी भी उसी निम्नतम स्तर पर है और इधर उधर से लकड़ियां तथा अन्य चीजें चोरी चकारी करके वे  अपनी गुजर बसर जैसे तैसे करते हैं , उनके पास खाना पीना बनाने खाने या पशुओं के लिये चारा तैयार करने के लिये एक गैस कनेक्शन तो बहुत दूर की बात , एक स्टोव या कोयले की अंगीठी तक नहीं है , या कहिये कि कोयला या मिट्टी का तेल खरीदने तक के पैसे नहीं है । 

ऐसे लोग सुबह शाम चोरी की गंदे पेड़ पौधों की लकड़ीयां चुराकर चूल्हा और बरोसी जलाते हैं , जिसका प्रदूषित व जहरीला धुंआं सारे मोहल्ले और सारे वायुमंडल में फैलता है । इसके अलावा नकली दवायें सप्लाई करने वाले मेडिकल रिप्रजेंटेटिव और एक्सपायरी डेट की दवायें रखने वाले एम आर उन दवाओं की लंबी चौड़ी खेप रोजाना ही मोहल्ले में जलाते हैं जिससे प्रदूषित धुंआ  सारे ही वायुमंडल को अपने कब्जे में लेकर चारों और मोहल्ले में पसरा रहता है , इसके अलावा कुछ अवैध वाहन और बसें, र्टेक्टर तथा पर्यावरण का सर्टीफिकेट लिये बगैर मोहल्ले में चक्कर लगाते और लेड ( सीसा युक्त ) जहरीला धुंआं मोहल्ले में फैलाते  रहते हैं । 

कुछ आपत्तिजनक व्यावसायिक गतिविधियां मसलन , लकड़ी लोहे का फर्नीचर का काम जो कि रहवासी कालोनियों और मोहल्लों में प्रतिबंधित है , आरी रंदा आदि चलाकर ध्वनि प्रदूषण सहित वातावरण में रजकणों ( डस्ट पार्टीकल्स ) उगलते रहते हैं । 

स्पष्टत: मोहल्ले के रहवासियों में इनकी वजह से तमाम बीमारीयां , संक्रामक बीमारीयां , श्वास लेने में तकलीफ , दमा , अस्थमा , फेंफड़ों के संक्रमण , किडनी संक्रमण और डेमेज जेसी तमाम बीमारीयों के साथ , ध्वनि प्रदूषण से कानों एवं मस्तिष्क से संबंधित तमाम विकार , अवसाद और हृदय रोगों , ब्लड प्रेशर जैसे तमाम रोगों से नित्य ही ग्रस्त होना पड़ता है तथा खांसी एवं फ्लू् जैसे तमाम रोगों का शिकार होना पड़ रहा है ।   

गांधी कालोनी मुरैना यूं तो मुरैना शहर की सबसे पॉश कालोनी और शहर के ऐन बींचोंबीच स्थित है , मगर कतिपय नये निवासियों के कारण अब इसे पॉश कालोनी तो नहीं कहा जा सकता , लेकिन तमाम लोग इन हीं प्रदूषणों के कारण मौत के आगोश में जा चुके हैं , जिसकी फेहरिस्त काफी लंबी है । 

मेरे खुद के माता पिता जब तक जीवित रहे इन्हीं प्रदूषणों के शिकार रहे , और उन्हें सांस लेने में तकलीफ के साथ , खांसी और जल प्रदूषण ने शिकार बनाकर परेशान व तंग रखा , खांसी का मेरी मां का अंतिम दम तक इलाज चला मगर गांधी कालोनी में फैला जहरीला धुंआं उस खांसी को कभी ठीक नहीं होने देता था , अंतत: मां उसी खांसी और उसी जहरीले ध्रुंये का शिकार हो गयी और उसी से उसका स्वर्गवास हो गया । अभी पिता ने भी जब इसी महीने अंतिम सांस ली तो उन्हें भी मुरैना की गांधी कालोनी के धुंये ने मरते दम तक परेशान किया , उन्हें भी सांस लेने में बरसों से यहां तकलीफ होती थी , दम घुटता रहता था , सुबह शाम फैलता धुंआं ऊपर की मंजिल पर बहुत आसानी से पहुंचता और उन्हें परेशान रखता था , प्रदूषित अस्वच्छ और पीने के गंदे पानी ने न केवल उनका डायजेशन सिस्टम ही घ्वस्त किया बल्कि पूरी तरह से किडनी ही डेमेज कर दीं । 

ग्वालियर में उनके मृत्युकाल में जब यह सब जांचें हुईं तो टेस्ट रिपोर्टों ने सारी असलियत खोल कर रख दी , कुल मिलाकर मुरैना की गांधी कालोनी के चारों प्रदूषणों ने उनकी जान ले ली , या दूसरे शब्दों में कहें तो हत्या कर दी । 

हालांकि यह सब हम अपनी पर्यावरण समिति की बैठक में उठाते और इसका स्थाई समाधान भी कर देते , मगर अफसोस एक जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा करीब पर्यावरण समित में करीब 70-80 लाख का फर्जीवाड़ा और घोटाला कर दिया , उसके बाद से 30 मई सन 2002 के बाद इस पर्यावरण समिति की कोई भी अनिवार्य तिमाही बैठक ही नहीं हुई इसलिये इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच पर लाना और उठाना अनिवार्य हो गया है , जिससे आम जनता और जिम्मेदार प्रशासनिक अफसर और नेता तथा नगरनिगम इसे जान सके , पहचान सके और इसका स्थाई निराकरण कर सके ।

नहीं हटा बरसों से लगा अभिशाप मुरैना नगर निगम पर , शोभाराम बाल्मीकि के अध्यक्ष कार्यकाल से अब तक लगातार दलित के लिये आरक्षित चली आ रही फिर से दलित मेयर के लिये रिजर्व हुयी



हाय मुरैना तेरी यही कहानी , शहर हुआ बेहड़ से बदतर और नहीं पीने लायक पीने का पानी

नरेन्द्र सिंह तोमर ” आनन्द”

 मुरैना शहर और नगर निगम के दिन फिरते नजर नही आ रहे हैं , दशकों से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासन काल में शुरू हुये नगरपालिका और नगरनिगम चुनावों के वक्त से लगातार दलितों के लिये रिजर्व चला आ रहा मुरैना नगर निगम ( पहले नगर पालिका अब नगर निगम ) का मेयर ( महापौर पहले नपा अध्यक्ष ) का रिजर्वेशन मुरैना के लिये ऐतिहासिक बन गया है और स्थाई रूप से दलितों के लिये आरक्षित हो गया है , उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सत्ता में आते ही दशकों से बंद पड़े नगरीय निकायों के चुनाव दोबारा शुरू कराये थे , उस समय नगरपालिका अध्यक्ष का पद दलित के लिये आरक्षित किया गया था , इस वक्त मुरैना नगरपालिका के पहले अध्यक्ष शोभाराम बाल्मीक बने थे । खैर शोभाराम बाल्मीक तो बहुत सीधे सच्चे और ईमानदार अध्यक्ष रहे सो नगरपालिका ठीक ठाक और अच्छी तरह चला ले गये । इसीलिये फिर उन्हें किसी भी भ्रष्ट नेता ने टिकिट नहीं दिया और ऐसे लोगों को राजनीति में भ्रष्ट लोग ठौर और मुकाम देते भी नहीं है । 

इसके बाद नगरपालिका के लगातार तमाम चुनाव हुये मगर लगातार नगरपालिका अध्यक्ष का पद दलित के लिये ही रिजर्व ही रहा । कभी दलित पुरूष तो कभी दलित महिला । सन 1993 से लेकर सन 2026 तक , यानि कि इतिहास से लेकर भविष्य तक मुरैना नगरनिगम के मेयर ( महापौर ) केवल एक ही जाति विशेष दलित के लिये आरक्षित कर दिया गया है । स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये नगरीय निकायों में फ्लोटिंग आरक्षण को मध्यप्रदेश सरकार ने और राजनेताओं ने ताक पर धरकर, मुरैना में केवल एक ही जाति वर्ग दलित के लिये स्थाई आरक्षण कर दिया है ।

उल्लेखनीय है कि इस समय दलित मेयर अशोक अर्गल वर्तमान ( अब निवर्तमान) मुरेना नगर निगम के मेयर थे । अब दोबारा यह पद दलित महिला के लिये आरक्षित कर दिया गया है , जाहिर है कि मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा न तो भ्रष्टाचार को खत्म करने की है और न उजागर करने की ।

दलितों के कंधे पर रखकर भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि अंधेरगर्दी और फर्जीवाड़े के जितने काले कारनामे किये जाते हैं यह किसी से छिपा नहीं है , मुरैना नगर निगम में अरबों रूपये का फर्जीवाड़ा , भ्रष्टाचार और काली कमाई के अलावा जितना मुरैना शहर का कबाड़ा अकेले मेयर अशोक अर्गल के कार्यकाल में हुआ उतना तो शायद पूरे मुरैना जिला में कहीं भी कभी भी नहीं हुआ । जाहिर है कि अशोक अर्गल के कार्यकाल में हुये भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के काले कारनामों  को दबाने और छिपाने का काम अकेला कोई दलित ही कर सकता है और अन्य कोई भी नहीं , जिसमें समूची की समूची केवल सीवर लाइन ही नहीं खा ली गई ,बल्कि सड़कों की खुदाई से लेकर , भराई तक , रिपेयरिंग और मैंटीनेंस ,  घटिया गुणवत्ता की नयी सड़कें बनवानें से लेकर जनता की नासुनवाई और , पीने के पानी की सप्लाई से लेकर स्ट्रीट लाइटों तक, बिना बेस प्लेटफार्म बिछाये और बिना सपोर्टिंग वाल बनाये घरों में लगाये जाने वाले प्लास्टिक के पानी पाइपों से सीवर लाइन बनाने का करिश्मा कर देने ( सीवर लाइन के मंजूरशुदा प्रोजेक्ट में स्पष्ट लिखा है और मंजूरशुदा ड्राइंग में बेस प्लेटफार्म और सपोर्टिंग वाल हर सीवर लाइन में बनाईं जायेंगी, मगर कहीं नहीं बनाईं गईं और सीमेंट पाइप न्यूनतम साइज 375 तक के डाले जायेंगे मगर कहीं डाले नहीं गये  ) , खुदी मिट्टी न केवल मंहगे दामों में बिक गई बल्कि उससे डबल भ्रष्टाचार का खेल प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों में भराई करवाकर उसका डबल बिल मिट्टी भराई का डालकर अलग से वसूला गया , ऐसे ऐसे  हुये महा फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार और अरबों रूपये के खाऊ हजम भ्रष्टाचार पर अगर कोई पर्दा डाल सकता है तो वह केवल दलित मेयर ही डाल सकता है ।

जाहिर है कि मुरैना नगर निगम लोकल लेवल की नहीं बल्कि उच्चस्तर की गहरी राजनीतिक चरागाह और शिकार है । जो यह भी साफ करता है कि नगरीय निकायों के मेयर और अध्यक्षों के आरक्षण साफ नीयत से किये गये स्पष्ट और पारदर्शी नहीं हैं और न इनमें फ्लोटिंग आरक्षण व्यवस्था का पालन ही किया गया है ।

यह भी साफ है कि मुरैना नगर निगम का मेयर राज्य सरकार के और केन्द्र सरकार के नेताओं का गुलाम और रबर का ठप्पा होना ही चाहिये वरना राज्य सरकार के नेताओं और केन्द्र सरकार के नेताओं को सीवर से लेकर सड़कें और स्ट्रीट खिला पिला चुका और उन्हें पाल पोस कर बड़ा बना रहा नगर निगम मुरैना , कहीं जनता के लिये साफ काम करने वाला सेवा करने वाला नगर निगम बनकर , मुरैना दमकता चमकता शहर बनकर केन्द्र और राज्य के तथाकथित बड़े नेताओं को नंगा कर कलई नहीं उतार देगा । इसलिये मुरैना की जनता के लिये और नगरनिगम के ईमानदार अधिकारीयों  और कर्मचारीयों तथा ठेकेदारों के लिये आलम ये है ”अब उस हाल में रहना लाजिम है ,जिस हाल में रहना मुश्किल है” मुरैना की जनता मौन रह कर बरसों से , सन 2015 से बिना सड़कों का, बिना स्ट्रीट लाइटों का , खुदा पड़ा शहर, धुल और गंदगी से लबरेज आवो हवा और पीने को मिल रहा गंदा व दूषित पानी , मौन रह कर झेल रही है , आगे भी झेलेगी , नेताजी की स्वर्णिम चरागाह को झेलने और रहने के लिये जो देते तो एक हाथ से हैं और वापस छीनते और लूटते हजार हाथों से हैं ।  

अरे आरक्षण की नौटंकी दिखाने की जरूरत क्या थी , वैसे ही अपने आप ही घोषित कर देते कि ये ऐसे रिजर्व और वो वैसे रिजर्व रहेगा , एक अधिनियम पारित कर देते कि अगले सौ साल तक मुरैना नगर निगम दलित मेयर के लिये ही रिजर्व रहेगा ।

आनलाइन वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये होगी 12 दिसंबर शनिवार को नेशनल लोक अदालत – उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति


I.P.C. , Cr.P.C. , Arms Act , Drugs and Narcotics and All Criminal Laws with Cyber Crime Laws will be Ammend , Home Ministry Invited Suggestions


राज्य शासन द्वारा भारत सरकार (गृह मंत्रालय) के निर्देशानुसार आपराधिक विधियों में सम्यक संशोधन के लिये अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया है।

समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, गृह अध्यक्ष होंगे। अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विकास, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव वाणिज्य कर, प्रमुख सचिव विधि और संचालक लोक अभियोजन समिति में सदस्य होंगे। सचिव गृह विभाग समिति के सदस्य सचिव होंगे।

विधि एवं व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं कमजोर वर्गों के लिये त्वरित न्याय सुनिश्चित करने तथा आम नागरिकों का जीवन सुगम बनाने के लिये वर्तमान आपराधिक विधियों जैसे भारतीय दण्ड संहिता, दण्ड प्रक्रिया संहिता, शस्त्र अधिनियम तथा नारकोटिक्स एक्ट पर विचार-विमर्श कर उसमें सम्यक संशोधन किया जाना है। पुलिस एवं लोक व्यवस्था संविधान की अनुसूची-7 में राज्य संबंधी विषय है। अत: केन्द्र शासन ने राज्य सरकारों से सुझाव आमंत्रित किये हैं। सुझाव देते समय यह ध्यान देना उचित होगा कि पुनरीक्षित कानून जनता की लोकतांत्रिक अपेक्षाओं के अनुरूप हो और महिलाओं तथा बच्चों एवं समाज के कमजोर वर्गों को त्वरित न्याय दिलाने में सक्षम हो एवं आम नागरिकों का जीवन सुगम हो सके। समिति अपनी अनुशंसा तीन माह में प्रस्तुत करेगी।

म प्र के किसानों से ज्वार बाजरा खरीदी 20 दिसंबर तक, पोर्टल पर पंजीयन व एस एम एस प्राप्ति 5 दिसंबर तक, अब दूसरा एस एम एस भी ले पायेंगें


शिवराज ने किसानों की सुनी , दूर की परेशानी और चिंता , शासन ने आज जारी किये आदेश , अब चिन्ता न करें किसान

ग्वालियर टाइम्स 03  दिसम्बर, आज जारी म प्र शासन के आदेश में किसानों को ज्वार व बाजरा खरीदी हेतु अब पहला एस एम एस खो जाने या उसकी अवधि समाप्त हो जाने पर एन आई सी के माध्यम से एक और दूसरा एस एम एस प्राप्त करने की सुविधा दी है ।

दी गयी सुविधा में यह भी कहा गया है कि पोर्टल पर पंजीकृत किसान 05 दिसंबर तक एस एम एस या दूसरा एस एम एस प्राप्त कर सकेंगें । तथा एस एम एस प्राप्त करने के 15 दिन तक वह एस एम एस या दूसरा एस एम एस मान्य और वैध रहेगा । और किसान एस एम एस प्राप्त करने से 15 दिन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना ज्वार बाजरा मंडी या उपार्जन केन्द्र को बेच सकेगा ।

दूसरी भाषा में कहें तो 04 तारीख को एस एम एस पाने वाला किसान 19 दिसम्बर तक और 05 दिसम्बर को एस एम एस पाने वाला किसान 20 दिसंबर तक अपनी फसल की उपज बेच सकेगा ।      

पेशकार ने ली 9 हजार रिश्वत, मेनका गांधी बोलीं- ‘1 घंटे में वापस करो, नहीं तो जेल में डाल दूंगी’


उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विधायक देवमणि दुबे के विधानसभा क्षेत्र लंभुआ में एसडीएम के पेशकार ने एक व्यक्ति से 9 हजार रुपये रिश्वत में ले लिए। बुधवार को जब पीड़ित ने इसकी शिकायत पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सुलतानपुर सांसद मेनका गांधी ने से की तो उनका पारा गर्म हो गया। मेनका गांधी के प्रतिनिधि विजय सिंह रघुवंशी ने बताया कि सांसद ने पेशकार से कहा कि 9 हजार रुपये एक घंटे में वापस करो, मेरे क्षेत्र में रिश्वतखोरी नहीं चलेगी। मेनका गांधी ने आरोपी को जेल में डालने की धमकी भी दी।

एनबीटी ऑनलाइन के पास मौजूद वीडियो में मेनका गांधी सख्त लहजे में पेशकार से कह रही हैं, ‘मैं आपको जेल में डालने वाली हूं। आपके खिलाफ शिकायत मिली है। अभी एक घंटे के अंदर रिश्वत के 9 हजार रुपये वापस कीजिए। एक घंटे में आपने वापस नहीं किए तो एसडीएम और डीएम से बात करने वाली हूं।’

‘…मुझे सबूत चाहिए’

मेनका गांधी बोलीं, ‘मुझे एक घंटे में फोन आना चाहिए कि पैसे वापस पहुंच गए। तुम एक नंबर के चोर हो और बहुत बड़े रिश्वतखोर हो। वह पैसे आप वापस दोगे और आज के बाद कोई शिकायत मिली रिश्वत की तो बहुत बुरा होगा। मुझे एक घंटे में फोन आना चाहिए कि वह पैसे वापस पहुंच गए, मुझे सबूत चाहिए। समझ गए आप? इस पर दूसरी ओर से जवाब मिला उस पर सख्त लहजे में मेनका ने कहा अभी 9 हजार रुपये वापस करेंगे आप। मेरे क्षेत्र में रिश्वतखोरी नहीं चलेगी।’

ई आनलाइन डिजिटल साक्षरता आज की सबसे अहम जरूरत, हर आदमी है ई टेक्नालाजी के दायरे में – यशोधरा राजे सिंधिया


तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने मंगलवार को वर्चुअल एम्पलाईविलिटी कॉन्क्लेव-2020 का शुभारंभ करते हुए कहा कि डिजिटल साक्षरता आज की जरूरत है। कोविड ने हम सभी को डिजिटल होने के लिए मजबूर किया है। हमें तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बच्चों में ऐसी मानसिकता को विकसित करना होगा जहाँ वे सिर्फ इंजीनियरिंग के विभिन्न विषयों पर केन्द्रित न रहकर आधुनिकतम तकनीकों की व्यवहारिक जानकारी से भी पूर्ण रूप से वाकिफ हो।

मंत्री श्रीमती सिंधिया ने कहा कि प्रौद्यागिकी जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है। शैक्षणिक संस्थानों में सैद्धांतिक ज्ञान से ज्यादा व्यवहारिक पढ़ाई पर जोर दिया जाना चाहिए। उद्योगों की जरूरत के हिसाब से विद्यार्थियों को तैयार करने के लिए यह जरूरी है कि फैकल्टी को भी उसकी जानकारी हो। श्रीमती सिंधिया ने कहा कि भविष्य में उद्योगों के विशेषज्ञों को विजिटिंग फैकल्टी के रूप में जोड़ा जाएगा। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा रोजगार कौशल और उद्यमिता में सुधार लाने के लिए आइटी क्षेत्र तथा विभिन्न उद्योगों के हितधारकों के साथ परस्पर बातचीत करने के मद्देनजर इण्डस्ट्री अकादमिया मीट आयोजित किया गया था। तकनीकी शिक्षा, सीआईआई यंग इंडियन्स और नैसकाम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित वर्चुअल कॉन्क्लेव में विभिन्न प्रतिष्ठित उद्योग विशेषज्ञों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

एम डी परसिसटेंट सिस्टम के डा.आनंद देशपाण्डे ने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता की ओर प्रोत्साहित करना चाहिए। उद्योगों के विशेषज्ञों को महाविद्यालयों में लेक्चर्स के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए।

नैसकाम फ्यूचर स्किल की हेड सुश्री कीर्ति सेठ ने कहा कि टैलेन्ट गेप एक बड़ी समस्या है। बहुविषयक शिक्षा वर्तमान बाजार की माँग है।

कॉग्नेजेंट की सुश्री माया श्रीकुमार ने कहा कि सिर्फ स्नातक या स्नातकोत्तर के सर्टिफिकेट से काम नहीं चलेगा। विद्यार्थियों को तकनीक के माध्यम से समस्याओं को समझना और उनकी पहचान करना आना आवश्यक है। यह हुनर उन्हें भविष्य में सफलता दिलायेगा। पाठ्यक्रम में विषयों को कम कर कौशल व्यवहारिक ज्ञान में वृद्धि करें।

इनफोसिस के श्री सुधीर मिश्रा ने कहा कि विद्यार्थियों को इनफोसिस के इनफि टी क्यू प्लेटफार्म से जुडना चाहिए।

टीसीएस के श्री गौरव ने तीन ए- एवेयरनेस, एग्रेसिव तथा एजीलिटी पर केन्द्रित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इच्छुक क्षेत्र में क्या चल रहा है उसकी जानकारी रखे, क्या सिखने की जिज्ञासा तथा नई तकनीक को अपनाने के लिए तैयार होना चाहिए।

कॉन्क्लेव में डॉ. क्रिस सोटिरोपॉल्स सीईओ मेलबर्न, सिस्को के श्री मुरूगन वासुदेवन, इनक्यूबेशन मास्टर्स के अध्यक्ष श्री सी.के. तिवारी, सेजग्रुप के सुश्री शिवानी अग्रवाल ने भी अपने सुझाव दिए। इस अवसर पर आयुक्त तकनीकी शिक्षा श्री पी नरहरि, संचालक कौशल विकास श्री एस. धनराजू, सीआईआई यंग इंडियन्स के डा. अनुज गर्ग उपस्थित थे।

किसान आंदोलन से निबटने की सरकार ने की तैयारी , अब दिल्ली और आसपास सप्लाई करेंगें देश के अन्य किसान , रेलवे ने रद्द की ये ट्रेनें, कई के रूट डायवर्ट, देखें पूरी लिस्ट


नई दिल्ली , अपनी मोनोपॉली और एकक्षत्राधिकार छिनने से डरे हुये दिल्ली को मनमाने दामों पर दूध , फल , सब्जी , अनाज , दालें सप्लाई करने वाले दिल्ली के आसपास के पंजाब, हरियाणा और उ प्र के किसान इन दिनों मात्र इसलिये आंदोलन में हैं कि अब देश का कोई भी किसान दिल्ली वालों को नये कानूनों के चलते , उनसे भी सस्ते दाम पर और अच्छी चीज मुहैया करा सकेगा और घर बैठे मनचाहा मंहगा दाम भी पा लेगा । देश के दूसरे किसानों को मुनाफा शेयर न करने देने और फायदा न लेने देने के उद्देश्य से दिल्ली के आसपास के चीजें सप्लाई करने वाले किसान इन दिनों डेरा जमाये दिल्ली बार्डर पर डटे हैं । ज्ञातव्य है कि नये कृषि कानूनों से देश भर से कोई भी किसान कहीं भी , कभी भी , अपनी फसल , उपज , साग सब्जी , दूध , अंडा , देशी घी , दही, मक्खन , पनीर वगैरह बेच सकेगा और इससे देश भर का कोई भी किसान दिल्ली के दाम दूर बैठकर भी किसी आनलाइन प्लेटफार्म के जरिये , किसी समिति , सहकारी समिति , कृषि साख विपणन समिति या अन्य मार्केटिंग कंपनी के माध्यम से बिना एक भी पैसा खर्च किये बगैर बेच कर पा सकेगा । यही एक मोनोपाली नये कृषि कानूनों से खत्म होती देखकर दिल्ली में सप्लाई कर करोड़पति और अरबपति बने लोग इन दिनों किसान आंदोलन के नाम पर डेरा जमाये पड़े हैं ।

नयी व्यवस्था अस्तित्व में आये और देश भर का किसान दिल्ली में सप्लाई के लिये तैयार हो , उससे पहले ही उन किसानों को मिले अधिकार और आजादी को देने वाले कानूनों को खात्मा कराने के लिये एक सुनियोजित आंदोलन , किसानों के नाम पर अब तक अकेले दिल्ली लूट रहे लोगों का महज एक शिगूफा है , किसानों से बातचीत का कल कोई निष्कर्ष नहीं निकलते देख , केन्द्र सरकार को यह तो समझ आ गया कि ये किसान तो कतई है ही नहीं बल्कि किसानों की आजादी और भुखमरी व गरीबी , किसान आत्महत्याओं का जारी रहे , के लिये कुचक्र रचने का प्रयास कर रहे लुटेरों व षडयंत्रकारियों का एक समूह है । जो पूरे देश के किसानों का हक हड़प कर मालामाल हो रहा है और मंहगी कारों और मंहगे बंगलों में रहकर देश भर के किसानों को कर्ज में फंसा कर आत्महत्यायें करवा रहा है । उललेखनीय है कि पूरे देश में कर्ज और गरीबी , भुखमरी के चलते किसान आत्महत्यायें करते हैं , परंतु जहां के लोग इस वक्त आंदोलन कर रहे हैं वहां के लोग कर्ज , गरीबी और भुखमरी से आत्महत्यायें नहीं करते ।

केन्द्र सरकार ने सारा माजरा भांपकर अब इस चक्रव्यूह से देश को निकालने के लिये बनाये तीनों कृषि कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने और षडयंत्रकारी समूह से निबटने के लिये 3 दिसंबर तक सारी तैयारीयां करने और अमल में लाने के लिये , सबसे पहले ट्रेन रूट डायवर्ट करने और , षडयंत्रकारी समूह क्षेत्र की ट्रेनें रद्द करने का फैसला पहले चरण में किया है , अब देश भर के किसानों को दिल्ली में चीजें व अनाज सप्लाई कर उचित व मंहगे दाम पाने का सुनहरा मौका अपने आप ही रेलवे और सड़क मार्ग से मिलेगा । किसान कंपनियां , समितियां व सहकारी समितियां मालवाहक हवाई जहाजों और मालवाहक ड्रोनों के मार्फत दिल्ली में सामान सप्लाई कर सकेंगीं ।

पिछले 6 दिनों से पंजाब-हरियाणा से आए किसानों का दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन जारी है। किसानों के जारी प्रदर्शन को देखते हुए उत्तर रेलवे ने कुछ ट्रेनों के संचालन में कुछ बदलाव किया है। पंजाब के किसानों द्वारा किए जा रहे आंदोलन का असर रेल यातायात पर भी देखने को मिल रहा है, जिसकी वजह से उत्तर रेलवे ने कुछ ट्रेनों को रद्द कर दिया है, वहीं कुछ ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट, शॉर्ट ओरिजिनेट और कुछ को डायवर्ट किया गया है। 

किन-किन ट्रेनों को किया गया है कैंसिल
दो दिसंबर को खुलने वाली 09613 अजमेर-अमृतसर एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन को रद्द कर दिया गया है। ठीक इसी तरह 3 दिसंबर को 09612 अजमेर-अमृतसर एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन भी रद्द रहेगी। इसके अलावा, 3 दिसंबर से शुरू होने वाली 05211 डिब्रूगढ़-अमृतसर एक्सप्रेस विशेष ट्रेन रद्द रहेगी। इसी तरह, 3 दिसंबर को शुरू होने वाली 05212 अमृतसर- डिब्रूगढ़ स्पेशल ट्रेन भी रद्द रहेगी।

कौन ट्रेन शॉर्ट टर्मिनेटेड
वहीं, 04998/04997 भटिंडा-वाराणसी-भटिंडा एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन अगले आदेश तक रद्द रहेगी। दो दिसंबर को 02715 नांदेड़-अमृतसर एक्सप्रेस ट्रेन को नई दिल्ली में शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा। 02925 को आज खुलने वाली बांद्रा टर्मिनस-अमृतसर एक्सप्रेस ट्रेन चंडीगढ़ में शॉर्ट टर्मिनेट होगी। 

ये ट्रेनें होंगी डायवर्ट
आज यानी दो दिसंबर को खुलने वाली 04650/74 अमृतसर-जयनगर एक्स्प्रेस को अमृतसर-तरनतारन-ब्यास के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा। 08215 दुर्ग-जम्मू तवी एक्सप्रेस को लुधियाना जलंधर कैंट-पठानकोट छावनी के रास्ते चलाया जाएगा। वहीं, 4 दिसंबर को चलने वाली ट्रेन 08216 जम्मू तवी-दुर्ग एक्सप्रेस को पठानकोट कैंट-जालंधर कैंट-लुधियाना के रास्ते डायवर्ट किया गया है। 

किसान आंदोलन में सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी घज्जियां , दूरी भुला कर इकठ्ठे हुये लोगों में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा


दिल्ली , किसान आंदोलन में शामिल लोगों में कोरोना संक्रमण और वायरस वाहक का खतरा बढ़ गया है , दूध सब्जी की सप्लाई रोकेने की जाटों की धमकी के बाद दहशत में आये दिल्ली के लोग मजबूरी में भले ही किसान आंदोलन को समर्थन दे रहे हों , मगर कोरोना और उसकी गाइडलाइनों और खतरे को सर्वथा भुला बैठे हैं ।

जमा हुये किसान एक ही क्षेत्र व जगह में सोशल डिस्टेंसिंग के बगैर साथ साथ ही न केवल खान पान कर रहे हैं , न सेनेटाइजर इस्तेमाल कर रहे हैं और न खाने पीने रहने में किसी भी सावधानी और सतर्कता बरत रहे हैं ।

दिल्ली वासियों के लिये खतरे का अलार्म बज चुका है और दिल्ली में अचानक तेजी से हुई कोरोना संक्रमकत मरीजों के बीच , बताया जा रहा है कि दिल्ली में सप्लाई होने वाला दूध , फल और सब्जियां इसकी वाहक बनीं हैं और जिसे बंद करने की धमकी आंदोलनकारी दे रहे हैं , वही संक्रमण वाहक बन गईं हैं ।

आने वाले दिनों में कोरोना की विस्फोटक संख्या दिल्ली में देखने को मिल सकती है , सूत्र बताते हैं दिल्ली में बहुत जल्द कम्पलीट लाकडाउन की स्थिति आ सकती है । उधर अन्य प्रदेशों में दिल्ली , हरियाणा और पंजाब से आने वालों की सख्ती से कोरोना की जांच शुरू कर दी गई है ।

नई मुसीबत: कोरोना इलाज के साइड इफेक्ट सामने आने लगे मरीजों में ‘ब्रेन फॉग’, पासवर्ड,अपनों को और कपड़े भूलने लगे, जानें क्या है यह बला


कानपुर , उत्तर प्रदेश । किदवई नगर के बुजुर्ग को कोरोना हुआ। 20 दिन इलाज से निगेटिव होकर घर आ गए। अब वह बिलकुल बदल गए हैं। आंखें शून्य में देखती हैं। चाय-पानी देने पर चौंक पड़ते हैं। अक्सर नहाकर कपड़े पहनना भी भूल जाते हैं। इसी तरह लाजपत नगर के बैंक अफसर कोरोना संक्रमण में 16 दिन भर्ती रहे। निगेटिव हुए पर तेज सिरदर्द से परेशान थे। दोबारा चार दिन भर्ती रहे। डॉक्टरों ने ब्रेन में सूजन बताई। 15 दिन बाद जब बैंक पहुंचे तो कंप्यूटर से लेकर करेंसी चेस्ट लॉक तक सारे पासवर्ड भूल चुके थे। सब दोबारा रिसेट किए गए। अभी वह कम्प्यूटर के कई फंक्शन भूल रहे हैं। डॉक्टर इसे ‘ब्रेन फॉग’ बता रहे हैं। जिसका इलाज बड़ा जटिल है। कानपुर में ऐसे चार मरीजों का इलाज हो रहा है।

क्लॉटिंग से नसों में नुकसान
मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी हेड प्रो. आलोक वर्मा के मुताबिक कोरोना वायरस नसों में खून के थक्के बना देता है। उससे यह दिक्कत हो सकती है। लम्बे समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले मरीजों की ब्रेन की नसें भी कमजोर होने लगती हैं। इससे न्यूरो समस्या पैदा होती है। ‘ब्रेन फाग’ के यह मरीज ज्यादातर बुजुर्ग हैं। कुछ मरीज एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम जैसे लक्षणों वाले भी मिल रहे हैं। जीबी सिंड्रोम से भी पीड़ित दो मरीज  मिले हैं। ब्रेन फॉग के लक्षण आने पर समय से इलाज हो तो महीने दो महीने में इलाज संभव है। फौरन न्यूरोफिजीशियन को दिखाना चाहिए।

क्या है ब्रेन फॉग
यह एक मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है। उसके सोचने, समझने और प्रतिक्रिया देने की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। यह कंप्यूटर के हैंग होने जैसी स्थिति है। कई मामलों में मरीज क्या बोल रहा है, क्या कर रहा है, उसे खुद पता नहीं चलता। शुरुआत में ही इसका इलाज न हो तो यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है।

मरीजों में यह लक्षण दिखे

  • घरवालों को पहचान पाने में मुश्किल
  • याददाश्त घटी, कपड़ा पहना भी भूलने लगे
  • फोकस कम हुआ, कन्फ्यूजन बढ़ा
  • कई बार बताने पर कुछ समझ पाना
  • सिर में हलके दर्द की शिकायत

 मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एसके गौतम का कहना है कि जिन मरीजों में ऑक्सीजन की जबरदस्त कमी हुई, जो लम्बे समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहे, उनमें न्यूरो प्राब्लम आना बहुत संभव है। याददाश्त पर असर पड़ता है। ब्रेन फाग ठीक होने वाली बीमारी है, बस समय ये इलाज जरूरी है।

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